Category: Madhya Pradesh

  • MP में मानसून के 15 दिन बाकी, 37 जिलों में अब भी कोटा अधूरा, आलीराजपुर सबसे पीछे

    MP में मानसून के 15 दिन बाकी, 37 जिलों में अब भी कोटा अधूरा, आलीराजपुर सबसे पीछे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से नीचे है। सीजन में अब तक 834.4 मिमी यानी 32.8 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य 886.6 मिमी यानी 34.9 इंच से 2.1 इंच कम है। प्रदेश में ओवरऑल बारिश 6% कम है और 37 जिलों में अभी औसत बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है।

    दूसरी ओर, भोपाल, ग्वालियर समेत 18 जिले औसत से आगे निकल चुके हैं। सबसे ज्यादा अंतर आलीराजपुर में है, जहां औसत की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है।

    पूर्वी MP ने संभाला आंकड़ा, पश्चिमी हिस्सा अब भी पीछे
    इस मानसून में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन पश्चिम की तुलना में बेहतर रहा है। जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में कई जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है। सागर संभाग के निवाड़ी में औसत से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34% और मैहर में 29% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इंच में देखें तो मऊगंज में 54.9 इंच बारिश दर्ज की गई है। सतना में भी 50 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इसके उलट इंदौर संभाग के आलीराजपुर में अब तक सिर्फ 16 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। हालांकि, पूर्वी हिस्से का ओवरऑल आंकड़ा भी सोमवार तक सामान्य से 1% कम हो गया। यहां बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 2% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिम के कई जिलों में 2 से 49% तक कमी
    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा बनी हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 2% से 49% तक कम बारिश हुई है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बनने के बावजूद पूरे प्रदेश का बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर नहीं पहुंच पाया।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस सूची में पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों के जिले शामिल हैं, लेकिन अधिक बारिश वाले जिलों में पूर्वी मध्य प्रदेश का दबदबा साफ दिखाई देता है।

    चार दिन भारी बारिश के आसार नहीं
    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, अगले चार दिनों में प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। पिछले चार दिनों से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में भारी बारिश का दौर चला था। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड हुई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर होने की संभावना है। इसके चलते 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।

    पिछले सप्ताह की बारिश से बदला तस्वीर का अंतर
    पिछले एक सप्ताह में कई जिलों में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के बारिश के आंकड़े को काफी सुधारा है। कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसका असर यह हुआ कि सीजन में पहली बार पूर्वी मध्य प्रदेश का आंकड़ा बेहतर स्थिति में पहुंचा था, हालांकि सोमवार तक यह फिर सामान्य से 1% नीचे आ गया।

    अब मानसून सीजन के करीब 15 दिन ही बाकी हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश यह तय करेगी कि प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य के कितने करीब पहुंचता है। फिलहाल पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों की कमी और आलीराजपुर जैसे जिलों में बेहद कम बारिश पूरे प्रदेश के औसत पर असर डाल रही है।

  • देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा

    देर रात तक घरों और पंडालों में पहुंचे गणपति जबलपुर से आई मीरानी के राजा की निकली भव्य यात्रा


    सतना । सतना में सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। सुबह से ही घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान श्री गणेश की स्थापना की तैयारियां चलती रहीं। रविवार को गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए बाजारों में दिनभर भीड़ रही। अलग अलग आकार और स्वरूप में तैयार गणेश प्रतिमाओं को श्रद्धालु अपने घरों प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक पंडालों तक लेकर पहुंचे। देर रात तक प्रतिमाओं को पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा।

    सिंधी कैंप स्थित मीरानी कॉलोनी में गणेशोत्सव को लेकर इस बार भी विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां स्थापित होने वाली प्रसिद्ध गणेश प्रतिमा मीरानी के राजा रविवार देर रात जबलपुर से सतना पहुंची। प्रतिमा के सतना पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। भक्तों ने ढोल नगाड़ों की धुन पर जयकारे लगाए और गणपति की अगवानी की। इसके बाद प्रतिमा को जुलूस के रूप में मीरानी कॉलोनी तक ले जाया गया। रास्ते में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सोमवार को शुभ मुहूर्त में विधि विधान के साथ मीरानी के राजा की स्थापना की गई।

    गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर शहर के अलग अलग हिस्सों में कई सार्वजनिक पंडाल तैयार किए गए हैं। रविवार देर रात तक इन पंडालों में सजावट का काम चलता रहा। कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां और विशेष सजावट की गई है। घरों में भी श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की स्थापना के लिए विशेष तैयारियां की हैं। गणपति स्थापना के साथ ही अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा और अलग अलग क्षेत्रों में गणपति बप्पा के जयकारों की गूंज सुनाई देगी।

    ज्योतिषाचार्य पं. प्रमोद मिश्रा के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग और चित्रा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस संयोग में भगवान गणेश की स्थापना और पूजन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह करीब 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। गणपति स्थापना और पूजन के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना गया है।

    गणेशोत्सव की शुरुआत के साथ ही सतना में धार्मिक उल्लास का माहौल बन गया है। बाजारों से लेकर कॉलोनियों और सार्वजनिक पंडालों तक हर जगह गणपति उत्सव की तैयारियां दिखाई दे रही हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना में जुटे हैं। अगले दस दिनों तक शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहने की उम्मीद है।

  • चित्रकूट में चाय दुकान पर अचानक भिड़े दो पक्ष पुरानी रंजिश में जमकर मारपीट और तोड़फोड़ CCTV में कैद हुई पूरी घटना

    चित्रकूट में चाय दुकान पर अचानक भिड़े दो पक्ष पुरानी रंजिश में जमकर मारपीट और तोड़फोड़ CCTV में कैद हुई पूरी घटना


    सतना । सतना जिले के चित्रकूट थाना क्षेत्र में रविवार देर शाम चाय की एक दुकान पर पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट के साथ दुकान में तोड़फोड़ शुरू हो गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें कुछ युवक दुकान के बाहर आपस में मारपीट करते और सामान में तोड़फोड़ करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

    घटना चित्रकूट के स्फटिक शिला मोड़ पर स्थित मनोहर चाय दुकान की बताई जा रही है। रविवार शाम कुछ युवक बोलेरो और ओमनी वैन से वहां पहुंचे थे। इसके बाद किसी बात को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने पर दुकान के बाहर रखा सामान तोड़ दिया गया। इस दौरान दुकान में मौजूद ब्रजनारेश सिंह ने युवकों को तोड़फोड़ करने से रोकने की कोशिश की। आरोप है कि उनके रोकने पर युवक और अधिक नाराज हो गए और उन्होंने ब्रजनारेश सिंह पर डंडे से हमला कर दिया।

    पिता पर हमला होते देख उनके बेटे अंकित सिंह ने बीच बचाव किया और उन्हें बचाने की कोशिश की। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। दुकान के आसपास मौजूद लोगों ने भी घटना देखी। कुछ देर तक चले विवाद के बाद मामला शांत हुआ लेकिन तब तक दुकान के बाहर रखा सामान क्षतिग्रस्त हो चुका था। घटना की सूचना पुलिस को दी गई जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

    मामले में दुकान संचालक अंकित सिंह की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। चित्रकूट थाना प्रभारी नीलेश तिवारी के मुताबिक विवाद के पीछे दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश की बात सामने आई है। शिकायत के आधार पर वरुण तिवारी और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब पूरे मामले की जानकारी जुटाने के साथ विवाद की वजह और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस की जांच को भी दिशा मिली है। फुटेज में कुछ युवक दुकान के बाहर मारपीट और तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं। पुलिस इसी फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों की पहचान फुटेज और जांच के आधार पर होगी उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने सोमवार सुबह मामले में दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    चाय दुकान पर हुए इस विवाद ने आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया। पुरानी रंजिश के चलते शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में मारपीट और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है और घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। दो आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी है।

  • जबलपुर में घर के अंदर सांप ने उड़ाई परिवार की नींद ढाई फीट लंबे बुल स्नेक को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा

    जबलपुर में घर के अंदर सांप ने उड़ाई परिवार की नींद ढाई फीट लंबे बुल स्नेक को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा


