Category: Madhya Pradesh

  • MP में आज से बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर 3 दिन तक परेशान होंगे ग्राहक 40 हजार बैंककर्मियों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता

    MP में आज से बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर 3 दिन तक परेशान होंगे ग्राहक 40 हजार बैंककर्मियों की हड़ताल ने बढ़ाई चिंता

    भोपाल।  मध्य प्रदेश में आज शुक्रवार को बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। पांच दिवसीय बैंकिंग वीक की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी एक दिन की हड़ताल पर रहेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले होने वाली इस हड़ताल के कारण प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। भोपाल में बैंक कर्मचारी एकजुट होकर प्रदर्शन भी करेंगे। हड़ताल भले ही केवल शुक्रवार को है लेकिन आम लोगों पर इसका असर लगातार तीन दिनों तक दिखाई दे सकता है क्योंकि इसके बाद शनिवार और रविवार को बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    बैंक यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग सरकार के सामने रखी जा रही है लेकिन इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वर्तमान व्यवस्था में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रहते हैं जबकि बाकी शनिवार को कामकाज होता है। कर्मचारियों की मांग है कि हर शनिवार को अवकाश घोषित कर सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिन बैंकिंग सेवाएं संचालित की जाएं। इसके बदले सप्ताह के पांच कार्यदिवसों में रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

    हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं में नकद निकासी जमा चेक क्लीयरेंस और अन्य काउंटर आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। खासकर बड़ी रकम निकालने या जमा करने वाले ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग यूपीआई एटीएम और मोबाइल बैंकिंग जैसी कई सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रह सकती हैं लेकिन नकद और शाखा से जुड़े जरूरी कामों के लिए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ सकता है।

    यूनियनों की मांग केवल पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह तक सीमित नहीं है। संगठन स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई पीएलआई योजना का भी विरोध कर रहे हैं। यूनियन नेताओं का आरोप है कि यह योजना बैंक अधिकारियों के एक छोटे वर्ग को अधिक लाभ देने वाली है और इससे कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ सकती है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित प्रोत्साहन की नीति के बजाय कर्मचारियों के व्यापक हितों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    बैंक यूनियनों के मुताबिक पेंशन अपडेशन एक्स ग्रेशिया की समीक्षा एनपीएस को ओपीएस में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान डीए व्यवस्था जैसी मांगें भी अभी लंबित हैं। इसके साथ ही बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क सब स्टाफ और आर्म्ड गार्ड की भर्ती की मांग भी उठाई जा रही है। यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की कमी का सीधा असर बैंकिंग सेवाओं और मौजूदा कर्मचारियों के काम के दबाव पर पड़ रहा है।

    सबसे बड़ी चिंता यह है कि सितंबर में बैंकिंग सेवाओं पर दूसरी बड़ी बाधा भी आ सकती है। यूनियनों के कार्यक्रम के अनुसार 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद 28 से 30 सितंबर तक फिर हड़ताल प्रस्तावित है। ऐसे में लगातार पांच दिनों तक बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। फिलहाल शुक्रवार की हड़ताल को लेकर बैंक यूनियन और सरकार के बीच बातचीत जारी है लेकिन सकारात्मक समाधान नहीं निकलने के कारण आंदोलन का कार्यक्रम बरकरार रखा गया है। ऐसे में बैंक ग्राहकों के लिए सलाह है कि जरूरी नकद लेनदेन चेक जमा करने और शाखा से जुड़े दूसरे काम पहले से निपटा लें ताकि छुट्टियों और हड़ताल के कारण उन्हें अतिरिक्त इंतजार न करना पड़े।

  • ‘प्रतिमा हटाई तो करूंगी अनशन’, उज्जैन पहुंचीं हर्षा रिछारिया, खड़े हनुमान के किए दर्शन

    ‘प्रतिमा हटाई तो करूंगी अनशन’, उज्जैन पहुंचीं हर्षा रिछारिया, खड़े हनुमान के किए दर्शन


    उज्जैन। खड़े हनुमान की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह शिफ्ट करने का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच प्रयागराज कुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया उज्जैन पहुंचीं और खड़े हनुमान मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने प्रतिमा को मौजूदा स्थान से हटाने की कोशिश का विरोध करते हुए कहा कि यदि प्रतिमा हटाई गई तो वे अनशन पर बैठेंगी।

