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  • सिलाई मशीन में बार-बार छूट रहे टांके या बन रहा धागे का गुच्छा, इन आसान तरीकों से पहचानें असली समस्या

    सिलाई मशीन में बार-बार छूट रहे टांके या बन रहा धागे का गुच्छा, इन आसान तरीकों से पहचानें असली समस्या

    नई दिल्ली । घर पर सिलाई करते समय मशीन का अचानक ठीक से काम न करना आम समस्या है। कभी टांके छूटने लगते हैं, कभी नीचे की तरफ धागा उलझकर गुच्छा बना लेता है और कई बार बॉबिन जाम होने से सिलाई पूरी तरह रुक जाती है। ऐसी स्थिति में तुरंत मशीन को सर्विस सेंटर ले जाने की जरूरत नहीं होती। कुछ सामान्य चीजों की जांच करके समस्या की वजह का पता लगाया जा सकता है।

    सिलाई मशीन में टांके छूटने की सबसे सामान्य वजहों में सुई, धागे की थ्रेडिंग, बॉबिन और टेंशन से जुड़ी गड़बड़ी शामिल हो सकती है। कपड़े के अनुसार सही सुई और धागे का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। अगर सुई टेढ़ी, कुंद या गलत तरीके से लगी है तो वह कपड़े में सही ढंग से टांका नहीं बना पाएगी। इसलिए सबसे पहले सुई की स्थिति और उसकी दिशा जांचनी चाहिए।

    इसके बाद ऊपर वाले धागे की थ्रेडिंग पर ध्यान दें। धागा मशीन के सभी जरूरी गाइड और लीवर से सही तरीके से होकर गुजर रहा है या नहीं, इसकी जांच करें। जरूरत पड़ने पर धागा पूरी तरह निकालकर दोबारा सही तरीके से डालें। साथ ही बॉबिन और कपड़े को दबाकर रखने वाले पैर की स्थिति भी देखना जरूरी है।

    अगर बॉबिन बार-बार जाम हो रही है तो सबसे पहले मशीन बंद करके उसका प्लग निकाल दें। बॉबिन बाहर निकालकर देखें कि उसमें धागा बराबर तरीके से लिपटा हुआ है या नहीं। ढीली या असमान लपेट भी जाम होने की वजह बन सकती है। बॉबिन में किसी तरह की टूट-फूट होने पर भी समस्या आ सकती है।

    बॉबिन वाले हिस्से में जमा रूई और धागे के छोटे टुकड़ों को समय-समय पर साफ करना चाहिए। बॉबिन को मशीन में सही दिशा में लगाएं और यह भी जांचें कि धागा सही तरफ से निकल रहा है। अगर धागा बुरी तरह उलझ गया हो तो हाथ वाले पहिए को जबरदस्ती घुमाने से बचें।

    जिग-जैग सिलाई में टांके असमान आ रहे हों तो धागे की थ्रेडिंग, टेंशन और सिलाई की सेटिंग जांचें। टांके की चौड़ाई और लंबाई भी सही होनी चाहिए। एक साथ कई सेटिंग बदलने के बजाय एक-एक बदलाव करके छोटे कपड़े पर सिलाई की जांच करना बेहतर रहता है। इससे समस्या की सही वजह पहचानने में आसानी होती है।

    कपड़े के नीचे धागा गुच्छा बनने पर ऊपर वाले धागे की थ्रेडिंग दोबारा जांचें। धागा निकालकर दोबारा डालते समय कपड़े को दबाकर रखने वाले पैर को ऊपर रखें। इसके बाद टेंशन, बॉबिन की स्थिति और बॉबिन वाले हिस्से की सफाई जांचें।

    सुई बदलना, धागा दोबारा डालना, मशीन की सफाई करना और बॉबिन सही तरीके से लगाना जैसी सामान्य देखभाल घर पर की जा सकती है। किसी भी सफाई या जांच से पहले मशीन बंद करके उसका प्लग निकालना जरूरी है।

    हालांकि, अगर हाथ से घुमाने वाला पहिया काम नहीं कर रहा है, सुई बार-बार प्लेट से टकरा रही है, मोटर असामान्य तरीके से चल रही है या सामान्य जांच के बाद भी सिलाई ठीक नहीं हो रही है, तो मशीन को खुद खोलने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है। नियमित सफाई, सही सुई-धागे का इस्तेमाल और बॉबिन की उचित देखभाल से मशीन की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • रातभर सिंक में बर्तन भिगोकर रखना पड़ सकता है भारी, जानिए किचन की सफाई से जुड़ी जरूरी बातें

    रातभर सिंक में बर्तन भिगोकर रखना पड़ सकता है भारी, जानिए किचन की सफाई से जुड़ी जरूरी बातें

