Category: Madhya Pradesh

  • देवास में हाई-ड्रामा: शराब तस्करों का 3 किमी तक पीछा, कार डिवाइडर से टकराई; 44 पेटी शराब जब्त

    देवास में हाई-ड्रामा: शराब तस्करों का 3 किमी तक पीछा, कार डिवाइडर से टकराई; 44 पेटी शराब जब्त


    देवास। देवास जिले में मंगलवार को आबकारी विभाग ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और 44 पेटी शराब जब्त की। जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 67 हजार रुपये बताई जा रही है। यह शराब इंदौर से देवास जिले में अवैध रूप से सप्लाई की जा रही थी। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके में घेराबंदी की और संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया।

    10-15 मिनट तक 3 किलोमीटर तक चला पीछा 
    जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग को सूचना मिली थी कि इंदौर से एक कार में अवैध शराब देवास की ओर लाई जा रही है। इसके बाद तीन से चार टीमों ने रसलपुर टोल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी शुरू की।

    शिप्रा क्षेत्र के पास संदिग्ध कार दिखाई देते ही टीम ने पीछा शुरू कर दिया। करीब 10 से 15 मिनट तक लगभग 3 किलोमीटर तक पीछा चलता रहा, इस दौरान वाहन चालक ने कई बार दिशा बदलकर भागने की कोशिश की।

    भागने के प्रयास में डिवाइडर से टकराई कार
    टोल से पहले रोकने की कोशिश के दौरान आरोपी चालक ने अचानक यू-टर्न लेकर वाहन वापस इंदौर की ओर मोड़ दिया। इसी दौरान पीछा कर रही टीम लगातार उसके पीछे लगी रही।

    भागने के प्रयास में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि कार के दरवाजे भी नहीं खुल पाए, जिससे आरोपी अंदर ही फंस गए। इसी दौरान एक आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। पीछा करने के दौरान आबकारी विभाग की एक गाड़ी को भी हल्की क्षति पहुंची।

    तीन आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
    आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक प्रेम यादव ने बताया कि कार्रवाई में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और कार के साथ 44 पेटी शराब जब्त की गई है। वाहन की कीमत भी लगभग 2 से 3 लाख रुपये आंकी गई है फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है कि यह शराब किसे सप्लाई की जानी थी और इस पूरे तस्करी नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं। विभाग को उम्मीद है कि पूछताछ में बड़े खुलासे हो सकते हैं।

  • शाजापुर में शादी के नाम पर ठगी: लुटेरी दुल्हन गैंग ने लाखों रुपए ऐंठे, शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू

    शाजापुर में शादी के नाम पर ठगी: लुटेरी दुल्हन गैंग ने लाखों रुपए ऐंठे, शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू


    शाजापुर । शाजापुर जिले में शादी के नाम पर ठगी करने वाले कथित ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह का मामला सामने आया है। पनवाड़ी गांव के दो अलग-अलग परिवारों ने आरोप लगाया है कि दलालों और महिलाओं के एक संगठित गिरोह ने उनसे करीब साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी की है। शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों दुल्हनें घर छोड़कर फरार हो गईं और अब तक वापस नहीं लौटीं। पीड़ित परिवारों ने 21 मई को सुनेरा थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, हालांकि आरोप है कि शिकायत के कई दिन बाद भी पुलिस स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    पहला मामला: 15 दिन बाद ‘दादी की तबीयत’ का बहाना बनाकर फरार
    पहले मामले में पनवाड़ी निवासी निर्भय सिंह ने बताया कि उनके बेटे धर्मेंद्र की शादी कराने के लिए दलाल नारायण पांडा, बाबू और सुखराम ने झाबुआ निवासी ज्योति से संपर्क कराया था। शादी तय कराने के एवज में करीब दो लाख रुपये लिए गए।

    परिवार का कहना है कि 19 नवंबर 2025 को विवाह से जुड़े दस्तावेज भी तैयार किए गए थे। शादी के बाद ज्योति मात्र 15 दिन तक ही घर में रही और फिर ‘दादी की तबीयत खराब’ होने का बहाना बनाकर घर से चली गई, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटी।

