Category: Madhya Pradesh

  • जबलपुर में पुलिस की शिकायत शाखा का वीडियो वायरल: फरियादी बोला दूर से आए हैं सुन लीजिए, महिला पुलिसकर्मी बोली बाद में आना

    जबलपुर में पुलिस की शिकायत शाखा का वीडियो वायरल: फरियादी बोला दूर से आए हैं सुन लीजिए, महिला पुलिसकर्मी बोली बाद में आना


    जबलपुर । जबलपुर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय की शिकायत शाखा से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक फरियादी शिकायत दर्ज कराने के लिए महिला पुलिसकर्मी से आग्रह करता नजर आ रहा है। फरियादी का कहना है कि वह दोपहर करीब तीन बजे से शिकायत शाखा में इंतजार कर रहा है और काफी दूर से अपनी समस्या लेकर आया है। वह महिला पुलिसकर्मी से अपनी शिकायत सुनने की गुहार लगाते हुए कहता है कि काम ज्यादा नहीं है और दो सेकेंड में उसकी बात सुन ली जाए। इस दौरान शिकायत शाखा के बाहर कई लोग भी नजर आ रहे हैं।

    वायरल वीडियो में फरियादी महिला पुलिसकर्मी से बार बार अपनी शिकायत लेने का अनुरोध करता दिखाई देता है। वह बताता है कि वह अपनी समस्या को लेकर पिछले करीब तीन महीने से चक्कर लगा रहा है। फरियादी के मुताबिक वह पहले एक अधिकारी के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचा था लेकिन वहां से उसे शिकायत शाखा भेज दिया गया। इसके बाद भी उसे अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। फरियादी यह भी कहता सुनाई देता है कि वह दूर से आया है और उसकी समस्या को थोड़ी देर सुन लिया जाए।

    वीडियो में महिला पुलिसकर्मी की ओर से तत्काल शिकायत नहीं लिए जाने की बात कही जा रही है। बातचीत के दौरान मीटिंग से आने और कुछ देर आराम करने का जिक्र भी सुनाई देता है। महिला पुलिसकर्मी फरियादी को बाद में आने के लिए कहती नजर आती है। इसी बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और पुलिस की शिकायत शाखा में फरियादियों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे।

    वीडियो में दिखाई दे रही महिला पुलिसकर्मी का नाम एएसआई रश्मि पराशर बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उनका हाल ही में शिकायत शाखा में तबादला हुआ है। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित महिला पुलिसकर्मी से पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी ली।

    सीएसपी भगत सिंह गोठरिया ने बताया कि वायरल वीडियो पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आया है। वीडियो देखने के बाद संबंधित महिला पुलिसकर्मी को बुलाकर बातचीत की गई। पुलिस अधिकारी के मुताबिक फरियादी को करीब पांच मिनट इंतजार करने के लिए कहा गया था और इसके बाद उसकी शिकायत भी ले ली गई थी। महिला पुलिसकर्मी से पूरे मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार फरियादी की शिकायत लिए जाने की पुष्टि हुई है। अब महिला पुलिसकर्मी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस कार्यालयों में अपनी समस्या लेकर पहुंचने वाले फरियादियों के साथ व्यवहार कैसा होना चाहिए और उनकी शिकायतों को समय पर सुनने के लिए व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाया जा सकता है।

  • दूसरे के दस्तावेज पर सिम एक्टिवेट कर थमा दी किसी और को: शिवपुरी में ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    दूसरे के दस्तावेज पर सिम एक्टिवेट कर थमा दी किसी और को: शिवपुरी में ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई


    शिवपुरी । मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल हो रही फर्जी सिम कार्ड के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत भौंती और मायापुर थाना पुलिस ने जांच के बाद तीन लोगों के खिलाफ अलग अलग मामले दर्ज किए हैं। यह कार्रवाई राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों और सिम कार्ड की जांच के दौरान की गई। जांच में कुछ ऐसे मोबाइल नंबर सामने आए जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया गया था। पुलिस ने सिम धारकों के साथ सिम जारी करने की प्रक्रिया में लापरवाही या गड़बड़ी करने वालों को भी जांच के दायरे में लिया है।