    नई दिल्ली । खाना खाने के बाद बर्तनों को सिंक में पानी और साबुन डालकर रातभर छोड़ देना कई घरों में आम आदत है। इसका मकसद बर्तनों पर चिपके खाने को नरम करना होता है, ताकि सुबह उन्हें आसानी से साफ किया जा सके। हालांकि, लंबे समय तक गंदे बर्तनों को पानी में छोड़ना किचन की स्वच्छता के लिहाज से सही तरीका नहीं माना जाता।

    बर्तनों को कुछ समय के लिए पानी में भिगोना अपने आप में गलत नहीं है। खासकर जब किसी बर्तन में खाना बुरी तरह चिपक गया हो, तब थोड़ी देर भिगोने से उसे साफ करना आसान हो सकता है। समस्या तब शुरू होती है जब गंदे बर्तन पूरी रात पानी में पड़े रहते हैं और उनमें मौजूद खाने के अवशेष लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहते हैं।

    गंदे बर्तनों से निकले भोजन के छोटे-छोटे कण पानी में मिलते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने पर पानी गंदा और चिपचिपा हो सकता है। बर्तनों की सतह पर भी एक परत जम सकती है, जिससे सुबह उन्हें साफ करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। इसलिए केवल रातभर भिगोकर रखना सफाई का बेहतर विकल्प नहीं है।

    इस आदत का असर किचन की गंध पर भी पड़ सकता है। सिंक में खाने के अवशेष और गंदे बर्तन लंबे समय तक पड़े रहने से बदबू बढ़ सकती है। खासकर तेज गंध वाले भोजन के अवशेष आसपास रखी लकड़ी, कपड़े और स्पंज जैसी चीजों पर भी गंध छोड़ सकते हैं।

    लकड़ी से बनी किचन की वस्तुएं नमी और गंध को अपेक्षाकृत ज्यादा सोख सकती हैं। उनकी छोटी दरारों और सतहों में नमी बनी रहने से सफाई मुश्किल हो सकती है। इसी वजह से गंदे बर्तनों के साथ सिंक और उसके आसपास के हिस्से को भी साफ रखना जरूरी है।

    रातभर सिंक में गंदे बर्तन पड़े रहने से चींटियों और कॉकरोच जैसे कीटों के आने की संभावना भी बढ़ सकती है। बर्तनों पर बचे खाने के टुकड़े और उनकी गंध कीड़ों को आकर्षित कर सकती है। अगर उन्हें नियमित रूप से भोजन और पानी मिलता रहे तो वे उसी जगह बार-बार आने लग सकते हैं।

    बर्तनों को साफ रखने का बेहतर तरीका यह है कि खाना खाने के बाद उन्हें जल्द से जल्द धो लिया जाए। अगर तुरंत धोना संभव नहीं हो तो कम से कम बर्तनों से खाने के अवशेष हटाकर उन्हें पानी से अच्छी तरह धो दें। इससे खाना सूखकर सतह पर ज्यादा मजबूती से चिपकने से बच सकता है।

    अगर किसी बर्तन पर खाना ज्यादा चिपका है तो उसे गर्म पानी और थोड़े डिश सोप में कुछ समय के लिए भिगोया जा सकता है। हालांकि, उसे पूरी रात पानी में छोड़ने के बजाय थोड़ी देर बाद साफ कर देना बेहतर है। डिशवॉशर का इस्तेमाल करने वाले लोग गंदे बर्तनों को सिंक में रखने के बजाय सीधे उसमें रख सकते हैं।

    सोने से पहले सिंक को खाली करना किचन की रोजाना सफाई का हिस्सा बनाया जा सकता है। सिंक में बचे खाने के टुकड़े हटाने, नाली को साफ रखने, स्पंज और कपड़े को नियमित रूप से धोने तथा कूड़ेदान को समय पर खाली करने से किचन को साफ रखने में मदद मिल सकती है। कच्चे मांस के संपर्क में आई सतहों को भी साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।

  • Skin Care Routine: महंगे प्रोडक्ट्स ही नहीं ये छोटी आदतें भी बनाती हैं त्वचा को खूबसूरत जानिए सही तरीका

    Skin Care Routine: महंगे प्रोडक्ट्स ही नहीं ये छोटी आदतें भी बनाती हैं त्वचा को खूबसूरत जानिए सही तरीका


    नई दिल्ली।
     आजकल हर कोई साफ निखरी और स्वस्थ त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स से लेकर घरेलू नुस्खों तक कई तरीके अपनाते हैं। लेकिन त्वचा की अच्छी देखभाल केवल किसी एक क्रीम या फेस पैक पर निर्भर नहीं करती। नियमित स्किन केयर रूटीन और रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अपनी त्वचा के प्रकार को समझकर सही उत्पादों का चुनाव करना भी उतना ही जरूरी है।

