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  • 40 के बाद हड्डियों की कमजोरी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये पोषण से भरपूर चीजें

    40 के बाद हड्डियों की कमजोरी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये पोषण से भरपूर चीजें

    नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई प्रकार के प्राकृतिक बदलाव होने लगते हैं, जिनमें हड्डियों की मजबूती में कमी सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद शरीर की बोन डेंसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे हड्डियां पहले की तुलना में अधिक कमजोर और संवेदनशील हो सकती हैं। महिलाओं में यह स्थिति मेनोपॉज के बाद और अधिक तेजी से विकसित हो सकती है। हालांकि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

    हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि दूध और दूध से बने उत्पादों को बोन हेल्थ के लिए सबसे उपयोगी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को पर्याप्त कैल्शियम उपलब्ध कराते हैं, जो हड्डियों के निर्माण और उनकी मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से इनका सेवन करने से उम्र बढ़ने के बावजूद हड्डियों की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी बोन हेल्थ के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। पालक, मेथी, सरसों और बथुआ जैसी सब्जियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व हड्डियों के विकास और उनकी संरचना को मजबूत बनाए रखने में योगदान देते हैं। दैनिक भोजन में हरी सब्जियों को शामिल करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषण प्राप्त होता है।

    ड्राई फ्रूट्स भी हड्डियों को मजबूती देने वाले महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। बादाम, अखरोट और अंजीर जैसे सूखे मेवों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। सीमित मात्रा में इनका नियमित सेवन न केवल हड्डियों बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।

    तिल के बीज भी कैल्शियम का समृद्ध स्रोत माने जाते हैं। कम मात्रा में सेवन करने पर भी तिल शरीर को पर्याप्त पोषण प्रदान कर सकता है। इसे सलाद, चटनी या अन्य व्यंजनों के माध्यम से आहार में शामिल किया जा सकता है। पारंपरिक भारतीय खानपान में तिल का उपयोग लंबे समय से हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता रहा है।

    विटामिन डी भी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कैल्शियम। फैटी फिश में विटामिन डी और ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो कैल्शियम के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं। जो लोग मछली का सेवन नहीं करते, वे विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों और नियमित धूप के माध्यम से इसकी आवश्यकता पूरी कर सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खानपान ही नहीं, बल्कि रोजाना हल्की एक्सरसाइज, नियमित वॉक, पर्याप्त पानी का सेवन और संतुलित प्रोटीन युक्त आहार भी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं धूम्रपान, अत्यधिक शराब, अधिक नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचना भी जरूरी है। सही आदतों और संतुलित पोषण के माध्यम से बढ़ती उम्र में भी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखा जा सकता है।

  • हार्ट अटैक का खतरा करना है कम? रोजमर्रा की ये 7 आदतें दिल को रख सकती हैं लंबे समय तक स्वस्थ

    हार्ट अटैक का खतरा करना है कम? रोजमर्रा की ये 7 आदतें दिल को रख सकती हैं लंबे समय तक स्वस्थ

    नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने हृदय रोगों के खतरे को पहले की तुलना में काफी बढ़ा दिया है। अब हार्ट अटैक केवल बुजुर्गों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए समय रहते जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करना बेहद आवश्यक हो गया है। अच्छी बात यह है कि कुछ सरल और नियमित आदतों को दैनिक जीवन में शामिल करके हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय को मजबूत बनाए रखने का सबसे प्रभावी तरीका है। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना, साइकिल चलाना, योग करना या किसी अन्य प्रकार का व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाता है और हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके साथ ही संतुलित और पौष्टिक आहार भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जबकि अधिक तले-भुने और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना लाभकारी माना जाता है।

    हृदय रोगों की रोकथाम में धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना भी अत्यंत आवश्यक है। तंबाकू उत्पाद रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ना हृदय स्वास्थ्य की दिशा में उठाया गया सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसके अलावा पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद भी शरीर और हृदय दोनों के लिए जरूरी है। रोजाना सात से आठ घंटे की अच्छी नींद ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और तनाव कम करने में सहायक होती है।