    मीडिया से बातचीत में हर्षा रिछारिया ने कहा कि विकास और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हिंदू समाज पहले ही कई मंदिरों को लेकर काफी कुछ स्वीकार कर चुका है। ऐसे में प्रशासन को कम से कम खड़े हनुमान मंदिर को छोड़ देना चाहिए और प्रतिमा को उसके वर्तमान स्थान पर ही रहने देना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई तो वे इसका विरोध करेंगी। हर्षा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रतिमा हटाई गई तो वह अनशन करेंगी।

    तीन बार हटाने की कोशिश, नहीं हिली प्रतिमा

    दरअसल, उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के काम के दौरान खड़े हनुमान की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने की तैयारी की गई थी। नई जगह मंदिर का ढांचा भी तैयार किया जा चुका है। योजना के मुताबिक प्रतिमा को वहां स्थापित किया जाना था, लेकिन अब तक खड़े हनुमान अपनी पुरानी जगह पर ही विराजमान हैं।

    बताया गया है कि प्रतिमा को तीन बार हटाने की कोशिश की जा चुकी है, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली। विवाद का एक प्रमुख कारण प्रतिमा की दिशा भी बताई जा रही है। वर्तमान में खड़े हनुमान की प्रतिमा दक्षिणमुखी है, जबकि नई जगह पर प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होने की बात सामने आई है। इसी को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में विरोध है।

    50 फीट चौड़ी हो चुकी है सड़क

    उज्जैन शहर में सड़क चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट के तहत कई पुराने निर्माण हटाए गए हैं। कान्थल चौराहे से छतरी चौक तक सड़क को 50 फीट चौड़ा किया गया है। इसी प्रक्रिया के बीच खड़े हनुमान की प्रतिमा सड़क के बीच दिखाई दे रही है और इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर विवाद बना हुआ है।

    अब हर्षा रिछारिया के मंदिर पहुंचने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दर्शन के बाद उन्होंने प्रतिमा को हटाने की कोशिश होने पर अनशन करने की चेतावनी दी है।

  • MP में फिर बदला मौसम, 12 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 12 सितंबर से इंदौर संभाग भी भीगेगा

    MP में फिर बदला मौसम, 12 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 12 सितंबर से इंदौर संभाग भी भीगेगा


    भोपाल। तीन दिन के ब्रेक के बाद मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 12 सितंबर से इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में भी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    शुक्रवार को बाकी जिलों में मौसम मिला-जुला रहेगा। कहीं धूप रहेगी तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सिंगरौली, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी शामिल हैं।

    तीन दिन थमी रही बारिश, बढ़ी गर्मी-उमस

    प्रदेश में पिछले तीन दिनों से भारी बारिश नहीं हुई है। बारिश का दौर थमने से गर्मी और उमस का असर बढ़ गया। गुरुवार को भोपाल में तेज धूप रही। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी दिनभर धूप खिली रही।

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और मानसून ट्रफ भी सक्रिय है। इसके अलावा पश्चिमी हिस्से में चक्रवाती परिसंचरण की सक्रियता है। इन मौसमी सिस्टम के असर से प्रदेश में दोबारा बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    सामान्य से 8% कम बारिश

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 795.3 मिमी यानी 31.3 इंच बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 862.5 मिमी यानी 33.9 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक 2.6 इंच कम बारिश हुई है और कुल बारिश सामान्य से 8% कम है।

    क्षेत्रवार स्थिति देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 2%, जबकि पश्चिमी हिस्से में 13% कम बारिश दर्ज हुई है।

    33 जिलों में बारिश का आंकड़ा पीछे

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से करीब 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने और अच्छी बारिश हुई, जिससे सीजन का आंकड़ा सुधरा। बुधवार तक पूर्वी हिस्से में बारिश सामान्य से सिर्फ 1% कम रह गई थी।

    पश्चिमी हिस्से में आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 56% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन 22 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

  • देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट

    देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट


    देवास। देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर खाद्य विभाग ने गुरुवार को बड़ी जांच कार्रवाई की। खाद्य विभाग राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने उज्जैन रोड स्थित कई दूध डेयरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उज्जैन से पहुंची चलित प्रयोगशाला की मदद से करीब छह डेयरियों में दूध की रैपिड किट के जरिए जांच की गई। जांच के दौरान ज्यादातर डेयरियों में दूध निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। हालांकि एक डेयरी के दूध की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को आशंका हुई जिसके बाद वहां से सैंपल लेकर विस्तृत जांच के लिए भोपाल भेजा गया है।