    स्किन केयर की शुरुआत चेहरे की सफाई से की जा सकती है। दिनभर चेहरे पर धूल मिट्टी पसीना और अतिरिक्त तेल जमा हो सकता है। इसलिए त्वचा के प्रकार के अनुसार हल्के क्लींजर से चेहरा साफ करना जरूरी है। बहुत ज्यादा तेज या कठोर क्लींजर का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी और संवेदनशील हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को ऐसे उत्पाद चुनने चाहिए जो उनकी त्वचा को परेशान न करें।

    चेहरा साफ करने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना भी जरूरी है। बहुत से लोग सोचते हैं कि ऑयली स्किन को मॉइस्चराइजर की जरूरत नहीं होती लेकिन त्वचा को नमी की आवश्यकता होती है। ऑयली त्वचा के लिए हल्का और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर चुना जा सकता है जबकि रूखी त्वचा के लिए थोड़ा अधिक हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है। सही मॉइस्चराइजर त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करता है।

    स्किन केयर रूटीन में सनस्क्रीन को विशेष महत्व दिया जाता है। धूप में मौजूद UV किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं और लंबे समय में समय से पहले त्वचा पर उम्र के निशान दिखाई देने का एक कारण बन सकती हैं। इसलिए दिन के समय बाहर निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना उपयोगी माना जाता है। लंबे समय तक धूप में रहने पर इसे दोबारा लगाने की जरूरत पड़ सकती है।

    स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही पर्याप्त नहीं है। खानपान और जीवनशैली का भी ध्यान रखना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और पर्याप्त नींद लेना शरीर के साथ त्वचा के लिए भी जरूरी है। फल सब्जियां प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। तनाव को कम रखने और नियमित शारीरिक गतिविधि करने से भी समग्र स्वास्थ्य को फायदा मिलता है।

    चेहरे पर बार बार हाथ लगाने या पिंपल्स को दबाने की आदत से बचना चाहिए। ऐसा करने से त्वचा में जलन बढ़ सकती है और दाग पड़ने का खतरा हो सकता है। मेकअप करने वाले लोगों को सोने से पहले मेकअप अच्छी तरह हटाना चाहिए। साथ ही तकिए के कवर तौलिया और मेकअप ब्रश जैसी चीजों की नियमित सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए।

    हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति पर काम करने वाला प्रोडक्ट जरूरी नहीं कि आपकी त्वचा के लिए भी सही हो। नया स्किन केयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना उपयोगी हो सकता है। अगर त्वचा पर लगातार खुजली लालिमा मुंहासे सूजन या अन्य परेशानी बनी रहती है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। नियमितता और सही देखभाल के साथ त्वचा को स्वस्थ और बेहतर बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है।

  • Hair Care Tips: झड़ते बालों और डैंड्रफ से परेशान हैं तो फिटकरी का ऐसे करें इस्तेमाल जानिए फायदे और सावधानियां

    Hair Care Tips: झड़ते बालों और डैंड्रफ से परेशान हैं तो फिटकरी का ऐसे करें इस्तेमाल जानिए फायदे और सावधानियां

    नई दिल्ली। बालों की देखभाल के लिए लोग तरह तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। इन्हीं में फिटकरी भी शामिल है जिसका इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा की सफाई और शेविंग के बाद किया जाता रहा है। फिटकरी में कसैले गुण पाए जाते हैं और इसका उपयोग कुछ लोग स्कैल्प की सफाई के लिए भी करते हैं। हालांकि फिटकरी को बाल झड़ने या डैंड्रफ का पक्का इलाज मानना सही नहीं है। इसका इस्तेमाल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि यह स्कैल्प पर किस तरह काम कर सकती है और इसे किस तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।

    फिटकरी का इस्तेमाल स्कैल्प की सफाई के लिए किया जाता है। अगर सिर की त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली रहती है तो फिटकरी का हल्का घोल अतिरिक्त तेल और गंदगी को हटाने में मदद कर सकता है। इससे स्कैल्प साफ महसूस हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे डैंड्रफ की समस्या में भी राहत मिलती है लेकिन डैंड्रफ के कई कारण हो सकते हैं और हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता। लगातार या ज्यादा डैंड्रफ होने पर केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    फिटकरी को सीधे स्कैल्प पर रगड़ना उचित नहीं माना जाता क्योंकि यह कुछ लोगों की त्वचा में रूखापन जलन या लालिमा पैदा कर सकती है। अगर इसका इस्तेमाल करना ही है तो पहले फिटकरी को पानी में अच्छी तरह घोलकर बहुत हल्का घोल तैयार किया जा सकता है। इस घोल को कॉटन या उंगलियों की मदद से स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। कुछ समय बाद बालों को सामान्य पानी से धो लेना चाहिए। इसके बाद स्कैल्प में रूखापन महसूस हो तो हल्का मॉइस्चराइजिंग या कंडीशनिंग प्रोडक्ट इस्तेमाल किया जा सकता है।

