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  • E20 पेट्रोल पर बढ़ी बहस क्या इथेनॉल मिश्रित ईंधन से बढ़ रहा है वाहन मेंटेनेंस का खर्च जानिए पूरी सच्चाई

    E20 पेट्रोल पर बढ़ी बहस क्या इथेनॉल मिश्रित ईंधन से बढ़ रहा है वाहन मेंटेनेंस का खर्च जानिए पूरी सच्चाई


    मध्य प्रदेश । देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि देश में शत प्रतिशत इथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है। वहीं बाजार में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसके बीच अब वाहन चालकों और ऑटो मैकेनिकों के बीच इस ईंधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    भोपाल के कई ऑटो मैकेनिकों का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाली कुछ गाड़ियों में फ्यूल पंप जल्दी खराब होने और फ्यूल सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। उनका कहना है कि पहले जिन वाहनों में फ्यूल पंप वर्षों तक बिना किसी परेशानी के चलता था अब कुछ मामलों में उसे अपेक्षाकृत कम समय में बदलना पड़ रहा है। हालांकि यह अनुभव सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होता और यह वाहन की तकनीक तथा उसकी स्थिति पर भी निर्भर करता है।

    मैकेनिकों के अनुसार जिन वाहनों का लंबे समय तक उपयोग नहीं होता उनमें इथेनॉल मिश्रित ईंधन अधिक समय तक टैंक में रहने पर नमी खींच सकता है। इससे फ्यूल सिस्टम में गंदगी या जंग जैसी समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में फ्यूल फिल्टर और फ्यूल पंप पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है और इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देने का भी उद्देश्य है। लेकिन यह भी जरूरी है कि वाहन निर्माता कंपनियों के निर्देशों का पालन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित वाहन E20 ईंधन के अनुकूल है।

    ऑटो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहने वाला है तो समय समय पर उसे स्टार्ट करना चाहिए ताकि फ्यूल सिस्टम सक्रिय रहे। साथ ही निर्धारित समय पर सर्विस कराना फ्यूल फिल्टर बदलना और अच्छी गुणवत्ता का ईंधन भरवाना भी जरूरी है। इससे संभावित तकनीकी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    वाहन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी गाड़ी की यूजर मैनुअल में दी गई ईंधन संबंधी जानकारी को ध्यान से पढ़ें। यदि वाहन निर्माता ने E20 के उपयोग की अनुमति दी है तो उसका उपयोग सुरक्षित माना जाता है। वहीं पुराने मॉडल के वाहनों में किसी भी तरह की समस्या महसूस होने पर अधिकृत सर्विस सेंटर या विशेषज्ञ मैकेनिक से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

    इथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर फिलहाल अलग अलग अनुभव सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि तकनीकी तथ्यों और वाहन निर्माता कंपनियों के दिशा निर्देशों के आधार पर ही निर्णय लिया जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण और वाहन की बेहतर कार्यक्षमता दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

  • ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला

    ब्लैकमेलिंग के आरोपों में घिरे मीडियाकर्मी पर दूसरी एफआईआर भाई और महिला साथी सहित चार लोगों पर पुलिस ने दर्ज किया मामला


    इंदौर । इंदौर में एक मीडियाकर्मी के खिलाफ सात दिन के भीतर दूसरी एफआईआर दर्ज होने से मामला चर्चा में आ गया है। इस बार बाणगंगा थाना पुलिस ने एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक की शिकायत पर मीडियाकर्मी अनवर खान उसके भाई एक महिला साथी और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ ब्लैकमेलिंग धमकी देकर रुपए वसूलने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    बाणगंगा थाना प्रभारी सियाराम गुर्जर के अनुसार शिकायत एमपीईबी के कार्यपालक निदेशक शिवलाल पुत्र दयाराम करबाडिया ने दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर अनवर खान साधना शक्वातव सिद्दीकी खान और फारूख सिद्दीकी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार उनका कार्यालय और निवास पोलोग्राउंड क्षेत्र में स्थित है। आरोप है कि चारों आरोपी कई वर्षों से रिपोर्टिंग के सिलसिले में वहां आते जाते थे। इसी दौरान उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में कथित रूप से भ्रामक और दबाव बनाने वाली खबरें प्रकाशित करने की बात कहकर मानसिक दबाव बनाया।

    एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को रेप के झूठे मामले में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी देकर रुपए की मांग की। शिकायत के मुताबिक जून 2024 से दिसंबर 2025 के बीच करीब डेढ़ लाख रुपये विभिन्न किस्तों में वसूल किए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद भी लगातार और पैसे की मांग की जाती रही जिससे शिकायतकर्ता मानसिक रूप से परेशान हो गया।

    शिवलाल करबाडिया ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें जानकारी मिली कि अनवर खान के खिलाफ पहले से ही बाणगंगा थाने में ब्लैकमेलिंग का एक अन्य मामला दर्ज है। इसके बाद उन्होंने भी अपने साथ हुई कथित घटनाओं की शिकायत पुलिस से की और पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।

    पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। मामले से जुड़े दस्तावेज साक्ष्य और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सके और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती

    इंदौर में थाने से हथकड़ी खोलकर फरार हुआ बदमाश अवैध शराब मामले का आरोपी पुलिस को देकर गया चुनौती


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी थाने से अवैध शराब मामले में गिरफ्तार आरोपी साबिर उर्फ गज्जू हथकड़ी से हाथ निकालकर फरार हो गया। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आरोपी की तलाश में कई टीमें रवाना कर दी गईं।

    इंदौर के द्वारकापुरी थाना परिसर से मंगलवार को पुलिस की हिरासत में मौजूद एक आरोपी के फरार होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार साबिर उर्फ गज्जू संतरी को चकमा देकर हथकड़ी से अपना हाथ निकालने में सफल रहा और मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल अलग अलग टीमों का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार साबिर उर्फ गज्जू निवासी अहीरखेड़ी को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया था। वह अवैध शराब के एक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे द्वारकापुरी थाने लाया गया जहां सुरक्षा के तहत हथकड़ी लगाकर बैठाया गया था। मंगलवार को मौका मिलते ही उसने धीरे धीरे हथकड़ी से अपना हाथ निकाल लिया और पुलिसकर्मियों को भनक लगे बिना वहां से भाग निकला।

    जानकारी के मुताबिक जिस स्थान पर साबिर को बैठाया गया था वहीं पास में पुलिस की गिरफ्त में मौजूद ड्रग्स तस्कर चेतन नाथ भी बैठा हुआ था। चेतन नाथ को सोमवार को ही आठ किलो गांजा लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन और 22 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का फायदा उठाकर साबिर फरार हो गया।

    घटना सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल पूरे मामले की जानकारी ली और आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीमों को रवाना किया। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में दबिश दे रही है और आरोपी के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को दोबारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार साबिर कोई नया अपराधी नहीं है। करीब दो महीने पहले उसके साथी अरुण को अवैध शराब के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय भी साबिर उसके साथ मौजूद था लेकिन पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। तभी से पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी और सोमवार रात उसे पकड़ने में सफलता मिली थी लेकिन अगले ही दिन वह फिर पुलिस हिरासत से भाग निकला।

    सूत्रों के मुताबिक साबिर के खिलाफ अवैध शराब की तस्करी मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों सहित तीन से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के साथ साथ यह भी जांच कर रही है कि थाने से फरार होने में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। पूरे मामले की विभागीय समीक्षा भी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

  • सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क

    सोशल मीडिया कॉलिंग से चलता था ड्रग्स का काला कारोबार इंदौर पुलिस की पूछताछ में खुला बड़ा नेटवर्क


    इंदौर । इंदौर में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान पुलिस को एक बड़े नेटवर्क के अहम सुराग मिले हैं। गिरफ्तार आरोपी चेतन नाथ से पूछताछ में सामने आया है कि नशे का पूरा कारोबार सोशल मीडिया कॉलिंग के जरिए संचालित किया जाता था। आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में एक भी सेव संपर्क नंबर नहीं मिला जिससे पुलिस को अंदेशा है कि गिरोह पहचान छिपाने के लिए आधुनिक डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहा था। फिलहाल अदालत ने आरोपी को दो जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।