    भौंती थाना पुलिस के सामने साइबर पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ठगी की शिकायत पहुंची थी। राजस्थान के डीडवाना कुचामन सिटी निवासी किशनलाल ने शिकायत में बताया कि उन्हें दो मोबाइल नंबरों से फोन आया था। कॉल करने वाले लोगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और एफआईआर दर्ज होने का डर दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। आरोपियों ने कार्रवाई का डर दिखाते हुए किशनलाल से 12520 रुपए फीनो पेमेंट्स बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि 7067915249 और 6267266154 नंबर ग्राम महोबा डामरौन निवासी राहुल जाटव और भानुप्रताप जाटव के नाम पर दर्ज थे। इसके बाद भौंती पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 318(4) और 319(2) बीएनएस के साथ 66(D) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन नंबरों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इनके जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से कौन कौन लोग जुड़े हुए हैं।

    इसी अभियान के तहत मायापुर पुलिस ने सिम जारी करने वाले एजेंट के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पुलिस को मिली एक एक्सेल शीट की जांच के दौरान POS कोड 8085309715 से जारी एक सिम साइबर फ्रॉड से जुड़ी मिली। जांच में सिम नंबर 7898219481 रेखा पत्नी हल्के आदिवासी निवासी ग्राम पड़ोरा के नाम पर दर्ज पाया गया। पुलिस ने जब रेखा से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने यह सिम कभी खरीदी ही नहीं थी। परिवार के किसी सदस्य द्वारा भी इस सिम का इस्तेमाल किए जाने से उन्होंने इनकार किया।

    इसके बाद पुलिस ने सिम जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि मायापुर स्थित एयरटेल स्टोर के एजेंट पवन कुमार लोधी ने ग्राहक के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम से सिम एक्टिवेट की और उसे किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया। बाद में इसी सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया गया। पुलिस की जांच में इस नंबर से कुल 13040 रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है।

    मायापुर पुलिस ने पवन कुमार लोधी के खिलाफ धारा 318(4) बीएनएस के साथ 66(C) आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(E) और 42(6) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे मामले की विवेचना कर रही है। इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस केवल ठगी करने वालों पर ही नहीं बल्कि संदिग्ध सिम उपलब्ध कराने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी सिम के नेटवर्क पर की जा रही यह कार्रवाई साइबर ठगी पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

  • शिवपुरी में कबड्डी का दमदार मुकाबला: नरवर की छात्राओं ने करेरा को दोनों मैचों में दी करारी शिकस्त

    शिवपुरी में कबड्डी का दमदार मुकाबला: नरवर की छात्राओं ने करेरा को दोनों मैचों में दी करारी शिकस्त


    शिवपुरी । शिवपुरी में आयोजित जिला स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिता में मंगलवार को स्कूली खिलाड़ियों का उत्साह देखने को मिला। तात्या टोपे शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय के मैदान पर आयोजित प्रतियोगिता में जिले के अलग अलग विकासखंडों से बालक और बालिका खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान कबड्डी के साथ नेटबॉल हॉकी और फुटबॉल सहित कई खेलों के मुकाबले कराए जा रहे हैं। कबड्डी प्रतियोगिता में नरवर की जूनियर छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी खेल प्रतिभा का दम दिखाया और करेरा की टीम को लगातार दो मुकाबलों में शिकस्त दी।

    कबड्डी के मैदान पर नरवर की टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों ने तेजी से रेड लगाकर अंक जुटाए और दूसरी ओर मजबूत टैकल के जरिए करेरा की खिलाड़ियों को रोकने में सफलता हासिल की। पहले मुकाबले में नरवर की छात्राओं ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए करेरा की टीम को 22-6 के बड़े अंतर से हराया। इस मुकाबले में नरवर की टीम ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और विपक्षी टीम को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया।

    पहले मुकाबले में जीत के बाद नरवर की खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ गया। दूसरे मुकाबले में भी टीम ने अपनी लय बरकरार रखी और शानदार रणनीति के साथ खेलते हुए करेरा को 18-7 से मात दी। लगातार दो जीत के बाद नरवर की छात्राओं के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। मैदान पर मौजूद दर्शकों और साथी खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन के लिए उनका उत्साह बढ़ाया।

    मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच हर अंक के लिए जोरदार संघर्ष देखने को मिला। रेडर अंक हासिल करने के लिए तेजी से विपक्षी पाले में पहुंचती नजर आईं तो डिफेंडर उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत लगाती रहीं। खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल और आक्रामक रणनीति नरवर की जीत की बड़ी वजह बनी। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे खिलाड़ियों के लिए यह आयोजन अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

    जिला स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर देना है। जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे होने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं में जिले का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा। ऐसे आयोजनों के जरिए ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर मिलता है।

