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  • ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?

    ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने कमान संभाल ली है. सोमवार को सीबीआई ने भोपाल पुलिस से केस डायरी और तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से एफआईआर दर्ज की है. इस बड़े घटनाक्रम के बीच, भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस की 7 दिन की रिमांड में मौजूद ट्विशा के पति समर्थ सिंह (Samarth Singh) से हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समर्थ पूछताछ में ज्यादातर वही जवाब दे रहा है, जो शुरुआत से उसकी मां गिरीबाला सिंह कहती आई हैं. उसने पूरी घटना के पीछे ट्विशा के बदले हुए व्यवहार और उनके ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े होने को वजह बताया है. समर्थ ने बताया कि शादी के बाद शुरुआती दिनों में उसके और ट्विशा के बीच रिश्ते पूरी तरह सामान्य थे. विवाद की शुरुआत 17 अप्रैल से हुई, जब ट्विशा को पता चला कि वह प्रेग्नेंट है. इसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया।

    समर्थ ने पुलिस के सामने दावा किया कि ट्विशा अक्सर खुद के ग्लैमर वर्ल्ड (मॉडलिंग और एक्टिंग) से जुड़े होने की दुहाई देती थी. वह कहती थी कि वह एक साधारण घरेलू महिला वाली जिंदगी नहीं जी सकती और यह उसके लिए बेहद मुश्किल है. समर्थ के अनुसार, इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होने लगी थी।

    पूछताछ में समर्थ ने अप्रैल महीने की एक घटना का जिक्र करते हुए दोनों के बीच बढ़ती दूरियों की बात कही. समर्थ ने बताया, ‘अप्रैल में हमें एक साथ बेंगलुरु जाना था. लेकिन ऐन वक्त पर ट्विशा ने जाने से मना कर दिया और कहा कि उसे अपने भाई के पास अजमेर जाना है।

    समर्थ के मुताबिक, वह अकेले बेंगलुरु चला गया और ट्विशा अजमेर के लिए निकल गई. लेकिन बाद में उसे पता चला कि ट्विशा अजमेर में सिर्फ एक दिन रुकी और उसे बिना बताए दिल्ली चली गई. इस बात को लेकर जब समर्थ ने आपत्ति जताई, तो दोनों के बीच विवाद और ज्यादा बढ़ गया।


    12 मई की रात को क्या हुआ था?

    ट्विशा की मौत वाली रात यानी 12 मई की कहानी बयां करते हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि उस दिन सब कुछ सामान्य दिख रहा था. उसने दावा किया कि रात को खाना खाने के बाद दोनों कुछ देर सोसाइटी के पार्क में टहले और फिर घर लौटकर टीवी देखने लगे।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्थ ने दावा करते हुए कहा, ‘कुछ देर बाद मैं सोने चला गया, जबकि ट्विशा नीचे जाकर अपने परिजनों से फोन पर बात करने लगी. देर रात मेरी मां गिरिबाला सिंह ने मुझे जगाया और कहा कि ट्विशा की मां का फोन आया था कि वह फोन नहीं उठा रही है।

    समर्थ के मुताबिक, जब दोनों ने घर में ट्विशा को ढूंढना शुरू किया, तो वह छत पर फंदे से लटकी मिली. समर्थ का दावा है कि उसने और उसकी मां ने मिलकर ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा, CPR दिया और तुरंत भोपाल AIIMS लेकर भागे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


    घटना के बाद कहां छिप गया था समर्थ?

    घटना के बाद फरार हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह एक हफ्ते से ज्यादा समय तक जबलपुर में छिपा रहा. पकड़े जाने के डर से उसने अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके. समर्थ के इस कबूलनामे के बाद अब भोपाल पुलिस और सीबीआई के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरारी के दौरान जबलपुर में समर्थ को किसने पनाह दी और उसकी मदद की? हालांकि, समर्थ ने अपने मददगारों के नाम उगलने से इनकार कर दिया है।

    गौरतलब है कि 33 वर्षीय मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसे जान देनी पड़ी. भोपाल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), 85 (क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) के साथ दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. दूसरी तरफ, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद द्विशा का दिल्ली एम्स के जरिए दूसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया है।


    सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञान

    इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. अदालत ने कहा कि एक महिला की असामयिक मौत बेहद गंभीर विषय है और इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अफवाहों और अटकलों से बचना चाहता है. अदालत ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी को खोने का दर्द असहनीय होता है और अदालत परिवार की पीड़ा को समझती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं पर भी चिंता जताई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियों को अत्यंत जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।

  • एमपी में भीषण गर्मी का कहर जारी, कई जिलों में लू का रेड अलर्ट; कहीं राहत की बारिश के संकेत

    एमपी में भीषण गर्मी का कहर जारी, कई जिलों में लू का रेड अलर्ट; कहीं राहत की बारिश के संकेत


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नौतपा के दौरान गर्मी ने अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, रीवा, सागर और उज्जैन संभाग के कई जिलों में लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। गर्म हवाओं के थपेड़ों और उमस ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

    भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम जैसे शहरों में भी दिनभर तेज गर्मी बनी रहेगी, हालांकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्के बादल, तेज हवाएं और बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों के कारण कुछ इलाकों में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिल सकती है।

    भीषण गर्मी का असर बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय प्रमुख बाजारों और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ नजर आ रही है। कई जिलों में दोपहर के दौरान अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने भी गर्मी और लू को लेकर एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओआरएस, नींबू पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, तेज बुखार, उल्टी या सिरदर्द जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि कुछ जिलों में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने से तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है।

  • पन्ना में तेज रफ्तार ट्रक पलटा, कई वाहन चकनाचूर; बिजली के खंभे टूटने से सप्लाई ठप

    पन्ना में तेज रफ्तार ट्रक पलटा, कई वाहन चकनाचूर; बिजली के खंभे टूटने से सप्लाई ठप


    मध्य प्रदेश । पन्ना जिले के सिहारन ग्राम में रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया, जब पशु आहार से लदा एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। हादसे में सड़क किनारे खड़ी कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं, वहीं बिजली के खंभे टूटने से पूरे इलाके की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और ट्रक चालक सुरक्षित बच गया।

    जानकारी के अनुसार, ट्रक अमानगंज से जबलपुर की ओर जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रक की रफ्तार काफी तेज थी। सिहारन गांव के पास चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और ट्रक सड़क किनारे पलट गया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि सड़क किनारे खड़ी पंकज जैन की दो गाड़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

    इसके अलावा स्थानीय निवासी जतन सिंह की चाय-समोसे की गुमटी भी ट्रक की चपेट में आ गई, जिससे उसे भारी नुकसान पहुंचा। हादसे के बाद सड़क पर पशु आहार बिखर गया और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    ट्रक पलटने के दौरान वह बिजली के खंभों से भी टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई खंभे उखड़ गए और आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई। बिजली गुल होने से ग्रामीणों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। इसके बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बिजली विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए सड़क से मलबा हटाने और बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम शुरू किया।

    प्रशासन की टीम क्षतिग्रस्त खंभों को बदलने और आवागमन सामान्य करने में जुटी हुई है। वहीं पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर दुर्घटना की वजह तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना माना जा रहा है। इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार भारी वाहनों की लापरवाही और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • छतरपुर में XUV से हो रही थी शराब तस्करी, जंगल में 369 लीटर देशी शराब जब्त; एक आरोपी गिरफ्तार

    छतरपुर में XUV से हो रही थी शराब तस्करी, जंगल में 369 लीटर देशी शराब जब्त; एक आरोपी गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश । छतरपुर जिले के बकस्वाहा थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक XUV-500 कार से भारी मात्रा में देशी शराब जब्त की है। ऊमरझिरिया जंगल क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने करीब 369 लीटर अवैध शराब पकड़ी, जिसकी कीमत लगभग 2 लाख रुपए बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसका साथी जंगल का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।

    जानकारी के अनुसार, बकस्वाहा थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ऊमरझिरिया जंगल इलाके में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। इसी दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध XUV-500 वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान वाहन के अंदर बड़ी मात्रा में अवैध शराब रखी मिली।

