Category: Madhya Pradesh

  • शिवपुरी में हाईवे पर बड़ा हादसा टला चलती कार से निकली आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पूरी वर्ना जलकर राख

    शिवपुरी में हाईवे पर बड़ा हादसा टला चलती कार से निकली आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पूरी वर्ना जलकर राख


    शिवपुरी । शिवपुरी में गुरुवार रात एनएच-46 पर एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। भैंसोंरा गांव के पास सड़क पर चल रही Hyundai Verna कार में अचानक आग लग गई। कार से तेज लपटें उठती देखकर चालक ने बिना देर किए वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद कार में सवार दोनों लोग तुरंत बाहर निकल आए। कुछ ही मिनटों में आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी कार उसकी चपेट में आ गई और देखते ही देखते वर्ना जलकर पूरी तरह खाक हो गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में कार सवार दोनों लोग सुरक्षित बच गए।

    घटना रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। कार में ग्वालियर निवासी 26 वर्षीय प्रेम गुप्ता और देव करारा सवार थे। दोनों चिकित्सा से जुड़ा सामान लेकर इंदौर की ओर जा रहे थे। बताया गया कि जब कार भैंसोंरा गांव के पास पहुंची तो अचानक उसमें से आग की लपटें निकलने लगीं। कार में आग लगते ही दोनों यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। चालक ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। दोनों लोग किसी तरह कार से बाहर निकले और सुरक्षित दूरी पर पहुंच गए।

    कार से निकलने के कुछ ही समय बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते लपटें पूरी कार में फैल गईं। हाईवे पर चल रहे दूसरे वाहन चालकों ने भी आग का यह खतरनाक मंजर देखा। आग के कारण मौके पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन गई। सूचना मिलने के बाद सुभाषपुरा थाना प्रभारी अरविंद चौहान पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

    पुलिस ने सबसे पहले हाईवे पर यातायात को नियंत्रित किया ताकि आग की वजह से कोई दूसरा हादसा न हो। वाहनों को दूसरी लेन से निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने आग की सूचना फायर ब्रिगेड को दी। मोहना से फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद कार में लगी आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी।

    हादसे में प्रेम गुप्ता और देव करारा को किसी तरह की चोट नहीं आई। दोनों समय रहते कार से बाहर निकल गए थे। अगर आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकलने में थोड़ी भी देरी होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटाने के साथ आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल शुरुआती जांच में आग लगने की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है।

    हाईवे पर चलती कार में अचानक आग लगने की यह घटना एक बार फिर बताती है कि वाहन में किसी तरह की असामान्य स्थिति नजर आते ही उसे सुरक्षित स्थान पर रोकना कितना जरूरी है। समय रहते कार से बाहर निकलने के कारण दोनों यात्रियों की जान बच गई जबकि उनकी कार पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।

  • सागर जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रवि लखेरा गिरफ्तार, बरायठा जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली

    सागर जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रवि लखेरा गिरफ्तार, बरायठा जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में जहरीली शराब कांड के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रवि लखेरा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी कई दिनों से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान बरायठा के जंगल में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें रवि लखेरा के पैर में गोली लगी।

    रवि लखेरा को बंडा जहरीली शराब कांड का मुख्य आरोपी बताया गया है। वह गढ़ी मलहरा शराब दुकान का ठेकेदार भी है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही थी।

    बताया गया है कि जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए अवैध शराब से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल शुरू की थी। जांच के दौरान रवि लखेरा के साथ मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर और शिवान्जय ठाकुर के नाम भी मुख्य आरोपियों के तौर पर सामने आए थे।

    पुलिस ने रवि लखेरा और मनीष लोधी की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस कार्रवाई के बाद से पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। रवि लखेरा कई दिनों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा और अलग-अलग ठिकानों पर छिपता रहा।

    पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को रवि लखेरा के बरायठा के जंगल में मौजूद होने की जानकारी मिलने के बाद उसे घेरने की कार्रवाई की गई। पुलिस ने जब उसे पकड़ने की कोशिश की तो उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

    जवाबी कार्रवाई के दौरान रवि लखेरा के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घायल आरोपी को इलाज के लिए सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है।

