Category: Madhya Pradesh

  • महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्ति का उत्सव: लगातार 16 घंटे नृत्यांजलि, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

    महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्ति का उत्सव: लगातार 16 घंटे नृत्यांजलि, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़


    उज्जैन। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गंगा दशहरा के अवसर पर भक्ति और कला का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह 6:30 बजे से यहां अखंड नृत्य आराधना का आयोजन शुरू हुआ, जो लगातार 16 घंटे तक बिना रुके चलेगा और भगवान महाकाल की शयन आरती तक भक्तिमय प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहेगा।

    इस विशेष आयोजन में विभिन्न आयु वर्ग के कलाकार भाग ले रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि 4 वर्ष की छोटी बच्चियों से लेकर 40 वर्ष तक की महिला कलाकार इस नृत्यांजलि में अपनी प्रस्तुतियां दे रही हैं। सभी कलाकार भगवान शिव, गणेश वंदना, माता की आराधना, भजन और लोकगीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है।

    कार्यक्रम में 50 से अधिक कलाकारों की भागीदारी है। प्रत्येक समूह को 15 से 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लगातार चलने वाली इस नृत्य आराधना में भक्ति की धारा निर्बाध रूप से बहती रहे। इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा तबला वादन भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बना हुआ है।

    महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित यह नृत्य आराधना केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और परंपरा का जीवंत रूप है। मंदिर परिसर में गूंजते भजनों और नृत्य की लय ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। दूर-दूर से आए भक्त इस अद्भुत दृश्य को देखकर भावविभोर हो रहे हैं।

    इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता और अनुशासन है, जिसमें कलाकार बिना किसी विराम के अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा हुआ नजर आ रहा है।

    यह परंपरा रसराज प्रभात नृत्य संस्थान द्वारा पिछले 38 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। संस्थान द्वारा इस आयोजन की तैयारी लगभग एक महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। कलाकारों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर अभ्यास कर इस भव्य प्रस्तुति के लिए खुद को तैयार किया है।

    कार्यक्रम में संस्थापक राज कुमुद ठोलिया सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अर्पण भारद्वाज और गोविंद गंधे ने भी आयोजन की सराहना की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में संजय मिश्रा, पंडित विशाल शुक्ला और भारती सिंह राजपूत की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।

    महाकाल मंदिर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति, नृत्य और संगीत की समृद्ध परंपरा को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

  • शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर अनशन: प्रशासन ने कराया समाप्त, आंदोलनकारियों ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

    शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर अनशन: प्रशासन ने कराया समाप्त, आंदोलनकारियों ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम


    इंदौर। इंदौर में मंगलवार को शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू होते-होते टल गया। मालवा रक्षा अनुष्ठान के संयोजक और अधिवक्ता आचार्य सत्यम सत्यनारायण पुरोहित ने नृसिंह घाट पर आमरण अनशन की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप और बातचीत के बाद उन्होंने फिलहाल अपना अनशन स्थगित कर दिया।

    आचार्य सत्यम मंगलवार सुबह 10 बजे नृसिंह घाट पर अनशन शुरू करने पहुंचे थे। उनकी मांग थी कि शिप्रा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस को मिली, महाकाल थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।

    थाना प्रभारी गगन बादल और एसआई चंद्रभान सिंह ने आचार्य से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। कुछ ही देर बाद एसडीएम एलेन गर्ग भी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारी की सभी मांगों को गंभीरता से सुना। नगर निगम के उपायुक्त संतोष टैगोर ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और बातचीत की।

    लगभग एक घंटे तक चली समझाइश और चर्चा के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि आचार्य की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद आचार्य सत्यम ने अपना अनशन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।

    आचार्य ने आरोप लगाया कि शिप्रा नदी के किनारे अब तक पर्याप्त पौधारोपण नहीं किया गया है, जबकि यह कार्य पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि 29 किलोमीटर घाट निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को सीधे नदी में डाल दिया गया, जिससे नदी की स्थिति और खराब हुई है।

    इसके अलावा उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि प्रशासन ने सात दिन के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

    प्रशासन ने इस मामले में ज्ञापन लेकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है और कहा है कि सभी बिंदुओं पर जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मौके पर शांति बनी हुई है, लेकिन शिप्रा नदी संरक्षण को लेकर उठे सवाल एक बार फिर चर्चा में हैं।

  • बरगी क्रूज हादसा मामला गरमाया: न्यायिक आयोग ने शुरू की जांच, उपभोक्ता मंच ने लगाए गंभीर आरोप

