Category: Madhya Pradesh

  • परिवार के विरोध के बावजूद जैन दीक्षा लेना चाहती है 20 साल की युवती हाई कोर्ट ने कहा फैसला लेने के लिए स्वतंत्र

    परिवार के विरोध के बावजूद जैन दीक्षा लेना चाहती है 20 साल की युवती हाई कोर्ट ने कहा फैसला लेने के लिए स्वतंत्र


    इंदौर । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 20 वर्षीय युवती के जैन दीक्षा लेने के फैसले को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। युवती सांसारिक जीवन छोड़कर जैन साध्वी के रूप में दीक्षा लेना चाहती है लेकिन उसके परिवार के लोग उसके इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। उसे अपनी पसंद के धर्म का पालन करने और धार्मिक जीवन अपनाने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    मामला इंदौर से जुड़ा है जहां युवती ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा की मांग की थी। युवती ने बताया कि वह श्वेतांबर जैन धर्म से प्रभावित है और लंबे समय से धार्मिक जीवन अपनाने की इच्छा रखती है। उसका उद्देश्य सांसारिक जीवन से अलग होकर जैन साध्वी के रूप में दीक्षा लेना है। हालांकि उसके माता पिता और अन्य रिश्तेदार इस निर्णय से सहमत नहीं हैं।

    युवती को आशंका थी कि परिवार के सामाजिक प्रभाव के कारण उसके फैसले में बाधा डाली जा सकती है। इसी आशंका को लेकर उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अपनी स्वतंत्रता तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

    मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकल पीठ ने की। कोर्ट ने युवती के माता पिता की भावनाओं को भी समझा और उनके दुख तथा चिंता के प्रति सहानुभूति जताई। हालांकि न्यायालय ने यह भी साफ किया कि युवती बालिग है और अपने जीवन की दिशा तय करने का उसे अधिकार है।

    कोर्ट ने कहा कि किसी बालिग नागरिक को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी धर्म या जीवन पद्धति को अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसी तरह यदि कोई बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से धार्मिक जीवन अपनाना चाहता है तो उसके इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। न्यायालय ने युवती के मौलिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण माना।

    हाई कोर्ट ने युवती को अपनी सुरक्षा के लिए संबंधित थाना प्रभारी के समक्ष आवेदन देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आवेदन मिलने के बाद पुलिस को उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इस आदेश के जरिए न्यायालय ने युवती के दीक्षा लेने के व्यक्तिगत फैसले पर सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय उसकी स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक बालिग युवती की व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल सामने आया है। परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए भी कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वयस्क व्यक्ति को अपने जीवन और आस्था से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता हासिल है। अब युवती अपनी इच्छा के अनुसार आगे की धार्मिक प्रक्रिया अपना सकती है और पुलिस उसकी सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाएगी।

  • इंदौर में होटल के कमरे में ब्यूटिशियन की संदिग्ध मौत कारोबारी के साथ पहुंची थी महिला मुंह से झाग निकलने के बाद मौत से मचा हड़कंप

    इंदौर में होटल के कमरे में ब्यूटिशियन की संदिग्ध मौत कारोबारी के साथ पहुंची थी महिला मुंह से झाग निकलने के बाद मौत से मचा हड़कंप


    इंदौर । इंदौर के तिलक नगर इलाके में एक होटल के कमरे में 32 वर्षीय ब्यूटिशियन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। महिला की पहचान सोनाली शर्मा के रूप में हुई है। वह एक पाइप कारोबारी के साथ होटल में रुकी थी। कुछ घंटे बाद उसकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई और कारोबारी उसे अस्पताल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद कारोबारी अस्पताल से चला गया। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक सोनाली बुधवार दोपहर करीब दो बजे तिलक नगर स्थित एलएक्स होटल पहुंची थी। उसके साथ पाइप कारोबारी दीपक खंडेलवाल भी था। दोनों ने होटल में कमरा लिया था। कुछ समय बाद दीपक कमरे से बाहर आया और होटल स्टाफ को महिला की तबीयत खराब होने की जानकारी दी। उसने बताया कि महिला को अस्पताल ले जाना है। इसके बाद वह सोनाली को अक्षत अस्पताल लेकर गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    महिला की मौत के बाद कारोबारी उसे अस्पताल में छोड़कर वहां से चला गया। इधर होटल के कमरे में कोई हलचल नहीं होने पर स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। महिला की हालत को देखते हुए शुरुआती तौर पर जहर खाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस के अनुसार महिला के मुंह से झाग निकल रहा था। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने होटल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में ली है। अब फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला होटल में कब पहुंची और उसके साथ कौन कौन मौजूद था। होटल में ठहरने के दौरान क्या हुआ इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।

