Category: Madhya Pradesh

  • फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील

    फायर सेफ्टी की अनदेखी पर इंदौर में बड़ा एक्शन, अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकानें और ऑफिस सील


    इंदौर । इंदौर के साउथ तुकोगंज स्थित शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र अपोलो टावर पर नगर निगम ने फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरी इमारत को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का सीधा असर टावर में संचालित 600 से अधिक दुकान और ऑफिस पर पड़ रहा है। नगर निगम की टीम के अचानक पहुंचते ही पूरे परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही दुकानदार और ऑफिस संचालक अपने सामान को सुरक्षित करने में जुट गए और कई लोगों ने निगम की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार अपोलो टावर प्रबंधन को करीब तीन महीने पहले फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। भवन में सुरक्षा मानकों को लेकर जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे लेकिन तय समय सीमा के बाद भी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया गया। इसके बाद निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती और फायर सेफ्टी जैसी गंभीर व्यवस्था में लापरवाही भारी पड़ सकती है।

    अपोलो टावर इंदौर की प्रमुख व्यावसायिक इमारतों में शामिल है और इसे शहर के शुरुआती बड़े व्यावसायिक परिसरों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें और कार्यालय संचालित होते हैं। ऐसे में एक साथ पूरी बिल्डिंग पर कार्रवाई होने से सैकड़ों कारोबारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। निगम की टीम के पहुंचने की खबर फैलते ही टावर में काम कर रहे लोगों और व्यापारियों के बीच हलचल तेज हो गई। कई दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने लगे जबकि कुछ लोग जरूरी सामान को सुरक्षित करने में जुटे दिखाई दिए।

    नगर निगम की इस कार्रवाई को शहर में फायर सेफ्टी नियमों को लेकर कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बड़े व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है और नोटिस मिलने के बावजूद यदि कमियों को दूर नहीं किया जाता है तो प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीम ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर में अन्य व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच की जा सकती है।

    अपोलो टावर पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर शहर की व्यावसायिक इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। आग लगने जैसी किसी आपात स्थिति में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने से बड़े हादसे की आशंका रहती है। ऐसे में नगर निगम अब केवल नोटिस देकर कार्रवाई सीमित रखने के बजाय सीधे सख्त कदम उठाता दिखाई दे रहा है। फिलहाल अपोलो टावर की 600 से अधिक दुकान और ऑफिस प्रभावित होने से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है जबकि निगम की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह का सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

  • कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में

    कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में


    रीवा। मध्यप्रदेश की राजनीति में रीवा के संजय गांधी अस्पताल से जुड़ा कल्पना मिश्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भोपाल स्थित मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर लगे पोस्टर और बैनर भी हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस विधायक की हिरासत के बाद इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। अभय मिश्रा सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं और वे लंबे समय से रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले को उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सी सेक्शन के बाद कल्पना और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई और दो डॉक्टरों तथा दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक को भी पद से हटाया गया और पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए गए। हालांकि कल्पना मिश्रा के परिजन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और सख्त कार्रवाई की मांग पर लगातार अड़े हुए हैं।

    इसी मामले को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन तेज कर दिया है। अभय मिश्रा मंत्रालय के सामने धरना देकर सरकार से मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने धरना स्थल से उन्हें हिरासत में ले लिया जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मामला केवल कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत तक सीमित नहीं रहा है बल्कि संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे अलग अलग आरोपों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

    अभय मिश्रा ने इससे पहले अस्पताल की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए थे और अस्पताल में निगरानी तथा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर अस्पताल से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। एक मामले में मरीज को मृत घोषित किए जाने और बाद में उसके जीवित होने की बात सामने आने के बाद जांच की मांग उठी। इसके अलावा एक युवक को गलत इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप तथा एक महिला मरीज के इलाज और देखरेख में लापरवाही के आरोपों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनमें से कुछ आरोपों को निराधार बताया है और कई मामलों में जांच की बात कही गई है।

    मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सक्रिय हैं। उन्होंने रीवा में धरने के दौरान कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को भी निशाने पर लिया और जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

    फिलहाल अभय मिश्रा को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पीड़ित परिवार FIR और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है जबकि दूसरी ओर सरकार और अस्पताल प्रशासन जांच तथा पहले से की गई कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है क्योंकि इसी से तय होगा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिल पाता है।

  • सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन

    सरकार-इंटर्न डॉक्टरों के बीच सुलह, 21,500 रुपये स्टाइपेंड के बाद खत्म हुआ आंदोलन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले कई दिनों से चल रहा MBBS इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे इंटर्न डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा गतिरोध मंगलवार को बातचीत के बाद खत्म हो गया। मंत्रालय में हुई अहम बैठक के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड पर सहमति बन गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा के बाद निकले इस समाधान को इंटर्न डॉक्टरों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हड़ताल समाप्त होने के साथ ही अब प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रभावित हुई स्वास्थ्य सेवाओं के सामान्य होने की उम्मीद भी बढ़ गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल की उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ मंत्रालय में अहम बैठक हुई। इस बैठक में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन यानी JUDA और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन यानी MTA के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। बातचीत के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच स्टाइपेंड की राशि को लेकर सहमति बन गई और आखिरकार 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड तय किया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।

    बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से शुरुआत में इंटर्न डॉक्टरों को 18,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई और अस्पतालों में लंबे समय तक काम करने की जिम्मेदारी को देखते हुए यह राशि पर्याप्त नहीं है। इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर अड़े रहे जिसके बाद सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत हुई। अंततः सरकार ने अपने प्रस्ताव में संशोधन करते हुए स्टाइपेंड की राशि बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दी और इसी पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।

    इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा की गई जिसके बाद समाधान का रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। JUDA और MTA के प्रतिनिधियों ने भी बैठक के बाद सकारात्मक बातचीत पर संतोष जताया और कहा कि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का समाधान बातचीत के जरिए निकलना महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का भी आभार व्यक्त किया।

    बैठक में केवल स्टाइपेंड का मुद्दा ही नहीं बल्कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच के लिए अलग से टीम भी गठित की गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के समुचित इलाज का भरोसा भी दिया है।

    दरअसल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। आंदोलन के कारण कई अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा था। हालात उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गए जब गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। छात्रों के आगे बढ़ने पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया जिसके बाद डॉक्टरों और छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई थी।

    अब 21,500 रुपये स्टाइपेंड पर सहमति बनने और पुलिस कार्रवाई की जांच के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। यह फैसला न केवल इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती का समाधान साबित हुआ है। आने वाले दिनों में इंटर्न डॉक्टरों के ड्यूटी पर लौटने के साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।

  • MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल

    MP: सीहोर के इस गांव में पानी फिल्टर प्लांट से क्लोरीन गैस लीक… आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ, 6 लोग पहुंचे अस्पताल


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर जिले (Sehore district) में पानी साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाली क्लोरीन गैस (Chlorine Gas) जब अचानक हवा में फैल जाए तो क्या होगा? आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और फिर लोगों का अस्पताल की तरफ दौड़ना।

    मामला लसुड़िया खास गांव (Lasudiya Khas village) का है. यहां एक पानी फिल्टर प्लांट (Water filtration plant) है, जहां तालाब के पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था. सब कुछ सामान्य था, लेकिन इसी दौरान क्लोरीन गैस के टैंक में लीकेज हो गया।

    गैस टैंक से बाहर निकली तो आसपास मौजूद लोगों को इसका असर महसूस होने लगा. कुछ लोगों की आंखों में तेज जलन होने लगी, तो कुछ को सांस लेने में परेशानी हुई. देखते ही देखते इलाके में हड़कंप मच गया।