    द्वारकापुरी थाना पुलिस के अनुसार चेतन नाथ की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि ड्रग्स की खरीद और सप्लाई के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेज की बजाय सोशल मीडिया कॉलिंग का उपयोग किया जाता था ताकि पुलिस की निगरानी से बचा जा सके। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल का तकनीकी विश्लेषण कर उसके डिजिटल नेटवर्क और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस ने बताया कि जब टीम चेतन नाथ को पकड़ने उसके ठिकाने पर पहुंची थी तब वहां उसका एक साथी भी मौजूद था। पुलिस को देखते ही वह मौके से फरार हो गया। पूछताछ में पता चला कि दोनों पहले जेल में साथ रह चुके हैं और लंबे समय से संपर्क में थे। अब पुलिस फरार आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और उसके संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है।

    पूछताछ के दौरान चेतन नाथ ने यह भी दावा किया कि उसके पास से बरामद 19 लाख रुपये नकद उसके एक साथी की जमानत के लिए जुटाए गए थे। हालांकि पुलिस इस दावे को पूरी तरह सत्यापित करने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इतनी बड़ी नकदी नशे के कारोबार से अर्जित की गई हो सकती है और इसके वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 19 लाख रुपये नकद नोट गिनने की मशीन लगभग 270 ग्राम ब्राउन शुगर 8 किलो गांजा और पिस्टल के 22 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद कारतूसों के स्रोत और उनके संभावित इस्तेमाल को लेकर भी जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी के पास हथियारों से जुड़ा कोई नेटवर्क भी था या नहीं।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ दिन पहले पुलिस ने लकी नाथ नामक आरोपी को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया था। उससे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने बैक ट्रैकिंग करते हुए चेतन नाथ तक पहुंच बनाई। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं हो सकता और इसके तार दूसरे शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से डिजिटल साक्ष्यों बैंकिंग लेनदेन और कॉलिंग पैटर्न की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे ड्रग्स सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके।

  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा

    शादी का झांसा देकर महिला से 28 लाख ऐंठे विदेश भागने की फिराक में आरोपी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा


    मध्य प्रदेश। आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला का भरोसा जीता और बीमारी का बहाना बनाकर उससे करीब 28 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस के मुताबिक आरोपी लंबे समय से फरार था और गिरफ्तारी से पहले यूरोप भागने की तैयारी कर रहा था।

    क्राइम ब्रांच अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र राकेश छोनकर के रूप में हुई है। वह नोएडा क्षेत्र का रहने वाला है और रूस के मॉस्को में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के रूप में काम करता है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका है और उसने अपनी शैक्षणिक एवं पेशेवर जानकारी का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया।

    जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट जीवनसाथी डॉट कॉम पर फर्जी प्रोफाइल बनाई थी। उसने खुद को भारतीय सेना का अधिकारी बताकर इंदौर की एक महिला से संपर्क किया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और शादी की चर्चा शुरू हो गई। विश्वास कायम होने के बाद आरोपी ने महिला को अपनी गंभीर बीमारी की झूठी कहानी सुनाई और इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी।
    पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 के दौरान आरोपी ने अलग अलग किस्तों में महिला से करीब 28 लाख रुपये अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जब पूरी रकम मिल गई तो उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और महिला से संपर्क भी कम कर दिया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने पर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

    क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी अधिकतर समय विदेश में रह रहा था जिससे उसकी गिरफ्तारी आसान नहीं थी। हाल ही में वह अपने परिवार से मिलने दिल्ली आया था। पुलिस को जैसे ही उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार आरोपी दिल्ली से यूरोप जाने वाली फ्लाइट पकड़ने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया।

    पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि उसने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। जांच एजेंसियां उसके ऑनलाइन नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की ठगी के और कितने मामले उससे जुड़े हुए हैं।