    बालों के झड़ने की समस्या में फिटकरी को सीधे तौर पर इलाज नहीं माना जाना चाहिए। बाल झड़ने के पीछे तनाव पोषण की कमी हार्मोनल बदलाव आनुवंशिक कारण स्कैल्प की समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी वजह की भूमिका हो सकती है। इसलिए अगर बाल लगातार तेजी से झड़ रहे हैं या सिर में पैच बन रहे हैं तो कारण समझना ज्यादा जरूरी है। केवल फिटकरी लगाने से मूल समस्या दूर नहीं होगी।

    इसी तरह अगर स्कैल्प पर घाव खुजली जलन या किसी तरह का संक्रमण है तो फिटकरी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना भी उपयोगी हो सकता है। किसी तरह की जलन या एलर्जी महसूस होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    दरअसल फिटकरी को बालों की नियमित देखभाल का विकल्प नहीं बल्कि सीमित घरेलू उपाय के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्वस्थ बालों के लिए संतुलित आहार पर्याप्त प्रोटीन और पोषक तत्वों का सेवन स्कैल्प की साफ सफाई पर्याप्त नींद और बालों के लिए सही उत्पादों का इस्तेमाल ज्यादा महत्वपूर्ण है। डैंड्रफ या हेयर फॉल की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका है।

  • Nainital Trip: पहली बार जा रहे हैं नैनीताल तो जरूर घूमें ये खास जगहें झील पहाड़ और खूबसूरत नजारों से यादगार बनेगा सफर

    Nainital Trip: पहली बार जा रहे हैं नैनीताल तो जरूर घूमें ये खास जगहें झील पहाड़ और खूबसूरत नजारों से यादगार बनेगा सफर

    नई दिल्ली। अगर आप भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ दिनों के लिए दूर जाकर पहाड़ों की ठंडी हवा झीलों की खूबसूरती और शांत वातावरण का आनंद लेना चाहते हैं तो नैनीताल आपके लिए शानदार ट्रैवल डेस्टिनेशन हो सकता है। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बसा नैनीताल अपनी खूबसूरत नैनी झील पहाड़ी वादियों और प्राकृतिक नजारों के कारण देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां परिवार के साथ छुट्टियां बिताने से लेकर दोस्तों के साथ घूमने और कपल्स के लिए शांत समय बिताने तक कई तरह के अनुभव मिल सकते हैं। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार नैनीताल के आसपास झीलों के साथ कई व्यू प्वाइंट और प्राकृतिक आकर्षण मौजूद हैं।

    नैनीताल की यात्रा की शुरुआत नैनी झील से करना सबसे खास अनुभव हो सकता है। पहाड़ों से घिरी यह झील शहर की पहचान मानी जाती है। यहां बोटिंग करते हुए चारों तरफ फैली पहाड़ियों और शहर की खूबसूरती को करीब से देखा जा सकता है। इसके बाद माल रोड की सैर यात्रा को अलग रंग देती है। यहां स्थानीय बाजारों में घूमते हुए खरीदारी करने और पहाड़ी खानपान का स्वाद लेने का मौका मिलता है। शाम के समय माल रोड और नैनी झील के आसपास का माहौल खास तौर पर आकर्षक नजर आता है।

    अगर आपको ऊंचाई से पहाड़ों और शहर का नजारा देखना पसंद है तो स्नो व्यू प्वाइंट और नैना पीक की ओर जाना अच्छा अनुभव हो सकता है। उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक गाइड में स्नो व्यू नैना पीक टिफिन टॉप लैंड्स एंड और इको केव गार्डन को नैनीताल के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया है। इको केव गार्डन में प्राकृतिक गुफाओं और पहाड़ी संरचनाओं को देखने का अलग अनुभव मिलता है।

    प्रकृति और वन्यजीव पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए नैनीताल चिड़ियाघर भी आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा राजभवन और सेंट जॉन्स चर्च जैसे स्थान शहर की विरासत और इतिहास से परिचित कराते हैं। अगर आप शहर की भीड़ से थोड़ा दूर शांत माहौल चाहते हैं तो पंगोट और आसपास के क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं। यहां हरियाली पक्षियों और पहाड़ी वातावरण के बीच समय बिताना यात्रा को यादगार बना सकता है।

    नैनीताल के आसपास घूमने के लिए भी कई विकल्प मौजूद हैं। भीमताल सातताल और नौकुचियाताल जैसे स्थान प्राकृतिक सुंदरता और झीलों के लिए प्रसिद्ध हैं। सातताल घने ओक के जंगलों के बीच स्थित झीलों का समूह है जहां प्रकृति की शांति के साथ बर्ड वॉचिंग और बोटिंग जैसी गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।