    प्रतियोगिता के सफल आयोजन में जिला खेल निरीक्षक चंद्रशेखर वेमेटे के साथ खेल शिक्षकों और सहयोगी स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यादवेंद्र चौधरी अब्दुल रजाक खान भगवत शर्मा बसंत बृजमोहन जाट नीरज सरैया मनोज खत्री नीरजा भार्गव रेखा शर्मा घनश्याम और शुभी रानी सहित अन्य स्टाफ ने प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं को संभाला। मैदान पर खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बीच प्रतियोगिता का माहौल उत्साह और खेल भावना से भरपूर रहा।

  • MP में TET को लेकर बढ़ी मुश्किल: ESB के इनकार से बदलेगा परीक्षा का पूरा प्लान, तारीख और सेंटर पर भी संशय

    MP में TET को लेकर बढ़ी मुश्किल: ESB के इनकार से बदलेगा परीक्षा का पूरा प्लान, तारीख और सेंटर पर भी संशय


    भोपाल। मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के लिए प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर बड़ा पेच फंस गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद परीक्षा को ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन कराने की तैयारी की जा रही थी लेकिन कर्मचारी चयन मंडल ESB ने ऑफलाइन परीक्षा कराने से साफ इनकार कर दिया है। ESB का कहना है कि पिछले करीब छह साल से मंडल केवल ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और मौजूदा व्यवस्था में ऑफलाइन परीक्षा कराना उसके लिए संभव नहीं है। इस फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग के सामने नई परीक्षा एजेंसी तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग दूसरी एजेंसी से परीक्षा कराने के साथ ही जरूरत पड़ने पर खुद परीक्षा आयोजित कराने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल लौटने के बाद लिया जा सकता है।

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 में दिए गए आदेश के बाद मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के लिए TET पास करना जरूरी हो गया है। वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया गया है। ऐसे शिक्षकों को हर साल होने वाली परीक्षा में शामिल होने के अवसर मिलेंगे। यदि कोई शिक्षक छह अवसर मिलने के बावजूद पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाता है तो उसकी सेवा समाप्त किए जाने का प्रावधान सामने आया है। इसी वजह से सरकार के लिए TET परीक्षा आयोजित कराना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

    इसी क्रम में कर्मचारी चयन मंडल ने पहले 21 अगस्त से 4 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में अभ्यर्थियों को राहत देते हुए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर कर दी गई। ESB की ओर से पहले 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही थी लेकिन अब ऑफलाइन परीक्षा से इनकार के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सरकार किसी नई एजेंसी को परीक्षा की जिम्मेदारी देती है तो परीक्षा की तारीख में भी बदलाव संभव है। नई एजेंसी को परीक्षा केंद्र तैयार करने से लेकर प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन तक की पूरी व्यवस्था करनी होगी।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक यदि TET ऑफलाइन कराई जाती है तो परीक्षा आयोजित करने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में विभाग TET के साथ शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। सरकार के सामने लोक सेवा आयोग यानी PSC को परीक्षा की जिम्मेदारी देने का विकल्प भी मौजूद है लेकिन PSC ने अब तक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा या भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की है। इसलिए इस विकल्प पर भी अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही होगा।

    परीक्षा केंद्रों को लेकर भी शिक्षकों की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल भोपाल इंदौर जबलपुर खंडवा नीमच रतलाम रीवा सागर सतना उज्जैन और सीधी में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सागर के साथ चंबल और ग्वालियर अंचल के कई जिलों को केंद्रों में जगह नहीं मिली है। शिक्षकों की मांग है कि जिला और ब्लॉक स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए जाएं ताकि उन्हें परीक्षा देने के लिए दूर के शहरों की यात्रा न करनी पड़े। नई एजेंसी तय होने के बाद परीक्षा केंद्रों की संख्या और स्थानों में भी बदलाव की संभावना है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि TET परीक्षा आखिर किस एजेंसी के जरिए और किस तारीख को आयोजित होगी। आवेदन की प्रक्रिया अभी 18 सितंबर तक जारी है लेकिन एजेंसी बदलने की स्थिति में परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव हो सकता है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद होने वाली बैठक में इस पूरे मामले पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। तब तक हजारों शिक्षक परीक्षा की तारीख और व्यवस्था को लेकर असमंजस में बने रहेंगे।

  • ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप

    ‘मामा वापस आओ’ से ‘जीतू को CM बनाओ’ तक गूंजे नारे: MP की सियासत में नया सियासी शोर, विधायक प्रतिनिधि पर ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नारों और बयानों ने सियासी माहौल को अलग ही रंग दे दिया है। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वापस आओ के नारे गूंज रहे हैं तो कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को मुख्यमंत्री बनाने की आवाज उठ रही है। दूसरी तरफ मंदसौर जिले में सड़क की समस्या को लेकर भाजपा विधायक का काफिला रोकने के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विधायक प्रतिनिधि पर एक ग्रामीण को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है।