    पुलिस के मुताबिक, रवि लखेरा पहले भी नकली शराब से जुड़े मामलों में पुलिस के रडार पर रहा है। मई 2026 में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में पकड़ी गई नकली शराब फैक्ट्री के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। पुलिस की जांच में उसके अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

    सागर में जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस ने अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की थी। इसी जांच में रवि लखेरा समेत अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मुठभेड़ के दौरान आरोपी के घायल होने के बाद उसे पुलिस निगरानी में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसका इलाज जारी है। पुलिस की कार्रवाई से इस मामले में फरार चल रहे आरोपियों की तलाश और अवैध शराब नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्रवाई हुई है।

  • नीम करौली बाबा की यादों ने भावुक किया भक्तों को पोते ने सुनाया बचपन का वो किस्सा जब बाबा के साथ बिताते थे वक्त

    नीम करौली बाबा की यादों ने भावुक किया भक्तों को पोते ने सुनाया बचपन का वो किस्सा जब बाबा के साथ बिताते थे वक्त


    भोपाल। नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों चर्चा में है। फिल्म की सफलता के बीच बाबा से जुड़ी कई ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं जो उनके भक्तों के लिए बेहद खास हैं। बाबा का भोपाल से भी पुराना पारिवारिक रिश्ता रहा है। उनके पोते डॉ. धनंजय शर्मा आज भी भोपाल में रहते हैं और उनके पास बाबा के साथ बिताए बचपन के कई ऐसे किस्से हैं जिन्हें याद करके वह आज भी भावुक हो जाते हैं। डॉ. धनंजय बताते हैं कि जब उनका जन्म भोपाल में हुआ था तब नीम करोली बाबा खुद यहां आए थे और उन्होंने ही उनका नामकरण किया था।

    डॉ. धनंजय के मुताबिक बचपन में गर्मी की छुट्टियों के दौरान वह करीब दो महीने के लिए आगरा जाते थे। उस समय बाबा से उनकी मुलाकात होती थी और उन्हें बाबा का भरपूर लाड़ प्यार मिला। करीब 13 साल तक उन्होंने बाबा को बेहद करीब से देखा। धनंजय कहते हैं कि उनके लिए नीम करोली बाबा पहले किसी बड़े संत या आध्यात्मिक गुरु से ज्यादा उनके अपने बाबा थे। घर में बाबा का व्यवहार भी बिल्कुल सामान्य रहता था। उन्होंने कभी बच्चों को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कोई बहुत बड़े संत हैं।

    नीम करोली बाबा करीब 40 साल तक गांव के प्रधान भी रहे थे। उनके व्यक्तित्व का यह पहलू भी उनके पोते की यादों में दर्ज है। धनंजय बताते हैं कि बाबा से जुड़े भक्त जब अपने अनुभव सुनाते हैं तो उन्हें कई बार हैरानी होती है। भक्तों का मानना है कि बाबा की कृपा से उनके जीवन की मुश्किल परिस्थितियां आसान हुईं और कई कठिन काम पूरे हुए।

    साल 1973 में जब नीम करोली बाबा का निधन हुआ तब धनंजय का परिवार भोपाल में ही था। उन्हें सुबह करीब आठ बजे ऑल इंडिया रेडियो के समाचार से बाबा के निधन की जानकारी मिली। उनके मुताबिक बाबा के निधन के बाद भी भक्तों की आस्था कम नहीं हुई। इसी संदर्भ में वह देवरहा बाबा से जुड़ा एक प्रसंग भी बताते हैं। उनके अनुसार जब कुछ भक्त देवरहा बाबा के पास पहुंचे और उन्हें बताया कि नीम करोली बाबा अब नहीं रहे तो वह भावुक होकर रोने लगे। उन्होंने भक्तों से कहा था कि नीम करोली बाबा कहीं नहीं गए और वह अपने भक्तों के साथ बने रहेंगे।

    डॉ. धनंजय शर्मा ने भोपाल में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने हमीदिया समेत कई अस्पतालों में काम किया और बाद में सेवानिवृत्त हुए। फिल्म हनुमान अंश की रिलीज से पहले इसके निर्देशक भी भोपाल पहुंचे थे और उन्होंने धनंजय को फिल्म दिखाई थी। शुरुआत में भोपाल में फिल्म को पर्याप्त शो नहीं मिल रहे थे और टिकटों की बिक्री भी कम थी। इसके बाद कुछ भक्तों ने पहल की। उन्होंने करीब 50 से 100 लोगों के टिकट खुद बुक किए और उन्हें फिल्म मुफ्त में दिखाई। धीरे धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। धनंजय इसे बाबा का चमत्कार मानते हैं।