    बरगी क्रूज हादसा मामला गरमाया: न्यायिक आयोग ने शुरू की जांच, उपभोक्ता मंच ने लगाए गंभीर आरोप


    जबलपुर । जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस हादसे में 13 पर्यटकों की मौत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर-43 में आयोग के समक्ष इस मामले की पहली सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने हादसे से जुड़े कई तकनीकी और कानूनी पहलुओं को आयोग के सामने रखा। मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने दलील दी कि इंडियन वेसेल्स एक्ट 2021 के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी दुर्घटनाग्रस्त जलयान (क्रूज) को जांच पूरी होने से पहले नष्ट करने की अनुमति देता हो।

    याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही क्रूज को नष्ट कर दिया, जो नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। मंच ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी नष्ट हो गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 12 सितंबर 2023 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जलाशयों में चलने वाले क्रूज में केवल फोर स्ट्रोक इंजन का उपयोग किया जाए। इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया था और उसमें लगाया गया 100 हॉर्सपावर का इंजन कमजोर बताया जा रहा है। हादसे के समय उसका दूसरा इंजन भी कथित रूप से फेल हो गया था।

    याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि क्रूज संचालन के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति और तकनीकी फिटनेस प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं थे। यदि यह सच है, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जब क्रूज को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है, तो अब उसकी तकनीकी जांच किस आधार पर की जाएगी। आयोग के समक्ष यह भी कहा गया कि इससे दुर्घटना के कारणों की वैज्ञानिक जांच लगभग असंभव हो गई है।

    आयोग ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए वैधानिक और तकनीकी पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच की जा सके।

    फिलहाल आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी सुनवाई में सभी पक्षों को पूरा अवसर दिया जाएगा और मामले की गहराई से जांच की जाएगी। यह हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही के गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।

  • जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस

    जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस


    जबलपुर । जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की तत्परता से एक होमगार्ड सैनिक की जान बचा ली गई। यह घटना 25 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे गाड़ी संख्या 22189 जबलपुर-रीवा इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन की गति बढ़ने और संतुलन बिगड़ने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक जगह पर गिर गया।

    जैसे ही यह घटना हुई, मौके पर मौजूद RPF जवानों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। ड्यूटी पर तैनात सहायक उप निरीक्षक धीरज कुमार और प्रधान आरक्षक भाग सिंह ने बिना देर किए यात्री की ओर दौड़ लगाई और उसे पकड़कर सुरक्षित बाहर खींच लिया। उनकी तेज प्रतिक्रिया और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।

    गिरने वाले यात्री की पहचान गुनागार तिवारी (56) के रूप में हुई है, जो वार्ड नंबर-16, खितोला बाजार, सिहोरा, जिला जबलपुर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वे होमगार्ड मुख्यालय, जबलपुर में पदस्थ हैं और उसी दौरान सिहोरा की ओर यात्रा कर रहे थे।

    घटना के दौरान यात्री को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वह कुछ देर तक घबराया हुआ था। RPF जवानों ने तुरंत उसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाकर प्राथमिक सहायता दी और उसकी स्थिति सामान्य की।

    पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे यात्री ट्रेन में चढ़ते समय फिसलता है और RPF जवान तुरंत उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

    स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी RPF जवानों की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था।

    फिलहाल रेलवे प्रशासन ने भी जवानों की इस सतर्कता की प्रशंसा की है और यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि यह जानलेवा हो सकता है।

  • जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला

    जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला


    जबलपुर। जबलपुर जिले के सिहोरा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 स्थित गढ़िया मोहल्ले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के दौरान एक बेटे ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। यह पूरी वारदात सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे की बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, आरोपी करण कोल देर रात शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचते ही उसने अपनी पत्नी कांति बाई कोल से खाना बनाने को कहा। पत्नी ने देर रात होने के कारण खाना बनाने से मना कर दिया, जिस पर वह गुस्से में आ गया और पत्नी के साथ मारपीट करने लगा।

    इस दौरान घर के दूसरे कमरे में सो रही उसकी मां गिरानी बाई कोल (65) ने आवाज सुनकर बीच-बचाव करने की कोशिश की। वह मौके पर पहुंचीं और बेटे को डांटते हुए शांत रहने और सोने को कहा। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जाता है कि मां ने जब उसे बार-बार समझाने की कोशिश की, तो आरोपी और अधिक आक्रोशित हो गया। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान गुस्से में आरोपी ने पास में रखा टेबल फैन उठाया और अपनी मां के सिर पर जोरदार वार कर दिया।

