Category: Madhya Pradesh

  • MP के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी हर महीने मिलेंगे 7500 रुपए NEET JEE और CLAT की तैयारी का खर्च भी उठाएगी सरकार

    MP के मेधावी छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी हर महीने मिलेंगे 7500 रुपए NEET JEE और CLAT की तैयारी का खर्च भी उठाएगी सरकार


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों के लिए एक बड़ी पहल शुरू करने जा रही है। सरकार की नई योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को हर महीने 7500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देना है जो पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की महंगी तैयारी करने में परेशानी का सामना करते हैं। भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना के नाम से प्रस्तावित इस योजना का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजने की तैयारी है। सरकार का प्रस्ताव है कि योजना इसी साल से लागू की जाए।

    इस योजना के तहत निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को पढ़ाई के साथ NEET JEE और CLAT जैसी महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी आर्थिक मदद दी जाएगी। 7500 रुपए की मासिक सहायता का इस्तेमाल कोचिंग फीस आने जाने के खर्च किताबें हॉस्टल ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि आर्थिक मदद मिलने से श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

    मध्य प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के मुताबिक शुरुआत में योजना को प्रयोग के तौर पर लागू किया जाएगा। पहले चरण में 600 विद्यार्थियों को इसका लाभ देने की तैयारी है। इनमें 500 विद्यार्थी भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल से जबकि 100 विद्यार्थी श्रमिक कल्याण मंडल के माध्यम से लिए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि इसके लिए 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। अगर योजना का शुरुआती प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में विद्यार्थियों की संख्या और चयन के लिए निर्धारित कटऑफ बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

    योजना का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें भी तय की गई हैं। बच्चे के माता या पिता का निर्माण श्रमिक के तौर पर संबंधित मंडल में पंजीकरण होना जरूरी होगा। पंजीयन निर्धारित अवधि से होना चाहिए और श्रमिक के कम से कम 90 दिन काम करने का रिकॉर्ड भी आवश्यक होगा। विद्यार्थी को 10वीं कक्षा में कम से कम 80 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। चयन केवल आवेदन करने से नहीं होगा बल्कि पात्र विद्यार्थियों की मेरिट तैयार की जाएगी और इसी आधार पर अधिकतम 500 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। योजना में छात्राओं के लिए 20 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान भी बताया गया है।

    चयन के बाद योजना का लाभ जारी रखने के लिए भी विद्यार्थियों को पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। 12वीं कक्षा में कम से कम 75 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा। इसके अलावा आगे की पढ़ाई के दौरान हर साल निर्धारित समय पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। यानी सरकार की आर्थिक सहायता लगातार पाने के लिए विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई में प्रदर्शन बनाए रखना होगा।

    इस योजना को लेकर सरकार का जोर केवल स्कॉलरशिप देने तक सीमित नहीं है बल्कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने पर है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करता है और बाकी पात्रता शर्तें पूरी करता है तो वह योजना के लिए आवेदन कर सकेगा। हालांकि अंतिम चयन मेरिट के आधार पर ही होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर वकील और अन्य प्रतिष्ठित करियर की दिशा में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

  • 60 साल से धरती को हरा-भरा करने में जुटे हैं झारखंड के ट्री मैन 65 लाख पौधों का रोपण कर कायम की मिसाल

    60 साल से धरती को हरा-भरा करने में जुटे हैं झारखंड के ट्री मैन 65 लाख पौधों का रोपण कर कायम की मिसाल


    झारखंड । झारखंड के पलामू के रहने वाले डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने पर्यावरण संरक्षण को सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। करीब छह दशक से पेड़ पौधों की रक्षा और नए पौधे लगाने के लिए लगातार काम कर रहे डॉ. कौशल को आज लोग ट्री मैन के नाम से जानते हैं। उनका पर्यावरण प्रेम इस कदर गहरा है कि वह पेड़ों को परिवार का हिस्सा मानते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए वनराखी मूवमेंट भी चला रहे हैं। अब तक भारत समेत कई देशों में 65 लाख से अधिक पौधों का निशुल्क वितरण और रोपण कर चुके डॉ. कौशल की कहानी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।