    गैस के संपर्क में आए लोगों को इलाज के लिए सीहोर जिला अस्पताल पहुंचाया गया. यहां डॉक्टरों ने प्रभावित लोगों का इलाज करना शुरू किया. अस्पताल पहुंचे लोगों की हालत को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन डॉक्टरों ने राहत की खबर दी. जिला अस्पताल के डॉक्टर हरिओम गुप्ता के मुताबिक, गैस से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को गंभीर परेशानी नहीं हुई है और सभी लोग खतरे से बाहर हैं।


    पानी साफ करने वाली गैस ने बढ़ाई चिंता

    क्लोरीन का इस्तेमाल आमतौर पर पानी को साफ करने के लिए किया जाता है. लसुड़िया खास के इस फिल्टर प्लांट में भी तालाब के पानी को साफ करने के लिए इसका उपयोग हो रहा था. लेकिन टैंक में लीकेज के बाद यही गैस लोगों के लिए परेशानी की वजह बन गई।

    घटना की सूचना के बाद प्लांट में स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिशें शुरू की गईं. हालांकि, गैस लीक होने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।

    राहत की बात यही है कि आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जरूर हुई, लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है. सभी प्रभावित लोग खतरे से बाहर हैं. लोगों का सवाल है कि पानी को साफ करने के लिए इस्तेमाल हो रहा क्लोरीन गैस का टैंक आखिर लीक कैसे हुआ? और क्या प्लांट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे?

  • MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार

    MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस कारण उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी (Standing Hanuman Ji) के मंदिर को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की टीमों ने मंदिर का ढांचा तोड़ दिया है लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस होने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन की तमाम कोशिशें विफल रही हैं। इसको श्रद्धालु चमत्कार मान रहे हैं। विरोध में हिंदूवादी संगठनों और भक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर मूर्तिं को हटाने का विरोध किया। अब तकनीकी जांच की बात कही जा रही है।


    सिहस्थ के मद्देनजर चौड़ी की जा रही सड़क

    अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन में सिहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण की हद में खड़े हनुमान जी के मंदिर का कुछ हिस्सा आ रहा है जिसे प्रसासन हटाने में लगा हुआ है। यह क्षेत्र कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर तक के मार्ग में है। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद प्रशासन खड़े हनुमान जी की मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना चाहता है।


    तमाम कोशिशें बेकार, टस से मस नहीं हुई प्रतिमा

    बताया जाता है कि बीते एक हफ्ते के भीतर प्रशासन की टीमों ने तीन बार हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिशें की लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई। अब श्रद्धालु, संत और हिंदूवादी संगठन इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोग प्रशासन से मूर्ति को नहीं हटाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मौजूदा वक्त में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है जबकि प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो जगह दी है वहां प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।


    जैसे पता चल कि प्रशासन आने वाला है, लग गया जमावड़ा

    श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे मंदिर के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर असर पड़ सकता है। बताया जाता है कि मंगलवार को बाबा महाकाल की राजसी सवारी के बाद खबरें फैलीं कि प्रशासन की टीम एक बार फिर मूर्ति को हटाने के लिए पहुंच सकती है। इसके बाद लोगों का जमावड़ा लगने लगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मंदिर पहुंच गए।


    हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे…

    भारी भीड़ के बीच भक्तों ने मंदिर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। नारेबाजी करते हुए लोगों ने हनुमान जी की प्रतिमा को किसी भी सूरत में नहीं हटाने देने की चेतावनी दी। हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने सरकार विकास के नाम पर 60 मंदिर हटा चुकी है। मैं सरकार से दो-टूक कहना चाहता हूं कि अटल विहारी वाजपेयी ने कहा था श्री राम जी मत उलझो मिट जाओगे। आज हम कहते हैं हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे।