    दूसरा मामला: तीन लाख लेकर शादी, फिर मोबाइल और जेवर लेकर फरार
    दूसरे मामले में अर्जुन नामक युवक ने आरोप लगाया है कि उसकी शादी रानू बाई मिश्रा से कराने के नाम पर करीब तीन लाख रुपये वसूले गए। आरोप है कि दलालों ने खुद को लड़की का रिश्तेदार बताकर विवाह संपन्न कराया। अर्जुन के अनुसार, शादी के लगभग 15 दिन बाद रानू बाई इंदौर जाने की बात कहकर घर से निकली और फिर वापस नहीं लौटी। वह अपने साथ मोबाइल फोन और चांदी की पायजेब भी ले गई। पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।

    दलालों का संगठित नेटवर्क, मुख्य आरोपी पर आरोप
    शिकायत में बताया गया है कि इस पूरे मामले में दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय है। इसमें नारायण पांडा (शाजापुर), बाबू (तराना, उज्जैन) और सुखराम (धार) शामिल हैं। सुखराम को इस गिरोह का मुख्य दलाल बताया जा रहा है, जो लड़कियों से संपर्क कर शादी तय कराने का काम करता है और पैसों का लेन-देन भी संभालता है। पीड़ित परिवारों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ठगी की राशि वापस दिलाने की मांग की है।

    पुलिस जांच जारी
    सुनेरा थाना प्रभारी अंकित मुकाती ने बताया कि शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं और मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

  • शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत

    शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत


    शाजापुर। शाजापुर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान पोलायखुर्द गांव के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के मामले को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी कलेक्टर की वाहन पार्किंग के पास पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठकर विरोध जताने लगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के खिलाफ भी नारे लगाए, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति
    घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर उस समय जनसुनवाई कक्ष में मौजूद थीं। सुंदरसी थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी और स्थिति को नियंत्रित किया। लंबी समझाइश के बाद ग्रामीणों ने शांत रुख अपनाया और अपने पांच प्रतिनिधियों को कलेक्टर से बातचीत के लिए भेजा गया।

    कलेक्टर के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
    प्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर से मुलाकात के दौरान उन्हें मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और स्थिति सामान्य हो गई।

    शासकीय भूमि पर कब्जे और फर्जी नामांतरण का आरोप
    ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ग्राम पोलायखुर्द स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 1396 (रकबा 2.045 हेक्टेयर) पर कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नामांतरण कर लिया है।

    ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर गांव का प्राचीन मंदिर और बच्चों का श्मशान स्थल स्थित है, जिससे यह जमीन सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ग्राम पंचायत द्वारा अनुसूचित जाति समाज के लिए मांगलिक भवन निर्माण का प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है।

    जातिसूचक गाली और धमकी देने का भी आरोप
    प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर संबंधित लोगों द्वारा उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि फर्जी नामांतरण को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अवैध कब्जे का मामला दर्ज किया जाए।

  • सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ा फैसला: शाजापुर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा दी

    सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ा फैसला: शाजापुर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा दी


    शाजापुर । शाजापुर जिले की न्यायालय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट डालने के मामले में आरोपी मोहसिन (पिता मुबारिक, निवासी ज्योति नगर, शाजापुर) को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। आरोपी ने फेसबुक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट साझा की थी, जिसे राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने वाला माना गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, शाजापुर ने मंगलवार दोपहर सुनवाई के बाद आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया और सजा का आदेश दिया।

    धाराओं के तहत अलग-अलग सजा और जुर्माना
    कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 153-बी के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा 505(1)(बी) के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67-ए के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

    2019 में दर्ज हुई थी शिकायत
    जिला मीडिया सेल प्रभारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि यह मामला 16 फरवरी 2019 का है। उस समय फरियादी रोहित राठौर ने थाना कोतवाली शाजापुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि ‘मोहसिन लाला’ नाम की फेसबुक आईडी से यह विवादित पोस्ट डाली गई थी। फरियादी ने पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपा था, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई।

    राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने का आरोप
    शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस तरह की पोस्ट से लोगों की राष्ट्रीय भावनाएं आहत हुईं और समाज में तनाव की स्थिति पैदा होने की आशंका थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर इसे न्यायालय में प्रस्तुत किया था।

    कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
    न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी प्रतीक श्रीवास्तव और तुलसी मानकर द्वारा की गई। यह फैसला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • कब्जा हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव: सरपंच प्रतिनिधि को धमकी, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू

    कब्जा हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव: सरपंच प्रतिनिधि को धमकी, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू


    शाजापुर । शाजापुर जिले के हिरपुर भज्जा भरड़ क्षेत्र में शासकीय जमीन से अवैध कब्जा हटाने को लेकर दो पक्षों के बीच गंभीर विवाद हो गया। सोमवार रात हुए इस घटनाक्रम का वीडियो मंगलवार को सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। विवाद के बाद सरपंच प्रतिनिधि सवाई सिंह ने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घर के सामने पहुंचकर गाली-गलौज और हंगामे का आरोप
    फरियादी सवाई सिंह (49), पिता हीरालाल, निवासी हिरपुर भज्जा भरड़ ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 25 मई 2026 की रात करीब 10 बजे लखन अहिरवार, उनकी मां रामकुंवर बाई और पत्नी उनके घर के सामने पहुंचे। आरोप है कि तीनों शासकीय जमीन से गुमटी हटाने के मुद्दे को लेकर हंगामा करने लगे और जोर-जोर से गाली-गलौज की।
    सवाई सिंह के अनुसार, उस समय वह अपने साथी जगदीश सोलिया के साथ गांव से घर लौटे थे। उन्होंने जब गाली-गलौज का विरोध किया, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें भी अपशब्द कहे और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    जान से मारने की धमकी देने का आरोप
    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने सरपंच प्रतिनिधि को झूठे केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने विवाद को देखा और स्थिति को शांत करने की कोशिश की।

    मौके पर मौजूद लोगों ने देखा पूरा घटनाक्रम
    घटना के दौरान ब्रम्हानंद गोवा, शुभम (भवानी सिंह के पुत्र) और जगदीश सोलिया मौके पर मौजूद थे। इन गवाहों की मौजूदगी में पूरा विवाद हुआ। बताया जा रहा है कि इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामा साफ दिखाई दे रहा है।

    पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू
    कोतवाली पुलिस ने सवाई सिंह की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, शासकीय जमीन से कब्जा हटाने को लेकर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी, जो अब खुले विवाद में बदल गई।

  • झाबुआ जनसुनवाई में अनोखा मामला: ‘मृत’ घोषित दिव्यांग पहुंचा प्रशासन के सामने, सिस्टम पर उठे सवाल

    झाबुआ जनसुनवाई में अनोखा मामला: ‘मृत’ घोषित दिव्यांग पहुंचा प्रशासन के सामने, सिस्टम पर उठे सवाल


    झाबुआ । झाबुआ जिले में प्रशासनिक लापरवाही और निजी बस संचालकों की कथित अमानवीयता का गंभीर मामला सामने आया है। आजाद विकलांग कल्याण समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की है। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक दिव्यांग व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह स्वयं जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पीड़ा रखता दिखा।

    ग्राम पंचायत मदरानी के बादरसिंह मुणिया, जो 98 प्रतिशत दिव्यांग हैं, और उनकी 85 प्रतिशत दिव्यांग पत्नी को पिछले दो वर्षों से सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया है। इस गंभीर त्रुटि के कारण दोनों की पेंशन, राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो गया है।

    आधार और योजनाओं से वंचित परिवार, पेंशन और आवास भी अटके
    इसी तरह कंजावानी निवासी गवरसिंह सोलंकी का परिवार भी लंबे समय से खाद्यान्न सहायता से वंचित है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली किस्तें भी रोक दी गई हैं। नौगावा की 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित सवली बेन और नयागांव की सबिस्ता कालिया कटारा के आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं, जिसके चलते वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन मामलों ने प्रशासनिक प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर किया है, जहां वास्तविक पात्र लोग योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।

