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  • महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र

    महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दरबार में एक बार फिर श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजस्थान के जयपुर से आए एक भक्त परिवार ने बाबा महाकाल के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए लाखों रुपए मूल्य का चांदी का भव्य छत्र समर्पित किया। इस विशेष भेंट ने न केवल मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया बल्कि यह भी साबित किया कि महाकाल के प्रति भक्तों का विश्वास और समर्पण समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है।

    जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा लंबे समय से भगवान महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ उन्होंने विशेष रूप से 1 किलो 300 ग्राम चांदी से एक सुंदर और कलात्मक छत्र तैयार करवाया। इस छत्र की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 25 हजार रुपए बताई जा रही है। भागचंद बलेसरा अपने पूरे परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस दिव्य छत्र को बाबा महाकाल को अर्पित किया।

    इस धार्मिक अवसर पर उनकी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा और सीताराम बलेसरा, पुत्रियां ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा भी मौजूद रहे। पूरे परिवार ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ छत्र का पूजन कराया। इसके बाद विशेष अनुष्ठान संपन्न कर यह चांदी का छत्र भगवान महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को श्रद्धा और भक्ति के साथ देखा। पूजा के दौरान वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।

    छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति की ओर से भागचंद बलेसरा और उनके परिवार का सम्मान भी किया गया। श्रद्धालु परिवार ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें जीवन में अनेक उपलब्धियां और खुशियां मिली हैं। इसी कृतज्ञता और आस्था के भाव से उन्होंने यह विशेष भेंट समर्पित की है।

    महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, छत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश और विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को बहुमूल्य उपहार भेंट करते हैं। विशेष बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद धार्मिक दान और भेंट की भावना में कोई कमी नहीं आई है।

    महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर से आए इस श्रद्धालु परिवार द्वारा अर्पित किया गया चांदी का छत्र भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया है।

  • भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला

    भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए अब श्रद्धालुओं को नई व्यवस्था का पालन करना होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी श्रद्धालु को एक ही मोबाइल नंबर से तीन माह के भीतर दोबारा भस्म आरती की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम सामान्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रोटोकॉल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने वालों पर भी समान रूप से लागू रहेगा।

    महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। सीमित संख्या में उपलब्ध अनुमति के कारण लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग एक ही मोबाइल नंबर या पहचान का उपयोग कर बार-बार अनुमति प्राप्त कर लेते हैं जबकि कई श्रद्धालु वर्षों तक भस्म आरती के दर्शन का अवसर नहीं पा पाते। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    दरअसल वर्ष 2024 में भी भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का नियम लागू किया था। कुछ समय तक यह व्यवस्था प्रभावी रही लेकिन बाद में इसका पालन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया। अब फिर से शिकायतें मिलने के बाद मंदिर समिति ने इस नियम को सख्ती के साथ लागू करने का फैसला किया है।

    नई व्यवस्था के अनुसार अब कोई भी श्रद्धालु चाहे वह ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से आवेदन करे या किसी विशेष प्रोटोकॉल के तहत अनुमति प्राप्त करने का प्रयास करे उसे एक ही मोबाइल नंबर से बार-बार अनुमति नहीं मिलेगी। एक बार भस्म आरती में शामिल होने के बाद उसी नंबर से अगली अनुमति प्राप्त करने के लिए कम से कम तीन माह का इंतजार करना होगा।

    मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा और अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही लंबे समय से उठ रहे पक्षपात और बार-बार अनुमति मिलने जैसे आरोपों पर भी रोक लग सकेगी।

    महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग रोकने से वास्तविक श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बन सकेगी।

    महाकाल मंदिर समिति के इस फैसले को श्रद्धालुओं के बीच सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था से भस्म आरती में शामिल होने की इच्छा रखने वाले अधिक लोगों को अवसर मिल सकेगा और व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और संतुलित बनेगी।

  • उज्जैन में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने तीन मजदूरों को रौंदा, एक की मौत, दो जिंदगी की जंग लड़ रहे

    उज्जैन में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने तीन मजदूरों को रौंदा, एक की मौत, दो जिंदगी की जंग लड़ रहे


    मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले के नरवर क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार का सहारा छीन लिया और दो लोगों को जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया। मजदूरी करने के लिए घर से निकले तीन मजदूरों की यात्रा उस समय हादसे में बदल गई जब उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार डंपर ने जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार नरवर निवासी धर्मेंद्र शेरवाल, कालू नागवंशी और रोशन रोज की तरह मजदूरी के लिए उज्जैन जा रहे थे। तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर सुबह घर से निकले थे। जब वे सेमलिया फंटे के पास फोरलेन सड़क पार कर रहे थे तभी देवास की ओर से तेज गति से आ रहे डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और डंपर की चपेट में आ गए।

    हादसे में 39 वर्षीय धर्मेंद्र शेरवाल की मौके पर ही मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल कालू नागवंशी और रोशन को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कालू की हालत नाजुक होने के कारण उसे देवास के अमलतास अस्पताल रेफर किया गया है जबकि रोशन का इलाज उज्जैन के चरक अस्पताल में जारी है।

    घटना की खबर मिलते ही गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और हादसे के लिए जिम्मेदार डंपर चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ समय के लिए देवास रोड पर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बन रही है लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

    सूचना मिलने पर नरवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया।

    पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त डंपर को जब्त कर लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाए तो ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और कई परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।

  • सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला

    सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला


    मध्यप्रदेश । सरकारी जमीनों और भवनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के दावे करने वाला प्रशासन शिवपुरी जिले में अपनी ही संपत्तियों को कब्जे से मुक्त नहीं करा पा रहा है। हालात यह हैं कि बदरवास में लाखों रुपए की लागत से बनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला पिछले सात वर्षों से एक परिवार के कब्जे में है जबकि कोलारस क्षेत्र के एक गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर छह साल से ताला लटका हुआ है। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बदरवास तहसील कार्यालय के पीछे वर्ष 2018 में मंडी बोर्ड द्वारा कृषि विभाग के लिए आधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया था। करीब 38 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना था ताकि वे अपनी फसलों के लिए वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकें। लेकिन प्रयोगशाला शुरू होने से पहले ही भवन पर एक परिवार ने कब्जा जमा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने आवास में तब्दील कर दिया। आज स्थिति यह है कि जिस भवन में किसानों के हित से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू होनी थीं वहां घरेलू गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

    कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन खाली कराने के कई प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। विभाग का आरोप है कि कब्जाधारी के खिलाफ कार्रवाई करने में कई तरह की बाधाएं सामने आती रही हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। परिणामस्वरूप लाखों रुपए की सरकारी संपत्ति वर्षों से बेकार पड़ी हुई है और किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।

    दूसरी ओर कोलारस विकासखंड के ग्राम सेसईखुर्द में स्थित शासकीय आंगनबाड़ी केंद्र भी वर्षों से अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में आए एक तेज तूफान के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने आंगनबाड़ी भवन का ताला तोड़कर उसमें अपना सामान रख लिया और धीरे-धीरे पूरे भवन पर कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बाद में भवन की संरचना में भी बदलाव कर दिया गया। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित हो गया और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ बाधित हो गया।

    स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है लेकिन सरकारी भवन पर कब्जा होने से व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।

    इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भवनों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्तियां इसी तरह अतिक्रमण और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जमीन पर परिणाम कब दिखाई देते हैं।

  • शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बुजुर्ग की मौत दो युवक गंभीर

    शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बुजुर्ग की मौत दो युवक गंभीर


    मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर अटलपुर गांव के समीप तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई जबकि बाइक पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहगीरों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। मोहनपुर निवासी 60 वर्षीय ओंकार सिंह पटेलिया सड़क किनारे खड़े थे। इसी दौरान तेज गति से आ रही एक बाइक अनियंत्रित होकर उनसे जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बुजुर्ग दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं बाइक पर सवार दोनों युवक भी सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल ओंकार सिंह पटेलिया को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

    दुर्घटना में घायल बाइक सवार दोनों युवकों की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुना रेफर किया गया है। समाचार लिखे जाने तक दोनों की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस उनकी शिनाख्त करने और परिजनों तक सूचना पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