    जबलपुर। जबलपुर के गढ़ा बाजार इलाके में एक कच्चे मकान में पिछले तीन दिनों से सांप की मौजूदगी ने पूरे परिवार की चिंता बढ़ा दी थी। कभी वॉशरूम तो कभी रसोई और कभी बिस्तर पर दिखाई देने वाले सांप के कारण परिवार के लोग डर के माहौल में रहने को मजबूर थे। सांप करीब ढाई फीट लंबा था और उसका रंग बादामी बताया गया है। उसके शरीर पर पीले रंग की गोल धारियां दिखाई दे रही थीं। लगातार तीन दिन तक घर के अलग अलग हिस्सों में नजर आने के बाद परिवार ने आखिरकार सर्प और वन्य प्राणी विशेषज्ञ से मदद मांगी।

    मामला गढ़ा बाजार में पुराने स्टेट बैंक के पास जवाहर लाल सेन के घर का है। रविवार सुबह करीब 10 बजे जवाहर लाल सेन ने सर्प और वन्य प्राणी विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे को सांप के घर में छिपे होने की सूचना दी। जानकारी मिलते ही गजेंद्र दुबे मौके पर पहुंचे और काफी सावधानी के साथ सांप की तलाश शुरू की। कुछ देर की मशक्कत के बाद उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। सांप के पकड़े जाने के बाद परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली।

    सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे के मुताबिक पकड़ा गया सांप गनैता प्रजाति का है जिसे बुल स्नेक भी कहा जाता है। यह सांप जहरीला नहीं होता लेकिन इसका स्वभाव काफी गुस्सैल और आक्रामक माना जाता है। खतरा महसूस होने या छेड़छाड़ किए जाने पर यह पीछे हटने के बजाय हमला करने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि घर में सांप दिखाई देने के बाद परिवार के लोगों ने खुद उसे पकड़ने का प्रयास नहीं किया और विशेषज्ञ को बुलाकर सुरक्षित रेस्क्यू कराया।

    विशेषज्ञ के अनुसार इस सांप के करीब 50 दांत होते हैं। इसका भोजन मुख्य रूप से छिपकली चिड़िया के अंडे और चूहों के बच्चे होते हैं। भोजन की तलाश में ऐसे सांप कई बार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। खासकर मौसम में उमस बढ़ने के दौरान सांप ठंडी और सुरक्षित जगहों की तलाश करते हैं। इसी वजह से वे ईंट गिट्टी कचरे के ढेर और घर के आसपास मौजूद अंधेरी जगहों में छिप सकते हैं।

    सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद उसे उसके प्राकृतिक वातावरण यानी जंगल में छोड़ दिया गया। विशेषज्ञ ने लोगों से अपील की कि घर के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें। ईंट गिट्टी और कचरे के ढेर को लंबे समय तक जमा करके न रखें क्योंकि ऐसी जगहें सांपों के छिपने का ठिकाना बन सकती हैं। घर की नालियों में फिनाइल डालने के साथ दीवारों में मौजूद दरारों को भी बंद करने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांप को छेड़ने से वह आक्रामक हो सकता है और ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। बेहतर है कि सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए तुरंत प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ या संबंधित विभाग को सूचना दी जाए। गढ़ा में तीन दिन तक परिवार के लिए परेशानी बने सांप के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद अब घरवालों ने राहत की सांस ली है।

  • जबलपुर में साहित्य संवाद में भाषा और समाज के बदलते रिश्तों पर मंथन महाभोज और राग दरबारी के किरदारों ने खींचा ध्यान

    जबलपुर में साहित्य संवाद में भाषा और समाज के बदलते रिश्तों पर मंथन महाभोज और राग दरबारी के किरदारों ने खींचा ध्यान


    जबलपुर । जबलपुर में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित साहित्य संवाद में भाषा और समाज के बदलते रिश्तों पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम में साहित्यकारों और इतिहासकारों ने इस बात पर विचार रखा कि समय के साथ समाज की सोच उसकी परिस्थितियां और जीवनशैली बदलती रहती है और इन बदलावों का सीधा असर भाषा और साहित्य पर भी दिखाई देता है। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि वह अपने समय के समाज की तस्वीर भी सामने रखता है। किसी दौर को समझने के लिए उस दौर में लिखे गए साहित्य को पढ़ना बेहद जरूरी है।