    हमले के बाद भी आरोपी लगातार मां पर हमला करता रहा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस बीच पत्नी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट की। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

    घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के बड़े बेटे दशरथ को सूचना दी गई। वह तुरंत मौके पर पहुंचा और अपनी मां को खून से लथपथ हालत में पाया। परिजन उन्हें तत्काल सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी करण कोल की तलाश शुरू कर दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान मां बीच-बचाव करने आई थीं, जिसके चलते आरोपी ने गुस्से में आकर हमला कर दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है। फिलहाल पूरा मामला घरेलू हिंसा और नशे के कारण हुई त्रासदी के रूप में सामने आ रहा है।

  • शिवपुरी में गंगा दशहरा पर विवाद: नपा अध्यक्ष ने लगाया अपमान का आरोप, प्रदेश नेतृत्व से शिकायत की बात कही

    शिवपुरी में गंगा दशहरा पर विवाद: नपा अध्यक्ष ने लगाया अपमान का आरोप, प्रदेश नेतृत्व से शिकायत की बात कही


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के गोरखनाथ मंदिर परिसर में गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा मंच से नाराज होकर अचानक नीचे उतर गईं और कार्यक्रम स्थल से चली गईं। इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

    कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत और माल्यार्पण किया जा रहा था। इसी दौरान नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा असंतुष्ट नजर आईं और कुछ ही देर बाद उन्होंने मंच छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि मंच पर उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर वे काफी नाराज थीं।

    नगर पालिका अध्यक्ष ने इस पूरे मामले के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ईशांक धाकड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गायत्री शर्मा का कहना है कि यह कार्यक्रम नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित किया गया था, लेकिन सीएमओ द्वारा उनके लिए मंच पर कुर्सी तक की व्यवस्था नहीं की गई, जिसे उन्होंने अपमानजनक बताया।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब सम्मान समारोह चल रहा था, तब उनका नाम मंच से नहीं पुकारा गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित महसूस हुआ। इस घटना के बाद वे नाराज होकर मंच से उतर गईं।

    गायत्री शर्मा ने इसे महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर महिला जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है।

    उन्होंने यह भी कहा कि वह इस पूरे मामले की शिकायत प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व तक करेंगी। उनके अनुसार, वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं से इस घटना की शिकायत करेंगी।

    वहीं दूसरी ओर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ईशांक धाकड़ ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष मंच पर मौजूद थीं और कार्यक्रम के दौरान उनका नाम भी सम्मानपूर्वक लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि वे अचानक मंच छोड़कर क्यों चली गईं।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मंच पर प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव, कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया भी मौजूद थे। घटना के बाद कार्यक्रम की चर्चा अब प्रशासनिक समन्वय और राजनीतिक विवाद के रूप में की जा रही है।

    फिलहाल मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे इसकी शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

  • सिरसौद में राशन वितरण पर बवाल: हितग्राहियों ने गेहूं-चावल में कटौती और अवैध वसूली के लगाए आरोप

    सिरसौद में राशन वितरण पर बवाल: हितग्राहियों ने गेहूं-चावल में कटौती और अवैध वसूली के लगाए आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करेरा अनुविभाग के सिरसौद गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें निर्धारित मात्रा से कम गेहूं और चावल दिया जा रहा है, साथ ही राशन देने के बदले अतिरिक्त पैसे भी वसूले जा रहे हैं।

    मामला तब सामने आया जब ग्रामीणों ने राशन वितरण के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इन वीडियो के सामने आने के बाद गांव में हड़कंप मच गया और लोगों ने खुलकर अपनी शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं।

    ग्रामीणों के अनुसार, कई हितग्राहियों को 2 से 3 किलो तक कम राशन दिया जा रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त वसूली भी की जा रही है। लोगों का आरोप है कि यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब जाकर मामला उजागर हुआ है।

    प्रेम नारायण नामक ग्रामीण ने बताया कि उन्हें दो महीने के राशन के बदले 22 किलो गेहूं और 6 किलो चावल मिला, जबकि निर्धारित मात्रा से 2 किलो कम अनाज दिया गया। साथ ही उनसे 10 रुपये अतिरिक्त लिए गए। इसी तरह पुष्पेंद्र लोधी ने भी आरोप लगाया कि उन्हें 20 किलो गेहूं और 8 किलो चावल के बजाय कम मात्रा में राशन मिला और 10 रुपये अतिरिक्त वसूले गए।