    धनंजय की पत्नी शैलजा भी शादी के बाद बाबा से जुड़ीं। उनकी शादी 1987 में हुई थी। परिवार और भक्तों से बाबा के बारे में जानने के बाद उन्होंने कई किताबें पढ़ीं और धीरे धीरे उनकी भी बाबा के प्रति आस्था बढ़ती चली गई।

    वहीं नीम करोली बाबा के पुश्तैनी घर को लेकर भी विवाद सामने आया है। बताया जाता है कि बाबा का बचपन उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में बीता था। उनके पुश्तैनी घर और उससे जुड़े परिसर के रखरखाव को लेकर परिवार और ट्रस्ट के बीच विवाद की स्थिति है। परिवार की ओर से ट्रस्ट के पदाधिकारी पर कब्जे का आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर डॉ. धनंजय का कहना है कि उत्तराखंड के कैंची धाम और उत्तर प्रदेश के नीम करोली को लेकर लोगों में भ्रम है। उनके अनुसार दोनों अलग स्थान हैं और इनकी सही पहचान स्पष्ट होना जरूरी है।

    नीम करोली बाबा से जुड़ी इन पारिवारिक यादों ने एक बार फिर उनके जीवन और व्यक्तित्व को चर्चा में ला दिया है। फिल्म हनुमान अंश के जरिए बाबा की कहानी बड़े पर्दे तक पहुंची है और अब उनके परिवार की यादें लोगों को उनके जीवन का एक अलग और निजी पहलू दिखा रही हैं।

  • हनुमान अंश फिल्म को लेकर खास चर्चा में MP के कलाकार सीएम मोहन यादव से मिले 8 वर्षीय सात्विक शर्मा सुनील लोधी को भी मिला सम्मान

    हनुमान अंश फिल्म को लेकर खास चर्चा में MP के कलाकार सीएम मोहन यादव से मिले 8 वर्षीय सात्विक शर्मा सुनील लोधी को भी मिला सम्मान


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को फिल्म हनुमान अंश के बाल कलाकार मास्टरHanuman Ansh Movie, Mohan Yadav News, Neem Karoli Baba, Satvik Sharma, Sunil Lodhi सात्विक शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य भेंट की। महज 8 वर्ष की उम्र में फिल्म का हिस्सा बने सात्विक शर्मा की मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक संदेश से जुड़ी इस फिल्म में प्रदेश के कलाकारों की प्रतिभा को भी जगह दी गई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री ने फिल्म के बाल कलाकार से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया।

    फिल्म हनुमान अंश में सागर जिले के दिव्यांग गायक सुनील लोधी की आवाज भी सुनाई देगी। सुनील लोधी ने फिल्म के लिए बुंदेली भजन गाया है। उनकी प्रतिभा की जानकारी जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची तो उन्होंने सुनील लोधी को मुख्यमंत्री निवास बुलाया था। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें एक लाख रुपए की सम्मान निधि देकर सम्मानित किया था।

    सुनील लोधी की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। बुंदेली भाषा में उनकी गायकी और भजनों ने लोगों का ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ उनकी आंखों की रोशनी लौटाने के लिए उपचार में मदद का आश्वासन भी दिया था। अब उनकी आवाज फिल्म हनुमान अंश के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचेगी।

    नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म हनुमान अंश को लेकर मध्यप्रदेश से जुड़े कलाकारों की भागीदारी इसे और खास बना रही है। फिल्म में सुनील लोधी का बुंदेली भजन क्षेत्रीय संस्कृति और भक्ति की भावना को सामने लाने का काम करेगा। वहीं फिल्म के बाल कलाकार मास्टर सात्विक शर्मा की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने भी इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्सुकता बढ़ाई है।

    मुख्यमंत्री निवास में हुई मुलाकात के दौरान सात्विक शर्मा ने फिल्म में अपने अनुभव और भूमिका को लेकर भी चर्चा की। कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले सात्विक के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात एक यादगार अनुभव रही। मुख्यमंत्री ने बाल कलाकार का उत्साह बढ़ाया और फिल्म के लिए शुभकामनाएं दीं।