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति लोगों का पुराना मामा वाला प्यार एक बार फिर दिखाई दिया। कार्यक्रम में लोगों ने आई लव यू मामा और मामा वापस आ जाइए जैसे नारे लगाए। जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने लोगों की ओर फ्लाइंग किस भेजे और आई लव यू टू कहकर उनका अभिवादन किया। उन्होंने मंच से कहा कि वह सभी से प्यार करते हैं और यह प्यार का सिलसिला जिंदगी भर चलता रहेगा।

    इस दौरान शिवराज सिंह चौहान का एक बयान खासा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री आते जाते रहते हैं लेकिन मामा परमानेंट हैं। शिवराज के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि शिवराज सिंह चौहान के लिए मामा वाला संबोधन कोई नया नहीं है। लंबे समय से उनके समर्थक और आम लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते रहे हैं और मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी कई कार्यक्रमों में उनके लिए मामा वापस आओ जैसे नारे सुनाई देते रहे हैं।

    उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री बनाने के नारे लगाए। देवास जिले के खातेगांव में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो के नारे लगाए। इसके बाद भोपाल में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान जीतू पटवारी जब अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में पहुंचे तो वहां भी उनके पक्ष में मुख्यमंत्री बनाने के नारे गूंजे। समर्थकों ने हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो जीतू पटवारी जैसा हो और अगला सीएम कैसा हो जीतू भैया जैसा हो जैसे नारे लगाए।

    हालांकि मध्यप्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है और मुख्यमंत्री पद की संभावनाओं पर अभी से कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस के भीतर भी भविष्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में आ सकते हैं। फिलहाल जीतू पटवारी के समर्थन में लग रहे नारे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कार्यकर्ताओं के उत्साह को जरूर दिखा रहे हैं।

    वहीं मंदसौर जिले के गरोठ में भाजपा विधायक चंदर सिंह सिसोदिया के काफिले को ग्रामीणों ने सड़क की समस्या बताने के लिए रोक लिया। आरोप है कि काफिला रोके जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें विधायक ग्रामीणों से बात करते दिखाई दे रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान विधायक प्रतिनिधि अनिल राठौर ने एक ग्रामीण को थप्पड़ मार दिया। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया कि वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल ले लिए गए। मामले को लेकर एक ग्रामीण ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है और अब पूरा विवाद थाने तक पहुंच गया है। आरोपों की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।

    इधर इंदौर भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा का एक बयान भी चर्चा में रहा। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते समय उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को देश का पहला प्रधानमंत्री बता दिया। जबकि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे और सरदार पटेल कभी प्रधानमंत्री नहीं रहे। इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा नेता के सामान्य ज्ञान और इतिहास की जानकारी पर सवाल उठाए।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयान नारे और विवाद लगातार सुर्खियां बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान के मामा परमानेंट वाले बयान से लेकर जीतू पटवारी के लिए मुख्यमंत्री के नारों और गरोठ में विधायक प्रतिनिधि पर लगे थप्पड़ के आरोप तक हर मामला राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे रहा है।

  • MP में 83.5% बारिश का कोटा पूरा, फिर भी 31 जिलों में कमी: मऊगंज में 53 इंच पानी, आलीराजपुर सबसे सूखा

    MP में 83.5% बारिश का कोटा पूरा, फिर भी 31 जिलों में कमी: मऊगंज में 53 इंच पानी, आलीराजपुर सबसे सूखा


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून अब धीरे धीरे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और प्रदेश में अब तक बारिश का बड़ा आंकड़ा दर्ज हो चुका है। इस मानसूनी सीजन में मध्यप्रदेश में औसतन 31.1 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जो अब तक की सामान्य बारिश के कोटे का 83.5 प्रतिशत है। हालांकि प्रदेश में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। जहां भोपाल समेत 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है वहीं 31 जिलों में अब भी औसत से काफी कम पानी गिरा है। ऐसे में प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश के बावजूद मानसून का आंकड़ा अभी पूरी तरह संतुलित नहीं हो पाया है।

    मौसम के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 790.8 मिलीमीटर यानी करीब 31.1 इंच बारिश हो चुकी है। यह अब तक की सामान्य बारिश 840.6 मिलीमीटर यानी 33.1 इंच से लगभग 2 इंच कम है। पूरे प्रदेश के स्तर पर अभी तक औसत से करीब 6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है जहां औसत के आसपास और कुछ क्षेत्रों में उससे ज्यादा बारिश हुई है जबकि पश्चिमी हिस्से में बारिश की कमी अधिक दिखाई दे रही है।