    बढ़ रहा आक्रोश, विरोध प्रदर्शन होगा तेज

    रूपेश ठाकुर ने आगे कहा कि महापौर और पार्षद को इस्तीफा दे देना चाहिए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि उनका विरोध और तेज होगा। मौजूदा वक्त में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टेंट में विराजमान है। वहीं प्रशासन दिन प्रति दिन बढ़ते लोगों के आक्रोश के कारण कोई मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता है। प्रशासन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिशें कर रहा है। इसके लिए बेहद सावधानी बरती जा रही है।


    पुरातत्व विभाग की टीम भी लौटी

    प्रशासन की ओर से तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन मूर्ति हिलने का नाम नहीं ले रही है। इतना ही नहीं एक बार पुरातत्व विभाग की टीम भी लौट चुकी है। आलम यह कि खड़े हनुमान जी के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। नगर निगम की ओर से प्रतिमा को शिफ्ट करने के प्रयास सफल नहीं होने की खबरें ट्रेंड कर रही हैं। अब खड़े हनुमान जी मंदिर का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया। अब मूर्ति की तकनीकी जांच की बात सामने आ रही है।

  • MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया

    MP के छिंदवाड़ा में भगवा झंडा हटाने पर भड़के हिंदू संगठन… प्रदर्शन के बाद खुद निगम आयुक्त ने लगाया


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा (Chhindwara) में मंगलवार दोपहर मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे भगवा झंडे को हटाने को लेकर विवाद हो गया. नगर निगम के कर्मचारियों ने पोल से भगवा झंडा (Saffron flag) उतार दिया था. जब हिंदू संगठनों के सदस्यों को पता चला कि झंडा नीचे पर पड़ा है, तो वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे, जिसके बाद वहां जल्द ही भीड़ जमा हो गई. रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत (Arvind Rajput) ने आरोप लगाया कि कलेक्टर हरेंद्र नारायण (Collector Harendra Narayan) के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त सीपी राय के कहने पर भगवा झंडा हटाया गया. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक नगर आयुक्त खुद मौके पर आकर झंडा दोबारा नहीं लगा देते।

    विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलने पर निगम कमिश्नर सीपी राय मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और खंभे पर दोबारा केसरिया झंडा लगा दिया. इसके बाद विरोध-प्रदर्शन खत्म हो गया और हालात सामान्य हो गए. जानकारी के मुताबिक, खंभे पर लगे भगवा झंडे की जगह तिरंगा लगाने की योजना थी, लेकिन जिस तरह से झंडा हटाया गया, उससे विरोध शुरू हो गया. इसके बाद फिलहाल भगवा झंडे को उसकी मूल जगह पर वापस लगा दिया गया. इस घटना के बाद कुछ समय के लिए मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने भीड़ जमा हो गई. प्रशासन ने झंडा हटाने के आरोपों को लेकर कोई अलग बयान जारी नहीं किया है।


    निगम कमिश्नर ने खुद लगाया झंडा

    कमिश्नर सीपी राय ने बताया कि मंगलवार दोपहर नगर निगम के कर्मचारियों ने मानसरोवर कॉम्प्लेक्स के सामने लगे एक खंभे से भगवा झंडा हटा दिया था. हिंदू संगठनों के सदस्यों को झंडा नीचे पड़ा देखकर इस घटना का पता चला. इसके बाद वे मौके पर पहुंचे और विरोध करने लगे. नगर निगम की एक टीम भी वहां पहुंची. जब झंडे को लेकर विवाद बढ़ने लगा, तो वे खुद मौके पर गए लोगों की बात सुनी, खुद झंडा लगाया और मामले को सुलझाया।

  • नीचे ग्रामीणों की भीड़ और ऊपर 60 फीट ऊंची टंकी पर सांड: 42 घंटे बाद प्रशासन ने क्रेन से किया सुरक्षित रेस्क्यू

    नीचे ग्रामीणों की भीड़ और ऊपर 60 फीट ऊंची टंकी पर सांड: 42 घंटे बाद प्रशासन ने क्रेन से किया सुरक्षित रेस्क्यू