    फिल्म हनुमान अंश में आध्यात्मिकता भक्ति और नीम करोली बाबा से जुड़े प्रसंगों को केंद्र में रखा गया है। फिल्म में बुंदेली भजन का शामिल होना मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर सागर के दिव्यांग गायक सुनील लोधी को फिल्म में अपनी आवाज देने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।

    इस मुलाकात के बाद फिल्म से जुड़े कलाकारों और प्रदेश की प्रतिभाओं को लेकर चर्चा और बढ़ गई है। एक तरफ 8 वर्षीय बाल कलाकार सात्विक शर्मा फिल्म का हिस्सा बनकर अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ सुनील लोधी अपनी आवाज के जरिए बुंदेली लोक संस्कृति को बड़े पर्दे तक पहुंचाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा दोनों कलाकारों से मुलाकात और प्रतिभाओं को प्रोत्साहन दिए जाने से फिल्म हनुमान अंश को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ने की उम्मीद है।

  • शिक्षा विभाग के 2000 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं! परिवारों पर बढ़ा आर्थिक संकट अब आंदोलन की तैयारी

    शिक्षा विभाग के 2000 कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं! परिवारों पर बढ़ा आर्थिक संकट अब आंदोलन की तैयारी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों के सामने वेतन को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के अलग अलग जिलों में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे जनशिक्षकों बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारियों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का रोजमर्रा का खर्च बच्चों की पढ़ाई इलाज और दूसरी जरूरी जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों की तरह ही विभागीय जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ प्रभारी कर्मचारियों को उनके मूल विद्यालय से नियमित वेतन मिल रहा है। इसी अंतर को लेकर अब शिक्षक संगठन ने राज्य शिक्षा केंद्र का ध्यान आकर्षित किया है।

    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक को पत्र भेजकर लंबित वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का कहना है कि जनशिक्षक बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारी लगातार अपने विभागीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद दो माह से वेतन नहीं मिलना गंभीर विषय है। कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों को भी पूरा करना होता है लेकिन वेतन अटकने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।

    संगठन ने यह भी कहा है कि रक्षाबंधन जन्माष्टमी और 15 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका। ऐसे समय में जब परिवारों पर अतिरिक्त खर्च रहता है तब दो माह की सैलरी अटकने से आर्थिक दबाव और बढ़ गया है। कर्मचारियों के बीच इसे लेकर नाराजगी और असंतोष भी देखा जा रहा है।

    शिक्षक संगठन ने राज्य शिक्षा केंद्र से मांग की है कि प्रदेश के सभी जिलों में जनशिक्षकों बीआरसीसी और बीएसी कर्मचारियों के वेतन भुगतान की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए। जहां भी भुगतान लंबित है वहां संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर जल्द से जल्द वेतन जारी कराया जाए। संगठन का कहना है कि नियमित सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना उनका न्यायसंगत अधिकार है।

    वेतन भुगतान में देरी का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है बल्कि उनके परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ रहा है। बच्चों की स्कूल फीस पढ़ाई का खर्च दवाइयां घर का राशन और अन्य जरूरी भुगतान समय पर करना मुश्किल हो रहा है। संगठन ने विभाग से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है जिससे भविष्य में प्रतिनियुक्ति पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से लंबे समय तक न अटके।

    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने साफ किया है कि यदि लंबित दो माह का वेतन जल्द जारी नहीं किया गया तो इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। संगठन कर्मचारियों के हित में आगे आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है। अब कर्मचारियों की नजर राज्य शिक्षा केंद्र के अगले कदम पर है और उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित वेतन का भुगतान जल्द किया जाएगा।

  • हेडलाइन विकल्प 3: MP में मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच पटवारियों ने उठाए सवाल ड्रोन सर्वे से लेकर कब्जे तक विवाद हुआ तो फंसेंगे कर्मचारी