    भोपाल राजगढ़ शिवपुरी निवाड़ी मैहर भिंड श्योपुर सिंगरौली सीधी सतना मऊगंज और उमरिया उन जिलों में शामिल हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में मानसून का आंकड़ा 90 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच चुका है। उमरिया अनूपपुर आगर मालवा टीकमगढ़ छतरपुर पन्ना ग्वालियर गुना दतिया खरगोन और बुरहानपुर में भी अब तक बारिश की स्थिति काफी बेहतर मानी जा रही है।

    इस सीजन में सबसे ज्यादा बारिश पूर्वी मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में दर्ज की गई है जहां अब तक करीब 53 इंच पानी गिर चुका है। इसके विपरीत आलीराजपुर में सबसे कम करीब 13.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह अंतर साफ दिखाता है कि प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में मानसून की सक्रियता कितनी अलग रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले चार दिन भी प्रदेश के मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग के कई जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बादल अधिक सक्रिय रहेंगे जबकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। 12 सितंबर के बाद नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने पर पूरे मध्यप्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश में पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई तेज बारिश से वहां के मौसमी आंकड़ों में बड़ा सुधार हुआ है। कई जिलों में लगातार बारिश के कारण नदी नालों का जलस्तर बढ़ा और कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसके चलते सीजन की शुरुआत में बारिश में पीछे रहने वाला पूर्वी हिस्सा अब आंकड़ों में बेहतर स्थिति में पहुंच गया है।

    वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिले अब भी सामान्य बारिश से पीछे चल रहे हैं। आलीराजपुर अशोकनगर बैतूल देवास धार हरदा इंदौर झाबुआ खंडवा मंदसौर मुरैना नर्मदापुरम नीमच बड़वानी रायसेन रतलाम सीहोर शाजापुर उज्जैन और विदिशा समेत कई जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। कुछ क्षेत्रों में यह कमी 7 प्रतिशत से लेकर 54 प्रतिशत तक बताई गई है।

    मध्यप्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का औसत करीब 37.3 इंच है। राजधानी भोपाल सहित इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच तक रहता है। जून में सामान्य से कम बारिश होने के बाद जुलाई और अगस्त में हुई अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार जरूर आया लेकिन शुरुआती कमी की पूरी भरपाई अभी नहीं हो सकी है।

    फिलहाल प्रदेश में अब तक 83.5 प्रतिशत बारिश का कोटा पूरा हो चुका है और आने वाले दिनों में नया सिस्टम सक्रिय होने पर बाकी इलाकों में भी बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा नजर अब रीवा और शहडोल संभाग पर रहेगी जहां अगले चार दिनों तक तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

  • अब अवैध शराब पर चौतरफा वार: अचानक छापे, रात में गश्त और वाहनों की जांच, गड़बड़ी नजरअंदाज करने वालों पर होगी कार्रवाई

    अब अवैध शराब पर चौतरफा वार: अचानक छापे, रात में गश्त और वाहनों की जांच, गड़बड़ी नजरअंदाज करने वालों पर होगी कार्रवाई


    भोपाल। सागर में जहरीली शराब पीने से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ सरकार और आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेशभर में अब विशेष अभियान चलाकर केवल अवैध शराब की बिक्री ही नहीं बल्कि इसके निर्माण संग्रहण और परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क पर नजर रखी जाएगी। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध मदिरा के कारोबार पर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गंभीर गड़बड़ी को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद जारी निर्देशों में प्रदेश के सभी जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है। ऐसे इलाकों में जहां अवैध शराब के निर्माण संग्रहण परिवहन या बिक्री की आशंका रहती है वहां नियमित जांच के साथ अचानक छापेमारी की जाएगी। संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि अवैध शराब का कारोबार शुरू होने से पहले ही उस पर कार्रवाई की जा सके।

    विशेष अभियान में सूचना तंत्र को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध शराब से संबंधित मिलने वाली हर विश्वसनीय सूचना का तत्काल सत्यापन किया जाएगा। सूचना सही पाए जाने पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 और लागू नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग ने सूचना देने वाले लोगों की पहचान गोपनीय रखने के भी निर्देश दिए हैं ताकि लोग बिना किसी डर के अवैध शराब के कारोबार की जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकें।