    संवाद के दौरान हिंदी साहित्य की चर्चित रचनाओं और उनके यादगार किरदारों को भी चर्चा के केंद्र में रखा गया। मन्नू भंडारी के उपन्यास महाभोज के दा साहब और श्रीलाल शुक्ल के राग दरबारी के रूपन बाबू जैसे पात्रों का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने बताया कि साहित्य में गढ़े गए किरदार केवल कहानी का हिस्सा नहीं होते बल्कि वे अपने समय की सामाजिक व्यवस्था राजनीतिक परिस्थितियों और लोगों की मानसिकता को भी सामने लाते हैं। इन पात्रों के जरिए उस दौर के समाज में मौजूद जटिलताओं और बदलावों को समझने का अवसर मिलता है।

    कार्यक्रम में साहित्य और लेखन के लिए पढ़ने की आदत को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। साहित्यकारों ने कहा कि बेहतर लेखन केवल शब्दों को जोड़ने से नहीं आता बल्कि इसके लिए लगातार पढ़ना और अलग अलग विषयों को समझना जरूरी है। किताबें व्यक्ति को नई जानकारी देने के साथ उसके विचारों को विस्तार देती हैं। पढ़ने से भाषा समृद्ध होती है और किसी विषय को देखने का नजरिया भी व्यापक होता है। यही कारण है कि पुराने साहित्य और क्लासिक किताबों की उपयोगिता आज के दौर में भी बनी हुई है।

    वक्ताओं ने मौजूदा दौर में सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने माना कि इन माध्यमों ने कहानी और घटनाओं को देखने और समझने का तरीका काफी बदल दिया है। विजुअल माध्यम किसी घटना या कहानी को तुरंत सामने ला सकते हैं लेकिन किताबें पाठक को उसके भीतर उतरकर सोचने और परिस्थितियों को अलग नजरिए से समझने का अवसर देती हैं। साहित्य के माध्यम से समाज की बारीकियों को जिस गहराई से महसूस किया जा सकता है वह केवल दृश्य माध्यमों से हमेशा संभव नहीं होता।

    साहित्य संवाद में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। युवाओं ने साहित्यकारों और इतिहासकारों के साथ हिंदी साहित्य की किताबों कहानियों और चर्चित पात्रों को लेकर बातचीत की। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि पुराने साहित्य में दिखाई देने वाला समाज आज के दौर से किस तरह अलग है और किन परिस्थितियों में बदलाव आया है। संवाद के दौरान साहित्य को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने पर भी विचार हुआ।

    वक्ताओं ने कहा कि समय बदलने के बावजूद अच्छा साहित्य अपनी प्रासंगिकता नहीं खोता। कई दशक पहले लिखी गई किताबें आज भी पाठकों को प्रभावित करती हैं क्योंकि उनमें समाज और मनुष्य के व्यवहार से जुड़े ऐसे सवाल मौजूद होते हैं जो समय के साथ खत्म नहीं होते। साहित्य पुरानी पीढ़ियों के अनुभवों से जोड़ने के साथ वर्तमान को समझने की दृष्टि भी देता है। इसलिए भाषा और साहित्य को मजबूत बनाए रखने के लिए पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी है।

  • कई महीनों से पेट दर्द और उल्टी से परेशान थी किशोरी जांच में सामने आया बालों का बड़ा गुच्छा

    कई महीनों से पेट दर्द और उल्टी से परेशान थी किशोरी जांच में सामने आया बालों का बड़ा गुच्छा


    शिवपुरी । शिवपुरी के श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने 14 वर्षीय किशोरी का जटिल ऑपरेशन कर उसके पेट से बालों का बड़ा गुच्छा निकाला है। करीब 16×14 सेंटीमीटर आकार का यह बालों का गुच्छा पेट के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। करीब तीन घंटे तक चली ओपन सर्जरी के बाद किशोरी की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

    किशोरी को पिछले कई महीनों से लगातार पेट दर्द की शिकायत थी। इसके साथ ही उसे उल्टी होती थी और पेट भरा हुआ महसूस होता था। भूख भी काफी कम लग रही थी। लगातार बनी इन परेशानियों के बाद उसे 11 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। जांच के दौरान उसका हीमोग्लोबिन स्तर सिर्फ 7.8 ग्राम पाया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए उसे दो यूनिट खून चढ़ाया।

