Category: Madhya Pradesh

  • हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप

    हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक हैचरी विकसित की जाए। सरकार का उद्देश्य मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश को मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस नीति के चलते प्रदेश में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अगले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है जहां मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो जाए। इसके लिए हर जिले में आधुनिक हैचरी विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही इस क्षेत्र के सतत विकास की कुंजी होगी।

    बैठक में मोती उत्पादन को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मोती उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों की सफल योजनाओं तथा बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनाकर प्रदेश में मोती उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए।

    मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कोल्ड चेन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने के साथ भंडारण और परिवहन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है ताकि उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन और जलीय जीवों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साथ ही जल संपदा आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।

    बैठक में यह जानकारी भी सामने आई कि मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने इसे संतोषजनक उपलब्धि बताते हुए कहा कि मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रखा जाए। राज्य सरकार की नई पहलें संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश मत्स्य उत्पादन, मछली बीज निर्माण और जलीय संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

  • MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली

    MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार को आगजनी की दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों को दहला दिया। उज्जैन और इंदौर में लगी आग से लाखों रुपये के सामान के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    पहली घटना धार्मिक नगरी उज्जैन में सामने आई जहां प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर के सामने स्थित पूजा सामग्री की दुकानों में अचानक आग लग गई। सुबह करीब साढ़े पांच बजे आग लगने की सूचना फायर कंट्रोल रूम को मिली। मंदिर क्षेत्र में आग की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड के कई वाहन मौके पर रवाना किए गए। अधिकारियों के अनुसार आग बुझाने के लिए तीन दमकल वाहनों और एक पानी के टैंकर की मदद ली गई। आग ने दो दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया था जिनमें एक छोटी और एक बड़ी दुकान शामिल थी। दोनों दुकानों में पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली सामग्री रखी हुई थी।

    दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर नियंत्रण पा लिया जिससे आग आसपास की अन्य दुकानों तक नहीं फैल सकी। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है लेकिन वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल देखा गया।

    दूसरी घटना इंदौर में सामने आई जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के 60 फीट रोड स्थित एक मोबाइल दुकान में देर रात अचानक आग लग गई। आग लगते ही आसपास के लोगों ने धुआं और लपटें देखीं तथा तत्काल इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। स्थानीय लोगों ने भी अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और दुकान का शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। आग की चपेट में आने से दुकान में रखे मोबाइल एसेसरीज और अन्य सामान पूरी तरह जलकर राख हो गए। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है और जांच जारी है।

    दोनों घटनाओं ने एक बार फिर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने लोगों से विद्युत उपकरणों और वायरिंग की नियमित जांच कराने तथा सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है। वहीं पुलिस और संबंधित विभाग आग लगने के कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।

  • राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित

    राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला चर्चा में आ गया है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल द्वारा मांगी गई रिपोर्ट दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजभवन तक नहीं पहुंची है। मामला आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों और उन पर खर्च किए गए बजट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट में देरी को लेकर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने आदिवासी क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से अप्रैल महीने में जल संसाधन विभाग की प्रमुख अभियंता को पत्र भेजा था। इस पत्र में विशेष रूप से आदिवासी अंचलों में जल आपूर्ति और जल जीवन मिशन से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इन योजनाओं का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा।

    राजभवन की ओर से भेजे गए इस पत्र को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। बताया जा रहा है कि विभाग के 116 मुख्य अभियंताओं को इस संबंध में जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जून महीने में जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के संचनालय और मध्य प्रदेश शासन ने भी विभाग को अलग से पत्र लिखकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई और मामला लंबित बना हुआ है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल बजट खर्च को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में 38 विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 1085 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभाग आवंटित बजट का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा उपयोग भी कर चुका है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद योजनाओं से लाभान्वित हुए लोगों का स्पष्ट ब्यौरा अब तक राजभवन को उपलब्ध नहीं कराया गया है।