    हेडलाइन विकल्प 3: MP में मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी के बीच पटवारियों ने उठाए सवाल ड्रोन सर्वे से लेकर कब्जे तक विवाद हुआ तो फंसेंगे कर्मचारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी भूमि पर लंबे समय से काबिज लाखों परिवारों को स्वामित्व का अधिकार देने की सरकार की तैयारी के बीच पटवारी संवर्ग ने प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन 2026 योजना के तहत प्रदेश के 48 लाख से ज्यादा परिवारों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी है। लेकिन योजना लागू होने से पहले पटवारियों ने रजिस्ट्री दस्तावेज में उन्हें निष्पादक के तौर पर शामिल किए जाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटवारियों का कहना है कि यदि भविष्य में जमीन के स्वामित्व कब्जे या सीमांकन को लेकर विवाद सामने आता है तो व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी कर्मचारी पर डालना उचित नहीं होगा।

    पटवारी संवर्ग का तर्क है कि आबादी भूमि का मामला केवल खसरा और नक्शे तक सीमित नहीं है। कई मामलों में वास्तविक कब्जे के साथ वारिसों का दावा सह स्वामित्व चतुर्सीमा पुराने दस्तावेज और न्यायालय में चल रहे विवाद जैसे पहलू भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति ने भविष्य में जारी किए गए स्वामित्व अभिलेख को चुनौती दी तो दस्तावेज में निष्पादक के तौर पर दर्ज पटवारी भी कानूनी प्रक्रिया में उलझ सकता है। यही वजह है कि पटवारी इस भूमिका को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

    स्वामित्व योजना में ड्रोन सर्वे की भी अहम भूमिका रही है। गांवों के आबादी क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कर नक्शे और आकृतियां तैयार की गईं। इसके बाद इन अभिलेखों को जमीन की वास्तविक स्थिति से मिलाने का काम स्थानीय स्तर पर किया गया। पटवारियों का कहना है कि उन्होंने गांवों में जाकर चूना डालने से लेकर मकानों और कब्जे की स्थिति दर्ज करने तक कई स्तर पर काम किया। पड़ोसियों के बीच सीमा विवाद होने पर मौके की रिपोर्ट तैयार करना और पुराने राजस्व रिकॉर्ड से नए ड्रोन नक्शे का मिलान करना भी प्रक्रिया का हिस्सा रहा।

    पटवारियों के मुताबिक ड्रोन सर्वे के बाद तैयार नक्शों में कई जगह विसंगतियां सामने आईं। इन्हें सुधारने और अधिकार अभिलेख तैयार कराने में भी पटवारियों ने भूमिका निभाई। अब उनका सवाल है कि यदि मूल सर्वे में कोई गलती रह गई और उसी आधार पर भविष्य में किसी परिवार के स्वामित्व पर विवाद खड़ा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी। उनका कहना है कि सहायक और सत्यापनकर्ता की भूमिका निभाने वाले कर्मचारी को रजिस्ट्री का निष्पादक बनाना अलग तरह की कानूनी जिम्मेदारी पैदा कर सकता है।

    पटवारी संवर्ग ने पंजीयन से पहले गांवों में अधिकार अभिलेखों का सार्वजनिक सत्यापन कराने की मांग रखी है। इसके लिए मुनादी कराने के साथ सार्वजनिक सूचना जारी करने और शिविर लगाने का सुझाव दिया गया है। पटवारियों का कहना है कि ग्रामीणों को उनके नाम और संपत्ति से जुड़े अभिलेख देखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति है तो उसे सुधार या दावा पेश करने का समय दिया जाए। आपत्तियों के निराकरण के बाद ही अंतिम रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

    पटवारियों का यह भी कहना है कि दस्तावेज में निष्पादक के रूप में मध्य प्रदेश शासन की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। उनका सुझाव है कि जरूरत के अनुसार ग्राम पंचायत को भी प्रक्रिया में अधिकृत किया जा सकता है जबकि पटवारी को राजस्व रिकॉर्ड और मौके के सत्यापन तक सीमित रखा जाए। उनके अनुसार योजना को जमीन पर उतारने में वे पूरा सहयोग करेंगे लेकिन ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती जिसमें सरकारी प्रक्रिया की भविष्य की व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी कर्मचारी पर आ जाए।