    तनाव प्रबंधन भी स्वस्थ हृदय के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। लगातार मानसिक दबाव और चिंता का प्रभाव सीधे हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे में ध्यान, योग, गहरी सांस लेने के अभ्यास और पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताना मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही शरीर के वजन और रक्तचाप पर नियमित निगरानी रखना भी आवश्यक है। अधिक वजन और उच्च रक्तचाप हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं, जिन्हें समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।

    पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। शरीर में जल संतुलन बनाए रखने से रक्त संचार बेहतर होता है और विभिन्न अंगों का कार्य सुचारु रूप से चलता रहता है। विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की भी सलाह देते हैं, ताकि किसी भी संभावित समस्या की समय पर पहचान हो सके। साथ ही नमक और चीनी का सीमित सेवन, शराब से दूरी और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे लेकिन नियमित बदलाव लंबे समय में बड़े लाभ दे सकते हैं। यदि इन आदतों को रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो न केवल हार्ट अटैक का खतरा कम किया जा सकता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

  • झुर्रियों और पिगमेंटेशन से राहत के लिए अपनाएं ये नेचुरल नाइट स्किन केयर

    झुर्रियों और पिगमेंटेशन से राहत के लिए अपनाएं ये नेचुरल नाइट स्किन केयर


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर हमारी त्वचा पर देखने को मिलता है। धूल, मिट्टी और धूप के कारण चेहरे पर दाग-धब्बे, झुर्रियां और पिगमेंटेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स हर किसी के लिए असरदार साबित नहीं होते। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्राकृतिक उपायों को रात के समय अपनाकर त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाया जा सकता है।

    रात का समय त्वचा की मरम्मत (स्किन रिपेयर) के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान त्वचा खुद को रिपेयर करने की प्रक्रिया में होती है। ऐसे में अगर सही प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाए तो इसका असर और भी बेहतर हो सकता है।

    एलोवेरा: त्वचा के लिए प्राकृतिक वरदान
    एलोवेरा को त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन A, C और E त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं और उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से त्वचा में नमी बनी रहती है और चेहरा अधिक फ्रेश और ग्लोइंग दिखने लगता है।

    एलोवेरा में मौजूद एलोइन और एलोसिन जैसे तत्व त्वचा में मेलेनिन के अत्यधिक उत्पादन को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। यही कारण है कि यह पिगमेंटेशन, झाइयों और मुंहासों के निशानों को हल्का करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह नई स्किन सेल्स के निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिससे त्वचा समय के साथ अधिक साफ और निखरी हुई नजर आती है।

    झुर्रियों और दाग-धब्बों पर असर
    नियमित रूप से एलोवेरा लगाने से त्वचा की लोच (elasticity) बेहतर हो सकती है, जिससे झुर्रियों की समस्या में राहत मिल सकती है। यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है और ड्राईनेस को कम करता है, जो झुर्रियों का एक प्रमुख कारण होता है।

    सन डैमेज और टैनिंग में राहत
    तेज धूप और प्रदूषण के कारण होने वाली टैनिंग, रेडनेस और जलन में भी एलोवेरा काफी असरदार माना जाता है। इसकी ठंडी तासीर त्वचा को राहत देती है और जलन को कम करने में मदद करती है। नियमित उपयोग से टैनिंग धीरे-धीरे हल्की पड़ सकती है और स्किन टोन बेहतर हो सकता है।

    अगर रोजाना सोने से पहले एलोवेरा जैसे प्राकृतिक उपायों को स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जाए, तो त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी भी गंभीर त्वचा समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है।

