Category: Madhya Pradesh

  • MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम

    MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक 9 से 11 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। इन तीन दिनों में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। स्थानीय सिस्टम सक्रिय होने और पर्याप्त नमी मिलने पर कुछ जिलों में तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक 11 सितंबर को पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसका असर 12 सितंबर से मध्य प्रदेश में दिखाई देने लगेगा। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश का दौर थमा हुआ है।

    सैटेलाइट तस्वीरों में ज्यादातर हिस्से साफ
    मंगलवार को मौसम विभाग की नई सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से बादल छंटे नजर आए। भोपाल समेत कई जिलों में तेज धूप रही। हालांकि श्योपुर, उज्जैन, इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहे।

    12 सितंबर को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    नए सिस्टम के सक्रिय होने के बाद 12 सितंबर को छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    पूर्वी MP में बारिश का आंकड़ा सुधरा
    बारिश के आंकड़ों में पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में सुधार आया है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब बारिश करीब 1 प्रतिशत तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 24% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले सप्ताह कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ जैसे हालात बनने से पूर्वी हिस्से का बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा। सोमवार तक यह हिस्सा पहली बार सीजन में सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया था।

    पश्चिमी हिस्से में अब भी बारिश की कमी
    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    प्रदेश में अब तक कुल 31.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र बारिश के आंकड़ों में और सुधार ला सकता है।

  • शिवपुरी में नशे का खौफनाक VIDEO सामने आया: खुलेआम स्मैक बेचते दिखे युवक और सड़क पर सिरिंज से नशा करता मिला दूसरा युवक

    शिवपुरी में नशे का खौफनाक VIDEO सामने आया: खुलेआम स्मैक बेचते दिखे युवक और सड़क पर सिरिंज से नशा करता मिला दूसरा युवक


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर में नशे के कारोबार और खुलेआम नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर सामने आए दो वीडियो ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में एक तरफ पुलिस की ओर से नशे से दूरी है जरूरी अभियान चलाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ सामने आए वीडियो में कथित तौर पर नशे की खरीद बिक्री और सेवन के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। दोनों वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वीडियो में नजर आ रहे युवकों की पहचान शुरू कर दी है।

    पहला वीडियो शिवपुरी के लुधावली क्षेत्र के वार्ड नंबर 17 का बताया जा रहा है। वीडियो में कुछ युवक एक स्थान पर नजर आ रहे हैं। इसमें दो युवक एक लड़के को कथित तौर पर स्मैक बेचते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में नशे के कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सार्वजनिक स्थान पर नशीले पदार्थ की खरीद बिक्री हो रही है तो इस पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की वास्तविक पहचान और वहां मौजूद पदार्थ की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    इसी बीच दूसरा वीडियो भी सामने आया है जो हवाई पट्टी के पास लगने वाली रेत मंडी का बताया जा रहा है। इस वीडियो में एक युवक सड़क किनारे बैठा दिखाई देता है और उसके हाथ में सिरिंज नजर आती है। वीडियो के मुताबिक युवक कथित तौर पर सिरिंज के जरिए नशा कर रहा था। वहां मौजूद दो लोगों ने युवक को इस तरह खुलेआम नशा करते देखा तो उसे पकड़ लिया और सड़क पर नशा करने को लेकर फटकार लगाई।

    पूछताछ के दौरान युवक ने खुद को ईंट के कारोबार से जुड़ा बताया। उसने यह भी बताया कि वह फिजिकल थाना क्षेत्र का रहने वाला है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला भी पुलिस के संज्ञान में आया है। सार्वजनिक स्थान पर इस तरह नशीले पदार्थ का सेवन दिखाई देना शहर में नशे की समस्या की गंभीरता को सामने लाता है।

    इन दोनों वीडियो के सामने आने के बाद अब पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि स्मैक बेचने और खरीदने से जुड़ा वीडियो सामने आया है। वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान की जा रही है। पहचान होने के बाद मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस वीडियो की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वीडियो में दिखाई दे रहे युवक कौन हैं और नशे से जुड़े इस पूरे मामले के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। यदि जांच में नशीले पदार्थ की खरीद बिक्री की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इन घटनाओं ने एक बार फिर शहर में नशे के खिलाफ लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत को सामने ला दिया है।

  • इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन का बड़ा असर: गांधी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं भी बंद मरीजों की बढ़ी परेशानी

    इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन का बड़ा असर: गांधी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाएं भी बंद मरीजों की बढ़ी परेशानी


    भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने अस्पताल की कई सेवाओं से दूरी बना ली है। हालात यहां तक पहुंच गए कि इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हुईं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ा। अचानक सेवाओं के प्रभावित होने से अस्पताल परिसर में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और काम के मुकाबले काफी कम है। डॉक्टरों का तर्क है कि इंटर्नशिप के दौरान उन्हें अस्पताल में नियमित रूप से मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है। ओपीडी से लेकर वार्ड और इमरजेंसी तक अलग अलग जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इसी मांग को लेकर डॉक्टरों ने काम बंद आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

    प्रदर्शन के बीच गांधी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी सेवाओं के प्रभावित होने की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन में भी हलचल बढ़ गई। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए किसी भी तरह की देरी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में डॉक्टरों के काम से अलग होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई। कई लोग इलाज और चिकित्सकीय सलाह के लिए अस्पताल पहुंचे लेकिन सेवाओं के प्रभावित होने से उन्हें इंतजार करना पड़ा।

    मामले की जानकारी डीन डॉ. झारोकर मालवीय ने दी। उन्होंने बताया कि इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन और सेवाओं के प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। डॉक्टरों की मांगों को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर बातचीत का दौर भी चल रहा है। हालांकि आंदोलनकारी डॉक्टर अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं और इसी वजह से विरोध लगातार जारी है।

    इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों तक बात पहुंचा चुके हैं। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से अब आंदोलन खत्म नहीं होगा। डॉक्टर स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी के साथ अपनी दूसरी मांगों पर भी ठोस कार्रवाई चाहते हैं। जब तक उन्हें संतोषजनक फैसला नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है।

    गांधी मेडिकल कॉलेज में सेवाओं के प्रभावित होने का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल लंबी खिंचने पर मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है। अस्पताल प्रबंधन के सामने चुनौती यह है कि आंदोलन के बीच जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को किस तरह सुचारू रखा जाए।

    फिलहाल इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन भी स्थिति को संभालने और मरीजों को जरूरी उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश में जुटा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं। अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो गांधी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट और गहरा सकता है।

  • इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन

    इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन


    भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर धरने पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई हैं।

    इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14 हजार 337 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है और वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करते हैं और मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    भोपाल में आंदोलन के कारण हमीदिया अस्पताल की ओपीडी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज मौजूद थे। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम से हटने के बाद पर्चे बनाने और मरीजों को देखने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। फिलहाल वरिष्ठ चिकित्सक और जीएमसी के प्रोफेसर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

    वहीं कमला पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। पुराने शहर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई और रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का सड़क पर बैठना जारी रहने से आसपास के इलाकों में भी यातायात दबाव बढ़ गया।

    इससे पहले सोमवार को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने के दौरान धक्कामुक्की की स्थिति बनी जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

    मंगलवार को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मामले पर फिर बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी दूसरी मांग प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में भी भोपाल की घटना के विरोध में डॉक्टरों ने रैली निकालकर अपना समर्थन जताया है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर फिलहाल जारी है।

  • बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद

    बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद


    उज्जैन । उज्जैन शहर के मध्य स्थित सिंधिया ट्रस्ट के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में बछ बारस के अवसर पर मंगलवार को पारंपरिक मटकी फोड़ आयोजन किया गया। जन्माष्टमी के चार दिन बाद होने वाले इस आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर के मुख्य द्वार पर करीब 10 फीट की ऊंचाई पर माखन से भरी मटकी बांधी गई थी। दोपहर करीब 12 बजे कृष्ण के रूप में सजे एक छोटे बालक को मंदिर से बाहर लाया गया। बाल कृष्ण ने लाठी की मदद से ऊंचाई पर बंधी मटकी फोड़ी। मटकी टूटते ही पूरा मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की के जयकारों से गूंज उठा।