    अवैध शराब बनाने वाली भट्ठियों अड्डों संग्रहण केंद्रों और बिक्री स्थलों पर विशेष दबिश देने की तैयारी है। तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी और पंचनामा समेत सभी दस्तावेजों को सही तरीके से तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों को विशेष रूप से साक्ष्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए कहा गया है ताकि कार्रवाई के बाद मामले अदालत में मजबूती के साथ पेश किए जा सकें और आरोपी कानूनी प्रक्रिया की कमियों का फायदा न उठा सकें।

    अवैध शराब के परिवहन पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। संवेदनशील मार्गों जिला सीमाओं और चिन्हित स्थानों पर वाहनों की आकस्मिक जांच होगी। संदिग्ध वाहनों में अवैध शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वाहन नंबर चालक और मालिक समेत जरूरी जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अंतर जिला और अंतर राज्यीय शराब तस्करी की आशंका वाले मार्गों पर संबंधित जिलों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई भी होगी।

    आबकारी विभाग ने लंबित मामलों की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं। जिन मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई बाकी है उनकी समीक्षा कर फरार और वांछित आरोपियों की अलग सूची तैयार की जाएगी। जमानत राजसात अभिरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण न्यायालयीन मामलों में भी लंबित कार्रवाई को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    लाइसेंसी शराब दुकानों और परिसरों की भी विशेष जांच की जाएगी। यदि वहां अवैध शराब के विक्रय भंडारण लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन या किसी अन्य गंभीर अनियमितता की सूचना मिलती है तो तत्काल निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गंभीर अनियमितताओं को किसी भी परिस्थिति में अनदेखा नहीं किया जाएगा।

    अभियान की निगरानी के लिए दैनिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। दबिश तलाशी वाहन जांच जब्ती दर्ज प्रकरण गिरफ्तारियां फरार आरोपी और जब्त शराब समेत हर कार्रवाई का विवरण प्रतिदिन दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजना होगा। कोई भी कॉलम खाली नहीं छोड़ा जाएगा और कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में शून्य अंकित करना होगा।

    सबसे अहम बात यह है कि अब अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। विश्वसनीय सूचना मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने गंभीर गड़बड़ी की उपेक्षा करने या दायित्व के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। सहायक आबकारी आयुक्त और जिला आबकारी अधिकारियों को अपने जिलों में व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सागर की घटना के बाद शुरू होने वाला यह विशेष अभियान प्रदेश में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लगातार जांच छापेमारी और सख्त निगरानी से जहरीली और अवैध शराब के कारोबार पर कितनी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

  • ‘बार-बार चेताया फिर भी नहीं जागा प्रशासन’ बंडा शराब कांड पर सपा का बड़ा आरोप, कलेक्टर-SP समेत अधिकारियों की जांच की मांग

    ‘बार-बार चेताया फिर भी नहीं जागा प्रशासन’ बंडा शराब कांड पर सपा का बड़ा आरोप, कलेक्टर-SP समेत अधिकारियों की जांच की मांग


    भोपाल। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी ने इस मामले में जिला प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पार्टी लगातार कई महीनों से बंडा क्षेत्र में अवैध और जहरीली शराब की बिक्री के खिलाफ प्रशासन को चेतावनी दे रही थी। सपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव का कहना है कि पार्टी ने पिछले पांच महीनों में छह बार ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की लेकिन प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए। अब जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पार्टी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    सपा प्रदेश अध्यक्ष ने सागर में पत्रकारों के सामने ज्ञापनों की प्रतियां पेश करते हुए कहा कि अप्रैल से ही प्रशासन को बंडा क्षेत्र में चल रहे अवैध शराब के कारोबार की जानकारी दी जा रही थी। पार्टी की ओर से अलग अलग अवसरों पर प्रशासन को चेतावनी दी गई कि अवैध रूप से बिक रही शराब लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती है। इसके बावजूद आरोप है कि शिकायतों पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सपा का कहना है कि यदि समय रहते अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाई जाती तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।

    मौतों के आंकड़े को लेकर भी सपा और प्रशासन के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने दावा किया है कि जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 50 तक पहुंच चुकी है जबकि प्रशासन की ओर से अब तक 22 मौतों की पुष्टि की जा रही है। सपा ने आरोप लगाया कि कई मामलों में मृतकों का पोस्टमार्टम कराए बिना अंतिम संस्कार कराया जा रहा है और इसी वजह से मौतों का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है।

    हालांकि सपा की ओर से किए गए 50 मौतों के दावे और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार कराए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में मौतों की वास्तविक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन की ओर से पुष्टि किए गए आंकड़े और विपक्षी दल के दावों में बड़ा अंतर होने के कारण इस पूरे मामले की जांच और पारदर्शिता की मांग भी तेज हो गई है।