    श्योपुर । मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के ददूनी गांव में एक सांड ने करीब दो दिन तक ग्रामीणों और प्रशासन की चिंता बढ़ाए रखी। गांव में बनी करीब 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ा सांड लंबे समय तक नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। उसे टंकी की ऊंचाई पर फंसा देखकर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। हर किसी के सामने एक ही सवाल था कि आखिर इतने ऊंचे स्थान से इस जानवर को सुरक्षित नीचे कैसे उतारा जाए। काफी प्रयासों के बाद जब सांड नीचे नहीं आया तो प्रशासन को क्रेन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। करीब दो घंटे चले अभियान के बाद आखिरकार सांड को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

    जानकारी के अनुसार ददूनी गांव श्योपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। रविवार की शाम एक सांड पानी की टंकी पर चढ़ गया। टंकी की ऊंचाई लगभग 60 फीट बताई जा रही है। सांड के इतनी ऊंचाई पर पहुंचने की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचने लगे। लोगों ने अपने स्तर पर उसे नीचे लाने की कोशिश की लेकिन ऊंचाई और सांड की स्थिति को देखते हुए यह आसान नहीं था।

    ददूनी पंचायत के सचिव महेश गौड़ के मुताबिक सांड पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पुलिस और प्रशासन को भी पूरे मामले की सूचना दे दी गई थी। इस दौरान सांड ने एक बार नीचे उतरने का प्रयास किया लेकिन नीचे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ देखकर वह फिर ऊपर की तरफ चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की ताकि जानवर को नीचे आने का मौका मिल सके लेकिन सांड टंकी पर ही रुका रहा।

    समय बीतता गया और रविवार की शाम से मंगलवार तक करीब 42 घंटे गुजर गए। इस दौरान पंचायत की ओर से सांड के खाने और पानी की व्यवस्था की गई। प्रशासन और ग्रामीण उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रहे। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इतने भारी जानवर को 60 फीट की ऊंचाई से नीचे उतारते समय किसी तरह की चोट या दुर्घटना न हो। इसी वजह से जल्दबाजी के बजाय सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू की योजना बनाई गई।

    मंगलवार को प्रशासन ने श्योपुर से क्रेन मंगवाई। मौके पर पुलिस के साथ पशुपालन विभाग और प्रशासन की टीम पहुंची। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मानपुर थाना प्रभारी सतीश दुबे के अनुसार पुलिस टीम ने पशुपालन विभाग के सहयोग से अभियान चलाया। पशु चिकित्सा अधिकारी सचिन उपाध्याय ने सांड को नियंत्रित करने के लिए बेहोशी की दवा दी। इसके बाद क्रेन की मदद से उसे सावधानीपूर्वक नीचे उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    करीब दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में टीम ने बेहद सावधानी के साथ सांड को नीचे लाने का काम किया। आखिरकार 42 घंटे से टंकी पर फंसे सांड को सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। सांड के सुरक्षित नीचे आने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और मौके पर बनी हलचल भी धीरे धीरे खत्म हो गई।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक सवाल जरूर छोड़ दिया कि आखिर सांड 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ा कैसे। फिलहाल इसका स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है लेकिन इस अनोखे रेस्क्यू की चर्चा पूरे इलाके में बनी हुई है।

  • कचरा गाड़ी चोरी का पुलिस ने किया खुलासा: कोलारस से साढ़ौरा तक 50 CCTV ने जोड़ा पूरा रास्ता, डीजल खत्म होने पर छोड़ने का शक

    कचरा गाड़ी चोरी का पुलिस ने किया खुलासा: कोलारस से साढ़ौरा तक 50 CCTV ने जोड़ा पूरा रास्ता, डीजल खत्म होने पर छोड़ने का शक