    नैनीताल पहुंचना भी काफी आसान है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार सड़क मार्ग से नैनीताल उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। रेल से आने वाले यात्रियों के लिए काठगोदाम प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो नैनीताल से करीब 23 किलोमीटर दूर है। हवाई यात्रा के लिए पंतनगर एयरपोर्ट एक विकल्प है जो करीब 69 किलोमीटर की दूरी पर है।

    नैनीताल की यात्रा पर निकलते समय मौसम के अनुसार गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए और स्थानीय मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना बेहतर रहता है। अगर आप झील पहाड़ हरियाली और शांत वातावरण को एक ही यात्रा में महसूस करना चाहते हैं तो नैनीताल का सफर आपके लिए यादगार बन सकता है।

  • बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम

    बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम


    नई दिल्ली ।
    बच्चों की परवरिश में पढ़ाई, होमवर्क और अच्छे व्यवहार के साथ उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी स्किल सिखाना भी बेहद अहम है। कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, जहां किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता और बच्चे को अपनी सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समझ की जरूरत पड़ती है। उम्र के अनुसार कुछ जरूरी बातें सिखाकर बच्चों को मुश्किल समय में घबराने के बजाय समझदारी से कदम उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले बच्चे को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम और जरूरत के मुताबिक घर से जुड़ी जरूरी जानकारी याद करानी चाहिए। छोटी उम्र में इसे खेल-खेल में दोहराकर सिखाया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चा बिना घबराए अपनी पहचान और जरूरी जानकारी बता सके।

    बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि आपात स्थिति में किससे मदद मांगनी है। परिवार के जरूरी फोन नंबर याद कराने के साथ उन्हें यह समझाना जरूरी है कि फोन पर अपनी स्थिति और परेशानी को साफ शब्दों में कैसे बताया जाए।

    अनजान लोगों से सावधानी बरतना भी बच्चों के लिए महत्वपूर्ण स्किल है। उन्हें समझाएं कि हर व्यक्ति पर तुरंत भरोसा करना जरूरी नहीं है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कुछ देने, कहीं ले जाने या माता-पिता के बारे में गलत जानकारी देने की कोशिश करे, तो बच्चे को वहां से हटकर किसी भरोसेमंद बड़े से मदद मांगनी चाहिए।

    अगर बच्चा भीड़ या किसी सार्वजनिक स्थान पर परिवार से अलग हो जाए, तो उसे इधर-उधर भागने के बजाय सुरक्षित जगह पर रुकना चाहिए। पुलिसकर्मी या किसी जिम्मेदार कर्मचारी से मदद मांगने की आदत उसे ऐसी स्थिति में सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है।

    घर में आग लगने जैसी स्थिति के लिए भी बच्चों को पहले से सामान्य सुरक्षा नियम समझाना जरूरी है। उन्हें बताया जाना चाहिए कि घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना है और आग या धुएं वाली जगह पर वापस जाकर सामान लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    पानी के आसपास सुरक्षा को लेकर भी बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। स्विमिंग पूल, तालाब या किसी जलाशय के पास अकेले नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी बड़े को बुलाने की आदत डालनी चाहिए।

    उम्र के अनुसार बच्चों को बेसिक फर्स्ट एड की जानकारी भी दी जा सकती है। छोटी चोट या कट लगने पर क्या करना है, यह समझाने के साथ उन्हें यह भी बताना चाहिए कि गंभीर चोट की स्थिति में खुद इलाज करने के बजाय तुरंत किसी बड़े से मदद लें।

    बड़े बच्चों को धीरे-धीरे किचन सेफ्टी के नियम सिखाए जा सकते हैं। गैस, गर्म बर्तन, चाकू और बिजली के उपकरणों से जुड़ी सावधानियां उनकी उम्र और समझ के अनुसार बताना जरूरी है।

    बच्चों को जरूरत पड़ने पर साफ तौर पर ‘ना’ कहना भी सिखाएं। अगर कोई बात या स्थिति उन्हें असहज लगे, तो वे बिना डर अपनी बात कह सकें और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को जानकारी दें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा परेशानी छिपाने के बजाय समय पर मदद मांगे। गलती होने या डर लगने पर सच बताना जरूरी है। इन स्किल्स को बच्चों पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के उदाहरणों, रोल-प्ले और छोटे अभ्यास के जरिए सहज तरीके से सिखाया जा सकता है।

  • गणपति उत्सव में छाएगा भक्ति और जोश का रंग, बॉलीवुड के ये 10 गाने प्लेलिस्ट में जोड़कर बनाएं माहौल खास

    गणपति उत्सव में छाएगा भक्ति और जोश का रंग, बॉलीवुड के ये 10 गाने प्लेलिस्ट में जोड़कर बनाएं माहौल खास