    मटकी फूटने के बाद उसमें रखा माखन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में बांटा गया। भक्तों को माखन के साथ मिश्री और धानी का प्रसाद भी वितरित किया गया। आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल नजर आया। मटकी फोड़ने की परंपरा के बाद भगवान द्वारकाधीश की चांदी की पादुकाओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे मंदिर में दिन के समय शयन आरती संपन्न हुई।

    मंदिर से जुड़े श्रद्धालु संजय मालिया के अनुसार यह आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। जन्माष्टमी के बाद चार दिनों तक भगवान की रात में शयन आरती नहीं की जाती। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान के सोने और जागने का कोई निश्चित समय नहीं माना जाता। बछ बारस के दिन मटकी फोड़ने के बाद भगवान के शयन की परंपरा निभाई जाती है। इसी कारण साल में एक बार दिन के समय शयन आरती की जाती है।

    इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि बच्चों को राधा और कृष्ण के रूप में सजाया गया। मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी परिवार के सदस्य मुख्य द्वार पर पहुंचे और परंपरागत तरीके से मटकी फोड़ कार्यक्रम संपन्न कराया। बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चे को देखकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। मटकी फूटने के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए।

    गोपाल मंदिर में बछ बारस का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ उज्जैन की समृद्ध कृष्ण भक्ति परंपरा को भी दर्शाता है। जन्माष्टमी के उत्सव के बाद होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। बाल कृष्ण के हाथों माखन की मटकी फूटने के साथ मंदिर परिसर में उमड़ा उल्लास पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य रहा।

  • जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम

    जबलपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला: मोबाइल बंद होने के बाद खाते से निकले 88 हजार, 3 UPI ट्रांजैक्शन से उड़ाई रकम


    जबलपुर । जबलपुर में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें मोबाइल अचानक बंद होने के बाद युवक को लगा कि फोन में तकनीकी खराबी आ गई है लेकिन कुछ देर बाद जब वह नया मोबाइल खरीदने पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। बैंक खाते में करीब 88 हजार रुपए होने के बावजूद मोबाइल से भुगतान नहीं हो सका। खाते में सिर्फ 36 पैसे बचे थे। जब मिनी स्टेटमेंट निकलवाया गया तो पता चला कि खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 88 हजार 542 रुपए निकाले जा चुके हैं।

    मामला राजीव गांधी नगर निवासी 46 वर्षीय वीरेन्द्र बावरिया का है। वीरेन्द्र जबलपुर नगर निगम में ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत कैंट थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घटना 9 अगस्त की बताई जा रही है। वीरेन्द्र काम पर जाने से पहले भैंसासुर रोड स्थित एक दुकान पर रुके थे। वहां उन्होंने QR कोड स्कैन कर 150 रुपए का UPI भुगतान किया। इसके बाद वह तीन पत्ती चौक स्थित नगर निगम कार्यालय पहुंच गए। दोपहर करीब डेढ़ बजे उनका ओप्पो एंड्रॉयड मोबाइल अचानक ऑटो अपडेट होने लगा। अपडेट की प्रक्रिया के दौरान फोन बंद हो गया और इसके बाद दोबारा चालू नहीं हुआ।

    वीरेन्द्र को लगा कि फोन की बैटरी या सॉफ्टवेयर में कोई खराबी आ गई है। वह फोन लेकर ITI माढ़ोताल स्थित कटंगी रोड की एक मोबाइल दुकान पर पहुंचे। दुकानदार ने फोन चेक करने के बाद बताया कि बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज है और पुरानी बैटरी ठीक से काम नहीं कर रही है। फोन की समस्या के चलते वीरेन्द्र ने नया मोबाइल खरीदने का फैसला किया।

    उन्होंने उसी दुकान से करीब 14 हजार रुपए का नया मोबाइल लेने की बात तय की। भुगतान के लिए उन्होंने PhonePe का इस्तेमाल करने की कोशिश की लेकिन स्क्रीन पर बैलेंस कम होने का मैसेज दिखाई दिया। यह देखकर वह हैरान रह गए क्योंकि उन्हें खाते में पर्याप्त रकम होने की उम्मीद थी। बैंक खाते की जानकारी लेने पर पता चला कि उसमें सिर्फ 36 पैसे बचे हैं।