    इसके बाद किशोरी का सीटी स्कैन कराया गया। जांच में पेट के भीतर बड़े आकार का बालों का गुच्छा दिखाई दिया। साथ ही आंत में छेद होने की आशंका भी सामने आई। मरीज की स्थिति और पेट में मौजूद गुच्छे के आकार को देखते हुए डॉक्टरों ने सामान्य प्रक्रिया के बजाय ओपन सर्जरी करने का फैसला लिया।

    अधिष्ठाता डॉ. ईला गुजारिया के मार्गदर्शन और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत राखोंडे के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया। प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया के साथ पीजी डॉक्टर डॉ. महेश पाटीदार ने सर्जरी में हिस्सा लिया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता की देखरेख में करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन चला।

    डॉक्टरों के मुताबिक पेट में मौजूद बालों का गुच्छा इतना बड़ा हो चुका था कि उसे सामान्य एंडोस्कोपी के जरिए पूरी तरह निकालना मुश्किल था। इसी वजह से पेट खोलकर सर्जरी की गई और बालों के पूरे गुच्छे को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद किशोरी की हालत स्थिर है और डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।

    प्रोफेसर डॉ. सौरभ चौहान ने बताया कि बाल आसानी से पचते नहीं हैं। लंबे समय तक बाल निगलने पर वे पेट में जमा होते रहते हैं और धीरे धीरे एक ठोस गुच्छे का रूप ले लेते हैं। इसी स्थिति को ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है। इस किशोरी के मामले में भी पेट के भीतर लंबे समय तक बाल जमा होने के कारण बड़ा गुच्छा बन गया था।

    असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र सिंह नरवरिया के मुताबिक ऐसी स्थिति कई बार ट्राइकोटिलोमेनिया यानी बाल तोड़ने की आदत और ट्राइकोफेजिया यानी बाल खाने या निगलने की आदत से जुड़ी हो सकती है। मानसिक तनाव और चिंता भी इसके पीछे एक कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों में केवल सर्जरी ही पर्याप्त नहीं मानी जाती बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीज की निगरानी और जरूरत के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी महत्वपूर्ण होता है।

    यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि बच्चों और किशोरों में लंबे समय तक बने रहने वाले पेट दर्द उल्टी भूख कम लगना या पेट भरा रहने जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच होने से गंभीर स्थिति का पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।

  • बिजली के तार ने छीन ली 17 साल के सौरभ की जिंदगी हादसे के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

    बिजली के तार ने छीन ली 17 साल के सौरभ की जिंदगी हादसे के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी में कबाड़ा उठाने गए 17 वर्षीय नाबालिग की करंट लगने से मौत हो गई। गंभीर रूप से झुलसने के बाद सौरभ शाक्य का ग्वालियर में कई दिनों तक इलाज चला लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। हादसे में सौरभ का शरीर करीब 70 प्रतिशत झुलस गया था। सोमवार को ग्वालियर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब शिवपुरी कोतवाली पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी।

    जानकारी के मुताबिक यह हादसा 6 जुलाई को शिवपुरी की हनुमान कॉलोनी में हुआ था। सौरभ अपने दोस्त सुमित शाक्य के साथ हाथ ठेला लेकर कबाड़ा खरीदने निकला था। दोनों एक मकान पर पहुंचे थे। वहां मौजूद महिला ने सौरभ से पहली मंजिल की छत पर रखा कबाड़ा नीचे लाने के लिए कहा। सौरभ कबाड़ा लेने के लिए ऊपर पहुंचा तो वहां मौजूद बिजली के तार की चपेट में आ गया।

    करंट लगते ही सौरभ के शरीर में आग लग गई। बिजली का झटका इतना तेज था कि वह पहली मंजिल से नीचे गिर गया। हादसे के बाद उसका दोस्त सुमित उसे हाथ ठेले पर लेकर सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसी दिन सौरभ को ग्वालियर रेफर कर दिया गया था। ग्वालियर में कई दिनों तक उसका इलाज चला लेकिन आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