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस में नगर परिषद की कचरा उठाने वाली सरकारी गाड़ी चोरी होने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 31 अगस्त की रात नगर परिषद परिसर से चोरी हुई टाटा ट्रिपर गाड़ी को पुलिस ने अशोकनगर जिले के साढ़ौरा से बरामद कर लिया है। वाहन की तलाश में पुलिस ने कोलारस से साढ़ौरा तक करीब 50 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और एक के बाद एक मिले सुरागों को जोड़ते हुए चोरी हुई गाड़ी तक पहुंच गई। फिलहाल वाहन को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर कोलारस थाने पहुंचा दिया है जबकि CCTV फुटेज में नजर आए संदिग्ध की तलाश जारी है।

    जानकारी के मुताबिक नगर परिषद कोलारस की टाटा ट्रिपर कचरा गाड़ी क्रमांक MP33L2598 को 31 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे नगर परिषद कार्यालय परिसर से चोरी कर लिया गया था। रात में गाड़ी के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद नगर परिषद कर्मचारियों ने आसपास के इलाके में तलाश शुरू की लेकिन वाहन का कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामले की जांच शुरू हुई।

    जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग उस समय मिला जब CCTV फुटेज में चोरी की गई गाड़ी रात करीब 9:40 बजे रेलवे स्टेशन रोड की तरफ जाती दिखाई दी। इसके कुछ देर बाद रात करीब 10 बजे यही वाहन पूरनखेड़ी टोल प्लाजा से गुजरता हुआ नजर आया। टोल प्लाजा के कैमरों में गाड़ी को ले जाते हुए एक संदिग्ध व्यक्ति भी दिखाई दिया। इस फुटेज ने पुलिस की जांच को नई दिशा दी।

    नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की शिकायत पर कोलारस थाने में मामला दर्ज किया गया। थाना प्रभारी पुनीत बाजपेई के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वाहन की तलाश शुरू की। पुलिस ने केवल एक या दो स्थानों के CCTV पर निर्भर रहने के बजाय पूरे संभावित रास्ते की फुटेज खंगालना शुरू किया। कोलारस से साढ़ौरा तक अलग अलग स्थानों पर लगे करीब 50 CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई। कई कैमरों में वाहन की गतिविधियों को जोड़ते हुए पुलिस ने उसके संभावित मार्ग का पता लगाया।

    लगातार जांच के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि चोरी की गई सरकारी गाड़ी अशोकनगर जिले के साढ़ौरा तक पहुंच चुकी है। इसके बाद पुलिस टीम ने साढ़ौरा रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की। इसी दौरान चोरी हुई टाटा ट्रिपर गाड़ी बरामद कर ली गई। वाहन को पुलिस ने कब्जे में लेकर कोलारस थाने भेज दिया।

    पुलिस की जांच में एक और अहम बात सामने आई है। बरामद गाड़ी के टैंक में डीजल नहीं मिला है। ऐसे में प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि रास्ते में डीजल खत्म होने के बाद संदिग्ध ने गाड़ी को साढ़ौरा रेलवे स्टेशन के पास छोड़ दिया और वहां से ट्रेन पकड़कर फरार हो गया। हालांकि यह अभी पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है। आरोपी ने वाहन को क्यों छोड़ा और वह किस दिशा में फरार हुआ इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    अब पुलिस का पूरा ध्यान CCTV फुटेज में दिखाई दे रहे संदिग्ध की पहचान और गिरफ्तारी पर है। पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपी की तस्वीर और हुलिए का मिलान कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोरी की वारदात अकेले व्यक्ति ने की थी या इसके पीछे कोई और भी शामिल था। नगर परिषद परिसर से सरकारी वाहन चोरी होने के कारण पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है।

    फिलहाल चोरी हुई कचरा गाड़ी बरामद होने से नगर परिषद और पुलिस ने राहत की सांस ली है लेकिन इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। 50 CCTV कैमरों से मिले सुरागों ने पुलिस को वाहन तक तो पहुंचा दिया है अब सबसे बड़ी चुनौती उस व्यक्ति तक पहुंचना है जिसने सरकारी गाड़ी को नगर परिषद परिसर से चोरी किया था।