    राज्यपाल ने अपने पत्र में विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि इन परियोजनाओं से कितने आदिवासी परिवारों को वास्तविक लाभ मिला और योजनाओं का जमीनी प्रभाव क्या रहा। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लाभार्थियों की संख्या और परियोजनाओं के परिणामों को लेकर रिपोर्ट लंबित रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी योजना पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होता है। ऐसे में राजभवन द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराना विभागीय समन्वय और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और आदिवासी क्षेत्रों में खर्च किए गए करोड़ों रुपये के वास्तविक परिणामों का विवरण राजभवन के सामने कब आता है। यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां

    कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार का दिन सड़क हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक साबित हुआ। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए पांच बड़े सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं तेज रफ्तार ट्रकों की टक्कर ने जान ले ली तो कहीं अनियंत्रित वाहन पलटने से लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हादसों के बाद कई स्थानों पर अफरा-तफरी और चीख पुकार का माहौल देखने को मिला।

    अनूपपुर जिले में नेशनल हाईवे 43 पर टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    वहीं शाजापुर जिले में नेशनल हाईवे 52 पर उकावता चौकी के पास दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि पीछे से आ रहे ट्रक चालक को नींद की झपकी आ गई जिसके कारण ट्रक आगे चल रहे वाहन से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को वाहन से बाहर निकाला और घायल को अस्पताल पहुंचाया।

    नरसिंहपुर जिले में तेंदूखेड़ा के पास एक स्कॉर्पियो वाहन गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन में सवार छह लोग घायल हो गए जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल रीवा जिले के निवासी हैं जो इंदौर से अपनी बहन का इलाज कराकर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन तीन बार पलटा जिसके कारण उसका अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में कचौरी मोड़ के पास एक और भीषण हादसा सामने आया। कटनी से पन्ना जा रहा तेज रफ्तार ट्रक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से उतरकर खेतों में घुस गया। लगभग सौ मीटर तक घिसटने के बाद ट्रक एक जामुन के पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में ट्रक के परिचालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों को वाहन से बाहर निकाला।

    इधर सीहोर जिले में जताखेड़ा के पास चावल से भरा एक ट्रक पलट गया। ट्रक पलटने के बाद उसमें आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए गए। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    लगातार हो रहे सड़क हादसे एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही और थकान जैसी वजहें अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनती हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

  • MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे

    MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त हो गया है। यह उपलब्धि न केवल सिवनी की कृषि पहचान को मजबूत करेगी बल्कि यहां के हजारों किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई संभावनाएं भी उपलब्ध कराएगी। लंबे समय से अपने अनोखे स्वाद और विशाल आकार के लिए पहचाने जाने वाले इस फल को अब आधिकारिक रूप से विशिष्ट उत्पाद का दर्जा मिल गया है।

    जीआई टैग किसी उत्पाद की विशेष भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उस नाम का उपयोग केवल उसी क्षेत्र में उत्पादित वस्तु के लिए किया जा सके। सिवनी के जम्बो सीताफल को यह मान्यता मिलने के बाद इसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित हो जाएगी और अन्य क्षेत्रों में उत्पादित फल इसके नाम का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    सिवनी का जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सामान्य रूप से एक सीताफल का वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है लेकिन जिले के भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई सीताफल 800 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं। यही विशेषता इसे सामान्य सीताफलों से अलग बनाती है।

    इसके अलावा इस फल का स्वाद भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। इसमें बीज अपेक्षाकृत कम होते हैं जबकि सफेद और गाढ़ा गूदा अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद मीठा स्वाद इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनाता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों में इसकी काफी मांग रहती है।

    पोषण के लिहाज से भी यह फल बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और विभिन्न आवश्यक विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

    जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। अब वे अपने उत्पाद को विशेष पहचान के साथ बाजार में बेच सकेंगे जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सिवनी के जम्बो सीताफल की अलग पहचान बनेगी।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इससे सीताफल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को गुणवत्ता आधारित खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर सिवनी के जम्बो सीताफल को मिला जीआई टैग जिले की कृषि विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण

    अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण


    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश का एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर से जुड़ा है जहां वर्ष 2017 में चंदे की राशि और आभूषणों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। उस समय इस घटना ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी थी और मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

    ओरछा का रामराजा सरकार मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है और देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे और संपत्तियों में कथित अनियमितता की खबर सामने आने के बाद लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई थीं।

    मामला उस समय का है जब निवाड़ी जिला अस्तित्व में नहीं आया था और ओरछा अविभाजित टीकमगढ़ जिले का हिस्सा था। आरोप लगाए गए कि मंदिर के खातों दान राशि आभूषणों नगद बही खातों स्टॉक रजिस्टर तथा मंदिर की चल और अचल संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि मंदिर से नकदी और कुछ आभूषण गायब पाए गए थे।

    इस मामले में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि जांच लंबे समय तक चलती रही लेकिन कथित चंदा चोरी कांड का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। यही कारण रहा कि यह मामला वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा रहा।

    बाद में मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक के सिर पर आपराधिक मुकदमे की तलवार अनिश्चितकाल तक नहीं लटकाई जा सकती। केवल प्रशासनिक कठिनाइयों अधिकारियों के तबादलों सेवानिवृत्ति या दस्तावेज जुटाने में लगने वाला समय जांच को वर्षों तक लंबित रखने का आधार नहीं बन सकता।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अत्यधिक देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त त्वरित और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। यह फैसला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि अदालत ने जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।

    हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले से असहमति जताई थी और बाद में एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ अपील करने की तैयारी भी शुरू की थी। ऐसे में यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना गया और कानूनी स्तर पर इसकी चर्चा जारी रही।

    अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे ताजा विवाद के बीच ओरछा का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। दोनों घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।

  • एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में मानसून की रफ्तार सुस्त, 48 जिले बारिश में पिछड़े, आज 30 जिलों में वर्षा और 4 जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की देरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जून के अधिकांश दिन सूखे गुजरने से प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 70.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 34.3 मिमी वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है।

    मानसून में देरी बनी कम बारिश की बड़ी वजह

    प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार तय समय से 8 दिन बाद भी मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है। मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में मानसून के आगमन की संभावना जताई है। आमतौर पर मानसून के जल्द सक्रिय होने पर तेज बारिश का दौर शुरू हो जाता है, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी आती है।

    हालांकि पूरे जून माह में प्री-मानसूनी गतिविधियां जारी हैं, फिर भी पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में औसत से 71 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औसत से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    इन जिलों में बारिश सामान्य से कम

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा

    भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले रहे जहां औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्री-मानसून सक्रिय, कई जिलों में बरसे बादल

    सोमवार को प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां तेज रहीं। धार में करीब 2 इंच और भोपाल में लगभग पौन इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, खजुराहो, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर समेत कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला।

    पचमढ़ी रहा सबसे ठंडा, दतिया सबसे गर्म

    सोमवार को पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। धार में 32.9, सिवनी में 34.2, रायसेन में 35.4 और शाजापुर में 35.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं दतिया सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीधी, खजुराहो, टीकमगढ़-नौगांव और नरसिंहपुर में भी तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का तापमान 34.7 डिग्री, उज्जैन 35 डिग्री, भोपाल 35.2 डिग्री, जबलपुर 36 डिग्री और ग्वालियर 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    आज का मौसम: 4 जिलों में लू, 30 जिलों में बारिश की संभावना

    मौसम विभाग ने मंगलवार को जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया जिलों में हीटवेव (लू) का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, भोपाल, सीहोर, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, इंदौर, धार, बड़वानी, आलीराजपुर और झाबुआ में तेज आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है।

    इसके अलावा नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, कटनी, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गर्मी का असर बना रह सकता है।

  • इंदौर में MCA छात्रा ने लगाई फांसी: परीक्षा के तनाव में उठाया खौफनाक कदम, कमरे में मिला शव