    व्हीलचेयर परिवहन में भी बाधा, बस स्टाफ पर आरोप
    आजाद विकलांग कल्याण समिति के अध्यक्ष कमलेश राठौर ने बताया कि हाल ही में समिति ने झाबुआ और अलीराजपुर के पांच दिव्यांगजनों को निःशुल्क इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर उपलब्ध करवाई थीं। इन्हें भोपाल से झाबुआ लाया जाना था, लेकिन यहां भी दिव्यांगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

    आरोप है कि पहले से सहमति होने के बावजूद भाबर बस के कंडक्टर ने अंतिम समय पर व्हीलचेयर बस में चढ़ाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, बस स्टाफ ने बस में रखी दो व्हीलचेयर भी जबरन उतरवा दीं। समिति द्वारा दोगुना किराया देने की पेशकश के बावजूद बस कर्मियों ने बात नहीं मानी और दिव्यांगों को आधी रात को भोपाल बस स्टैंड पर छोड़ दिया।

    टेम्पो से मंगानी पड़ी व्हीलचेयर, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
    स्थिति इतनी खराब हो गई कि समिति को 12 हजार रुपये खर्च कर लोडिंग टेम्पो के माध्यम से व्हीलचेयर झाबुआ मंगवानी पड़ी। इस घटना के बाद दिव्यांगजनों और समिति ने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधार की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता की कमी को भी सामने लाते हैं।

  • पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

    पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता


    झाबुआ  झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम हिरानिनामापाड़ा में एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां बुजुर्ग दंपति ने अपने ही बेटों और बहुओं पर लगातार प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित दंपति रतनीबाई और उनके पति नाकु डांगी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।

    जमीन बांटने के बाद भी नहीं थमी प्रताड़ना
    पीड़ित दंपति ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमीन-जायदाद पहले ही अपने तीनों बेटों-धनसिंग, डूंगरसिंग और एक अन्य पुत्र के बीच बांट दी थी। इसके बावजूद उनके पास बची हुई मात्र एक बीघा जमीन से ही वे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन अब आरोप है कि बेटों और बहुओं द्वारा लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

    शराब के नशे में मारपीट और गंभीर चोट का आरोप
    दंपति के अनुसार, बीते रविवार और 23 मई को बेटों और उनकी पत्नियों ने शराब के नशे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। नाकु डांगी ने आरोप लगाया कि उन्हें पत्थर मारकर घायल किया गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है। वहीं, रतनीबाई ने बताया कि आरोपियों ने उनका मकान तोड़ दिया, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में खुले बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

    धमकी देकर कहा-‘पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती’
    पीड़ित दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो बेटों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कहा कि अब जमीन और मकान उनके कब्जे में हैं तथा पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। दंपति ने यह भी बताया कि जब वे रायपुरिया थाने में शिकायत करने पहुंचे तो आरोपी मोटरसाइकिल से उनका पीछा करते हुए वहां तक पहुंच गए, जिससे वे बेहद भयभीत हो गए।

    एसपी से सख्त कार्रवाई की मांग
    लगातार प्रताड़ना और जान के खतरे से परेशान बुजुर्ग दंपति ने पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार से निवेदन किया है कि उनके बेटों और बहुओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे अपने शेष जीवन को भयमुक्त होकर जी सकें।

    यह मामला न केवल पारिवारिक टूटन की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है, बल्कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • सड़क सुरक्षा पर सख्ती: बसों में सुरक्षा उपकरणों की जांच, नियम तोड़ने पर 8 वाहन चालकों पर कार्रवाई

    सड़क सुरक्षा पर सख्ती: बसों में सुरक्षा उपकरणों की जांच, नियम तोड़ने पर 8 वाहन चालकों पर कार्रवाई


    झाबुआ  झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र में यातायात पुलिस ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर सघन चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य शहर में यातायात व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाना और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करना रहा। अभियान के दौरान पुलिस टीम ने बस स्टैंड, शंकर मंदिर क्षेत्र सहित कई प्रमुख स्थानों पर सघन जांच की और वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक भी किया।