    घटना के बाद मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने मामले की जानकारी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को मृतक का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बाइक की गति कितनी थी तथा हादसे के पीछे लापरवाही या अन्य कोई कारण तो नहीं था।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों की वजह से हादसे होते रहते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में यातायात नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की जरूरत को रेखांकित करता है। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना न केवल चालक बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।

  • धारा 370 से राष्ट्र प्रथम तक भाजपा का वैचारिक महाअभियान मध्यप्रदेश में बूथ गौरव दिवस के साथ होंगे हजारों कार्यक्रम

    धारा 370 से राष्ट्र प्रथम तक भाजपा का वैचारिक महाअभियान मध्यप्रदेश में बूथ गौरव दिवस के साथ होंगे हजारों कार्यक्रम


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी आगामी 23 जून से 6 जुलाई तक व्यापक जनसंपर्क और वैचारिक जागरण अभियान चलाने जा रही है। जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले इस विशेष अभियान को पार्टी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पक्ष नाम दिया है। इसके तहत प्रदेश के बूथ स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को जन जन तक पहुंचाना और संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय बनाना है। मध्यप्रदेश भाजपा इस पूरे पखवाड़े को बूथ गौरव दिवस के रूप में मनाएगी। इसके लिए प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

    अभियान का प्रमुख केंद्र जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के फैसले को बनाया गया है। भाजपा कार्यकर्ता विभिन्न व्याख्यानों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बताएंगे कि किस प्रकार यह निर्णय देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। कार्यक्रमों में राष्ट्र प्रथम की अवधारणा को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। पार्टी का मानना है कि डॉ. मुखर्जी के विचारों और उनके सपनों को साकार करने की दिशा में यह ऐतिहासिक निर्णय महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

    प्रदेश के सभी जिलों में जिला कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन सम्मेलनों में प्रबुद्ध वक्ता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन दर्शन सामाजिक योगदान राजनीतिक यात्रा और भारतीय जनसंघ की स्थापना में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। इसके साथ ही स्वतंत्र भारत के निर्माण में उनके योगदान और राष्ट्रहित से जुड़े उनके विचारों पर भी चर्चा की जाएगी।

    युवा वर्ग को जोड़ने के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों और विश्वविद्यालयों के आसपास छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और डॉ. मुखर्जी के विचारों से जोड़ना है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार ये आयोजन शैक्षणिक परिसरों के बाहर आयोजित होंगे।

    अभियान के दौरान सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों को भी प्रमुखता दी जाएगी। प्रदेश के विभिन्न शहरों और नगरों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर मार्ग उद्यान अथवा प्रमुख स्थलों का नामकरण किया जाएगा। कई स्थानों पर उनकी प्रतिमा अथवा चित्र का अनावरण भी प्रस्तावित है। इसके अलावा मानसून को देखते हुए बूथ स्तर तक व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। भाजपा का लक्ष्य है कि पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत किया जाए।

    भाजपा संगठन का मानना है कि यह अभियान केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रवाद संगठन सशक्तिकरण और जनजागरण का व्यापक अभियान होगा। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पार्टी अपने वैचारिक आधार को मजबूत करने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास करेगी। आने वाले दिनों में प्रदेशभर में इस अभियान से जुड़ी गतिविधियां राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आएंगी।

  • मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा

    मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा


    मध्यप्रदेश । भोपाल में आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी ATS द्वारा की जा रही जांच में कथित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। एजेंसी की हिरासत में मौजूद आरोपियों से पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और सामने आई जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार आरोपी इजहार उल हक से पूछताछ में एक कथित नेटवर्क और उसके उद्देश्यों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से बताया कि कुछ लोग एक विशेष एजेंडे के तहत काम कर रहे थे और सोशल मीडिया तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियां इन दावों की गहन जांच कर रही हैं।

    ATS के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे। टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग कथित तौर पर संवाद और विचारों के आदान प्रदान के लिए किया जा रहा था। एजेंसी अब इन डिजिटल संपर्कों और चैट रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके विस्तार का पता लगाया जा सके।

    पूछताछ में आरोपी फराज से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज पिछले कई वर्षों से कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसकी पहचान कुछ ऐसे लोगों से कराई गई थी जो विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। एजेंसी अब इन संपर्कों की प्रामाणिकता और उनके संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर वैचारिक प्रभाव डालकर लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपियों ने विभिन्न राज्यों के लोगों के संपर्क में होने की बात भी स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन क्षेत्रों तक सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