    सोनाली के पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी पिंक सिटी पार्लर में काम करती थी। इसी पार्लर के जरिए उसकी पहचान दीपक खंडेलवाल से हुई थी। पिता के मुताबिक कारोबारी पहले भी दो बार सोनाली के घर आ चुका था। बुधवार को सोनाली घर से पार्लर जाने की बात कहकर निकली थी। इसके बाद वह कारोबारी के साथ होटल पहुंची।

    पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सोनाली अपने पति से अलग रह रही थी। उसका पति करीब एक साल से अलग रह रहा है और ड्राइवर का काम करता है। सोनाली की दो बेटियां हैं जिनकी उम्र 8 और 14 साल बताई गई है।

    तिलक नगर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कारोबारी दीपक खंडेलवाल की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस उससे पूछताछ कर घटना से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशना चाहती है। होटल की सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जांच में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल पुलिस मौत की वजह और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

  • कृषि प्रशिक्षण केंद्र में प्राचार्य के कमरे से स्मैक बरामद पुलिस ने 14 पुड़िया जब्त कीं NDPS एक्ट में केस दर्ज

    कृषि प्रशिक्षण केंद्र में प्राचार्य के कमरे से स्मैक बरामद पुलिस ने 14 पुड़िया जब्त कीं NDPS एक्ट में केस दर्ज


    शिवपुरी । शिवपुरी में कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ प्राचार्य की टेबल से कथित तौर पर स्मैक की 14 पुड़िया बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके से कुल 1.66 ग्राम नशीला पदार्थ जब्त किया है। मामले में कृषि प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य लक्ष्मीनारायण चौरसिया उम्र 59 वर्ष के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान प्राचार्य का मोबाइल फोन और कार्यालय में लगे सीसीटीवी सिस्टम की डीवीआर भी जब्त की है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार को कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित दुबे शहर में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को मोबाइल फोन पर सूचना मिली कि कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र में एक कर्मचारी के पास स्मैक की पुड़िया मौजूद हैं और उन्हें छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ तत्काल कृषि प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे।

    पुलिस जब केंद्र पहुंची तो प्राचार्य कक्ष में लक्ष्मीनारायण चौरसिया मौजूद मिले। वहां मौजूद कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्राचार्य की टेबल की दराज में नशीले पदार्थ की पुड़िया रखी हुई हैं। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में टेबल की दराज की जांच की गई। दराज में सफेद पॉलिथीन के अंदर कागज में लिपटी हुई कई पुड़िया मिलीं। बताया गया कि कर्मचारियों ने इन पुड़ियों को दराज से निकालकर टेबल पर रख दिया था।

    पुलिस ने मौके पर पुड़ियों की गिनती की तो कुल 14 पुड़िया मिलीं। इसके बाद पुलिस ने तौल कांटा और जांच किट मंगवाई। पुड़ियों को खोलकर जांच की गई तो उनमें भूरे रंग का पाउडर मिला जिसे पुलिस ने स्मैक बताया। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से तौल करने पर नशीले पदार्थ का कुल वजन 1.66 ग्राम पाया गया। पुलिस ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई ताकि जब्ती की प्रक्रिया को रिकॉर्ड में रखा जा सके।

    पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान प्राचार्य ने पंचनामा और जब्ती पत्र सहित नोटिस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उनके हस्ताक्षर नहीं करने की बात का अलग से पंचनामा तैयार किया। मामले में आरोपी के खिलाफ धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने प्राचार्य के मोबाइल फोन के साथ कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी जब्त की है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बरामद नशीला पदार्थ वहां कैसे पहुंचा और इससे जुड़े अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल से मिलने वाली जानकारी भी जांच का हिस्सा हो सकती है। पुलिस पूरे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • गणेश चतुर्थी से पहले शिवपुरी में उठी बड़ी मांग 12 दिनों तक मांस-मटन की दुकानें बंद कराने की अपील कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    गणेश चतुर्थी से पहले शिवपुरी में उठी बड़ी मांग 12 दिनों तक मांस-मटन की दुकानें बंद कराने की अपील कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    शिवपुरी । शिवपुरी में गणेश चतुर्थी के पर्व को लेकर राष्ट्रीय सनातन सेना भारत ने प्रशासन के सामने एक अहम मांग रखी है। संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गणेश चतुर्थी उत्सव की 12 दिनों की अवधि में शहर की मांस और मटन की दुकानों को बंद रखने की मांग की है। संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं और शहर में धार्मिक वातावरण बना रहता है। ऐसे में प्रशासन को भी इस अवधि में विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।

    राष्ट्रीय सनातन सेना भारत के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र शर्मा के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें गणेश चतुर्थी के दौरान मांस और मटन की दुकानों को बंद रखने के लिए प्रशासनिक आदेश जारी करने की अपील की गई है। संगठन ने अपनी मांग को धार्मिक आस्था के साथ शहर की स्वच्छता और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ते हुए प्रशासन से सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

    संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान शहर में जगह जगह भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही भी रहती है। ऐसे में संगठन चाहता है कि उत्सव के दौरान शहर का वातावरण धार्मिक आयोजनों के अनुरूप बना रहे।

    ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि मांस और मटन की दुकानें बंद रखने की मांग किसी व्यक्ति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं की गई है। संगठन ने इसे धार्मिक आस्था और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान से जुड़ा विषय बताया है। साथ ही स्वच्छता को भी अपनी मांग का एक आधार बताया गया है।

    राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रशासन से अपील की है कि गणेश चतुर्थी की 12 दिनों की अवधि के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। संगठन ने संबंधित क्षेत्रों में आदेश के पालन की निगरानी के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग भी की है ताकि पर्व के दौरान प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

    गणेश उत्सव के दौरान शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर भी संगठन ने प्रशासन और नगर पालिका से विशेष इंतजाम करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि धार्मिक स्थलों और गणेश पंडालों के आसपास नियमित सफाई होनी चाहिए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

    पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा कि गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। इसलिए प्रशासन को श्रद्धालुओं की भावनाओं और स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए जरूरी कदम उठाने चाहिए। अब संगठन की इस मांग पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • इंदौर में 11 सितंबर से यात्री परिवहन विजन समिट, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सार्वजनिक परिवहन के भविष्य पर करेंगे मंथन

    इंदौर में 11 सितंबर से यात्री परिवहन विजन समिट, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सार्वजनिक परिवहन के भविष्य पर करेंगे मंथन

    मध्यप्रदेश में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में इस समिट का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम 11 और 12 सितंबर को आयोजित होगा। इसमें परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी शामिल होंगे।

    समिट का मुख्य फोकस मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा पर रहेगा। इसके जरिए प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को नई तकनीक, जन-निजी भागीदारी और हरित ऊर्जा से जोड़ने पर चर्चा होगी। मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के माध्यम से PPP मॉडल, आधुनिक आईटी प्रणालियों और हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को आगे बढ़ाने की योजना पर विचार किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंडस्ट्री-एक्सपो का उद्घाटन करेंगे। इसमें बस निर्माताओं, आईटी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और अन्य उद्योगों के साथ प्रदेश के विभिन्न शासकीय निगम अपनी गतिविधियों तथा नवाचारों को प्रदर्शित करेंगे। समिट की स्मारिका का विमोचन भी किया जाएगा।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की संरचना और भविष्य में प्रस्तावित कार्यों पर आधारित विशेष पुस्तिका जारी की जाएगी। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के जरिए चुने गए MPYPIL के नए लोगो का अनावरण भी मुख्यमंत्री करेंगे। मोबिलिटी स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित हैकाथॉन का शुभारंभ भी कार्यक्रम में होगा।