    डॉ. कौशल किशोर जायसवाल के अनुसार पर्यावरण के प्रति उनका जुड़ाव वर्ष 1966 में शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1967 में अपनी 7.72 एकड़ निजी जमीन पर पौधारोपण करते हुए जंगल बचाव और जंगल लगाव अभियान को आगे बढ़ाया। धीरे धीरे यह अभियान उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मिशन बन गया। उन्होंने लोगों को केवल पौधे लगाने के लिए प्रेरित नहीं किया बल्कि लगाए गए पेड़ों की देखभाल और सुरक्षा को भी उतना ही जरूरी बताया। इसी सोच के साथ उन्होंने वनराखी मूवमेंट की शुरुआत की जिसमें पेड़ों को परिवार के सदस्य की तरह मानकर उनकी रक्षा करने का संदेश दिया जाता है।

    उनका अभियान अब झारखंड तक सीमित नहीं है। भारत के 26 राज्यों के 181 जिलों के अलावा नेपाल भूटान म्यांमार सिंगापुर मलेशिया अजरबैजान थाईलैंड इंडोनेशिया जापान और वियतनाम जैसे देशों तक उनका पर्यावरण संदेश पहुंच चुका है। अलग अलग स्थानों पर उन्होंने निशुल्क पौधों का वितरण और रोपण किया है। उनके अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित धरती तैयार करना है।

    डॉ. कौशल के अभियान की एक खास बात पेड़ों के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता है। वह पेड़ों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं बल्कि जीवनदाता मानते हैं। इसी सोच के कारण उन्होंने लाखों पौधों को लगाने के साथ उनकी रक्षा का संदेश भी दिया। उनके अभियान के तहत करीब 30 लाख पेड़ों को राखी बांधने की बात भी सामने आई है। इसके जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि जिस तरह परिवार में भाई की रक्षा का संकल्प लिया जाता है उसी तरह पेड़ों की भी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।

    करीब 58 वर्षों से निशुल्क पौधा वितरण और रोपण का अभियान चलाने वाले डॉ. कौशल को उनके पर्यावरणीय योगदान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें अब तक 65 प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने की जानकारी दी गई है। हाल ही में झारखंड के राज्यपाल की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया। उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध पर्यावरणविदों के साथ काम किया है और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को लगातार आगे बढ़ाया है।

    डॉ. कौशल का मानना है कि जंगलों की कटाई प्रदूषण और मानवीय गतिविधियों के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। ऐसे समय में केवल सरकार या संस्थाओं के भरोसे पर्यावरण को सुरक्षित नहीं किया जा सकता। इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उनका जीवन इसी विचार का उदाहरण है कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार प्रयास करता रहे तो उसका छोटा सा कदम भी बड़े पर्यावरणीय आंदोलन में बदल सकता है। 65 लाख से अधिक पौधों के रोपण और वितरण की उनकी यात्रा आज हजारों लोगों को पेड़ लगाने और उन्हें बचाने की प्रेरणा दे रही है।

  • मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई

    मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी दौरान करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन सड़क की जद में आया जिसके बाद मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के कुछ हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। दावा किया गया कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे हनुमान जी का दैवीय चमत्कार बताया जाने लगा।

    मामला तेजी से बढ़ा तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संत समाज भी इस मुद्दे पर सामने आया और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई। संतों का कहना था कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बाद भी वह अपनी जगह पर बनी हुई है तो इसे आस्था से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई और दर्शन करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

    इस बीच कांग्रेस भी इस मामले को लेकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना का विरोध किया। वहां रामधुन गाई गई और हनुमान चालीसा का पाठ कर पूजा अर्चना की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।

    अब इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आया बयान चर्चा का नया विषय बन गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। यानी जिस प्रतिमा को हटाने की कोशिश और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने की चर्चा पिछले दिनों से चल रही थी उस पर प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। इस बयान के बाद पूरे मामले में प्रशासन के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    मंदिर की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी काफी गहरा है। चाहरदीवारी का हिस्सा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।

    मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा की प्राचीनता से जुड़ा है। बताया गया है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराने होने की संभावना जताई गई है हालांकि इसकी वास्तविक उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की चुनौती भी है। फिलहाल संत समाज संवाद से समाधान चाहता है जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।

  • एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश

    एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फिलहाल मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। बुधवार को सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से बादल छंटे नजर आए और कहीं भी तेज बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन भी भारी बारिश से राहत रहेगी। IMD भोपाल ने गुरुवार को प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। शुक्रवार को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस समय बारिश कराने वाला कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है। पश्चिमी क्षेत्र में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन जरूर बना हुआ है, लेकिन इसका प्रदेश पर खास असर नहीं पड़ रहा है।

    धूप तेज, कुछ जगह हल्की बारिश के आसार

    सिस्टम कमजोर होने के कारण बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप निकली। भोपाल में भी अचानक बदले मौसम के कारण लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहने का अनुमान है। ज्यादातर स्थानों पर धूप रहेगी, हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    13 सितंबर से पश्चिमी एमपी में बढ़ेगा असर

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश की संभावना कम है। हालांकि 13 सितंबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी अब कम हुई

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा पिछले एक सप्ताह में काफी सुधरा है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 25% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने रहे। इससे बारिश के आंकड़ों में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी क्षेत्र की स्थिति बेहतर हुई। हालांकि बुधवार तक यहां बारिश सामान्य से करीब 1% कम रही।

    पश्चिमी एमपी के 21 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है। कॉपी में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • इंदौर में 27 नवंबर से तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल का होगा भव्‍य आयोजन

    इंदौर में 27 नवंबर से तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल का होगा भव्‍य आयोजन

    इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में एक बार फिर साहित्य, कला और संस्कृति का अनूठा संगम होने जा रहा है। आगामी 27, 28 और 29 नवंबर 2026 को प्रतिष्ठित इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल (ILF) के अगले संस्करण का भव्य आयोजन किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह वैचारिक उत्सव इंदौर के ऐतिहासिक डेली कॉलेज परिसर में आयोजित होगा, जहां देश-विदेश के प्रख्यात साहित्यकार, लेखक, कवि, पत्रकार और कलाकार एक मंच पर जुटेंगे।

    आयोजन समिति के अनुसार, इस वर्ष का फेस्टिवल कला और विचार-विमर्श के नए आयाम स्थापित करेगा। महोत्सव में समकालीन साहित्य, क्षेत्रीय भाषाएं, डिजिटल मीडिया के दौर में लेखन की चुनौतियां, और सिनेमाई पटकथा जैसे विविध विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही, काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस तीन दिवसीय आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगी।

    इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल हमेशा से ही युवाओं और विचारकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। इस वर्ष भी उत्सव में छात्र-छात्राओं और उभरते हुए लेखकों को दिग्गज विचारकों से सीधे संवाद करने का अवसर मिलेगा। डेली कॉलेज के हरे-भरे परिसर में विभिन्न सत्रों के लिए विशेष मंच तैयार किए जा रहे हैं, जहां समानांतर रूप से अलग-अलग विषयों पर परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। सांस्कृतिक नगरी इंदौर का यह उत्सव न केवल साहित्य प्रेमियों को आकर्षित करता है, बल्कि यह बौद्धिक विमर्श का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। आयोजन को लेकर शहर के प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

  • दुबई में सीएम मोहन यादव ने वैश्विक उद्योगपतियों से की मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के लिए रखे कई प्रस्ताव

    दुबई में सीएम मोहन यादव ने वैश्विक उद्योगपतियों से की मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के लिए रखे कई प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित एन्युअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग के तीसरे दिन 8 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख निवेशकों और उद्यमियों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन बैठकों में मध्य प्रदेश में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा, तकनीक, ग्रीन एनर्जी और नगरीय विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों को वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए आमंत्रित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों के सामने मध्य प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं को रखते हुए कहा कि राज्य देश के मध्य में स्थित होने के कारण सड़क, रेल और हवाई संपर्क के लिहाज से सुविधाजनक स्थिति में है। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अधोसंरचना, पर्याप्त ऊर्जा और कुशल मानव संसाधन को निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार मध्य प्रदेश से देश के विभिन्न हिस्सों तक उत्पादों की पहुंच सुगम और त्वरित है।