    अधिकारियों के मुताबिक मौके पर की गई प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध की गुणवत्ता को लेकर जहां संदेह सामने आया वहां से नमूना सुरक्षित तरीके से लिया गया। अब इस सैंपल की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। भोपाल से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दूध में वास्तव में किसी तरह की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कमी है या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयुक्त जांच टीम में नायब तहसीलदार हरिओम ठाकुर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने डेयरियों में पहुंचकर दूध की गुणवत्ता की जांच करने के साथ वहां उपलब्ध अन्य दूध उत्पादों को भी देखा। अधिकारियों ने बताया कि जांच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और दूध तथा दूध से बने उत्पादों में किसी तरह की मिलावट की संभावना को सामने लाना है।

    जांच के दौरान डेयरियों में मौजूद दूध उत्पादों की भी पड़ताल की गई। इनमें सुक्रोज की मात्रा की जांच भी शामिल रही। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध उत्पादों से जुड़े जरूरी तथ्यों को दर्ज किया। इस तरह की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे दूध और अन्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

    खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान ज्यादातर दुकानों पर दूध तय मानकों के अनुसार मिला। हालांकि एक डेयरी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी डेयरी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। भोपाल से आने वाली प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    दूध रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा खाद्य पदार्थ है और बड़ी संख्या में लोग इसका सीधे सेवन करते हैं। ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर समय समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। देवास में हुई इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में दूध मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित डेयरी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

  • देवास नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हंगामा, पार्षद ने दिया धरना; जनता के लिए काम कराने पर अड़े

    देवास नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हंगामा, पार्षद ने दिया धरना; जनता के लिए काम कराने पर अड़े


    देवास । देवास में वार्ड क्रमांक 9 के विकास कार्यों को लेकर नगर निगम और पार्षद के बीच विवाद सामने आया है। बुधवार को वार्ड पार्षद दीपेश कानूनगो ने बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और महिलाओं के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। पार्षद और उनके साथ पहुंचे लोगों ने निगम परिसर की सीढ़ियों पर बैठकर नारेबाजी की। इस दौरान नगर निगम प्रशासन के साथ महापौर और महापौर प्रतिनिधि के खिलाफ भी नारे लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने वार्ड में विकास कार्यों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    पार्षद दीपेश कानूनगो का कहना है कि वार्ड क्रमांक 9 के लोगों को पिछले करीब एक साल से विकास कार्यों का इंतजार है। उनके मुताबिक इस अवधि में वार्ड के लिए कोई नया विकास कार्य मंजूर नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में करीब 450 विकास कार्यों के टेंडर किए गए हैं लेकिन इनमें वार्ड क्रमांक 9 का एक भी काम शामिल नहीं है। पार्षद का आरोप है कि इस स्थिति के कारण वार्ड के लोगों को मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने कहा कि वार्ड की समस्याओं को लेकर वे लगातार नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करते रहे हैं। कई बार समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त को पूरे मामले की जानकारी दी है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    पार्षद के अनुसार महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल से भी उन्होंने वार्ड के विकास को लेकर बातचीत करने की कोशिश की है। उनका आरोप है कि अब महापौर प्रतिनिधि उनका फोन तक नहीं उठा रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ निगम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने भी वार्ड की समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि लंबे समय से विकास कार्यों की जरूरत महसूस की जा रही है लेकिन लोगों को केवल आश्वासन मिल रहे हैं। महिलाओं ने कहा कि जनता को सिर्फ भरोसा दिलाने के बजाय धरातल पर काम शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने निगम प्रशासन से वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द निराकरण करने की मांग की।

    वहीं नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार ने पार्षद की ओर से रखी गई मांगों को लेकर कहा कि पार्षद ने कुछ मुद्दे सामने रखे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड में पहले भी विकास कार्य कराए गए हैं। निगम आयुक्त के इस बयान के बाद अब वार्ड में विकास कार्यों को लेकर पार्षद और निगम प्रशासन के दावों में अंतर सामने आया है। प्रदर्शन के जरिए पार्षद ने वार्ड की समस्याओं को लेकर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ाया है। अब देखना होगा कि निगम की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और वार्ड क्रमांक 9 में नए विकास कार्यों को लेकर कब तक स्थिति स्पष्ट होती है।

  • दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध

    दो दिन में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क हादसों का शिकार रीवा में फिर 5 की मौत सड़क पर कीर्तन कर जताया विरोध