    नई दिल्ली । गणपति उत्सव का माहौल भक्ति, उमंग और उत्साह से भरा होता है। बप्पा के स्वागत से लेकर आरती और विसर्जन तक हर पल में संगीत उत्सव की खुशी को और बढ़ा देता है। अगर पूजा-पाठ के साथ बॉलीवुड का रंग भी शामिल करना चाहते हैं, तो गणपति से जुड़े कई ऐसे गाने हैं जो लंबे समय से लोगों की पसंद बने हुए हैं। इन गीतों में भक्ति के साथ जोश, श्रद्धा और उत्सव की ऊर्जा भी महसूस होती है।

    गणपति उत्सव की शुरुआत के लिए ‘देवा श्री गणेशा’ को प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। फिल्म ‘अग्निपथ’ का यह गीत अपनी दमदार धुन और भक्तिमय अंदाज के कारण गणपति समारोह में जोश भरने वाला गाना माना जाता है। आरती या उत्सव के दौरान इसकी ऊर्जा माहौल को खास बना सकती है।

    ‘मोरया रे’ भी गणपति उत्सव के रंग में पूरी तरह फिट बैठता है। फिल्म ‘डॉन’ से जुड़ा यह गीत बप्पा के जयकारों और उत्सव की ऊर्जा को सामने लाता है। गणपति पंडाल में इसे बजाने से माहौल में उत्साह और उमंग का रंग बढ़ सकता है।

    ‘गणपति बप्पा मोरया’ जैसे भक्तिमय गीत गणपति आराधना की भावना को मजबूत करते हैं। बप्पा के जयकारों के बीच ऐसे गीत उत्सव में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बनाए रखते हैं। वहीं ‘श्री गणेशा देवा’ भी गणपति आराधना के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है।

    पूजा के दौरान ‘सिंदूर लाल चढ़ायो’ को भी प्लेलिस्ट में जगह दी जा सकती है। गणपति आराधना से जुड़े इस पारंपरिक भक्ति गीत का भाव पूजा के माहौल को भक्तिमय बनाने में मदद करता है।

    फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ का ‘गजानना’ गणपति उत्सव के लिए खास जोश लेकर आता है। इसकी तेज धुन और भव्य अंदाज समारोह के माहौल में उत्साह बढ़ा सकते हैं। घर में होने वाले छोटे आयोजन से लेकर बड़े गणपति समारोह तक यह गीत प्लेलिस्ट का हिस्सा बन सकता है।

    वहीं विसर्जन के समय ‘गणपती अपने गांव चले’ जैसे गीतों का भाव बिल्कुल अलग नजर आता है। बप्पा की विदाई के समय ऐसे गीत उत्सव की खुशी के साथ भावुक माहौल भी पैदा करते हैं।

    ‘हे गणराया’ भी गणपति भक्ति से जुड़ा गीत है। फिल्म ‘एबीसीडी 2’ का यह गाना आस्था और श्रद्धा की भावना को खूबसूरती से सामने लाता है। इसके अलावा ‘बप्पा मोरया रे’ जैसे जोशीले गीत भी गणपति समारोह में उत्साह बढ़ाने के लिए बजाए जा सकते हैं।

    गणपति विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ की भावना उत्सव को भावुक अंदाज में पूरा करती है। बप्पा को विदाई देते समय अगले वर्ष फिर आने की कामना इस भाव को और खास बना देती है।

    गणपति उत्सव में संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि माहौल को यादगार बनाने का एक जरिया भी है। आरती के समय भक्तिमय गीत और सेलिब्रेशन के दौरान जोशीले गाने बजाकर भक्ति, उमंग और मस्ती का संतुलित रंग उत्सव में शामिल किया जा सकता है।

  • शराब और दवा का कॉम्बिनेशन पड़ सकता है भारी पेनकिलर से लेकर BP की दवा तक इन बातों का रखें ध्यान

    शराब और दवा का कॉम्बिनेशन पड़ सकता है भारी पेनकिलर से लेकर BP की दवा तक इन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। पार्टी या किसी सोशल गैदरिंग के बाद कई लोग सिरदर्द बदहजमी या दूसरी परेशानी होने पर तुरंत दवा ले लेते हैं। कई बार लोग यह मान लेते हैं कि सामान्य दर्द या बुखार की दवा शराब पीने के कुछ समय बाद लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन शराब और दवाओं का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता और कुछ दवाओं के साथ शराब का सेवन गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए शराब पीने के बाद अपनी मर्जी से कोई भी दवा लेना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाता।

    शराब और कई दवाओं को शरीर मुख्य रूप से लिवर की मदद से प्रोसेस करता है। ऐसे में दोनों का एक साथ शरीर में पहुंचना कुछ परिस्थितियों में दवा के असर को बदल सकता है। दवा का प्रभाव जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है या शरीर में उसके स्तर में बदलाव हो सकता है। इसके कारण चक्कर मतली उल्टी अत्यधिक नींद या दूसरी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं। कुछ दवाओं के साथ सांस लेने में परेशानी और ब्लड प्रेशर में गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    पेनकिलर को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। पैरासिटामोल जैसी दवा का इस्तेमाल आमतौर पर दर्द और बुखार के लिए किया जाता है लेकिन शराब का अधिक सेवन करने वाले लोगों में इसे बार बार या अधिक मात्रा में लेना लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी तरह कुछ मजबूत दर्द निवारक दवाएं केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं। इनके साथ शराब लेने पर अत्यधिक नींद और सांस धीमी होने जैसे गंभीर प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी पेनकिलर को शराब के बाद अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