    क्रेसेंट एंटरप्राइजेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बद्र जाफर के साथ बैठक में वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और प्रमुख उत्पादन क्लस्टर्स से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित उद्यमशीलता और स्टार्टअप क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने की बात कही। जाफर ने शहरी अधोसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और तकनीक हस्तांतरण में दीर्घकालिक निवेश में रुचि दिखाई। ऊर्जा और तकनीक में नवाचार पर भी चर्चा हुई।

    डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिजवान सूमार के साथ बैठक में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने पोवारखेड़ा लॉजिस्टिक्स कंपोजिट हब को अंतरदेशीय लॉजिस्टिक्स के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की संभावना बताई। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और कोल्ड चेन सुविधाओं के माध्यम से किसानों, एफपीओ, एमएसएमई और उद्योगों को बेहतर व्यापार तथा निर्यात सहायता देने पर चर्चा हुई।

    राणा होल्डिंग्स के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. दर्शन सिंह राणा के साथ बैठक में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ई-मोबिलिटी और कृषि मशीनरी में निवेश संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    जेम्स एजुकेशन कंपनी के चेयरमैन-फाउंडर सनी वर्की के साथ बैठक में शिक्षा क्षेत्र में निवेश पर विचार हुआ। कंपनी ने मध्य प्रदेश के प्रमुख और विकासशील शहरों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के K-12 स्कूल कैंपस स्थापित करने में रुचि दिखाई। इन संस्थानों में विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ स्थानीय जरूरतों और भविष्य की शिक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम लागू करने की योजना पर चर्चा हुई।

    ब्यूमर्क कॉर्पोरेशन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ सिद्धार्थ बालाचंद्रन ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, तकनीक और ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की इच्छा जताई।

    शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर के साथ शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर चर्चा हुई। इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में रेल-साइडिंग वाले लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार हुआ। इसमें 30 से 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश और करीब 300 से 600 रोजगार अवसरों की संभावना बताई गई।

    वीएफएस ग्लोबल के वैश्विक प्रमुख अमित साइचर के साथ वीजा सेवाओं, पर्यटन, रोजगार और युवाओं के कौशल विकास पर चर्चा हुई। भोपाल और इंदौर में वीजा आवेदन सेवाओं का विस्तार करने तथा युवाओं के लिए यात्रा, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विचार किया गया।

    चोइथराम समूह के अध्यक्ष एल.टी. पगरानी के साथ आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना और रिटेल क्षेत्र में निवेश पर चर्चा हुई। समूह मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में सुपरमार्केट और आधुनिक किराना रिटेल केंद्र स्थापित करने का इच्छुक है। साथ ही स्थानीय किसानों और उत्पादकों से कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की खरीद, खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निजी लेबल विनिर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

  • सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर जिले के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब से जुड़ी दुखद घटना के बाद मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनके परिवार से एक व्यक्ति को कथित तौर पर जोड़कर किए जा रहे दावों पर सफाई दी है। मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में जिस व्यक्ति को उनके परिवार या रिश्तेदार से संबंधित बताया जा रहा है, उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बंडा क्षेत्र की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हृदयविदारक घटना है और वह इससे बेहद दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय का सामना करने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।