    क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट या सोशल मीडिया के जरिए बनने वाले रिश्तों में आर्थिक लेनदेन करने से पहले पूरी तरह जांच पड़ताल करें। किसी भी व्यक्ति की पहचान और दावों की पुष्टि किए बिना बड़ी रकम भेजना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। पुलिस ने मामले में आगे की जांच जारी होने की जानकारी दी है।
  • बारिश से पहले नगर निगम सख्त इंदौर में उद्यान की जमीन कराई कब्जामुक्त जर्जर भवन भी तोड़ा

    बारिश से पहले नगर निगम सख्त इंदौर में उद्यान की जमीन कराई कब्जामुक्त जर्जर भवन भी तोड़ा


    इंदौर इंदौर में बारिश के मौसम से पहले नगर निगम ने अतिक्रमण और जर्जर भवनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को निगम की टीम ने शहर के दो अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए एक ओर नगर निगम की बगीचे की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया तो दूसरी ओर लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक जर्जर मकान के खतरनाक हिस्से को हटाया। दोनों स्थानों पर पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई शांतिपूर्वक संपन्न हुई।

    पहली कार्रवाई जोन क्रमांक 16 के छोटा बांगड़दा क्षेत्र में की गई। नगर निगम को शिकायत मिली थी कि उद्यान के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया है। शिकायत की जांच के बाद निगम ने कार्रवाई का निर्णय लिया। मंगलवार सुबह नगर निगम की टीम जेसीबी मशीनों और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और अवैध निर्माण को हटाकर जमीन को कब्जामुक्त कराया।

    रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरिया ने बताया कि नगर निगम की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई और सरकारी जमीन को मुक्त कराया गया।

    इसके बाद नगर निगम का अमला छोटी ग्वालटोली इलाके में पहुंचा जहां एक मकान का ऊपरी हिस्सा काफी जर्जर हो चुका था। भवन की स्थिति को देखते हुए उसके गिरने का खतरा बना हुआ था जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा था। इसी कारण निगम ने एहतियात के तौर पर भवन के ऊपरी हिस्से में बने दो कमरों और छज्जे को हटाने की कार्रवाई की।

    अधिकारियों ने बताया कि इस स्थान पर मशीनों की बजाय मैन्युअल तरीके से तोड़फोड़ की गई ताकि आसपास की इमारतों और दुकानों को कोई नुकसान न पहुंचे। कार्रवाई शुरू करने से पहले सुरक्षा के मद्देनजर नीचे संचालित दुकानों को अस्थायी रूप से बंद कराया गया और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया गया।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार दोनों स्थानों पर कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का विरोध सामने नहीं आया। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई। निगम का कहना है कि मानसून के दौरान जर्जर भवनों के गिरने और अतिक्रमण से होने वाली समस्याओं को रोकने के लिए शहरभर में लगातार सर्वे किया जा रहा है। जहां भी अवैध कब्जे या खतरनाक भवन चिन्हित किए जा रहे हैं वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई जर्जर भवन या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा दिखाई दे तो इसकी सूचना प्रशासन को दें ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर जनहानि और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में कांग्रेस नेता पंकज संघवी से पुलिस पूछताछ डायमंड पैलेस जमीन मामले में जांच तेज


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर में करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की 17 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे चर्चित विवाद में पुलिस जांच तेज हो गई है। इसी सिलसिले में मंगलवार को कनाड़िया थाना पुलिस ने संयम इंफ्रा से जुड़े कारोबारी और कांग्रेस नेता पंकज संघवी से पूछताछ की। उनके भतीजे तथा कंपनी के पार्टनर प्रतीक संघवी को भी नोटिस देकर थाने बुलाया गया जहां उनसे लंबे समय तक पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि जांच के तहत सभी संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है।

    यह मामला कनाड़िया क्षेत्र स्थित डायमंड पैलेस कॉलोनी की लगभग 17 एकड़ जमीन से जुड़ा है जिसकी अनुमानित कीमत करीब 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पिछले सप्ताह इस जमीन को लेकर संयम इंफ्रा से जुड़े लोगों और स्थानीय रहवासियों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी जहां कथित रूप से कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी विवाद किया था।