    समाजवादी पार्टी ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सागर कलेक्टर एसपी और बंडा एसडीएम समेत उन सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए जिन तक अवैध शराब की बिक्री से संबंधित शिकायतें पहुंचाई गई थीं। सपा ने प्रशासन से यह भी सवाल किया है कि बार बार ज्ञापन और शिकायतें दिए जाने के बावजूद अवैध शराब के खिलाफ समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    डॉ. मनोज यादव का आरोप है कि यदि प्रशासन ने शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से लिया होता और अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए होते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। पार्टी अब इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है।

    बंडा जहरीली शराब मामले में प्रशासन और समाजवादी पार्टी के दावों के बीच बड़ा अंतर सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। जहां प्रशासन ने अब तक 22 मौतों की पुष्टि की है वहीं सपा ने 50 लोगों की मौत का दावा किया है। ऐसे में अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जहरीली शराब से कितने लोगों की मौत हुई और अवैध शराब की बिक्री को लेकर पहले की गई शिकायतों पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।

  • 20 सितंबर को भोपाल में दिखेगा RSS का विशाल अनुशासन और संगठन: 30 हजार स्वयंसेवक करेंगे परेड-योग-दंड प्रयोग, होसबाले होंगे मुख्य अतिथि

    20 सितंबर को भोपाल में दिखेगा RSS का विशाल अनुशासन और संगठन: 30 हजार स्वयंसेवक करेंगे परेड-योग-दंड प्रयोग, होसबाले होंगे मुख्य अतिथि


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आगामी 20 सितंबर को ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड पर विशाल शाखा संगम आयोजित किया जाएगा जिसमें भोपाल विभाग के करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की संभावना है। बड़ी संख्या में पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों की मौजूदगी के कारण इस आयोजन को संघ के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में माना जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य रूप से शामिल होंगे और स्वयंसेवकों को मार्गदर्शन देंगे।

    लाल परेड ग्राउंड पर यह आयोजन दोपहर बाद करीब 3 बजे शुरू होगा। शाखा संगम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले भोपाल प्रताप भोजपुर तात्या टोपे और विद्युत नगर संगठनात्मक जिलों के स्वयंसेवक एक साथ जुटेंगे। संघ की विभिन्न शाखाओं से जुड़े हजारों स्वयंसेवक इस कार्यक्रम में पूर्ण गणवेश में पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण के चलते आयोजन की तैयारियां भी बड़े स्तर पर की जा रही हैं।

    शाखा संगम के दौरान स्वयंसेवकों के अनुशासन और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा। हजारों स्वयंसेवक एक साथ समता यानी परेड करेंगे। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम दंड प्रयोग और योग का सामूहिक प्रदर्शन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। संघ की दृष्टि से भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख नगरों और बस्तियों की शाखाओं का यह एक बड़ा एकत्रीकरण होगा। आयोजन के माध्यम से संगठन की गतिविधियों और समाज जीवन में उसकी भूमिका को भी सामने रखा जाएगा।

    यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजन से भी जुड़ा हुआ है। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में अलग अलग गतिविधियों और कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में मुहल्ला शाखाओं के गठन और विस्तार पर भी जोर दिया है। भोपाल में आयोजित होने वाले शाखा संगम में इन मुहल्ला शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों की भी बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है। इसे मुहल्ला स्तर पर संगठन विस्तार के बाद एक बड़े सामूहिक जुटान के रूप में देखा जा रहा है।

    कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी को भी विशेष माना जा रहा है। वे स्वयंसेवकों को संगठन समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। युवाओं से संवाद भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हाल के समय में युवाओं और विशेष रूप से Gen-Z से जुड़े मुद्दों पर देशभर में चर्चा बढ़ी है। ऐसे में संघ भी युवाओं से संवाद और परिचर्चा के माध्यम से उनकी सोच और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विषयों पर सक्रिय दिखाई दे रहा है।

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर इससे पहले भी संघ का बड़ा आयोजन हो चुका है। कोरोना काल के प्रतिबंध हटने के बाद 11 दिसंबर 2022 को यहां भव्य शारीरिक प्रकटोत्सव आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए थे और दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे थे। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और समाज के गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

    अब एक बार फिर 20 सितंबर को लाल परेड ग्राउंड पर होने वाला शाखा संगम भोपाल में संघ का बड़ा संगठनात्मक आयोजन बनने जा रहा है। 30 हजार स्वयंसेवकों की भागीदारी पर केंद्रित इस कार्यक्रम में अनुशासन शारीरिक प्रदर्शन संगठनात्मक एकजुटता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश प्रमुख रूप से दिखाई देंगे। राजधानी में होने वाले इस विशाल जुटान पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों की भी नजर रहेगी।