    मंत्री ने कहा कि घटना के बीच कुछ लोगों द्वारा एक गांव के व्यक्ति को उनके परिवार से जोड़ने का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति उनका कोई रिश्तेदार नहीं है और उनके नाम को मामले से जोड़कर जानकारी प्रसारित करना गलत है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने स्वयं सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल व्यक्ति की पहचान या उसका किसी से संबंध कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि आरोपी किसी का रिश्तेदार या नातेदार हो अथवा किसी राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव से जुड़ा हो, कानून के सामने किसी को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि सागर जिला उनके परिवार को अच्छी तरह जानता है। मंत्री के अनुसार उनका पूरा परिवार शराब, सट्टा और जुआ जैसी गतिविधियों से हमेशा दूर रहा है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्यकर्ता को इस प्रकार की गतिविधियों में सहयोग या संरक्षण देने के पक्ष में नहीं हैं।

    मंत्री ने गंभीर घटना के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सच्चाई सामने लाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील स्थिति में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति या परिवार को बदनाम करने वाली जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं की जानी चाहिए।

    गोविंद सिंह राजपूत ने दोहराया कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को बदनाम करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है, तो ऐसी गतिविधियों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    बंडा क्षेत्र की घटना को लेकर मंत्री की सफाई का मुख्य केंद्र उनके परिवार से संबंधित बताए जा रहे व्यक्ति के आरोपों को खारिज करना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग है। उन्होंने जांच में किसी भी तरह के प्रभाव या संबंध को आड़े नहीं आने देने की बात कही है।

    मंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि घटना में वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और अफवाहों के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान में घटना की गंभीरता के बीच तथ्य सामने लाने और कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया गया।

  • मोहन यादव ने शारजाह के उद्योग जगत को दिया जीआईएस 2027 का न्योता, फूड प्रोसेसिंग समेत कई क्षेत्रों में निवेश अवसर बताए

    मोहन यादव ने शारजाह के उद्योग जगत को दिया जीआईएस 2027 का न्योता, फूड प्रोसेसिंग समेत कई क्षेत्रों में निवेश अवसर बताए

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संयुक्त अरब अमीरात के दौरे के दौरान शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं एक्सपो सेंटर के चेयरमैन अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस से मुलाकात की। यह बैठक एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग के दौरान हुई, जिसमें मध्य प्रदेश और शारजाह के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने तथा प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस को वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए मध्य प्रदेश आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। उन्होंने शारजाह के व्यापारिक समुदाय और कंपनियों से प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह भी किया।

    मुख्यमंत्री ने शारजाह चैंबर के साथ दीर्घकालिक और रणनीतिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने चेयरमैन ओवैस से मध्य प्रदेश में एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। इसके साथ ही दोनों क्षेत्रों के कारोबारियों और उद्यमियों के बीच सेक्टर आधारित बिजनेस टू बिजनेस बैठकों के आयोजन के लिए मध्य प्रदेश-शारजाह बिजनेस फोरम बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

    चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश के छोटे और मध्यम उद्यमों तथा निर्यातकों को खाड़ी देशों के प्रमुख खरीदारों और वितरकों से जोड़ने में शारजाह चैंबर के सहयोग की जरूरत पर भी बात हुई। मुख्यमंत्री ने शारजाह की कंपनियों को मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    इन क्षेत्रों में फूड पार्क, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन परियोजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। बैठक में इन क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं और दोनों पक्षों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की निवेश क्षमता को रेखांकित करते हुए राज्य की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, प्रतिस्पर्धी लागत, औद्योगिक लैंड बैंक और इंफ्रास्ट्रक्चर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के बड़े बाजारों से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण मध्य प्रदेश निवेश के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

    उन्होंने राज्य सरकार की निवेशक-अनुकूल व्यवस्था का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार पारदर्शी नीतियों, त्वरित सिंगल विंडो व्यवस्था और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण के माध्यम से निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बैठक में शारजाह के व्यापारिक नेटवर्क और कनेक्टिविटी को मध्य प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के निर्यात, कौशल संवर्धन, रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया। दोनों पक्षों के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ाने और उद्यमियों के लिए संभावित सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।

    भारत और शारजाह के आर्थिक संबंधों को व्यापक भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी तथा सीईपीए का समर्थन प्राप्त है। शारजाह चैंबर की ओर से भारत में मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर ट्रेड मिशन और बिजनेस फोरम आयोजित किए गए हैं। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, एसएमई, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, फूड इंडस्ट्री, टूरिज्म और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल रहे हैं।