    पुलिस के अनुसार मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी विजय सिकरवार और आशीष शर्मा के साथ मोहसीन और उसके साथियों की कहासुनी हुई थी। घटना के दो दिन बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इसके बाद सात दिन के भीतर नामजद आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि जांच के क्रम में पंकज संघवी और प्रतीक संघवी को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पंकज संघवी से पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया जबकि प्रतीक संघवी से देर तक पूछताछ जारी रही। पुलिस का कहना है कि अभी यह केवल जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक संयम इंफ्रा कंपनी में पंकज संघवी प्रतीक संघवी दीपक और आशीष साझेदार हैं। कंपनी के कई आधिकारिक दस्तावेजों पर प्रतीक संघवी के हस्ताक्षर होने के कारण उनसे भी विस्तृत जानकारी ली जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि विवाद वाले दिन मौके पर पहुंचे लोगों को किसने बुलाया था और पूरे घटनाक्रम में उनकी भूमिका क्या थी।

    बताया जा रहा है कि डायमंड पैलेस कॉलोनी की यह जमीन लंबे समय से विवादों में रही है। संघवी परिवार इस जमीन पर अपना दावा करता है जबकि कथित अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर कई वर्षों से स्थानीय रहवासियों और परिवार के बीच विवाद चलता आ रहा है। यह मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है और अब तक इसका अंतिम समाधान नहीं निकल पाया है।

    फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी तथा यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

  • एक पल की चूक बनी जिंदगी भर का दर्द मां के वॉशरूम जाते ही बेड से गिरा 44 दिन का मासूम

    एक पल की चूक बनी जिंदगी भर का दर्द मां के वॉशरूम जाते ही बेड से गिरा 44 दिन का मासूम


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां महज 44 दिन के एक मासूम की बेड से गिरने के बाद मौत हो गई। यह घटना एरोड्रम थाना क्षेत्र के रुक्मणी नगर छोटा बांगड़दा इलाके की है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय बच्चे की मां कुछ देर के लिए वॉशरूम गई थीं। इसी दौरान मासूम करवट लेते हुए करीब तीन फीट ऊंचे बेड से नीचे गिर गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

    जानकारी के अनुसार रात के समय परिवार घर में सो रहा था। मां थोड़ी देर के लिए वॉशरूम गई थीं जबकि पिता गहरी नींद में थे। इसी बीच 44 दिन का मासूम प्रियांशु करवट बदलते हुए बेड के किनारे तक पहुंच गया और नीचे गिर पड़ा। गिरते ही बच्चा जोर जोर से रोने लगा। उसकी आवाज सुनकर पिता की नींद खुली। उन्होंने देखा कि बच्चे के चेहरे और मुंह पर गंभीर चोट लगी है जिसके बाद परिवार में अफरा तफरी मच गई।

    परिजन बिना देर किए बच्चे को नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे तुरंत एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया। वहां डॉक्टरों ने पूरी कोशिश की लेकिन मंगलवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    एरोड्रम थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक बच्चे का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है जिसके बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। शुरुआती जांच में मामला हादसा माना जा रहा है हालांकि सभी पहलुओं की जांच जारी है।

    मृतक बच्चे की पहचान प्रियांशु पुत्र चंद्रशेखर कुमार के रूप में हुई है। परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और रोजी रोजगार के लिए इंदौर में किराए के मकान में रहता है। बच्चे के पिता सिलाई का काम करते हैं। परिवार में दो साल की एक बेटी भी है। 44 दिन पहले ही घर में बेटे के जन्म से खुशियां आई थीं लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात और छोटे बच्चों को कभी भी ऊंचे बेड पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि जन्म के कुछ सप्ताह बाद ही बच्चे अनजाने में करवट लेने लगते हैं। ऐसे में थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। बच्चों को हमेशा सुरक्षित पालने में सुलाना या बेड के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था रखना जरूरी माना जाता है ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है।

    धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

    गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े।

    गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

    गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।