  • चेहरे पर अचानक निकलने वाले पिंपल्स हो सकते हैं हार्मोनल बदलाव का संकेत

    चेहरे पर अचानक निकलने वाले पिंपल्स हो सकते हैं हार्मोनल बदलाव का संकेत


    नई दिल्ली । पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले चेहरे पर अचानक पिंपल्स निकल आना कई महिलाओं के लिए आम समस्या बन चुका है। खासतौर पर ठुड्डी, जॉलाइन और गालों के आसपास दर्द वाले दाने दिखाई देने लगते हैं। अक्सर लोग इसकी वजह गलत खानपान, धूल-मिट्टी या स्किन केयर प्रोडक्ट्स को मानते हैं, लेकिन असल कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह केवल ब्यूटी प्रॉब्लम नहीं बल्कि शरीर की ओर से मिलने वाला एक अहम संकेत भी हो सकता है।

    जानकारी के अनुसार सामान्य तौर पर महिलाओं का पीरियड साइकिल लगभग 28 दिनों का होता है और इस दौरान शरीर में अलग-अलग हार्मोन्स का स्तर लगातार बदलता रहता है। शुरुआती दिनों में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है, जबकि बाद में प्रोजेस्टेरोन अधिक सक्रिय हो जाता है। जैसे-जैसे पीरियड्स नजदीक आते हैं, इन दोनों हार्मोन्स का स्तर कम होने लगता है, लेकिन टेस्टोस्टेरोन अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। यही बदलाव त्वचा पर असर डालता है और पिंपल्स की समस्या शुरू हो जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स से पहले बढ़ा हुआ प्रोजेस्टेरोन त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स को ज्यादा सक्रिय कर देता है। इससे सीबम यानी त्वचा का नेचुरल ऑयल अधिक मात्रा में बनने लगता है। इसके कारण रोमछिद्र बंद होने लगते हैं और त्वचा में सूजन बढ़ जाती है। जब अतिरिक्त तेल धूल, डेड स्किन और बैक्टीरिया के साथ मिल जाता है, तो ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और दर्द वाले पिंपल्स बनने लगते हैं।

    हार्मोनल एक्ने का सबसे ज्यादा असर ठुड्डी और जॉलाइन के हिस्से पर दिखाई देता है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि त्वचा के अंदर गांठ जैसी सूजन और दर्द भरे सिस्ट बनने लगते हैं। ऐसे पिंपल्स सामान्य एक्ने की तुलना में ज्यादा दर्दनाक और लंबे समय तक रहने वाले हो सकते हैं।

    हालांकि कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। चेहरे को नियमित रूप से साफ रखना, बार-बार चेहरे को हाथ न लगाना, मोबाइल स्क्रीन की सफाई करना और धूम्रपान से दूरी बनाना फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा संतुलित वजन बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि मोटापा हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकता है।

    एक्सपर्ट्स जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन ए, सी, डी और ई से भरपूर आहार लेने की सलाह देते हैं। पनीर, पालक, नट्स, सीफूड और पौष्टिक भोजन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि केवल सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित डाइट और सही स्किन केयर रूटीन अपनाना ज्यादा जरूरी माना जाता है।

    अगर पिंपल्स हर महीने गंभीर रूप लेने लगें, दर्द बढ़ जाए या बार-बार चेहरे पर सूजन और दाग बनने लगें, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। कुछ मामलों में डॉक्टर हार्मोनल ट्रीटमेंट या दवाओं की सलाह भी दे सकते हैं। इसलिए पीरियड्स से पहले होने वाले पिंपल्स को नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता।

  • Summer Skin Care Tips: गर्मी में टैनिंग, पिंपल्स और डलनेस से ऐसे बचाएं अपनी स्किन

    Summer Skin Care Tips: गर्मी में टैनिंग, पिंपल्स और डलनेस से ऐसे बचाएं अपनी स्किन


    नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। तेज धूप, पसीना, धूल और बढ़ता प्रदूषण स्किन को बेजान और रूखा बना देता है। कई लोगों को टैनिंग, पिंपल्स, ऑयली स्किन और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर सही तरीके से स्किन की देखभाल की जाए, तो गर्मी के मौसम में भी त्वचा को हेल्दी, फ्रेश और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में त्वचा को सबसे ज्यादा जरूरत सफाई, हाइड्रेशन और सन प्रोटेक्शन की होती है। दिन में कम से कम दो बार चेहरे को हल्के फेसवॉश से साफ करना चाहिए ताकि त्वचा पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हट सके। ऑयली स्किन वाले लोगों को जेल बेस्ड फेसवॉश का इस्तेमाल करना चाहिए, जबकि ड्राई स्किन वालों के लिए मॉइश्चराइजिंग फेसवॉश बेहतर माना जाता है।