    अब्दल्ला सुल्तान अल ओवैस मई 2014 से शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और एक्सपो सेंटर शारजाह के चेयरमैन हैं। वे यूएई फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वाइस चेयरमैन भी हैं। उन्हें सरकार, उद्योग, बैंकिंग, खाद्य उत्पादन, शिक्षा, कृषि और द्विपक्षीय व्यापारिक संस्थाओं में नेतृत्व का अनुभव है।

  • दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण

    दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण


    भोपाल । दुबई में मध्यप्रदेश ने निवेश की संभावनाओं को लेकर बड़ा असर छोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के तीसरे दिन प्रदेश को 53 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई है। ग्रीन एनर्जी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शिक्षा मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों और कारोबारी समूहों ने मध्यप्रदेश में रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से वन टू वन मुलाकात कर प्रदेश की खूबियां गिनाईं और साफ संदेश दिया कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने निवेशकों को अगले साल जनवरी में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि वेलकम टू मध्यप्रदेश।

    दुबई दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की मुलाकात कई बड़े कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों से हुई। इनमें राणा होल्डिंग्स जेम्स एजुकेशन क्रेसेंट ग्रुप प्योर हेल्थ शराफ ग्रुप चोइथराम्स डीपी वर्ल्ड ब्यूमर्क कॉरपोरेशन वेस्ट जोन केजीके ग्रुप विस्टास मीडिया कैपिटल वीएफएस ग्लोबल और एनआईडीआई सर्विसेज से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठकों का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को अलग अलग सेक्टर में सामने रखना और संभावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाना रहा।

    इनमें राणा होल्डिंग्स की ओर से सबसे बड़े प्रस्तावों में रुचि दिखाई गई। कंपनी ने मध्यप्रदेश में 2000 मेगावॉट के सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावॉट के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट 50 मेगावॉट क्षमता के एआई और कंप्यूट डेटा सेंटर क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी एवं रीसाइक्लिंग कॉम्प्लेक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब जैसी परियोजनाओं में रुचि दिखाई। इन प्रस्तावित परियोजनाओं से करीब 35 हजार 200 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना बताई गई है।

    इसके अलावा औद्योगिक स्तर के एआई कंप्यूट कैंपस और सॉवरेन एआई फैक्ट्री को लेकर भी चर्चा हुई। 50 मेगावॉट क्षमता वाले एआई फैक्ट्री प्रोजेक्ट के लिए करीब 1.5 से 2 अरब डॉलर यानी लगभग 18 हजार करोड़ रुपए के निवेश का कॉन्सेप्ट सामने रखा गया। भविष्य में इसकी क्षमता को 100 मेगावॉट से अधिक तक बढ़ाने की संभावना भी बताई गई है। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों के साथ साथ एआई डेटा सेंटर और हाई टेक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए क्षेत्रों पर भी अपना फोकस बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री की बातचीत केवल ऊर्जा और तकनीक तक सीमित नहीं रही। हेल्थ सेक्टर में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल डिजिटल हेल्थ टेलीमेडिसिन मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा हुई। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क वेयरहाउसिंग कोल्ड चेन और ग्लोबल सप्लाई चेन से मध्यप्रदेश को जोड़ने पर जोर दिया गया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण रिटेल कृषि उत्पादों की खरीद वितरण नेटवर्क और कोल्ड चेन को लेकर भी निवेश की संभावनाएं तलाशीं गईं।

    शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ हुई बैठक में भी मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें लॉजिस्टिक्स फूड प्रोसेसिंग टेक्सटाइल फार्मास्यूटिकल्स पर्यटन नवीकरणीय ऊर्जा और एसएमई सहयोग जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री ने शारजाह के निवेशकों को भी मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