    इसके बाद वीरेन्द्र पास के SBI ATM पहुंचे और मिनी स्टेटमेंट निकाला। स्टेटमेंट देखते ही उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी मिली। उनके Union Bank of India की सदर शाखा के खाते से तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन किए गए थे। पहले 29 हजार रुपए फिर 50 हजार रुपए और इसके बाद 9 हजार 542 रुपए खाते से ट्रांसफर किए गए। कुल 88 हजार 542 रुपए की रकम उनके खाते से निकल चुकी थी।

    वीरेन्द्र का कहना है कि उन्होंने ये ट्रांजैक्शन नहीं किए थे। मोबाइल बंद होने और खाते से रकम निकलने के बीच संबंध को लेकर अब पुलिस साइबर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइल बंद होने के दौरान खाते तक ठगों की पहुंच कैसे बनी और UPI ट्रांजैक्शन किस माध्यम से किए गए।

    इस घटना ने मोबाइल यूजर्स के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। अचानक मोबाइल बंद होने या अपडेट होने जैसी स्थिति में लोग अक्सर इसे सामान्य तकनीकी समस्या मान लेते हैं। लेकिन इस मामले में मोबाइल की खराबी सामने आने के बाद बैंक खाते से बड़ी रकम निकलने का पता चला। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और ट्रांजैक्शन की जानकारी के आधार पर साइबर ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

  • 5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन

    5 लाख पेंशनर सड़क पर उतरने की तैयारी में: महंगाई राहत का एरियर और कैशलेस इलाज नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। जबलपुर में प्रमुख पेंशनर संगठनों की संयुक्त बैठक में सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के साथ आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा की गई। पेंशनरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के करीब 5 लाख पेंशनर भोपाल में विशाल रैली निकालेंगे। संगठन ने जरूरत पड़ने पर अर्धनग्न प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है।

    जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के मीटिंग हॉल में हुई बैठक में नगर निगम विद्युत मंडल और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े पेंशनर संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत का लंबित एरियर रहा। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से महंगाई राहत के एरियर का भुगतान रुका हुआ है और पेंशनरों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से एरियर सहित भुगतान जल्द करने की मांग की है।

    पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि 5 लाख रुपए तक के आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बावजूद कई पेंशनरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई अस्पतालों में इलाज से इनकार किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। संगठनों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश में भी उत्तर प्रदेश बिहार और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पेंशनरों के लिए बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू की जाए ताकि इलाज के लिए उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    बैठक में नेताओं को मिलने वाली पेंशन का मुद्दा भी उठाया गया। पेंशनर संगठनों ने देश में एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू करने की मांग की। पदाधिकारियों का कहना है कि एक कर्मचारी को जीवनभर एक पेंशन पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है जबकि कई नेताओं को अलग-अलग पदों के आधार पर एक से अधिक पेंशन मिलने की व्यवस्था है। संगठन ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि एक व्यक्ति एक पेंशन का नियम लागू होने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम हो सकता है।

    पेंशनर संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सितंबर के भीतर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके बाद नवंबर में जबलपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी भी है। इसी सम्मेलन में संगठन के आगामी कार्यक्रमों और नेतृत्व से जुड़े फैसले लिए जाएंगे।

    बैठक में शामिल पेंशनर संगठनों ने सरकार से टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की अपील की है। हालांकि संगठनों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर लंबे समय से लंबित मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो प्रदेशभर के पेंशनर एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और पेंशनर संगठनों के बीच यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

  • पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा

    पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा


    जबलपुर । पितृपक्ष के दौरान गया जाकर पिंडदान और तर्पण करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और नियमित ट्रेनों में दबाव को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने गया के लिए 12 स्पेशल ट्रेन सेवाएं चलाने का फैसला लिया है। इनमें रानी कमलापति से गया और जबलपुर से गया के बीच स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए AC स्लीपर और जनरल श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे।

    रानी कमलापति से गया के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति-गया स्पेशल 27 सितंबर 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01662 गया-रानी कमलापति स्पेशल 30 सितंबर 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से रवाना होगी और अगले दिन शाम 4 बजकर 15 मिनट पर रानी कमलापति पहुंचेगी।