    समिट में देश के विभिन्न हिस्सों से परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, राज्य परिवहन उपक्रमों के प्रतिनिधि, आईटी कंपनियां और उद्योग जगत से जुड़े लोग शामिल होंगे। इन सभी के बीच प्रदेश की सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को सरल, सुगम, सुरक्षित, स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की रणनीति पर चर्चा होगी और सुझाव लिए जाएंगे।

    दो दिनों के कार्यक्रम में कुल आठ सत्र रखे गए हैं। इनमें मध्यप्रदेश मोबिलिटी विजन-2030 के तहत बस संचालन और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम में PPP मॉडल को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। बस टर्मिनल, मल्टीमॉडल हब, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक परिवहन सुविधाओं में निवेश आकर्षित करने के तरीकों पर भी विचार किया जाएगा।

    एक सत्र सार्वजनिक बस संचालन को वित्तीय रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित रहेगा। इसमें किराए पर निर्भरता कम करने, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण और विज्ञापन, खुदरा, लॉजिस्टिक्स तथा नामकरण अधिकार जैसे गैर-किराया राजस्व के विकल्पों पर मंथन होगा।

    रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के उपयोग पर भी चर्चा होगी। इसमें पीएम मुद्रा योजना, पीएमईजीपी, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम कौशल विकास योजना, पीएम ई-ड्राइव, पीएम ई-बस सेवा और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान शामिल हैं।

    यात्री सुरक्षा, विश्वसनीयता और सुविधा से जुड़े विषयों में CCTV निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया, वाहन रखरखाव, वास्तविक समय यात्री सूचना, चालक प्रशिक्षण और शिकायत निवारण पर विचार होगा। वहीं AI और रीयल-टाइम डेटा के जरिए बस मार्गों और शेड्यूलिंग को बेहतर बनाने पर भी विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

    हरित मोबिलिटी के तहत इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल बसों, चार्जिंग एवं रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन डिपो और उन्नत चालक सहायता प्रणाली पर विचार होगा। अंतिम सत्र में एकीकृत टिकटिंग, स्वचालित किराया संग्रह, नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड, ओपन-लूप भुगतान और MaaS प्लेटफॉर्म के जरिए निर्बाध यात्रा अनुभव पर मंथन किया जाएगा।

  • राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से

    राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से


    भोपाल।  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सियासी बयानबाजी के साथ नेताओं और सरकारी अमले से जुड़े कई दिलचस्प मामले भी चर्चा में हैं। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक रहा। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा डेढ़ लाख के पार पहुंचने के बाद कांग्रेस ने जमकर जश्न मनाया। शहर में राहुल गांधी का बड़ा कटआउट लगाया गया और आतिशबाजी के साथ ढोल नगाड़े बजाए गए। कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

    कांग्रेस इस कार्यक्रम को युवाओं से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह तक युवाओं के बीच पहुंचकर संवाद कर रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी हो। हालांकि कार्यक्रम को लेकर अभी अनुमति का पेंच बना हुआ है। यही वजह है कि कार्यक्रम आखिर किस स्थान पर होगा इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

    इस बीच भाजपा की ओर से राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर तंज भी सामने आया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को भाजपा का स्टार प्रचारक बताया। उनका कहना है कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को राजनीतिक फायदा मिलता है। इस बयान के बाद कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    उधर आलीराजपुर में मंत्री नागर सिंह चौहान का अलग अंदाज देखने को मिला। स्कूली बच्चों की रैली देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। बच्चों से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। मंत्री ने बच्चों से यह भी पूछा कि वे उन्हें पहचानते हैं या नहीं। हालांकि बताया गया कि बच्चों में कुछ ही मंत्री को पहचान सके। इस पूरे घटनाक्रम को मंत्री की लोकप्रियता के अनौपचारिक टेस्ट के तौर पर देखा गया।

    सीधी से सामने आया एक वीडियो सरकारी कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में पटवारी नीलेश नामदेव एक बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरा नाला पार करते नजर आ रहे हैं। बताया गया कि पटवारी गांव में सर्वे के काम से पहुंचे थे। वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है लेकिन अब सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है। घटना ने सरकारी अमले के आम लोगों के प्रति व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।