    दुबई दौरे में मुख्यमंत्री ने वेस्ट टू एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़ी परियोजनाओं को भी करीब से समझा। बीईईएएच के साथ इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सर्कुलर इकोनॉमी स्मार्ट सिटी और हरित ऊर्जा को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं एमार समूह की लीडरशिप से मुलाकात में इंदौर पीथमपुर उज्जैन डेवलपमेंट कॉरिडोर के साथ टाउनशिप हॉस्पिटैलिटी और आधुनिक शहरी विकास परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई।

    इस पूरे दौरे में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता को वैश्विक मंच पर पेश करने के साथ राज्य की निवेश नीति इंफ्रास्ट्रक्चर भूमि उपलब्धता लॉजिस्टिक्स और सिंगल विंडो व्यवस्था को भी प्रमुखता से बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार निवेशकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है।

    इसी दौरान मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को एआईएम इन्वेस्टमेंट अवॉर्ड्स 2026 में विनर एशिया सम्मान भी मिला। यह पुरस्कार निवेश संवर्धन विदेशी निवेश आकर्षित करने रोजगार सृजन नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए दिया गया। ऐसे में दुबई दौरे से मिले 53 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश के लिए बड़ी संभावनाओं का संकेत जरूर हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की होगी।

  • तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज

    तीन दिन के आंदोलन के बाद सरकार झुकी: MP के MBBS इंटर्न्स का स्टाइपेंड अब 21,500 रुपए, पुलिस कार्रवाई पर भी जांच तेज


    भोपाल । मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है। सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच हुई बातचीत के बाद स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21 हजार 500 रुपए प्रतिमाह करने पर सहमति बनी है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक में इस मुद्दे पर सकारात्मक समाधान निकला। हालांकि बढ़ी हुई राशि कब से लागू होगी और इसके लिए औपचारिक आदेश कब जारी होगा इसकी स्थिति सरकारी आदेश के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर आंदोलन कर रहे थे। भोपाल में आंदोलन ने उस समय बड़ा रूप ले लिया था जब डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड को 14 हजार 337 रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की थी। डॉक्टरों का कहना था कि मौजूदा राशि उनके काम के बोझ और बढ़ती महंगाई के मुकाबले काफी कम है।

    आंदोलन के दौरान सोमवार को हमीदिया अस्पताल के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। डॉक्टरों के मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसके बाद कुछ इंटर्न डॉक्टरों के घायल होने की खबर सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर मेडिकल संगठनों और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई थी। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा जिसके बाद पुलिस कार्रवाई की जांच के निर्देश दिए गए।

    इसके बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन को और तेज कर दिया। भोपाल में सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया गया और कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ। डॉक्टरों का कहना था कि जब तक सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने और पुलिस कार्रवाई के मामले में लिखित तौर पर ठोस कदम नहीं उठाती तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। गांधी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों से जुड़े इंटर्न्स ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया।

    इसी बीच बुधवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ इंटर्न डॉक्टरों JUDA और MTA के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। करीब डेढ़ घंटे चली बातचीत में स्टाइपेंड बढ़ाने के साथ ही प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और घायल छात्रों के इलाज का मुद्दा भी उठाया गया। बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई। इससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    बैठक में पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को कार्रवाई का भरोसा दिया। शुरुआती जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी दी गई है। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के लिए जांच टीम भी बनाई गई है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे आंदोलन कर रहे डॉक्टरों को भी यह भरोसा मिला कि पुलिस कार्रवाई के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

    बैठक के दौरान प्रदर्शन में घायल हुए इंटर्न डॉक्टरों के उपचार को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से घायल छात्रों को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। JUDA और MTA प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर संतोष जताया।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मुद्दा अब 21 हजार 500 रुपए के स्टाइपेंड पर बनी सहमति है। इंटर्न डॉक्टर भले ही 30 हजार रुपए की मांग कर रहे थे लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बाद 21 हजार 500 रुपए पर सहमति बनने से आंदोलन खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल गया है। अब निगाहें औपचारिक आदेश पर हैं क्योंकि आदेश जारी होने के बाद ही नई राशि के लागू होने की तारीख और दूसरी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी। फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच टकराव के बाद बातचीत से निकला यह समाधान चिकित्सा छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।