    रीवा । रीवा सीधी मार्ग पर गुढ़ थाना क्षेत्र के गुढ़वा पेट्रोल पंप के पास देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने सड़क पर बैठे करीब 6 से 7 गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि पांच गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अन्य गोवंश घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों और गौ सेवा से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। हादसे को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने सड़क पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    घटना से नाराज लोग सड़क पर बैठकर कीर्तन करने लगे। प्रदर्शन के कारण रीवा सीधी मार्ग पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सड़क पर घायल अवस्था में पड़े गोवंश के उपचार की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की। साथ ही हादसे में मारे गए गोवंश को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क पर खुले में घूमने वाले गोवंश की वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।

    बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों और गौ सेवकों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से घायल गोवंश को उपचार उपलब्ध कराने और मृत गोवंश को सम्मानजनक तरीके से हटाने की मांग की। इसके साथ ही हादसे को अंजाम देने वाले अज्ञात वाहन की पहचान कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।

    गोसेवकों के मुताबिक यह इस मार्ग पर लगातार दूसरा बड़ा हादसा है। इससे एक दिन पहले भी रीवा सीधी मार्ग पर कसई स्टैंड के पास करीब 12 गोवंश अज्ञात वाहन की चपेट में आ गए थे। लगातार दो दिनों में बड़ी संख्या में गोवंश के सड़क हादसों का शिकार होने से गौ सेवा से जुड़े लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

    गोसेवक राधा मोहन ने भी लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सड़क पर खुले में घूम रहे गोवंश के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन को अभियान चलाकर ऐसे गोवंश को सुरक्षित तरीके से गौशालाओं तक पहुंचाना चाहिए। उनका कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समस्या के स्थायी समाधान पर ध्यान देने की जरूरत है।

    प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें घायल गोवंश का तत्काल इलाज कराने के साथ सड़क पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और हादसे के जिम्मेदार वाहन की पहचान कर कार्रवाई करना शामिल है। मांगों को लेकर लोगों ने कुछ समय तक चक्काजाम किया। मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने लोगों को समझाइश दी जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।

    लगातार दो दिनों में हुए हादसों ने सड़क सुरक्षा के साथ आवारा गोवंश की समस्या को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या से निपटने के लिए क्या स्थायी कदम उठाता है और अज्ञात वाहन की पहचान कर उसके चालक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन

    कल्पना मिश्रा मामले में बढ़ा आक्रोश, 9 दिन से अनशन पर पिता; कांग्रेस ने भी तेज किया आंदोलन


    रीवा । रीवा में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में न्याय और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर उनके पिता की भूख हड़ताल लगातार जारी है। गुरुवार को अनशन के नौवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। स्वास्थ्य में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अब ठीक से बैठ भी नहीं पा रहे हैं। कमजोरी बढ़ने के कारण उन्हें लेटकर ही अनशन करना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि लगातार कई दिनों तक भोजन नहीं लेने से उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    कल्पना मिश्रा के पिता रीवा के सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक पहले वे बैठकर भूख हड़ताल कर रहे थे लेकिन अब कमजोरी इतनी बढ़ गई है कि उनके लिए बैठना भी मुश्किल हो गया है। परिवार के लोगों ने बताया कि उनकी बातचीत करने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अनशन समाप्त करने से इनकार किया है। परिजनों का कहना है कि जब तक कल्पना को न्याय नहीं मिलता और मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    कल्पना मिश्रा की मौत के बाद से ही परिवार की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी। इसी को लेकर कार्रवाई की मांग लगातार उठाई जा रही है। परिवार की ओर से अलग अलग स्तर पर विरोध और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। अब पिता की लगातार बिगड़ती सेहत ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

    इधर कल्पना मिश्रा मामले को लेकर कांग्रेस का आंदोलन भी जारी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार को रीवा पहुंचे और अग्रसेन चौराहे पर पार्टी की ओर से चलाए जा रहे धरने में शामिल हुए। उन्होंने आंदोलन को समर्थन दिया। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि पहले भी इस धरने में पहुंच चुके हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवालों और कल्पना मिश्रा मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।

    कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आम लोगों को बेहतर इलाज और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था मिलनी चाहिए। वहीं कल्पना मिश्रा के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    सिरमौर चौराहे पर पिता की बिगड़ती हालत के बीच परिवार और समर्थकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। नौ दिन से चल रही भूख हड़ताल का उनके स्वास्थ्य पर साफ असर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद परिवार का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक अनशन समाप्त नहीं करेंगे। अब इस मामले में प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और परिवार की मांगों पर किस तरह कार्रवाई होती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • शराब के खिलाफ प्रदर्शन में बवाल! शिवपुरी में महिलाओं और पुलिस-अबकारी टीम की भिड़ंत

