Category: Madhya Pradesh

  • गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में

    गोलीकांड में नया खुलासा: महिला और नाबालिग समेत 5 आरोपी गिरफ्त में


    मध्यप्रदेश। सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र स्थित गौंड बब्बा चबूतरा इलाके में हुए सनसनीखेज गोलीकांड में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक नाबालिग भी शामिल है। इसके साथ ही इस हत्याकांड में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर पांच हो गई है, जबकि मुख्य आरोपी यश अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

    यह घटना 21 मई की रात करीब 10:30 बजे की है, जब पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने फरियादी ओम साहू और उसके भाई मयंक साहू के साथ विवाद शुरू कर दिया था। विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट के बाद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक आरोपी ने अवैध हथियार से फायर कर दिया। गोली लगने से मयंक साहू गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी दौरान हमले में ओम साहू पर चाकू से वार भी किया गया था।

    घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज की और साइबर सेल व मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया। शनिवार को इसी कार्रवाई के तहत पुलिस ने तुत्तू उर्फ शैलेंद्र रैकवार (22 वर्ष, निवासी तिरुपतिपुरम) और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 18 वर्षीय आर्यन आठिया, एक 16 वर्षीय नाबालिग और एक 60 वर्षीय महिला शामिल थी। इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

    मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह के अनुसार, इस हत्याकांड में कुल छह आरोपी नामजद हैं, जिनमें से एक मुख्य आरोपी यश अभी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।

    पुलिस का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही फरार आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • सागर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: देसी पिस्टल और कारतूस के साथ 59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

    सागर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: देसी पिस्टल और कारतूस के साथ 59 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार


    मध्यप्रदेश। सागर शहर में उस समय पुलिस को बड़ी सफलता मिली जब मोतीनगर थाना क्षेत्र की टीम ने एक 59 वर्षीय व्यक्ति को अवैध देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि आरोपी न्यू भोपाल बस स्टैंड के पीछे भगतसिंह वार्ड क्षेत्र में संदिग्ध हालत में घूम रहा है।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही आरोपी वहां से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन टीम में शामिल आरक्षकों ने उसका पीछा कर उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब आरोपी की तलाशी ली गई तो उसके पास से एक देसी मैगजीन युक्त पिस्टल और उसकी जेब से एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ।

    पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहन उर्फ बबलू (59 वर्ष), निवासी राजीवनगर वार्ड के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों हथियारों को जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने यह अवैध हथियार कहां से प्राप्त किया और वह किस उद्देश्य से इसे लेकर घूम रहा था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरोपी किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है।

  • सड़क पर मातम: जैन साध्वियों को कार ने कुचला, VIDEO सामने आने के बाद हड़कंप

    सड़क पर मातम: जैन साध्वियों को कार ने कुचला, VIDEO सामने आने के बाद हड़कंप


    मध्यप्रदेश। रीवा शहर में उस समय हड़कंप मच गया जब कलेक्ट्रेट के सामने तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे शांतिपूर्वक पैदल विहार कर रही तीन जैन साध्वियों को जोरदार टक्कर मार दी। यह पूरा हादसा 20 मई की दोपहर का बताया जा रहा है, जिसका सीसीटीवी फुटेज अब सामने आया है और जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

    वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि साध्वियां नियम अनुसार सड़क किनारे पैदल चल रही थीं, तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार अनियंत्रित कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत बचाव में जुट गए।

    हादसे में पूज्य श्रुति मति माता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उपसमिति माता ने इलाज के दौरान संजय गांधी अस्पताल में दम तोड़ दिया। वहीं तीसरी साध्वी आर्यिका माता की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।

    घटना के तुरंत बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन दो साध्वियों की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद बुधवार को एक साध्वी का अंतिम संस्कार रीवा में ही किया गया, जिससे माहौल बेहद भावुक हो गया।