    बसों में सुरक्षा उपकरणों की हुई बारीकी से जांच
    अभियान के तहत सबसे पहले यात्री बसों की जांच की गई। यातायात प्रभारी विवेक शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बस स्टैंड पर खड़ी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र और आपातकालीन द्वार की उपलब्धता को गंभीरता से परखा। इस दौरान अधिकांश बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद पाए गए, जिससे यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत मिले। पुलिस ने बस चालकों और परिचालकों को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    दोपहिया वाहनों पर नाकाबंदी, दस्तावेजों की गहन जांच
    बस स्टैंड के बाद पुलिस टीम ने शंकर मंदिर क्षेत्र में नाकाबंदी कर दोपहिया वाहनों की जांच शुरू की। इस दौरान वाहन चालकों के दस्तावेज, हेलमेट और अन्य अनिवार्य कागजात की बारीकी से जांच की गई। पुलिस जवान विकास यादव और राहुल वसुनिया भी अभियान में शामिल रहे। कई वाहन चालकों को हेलमेट और दस्तावेजों के बिना वाहन चलाते हुए पाया गया, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई।

    8 वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई, 2400 रुपये जुर्माना
    यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 8 दोपहिया वाहन चालकों पर पुलिस ने चालानी कार्रवाई की। इनसे कुल 2400 रुपये का जुर्माना वसूला गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि लोग यातायात नियमों के प्रति अधिक गंभीर हों और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

    अभियान आगे भी जारी रहेगा
    यातायात प्रभारी विवेक शर्मा ने बताया कि यह अभियान एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी वाहन चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

    स्थानीय लोगों ने भी इस अभियान का समर्थन किया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

  • नलों से नहीं टपकी एक बूंद: भीषण गर्मी में राजस्थान के कुएं पर निर्भर MP का गांव, पानी के लिए रोज जंग

    नलों से नहीं टपकी एक बूंद: भीषण गर्मी में राजस्थान के कुएं पर निर्भर MP का गांव, पानी के लिए रोज जंग


    राजगढ़  मध्यप्रदेश सरकार की “हर घर नल से जल” योजना के दावों के बीच राजगढ़ जिले का फतेहपुर गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे सिर पर मटके और बैलगाड़ियों में ड्रम रखकर राजस्थान सीमा तक पानी लेने जाने को मजबूर हैं। गांव में नल लगे हैं, पाइपलाइन भी बिछाई गई है, लेकिन दो साल बाद भी नलों में एक बूंद पानी नहीं पहुंची।

    राजगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित फतेहपुर गांव ग्राम पंचायत बावड़ीखेड़ा के अंतर्गत आता है। करीब 200 आबादी वाले इस गांव में पानी का संकट इतना गहरा चुका है कि लोगों का बड़ा हिस्सा रोजाना पानी जुटाने में ही निकल जाता है। गांव के तीनों हैंडपंप बंद पड़े हैं, जबकि गांव का कुआं भी पीने योग्य नहीं बचा। ऐसे में ग्रामीणों का एकमात्र सहारा राजस्थान के झालावाड़ जिले की सीमा पर स्थित कुआं है।

    गांव के गजराज सिंह गुर्जर बैलगाड़ी में खाली ड्रम लेकर राजस्थान की ओर जाते दिखाई देते हैं। वे बताते हैं कि गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है। महिलाएं सिर पर मटके रखकर कई चक्कर लगाती हैं, जबकि बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि सुबह की शुरुआत पानी भरने से होती है और उसके बाद ही खेत या मजदूरी पर जा पाते हैं। कई बार दिन में दो-दो बार पानी लाने जाना पड़ता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह संघर्ष रोज का हिस्सा बन चुका है।

    पाइपलाइन बिछी, लेकिन पानी नहीं आया
    ग्रामीण कालू सिंह गांव में जमीन से बाहर निकली पाइपलाइन दिखाते हुए कहते हैं कि दो साल पहले नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन डाली गई थी और घरों के बाहर नल लगाए गए थे। लोगों को उम्मीद थी कि अब पानी की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन आज तक पाइपलाइन पूरी तरह जोड़ी ही नहीं गई।