  • शिवपुरी में बारिश बनी आफत: मकान का आधा हिस्सा गिरने से लाखों का नुकसान, हादसे के वक्त घर में नहीं था कोई शख्स

    शिवपुरी में बारिश बनी आफत: मकान का आधा हिस्सा गिरने से लाखों का नुकसान, हादसे के वक्त घर में नहीं था कोई शख्स


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर में लगातार चार दिनों तक हुई तेज बारिश के बाद अब इसका असर शहर के कमजोर मकानों पर दिखाई देने लगा है। मंगलवार शाम नवाब साहब रोड पर उस समय हड़कंप मच गया जब एक मकान का करीब आधा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। मकान का छज्जा बाथरूम और पीछे का बड़ा हिस्सा कुछ ही सेकंड में मलबे में बदल गया। मकान का हिस्सा गिरने के साथ ही वहां खड़ी तीन मोटरसाइकिलें भी मलबे के नीचे दब गईं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। गनीमत रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय कोई व्यक्ति मलबे की चपेट में नहीं आया और एक बड़ा हादसा टल गया।

    घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में अफरा तफरी मच गई। मकान का हिस्सा गिरने की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते सड़क और मकान के आसपास मलबा फैल गया था। स्थानीय लोगों ने परिवार की मदद करते हुए मलबा हटाने का काम शुरू किया। मलबे में दबे वाहनों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इस दौरान सामने आया कि तीनों मोटरसाइकिलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

    मकान मालिक सुनील रजक के मुताबिक पिछले चार दिनों से शिवपुरी में लगातार तेज बारिश हो रही थी। बारिश का पानी मकान की दीवारों और निर्माण वाले हिस्सों में लगातार पहुंच रहा था। इससे मकान का पिछला हिस्सा धीरे धीरे कमजोर हो गया। मंगलवार शाम अचानक मकान की संरचना ने जवाब दे दिया और छज्जे के साथ बाथरूम तथा पीछे का हिस्सा भरभराकर गिर गया। हादसा इतनी तेजी से हुआ कि परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हालांकि किस्मत अच्छी रही कि उस समय कोई व्यक्ति उस हिस्से में मौजूद नहीं था।

    मकान का हिस्सा गिरने से केवल भवन को ही नुकसान नहीं हुआ बल्कि वहां खड़ी तीन मोटरसाइकिलें भी मलबे में दब गईं। परिवार के मुताबिक तीनों बाइक की कुल कीमत करीब ढाई लाख रुपए है। इसके अलावा मकान के अंदर रखा सामान भी मलबे में दब गया जिससे नुकसान और बढ़ गया। मकान के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और दोबारा निर्माण में करीब ढाई लाख रुपए का खर्च आने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस तरह मकान और मोटरसाइकिलों को मिलाकर करीब पांच लाख रुपए के नुकसान की आशंका है।

    बारिश के कारण मकान की स्थिति पहले से कमजोर होने की बात सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश के दौरान पुराने और कमजोर मकानों को लेकर खतरा बढ़ जाता है। खासकर ऐसे मकानों में जहां दीवारों में पहले से दरारें हों या पानी लगातार रिस रहा हो वहां अचानक हिस्सा गिरने की आशंका बनी रहती है। नवाब साहब रोड की घटना ने भी इसी खतरे की ओर ध्यान खींचा है।

    हादसे के बाद प्रभावित परिवार ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। परिवार चाहता है कि राजस्व और नगर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करे। इसके साथ ही नियमानुसार राहत और मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। परिवार का कहना है कि बारिश के कारण हुए इस नुकसान ने आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है और मकान के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा सुरक्षित बनाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होगी।

    फिलहाल घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है। लेकिन जिस तरह मकान का बड़ा हिस्सा अचानक गिरा उसने आसपास रहने वाले लोगों को जरूर डरा दिया है। चार दिन की बारिश के बाद सामने आई इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि लगातार बारिश के बीच कमजोर भवनों की स्थिति की जांच बेहद जरूरी है ताकि किसी अगले हादसे से पहले जरूरी कदम उठाए जा सकें।