    रानी कमलापति से गया जाने वाली ट्रेन को कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। इसमें नर्मदापुरम इटारसी पिपरिया नरसिंहपुर जबलपुर सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड शामिल हैं। इससे रास्ते में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी गया जाने के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसी तरह जबलपुर से गया के बीच भी स्पेशल ट्रेन सेवा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 01701 जबलपुर-गया स्पेशल 29 सितंबर 4 अक्टूबर और 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 25 मिनट पर जबलपुर से रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01702 गया-जबलपुर स्पेशल 28 सितंबर 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से चलेगी और अगले दिन सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर जबलपुर पहुंचेगी।

    जबलपुर-गया स्पेशल ट्रेन का ठहराव सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड पर रहेगा।

    रेलवे के मुताबिक पितृपक्ष में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। पिंडदान और तर्पण के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के कारण इस दौरान ट्रेनों में काफी भीड़ रहती है। इसी को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाने का फैसला किया है ताकि यात्रियों को सफर के दौरान परेशानी कम हो और नियमित ट्रेनों पर भी दबाव घटाया जा सके।

    पश्चिम मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान यात्रियों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेलवे ने श्रद्धालुओं और यात्रियों से अपील की है कि वे इन अतिरिक्त ट्रेनों की सुविधा का लाभ उठाएं। ऐसे में गया जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्पेशल ट्रेनें काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

  • जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक: सांड ने युवक को पटककर किया घायल, अस्पताल में तोड़ा दम

    जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक: सांड ने युवक को पटककर किया घायल, अस्पताल में तोड़ा दम


    जबलपुर । जबलपुर में आवारा मवेशियों का आतंक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। हनुमानताल क्षेत्र में सड़क पर लड़ रहे दो सांडों के बीच से
    गुजरना एक युवक को भारी पड़ गया। अचानक एक सांड ने युवक पर हमला कर दिया और उसे उठाकर सड़क पर पटक दिया। हमले के बाद सांड उसके ऊपर से गुजरते हुए वहां से भाग गए। गंभीर रूप से घायल युवक को आसपास मौजूद लोगों ने ऑटो की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।

    मृतक की पहचान गोराबाजार निवासी रवि यादव के रूप में हुई है। बताया गया है कि रवि दूध का कारोबार करता था और घटना वाले दिन दूध लेकर हनुमानताल क्षेत्र में आया था। घटना 5 सितंबर की शाम करीब 6 बजे की बताई जा रही है। उस समय सड़क पर दो सांड आपस में लड़ रहे थे। सांडों की लड़ाई के कारण सड़क पर यातायात भी रुक गया था। आसपास मौजूद लोग उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे थे और इसी दौरान सांडों पर पानी डाला जा रहा था।

    इसी बीच रवि वहां से निकल रहा था। अचानक एक सांड ने पीछे से उस पर हमला कर दिया। सांड ने रवि को अपने सींगों से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद वह सांड उसके ऊपर से गुजर गया और दोनों सांड मौके से भाग निकले। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। रवि काफी देर तक सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा रहा। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसे ऑटो से जिला अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

    हनुमानताल थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल के मुताबिक मृतक दूध व्यवसाय से जुड़ा था। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सड़क पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की समस्या एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

    नगर निगम के मुताबिक जबलपुर शहर में 20 हजार से अधिक आवारा मवेशी हैं। इन्हें पकड़ने के लिए करीब 80 कर्मचारी लगाए गए हैं और रोजाना 70 से 80 मवेशियों को पकड़ा जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या इन मवेशियों को रखने की है। निगम अधिकारी कुशाग्र सिंह ठाकुर के मुताबिक तिलवारा में करीब 800 रामपुर में 130 और उमरिया में 170 मवेशियों को रखने की क्षमता है। इससे ज्यादा मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

    अधिकारी का यह भी कहना है कि कई जगहों पर मवेशियों को पकड़ने के दौरान गौभक्तों की ओर से विरोध या विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे में निगम के सामने एक तरफ शहर की सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की समस्या भी बनी हुई है। रवि यादव की मौत ने इस पूरे इंतजाम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर सड़क पर घूम रहे हजारों आवारा मवेशियों से लोगों की जान कब तक खतरे में पड़ती रहेगी।

  • गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा

    गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सीधी में महिला प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या कर करीब एक साल से फरार चल रहे उसके पति वीरेंद्र साकेत को पकड़ने के लिए पुलिस ने ऐसी रणनीति बनाई जिसकी भनक आरोपी को भी नहीं लगी। आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और फरारी के दौरान मोबाइल फोन तक इस्तेमाल नहीं कर रहा था। परिवार और बच्चों से भी उसने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया था। कई राज्यों में तलाश और लगातार दबिश के बावजूद जब उसका सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ऐसा जाल बिछाया जिसमें खुद कोतवाली थाना प्रभारी मजदूर बनकर पंक्चर की दुकान पर बैठ गए।

    29 अगस्त को सीधी के एक व्यक्ति से पुलिस को अहम जानकारी मिली कि वीरेंद्र कुछ साल पहले महाराष्ट्र के राजगढ़ इलाके में काम कर चुका है। पुलिस ने इस सुराग को गंभीरता से लिया और टीम को तत्काल महाराष्ट्र रवाना कर दिया। सीधी से पुलिस टीम ने करीब 1322 किलोमीटर का सफर तय किया। राजगढ़ पहुंचने के बाद पता चला कि वीरेंद्र खिरखिनदीवाड़ी इलाके की एक कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम कर रहा है और कंपनी के पास ही एक झोपड़ी किराए पर लेकर रह रहा है। पुलिस को डर था कि अगर आरोपी को पुलिस की भनक लग गई तो वह दोबारा फरार हो सकता है। इसलिए सीधे उसके ठिकाने पर दबिश देने के बजाय उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों को समझने की रणनीति बनाई गई।

    पुलिस को पता चला कि वीरेंद्र कंपनी की गाड़ी लेकर अक्सर पास की एक पंक्चर की दुकान पर आता है। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने अपना हुलिया पूरी तरह बदल लिया। सिर पर गमछा बांधा गया। पैरों में चप्पल पहनी गई और पुराने कपड़े पहनकर वह मजदूर की तरह पंक्चर की दुकान पर पहुंच गए। दुकान संचालक को भी उनकी असली पहचान नहीं बताई गई। थाना प्रभारी ने वहां आम मजदूर की तरह काम करना शुरू कर दिया। कभी गाड़ियों में हवा भरी तो कभी पंक्चर बनाया। इस दौरान पुलिस की बाकी टीम आसपास सादी वर्दी में तैनात रही और आरोपी की हर गतिविधि पर नजर रखती रही।

    पुलिस को वीरेंद्र का इंतजार करीब 16 घंटे तक करना पड़ा। आखिरकार 2 सितंबर को वह कंपनी की गाड़ी लेकर उसी पंक्चर की दुकान पर पहुंचा। जैसे ही वीरेंद्र गाड़ी से उतरकर दुकान की ओर बढ़ा पहले से तैयार पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और मौके पर ही दबोच लिया। आरोपी को तत्काल वाहन में बैठाया गया और पुलिस टीम उसे लेकर सीधी रवाना हो गई। इस पूरी कार्रवाई में सबसे अहम बात यह रही कि जिस थाना प्रभारी को आरोपी पहचानता था वही उसके सामने मजदूर बनकर कई घंटे तक पंक्चर की दुकान पर काम करता रहा और उसे इसकी भनक तक नहीं लगी।

    वीरेंद्र पर अपनी पत्नी और सीधी पुलिस लाइन में पदस्थ प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या का आरोप है। दोनों की शादी करीब 22 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। 15 सितंबर 2025 की रात शराब के नशे में दोनों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद मारपीट शुरू हो गई। बच्चों ने डरकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। इसी दौरान वीरेंद्र ने घर में रखे बेसबॉल के डंडे से सविता के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी आधी रात को घर से फरार हो गया।

    पुलिस ने मामले में हत्या का केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की थी। उसके ऊपर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। इस दौरान कई राज्यों में दबिश दी गई लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। करीब एक साल में कोतवाली थाने के चार थाना प्रभारी बदल गए। 11 अगस्त 2026 को दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली और एसपी संतोष कोरी ने उन्हें सविता हत्याकांड की फाइल सौंपकर आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। आखिरकार पुलिस की बदली हुई रणनीति काम आई और मजदूर के भेष में पंक्चर की दुकान पर बैठकर बिछाए गए जाल में एक साल से फरार आरोपी फंस गया। पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने की बात कही है।