    इंदौर में MCA छात्रा ने लगाई फांसी: परीक्षा के तनाव में उठाया खौफनाक कदम, कमरे में मिला शव


    मध्यप्रदेश । इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अपने घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रही एक 22 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव को इस घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। घटना के बाद छात्रा के परिवार और दोस्तों में गहरा शोक व्याप्त है।

    पुलिस के अनुसार मृतक छात्रा रेखा गाढे बुरहानपुर की रहने वाली थी और पिछले करीब एक वर्ष से इंदौर में रहकर MCA की पढ़ाई कर रही थी। वह चमेली देवी कॉलेज की छात्रा थी और वर्तमान में सेकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं दे रही थी। पढ़ाई में मेहनती मानी जाने वाली रेखा पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान चल रही थी।

    जानकारी के मुताबिक रविवार शाम उसकी सहेलियों ने उसे राजबाड़ा घूमने चलने के लिए कहा था, लेकिन उसने जाने से इनकार कर दिया। सहेलियां उसे अकेला छोड़कर घूमने चली गईं। देर रात जब वे वापस लौटीं तो कमरे का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। रेखा कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी हुई थी। सहेलियों ने तत्काल आसपास के लोगों और पुलिस को सूचना दी।

    घटना की जानकारी मिलते ही परदेशीपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने छात्रा के कमरे की तलाशी ली, लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    पुलिस द्वारा सहेलियों और परिचितों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि रेखा परीक्षा को लेकर काफी तनाव में थी। उसके कुछ पेपर उम्मीद के मुताबिक नहीं हुए थे, जिससे वह निराश और चिंतित रहने लगी थी। सहेलियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह पढ़ाई पर ठीक से ध्यान नहीं दे पा रही थी और अक्सर उदास दिखाई देती थी।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। परिजन इंदौर पहुंच रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

    यह घटना एक बार फिर विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीर समस्या को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन न होने पर छात्रों को निराशा के बजाय परिवार, मित्रों और शिक्षकों से संवाद करना चाहिए। मानसिक तनाव की स्थिति में समय रहते परामर्श और सहायता प्राप्त करना बेहद आवश्यक है।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्रा ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। पूरे मामले ने कॉलेज और छात्र समुदाय को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।

  • इंदौर में विजयवर्गीय का मुस्लिम समुदाय पर तंज: विकास चाहिए तो भेदभाव की राजनीति छोड़नी होगी

    इंदौर में विजयवर्गीय का मुस्लिम समुदाय पर तंज: विकास चाहिए तो भेदभाव की राजनीति छोड़नी होगी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में आयोजित एक विकास कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजयवर्गीय ने विकास कार्यों के भूमिपूजन के दौरान कहा कि कुछ मुस्लिम भाई उन्हें और उनकी विचारधारा से जुड़े लोगों को काफिर कहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वे काफिर हैं तो उनकी बनाई सड़कों पर नहीं चलना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं लेना चाहिए।

    विजयवर्गीय ने कहा कि जिस क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं वहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। उन्होंने मंच से कहा कि कई मुस्लिम भाई हमें काफिर कहते हैं। यदि हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो। यदि आपके घर में लाड़ली बहना या लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा पहुंच रहा है तो उसे भी मत लो। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    हालांकि अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार और पार्टी की नीति किसी प्रकार के भेदभाव की नहीं रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत पर काम किया है। सरकार ने कभी यह नहीं देखा कि कौन किस धर्म या समुदाय से जुड़ा है। विकास कार्यों का लाभ सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

    मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता की सेवा करना उनका दायित्व है। जनता उन्हें वोट दे या न दे लेकिन विकास कार्य रुकेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि यदि जनता राजनीतिक समर्थन देती है तो और अधिक उत्साह के साथ काम किया जाएगा लेकिन समर्थन न मिलने की स्थिति में भी विकास की गति जारी रहेगी। उनका कहना था कि जनता की सेवा करना राजनीति से ऊपर की जिम्मेदारी है।