  • 5-डे बैंकिंग वीक की मांग पर बैंककर्मियों का बड़ा आंदोलन: सितंबर में दो बार काम बंद, 26 से 30 सितंबर तक लगातार 5 दिन असर

    5-डे बैंकिंग वीक की मांग पर बैंककर्मियों का बड़ा आंदोलन: सितंबर में दो बार काम बंद, 26 से 30 सितंबर तक लगातार 5 दिन असर


    भोपाल । मध्य प्रदेश में सितंबर का महीना बैंक ग्राहकों के लिए परेशानी भरा हो सकता है। प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में इस महीने दो अलग-अलग मौकों पर बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। करीब 40 हजार बैंककर्मी 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने समेत कई लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। पहली हड़ताल 11 सितंबर को प्रस्तावित है। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण लगातार तीन दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित हो सकता है। महीने के आखिरी सप्ताह में भी बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद 28 29 और 30 सितंबर को बैंककर्मियों की हड़ताल प्रस्तावित है। इस तरह लगातार पांच दिन बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    हड़ताल के दौरान बैंक की रोजमर्रा की कई सेवाओं पर असर पड़ सकता है। नकद जमा और निकासी से लेकर चेक क्लियरेंस KYC अपडेट लॉकर से जुड़े काम और अन्य शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं होंगी लेकिन जिन कामों के लिए ग्राहकों को शाखा जाना जरूरी होता है उनके लिए परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें ताकि हड़ताल के दौरान उन्हें किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

    बैंक यूनियनों का सबसे प्रमुख मुद्दा 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना है। फिलहाल बैंक कर्मचारियों को महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है। यूनियनों की मांग है कि महीने के सभी शनिवार को अवकाश घोषित किया जाए। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना बैंकिंग समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। यूनियनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य संतुलन मिलेगा और बैंकिंग व्यवस्था को भी पांच कार्य दिवसों के आधार पर व्यवस्थित किया जा सकेगा।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU ने 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह के साथ स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू की गई PLI योजना को वापस लेने की मांग भी उठाई है। यूनियनों का आरोप है कि नई PLI व्यवस्था से कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ सकती है। उनका कहना है कि अधिकारियों के सीमित वर्ग को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन देने की व्यवस्था बैंक कर्मचारियों के बीच विभाजन पैदा कर सकती है।

    बैंक यूनियनों के मुताबिक पेंशन अपडेशन और पेंशनभोगियों के एक्स ग्रेशिया की समीक्षा जैसे कई मुद्दे भी लंबे समय से लंबित हैं। NPS को OPS में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान DA व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई जा रही है। इसके अलावा बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क सब स्टाफ और आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती करने की मांग है। ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ाने का मुद्दा भी यूनियनों के एजेंडे में शामिल है।

    यूनियनों का कहना है कि इन मांगों का समाधान किए बिना सरकार अगले वेतन संशोधन समझौते को जल्द पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। बैंक कर्मचारियों ने 27 अगस्त को देशभर में प्रदर्शन भी किए थे। अब सितंबर में प्रस्तावित हड़ताल को आंदोलन को आगे बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि हड़ताल से पहले सरकार और बैंक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में बैठक प्रस्तावित है। यदि बातचीत के दौरान 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह और अन्य मांगों पर सहमति बनती है तो हड़ताल के फैसले में बदलाव की संभावना हो सकती है। वहीं यदि बातचीत बेनतीजा रहती है तो 11 सितंबर और 28 से 30 सितंबर की हड़ताल का असर देशभर की बैंकिंग व्यवस्था पर पड़ सकता है।

    UFBU ने इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का भी ऐलान किया है। ऐसे में सितंबर की प्रस्तावित हड़तालों के साथ बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच बातचीत का परिणाम आगे की बैंकिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।