    योजना से जुड़े प्रावधानों के मुताबिक निष्पादक या अधिकृत अधिकारी के रूप में तहसीलदार और राजस्व अनुविभागीय अधिकारी की भूमिका तय है। अधिकार अभिलेख पर अंतिम हस्ताक्षर भी तहसीलदार द्वारा किए जाते हैं। वहीं ड्रोन सर्वे और नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया में सर्वे ऑफ इंडिया और पंचायत विभाग की भूमिका बताई गई है। पटवारी मौके की स्थिति कब्जे सीमाओं और पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर रिपोर्ट उपलब्ध करा सकता है।

    पटवारी संवर्ग का कहना है कि उनके पास न्यायिक शक्तियां नहीं हैं। इसलिए स्वामित्व विवादों पर अंतिम निर्णय लेने वाली भूमिका उन्हें देना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि योजना का लाभ लाखों परिवारों तक पहुंचाने के साथ कर्मचारियों की कानूनी जवाबदेही को लेकर उठ रही चिंताओं का भी समाधान किया जाए।

  • MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी

    MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में इन दिनों एक से बढ़कर एक दिलचस्प किस्से सामने आ रहे हैं। कहीं नेता सोशल मीडिया पर 80 के दशक के रेट्रो अंदाज में नजर आ रहे हैं तो कहीं अपने अधिकारी के सम्मान में कर्मचारी आग की लपटों तक पहुंच गया। दूसरी तरफ श्योपुर में विकास कार्यों का हिसाब बताने पहुंचे सांसद को पंच और सरपंचों के विरोध के बाद कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। यानी प्रदेश की सियासत में इन दिनों खबरों के साथ किस्से भी खूब बन रहे हैं।

    सबसे पहले बात नेताओं के रेट्रो अंदाज की। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक का रंग छाया हुआ है। पुराने दौर के कपड़े पुराने गाने और उस जमाने की तस्वीरों जैसा अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है। अब इस ट्रेंड से मध्य प्रदेश की राजनीति भी अछूती नहीं रही। मुख्यमंत्री मोहन यादव से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक और दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ तक कई नेताओं की रेट्रो स्टाइल वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा और जीतू पटवारी जैसे नेताओं के फोटो भी पुराने दौर की झलक दिखा रहे हैं। किसी का अंदाज पुराने फिल्मी सितारे जैसा नजर आ रहा है तो किसी की तस्वीर देखकर 80 के दशक की यादें ताजा हो रही हैं।

    अब बात नर्मदापुरम की जहां अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी चर्चा का विषय बन गई। यहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता गंदगी और खराब सड़कों के विरोध में नगर पालिका के सीएमओ का पुतला जला रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी पुतले को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों से भिड़ गया। पहले उसने हाथों से आग बुझाने की कोशिश की। जब आग नहीं बुझी तो पैरों से उसे हटाने लगा। इसके बाद कर्मचारी ने अपनी शर्ट उतारकर उससे आग बुझाने की कोशिश की। आखिरकार पानी डालकर पुतले को जलने से बचा लिया गया। इस दौरान कर्मचारी खुद भी झुलस गया। उसका कहना था कि जब उसके अधिकारी का पुतला जलाया जा रहा था तो वह चुप कैसे रह सकता था। अधिकारी के पुतले को बचाने के लिए कर्मचारी का इस तरह आग में उतरना अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

    उधर श्योपुर में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर को पंच और सरपंचों के विरोध का सामना करना पड़ा। सांसद विकास कार्यों का जिक्र कर रहे थे तभी कार्यक्रम में मौजूद पंच और सरपंचों ने इलाके में काम नहीं होने को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विरोध बढ़ा तो एक उप सरपंच सांसद के सामने पहुंच गया। स्थिति ऐसी बनी कि सांसद को कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। विकास कार्यों का बखान करने पहुंचे सांसद के सामने जब स्थानीय प्रतिनिधियों ने ही सवाल खड़े किए तो कार्यक्रम का माहौल बदल गया।