    गांव में जगह-जगह टूटी और बाहर निकली पाइपलाइनें सरकारी योजनाओं की अधूरी तस्वीर पेश कर रही हैं। सूखे नल अब ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक प्रतीक बनकर रह गए हैं।

    बच्चों की पढ़ाई और जिंदगी प्रभावित
    पानी की समस्या का असर सिर्फ दैनिक जीवन पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी भरने में परिवार का साथ देते हैं। महिलाएं बताती हैं कि घर में पानी खत्म होने का डर हमेशा बना रहता है। भीषण गर्मी में पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष करना उनकी मजबूरी बन गया है।

    हर गर्मी में बढ़ जाती है मुश्किल
    मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर बसे इस गांव में गर्मी बढ़ते ही हालात और खराब हो जाते हैं। राजस्थान के कुएं पर भीड़ बढ़ जाती है और पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिलते आए हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हुआ।

    प्रशासन ने माना संकट
    खिलचीपुर जनपद सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने गांव में पानी संकट की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र होने और पथरीली जमीन के कारण पाइपलाइन कार्य में तकनीकी दिक्कतें आईं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि जल्द ही योजना का काम पूरा कर गांव में पानी पहुंचाया जाएगा।

    फिलहाल फतेहपुर गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी की तलाश में शुरू होता है और उसी चिंता में खत्म होता है। सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच यह गांव आज भी प्यासा खड़ा है।

  • मां की उम्मीद ने तोड़ा दिल: बेटे की मौत के बाद 5 दिन तक प्रार्थना, डेडबॉडी से खून बहता रहा

    मां की उम्मीद ने तोड़ा दिल: बेटे की मौत के बाद 5 दिन तक प्रार्थना, डेडबॉडी से खून बहता रहा


    विदिशा । विदिशा जिले में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मां अपने बेटे की मौत के बाद भी उसे जीवित मानकर पांच दिनों तक उसके शव के पास बैठी रही और लगातार प्रार्थना करती रही। महिला ने बेटे के सीने पर बाइबिल रख दी थी और उसे जिंदा करने की उम्मीद में लगातार धार्मिक अनुष्ठान करती रही।

    मृतक की पहचान शीनू वर्गिस (42) के रूप में हुई है, जो मुंबई में फैशन डिजाइनिंग का काम करता था और कुछ समय से अपनी मां के साथ विदिशा में रह रहा था। पिता की मौत के बाद वह मां की देखभाल के लिए उनके साथ रह रहा था।

    पड़ोसियों और पुलिस के अनुसार, महिला मरियमा वर्गिस ने बेटे की मौत की जानकारी किसी को नहीं दी। उन्हें विश्वास था कि प्रार्थना और बाइबिल रखने से उनका बेटा वापस जीवित हो जाएगा। इसी कारण शव को घर में ही रखा गया और अंतिम संस्कार नहीं किया गया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब दूध विक्रेता सुबह घर पर पहुंचा और दरवाजे के नीचे से तेज दुर्गंध और खून बहता देखा। इसके बाद आसपास के लोगों को शक हुआ और पुलिस को सूचना दी गई।

    पुलिस जब मौके पर पहुंची तो महिला ने उन्हें घर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की और दरवाजा बंद करने का प्रयास भी किया। काफी समझाने के बाद पुलिस अंदर दाखिल हुई, जहां कमरे में शीनू का शव पड़ा मिला। शव के ऊपर बाइबिल रखी हुई थी और धार्मिक सामग्री भी मौजूद थी।

    पुलिस के अनुसार, शव लगभग पांच दिन पुराना था और उसमें दुर्गंध तथा कीड़े लग चुके थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक लंबे समय से बीमार था।

    फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मौत के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। महिला को निगरानी में रखा गया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है।

    यह घटना न सिर्फ मानवीय संवेदना को झकझोरती है, बल्कि मानसिक स्थिति और जागरूकता को लेकर भी कई सवाल खड़े करती है।