    ब्लड प्रेशर की दवाएं लेने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। शराब कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है और जब इसके साथ ऐसी दवा ली जाती है जो रक्तचाप कम करती है तो चक्कर कमजोरी या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है। इसी तरह डायबिटीज की कुछ दवाओं के साथ शराब लेने से ब्लड शुगर कम होने का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्ग लोगों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय हो सकती है।

    एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में भी बिना जानकारी के शराब का सेवन करना उचित नहीं है। सभी एंटीबायोटिक शराब के साथ एक जैसा असर नहीं करते लेकिन कुछ विशेष दवाओं के साथ शराब लेने पर उल्टी पेट खराब होना सिरदर्द और अन्य प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति नियमित दवा ले रहा है तो शराब के बाद दवा लेने या दवा के दौरान शराब पीने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब पीने के बाद दवा लेने के लिए कोई एक सुरक्षित अंतराल सभी दवाओं पर लागू नहीं होता। दवा का नाम उसकी खुराक शराब की मात्रा व्यक्ति की उम्र लिवर की स्थिति और दूसरी चल रही दवाओं के आधार पर जोखिम बदल सकता है। इसलिए केवल कुछ घंटे का अंतर रखकर हर दवा को सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।

    अगर शराब पीने के बाद दवा लेने पर अत्यधिक नींद सांस लेने में परेशानी बेहोशी लगातार उल्टी सीने में दर्द या असामान्य रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह या दवा के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • बालों में कब और कैसे लगाएं नारियल तेल जानिए सही तरीका और किन गलतियों से बचना जरूरी है

    बालों में कब और कैसे लगाएं नारियल तेल जानिए सही तरीका और किन गलतियों से बचना जरूरी है


    नई दिल्ली। बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिए लोग लंबे समय से नारियल तेल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। कई घरों में बालों की मालिश के लिए नारियल तेल को पारंपरिक उपाय माना जाता है। इसकी वजह यह है कि नारियल तेल में मौजूद फैटी एसिड बालों और स्कैल्प की देखभाल में मदद कर सकते हैं। खासकर जब बाल रूखे और बेजान नजर आते हैं तब नियमित रूप से सही तरीके से तेल लगाने से बालों में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि नारियल तेल को किसी चमत्कारी इलाज की तरह देखना सही नहीं है। बालों की समस्या के कारण अलग अलग हो सकते हैं इसलिए तेल का असर भी हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

    नारियल तेल का सबसे बड़ा फायदा बालों की नमी से जुड़ा माना जाता है। बालों पर तेल लगाने से बालों की बाहरी परत को कंडीशनिंग मिल सकती है जिससे वे अपेक्षाकृत मुलायम महसूस होते हैं। खासकर ड्राई और फ्रिजी बालों में नारियल तेल लगाने से रूखापन कुछ कम महसूस हो सकता है। बालों को धोने से पहले तेल लगाने पर यह बालों में नमी के नुकसान को कम करने में भी मदद कर सकता है। यही कारण है कि हेयर केयर रूटीन में नारियल तेल को शामिल करने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है।

    नारियल तेल से सिर की मालिश करना भी कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। हल्के हाथों से स्कैल्प की मालिश करने से आराम महसूस हो सकता है और बालों में तेल समान रूप से फैल जाता है। हालांकि बहुत ज्यादा जोर से मसाज करने से बचना चाहिए। स्कैल्प पर चोट या जलन होने की स्थिति में तेल लगाने से परेशानी बढ़ सकती है। इसी तरह अगर किसी व्यक्ति को डैंड्रफ या स्कैल्प से जुड़ी कोई समस्या है तो केवल तेल लगाना पर्याप्त इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

    बालों में नारियल तेल लगाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। थोड़ी मात्रा में तेल लेकर उसे हल्का गुनगुना किया जा सकता है। इसके बाद बालों की लंबाई और जरूरत के अनुसार स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। तेल लगाने के बाद कुछ समय के लिए छोड़कर सामान्य शैंपू से बाल धोए जा सकते हैं। बहुत अधिक तेल लगाने से बाल चिपचिपे हो सकते हैं और उन्हें साफ करने के लिए ज्यादा शैंपू की जरूरत पड़ सकती है।