    हादसे को अंजाम देने के बाद कार चालक रशीद आबाद अली शाह मौके से फरार हो गया था। पुलिस की जांच में पता चला कि वह घटना के बाद करीब 270 किलोमीटर दूर जबलपुर तक भाग गया था, जहां बरगी पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    घटना के बाद जैन समाज में भारी आक्रोश है और इसे केवल दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही या संभावित साजिश के रूप में देखा जा रहा है। समाज ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और सभी डिजिटल व सीसीटीवी साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं।

    जैन समाज ने यह भी मांग की है कि देशभर में पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संत सुरक्षा नीति बनाई जाए। साथ ही दोषी को कठोर से कठोर सजा देने की अपील की गई है।

    इस घटना के विरोध में 25 मई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया गया है, जिसमें जैन समाज मौन रैली निकालकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाएगा।

  • धमकी और दबाव के आरोप से गरमाया मामला: शिक्षक गंभीर, पुलिस जांच में सवाल

    धमकी और दबाव के आरोप से गरमाया मामला: शिक्षक गंभीर, पुलिस जांच में सवाल


    मध्यप्रदेश।  रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी शिक्षक अनिल कुमार तिवारी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर उनका परिवार अस्पताल के बाहर पिछले 48 घंटों से भीषण गर्मी में अन्न-जल त्यागकर न्याय की मांग पर डटा हुआ है।

    परिवार का आरोप है कि घटना के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी न तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की गिरफ्तारी हुई है। इस देरी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    मामला उस समय और गंभीर हो गया जब शिक्षक ने आत्महत्या का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले अपनी कलाई की नस काटी और बाद में जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई। डॉक्टरों के अनुसार जहर पूरे शरीर में फैल चुका है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।

    घटना से आहत उनकी पत्नी ने अस्पताल के बाहर पानी तक छोड़ दिया है और रोते हुए कहा कि यदि उनके पति को न्याय नहीं मिला तो वह भी जीवन समाप्त कर देंगी। वहीं बेटी ने भी साफ कहा है कि पूरा परिवार न्याय न मिलने पर सामूहिक आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा।

    परिजनों के अनुसार विवाद की शुरुआत एक पेड़ कटाई के मामले से हुई थी, जिसके बाद मामला थाने तक पहुंचा और वहीं से तनाव बढ़ता गया। आरोप है कि शिक्षक को झूठे केस में फंसाया गया और थाने में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    शिक्षक द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और एक पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि उन्हें बिना किसी अपराध के फंसाया गया और उनकी 28 साल की सेवा को बर्बाद कर दिया गया।

    परिवार का यह भी आरोप है कि पत्रकार ने पुलिस और प्रशासन में अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर उन्हें धमकाया और अपमानित किया। वहीं, शिक्षक ने अपने नोट में उच्च स्तरीय जांच या सीबीआई जांच की मांग भी की है।

    घटना के बाद 72 घंटे बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने से आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। यह पूरा मामला अब प्रशासन, पुलिस और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

  • रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर

    रोशनी से डरती जिंदगी: रीवा के चार बच्चे दुर्लभ बीमारी से अंधेरे में जीने को मजबूर


    मध्यप्रदेश। रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत देवखर (कोरियान टोला) से एक बेहद दर्दनाक और भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार के चार मासूम बच्चे ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया है। इस बीमारी के कारण सूरज की रोशनी उनके लिए राहत नहीं बल्कि सजा बन गई है।

    सुग्रीव कोरी के परिवार के चार बच्चे अनामिका (5 वर्ष), रिया (9 वर्ष), प्रियांशु (13 वर्ष) और पुष्पेंद्र (10 वर्ष)—जन्म से ही एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी एल्बिनिज्म से पीड़ित हैं। इस बीमारी में शरीर में मेलानिन नामक तत्व नहीं बन पाता, जिसके कारण बच्चों की त्वचा, बाल और आंखों का रंग पूरी तरह सफेद है और उनकी दृष्टि भी बेहद कमजोर है।

