Category: Madhya Pradesh

  • दुबई प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआईएम कांग्रेस में निवेश और वैश्विक संवाद से मध्यप्रदेश की संभावनाएं रखेंगे

    दुबई प्रवास के दूसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एआईएम कांग्रेस में निवेश और वैश्विक संवाद से मध्यप्रदेश की संभावनाएं रखेंगे

    मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चार दिवसीय दुबई प्रवास का दूसरा दिन सोमवार, 7 सितंबर को मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री एआईएम कांग्रेस 2026 में भाग लेंगे और विभिन्न देशों के राजनीतिक एवं शासन स्तर के प्रतिनिधियों, निवेशकों तथा संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ संवाद करेंगे। दिनभर होने वाले कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक संभावनाओं और वैश्विक साझेदारी के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस 2026 के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। इसके साथ ही वे मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन करेंगे। एआईएम कांग्रेस के मंच पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश के अवसर और प्रदेश में उपलब्ध अनुकूल कारोबारी वातावरण को वैश्विक निवेश समुदाय के सामने रखा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव संयुक्त अरब अमीरात की संघीय सर्वोच्च परिषद के सदस्य और रास अल खैमाह के शासक महामहिम शेख सऊद बिन सक्र अल कासिमी से शिष्टाचार भेंट करेंगे। यह मुलाकात मध्यप्रदेश और यूएई के बीच निवेश तथा आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी।

    एआईएम कांग्रेस के लीडर्स सेशन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की मौजूदगी में संबोधित करेंगे। इस वैश्विक मंच पर वे मध्यप्रदेश की विकास यात्रा, राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं और उद्योगों के लिए तैयार किए जा रहे अनुकूल इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष रखेंगे। इसी अवसर पर इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव तातारस्तान गणराज्य, रूस के गवर्नर के साथ भी बैठक करेंगे। इस बैठक में मध्यप्रदेश और रूस के बीच औद्योगिक तथा निवेश सहयोग की संभावनाओं को लेकर संवाद होगा। इसके बाद दिन के प्रमुख कार्यक्रमों में ‘इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश, इंडिया’ निवेश सत्र आयोजित होगा।

    इस निवेश सत्र में मुख्यमंत्री वैश्विक निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों के सामने मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, प्रमुख क्षेत्रों, औद्योगिक अधोसंरचना और निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी देंगे। उनका संबोधन प्रदेश को एक विश्वसनीय और उभरते निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने पर केंद्रित रहेगा।

    इसके बाद यूएई के विदेश व्यापार राज्य मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयूदी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव संबोधित करेंगे। यह संवाद भारत, मध्यप्रदेश और यूएई के बीच व्यापार तथा निवेश संबंधों को व्यापक बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री महामहिम अब्दुल्ला बिन तौक अल मरी के साथ भी बैठक होगी। इसमें निवेश, व्यापार, पर्यटन और आर्थिक सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री विदेश व्यापार राज्य मंत्री और एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल जेयूदी से बैठक करेंगे।

    दुबई प्रवास के दूसरे दिन लूलू ग्रुप इंटरनेशनल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक यूसुफ अली एम.ए. के साथ मुख्यमंत्री की बैठक भी महत्वपूर्ण रहेगी। इस दौरान मध्यप्रदेश में निवेश और व्यापार विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। दिन के समापन पर दुबई के महावाणिज्य दूत द्वारा आयोजित रात्रिभोज में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहभागिता करेंगे।

  • रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

    रीवा के संजय गांधी अस्पताल में अर्चना की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए

    रीवा: के संजय गांधी अस्पताल में मरीज के इलाज और देखरेख को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। सतना निवासी अर्चना गुप्ता के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ दिनों बाद अर्चना की हालत अचानक बिगड़ गई और उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई।