    इसी बीच सत्ता के गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का हवाला देकर बार बार स्टेट हैंगर पहुंच रहे थे। चर्चा है कि मुख्यमंत्री ने अपने ओएसडी से इस पर सवाल किया और कहा कि जरूरत होने पर अधिकारी को खुद बुलाया जाएगा। यह संदेश संबंधित अधिकारी तक पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि इस तरह की अंदरूनी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    कुल मिलाकर राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का उत्साह भाजपा का तंज मंत्रियों के बदले अंदाज और सरकारी अमले से जुड़े विवादों ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है।

  • पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर MP में 7500 आरक्षकों की भर्ती 22 सितंबर से आवेदन शुरू वेतन 62 हजार तक

    पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर MP में 7500 आरक्षकों की भर्ती 22 सितंबर से आवेदन शुरू वेतन 62 हजार तक


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग में नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी चयन मंडल ने पुलिस आरक्षक के 7500 पदों पर भर्ती के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 22 सितंबर से शुरू होगी और अभ्यर्थी 6 अक्टूबर की रात 12 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस भर्ती में सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि चयनित अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना नहीं दी जाएगी। आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को प्रदेश के 55 जिलों में अपनी पसंद की यूनिट चुननी होगी और नियुक्ति मिलने के बाद उसी यूनिट में कम से कम पांच साल की सेवा पूरी करनी होगी।

    कर्मचारी चयन मंडल के मुताबिक अभ्यर्थी को आवेदन करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वह सामान्य ड्यूटी के आरक्षक पद के लिए आवेदन कर रहा है या विशेष सशस्त्र बल यानी एसएएफ के आरक्षक पद के लिए। भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को शासकीय रेल पुलिस की भोपाल इंदौर और जबलपुर इकाइयों में भी नियुक्ति दी जा सकती है। इस तरह भर्ती में प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों में पुलिस बल को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण नियम तय किए गए हैं। परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों का आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट में आयोजित होती है तो अभ्यर्थियों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपना कलर फोटो हस्ताक्षर और हाथ से लिखा हुआ एक पैराग्राफ स्कैन करके अपलोड करना होगा। मंडल ने स्पष्ट किया है कि पोलेराइड फोटो स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    जन्मतिथि के प्रमाण के लिए अभ्यर्थी को आठवीं दसवीं या बारहवीं की अंकसूची प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र देना होगा। एनसीसी या अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर मिलने वाले बोनस अंकों का लाभ लेने के लिए संबंधित दस्तावेज भी आवेदन के दौरान प्रस्तुत करने होंगे।

    आरक्षक भर्ती में विशेष सशस्त्र बल के लिए कुल 700 पद रखे गए हैं। वहीं एसएएफ को छोड़कर सामान्य ड्यूटी के लिए 6800 पद निर्धारित किए गए हैं। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 7500 पदों पर नियुक्तियां होंगी। भर्ती में आरक्षण के नियम भी निर्धारित किए गए हैं जिसके अनुसार विभिन्न वर्गों के लिए तय प्रावधानों के आधार पर पदों का वितरण किया जाएगा।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सामान्य अभ्यर्थियों के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्था से दसवीं हायर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता आठवीं कक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा रखी गई है। चयन के बाद उम्मीदवारों को तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि से गुजरना होगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

    चयनित अभ्यर्थियों को 19500 रुपये से लेकर 62000 रुपये तक का वेतनमान मिलेगा। भर्ती नियमों में दो से अधिक बच्चों को लेकर भी विशेष शर्त रखी गई है। यदि किसी उम्मीदवार के दो से अधिक बच्चे हैं और उनमें से किसी एक बच्चे का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है तो वह नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि एक बच्चे के बाद एक ही प्रसव में दो या उससे अधिक बच्चे जन्म लेने की स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा।

    इस भर्ती में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन से पहले कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी नियम और पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्ती परीक्षा की आगे की प्रक्रिया मंडल के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी।

  • भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त

    भोपाल में पुलिस ने पीछा कर पकड़ी शराब से भरी स्कॉर्पियो भागने की कोशिश में डिवाइडर से टकराई गाड़ी 40 पेटी शराब जब्त