    पुलिस ने कार से कुल 41 पेटी देशी शराब बरामद की, जिसमें 10 पेटी प्लेन शराब और 31 पेटी मसाला शराब शामिल थी। जब्त शराब की कुल मात्रा 369 लीटर बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 95 हजार रुपए आंकी गई है।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ग्राम सोंरई निवासी 38 वर्षीय कन्हैया यादव को मौके से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, वाहन चला रहा दूसरा आरोपी नातीराजा, निवासी जगारा थाना बाजना, पुलिस को देखकर जंगल की ओर भाग निकला। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

    पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही करीब 4 लाख रुपए कीमत की XUV-500 कार को भी जब्त कर लिया है। आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस क्षेत्र में सप्लाई किया जाना था। अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जा सकता है।

    इस कार्रवाई को अवैध शराब तस्करी के खिलाफ जिले में चलाए जा रहे अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

  • छतरपुर में दिल दहला देने वाली घटना: 13 वर्षीय बहन और 15 वर्षीय भाई की जान गई

    छतरपुर में दिल दहला देने वाली घटना: 13 वर्षीय बहन और 15 वर्षीय भाई की जान गई


    मध्य प्रदेश । छतरपुर जिले के लवकुश नगर थाना क्षेत्र के ग्राम बागवान में सोमवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया, जिसने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। खेत पर बने कुएं में नहाते समय 13 वर्षीय किशोरी का पैर फिसल गया। बहन को डूबता देख 15 वर्षीय भाई बिना कुछ सोचे-समझे उसे बचाने के लिए कुएं में कूद पड़ा, लेकिन गहरे पानी के कारण दोनों की जान नहीं बच सकी।

    जानकारी के अनुसार, मुस्कान राजपूत सुबह घर के पास खेत पर बने कुएं में नहा रही थी। बताया जा रहा है कि कुएं के आसपास सुरक्षा के लिए कोई मुंडेर या बाउंड्री नहीं बनी थी। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे कुएं में जा गिरी।

    बहन को डूबता देख पास में खड़ा उसका छोटा भाई सत्यजीत राजपूत घबरा गया और उसे बचाने के लिए तुरंत कुएं में कूद पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सत्यजीत ने बहन को बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन कुएं में पानी अधिक गहरा होने के कारण वह खुद भी बाहर नहीं निकल सका। कुछ ही पलों में दोनों भाई-बहन गहरे पानी में डूब गए।

    घटना का पता तब चला जब बड़ा भाई निरंजन राजपूत वहां पहुंचा। उसने कुएं में भाई-बहन के शव उतराते देख शोर मचाया। आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे। गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने तत्काल दोनों को कुएं से बाहर निकाला।

    इसके बाद परिजन दोनों बच्चों को तुरंत लवकुश नगर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग भी इस हादसे से स्तब्ध हैं।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह हादसा माना जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

    गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खेतों और खुले कुओं के आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

  • जल संरक्षण अभियान में शामिल हुए मंत्री-कलेक्टर, तालाब सफाई में लिया हिस्सा

    जल संरक्षण अभियान में शामिल हुए मंत्री-कलेक्टर, तालाब सफाई में लिया हिस्सा


    मध्य प्रदेश । निवाड़ी जिले में सोमवार को जल संरक्षण और सादगी का अनोखा उदाहरण देखने को मिला, जब जिले के प्रभारी मंत्री, कलेक्टर और एसपी बिना किसी बड़े सरकारी काफिले के बस से गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ तालाब में उतरकर श्रमदान किया।

    जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश पटेरिया, कलेक्टर जमुना भिड़े, एसपी डॉ. राय सिंह नरवरिया और जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना सहित पूरा प्रशासनिक अमला शामिल हुआ।