    सौरभ की बहन काजल शाक्य ने बताया कि हादसे के बाद जब परिवार के लोग संबंधित मकान पर पहुंचे तो वहां मौजूद महिला ने मदद करने के बजाय परिवार पर चोरी का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली थाने का रुख किया था। परिजनों ने पुलिस पर सुनवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया था।

    सौरभ के परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार फिजिकल थाना क्षेत्र में कोलियों के मंदिर के पास किराए के मकान में रहता है। परिवार के तीन भाई मेहनत मजदूरी करके घर का खर्च चलाते थे। सौरभ भी कबाड़ा उठाने और बेचने का काम करता था।

    अब सौरभ की मौत के बाद परिवार हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। परिजन चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और यह सामने आए कि आखिर बिजली के तार की चपेट में आने से नाबालिग की जान कैसे गई। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।

  • शिवपुरी में शराब दुकान बंद कराने निकले ग्रामीण पुलिस ने रोका तो सड़क पर बैठकर किया चक्काजाम

    शिवपुरी में शराब दुकान बंद कराने निकले ग्रामीण पुलिस ने रोका तो सड़क पर बैठकर किया चक्काजाम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के नावली गांव में सरकारी शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन रविवार शाम उस समय सड़क पर पहुंच गया जब पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। शराब दुकान बंद कराने के लिए गांव से निकले पुरुषों और महिलाओं को पुलिस ने नावली मोड़ के पास रोक दिया। इससे नाराज ग्रामीण सड़क पर ही बैठ गए और खोड़ सिरसौद मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब एक घंटे तक सड़क पर आवागमन प्रभावित रहा। बाद में पुलिस की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और वापस गांव लौट गए।

    जानकारी के मुताबिक नावली गांव के कुछ ग्रामीण गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर सिरसौद थाना क्षेत्र में संचालित सरकारी शराब दुकान को बंद कराने की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर रविवार शाम ग्रामीण प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। ग्रामीणों के प्रदर्शन की जानकारी पुलिस को मिली तो खोड़ चौकी प्रभारी संजय लोधी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए।

    पुलिस ने ग्रामीणों को नावली मोड़ के पास मंदिर के सामने रोक लिया। ग्रामीण शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर आगे जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया। इससे ग्रामीण नाराज हो गए और उन्होंने सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते खोड़ सिरसौद मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रुक गई और चक्काजाम की स्थिति बन गई।

    पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि गांव के पास संचालित शराब दुकान को बंद किया जाना चाहिए। ग्रामीणों के सड़क पर बैठने से करीब एक घंटे तक मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही और स्थिति को नियंत्रित करने के साथ ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करती रही।

    करीब एक घंटे बाद खोड़ चौकी प्रभारी संजय लोधी ने ग्रामीणों को शराब दुकान से जुड़े नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संबंधित शराब दुकान सरकारी है और नियमों के तहत उसका स्थान बदला जा सकता है। पुलिस ने ग्रामीणों को इस प्रक्रिया और संबंधित प्रावधानों के बारे में समझाया। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस की बात मान ली और सड़क से हट गए।

    ग्रामीणों के सड़क से हटने के बाद खोड़ सिरसौद मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण अपने गांव वापस लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम में किसी बड़े विवाद या अप्रिय स्थिति की जानकारी सामने नहीं आई। पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया।

    शराब दुकान के खिलाफ ग्रामीणों का यह विरोध स्थानीय स्तर पर शराब बिक्री को लेकर लोगों की नाराजगी को भी सामने लाता है। ग्रामीणों ने दुकान बंद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था लेकिन पुलिस ने उन्हें नियमों की जानकारी देकर शांत कराया। फिलहाल दुकान को बंद करने के बजाय उसके स्थानांतरण की संभावना को लेकर नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया की बात सामने आई है।

  • लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर

    लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शुरू हुई इस योजना में जहां शुरुआत में बड़ी संख्या में महिलाओं को शामिल किया गया था वहीं अब पात्रता की शर्तों और अन्य कारणों के चलते हजारों महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच करीब 21 हजार 150 महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके साथ ही योजना शुरू होने के बाद तीन साल में करीब 6 लाख 26 हजार महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं।

    विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को लाड़ली बहना योजना में 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं पात्र हितग्राही थीं। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 रह गई। यानी करीब आठ महीने की अवधि में ही 21 हजार से ज्यादा नाम कम हो गए। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में एक तरफ नए हितग्राही नहीं जुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ पात्रता पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।

    योजना की शुरुआत में अक्टूबर 2023 में करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 महिलाएं योजना में शामिल थीं। इसके बाद आपत्तियों और पात्रता की जांच के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद पात्र हितग्राहियों की संख्या करीब 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ यह संख्या और कम होती चली गई।

    अधिकारियों के मुताबिक लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए अधिकतम उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो जाती है उनके नाम योजना की सूची से हटा दिए जाते हैं। इसके अलावा किसी हितग्राही की मृत्यु होने या अन्य पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में भी नाम बाहर किया जाता है। इसी वजह से योजना के आंकड़ों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

    दूसरी ओर नए नाम नहीं जुड़ने के कारण योजना में शामिल महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता के साथ हुई थी। सरकार ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। शुरुआत के करीब चार महीने बाद मासिक राशि बढ़ाकर 1250 रुपए कर दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से इसमें 250 रुपए की और बढ़ोतरी की गई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    विभाग की ओर से पात्रता के आधार पर हितग्राहियों की समीक्षा लगातार जारी है। ऐसे में दिसंबर 2026 के अंत तक योजना में शामिल महिलाओं की संख्या और घट सकती है। खासकर उम्र की सीमा पूरी करने वाली महिलाओं और अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से मौजूदा संख्या में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

  • भोपाल में आधी रात सड़क पर हंगामा वकील की कार के आगे थार लगाकर की अभद्रता

    भोपाल में आधी रात सड़क पर हंगामा वकील की कार के आगे थार लगाकर की अभद्रता


    भोपाल।  भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में रविवार रात रैश ड्राइविंग को लेकर हुआ विवाद उस समय गंभीर हो गया जब थार सवार युवकों ने एक वकील की कार रोककर उसके साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। घटना दाता कॉलोनी के पास रात करीब 11:45 बजे की बताई जा रही है। एडवोकेट शादाब खान का आरोप है कि थार सवार करीब 7 से 8 युवकों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी खड़ी कर रास्ता रोक दिया। इसके बाद युवकों ने उन्हें और उनके भाइयों को घेर लिया और विवाद करने लगे।

    शादाब खान के मुताबिक 13 सितंबर की रात वे अपने भाइयों के साथ ढाबे पर खाना खाने के बाद कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें कुछ युवक थार से तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए नजर आए। उन्होंने युवकों को रैश ड्राइविंग नहीं करने की समझाइश दी। आरोप है कि उनकी यह बात युवकों को नागवार गुजरी और उन्होंने दाता कॉलोनी के पास आगे जाकर उनकी कार रोक ली।

    वकील का कहना है कि थार सवार युवकों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी लगा दी जिसके बाद करीब 7 से 8 युवक कार को घेरकर खड़े हो गए। उन्होंने शादाब और उनके भाइयों के साथ कथित तौर पर अभद्रता शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर कुछ युवक बेसबॉल बैट लेकर भी पहुंचे। शादाब ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसी बीच दूसरे वाहन से पहुंचे एक व्यक्ति पर पिस्टल दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

    घटना के दौरान शादाब खान ने अपने मोबाइल फोन से पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। विवाद के बाद वे कोहेफिजा थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। हालांकि पुलिस के मुताबिक सामने आए वीडियो में किसी युवक के हाथ में पिस्टल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में पुलिस वीडियो फुटेज और दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के कुछ समय बाद दूसरा पक्ष भी कोहेफिजा थाने पहुंचा। दूसरे पक्ष की ओर से भी शादाब खान और उनके साथियों के खिलाफ अभद्रता और धमकी देने के आरोप लगाए गए। इस तरह मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पुलिस के सामने आई है।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत प्राप्त कर ली है लेकिन फिलहाल किसी भी पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर रही है। जांच के बाद आरोपों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इस घटना ने भोपाल में सड़क पर मामूली विवाद के बढ़कर गंभीर स्थिति तक पहुंचने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैश ड्राइविंग को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते कार रोकने और धमकी देने तक पहुंच गया।