    भोपाल। भोपाल में अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ लिया है। कजलीखेड़ा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक स्कॉर्पियो के जरिए बड़ी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन पर नजर रखना शुरू किया और उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस को देखकर चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसे तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो का पीछा शुरू कर दिया।

    पुलिस के पीछा करने के दौरान चालक ने वाहन को बचाकर निकालने का प्रयास किया लेकिन कुछ दूरी पर स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। हादसे में चालक को मामूली चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। जब पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसके अंदर बड़ी मात्रा में शराब रखी मिली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन से करीब 40 पेटी शराब बरामद की गई है।

    पुलिस ने शराब के साथ स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है। कार्रवाई के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद शराब किस जगह से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। इसके साथ ही शराब के अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक वाहन चालक से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के जरिए यह जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है कि स्कॉर्पियो में शराब किसके कहने पर भरी गई थी और इसके पीछे किसी बड़े शराब तस्करी नेटवर्क का हाथ तो नहीं है। पुलिस शराब की कुल मात्रा और उसकी अनुमानित कीमत का भी पता लगा रही है।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब वाहन से जुड़े दस्तावेजों और शराब के संबंध में उपलब्ध जानकारी की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि बरामद शराब वैध तरीके से खरीदी गई थी या इसे अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल कजलीखेड़ा पुलिस ने स्कॉर्पियो और उसमें मिली शराब को जब्त कर लिया है। चालक से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं। अवैध शराब के परिवहन के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बड़ी मात्रा में शराब एक वाहन के जरिए ले जाई जा रही थी। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

  • MP में पंप संचालकों की बढ़ी मुश्किलें हुईं आसान टैक्स असेसमेंट के लिए नई व्यवस्था लागू 2024-25 के लंबित मामलों को निपटाने का रास्ता साफ

    MP में पंप संचालकों की बढ़ी मुश्किलें हुईं आसान टैक्स असेसमेंट के लिए नई व्यवस्था लागू 2024-25 के लंबित मामलों को निपटाने का रास्ता साफ


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पेट्रोल डीजल और CNG पंप संचालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़े लंबित टैक्स असेसमेंट मामलों को आसान तरीके से निपटाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत पात्र पंप संचालक स्व-घोषणा के आधार पर अपना कर निर्धारण पूरा करा सकेंगे। वाणिज्यिक कर विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब संबंधित कारोबारियों को लंबी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था मध्यप्रदेश वैट अधिनियम 2002 केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956 मोटर स्पिरिट उपकर अधिनियम 2018 और हाई स्पीड डीजल उपकर अधिनियम 2018 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगी। इसके लिए पंप संचालकों को निर्धारित फॉर्म में आवेदन करना होगा। आवेदन में दी गई जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विभाग टैक्स असेसमेंट की प्रक्रिया पूरी करेगा। सबसे खास बात यह है कि आवेदन जमा होने के बाद यदि 30 दिन के भीतर विभाग की ओर से कोई आपत्ति या सूचना नहीं दी जाती है तो आवेदन स्वत स्वीकार माना जाएगा और असेसमेंट पूरा हो जाएगा।

    इस सुविधा का लाभ हर पंप संचालक को नहीं मिलेगा। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं। वही पंजीकृत पेट्रोल पंप संचालक पात्र होंगे जिन्होंने मध्य प्रदेश में अधिसूचित तेल कंपनियों या पंजीकृत व्यापारियों से पेट्रोल डीजल या CNG की खरीद की हो और उस पर निर्धारित टैक्स तथा उपकर का भुगतान किया गया हो। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 में संबंधित कारोबारी के खिलाफ टैक्स चोरी का मामला नहीं होना चाहिए।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कारोबारियों के खिलाफ अतिरिक्त कर या ऑडिट से संबंधित नोटिस लंबित हैं और उन्होंने उसका निर्धारित तरीके से अनुपालन नहीं किया है उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह संबंधित वर्ष के लिए रिफंड का दावा करने वाले पंप संचालक भी इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

    आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज देना भी अनिवार्य होगा। पंप संचालकों को कर और ब्याज जमा करने की चालान कॉपी लगानी होगी। जिन कारोबारियों का टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से अधिक है उन्हें CA की ऑडिट रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। यदि किसी कारोबारी ने केंद्रीय बिक्री कर के तहत छूट या रियायती दर का लाभ लिया है तो उसे फॉर्म C फॉर्म F और फॉर्म E जैसे मूल दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे।

    टैक्स विभाग की ओर से आवेदन की जांच के दौरान अगर किसी तरह की कमी या गलती सामने आती है तो कारोबारी को तुरंत आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा। अधिकारी लिखित नोटिस जारी कर संबंधित व्यक्ति को सुनवाई और कमी दूर करने का मौका देंगे। निर्धारित समय में कमी को ठीक कर दिया जाता है तो आवेदन स्वीकार किया जा सकेगा। वहीं सुधार नहीं करने या सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने पर आवेदन खारिज भी किया जा सकता है।

    इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़े पात्र लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है। स्व-घोषणा और 30 दिन की तय समयसीमा से कारोबारियों को प्रक्रिया में राहत मिलेगी। हालांकि टैक्स चोरी से जुड़े मामलों और नियमों का अनुपालन नहीं करने वाले कारोबारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। नई व्यवस्था से पेट्रोल डीजल और CNG कारोबारियों के लंबित असेसमेंट मामलों को जल्द सुलझाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस

    MP हाईकोर्ट में खत्म हुआ तीन महीने का इंतजार, जस्टिस अल्पेश कोगजे बने स्थायी चीफ जस्टिस


    भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को करीब तीन महीने के इंतजार के बाद स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने गुरुवार को भोपाल स्थित लोकभवन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समेत प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। जस्टिस कोगजे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।

    जस्टिस कोगजे की नियुक्ति के साथ ही अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को स्थायी नेतृत्व मिल गया है। पिछले करीब तीन महीने से जस्टिस विवेक रसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम की सिफारिश की थी। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री निवास पर नए मुख्य न्यायाधीश के सम्मान में लंच का आयोजन किया गया। शुक्रवार से जस्टिस कोगजे हाईकोर्ट में आधिकारिक रूप से अपना पदभार संभालेंगे।

    जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का लंबा न्यायिक और कानूनी अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने 1990 में केमिस्ट्री से बीएससी की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद 1993 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी साल उन्होंने गुजरात में वकालत शुरू की। करीब 33 वर्षों के कानूनी सफर में उन्होंने वकील से लेकर गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश और अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक का सफर तय किया है।

    जस्टिस कोगजे को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने गुजरात सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों में पैरवी की। वर्ष 2001 में वे असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर रहे। इसके बाद 2002 से 2007 तक एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम किया। वर्ष 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट के स्टैंडिंग काउंसल बने। वर्ष 2011 में उन्हें स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल टास्क फोर्स के स्पेशल काउंसल की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्होंने गोधरा दंगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में गुजरात सरकार का पक्ष रखा।

    6 अप्रैल 2016 को जस्टिस कोगजे को गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। करीब दो साल बाद 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। गुजरात हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर उन्होंने आपराधिक मामलों के अलावा सर्विस और लेबर विवाद तथा अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। कई मामलों में उनके फैसलों ने खासा ध्यान खींचा।

    वर्ष 2024 में पत्नी की हत्या के आरोपी पति को जमानत देने से इनकार करने वाले फैसले में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अदालत ने आरोपी के जांच को गुमराह करने के प्रयासों को गंभीरता से लिया था। वर्ष 2022 के कस्टोडियल डेथ मामले में भी जमानत से इनकार किया गया। इसके अलावा जल निकायों की सुरक्षा और अंधाधुंध लैंड फिलिंग को लेकर भी उनकी पीठ ने सख्त टिप्पणी की थी। औद्योगिक विवादों और वर्कमैन के अधिकारों से जुड़े मामलों में भी उनके कई अहम फैसले सामने आए।

    जस्टिस कोगजे 15 जुलाई 2031 को सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्हें करीब चार वर्ष दस महीने का कार्यकाल मिलेगा। अब उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक प्रशासन से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। शपथ ग्रहण समारोह में हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश और बड़ी संख्या में वकील भी मौजूद रहे।