    गर्मियों में सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी होता है। धूप में निकलने से पहले SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाने से त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाना चाहिए और लंबे समय तक बाहर रहने पर हर तीन से चार घंटे में दोबारा लगाना चाहिए।

    त्वचा को अंदर से स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। गर्मियों में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है, जिसका असर चेहरे की चमक पर साफ दिखाई देता है। दिनभर में कम से कम आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए। नारियल पानी, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन भी त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।

    गर्मियों में भारी और ऑयली क्रीम की जगह हल्के जेल या वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइजर का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। इससे त्वचा को जरूरी नमी मिलती है और चिपचिपाहट भी महसूस नहीं होती। इसके अलावा घरेलू उपाय भी स्किन को प्राकृतिक निखार देने में मददगार साबित होते हैं। दही, बेसन और हल्दी का फेस पैक टैनिंग कम करने में मदद करता है, जबकि मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल ऑयली स्किन को फ्रेश बनाए रखते हैं। एलोवेरा और खीरे का रस त्वचा को ठंडक देने के साथ ग्लो भी बढ़ाते हैं।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि खानपान का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। गर्मियों में तले-भुने और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। तरबूज, खीरा, पपीता और संतरे जैसे फल स्किन के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    रात में सोने से पहले चेहरा साफ करना और हल्की नाइट क्रीम या एलोवेरा जेल लगाना त्वचा की मरम्मत में मदद करता है। वहीं ज्यादा मेकअप और बार-बार स्क्रबिंग से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।

    अगर गर्मियों में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच भी त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी, मुलायम और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।

  • गर्मी में स्टाइल भी, सुरक्षा भी! UV कपड़े बन रहे नया फैशन ट्रेंड

    गर्मी में स्टाइल भी, सुरक्षा भी! UV कपड़े बन रहे नया फैशन ट्रेंड


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और लगातार बढ़ती हीटवेव के बीच अब लोगों को राहत देने का नया तरीका फैशन ट्रेंड बनता जा रहा है। पहले जहां लोग धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन, दुपट्टा, ग्लव्स और छाते का सहारा लेते थे, वहीं अब बाजार में ऐसे खास कपड़े तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं जिनमें “सनस्क्रीन” जैसी सुरक्षा पहले से मौजूद है। UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग यानी अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाले कपड़े अब फैशन और हेल्थ दोनों का कॉम्बिनेशन बन चुके हैं।

    इन खास कपड़ों की मांग खासतौर पर उन लोगों में तेजी से बढ़ रही है जो रोजाना बाइक, स्कूटी, साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करते हैं। लंबे समय तक धूप में रहने से होने वाली टैनिंग, सनबर्न और स्किन डैमेज से बचने के लिए लोग अब UV-सुरक्षा वाले जैकेट, शर्ट, ट्राउजर, टोपी, ग्लव्स और स्कार्फ खरीद रहे हैं।

    UV-प्रोटेक्टिव कपड़े सामान्य फैब्रिक से अलग तकनीक से तैयार किए जाते हैं। इनमें धागों की बुनाई काफी घनी होती है ताकि सूरज की हानिकारक किरणें आसानी से कपड़े के आर-पार न जा सकें। इसके अलावा इनमें पॉलिएस्टर, नायलॉन और हाई-टेक कॉटन ब्लेंड जैसे फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है, जो UV किरणों को बेहतर तरीके से ब्लॉक करते हैं। कई कंपनियां इन कपड़ों पर खास मिनरल या केमिकल कोटिंग भी करती हैं, जिसमें जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये UV किरणों को रिफ्लेक्ट करने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे सनस्क्रीन में SPF रेटिंग होती है, वैसे ही इन कपड़ों में UPF यानी अल्ट्रावायलेट प्रोटेक्शन फैक्टर होता है। यह बताता है कि कपड़ा कितनी UV किरणों को रोक सकता है। UPF 15 से 20 वाले कपड़े सामान्य सुरक्षा देते हैं, जबकि UPF 30 से 40 अच्छी सुरक्षा माने जाते हैं। वहीं UPF 50 वाले कपड़े लगभग 98 प्रतिशत तक UV किरणों को ब्लॉक कर सकते हैं।