    इसके बाद सागर से जुड़ी एक और चर्चा सामने आई है। जहरीली शराब कांड की जांच के लिए पहुंचे आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर कई घंटे तक सर्किट हाउस में ही इंतजार करना पड़ा। बताया गया कि पुलिस विभाग के एक अधिकारी से घटना से जुड़े तथ्यों और सबूतों को लेकर जानकारी मांगी गई थी लेकिन प्रक्रिया में काफी समय लग गया। बाद में मौके पर पहुंचने पर जांच अधिकारी को महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिले। अब इस मामले में शिकायत किए जाने की चर्चा है और आगे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनीति और प्रशासन से जुड़े ये किस्से खूब चर्चा बटोर रहे हैं। कहीं सोशल मीडिया का रेट्रो ट्रेंड नेताओं पर चढ़ा है तो कहीं अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी सुर्खियों में है और कहीं जनता के प्रतिनिधियों के सवालों ने नेताओं के दावों की परीक्षा ले ली है।

  • तीन दिन की गर्मी और उमस के बाद MP में फिर बारिश का दौर 12 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम

    तीन दिन की गर्मी और उमस के बाद MP में फिर बारिश का दौर 12 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन दिन के ब्रेक के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार से बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। जबलपुर रीवा और शहडोल संभाग के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 12 सितंबर से इंदौर नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। इससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को सतना रीवा मऊगंज सीधी मैहर शहडोल डिंडौरी अनूपपुर मंडला बालाघाट सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में कहीं धूप तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच मंदसौर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा समेत कई जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    पिछले तीन दिनों से प्रदेश में भारी बारिश का दौर थमा हुआ था। इसके चलते कई शहरों में तेज धूप निकलने लगी थी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। भोपाल समेत इंदौर उज्जैन ग्वालियर और जबलपुर में भी दिन के समय गर्मी का असर दिखाई दिया। हालांकि अब मौसम का मिजाज फिर बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र मानसून ट्रफ और पश्चिमी हिस्से में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं।

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन अब तक सामान्य से करीब 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक करीब 795.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक लगभग 862.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में सामान्य से करीब 2.6 इंच कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी करीब 2 प्रतिशत जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी करीब 13 प्रतिशत बताई गई है।

    प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई है। वहीं कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। अनूपपुर छतरपुर मैहर मऊगंज निवाड़ी पन्ना सतना शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ उमरिया समेत कई जिलों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। भोपाल बुरहानपुर दतिया गुना ग्वालियर खरगोन राजगढ़ श्योपुर और शिवपुरी जैसे जिलों में भी बारिश सामान्य से अधिक रही है।

    इस सीजन की शुरुआत में जून में बारिश की कमी ने प्रदेश के आंकड़ों को प्रभावित किया था। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार आया। हालांकि मानसून में कई बार ब्रेक आने के कारण जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। अब सितंबर में सक्रिय हो रहे नए सिस्टम से बारिश के आंकड़ों में और सुधार की उम्मीद है।

    भोपाल में भी सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। राजधानी में सितंबर महीने की औसत बारिश करीब 7 इंच मानी जाती है। पिछले कई वर्षों में सितंबर के दौरान सामान्य से ज्यादा बारिश भी दर्ज होती रही है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला फिर तेज हो सकता है।

  • 17 सितंबर से MP में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान CM मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने बताया पूरा प्लान बूथ से आंगनवाड़ी तक होंगे कार्यक्रम

    17 सितंबर से MP में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान CM मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने बताया पूरा प्लान बूथ से आंगनवाड़ी तक होंगे कार्यक्रम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसके तहत प्रदेशभर में अलग अलग स्तर पर सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की रूपरेखा साझा की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सेवा गतिविधियों के जरिए समाज के अलग अलग वर्गों तक पहुंचना है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यकाल में देश तथा मध्य प्रदेश में हुए बदलावों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

    अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को शाम 7 बजे से होगी। इस दिन प्रदेश के करीब 18 हजार बूथों पर लाभार्थियों के घरों में आशीर्वाद का दीप जलाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले प्रमुख स्थानों पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास है कि इस कार्यक्रम के जरिए लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को मजबूत किया जाए और सरकार की योजनाओं से जुड़े लोगों तक संगठन की पहुंच बढ़ाई जाए।

    अभियान के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों में मेरे सपनों का भारत कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए चित्रकला ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। विकसित भारत की संकल्पना को लेकर स्कूल स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसमें विद्यार्थियों को भविष्य के भारत को लेकर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