    शराब के खिलाफ प्रदर्शन में बवाल! शिवपुरी में महिलाओं और पुलिस-अबकारी टीम की भिड़ंत


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में शराब दुकानों के विरोध को लेकर चल रहा प्रदर्शन गुरुवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया जब अमोला थाना क्षेत्र के अमोल गांव में महिलाओं और पुलिस तथा आबकारी विभाग की टीम के बीच विवाद हो गया। शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर पहुंची महिलाओं ने कथित तौर पर लाठियां उठा लीं और पुलिस तथा आबकारी कर्मचारियों की ओर बढ़ गईं। स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को मौके से पीछे हटना पड़ा। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति दिखाई दे रही है।

    जानकारी के अनुसार गुरुवार को पुलिस और आबकारी विभाग की टीम पहले से ही शराब दुकान पर मौजूद थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंचीं और दुकान बंद कराने की मांग करने लगीं। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। महिलाओं ने लाठियां हाथ में ले लीं और टीम की ओर बढ़ने लगीं। हालात को देखते हुए पुलिस और आबकारी कर्मचारियों ने पीछे हटना उचित समझा। दोपहर तक गांव में तनाव की स्थिति बनी रही और पुलिस मौके पर मौजूद रही।

    शिवपुरी जिले में शराब के खिलाफ महिलाओं का विरोध पिछले करीब एक महीने से अलग अलग इलाकों में जारी है। महिलाओं की ओर से अवैध और कच्ची शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग लगातार उठाई जा रही है। पिछोर और खनियाधाना क्षेत्र में भी महिलाओं ने शराब के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कई जगहों पर महिलाओं ने शराब बेचने वालों के ठिकानों से कच्ची और अवैध शराब बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दी थी। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान चक्काजाम की स्थिति भी बनी।

    अमोला क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से सरकारी शराब दुकानों को लेकर लगातार विरोध की घटनाएं सामने आ रही हैं। 8 सितंबर को नया अमोला नंबर दो में महिलाओं ने शराब दुकान में पहुंचकर शराब की पेटियां बाहर निकाल दी थीं और उनमें आग लगा दी थी। इसके बाद 9 सितंबर को भी महिलाएं दुकान हटाने की मांग को लेकर देर शाम तक मौके पर डटी रहीं। आबकारी विभाग की ओर से पांच दिन में दुकान हटाने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन शांत हुआ था।

    इसी दौरान देर रात थरखेड़ा गांव में भी महिलाओं ने शराब दुकान के खिलाफ प्रदर्शन किया। यहां दुकान के भीतर रखी शराब की पेटियां बाहर निकालने की बात सामने आई। इसके अगले दिन अमोल गांव में शराब दुकान बंद कराने पहुंची महिलाओं और पुलिस तथा आबकारी टीम के बीच विवाद हो गया। लगातार तीन दिनों से सामने आ रही घटनाओं ने प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था की चुनौती बढ़ा दी है।

    लगातार हो रहे विरोध के बीच शराब ठेकेदारों ने भी जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि नया अमोला थरखेड़ा अमोल मायापुर और खोड़ की सरकारी शराब दुकानों में पिछले तीन दिनों के दौरान तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुई हैं। उनका कहना है कि दुकानों की सुरक्षा नहीं हो पाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठेकेदारों ने इन परिस्थितियों के बीच शराब दुकानों के लाइसेंस सरेंडर करने की बात कही है।

    अब प्रशासन के सामने एक ओर महिलाओं की शराब विरोधी मांग और दूसरी ओर शराब ठेकेदारों की सुरक्षा तथा कारोबार से जुड़ी शिकायतें हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और विरोध कर रही महिलाओं की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई

    भोपाल में रिहायशी प्लॉट पर कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती, 7 दिन में दस्तावेज नहीं मिले तो होगी कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत के इस आदेश के बाद ऐसे लोगों और प्रतिष्ठानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो आवासीय जमीन का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया है कि यदि उनके पास आवासीय भूखंड पर किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैध अनुमति है तो उसके दस्तावेज सात दिन के भीतर भोपाल नगर निगम के सामने पेश करने होंगे। इसके बाद नगर निगम दस्तावेजों की जांच करेगा और यदि अनुमति वैध नहीं पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।