    फैशन और स्किन प्रोटेक्शन का यह कॉम्बिनेशन लोगों को खूब पसंद आ रहा है। पहले जहां लोग गर्मी में चेहरा ढंककर निकलते थे, वहीं अब स्टाइलिश UV जैकेट और फुल स्लीव कपड़े नया स्टाइल स्टेटमेंट बनते जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं और आउटडोर एक्टिविटी करने वाले लोगों में इसका क्रेज तेजी से बढ़ा है।

    बढ़ती गर्मी और सन डैमेज का डर भी इस ट्रेंड के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक तेज धूप में रहने से स्किन एजिंग, पिग्मेंटेशन और स्किन कैंसर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में UV कपड़े एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि UV-प्रोटेक्टिव कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं है कि सनस्क्रीन की जरूरत खत्म हो गई। चेहरे, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाना अब भी जरूरी है। साथ ही धूप का चश्मा और हाइड्रेशन भी बेहद जरूरी माना जाता है।

    जानकारों के मुताबिक अगर ये कपड़े गीले हो जाएं तो उनकी UPF क्षमता कम हो सकती है। इसलिए धूप में लंबे समय तक रहने पर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल फैशन इंडस्ट्री में UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग तेजी से अपनी जगह बना रही है। स्टाइल, आराम और सुरक्षा का यह नया फॉर्मूला आने वाले समय में गर्मियों की जरूरत बन सकता है।

  • DNA बदलकर दिल की बीमारी खत्म करने का दावा! एक इंजेक्शन से 62% घटा खराब कोलेस्ट्रॉल

    DNA बदलकर दिल की बीमारी खत्म करने का दावा! एक इंजेक्शन से 62% घटा खराब कोलेस्ट्रॉल

    नई दिल्ली । दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियों के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई थेरेपी विकसित करने का दावा किया है, जो भविष्य में हार्ट अटैक के खतरे को हमेशा के लिए कम कर सकती है। खास बात यह है कि इस इलाज में रोज दवाइयां खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सिर्फ एक इंजेक्शन शरीर के डीएनए में बदलाव कर लंबे समय तक खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रख सकता है।

    यह नई तकनीक जीन-एडिटिंग यानी डीएनए में बदलाव करने वाली थेरेपी पर आधारित है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The New England Journal of Medicine में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक इस थेरेपी ने शुरुआती ट्रायल में बेहद उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आगे के बड़े अध्ययनों में भी ऐसे ही नतीजे मिले तो यह दिल की बीमारी के इलाज में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

    इस रिसर्च का नेतृत्व बायोटेक कंपनी Verve Therapeutics के सीईओ और वैज्ञानिक Dr. Sekar Kathiresan ने किया। अध्ययन में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार यह थेरेपी शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को लंबे समय तक कम रखने में सक्षम दिखाई दी है।

    रिसर्च के दौरान 85 मरीजों पर ट्रायल किया गया, हालांकि फिलहाल 35 मरीजों के डेटा का विश्लेषण सामने आया है। ये सभी मरीज आनुवंशिक रूप से हाई कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। जिन मरीजों को इस नई दवा की सबसे ज्यादा डोज दी गई, उनमें सिर्फ एक इंजेक्शन के बाद LDL कोलेस्ट्रॉल में करीब 62 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिन मरीजों को 18 महीने पहले यह थेरेपी दी गई थी, उनमें भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगातार कम बना हुआ है।

