Category: Madhya Pradesh

  • 26 जून महाकाल भस्म आरती में त्रिपुंड और चंद्र से सजे भगवान महाकाल, दिव्य श्रृंगार और वैदिक अनुष्ठानों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    26 जून महाकाल भस्म आरती में त्रिपुंड और चंद्र से सजे भगवान महाकाल, दिव्य श्रृंगार और वैदिक अनुष्ठानों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर प्रातःकालीन भस्म आरती श्रद्धा, परंपरा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। पूरे मंदिर परिसर में शिवभक्ति का वातावरण बना रहा और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा।

    मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके उपरांत भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों का लेप अर्पित किया गया तथा आभूषणों और पुष्पों से उनका आकर्षक श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती की प्रक्रिया के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को परंपरानुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विविध पुष्पमालाएं अर्पित कर अलंकृत किया गया। त्रिपुंड और चंद्र से सुसज्जित भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    सनातन परंपरा में महाकाल की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भस्म आरती को देखने और भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने को श्रद्धालु अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।

    आरती के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा के अनुसार अनेक श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हुए सुख, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते दिखाई दिए। पूरे मंदिर परिसर में ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष लगातार गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह शिवमय बना रहा।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। प्रतिदिन होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, प्राचीन धार्मिक विधियों और सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाता है। शुक्रवार को संपन्न हुई विशेष भस्म आरती में भी श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक संतोष का अनुभव कराया।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ट्रैफिक सुधार के लिए वन-वे और पिक-ड्रॉप सिस्टम अनिवार्य

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ट्रैफिक सुधार के लिए वन-वे और पिक-ड्रॉप सिस्टम अनिवार्य


    जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर में बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था और अदालत परिसरों के आसपास हो रही अवैध पार्किंग को गंभीर समस्या मानते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से अंतरिम यातायात व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रस्तावित मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू की जाएं।

    ‘पिक एंड ड्रॉप’ सिस्टम अपनाने पर जोर

    हाईकोर्ट ने अदालत आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘पिक एंड ड्रॉप’ व्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, एडवोकेट जनरल राज्य सरकार के सभी विभागों के प्रमुखों को एडवाइजरी जारी करेंगे, ताकि कोर्ट आने वाले अधिकारी अपनी गाड़ियों को लंबे समय तक पार्क करने के बजाय ‘पिक एंड ड्रॉप’ प्रणाली का उपयोग करें।

    इसी तरह, केंद्र सरकार के अधिकारियों के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेंगे। न्यायालय का मानना है कि इससे अदालतों के आसपास वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में राहत मिलेगी।

    वकीलों से कार-पूलिंग की अपील

    कोर्ट ने अधिवक्ताओं से भी सहयोग की अपेक्षा जताई है। जिन वकीलों के पास निजी ड्राइवर उपलब्ध हैं, उन्हें ‘पिक एंड ड्रॉप’ सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही पार्किंग पर दबाव कम करने के लिए कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करने की अपील की गई है।

    सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रहेगा ‘वन-वे’

    यातायात को सुचारू बनाने के लिए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि कलेक्टर ऑफिस क्रॉसिंग से तहसील क्रॉसिंग तक का मार्ग सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वन-वे घोषित किया जाए। इस दौरान वाहनों की आवाजाही एक ही दिशा में नियंत्रित की जाएगी, जिससे सड़क पर जाम की स्थिति कम हो सके।

    इसके अलावा हाईकोर्ट और जिला अदालत के सामने ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    फ्लाईओवर निर्माण पर भी नजर

    याचिका में अदालत के सामने से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर फ्लाईओवर निर्माण की मांग भी उठाई गई है। इस संबंध में पहले से दो याचिकाएं न्यायालय में लंबित हैं। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है।

    शहरवासियों को मिल सकती है राहत

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘पिक एंड ड्रॉप’, कार-पूलिंग और ‘वन-वे’ जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी ढंग से पालन कराया गया, तो अदालत क्षेत्र और आसपास की सड़कों पर लगने वाले जाम में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा इन निर्देशों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं।
  • जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल

    जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल


    जबलपुर। जबलपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ की गई कार्रवाई से पहले का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर आरोपी महिला को कार्रवाई के दौरान क्या कहना है और कैसे व्यवहार करना है इसकी जानकारी देता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने एक स्थान पर दबिश दी थी। कार्रवाई में हवलदार सुग्रीव तिवारी, एफआरवी दल, महिला आरक्षक और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने मौके से एक महिला को अवैध शराब के साथ पकड़ा था। हालांकि विवाद का केंद्र कार्रवाई नहीं बल्कि उससे पहले का कथित घटनाक्रम बन गया है।

    वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक आरक्षक कार्रवाई से पहले आरोपी महिला को पूरी स्थिति समझा रहा है। वीडियो में महिला को यह बताया जाता दिखाई दे रहा है कि कार्रवाई के दौरान उसे क्या कहना है और किस तरह प्रतिक्रिया देनी है। आरोप है कि महिला को सहानुभूति प्राप्त करने और खुद को मजबूर दिखाने के लिए भी निर्देश दिए गए। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिख रही बातचीत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। वहीं कुछ लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

    मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था की विश्वसनीयता सीधे तौर पर जनता के भरोसे से जुड़ी होती है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई है और पुलिस विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। तब तक यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।

  • सुपरफास्ट ट्रेन के सामने कूदी किशोरी, युवक की बहादुरी ने बचाई जिंदगी

    सुपरफास्ट ट्रेन के सामने कूदी किशोरी, युवक की बहादुरी ने बचाई जिंदगी

    ग्वालियर। ग्वालियर में बुधवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने कुछ क्षणों के लिए लोगों की सांसें थाम दीं। शहर के एजी ऑफिस पुल के नीचे स्थित रेलवे ट्रैक पर एक किशोरी ने कथित रूप से आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन एक युवक की सतर्कता और साहस के कारण उसकी जान बच गई। इस घटना ने जहां लोगों को भावुक कर दिया, वहीं युवक की बहादुरी की हर तरफ सराहना हो रही है।

    जानकारी के अनुसार दोपहर के समय एक किशोरी अचानक रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई। उसी दौरान ट्रैक पर एक सुपरफास्ट ट्रेन तेज गति से आगे बढ़ रही थी। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार ट्रेन और किशोरी के बीच केवल कुछ सेकंड का ही फासला बचा था। हालात ऐसे थे कि किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता था और किशोरी की जान जा सकती थी।

    इसी बीच वहां मौजूद प्रहलाद सिंह तोमर नामक युवक की नजर किशोरी पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना अपनी जान की परवाह किए ट्रैक की ओर दौड़ पड़े। युवक ने तेजी दिखाते हुए किशोरी को पकड़कर पटरी से दूर खींच लिया। यह सब कुछ इतने कम समय में हुआ कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए।

    युवक की इस बहादुरी के बाद आसपास खड़े अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए। सभी ने मिलकर किशोरी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कुछ ही क्षण बाद सुपरफास्ट ट्रेन वहां से गुजर गई। यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो परिणाम बेहद दुखद हो सकते थे।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किशोरी को अपने संरक्षण में लिया। प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि किशोरी किसी पारिवारिक कारण से परेशान थी। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि वह अपने माता-पिता से किसी बात को लेकर नाराज थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोरी के परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनसे बातचीत की जा रही है। साथ ही यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में किशोरी ने इतना बड़ा कदम उठाने की कोशिश की। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा प्रहलाद सिंह तोमर की बहादुरी की हो रही है। उनकी सूझबूझ और साहस ने एक परिवार को गहरे दुख में डूबने से बचा लिया। स्थानीय लोगों ने युवक को सच्चा हीरो बताते हुए सम्मानित किए जाने की मांग भी की है।

    यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि संकट की घड़ी में दिखाई गई तत्परता और मानवता किसी की जिंदगी बचा सकती है। साथ ही मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए समय रहते संवाद और सहयोग कितना जरूरी है, यह भी इस घटना से स्पष्ट होता है।