    इन बच्चों की हालत इतनी गंभीर है कि तेज धूप या रोशनी में उनकी आंखों में तेज जलन और चुभन होती है। बाहर निकलते ही उनकी आंखें बंद हो जाती हैं और संतुलन बिगड़ने से वे गिर जाते हैं। यही कारण है कि ये मासूम बच्चे अधिकांश समय अंधेरे कमरों में रहने को मजबूर हैं।

    सबसे दुखद पहलू यह है कि उनकी शारीरिक स्थिति के कारण उन्हें समाज में भी उपहास का सामना करना पड़ता है। गांव के कुछ लोग और बच्चे उन्हें ‘अंग्रेज’ कहकर चिढ़ाते हैं, जिससे वे मानसिक रूप से और अधिक आहत हो गए हैं। धीरे-धीरे उन्होंने घर से बाहर निकलना भी कम कर दिया है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। माता-पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे हैं। ऐसे में बच्चों का इलाज बड़े अस्पतालों में कराना उनके लिए संभव नहीं है। मां माया कोरी और मंजू कोरी ने भावुक होकर बताया कि बच्चे पढ़ना चाहते हैं, लेकिन धुंधली दृष्टि के कारण उन्हें अक्षर भी स्पष्ट दिखाई नहीं देते।

    इस बीच एक और गंभीर समस्या सामने आई है कि बच्चों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन मशीन में मैच नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उनका सरकारी राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण परिवार को सरकारी राशन और योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

    इसके अलावा अब तक बच्चों का दिव्यांग प्रमाण पत्र भी नहीं बन सका है, जिससे वे पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी सहायता से वंचित हैं। यह स्थिति परिवार की मुश्किलों को और बढ़ा रही है।

    स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह मामला आनुवंशिक बीमारी का प्रतीत होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच कराकर उचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य टीम को गांव भेजने और आवश्यक सहायता देने की बात कही है। यह कहानी न केवल एक चिकित्सा चुनौती को दर्शाती है, बल्कि समाज और सिस्टम की जिम्मेदारी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

  • रजत मुकुट और त्रिशूल के साथ महाकाल का दिव्य स्वरूप, रविवार की भस्म आरती में उमड़ा सैलाब

    रजत मुकुट और त्रिशूल के साथ महाकाल का दिव्य स्वरूप, रविवार की भस्म आरती में उमड़ा सैलाब


    मध्यप्रदेश। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान भव्य और दिव्य दृश्य देखने को मिला, जब सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही संपूर्ण गर्भगृह भक्तिभाव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा।

    पट खुलने के बाद पंडे-पुजारियों ने सर्वप्रथम गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से उनका अभिषेक कर विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।

    इसके पश्चात भगवान महाकाल को भांग, त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर पारंपरिक रूप से भस्म रमाई गई, जो भस्म आरती की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।

    भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बनी आकर्षक मालाओं से उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर राजा स्वरूप दर्शन को पूर्ण किया गया।

    इस अद्भुत भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और उन्होंने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

    मान्यता के अनुसार, भस्म आरती के दौरान जब भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है, तो वे निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।

    महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई, जिससे यह आरती और भी विशेष और आध्यात्मिक महत्व की बन गई।

  • मंदिर पहुंची लेकिन दर्शन न कर सकी: उज्जैन में बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत

    मंदिर पहुंची लेकिन दर्शन न कर सकी: उज्जैन में बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर के बाहर शनिवार को एक अत्यंत भावुक कर देने वाली घटना सामने आई, जहां नासिक से आई 50 वर्षीय बुजुर्ग महिला की दर्शन की अंतिम इच्छा अधूरी रह गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    जानकारी के अनुसार, महिला सीमा अपने पति भेरू के साथ लंबे समय से बीमार चल रही थीं और अपनी अंतिम इच्छा के रूप में महाकालेश्वर भगवान के दर्शन करने उज्जैन पहुंची थीं। पति स्वयं भी अस्वस्थ थे, लेकिन इसके बावजूद वे पत्नी को ट्राइसाइकिल के सहारे मंदिर तक लेकर पहुंचे।