    आमतौर पर मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे लंबे-चौड़े काफिलों के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार प्रशासन ने अलग संदेश देने की कोशिश की। सभी अधिकारी और जनप्रतिनिधि अलग-अलग वाहनों के बजाय केवल दो बसों में सामूहिक रूप से गांव पहुंचे। इस पहल को पेट्रोल-डीजल बचाने और वीआईपी संस्कृति से दूर सादगी अपनाने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने की अपील के बाद जिला प्रशासन ने यह प्रयोग किया। इससे न केवल सरकारी खर्च और ईंधन की बचत का संदेश दिया गया, बल्कि सामूहिक भागीदारी की भावना भी मजबूत हुई।

    घुघसी गांव पहुंचने के बाद मंत्री और अधिकारी सीधे तालाब पर पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर श्रमदान किया। सभी ने तालाब में उतरकर सफाई अभियान चलाया और कुदाल चलाकर गाद हटाने का काम किया। इस दौरान गांव के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक अभियान में हिस्सा लिया।

    प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा ने कहा कि तालाब, बावड़ी और पारंपरिक जल स्रोत केवल पानी का साधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा हैं। यदि समय रहते इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।

    उन्होंने कहा कि घुघसी तालाब की सफाई का उद्देश्य सिर्फ सफाई अभियान चलाना नहीं, बल्कि समाज में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता पैदा करना भी है। कलेक्टर जमुना भिड़े और एसपी डॉ. राय सिंह नरवरिया ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए लोगों को जल बचाने का संदेश दिया। अभियान के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों की साझी भागीदारी ने गांव में सकारात्मक माहौल बनाया और लोगों ने इसे प्रेरणादायक पहल बताया।

  • निवाड़ी में जैन समाज का विरोध प्रदर्शन, संतों की सुरक्षा को लेकर मांग तेज

    निवाड़ी में जैन समाज का विरोध प्रदर्शन, संतों की सुरक्षा को लेकर मांग तेज


    मध्य प्रदेश । रीवा में दो जैन साध्वियों को कार से टक्कर मारने की घटना को लेकर प्रदेशभर में जैन समाज में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को निवाड़ी में भी बड़ी संख्या में समाजजन सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान के तहत प्रदर्शन किया।

    जैन समाज के लोग एसपी कार्यालय पहुंचे और प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर घटना की निष्पक्ष जांच और संतों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान समाजजनों ने कहा कि रीवा की घटना केवल एक सामान्य सड़क हादसा नहीं मानी जा सकती और इसकी गहराई से जांच जरूरी है।

    ज्ञापन में 20 मई को हुई घटना की SIT अथवा न्यायिक जांच कराने की मांग की गई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग भी उठाई। समाज ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख मार्गों पर संतों के पद विहार के दौरान विशेष ट्रैफिक व्यवस्था और “सुरक्षित कॉरिडोर” बनाए जाएं, जिससे पैदल विहार करने वाले संतों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    इसके अलावा समाज ने संतों के आहार, यात्रा और विहार के दौरान प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि जैन संत पूरी तरह अहिंसक, निहत्थे और तपस्वी जीवन जीते हैं, इसलिए उनके खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

    जैन समाज ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संतों की सुरक्षा को लेकर जल्द प्रभावी और ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में देशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे और पूरे आयोजन में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया गया।

  • टीकमगढ़ में लू का रेड अलर्ट: पारा 44.8°C पहुंचा, दोपहर में बाहर न निकलने की सलाह; शुक्रवार से मौसम बदलने के संकेत

    टीकमगढ़ में लू का रेड अलर्ट: पारा 44.8°C पहुंचा, दोपहर में बाहर न निकलने की सलाह; शुक्रवार से मौसम बदलने के संकेत


    मध्य प्रदेश । टीकमगढ़ जिले में गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और तेज लू के कारण मौसम विभाग ने जिले में रेड अलर्ट जारी किया है। रविवार को अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सोमवार को भी पारा 44 से 45 डिग्री के बीच रहने की संभावना जताई गई है।

    सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि सुबह 9 बजे के बाद ही सड़कें सूनी नजर आने लगती हैं। सोमवार सुबह 11 बजे तक तापमान 41 डिग्री तक पहुंच गया था, जिससे दिन की शुरुआत से ही तपिश महसूस होने लगी।