  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    इंदौर। इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की बहुमूल्य जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामला केवल जमीन पर कब्जे या पुलिसकर्मियों पर हमले तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इसमें सबूत गायब होने, कथित आर्थिक लेनदेन और आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार विवादित जमीन को लेकर हुए संघर्ष के दौरान बीट पर तैनात पुलिस जवानों पर हमला किया गया था। घटना स्थल के पास स्थित एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जांच के लिए सीसीटीवी का डीवीआर अपने कब्जे में लिया था, लेकिन बाद में वही डीवीआर गायब हो गया। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपियों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई। खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर ने कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली और उनकी भूमिका की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। जांच के आदेश के बाद अब पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना के वीडियो उपलब्ध थे और आरोपियों की पहचान भी कथित रूप से हो चुकी थी, तब एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई। इस निर्णय ने पुलिस की मंशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि यदि पहचान स्पष्ट थी तो नामजद मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।

    सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि विवाद से एक दिन पहले मोहसिन नामक व्यक्ति द्वारा थाने में 10 लाख रुपये पहुंचाए गए थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। यह भी आरोप है कि इसी प्रभाव के चलते संबंधित व्यक्ति ने थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार किया और उसका वीडियो भी मौजूद है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया।

    मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है कि उज्जैन का एक व्यक्ति जो इस विवाद से जुड़ा हुआ था, उसे पुलिस वाहन के माध्यम से वहां से रवाना किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।

    घटना में घायल हुए पुलिस जवानों पर मीडिया से दूरी बनाए रखने का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल हमले का मामला नहीं बल्कि पूरे घटनाक्रम को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा।

    फिलहाल विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

  • ग्राहक अधिकारों की बड़ी जीत: होटल रेडिसन पर जुर्माना, अतिरिक्त वसूली और मानसिक प्रताड़ना का देना होगा हर्जाना

    ग्राहक अधिकारों की बड़ी जीत: होटल रेडिसन पर जुर्माना, अतिरिक्त वसूली और मानसिक प्रताड़ना का देना होगा हर्जाना


    भोपाल। भोपाल में उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रतिष्ठित होटल रेडिसन के खिलाफ फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी। करीब चार वर्ष पुराने इस मामले में आयोग ने होटल प्रबंधन को अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाने के साथ ही उपभोक्ता को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।

    मामला वर्ष 2022 का है जब हुकुम सिंह अपने चार साथियों के साथ भोपाल स्थित होटल रेडिसन में ठहरे थे। होटल में ठहरने के दौरान उन्होंने पानी की एक बोतल खरीदी जिसके लिए उनसे 175 रुपये वसूले गए जबकि बोतल पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य केवल 60 रुपये था। ग्राहक ने मौके पर इस पर आपत्ति दर्ज कराई लेकिन होटल प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

    लंबी सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले का निपटारा करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। आयोग ने माना कि होटल और रेस्तरां जैसी संस्थाएं अपने यहां उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं सेवा गुणवत्ता और माहौल के आधार पर कुछ उत्पादों के लिए एमआरपी से अधिक कीमत वसूल सकती हैं। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त वसूली गई राशि पर मनमाने तरीके से जीएसटी लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है और ऐसा करना उपभोक्ता हितों के खिलाफ माना जाएगा।

    आयोग ने होटल रेडिसन की सेवा में कमी पाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आदेश के अनुसार होटल को ग्राहक से अतिरिक्त वसूली गई 10.80 रुपये की राशि वापस करनी होगी। इसके अलावा मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 5000 रुपये का मुआवजा तथा कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के रूप में 3000 रुपये का भुगतान भी करना होगा। इस तरह होटल को कुल मिलाकर लगभग 8000 रुपये की राशि उपभोक्ता को देनी होगी।

    उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो होटल प्रबंधन को पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला न केवल संबंधित उपभोक्ता के लिए राहत लेकर आया है बल्कि उन सभी ग्राहकों के लिए एक उदाहरण बन गया है जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और गलत वसूली के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उपभोक्ता संरक्षण कानूनों की प्रभावशीलता को दर्शाता है और व्यावसायिक संस्थानों को भी यह संदेश देता है कि ग्राहकों के साथ पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उपभोक्ता आयोग का यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है और उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग बनाएगा।

  • कानून व्यवस्था बनाए रखने प्रशासन का बड़ा फैसला, BNSS धारा 163 लागू, उल्लंघन पर होगी FIR

    कानून व्यवस्था बनाए रखने प्रशासन का बड़ा फैसला, BNSS धारा 163 लागू, उल्लंघन पर होगी FIR