    दोनों पति-पत्नी किसी तरह संघर्ष करते हुए मंदिर के गेट तक पहुंचे, लेकिन जैसे ही वे प्रवेश द्वार के पास पहुंचे, महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। कुछ ही क्षणों में उनकी हालत गंभीर हो गई और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया।

    घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर समाजसेवी अनिल डागर तत्काल वहां पहुंचे और उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद करते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं संभालीं।

    परिवार की स्थिति को देखते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी समाजसेवी की मदद से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरी कराई गई। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और हर किसी की आंखें नम हो गईं। महाकाल मंदिर परिसर के बाहर घटी यह घटना श्रद्धा, आस्था और जीवन की नश्वरता का गहरा संदेश छोड़ गई।

  • उज्जैन सड़क हादसा: अंधेरे और निर्माण कार्य के बीच कार पलटी, एक युवक की जान गई

    उज्जैन सड़क हादसा: अंधेरे और निर्माण कार्य के बीच कार पलटी, एक युवक की जान गई


    मध्यप्रदेश। उज्जैन जिले के बदनावर बायपास पर रविवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें इंदौर से सांवरिया सेठ दर्शन के लिए जा रहे युवकों की खुशियों से भरी यात्रा मातम में बदल गई। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि 12वीं कक्षा के सात छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार, सभी युवक इंदौर से एक स्कॉर्पियो वाहन में सवार होकर सांवरिया सेठ के दर्शन और जन्मदिन मनाने के लिए रवाना हुए थे। यात्रा के दौरान यह हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ, जब सड़क पर घना अंधेरा था और सामने एक मृत गाय पड़ी होने के साथ-साथ सड़क निर्माण कार्य भी चल रहा था।

    इसी दौरान चालक ने वाहन को साइड में लेने की कोशिश की, लेकिन सड़क की स्थिति खराब होने और संतुलन बिगड़ने के कारण स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर चीख-पुकार मच गई।

    हादसे में 18 वर्षीय विशाल परिहार की मौत हो गई, जो इंदौर के एक कैफे में शेफ के रूप में काम करता था। वह अपने दोस्तों के साथ जन्मदिन और धार्मिक यात्रा के लिए निकला था, लेकिन यह सफर उसके जीवन का अंतिम सफर साबित हुआ। मृतक अपने परिवार में एक बहन और बड़े भाई के साथ जुड़ा हुआ था, जबकि उसके पिता पचोर के रहने वाले हैं।

    हादसे में घायल हुए अन्य युवकों की पहचान निलेश, पीयूष, चंदन, जीवन, ओम, आयुष और मिलन के रूप में हुई है। इनमें से निलेश और पीयूष की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

    यह हादसा एक बार फिर रात के समय खराब सड़क व्यवस्था और लापरवाही से हो रहे हादसों की गंभीरता को उजागर करता है।

  • जिंदगी की जंग जीती नन्ही परी: 8 दिन की बच्ची की मुंबई में सफल हार्ट सर्जरी

    जिंदगी की जंग जीती नन्ही परी: 8 दिन की बच्ची की मुंबई में सफल हार्ट सर्जरी


    मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से एक भावुक कर देने वाली और राहत भरी खबर सामने आई है, जहां महज 8 दिन की नवजात बच्ची ने जिंदगी की जंग जीतनी शुरू कर दी है। बच्ची के दिल में जन्मजात छेद होने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल उच्च स्तरीय इलाज की आवश्यकता बताई।

    परिजन बच्ची को जबलपुर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद पता चला कि स्थिति बेहद गंभीर है और तत्काल उन्नत कार्डियक सर्जरी की जरूरत है। इसके बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से बच्ची को एयर एम्बुलेंस के माध्यम से मुंबई स्थित नारायणा अस्पताल भेजा गया।

    इस पूरी प्रक्रिया को आरबीएसके योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया। करीब 1.60 लाख रुपये की लागत वाला यह इलाज पूरी तरह सरकारी सहायता से संभव हो पाया।

    डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के कुछ ही दिनों बाद बच्ची की तबीयत तेजी से बिगड़ रही थी। जब उसे जबलपुर लाया गया, तब ऑक्सीजन स्तर केवल 30 से 50 के बीच रह गया था, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। तत्काल उपचार शुरू कर उसे एचएनसीयू वार्ड में रखा गया।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की निगरानी में एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। बच्ची के पिता विक्रम दाहिया और अन्य परिजन भी उसके साथ मुंबई पहुंचे, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।

    मुंबई के नारायणा अस्पताल में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया प्रधान और कार्डियक सर्जन डॉ. प्रदीप कौशिक की टीम ने शनिवार को सफल सर्जरी की। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और सभी अंग—ब्रेन, किडनी और लीवर—सही तरीके से काम कर रहे हैं।

    सर्जरी के बाद बच्ची को एचएनसीयू में निगरानी में रखा गया है और उसमें लगातार सुधार देखा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर इसी तरह सुधार जारी रहा तो जल्द ही उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया जा सकता है।

    यह मामला न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता को दर्शाता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और समय पर लिए गए निर्णयों की अहमियत को भी उजागर करता है, जिससे एक मासूम की जान बचाई जा सकी।

  • दोस्ती बनी दुश्मनी: आपत्तिजनक हरकत के बाद गला दबाकर हत्या से हड़कंप

    दोस्ती बनी दुश्मनी: आपत्तिजनक हरकत के बाद गला दबाकर हत्या से हड़कंप


    मध्यप्रदेश। जबलपुर शहर के धनवंतरी नगर क्षेत्र में सामने आए सनसनीखेज हत्याकांड का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस मामले में 28 वर्षीय युवक सुरेंद्र सिंह उर्फ चिंगम की हत्या उसके ही खास दोस्त आयुष यादव (26) ने की थी, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    पुलिस पूछताछ में आरोपी आयुष यादव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसका कहना है कि वह पिछले लगभग दो वर्षों से मृतक सुरेंद्र के संपर्क में था, लेकिन इस दौरान सुरेंद्र अक्सर उसके साथ गलत तरीके से व्यवहार करता था और शराब के नशे में उसे परेशान करता था। आरोपी के अनुसार, कई बार मना करने के बावजूद वह लगातार उसे बुलाकर प्रताड़ित करता और मारपीट करता था।

    आयुष ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात भी सुरेंद्र ने उसे बुलाया और फिर कथित रूप से गलत हरकतें करने लगा। विरोध करने पर मारपीट हुई, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया। इसी तनाव और गुस्से में उसने हत्या करने का निर्णय ले लिया।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पहले गमछे से गला दबाकर सुरेंद्र की हत्या की और बाद में मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसके बाएं हाथ की नस चाकू से काट दी। शव शुक्रवार सुबह उसके कमरे में मिला था, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि घटना से पहले सुरेंद्र का स्थानीय लोगों से विवाद हुआ था। वह शराब के नशे में गाली-गलौज कर रहा था, जिसके बाद वह अपने कमरे की ओर गया। कुछ ही समय बाद वहां विवाद और गिरने की आवाजें सुनी गई थीं। बाद में जब लोग पहुंचे तो आयुष वहां मौजूद था और उसने खुद को उसका दोस्त बताते हुए कहा कि वह ज्यादा शराब पीकर गिर गया है।

    इसके बाद दोनों अन्य लोगों ने उसे कमरे तक पहुंचाया, लेकिन अगली सुबह उसकी मौत की जानकारी मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हुआ कि श्वासनली टूटने से गला घुटने के कारण उसकी मौत हुई है।

    एएसपी पल्लवी शुक्ला ने बताया कि मृतक सुरेंद्र के खिलाफ भी आधा दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वहीं आरोपी आयुष ने पूछताछ में दावा किया कि वह लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान था और लगातार प्रताड़ना से तंग आकर उसने यह कदम उठाया।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।