    यह बयान उस समय आया जब विजयवर्गीय दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन क्षेत्रीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने वार्ड क्रमांक-1 और वार्ड क्रमांक-5 में लगभग 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए की लागत से होने वाले 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

    अपने संबोधन में विजयवर्गीय ने भाजपा कार्यकर्ता होने को अपना पहला सौभाग्य और जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करने को दूसरा सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना होना चाहिए।

    विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक दलों के बीच सामाजिक समरसता और विकास के मुद्दों पर लगातार बहस जारी है। उनके बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने अपने पूरे भाषण में विकास कार्यों और जनता की सेवा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई तथा यह संदेश देने का प्रयास किया कि सरकार की योजनाएं सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं।

  • NQAS टीम की सख्ती से अस्पताल में मचा हड़कंप: गंदगी और शराब की बोतलों पर जताई नाराजगी, बंद बगीचे का खुलवाया ताला

    NQAS टीम की सख्ती से अस्पताल में मचा हड़कंप: गंदगी और शराब की बोतलों पर जताई नाराजगी, बंद बगीचे का खुलवाया ताला


    मध्यप्रदेश । उज्जैन के जिला अस्पताल चरक भवन में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) की राष्ट्रीय मूल्यांकन टीम री-सर्टिफिकेशन के लिए निरीक्षण करने पहुंची। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) दिल्ली के निर्देश पर पहुंचे इस दल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और कई स्थानों पर गंभीर खामियां मिलने पर अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

    मूल्यांकन दल में महाराष्ट्र की डॉ. स्वर्णा पंजाब की रुपिंदर कौर और पटना के डॉ. विजय चंद्र झा शामिल थे। टीम ने अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से निरीक्षण की शुरुआत की। इस दौरान अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर गंदगी देखी गई जिस पर टीम ने कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों और सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा गया कि उन्हें किसी का परिचय पत्र देखने में रुचि नहीं है बल्कि एक घंटे के भीतर अस्पताल पूरी तरह साफ दिखाई देना चाहिए।

    निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर और मुख्य गेट के आसपास शराब की खाली बोतलें तथा अन्य अनुपयोगी सामग्री बिखरी मिली। यह दृश्य देखकर टीम के सदस्य नाराज हो गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए बने परिसर में इस प्रकार की सामग्री कैसे पहुंच रही है। साथ ही नियमित निगरानी और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

    निरीक्षण के दौरान टीम की नजर अस्पताल परिसर में स्थित एक बंद बगीचे पर भी पड़ी। बगीचा लंबे समय से बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था। टीम ने तुरंत ताला खुलवाया और अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों से पूछा गया कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बने इस स्थान को बंद क्यों रखा गया है। निरीक्षण के बाद टीम ने निर्देश दिए कि बगीचे को व्यवस्थित किया जाए और मरीजों तथा उनके परिजनों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें बेहतर वातावरण मिल सके।

    राष्ट्रीय मूल्यांकन दल ने अस्पताल की शासकीय भोजनशाला का भी निरीक्षण किया। यहां मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला जिस पर टीम ने तत्काल मेन्यू बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा शिकायत पेटी की व्यवस्था उसकी चाबी किसके पास रहती है और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली गई।

    टीम ने अस्पताल में लगाए गए सिटीजन चार्टर का भी अवलोकन किया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी का परीक्षण किया। इसके साथ ही कचरा संग्रहण वाहन का निरीक्षण किया गया और उसकी तस्वीरें लेकर रिकॉर्ड तैयार किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल प्रशासन को साफ संदेश दिया कि गुणवत्ता मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं बनाए रखना जरूरी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    NQAS री-सर्टिफिकेशन के लिए हो रहे इस निरीक्षण को अस्पताल प्रबंधन के लिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके आधार पर अस्पताल की गुणवत्ता और सेवाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। टीम के निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गया है।