    एक और जरूरी बात यह है कि हर व्यक्ति के बाल और स्कैल्प एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों को नारियल तेल लगाने के बाद बाल भारी या चिपचिपे महसूस हो सकते हैं। वहीं संवेदनशील स्कैल्प वाले लोगों में किसी भी नए प्रोडक्ट से जलन या खुजली हो सकती है। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ी मात्रा में लगाकर प्रतिक्रिया देखना बेहतर है। अगर लगातार खुजली लालिमा या जलन हो तो इस्तेमाल रोककर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

    अगर बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं या अचानक बालों का घनत्व कम हो रहा है तो केवल नारियल तेल पर निर्भर रहना उचित नहीं है। बाल झड़ने के पीछे पोषण की कमी हार्मोनल बदलाव तनाव आनुवंशिक कारण या स्कैल्प की समस्या जैसे कई कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सही कारण पता करना ज्यादा जरूरी है। कुल मिलाकर नारियल तेल बालों को कंडीशन करने और रूखेपन को कम करने वाली हेयर केयर रूटीन का हिस्सा बन सकता है लेकिन इसके इस्तेमाल का सही तरीका और व्यक्ति के बालों की जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • कॉकरोच और कीड़े-मकोड़ों से हैं परेशान तो घर की इन चीजों का करें इस्तेमाल, बिना तेज केमिकल गंध के पाएं राहत

    कॉकरोच और कीड़े-मकोड़ों से हैं परेशान तो घर की इन चीजों का करें इस्तेमाल, बिना तेज केमिकल गंध के पाएं राहत

    नई दिल्ली । घर में अचानक कॉकरोच या दूसरे कीड़े-मकोड़े दिखाई देने लगें तो परेशानी बढ़ जाती है। खासकर रसोई में इनका नजर आना साफ-सफाई को लेकर चिंता पैदा कर सकता है। इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले स्प्रे और दूसरे केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इन उत्पादों की गंध तेज हो सकती है और कुछ समय बाद समस्या दोबारा सामने आने की बात भी कही जाती है।

    अगर आप घर में मौजूद चीजों के जरिए कॉकरोच को दूर रखने का तरीका तलाश रहे हैं, तो किचन में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें मददगार हो सकती हैं। तेज पत्ता, लौंग और दालचीनी ऐसी ही चीजें हैं, जिनकी तेज खुशबू कॉकरोच को कुछ जगहों से दूर रखने में सहायक मानी जाती है।

    सबसे पहले तेज पत्ते की बात करें। आमतौर पर इसका इस्तेमाल खाने में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी गंध कॉकरोच को पसंद नहीं आती। इसके लिए सूखे तेज पत्ते लेकर उन्हें हल्का सा कुचल सकते हैं। ऐसा करने से उनमें मौजूद खुशबू और प्राकृतिक तेल बाहर आने लगते हैं।

    कुचले हुए तेज पत्तों को रसोई के कोनों, दराजों के किनारों और फ्रिज या गैस जैसे उपकरणों के पीछे रखा जा सकता है। इन जगहों पर इसकी खुशबू कॉकरोच को दूर रखने में मदद कर सकती है। जब तेज पत्ते की खुशबू कम होने लगे तो उन्हें बदल देना बेहतर रहेगा।

    दूसरा घरेलू विकल्प साबुत लौंग है। लौंग की तेज और तीखी खुशबू भी कॉकरोच को असहज कर सकती है। इसे किचन के उन हिस्सों में रखा जा सकता है जहां कॉकरोच दिखाई देते हैं या उनके आने की संभावना रहती है।

    सिंक के नीचे, मसाले रखने वाली अलमारी और कूड़ेदान के आसपास कुछ साबुत लौंग रखने का तरीका अपनाया जा सकता है। इसकी खुशबू कॉकरोच को उन जगहों से दूर रखने में मदद कर सकती है। साथ ही किचन में लौंग की प्राकृतिक सुगंध भी बनी रहती है।

    तीसरा विकल्प दालचीनी है। इसकी तेज खुशबू को भी कॉकरोच दूर रखने में उपयोगी माना जाता है। इसके लिए खिड़की की चौखट, दरवाजे के किनारे और फ्रिज के पीछे जैसी जगहों पर थोड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर रखा या छिड़का जा सकता है।

    किचन की अलमारी या पेंट्री में साबुत दालचीनी की स्टिक भी रखी जा सकती है। इसकी सुगंध कॉकरोच को उन स्थानों से दूर रखने में मदद कर सकती है।

    हालांकि, घरेलू उपायों का असर हर घर और हर स्थिति में एक जैसा होना जरूरी नहीं है। अगर कॉकरोच की समस्या लगातार बनी हुई है या बहुत ज्यादा बढ़ गई है, तो केवल खुशबू आधारित उपायों पर निर्भर रहने के बजाय घर की साफ-सफाई और कीड़ों के संभावित ठिकानों पर भी ध्यान देना जरूरी है। रसोई को साफ और सूखा रखने से भी कीड़ों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।