    ATS अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। एजेंसी यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा। इसी कारण जांच से जुड़ी जानकारियों को सावधानीपूर्वक परखा जा रहा है।

    इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलाए जाने वाले कट्टरपंथी विचारों और संदिग्ध नेटवर्क की चुनौती को सामने ला दिया है। जांच एजेंसियां लगातार ऐसे तत्वों पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि किसी भी प्रकार की अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

  • सीनियर अफसरों की अनदेखी से बढ़ा विवाद एमएसएमई विभाग में जूनियर लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर

    सीनियर अफसरों की अनदेखी से बढ़ा विवाद एमएसएमई विभाग में जूनियर लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में हाल ही में जारी प्रभार आदेशों ने विभागीय व्यवस्था को लेकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। वाणिज्यिक कर विभाग में तबादलों को लेकर उठे सवालों के बाद अब एमएसएमई विभाग के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अधिकारियों का आरोप है कि वरिष्ठता और योग्यता की अनदेखी करते हुए जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार सौंप दिया गया है जिससे विभागीय पदक्रम और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

    विवाद की शुरुआत 15 और 16 जून को जारी किए गए प्रभार आदेशों से हुई। इन आदेशों के तहत कुछ ऐसे अधिकारियों को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधक का प्रभार दिया गया है जो मूल रूप से सहायक प्रबंधक पद पर नियुक्त हैं और वर्तमान में प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। विभाग के भीतर इसे चार्ज के ऊपर चार्ज की व्यवस्था बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य है और इससे विभाग में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

    जिन अधिकारियों को महाप्रबंधक का प्रभार सौंपा गया है उनमें सुबोध कुमार श्रीवास्तव को मंडीदीप जेपी तिवारी को रीवा शिवशंकर सिंह को निवाड़ी सुरेश कुमार गोस्वामी को भिंड राममूर्ति खरे को अनूपपुर अजय तिवारी को शिवपुरी तथा बीएल अहिरवार को दमोह की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को लेकर विभाग के भीतर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि विभाग में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित वर्ष 2016 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक वर्ग दो राजपत्रित अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें प्रबंधक और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद उन्हें जिम्मेदारी न देकर प्रभारी प्रबंधकों को महाप्रबंधक का प्रभार देना कई अधिकारियों को समझ से परे लग रहा है। उनका मानना है कि जब योग्य और नियमित रूप से चयनित अधिकारी उपलब्ध हैं तो उन्हें नजरअंदाज करने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।

    नाराजगी का एक बड़ा कारण लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया भी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्षों से पदोन्नति के मामले लंबित हैं और अधिकारियों को उनके अधिकारिक पद नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी ओर जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार देकर वरिष्ठ अधिकारियों की उपेक्षा की जा रही है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और विभाग में असंतोष का माहौल बन रहा है।

    विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर से जुड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में अब ऐसे हालात बन सकते हैं जहां वर्ग दो राजपत्रित अधिकारी उन अधिकारियों के अधीन कार्य करेंगे जो मूल रूप से वर्ग तीन सेवा श्रेणी से आते हैं। ऐसी स्थिति में जूनियर अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की सीआर लिखेंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह न केवल सेवा संरचना के सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी उचित नहीं माना जा सकता।

    विभाग के भीतर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि नियमित और वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं तो फिर प्रभारी व्यवस्था के माध्यम से उच्च पदों की जिम्मेदारी देने के पीछे क्या प्रशासनिक तर्क अपनाया गया है। फिलहाल विभाग की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है लेकिन आदेशों को लेकर विरोध और चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

    एमएसएमई विभाग में बढ़ते असंतोष ने एक बार फिर सरकारी विभागों में तबादला और प्रभार व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यदि विभाग इस मामले पर स्पष्टता नहीं देता है तो विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां

    करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक भले ही धीमी हो लेकिन लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर जलभराव और गड्ढों की समस्या के बीच अब बिजली के लटकते तार भी मौत का कारण बन रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में बिजली व्यवस्था की बदहाली साफ दिखाई दे रही है जहां बाजारों कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर तारों का जाल लोगों की सुरक्षा को चुनौती दे रहा है।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की हालिया रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेशभर में 1963 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1102 लोगों की मौत हुई जबकि 329 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इतना ही नहीं 1492 पशुओं की भी करंट लगने से जान चली गई। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसतन हर दिन तीन लोगों की मौत बिजली हादसों में हो रही है और लगभग हर आठ घंटे में एक व्यक्ति करंट का शिकार बन रहा है।

    भोपाल की स्थिति भी किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त इलाकों में बिजली के तार खुलेआम लटकते दिखाई देते हैं। न्यू मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में जहां प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं वहां खंभों और दुकानों के बीच फैले तार दुर्घटना को आमंत्रण देते नजर आते हैं। पुराने भोपाल की संकरी गलियों में कई स्थानों पर बिजली के तार मकानों की बालकनियों से सटे हुए हैं जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

    शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक हैं। रोशनपुरा चौराहे पर बिजली के तार खंभों से नीचे जमीन तक झूलते दिखाई देते हैं। कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने कई जगह तार लोगों के सिर तक पहुंच रहे हैं। एमपी नगर के कोचिंग हब क्षेत्र में छात्रों की भीड़ के बीच सड़कों के ऊपर उलझे तार सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। वहीं 10 नंबर मार्केट क्षेत्र में एक तार जमीन से महज चार फीट की ऊंचाई पर लटका हुआ देखा गया जो किसी भी राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान ऐसे खुले और झूलते तारों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बारिश के पानी और नमी के कारण करंट फैलने की आशंका बढ़ जाती है जिससे आम नागरिकों के साथ पशुओं की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। इसके बावजूद कई इलाकों में लंबे समय से शिकायतों के बाद भी सुधार कार्य नहीं हो पाए हैं।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी जारी रही तो बिजली अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है।

    प्रदेश में बढ़ते बिजली हादसे इस बात का संकेत हैं कि केवल निर्देश और चेतावनियां पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत है कि प्रशासन और बिजली कंपनियां तत्काल प्रभाव से जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सुधार कार्य शुरू करें। क्योंकि जब तक सड़कों पर लटकते ये मौत के तार हटाए नहीं जाते तब तक हर बारिश के साथ किसी नई दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।

  • एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही

    एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही


    भोपाल । भोपाल के रायसेन रोड पर रविवार रात उस समय अफरा तफरी मच गई जब नगर निगम का एक कंटेनरनुमा ट्रक अचानक आग की चपेट में आ गया। घटना एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने की है जहां से गुजर रहे ट्रक के केबिन से अचानक धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुआं आग की लपटों में बदल गया और ट्रक का अगला हिस्सा जलने लगा। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और ट्रक कर्मचारियों ने साहस दिखाते हुए आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई।

    जानकारी के अनुसार नगर निगम का यह ट्रक आदमपुर स्थित कचरा खंती से वापस लौट रहा था। रात के समय जब वाहन रायसेन रोड पर एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने पहुंचा तब चालक को केबिन से धुआं निकलता दिखाई दिया। उसने तुरंत वाहन रोका और नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ लोगों ने अपनी गाड़ियों में रखी पानी की बड़ी बोतलें निकालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। कर्मचारियों और राहगीरों ने मिलकर आग पर पानी डाला लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उसे नियंत्रित करना आसान नहीं था। कुछ ही मिनटों में आग ने ट्रक के अगले हिस्से और टायरों को अपनी चपेट में ले लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद काफी समय तक दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब आधे घंटे तक आग धधकती रही और लोग अपने स्तर पर उसे बुझाने की कोशिश करते रहे। इस दौरान सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ और आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    घटना के बाद जब ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुका था। इसके अलावा ट्रक का इंश्योरेंस वर्ष 2019 से नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इतना ही नहीं वाहन का परमिट भी वैध नहीं पाया गया। इस खुलासे ने नगर निगम के वाहन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फिटनेस जांच और समय पर रखरखाव से ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। यदि वाहन की तकनीकी जांच समय पर होती रहे तो शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

    फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है जो राहत की बात है। हालांकि इस हादसे ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और पुराने वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।