    हाईकोर्ट का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब रिहायशी इलाकों में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित जमीन पर होटल मॉल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय रहवासियों की ओर से लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं कि इस तरह की गतिविधियों से उनके इलाकों की व्यवस्था प्रभावित होती है। खासकर ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या के साथ शोर और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की बात कही जाती रही है।

    अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में वैध अनुमति से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या मामले में वर्ष 2024 में दिए गए फैसले के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। इससे अब नगर निगम के लिए भी आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है।

    इस मामले में याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों को व्यावसायिक गतिविधियों के अनियंत्रित विस्तार से बचाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार अब नगर निगम के सामने न्यायिक निर्देश मौजूद हैं जिसके आधार पर संबंधित प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जा सकती है।

    रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इस आदेश से उम्मीद जगी है। रहवासी लवनीश भाटी का कहना है कि कई इलाकों में लंबे समय से ट्रैफिक पार्किंग और दूसरी समस्याएं बनी हुई हैं। शिकायतों के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी रही है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उम्मीद है कि नगर निगम जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करेगा।

    संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी अदालत के आदेश का स्वागत किया है। समिति ने नगर निगम से मांग की है कि रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अनुमति की जांच की जाए। जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध अनुमति नहीं है उनके खिलाफ नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल आने वाले सात दिनों में संबंधित पक्षों को अपने दस्तावेज नगर निगम के सामने प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच और उनकी वैधता के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • फ्रिज खोला तो सामने आया नशे का काला कारोबार, जबलपुर पुलिस ने 24 नशीले इंजेक्शन किए जब्त

    फ्रिज खोला तो सामने आया नशे का काला कारोबार, जबलपुर पुलिस ने 24 नशीले इंजेक्शन किए जब्त


    जबलपुर । जबलपुर में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गोरखपुर थाना पुलिस ने सेठीनगर निवासी बड़कू सोनकर को उसके घर से पकड़ा है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 24 प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं। इनमें 11 बुप्रेनोरफिन और 13 फेनिरामाइन मैलेट के इंजेक्शन शामिल हैं। पुलिस ने नशीले इंजेक्शनों की बिक्री से मिले 3950 रुपए भी जब्त किए हैं। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के मुताबिक 9 सितंबर को गोरखपुर थाना प्रभारी नितिन कमल को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सेठीनगर निवासी बड़कू सोनकर अपने घर से नशीले इंजेक्शनों की बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने टीम तैयार की और बताए गए स्थान पर दबिश देने के लिए पहुंच गई। पुलिस को आशंका थी कि आरोपी नशीले इंजेक्शनों को किसी सुरक्षित जगह पर छिपाकर रख सकता है।

    पुलिस टीम ने घर की तलाशी शुरू की। इसी दौरान आंगन में निर्माणाधीन कमरे में रखा एक फ्रिज पुलिस के निशाने पर आया। फ्रिज की तलाशी लेने पर उसके अंदर एक थैला मिला। जब पुलिस ने थैला खोला तो उसमें प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन रखे हुए थे। गिनती करने पर कुल 24 इंजेक्शन बरामद हुए। इनमें 11 इंजेक्शन बुप्रेनोरफिन के जबकि 13 इंजेक्शन फेनिरामाइन मैलेट के बताए गए हैं।

    पुलिस ने मौके से नशीले इंजेक्शनों की बिक्री से प्राप्त 3950 रुपए भी जब्त किए। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह इन प्रतिबंधित इंजेक्शनों को नशे के आदी लोगों को बेचता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी को नशीले इंजेक्शनों की सप्लाई कहां से मिलती थी और इस अवैध कारोबार में उसके साथ और कौन लोग जुड़े हुए हैं।

    जांच के दौरान पुलिस को आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी मिला है। पुलिस के अनुसार बड़कू सोनकर आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से छह से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें आर्म्स एक्ट के साथ सट्टा एक्ट एनडीपीएस एक्ट और आबकारी एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। इस वजह से पुलिस आरोपी से पूछताछ में पुराने मामलों और नशे के नेटवर्क से जुड़े पहलुओं को भी खंगाल रही है।

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद इंजेक्शन किस माध्यम से आरोपी तक पहुंचे थे और इनकी सप्लाई किन लोगों तक की जाती थी। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से नशीले इंजेक्शनों की अवैध सप्लाई से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है।

    थाना प्रभारी नितिन कमल के नेतृत्व में पुलिस टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क से जुड़े संभावित लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।