    इसके अलावा नमो सेवा अनकही कहानी नाम से भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यों पर आधारित 10 से 15 मिनट की नाट्य प्रस्तुतियां तैयार की जाएंगी। इनका मंचन चौक चौराहों और विभिन्न संस्थानों में किया जाएगा। अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।

    महिलाओं और बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए आंगन मिलन कार्यक्रम भी अभियान का अहम हिस्सा रहेगा। प्रदेश की 97 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ियों में तीन दिन तक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का सम्मान किया जाएगा। बच्चों और माताओं के साथ पोषण स्वास्थ्य तथा महिलाओं से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की जाएगी। इसके जरिए सरकार की योजनाओं और समाज के अंतिम वर्ग के बीच संवाद को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

    भाजपा प्रदेश के करीब 11 हजार 400 शक्ति केंद्रों पर सेवा की कहानी कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों में छोटी झांकियों और प्रस्तुतियों के जरिए देश में हुए बदलावों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन के साथ केंद्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल में हुए बदलावों को भी इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के सामने रखा जाएगा।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान शासन और समाज के मिलकर काम करने की भावना पर आधारित है। पार्टी का फोकस सेवा गतिविधियों के साथ सरकार की योजनाओं और उनके प्रभाव को जनता तक पहुंचाने पर रहेगा। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान में बूथ से लेकर आंगनवाड़ी और शक्ति केंद्र तक अलग अलग स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ऐसे में सितंबर और अक्टूबर के दौरान मध्य प्रदेश में भाजपा का यह अभियान संगठनात्मक गतिविधियों के साथ व्यापक जनसंपर्क अभियान के रूप में भी नजर आएगा।

  • एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी

    एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले की जांच अब भोपाल तक पहुंच गई है। STF की जांच में गोविंदपुरा क्षेत्र स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ का पता भी सामने आया है। दावा है कि इसी एक पते का इस्तेमाल 40 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने के लिए किया गया। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो गया है। आखिर एक ही पते पर रहने वाले अलग अलग लोगों के नाम से इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट के आवेदन कैसे आगे बढ़े और सत्यापन के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई।

     टीम ने मामले की पड़ताल के लिए अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंचकर वहां मौजूद भंते कश्यप आनंद से बातचीत की। भंते के मुताबिक उन्हें मठ के पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और करीब दो दिन पहले ही मठ में आए हैं। उनके आने के बाद अब तक न STF की टीम जांच के लिए मठ पहुंची और न ही किसी दूसरी जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले में पूछताछ की है।

    भंते कश्यप आनंद ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि मठ के पते से कितने लोगों के पासपोर्ट बनाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने मठ का पता देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया होगा तो नियमानुसार पुलिस को पते का सत्यापन करना चाहिए था। हालांकि उनकी जानकारी में ऐसा कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार वह भोजन के लिए मठ से बाहर चले जाते हैं इसलिए उनकी गैरमौजूदगी में कोई टीम आई हो इसकी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन मठ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने भी उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।

    यही बात अब STF की जांच को और गंभीर बना रही है। अगर जांच एजेंसी के मुताबिक एक ही मठ के पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट बने हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन आवेदनों में दिए गए दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। पुलिस वेरिफिकेशन में आवेदकों की पहचान और उनके वास्तविक निवास की पुष्टि कैसे की गई। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मठ का पता पासपोर्ट आवेदनों में किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।

    इस पूरे मामले की शुरुआत डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के पते से सामने आए संदिग्ध पासपोर्ट से हुई थी। जांच आगे बढ़ी तो मध्य प्रदेश के अलग अलग स्थानों के पतों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई। STF के मुताबिक इनमें 22 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है। जांच में फर्जी आधार कार्ड वोटर आईडी निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    STF ने मामले में रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार रियाल कई पासपोर्ट में गवाह बना था और उसके नाम से भी चार पासपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के कनेक्शन असम समेत दूसरे राज्यों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। STF अब इस मामले में संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में भी जांच कर रही है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मठ के एक पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया में यह असामान्य स्थिति पकड़ में क्यों नहीं आई। अब STF पासपोर्ट आवेदन से लेकर दस्तावेज तैयार होने और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि मठ का पता किसने इस्तेमाल किया दस्तावेज कहां तैयार हुए और इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने के पीछे असली नेटवर्क कितना बड़ा है।