    ग्वालियर। ग्वालियर जिले में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूरे जिले में बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, रैली और जुलूस के आयोजन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी किया गया है और आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा।

    प्रशासन का कहना है कि यह कदम जिले में शांति, सौहार्द और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों, प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों, मॉल और संवेदनशील स्थानों पर किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

    जारी निर्देशों के मुताबिक किसी भी संगठन, संस्था या व्यक्ति को सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने से पहले प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि कार्यक्रम किसी एक अनुविभाग की सीमा में आयोजित किया जाना है तो संबंधित एसडीएम से अनुमति प्राप्त करनी होगी। वहीं यदि कार्यक्रम का दायरा एक से अधिक अनुविभागों में आता है तो आयोजन के लिए अपर जिला दंडाधिकारी से लिखित स्वीकृति लेना आवश्यक होगा।

    प्रशासन ने सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भड़काऊ, भ्रामक, अफवाह फैलाने वाली अथवा सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली पोस्ट पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पुलिस और आईटी सेल ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखेंगे। यदि कोई व्यक्ति धर्म, जाति, समुदाय या सामाजिक समूहों की भावनाओं को आहत करने वाली सामग्री प्रसारित करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। बिना अनुमति धरना, प्रदर्शन, जुलूस या रैली आयोजित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत मामला दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से नियमों का पालन करने तथा प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है।

    कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी इस आदेश के बाद अब जिले में किसी भी सार्वजनिक आयोजन से पहले अनुमति प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। प्रशासन ने नागरिकों से शांति, सौहार्द और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है।

  • मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस सक्रिय, जल-जंगल-जमीन संरक्षण के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी

    मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस सक्रिय, जल-जंगल-जमीन संरक्षण के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ी पहल की है। जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा तथा आदिवासी समुदाय के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से पार्टी ने एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का गठन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर किया गया है और इसे प्रदेश में आदिवासी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से गठित इस समिति में पार्टी के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को समिति में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इसके अलावा पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया तथा आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को भी सदस्य बनाया गया है।

    कांग्रेस का मानना है कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक संरचना दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से समिति को विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन कर सुझाव देने और पार्टी की भावी रणनीति तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। समिति प्रदेश के आदिवासी अंचलों में जाकर जमीनी स्तर की समस्याओं का आकलन भी करेगी।

    समिति का प्रमुख फोकस जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा पर रहेगा। इसके साथ ही आदिवासी समुदाय को मिले संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी यह समिति कार्य करेगी। वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना और उससे जुड़े मुद्दों को सामने लाना भी इसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

    इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में भूमि विवाद, वन भूमि के पट्टों, विस्थापन और अधिकारों से जुड़े मामलों का अध्ययन कर पार्टी को सुझाव दिए जाएंगे। समिति इन विषयों पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कांग्रेस की रणनीति भी तैयार करेगी ताकि आदिवासी वर्ग की आवाज को प्रभावी तरीके से उठाया जा सके।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है और कांग्रेस इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विशेष समिति का गठन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर कांग्रेस आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को सड़क से लेकर विधानसभा तक मजबूती से उठाने की तैयारी कर सकती है।

    कांग्रेस का यह कदम न केवल आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाकर आदिवासी समुदाय की समस्याओं को प्रमुखता से सामने लाया जाए।

  • सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार

    सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी को ही साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। टेकनपुर स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ एक इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन हैक कर शातिर बदमाशों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से 3 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी 34 वर्षीय अविनाश कुमार वर्तमान में एसटीसी बीएसएफ टेकनपुर में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और यस बैंक के क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग सुविधाएं थीं। 17 जून की रात अज्ञात साइबर अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन का ऑनलाइन एक्सेस हासिल कर लिया।

    मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही ठगों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर डाले। अलग-अलग किस्तों में किए गए इन लेनदेन के जरिए कुल 3 लाख 10 हजार रुपये खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए। पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे शुरुआती दौर में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब इंस्पेक्टर अविनाश कुमार के मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन संबंधी संदेश आने लगे। बैंक खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में बिलौआ थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की टीम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही लेनदेन में उपयोग किए गए आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और मालवेयर जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है।

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के अधिकारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।