    मौसम विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। नागरिकों से दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घरों से बाहर न निकलने की अपील की गई है। खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को गर्मी और लू से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्क रहने को कहा गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में आर्द्रता 24 प्रतिशत है और हवाएं करीब 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं। हालांकि यह हवाएं राहत देने के बजाय गर्मी को और बढ़ा रही हैं।

    पिछले एक सप्ताह के तापमान के आंकड़े भी गर्मी की गंभीरता को दर्शा रहे हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री तक पहुंच गया था, जो सप्ताह का सबसे अधिक तापमान रहा। इसके बाद लगातार कई दिनों तक तापमान 44 डिग्री से ऊपर बना रहा।

    भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पक्षियों और जानवरों पर भी पड़ रहा है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपने घरों की छतों और आसपास पक्षियों के लिए पानी रखने की अपील की है।

    हालांकि मौसम विभाग ने शुक्रवार से मौसम में कुछ बदलाव की संभावना जताई है। अनुमान है कि दिन और रात के तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

  • टीकमगढ़ में किसान की रहस्यमयी मौत, 11 लाख के लेनदेन पर उठे सवाल

    टीकमगढ़ में किसान की रहस्यमयी मौत, 11 लाख के लेनदेन पर उठे सवाल


    मध्य प्रदेश ।  टीकमगढ़ जिले के देहात थाना क्षेत्र स्थित बड़ागांव खुर्द गांव में सोमवार सुबह एक किसान की संदिग्ध मौत से सनसनी फैल गई। 55 वर्षीय मोहन यादव का शव उनके घर में मृत अवस्था में मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। मामले को लेकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है और गांव के ही तीन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    मृतक के बड़े भाई रामेश्वर यादव का आरोप है कि गांव के राम चरण नपित, हर चरण नपित और राजकुमार नपित ने मोहन यादव की हत्या की है। परिजनों के अनुसार, मोहन यादव ने करीब 10 साल पहले रामचरण और हरचरण को लगभग 11 लाख रुपए उधार दिए थे, जो अब तक वापस नहीं किए गए थे।

    बताया जा रहा है कि चार दिन पहले मोहन यादव पैसे वापस मांगने आरोपियों के घर गए थे, जहां दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हुआ था। इसके बाद परिवार में तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

    परिजनों का दावा है कि घटनास्थल से राम चरण उर्फ कल्लू की तौलिया बरामद हुई है, जिसे वे इस मामले का महत्वपूर्ण सबूत मान रहे हैं। इसी आधार पर परिवार ने हत्या की आशंका और मजबूत होने की बात कही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहां मेडिकल जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

    परिजनों ने बताया कि पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। गांव में घटना के बाद तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और लोग मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस इस मौत को संदिग्ध मानते हुए जांच में जुटी हुई है। जांच पूरी होने और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

  • टीकमगढ़ में दर्दनाक हादसा: मेमू ट्रेन से गिरकर स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत

    टीकमगढ़ में दर्दनाक हादसा: मेमू ट्रेन से गिरकर स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत


    मध्य प्रदेश । टीकमगढ़ जिले के मवई रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में स्वास्थ्य कर्मचारी की मौत हो गई। मृतक की पहचान छतरपुर निवासी सुरेंद्र अहिरवार के रूप में हुई है, जो आयुष अस्पताल में कार्यरत थे और प्रतिदिन मेमू ट्रेन से ड्यूटी पर आते-जाते थे।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार को भी सुरेंद्र अपनी नियमित यात्रा के तहत मेमू ट्रेन से मवई स्टेशन पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकी और वह उतरने लगे, अचानक उनका पैर फिसल गया। संतुलन बिगड़ने से वह ट्रेन के नीचे आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें ट्रेन के नीचे से बाहर निकाला और गंभीर हालत में टीकमगढ़ जिला चिकित्सालय पहुंचाया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    सुरेंद्र अहिरवार के निधन की खबर मिलते ही अस्पताल स्टाफ और उनके परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि वह अपने मिलनसार स्वभाव और कार्यकुशलता के कारण साथियों के बीच काफी लोकप्रिय थे।

    घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। परिजनों को सूचित कर दिया गया है। उनके पहुंचने के बाद पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और सावधानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जाने की मांग उठाई है।