    जानकारी के मुताबिक, अर्चना गुप्ता 30 अगस्त को स्कूटी हादसे के बाद संजय गांधी अस्पताल में भर्ती हुई थीं। परिजनों का दावा है कि भर्ती के समय वह बातचीत कर रही थीं और उनकी हालत सामान्य थी। परिवार के अनुसार, शुरुआती दिनों के बाद उनकी तबीयत अचानक खराब होने लगी। इसके बाद मरीज की स्थिति को लेकर परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज और देखरेख में कथित लापरवाही के कारण अर्चना के शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिवार का कहना है कि मरीज की हालत देखकर वे उसे बेहतर इलाज के लिए किसी दूसरे अस्पताल में ले जाना चाहते थे, लेकिन उनके अनुसार डॉक्टरों ने मरीज को रेफर करने की अनुमति नहीं दी।

    मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब परिजन मरीज की स्थिति का वीडियो बनाने के लिए आईसीयू पहुंचे। परिवार का आरोप है कि वहां मौजूद एक डॉक्टर ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। इसके बाद अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति बनी और परिजनों ने हंगामा करते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    फिलहाल अर्चना गुप्ता को संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू नंबर दो में भर्ती बताया जा रहा है। उनकी बेटी नैंसी गुप्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान हुई घटनाओं की पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    संजय गांधी अस्पताल में हाल के दिनों में सामने आए अन्य मामलों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पिछले दो सप्ताह के दौरान कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए थे और मामले में अस्पताल के डॉक्टरों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी।

    इसके बाद अस्पताल में एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने का मामला भी सामने आया था। इस घटना को लेकर परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसी अवधि में एक युवक ने आरोप लगाया था कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचने पर उसे कथित तौर पर एंटी रेबीज के बजाय एंटी वेनम इंजेक्शन लगा दिया गया।

    हालांकि अर्चना गुप्ता के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। प्रबंधन के अनुसार मरीज का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रख रही है।

    अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। ऐसे में अर्चना गुप्ता के मामले में जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और किसी की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

  • रीवा में दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल मामले पर किया प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग

    रीवा में दिग्विजय सिंह ने संजय गांधी अस्पताल मामले पर किया प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग


    मध्य प्रदेश:
    के रीवा में कांग्रेस की ओर से आयोजित धरने में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह शामिल हुए। यह प्रदर्शन संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के विरोध में आयोजित किया गया था। धरने के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।

    दिग्विजय सिंह देर रात रीवा पहुंचे और जयस्तंभ चौराहे पर चल रहे कांग्रेस के धरने में शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य मंत्री को इस मामले के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाएगा तो फिर जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अपने गृह जिले रीवा में भी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को बेहतर नहीं कर पा रहे हैं। उनके मुताबिक, जिस अस्पताल को क्षेत्र की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था माना जाता है, वहां लगातार गंभीर घटनाएं सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

    संजय गांधी अस्पताल को लेकर उन्होंने कई मुद्दे उठाए। दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में कथित तौर पर जीवित व्यक्ति के पोस्टमार्टम की कोशिश के पुराने मामले का उल्लेख करते हुए मौजूदा घटना से इसे जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक ओर ऐसी गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आते हैं और दूसरी ओर प्रसूता तथा नवजात की मौत जैसी घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं।

    दिग्विजय सिंह ने अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या स्वास्थ्य विभाग में हुई भर्तियों और प्रशिक्षण व्यवस्था में रही खामियों का असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने नर्सिंग भर्तियों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए सरकार से व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इस दौरान नर्सिंग क्षेत्र में कई विवाद सामने आए हैं। उनके अनुसार, भर्ती प्रक्रिया और स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा नहीं होने से गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि उनके लगाए आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब इस घटनाक्रम में सामने नहीं आया है।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि मरीजों और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इस बीच कल्पना मिश्रा के पिता भी रीवा के सिरमौर चौराहे पर अलग से धरने पर बैठे हैं। बेटी और नवजात की मौत के मामले में परिवार की ओर से जवाबदेही और न्याय की मांग की जा रही है। दो अलग-अलग स्थानों पर चल रहे धरनों के कारण यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    रीवा में सामने आए इस घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं, चिकित्सकीय निगरानी और नर्सिंग व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। अब मामले में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई और अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, मौत के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की स्पष्टता जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही सामने आएगी।

  • दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    मध्य प्रदेश: के दमोह जिले के हटा विकासखंड में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चंडी जी वार्ड स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र में सोमवार को बच्चों के लिए तैयार की गई आलू की सब्जी में कीड़े मिलने का मामला सामने आया। घटना के बाद बच्चों को दिया जाने वाला खाना वापस भेज दिया गया।

    बताया गया कि सोमवार दोपहर जब बच्चों के परिजन उन्हें लेकर आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचे, उसी दौरान भोजन की जांच करने पर सब्जी में कीड़े दिखाई दिए। बच्चों की माताओं ने तत्काल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की मांग की।

    बच्चे को केंद्र लेकर पहुंचीं दीपा प्रजापति ने बताया कि उनका बच्चा नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र आता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताते हुए कहा कि बच्चों को साफ और अच्छा खाना मिलना जरूरी है। सोमवार को आलू की सब्जी में इल्ली मिलने के बाद उन्होंने चिंता जताई कि यदि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन नहीं मिलेगा तो उनके स्वास्थ्य और विकास पर इसका क्या असर पड़ेगा।

    दीपा ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही बच्चों के अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन जाती है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    एक अन्य महिला अनीता प्रजापति ने भी भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत की। उनका कहना है कि इस तरह की समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी आंगनवाड़ी केंद्र में दिए जाने वाले भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आ चुकी है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।

    मामला सामने आने के बाद केंद्र में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन वापस भेज दिया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच किस स्तर पर की जाती है। छोटे बच्चों के लिए तैयार भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन मां लक्ष्मी स्वसहायता समूह की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। भोजन तैयार करने और केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में गुणवत्ता तथा स्वच्छता के मानकों का पालन होना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में कीड़े भोजन में किस स्तर पर पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    हटा के एसडीएम राकेश कुसरे ने मामले की जानकारी लेकर जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि उस समय वह बैठक में थे और पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही किस स्तर पर हुई।

    घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के लिए भोजन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अब परिजनों को प्रशासन की जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

  • ग्वालियर फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामला:डबरा में 20 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट का खुलासा, STF ने असम बंगाल तक जांच का दायरा बढ़ाया

    ग्वालियर फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामला:डबरा में 20 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट का खुलासा, STF ने असम बंगाल तक जांच का दायरा बढ़ाया

    ग्वालियर :जिले के डबरा में 20 बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय पासपोर्ट तैयार किए जाने का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF ने इस मामले में ऐसे नेटवर्क का पता लगाया है, जिसने कथित रूप से एक ही स्थानीय पते का इस्तेमाल कर कई पासपोर्ट तैयार करवाए। मामला सामने आने के बाद दस्तावेजों की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने आवेदन प्रक्रिया में सहयोग किया।

    जांच के अनुसार, इन 20 बांग्लादेशी नागरिकों को डबरा के एक बौद्ध विहार में रहने वाला और बौद्ध धर्म का अनुयायी बताया गया था। सभी पासपोर्ट में एक ही व्यक्ति को गवाह के रूप में दर्ज किए जाने से जांच का दायरा बढ़ गया है। STF ने इसी गवाह रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया है। उससे पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।

    मामले की जांच में स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेजों की भूमिका भी सामने आई है। बांग्लादेशी नागरिकों के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और दसवीं की अंकसूची समेत कई दस्तावेज तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय पहचान साबित करने और पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में किया गया।

    एक ही पते से 20 पासपोर्ट जारी होना जांच का अहम बिंदु बन गया है। पासपोर्ट आवेदन के दौरान आवेदक के पते, पहचान और अन्य विवरणों का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में एक ही स्थान से इतने लोगों के दस्तावेज तैयार होने और उनका सत्यापन पूरा होने की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।