    अन्य ग्रामीणों ने भी समान आरोप लगाए हैं। मुकेश पाल ने कहा कि उन्हें 60 किलो गेहूं और 10 किलो चावल दिया गया, लेकिन उसमें भी 2 किलो की कमी पाई गई और 20 रुपये अतिरिक्त लिए गए। वहीं धनीराम शिवहरे का कहना है कि दो व्यक्तियों के हिस्से का राशन लेने पर उन्हें 3 किलो अनाज कम मिला और अतिरिक्त पैसे भी लिए गए।

    इन आरोपों के बाद गांव में नाराजगी बढ़ गई है और लोग राशन दुकान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वायरल वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसके बाद प्रशासनिक जांच की मांग भी तेज हो गई है।

    दूसरी ओर, राशन दुकान के सेल्समैन सुमित लोधी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वह पहली बार राशन वितरण कर रहे हैं और इससे पहले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यह कार्य किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

    फिलहाल मामला तूल पकड़ चुका है और स्थानीय प्रशासन से जांच की उम्मीद की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ी अनियमितताओं का संकेत होगा।

  • बिस्तर विवाद में बड़ा हादसा: मां-बेटी की बहस के दौरान पिता को आया हार्ट अटैक, मौके पर मौत

    बिस्तर विवाद में बड़ा हादसा: मां-बेटी की बहस के दौरान पिता को आया हार्ट अटैक, मौके पर मौत


    ग्वालियर । ग्वालियर के चिटनिस की गोठ स्थित वैकुंठ अपार्टमेंट में एक मामूली घरेलू विवाद ने बड़ा और दुखद रूप ले लिया, जब मां-बेटी के बीच झगड़े के दौरान पिता की अचानक मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह मामला बिस्तर को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जो देखते ही देखते परिवार के लिए त्रासदी बन गया।

    जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान अनिल कपूर के रूप में हुई है, जो अपनी पत्नी रितु कपूर और बेटी मानसी कपूर के साथ रहते थे। मानसी हाल ही में अपनी शादी के बाद कुछ दिनों के लिए मायके आई हुई थी। इसी दौरान घर में बिस्तर पर सोने को लेकर मां-बेटी के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    बताया जाता है कि रात के समय रितु कपूर बेटी के बिस्तर पर सो गईं, जिससे मानसी नाराज हो गई और दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि घर में तनावपूर्ण माहौल बन गया और परिजनों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई।

    इसी विवाद को शांत कराने के लिए अनिल कपूर बीच-बचाव करने पहुंचे। परिजनों के अनुसार, वह दोनों को समझाने की कोशिश कर ही रहे थे कि अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वह जमीन पर गिर पड़े। परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है।

    घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसर गया। मां-बेटी दोनों सदमे में हैं और घर का माहौल पूरी तरह शोकाकुल हो गया है। मृतक की बेटी मानसी का रो-रोकर बुरा हाल है।

    परिवार के संबंधों को लेकर भी इस मामले में कई भावनात्मक पहलू सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार अनिल कपूर की पहली पत्नी की मृत्यु 2019 में हो चुकी थी। बाद में रितु कपूर, जो पहले उनकी साली थीं, उन्होंने अनिल कपूर से विवाह किया था। पारिवारिक रिश्तों के इस जटिल स्वरूप ने भी मामले को और भावनात्मक बना दिया है।

    पुलिस ने घटना को लेकर जांच शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआती निष्कर्ष में इसे प्राकृतिक हार्ट अटैक से हुई मौत माना जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

    यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि घरेलू विवादों में बढ़ता तनाव कभी-कभी गंभीर परिणामों में बदल सकता है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं।

  • ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर

    ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर


    ग्वालियर । ग्वालियर जिले के बिलौआ इलाके में अवैध खनन का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें पर्यावरण और खनिज नियमों की खुली अनदेखी कर करोड़ों रुपये की खनिज संपदा निकाल ली गई। आरोप है कि एक क्रेशर संचालक ने निजी और कृषि भूमि पर बिना अनुमति के 200 से 250 फीट तक गहरी खुदाई कर भारी मात्रा में पत्थर का अवैध उत्खनन कर डाला।

    सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा उत्खनन उस समय किया गया जब संबंधित जमीन पर माइनिंग की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। इसके बावजूद महीनों तक भारी मशीनों की मदद से लगातार खुदाई चलती रही और खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    शिकायत सामने आने के बाद जब इस क्षेत्र की सैटेलाइट इमेज मंगाई गई, तो स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि तीन अलग-अलग सर्वे नंबरों पर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया गया है और जमीन का बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील हो चुका है। अनुमान के मुताबिक यहां करोड़ों रुपये मूल्य का पत्थर निकाला जा चुका है।

    मामले में यह भी आरोप है कि खनिज विभाग ने न तो समय रहते निरीक्षण किया और न ही अवैध उत्खनन पर कोई सख्त कार्रवाई की। नियमों के अनुसार बिना अनुमति खनन पर भारी जुर्माना और खदान सील करने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में न तो जुर्माना लगाया गया और न ही कोई कठोर कार्रवाई हुई।

    इसके बजाय, संबंधित फाइल को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा मामला मिलीभगत और संरक्षण का परिणाम है, जिसमें नियमों को दरकिनार कर खनन माफिया को फायदा पहुंचाया गया।

    वहीं दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर यह दलील दी जा रही है कि सीमांकन में त्रुटि के कारण क्रेशर संचालक ने गलती से दूसरी जमीन पर खुदाई कर दी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या 250 फीट गहरी खुदाई किसी “गलती” का परिणाम हो सकती है, या इसके पीछे महीनों की सुनियोजित प्रक्रिया रही है।

    स्थानीय स्तर पर 22 अप्रैल 2026 को पर्यावरण मंजूरी के लिए लोक सुनवाई भी कराई गई थी, जिसमें ग्रामीणों को रोजगार और विकास के वादे किए गए थे। लेकिन इससे पहले ही खनन पूरा कर लिया गया, जिससे इस सुनवाई की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है।

    फिलहाल कलेक्टर स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई है। खनिज विभाग के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि अनुमति के बिना इतनी बड़ी खुदाई कैसे और किसकी अनुमति से हुई।  यह पूरा मामला न केवल खनिज संपदा की लूट को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • ग्वालियर किले पर दर्दनाक हादसा: छत्तीसगढ़ के पर्यटक की मौत, ढलान पर ट्रक ने रौंदा; पहिया ऊपर से गुजर गया

    ग्वालियर किले पर दर्दनाक हादसा: छत्तीसगढ़ के पर्यटक की मौत, ढलान पर ट्रक ने रौंदा; पहिया ऊपर से गुजर गया


    ग्वालियर । ग्वालियर किले की ऐतिहासिक सैर उस समय एक दर्दनाक हादसे में बदल गई जब छत्तीसगढ़ से आए एक पर्यटक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। यह घटना सोमवार शाम किले के मुख्य गेट के पास उस समय हुई जब परिवार के साथ आए पर्यटक किला घूम रहे थे।

    मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सूरजपुर निवासी 35 वर्षीय प्रमोद देवगन के रूप में हुई है। वह अपने बहनोई और बहन के साथ ग्वालियर घूमने आए थे और घाटीगांव में अपने रिश्तेदार के घर ठहरे हुए थे। सोमवार को पूरा परिवार ग्वालियर किला देखने पहुंचा था, लेकिन यह यात्रा उनके लिए आखिरी साबित हुई।

    जानकारी के अनुसार, शाम करीब चार बजे परिवार किले के मुख्य प्रवेश द्वार के पास पहुंचा ही था कि ढलान से आ रहा एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित हो गया। इसी दौरान ट्रक ने प्रमोद को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक का पहिया उनके सीने के ऊपर से गुजर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजन चीख-पुकार करने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद की और दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारे की कार के स्टाफ ने घायल को अपनी गाड़ी से तुरंत जयारोग्य अस्पताल पहुंचाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    परिवार के लिए यह हादसा किसी सदमे से कम नहीं था। बहनों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। कुछ ही पलों में पर्यटन का आनंद मातम में बदल गया और पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

    घटना के बाद ट्रक चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि हादसा ढलान और तेज रफ्तार के कारण हुआ, जिससे ट्रक चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका।

    बहोड़ापुर थाना पुलिस के अनुसार, आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा न होने के कारण सीधे फुटेज उपलब्ध नहीं हो सका है। हालांकि पुलिस अब आसपास के अन्य मार्गों और कैमरों की मदद से ट्रक और चालक की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी के अनुसार, जल्द ही आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जाएगा।

    यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए गहरा दुख लेकर आया है, बल्कि ग्वालियर जैसे पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर गया है।