    वैज्ञानिकों के मुताबिक यह थेरेपी शरीर में एक खास जीन-एडिटिंग “मशीन” की तरह काम करती है। इंजेक्शन के जरिए इसे शरीर में पहुंचाया जाता है, जहां यह खून के रास्ते सीधे लिवर तक पहुंचती है। इसके बाद यह लिवर सेल के डीएनए में मौजूद PCSK9 नाम के जीन को टारगेट करती है। यही जीन खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। थेरेपी इस जीन में बदलाव कर LDL को नियंत्रित कर देती है।

    दिल के विशेषज्ञ Dr. John H. P. Alexander ने इस शोध को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी का स्थायी इलाज संभव हो जाता है तो यह मेडिकल साइंस में गेम चेंजर साबित होगा।

    हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी साबित करने के लिए बड़े स्तर पर और अध्ययन किए जाएंगे। इसके बावजूद शुरुआती नतीजों ने दुनियाभर के मेडिकल समुदाय का ध्यान खींचा है।

    आमतौर पर जीन थेरेपी बेहद महंगी मानी जाती है, लेकिन रिसर्च टीम का दावा है कि भविष्य में इस दवा को आम लोगों की पहुंच में लाने की कोशिश की जाएगी। कंपनी इसे सिर्फ दुर्लभ इलाज नहीं बल्कि सामान्य हार्ट ट्रीटमेंट का हिस्सा बनाना चाहती है।

    भारत जैसे देश के लिए यह शोध बेहद अहम माना जा रहा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 28 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारियों से होती है। ऐसे में अगर यह थेरेपी सफल होती है तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • 45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

    45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली । नौतपा के नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान कई शहरों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और लू शरीर पर तेजी से असर डालती हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी डीहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है जिन्हें रोजमर्रा के काम, नौकरी, व्यापार या यात्रा के कारण घर से बाहर निकलना पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा में सबसे जरूरी है कि शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाया जाए और पानी की कमी न होने दी जाए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सही सावधानी बरती जाए तो इस भीषण गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    घर से बाहर निकलते समय कुछ जरूरी चीजें हमेशा साथ रखनी चाहिए। पानी की बोतल, ORS या ग्लूकोज, छाता या टोपी, सनग्लास, गमछा या कॉटन कपड़ा, हल्का स्नैक और जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहद जरूरी माना गया है। धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढंकना लू से बचाने में काफी मदद करता है।

    नौतपा के दौरान सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और शाम 5 बजे के बाद बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती हैं। यदि जरूरी काम न हो तो इस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए।

    पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाइक चलाते समय फुल स्लीव कपड़े, ग्लव्स और हेलमेट का इस्तेमाल करें। हेलमेट के अंदर कॉटन का कपड़ा लगाने से सिर जल्दी गर्म नहीं होता। वहीं पैदल चलने वाले लोग बीच-बीच में छांव में रुककर आराम करें और हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। खाली पेट बाहर निकलना भी खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार कुछ शारीरिक संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना, तेज कमजोरी, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, शरीर का तापमान बढ़ना, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज होना हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत छांव या ठंडी जगह पर जाएं और मेडिकल मदद लें।

    नौतपा में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर से पसीने के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इसलिए ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और बेल या आम पना जैसे देसी पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है। बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें। वहीं बुजुर्गों को लंबे समय तक गर्मी में न रहने दें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट या सांस की बीमारी है उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।

    नौतपा के दौरान लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और मौसमी फल डाइट में शामिल करें। ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे। पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर को गर्मी से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सही सावधानी और जागरूकता ही इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा बचाव है।

  • स्किन के दाग-धब्बे होंगे गायब: हल्दी के साथ 2 घरेलू चीजों का कमाल, मिलेगा नेचुरल ग्लो

    स्किन के दाग-धब्बे होंगे गायब: हल्दी के साथ 2 घरेलू चीजों का कमाल, मिलेगा नेचुरल ग्लो


    नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा और ड्राई स्किन के कारण चेहरा रूखा, बेजान और डल नजर आने लगता है। ऐसे में अगर आप केमिकल प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू नुस्खे अपनाते हैं तो त्वचा को प्राकृतिक रूप से निखारा जा सकता है। हल्दी को आयुर्वेद में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्किन को साफ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। अगर हल्दी में दो खास चीजें मिलाकर फेस पर लगाया जाए तो चेहरा सर्दियों में भी खिला-खिला और ग्लोइंग नजर आ सकता है।

    1. हल्दी + दही: प्राकृतिक मॉइश्चराइजर पैक
    दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को एक्सफोलिएट करता है और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। हल्दी के साथ मिलकर यह स्किन को अंदर से साफ करता है।

    कैसे बनाएं पैक:
    1 चुटकी हल्दी
    2 चम्मच ताजा दही
    दोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर 15–20 मिनट लगाएं। फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें।

    फायदे:
    ड्राई स्किन से राहत
    दाग-धब्बे हल्के होते हैं
    चेहरा मुलायम और चमकदार बनता है

    2. हल्दी + शहद: ग्लो बढ़ाने वाला नेचुरल फेस मास्क
    शहद एक बेहतरीन नेचुरल मॉइश्चराइजर है जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है। हल्दी के साथ मिलकर यह स्किन को ग्लोइंग बनाता है और पिंपल्स कम करता है।

    कैसे बनाएं पैक:
    1 चुटकी हल्दी
    1 चम्मच शहद
    इसे अच्छे से मिक्स करके चेहरे पर लगाएं और 15–20 मिनट बाद धो लें।

    फायदे:
    स्किन में नेचुरल ग्लो आता है
    मुंहासे और दाग कम होते हैं
    त्वचा सॉफ्ट और हाइड्रेट रहती है
    ध्यान रखने वाली बातें
    हल्दी बहुत ज्यादा न लगाएं, वरना स्किन पीली पड़ सकती है
    पहले पैच टेस्ट जरूर करें
    हफ्ते में 2–3 बार ही इस्तेमाल करें

    हल्दी के साथ दही या शहद का इस्तेमाल सर्दियों में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल चेहरे को साफ करता है बल्कि उसे प्राकृतिक रूप से चमकदार भी बनाता है। नियमित उपयोग से स्किन चांद जैसी निखरी और हेल्दी दिख सकती है।

  • सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

    नई दिल्ली । बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के दौर में हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। पहले जहां दिल की बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हार्ट अटैक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो कई बार अचानक सामने आती है और मरीज तथा परिवार दोनों को संभलने का मौका तक नहीं देती। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर कई बार पहले ही कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में यह संकेत सामान्य शारीरिक परेशानी की तरह लगते हैं, जिसके कारण लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे सामान्य और गंभीर संकेत सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना माना जाता है। कई बार यह दर्द धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। दर्द बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, कोहनी और पीठ तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति को सामान्य दर्द समझकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है।

    इसके अलावा अचानक सांस लेने में कठिनाई होना या बिना ज्यादा मेहनत के सांस फूलना भी दिल से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। कई लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं या शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। कुछ मामलों में मतली, उल्टी या पेट में असहजता भी देखने को मिलती है, जिसके कारण लोग इसे गैस या पाचन से जुड़ी समस्या मान लेते हैं। अचानक ठंडा पसीना आना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाना भी ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते। यही कारण है कि इन वर्गों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है। अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण लगातार कुछ मिनटों तक बने रहें या तेजी से बढ़ने लगें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी हो जाता है। देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।

    हृदय रोगों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम कदम माना जाता है। रोजाना नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। तला-भुना और अत्यधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखना फायदेमंद हो सकता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन हृदय के लिए गंभीर जोखिम बढ़ाते हैं, इसलिए इन आदतों से बचना जरूरी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराना अब आवश्यकता बन चुका है। समय पर जांच और सतर्कता न केवल बीमारियों की पहचान आसान बनाती है, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की दिशा भी तय करती है।