  • जिम 365 डिग्री में करोड़ों की टैक्स चोरी का आरोप! CGST की 30 अफसरों वाली टीम ने 5 ठिकानों पर मारा छापा

    जिम 365 डिग्री में करोड़ों की टैक्स चोरी का आरोप! CGST की 30 अफसरों वाली टीम ने 5 ठिकानों पर मारा छापा


    भोपाल। राजधानी भोपाल में टैक्स चोरी के मामले में सेंट्रल जीएसटी यानी CGST ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने जिम 365 डिग्री के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी कर जांच शुरू की है। शुरुआती जांच में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों को जांच के दौरान बिलिंग व्यवस्था में अनियमितताएं मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि जिम में ग्राहकों को बिल जारी नहीं किए जा रहे थे और इसी के जरिए टैक्स चोरी की जा रही थी।

    CGST की कार्रवाई जिम संचालक कुरैशी से जुड़े चूनाभट्टी कोहेफिजा बावड़िया कलां सिंधी कॉलोनी और जेके रोड स्थित प्रतिष्ठानों पर की गई। पांचों स्थानों पर एक साथ पहुंची टीम ने जिम के दस्तावेजों बिलिंग रिकॉर्ड और टैक्स से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच की। कार्रवाई इतनी बड़ी थी कि इसके लिए करीब 30 अधिकारियों की टीम लगाई गई। यह कार्रवाई प्रधान आयुक्त CGST एन पदमश्री के निर्देश पर की गई जबकि एडिशनल कमिश्नर जी मनिगंडा स्वामी के नेतृत्व में जांच दल ने पांचों ठिकानों पर कार्रवाई को अंजाम दिया।

    जांच में सितंबर 2025 के बाद लागू हुए जीएसटी नियमों से जुड़े प्रावधान भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार नियमों में बदलाव के बाद संबंधित संस्थाओं के लिए टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद ऐसे प्रतिष्ठानों को 5 प्रतिशत जीएसटी जमा करना जरूरी था। जांच एजेंसी का आरोप है कि जिम संचालक की ओर से यह टैक्स जमा नहीं किया जा रहा था। इससे पहले ऐसे प्रतिष्ठानों पर 18 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान लागू था लेकिन नियमों में बदलाव के बाद टैक्स की दर में संशोधन किया गया।

    CGST अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि जिम की ओर से ग्राहकों से ली जाने वाली राशि का रिकॉर्ड किस तरह रखा गया और टैक्स का भुगतान नियमों के अनुसार किया गया या नहीं। शुरुआती जांच में एक करोड़ रुपए से ज्यादा की टैक्स चोरी का मामला सामने आने के बाद अब विभाग सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। कार्रवाई पूरी होने के बाद टैक्स चोरी की वास्तविक राशि तय की जाएगी और नियमानुसार जिम संचालक से बकाया टैक्स की राशि जमा कराई जा सकती है।

    बताया गया कि CGST की टीम ने कार्रवाई एक दिन पहले शुरू की थी लेकिन जांच पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद रात के समय जिम 365 डिग्री के प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया था। अगले दिन अधिकारी फिर से संबंधित ठिकानों पर पहुंचकर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि टैक्स चोरी का वास्तविक आंकड़ा कितना है और इसमें किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन किया गया।

    इधर भोपाल के अलावा राजगढ़ जिले के सारंगपुर में भी स्टेट जीएसटी विभाग ने बड़े किराना कारोबारियों के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। टीम ने दुकानों की बिलिंग व्यवस्था बिक्री और जीएसटी अनुपालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। विभाग के पहुंचने की सूचना मिलते ही कुछ दुकानदार दुकानें बंद कर चले गए जबकि कुछ प्रतिष्ठानों पर संचालक मौजूद नहीं मिले।

    सारंगपुर में बिना बिल सामान बेचने और ग्राहकों से जीएसटी सहित राशि लेने के बावजूद बिल जारी नहीं करने की शिकायतों के आधार पर निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठान अनरजिस्टर्ड भी मिले। अधिकारियों के अनुसार कुछ दुकानों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से कम पाया गया है और ऐसे मामलों में जीएसटी नियमों के तहत पात्रता की जांच की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी प्रतिष्ठान के अनरजिस्टर्ड मिलने पर तत्काल कार्रवाई तय नहीं होती। निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।