    STF यह पता लगाने में जुटी है कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या इसके पीछे किसी व्यक्ति अथवा कर्मचारियों की मिलीभगत थी। जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है। फिलहाल इस पहलू पर जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित पासपोर्ट करीब पांच साल पहले तैयार किए गए थे। इनमें से कुछ पासपोर्ट का इस्तेमाल विदेश यात्राओं के लिए किए जाने की जानकारी मिली है। कुछ संदिग्धों के थाईलैंड, चीन और भूटान सहित अन्य देशों की यात्रा करने की बात सामने आई है। STF अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और यात्राओं के दौरान इन दस्तावेजों का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

    रियाल चौधरी की गिरफ्तारी के बाद 44 अन्य पासपोर्ट भी जांच के दायरे में आ गए हैं। इनमें से कई दस्तावेजों में समान पते और गवाह से जुड़े विवरण मिलने की बात सामने आई है। STF इन सभी रिकॉर्ड की जांच कर यह निर्धारित करने में जुटी है कि उनका संबंध भी इसी नेटवर्क से है या नहीं। एक अन्य संदिग्ध से पूछताछ भी की जा रही है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए STF ने करीब 10 टीमों को जांच में लगाया है। मध्य प्रदेश में चार टीमें स्थानीय स्तर पर नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटा रही हैं, जबकि छह टीमें असम, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। जांच का फोकस कथित बिचौलियों, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों और पासपोर्ट प्रक्रिया में मदद करने वाले लोगों पर है।

    इस मामले ने पहचान और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। STF की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क कितना व्यापक था, इसमें कितने लोग शामिल थे और 20 संदिग्ध पासपोर्ट के अलावा सामने आए 44 अन्य पासपोर्ट का वास्तविक स्वरूप क्या है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • जबलपुर एयरपोर्ट पर अचानक कैंसिल हुई इंडिगो की उड़ान, यात्रियों ने जताई नाराजगी; वैकल्पिक यात्रा का दिया गया भरोसा

    जबलपुर एयरपोर्ट पर अचानक कैंसिल हुई इंडिगो की उड़ान, यात्रियों ने जताई नाराजगी; वैकल्पिक यात्रा का दिया गया भरोसा

    मध्‍य प्रदेश : जबलपुर एयरपोर्ट पर सोमवार को इंडिगो की उड़ान तकनीकी खराबी के कारण रद्द होने से करीब 45 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हैदराबाद से जबलपुर पहुंचने के बाद इसी विमान को यात्रियों को लेकर इंदौर रवाना होना था, लेकिन तकनीकी समस्या सामने आने के बाद उड़ान संचालित नहीं की जा सकी।

    इंडिगो की फ्लाइट 6E7315 सोमवार सुबह हैदराबाद से जबलपुर पहुंची थी। इसके बाद विमान को जबलपुर से इंदौर के लिए उड़ान भरनी थी। इस चरण में करीब 45 यात्री इंदौर जाने के लिए विमान में सवार होने वाले थे। हालांकि तकनीकी खराबी के चलते उड़ान रद्द करने का फैसला लिया गया।

    यात्रियों को जब फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिली तो एयरपोर्ट पर नाराजगी की स्थिति बन गई। कई यात्रियों का कहना था कि उन्होंने इंदौर पहुंचने के लिए पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाई थी। कुछ यात्रियों को जरूरी काम के सिलसिले में इंदौर जाना था, इसलिए अचानक उड़ान रद्द होने से उनके कार्यक्रम प्रभावित हुए।

    फ्लाइट रद्द होने की सूचना के बाद यात्रियों ने एयरपोर्ट पर अपनी नाराजगी जाहिर की। यात्रियों के मुताबिक उन्हें उड़ान रद्द होने की जानकारी अचानक मिली, जिससे आगे की यात्रा को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए नए विकल्प तलाशने पड़े।

    स्थिति को देखते हुए एयरलाइन अधिकारियों ने यात्रियों से बातचीत की और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरे मार्गों और कनेक्टिंग फ्लाइट की संभावनाओं पर काम किया गया।

    एयरलाइन की ओर से कुछ यात्रियों को कनेक्टिंग रूट के जरिए इंदौर भेजने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई। इससे यात्रियों के लिए तत्काल यात्रा का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। हालांकि अचानक हुए बदलाव के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाओं में परिवर्तन करना पड़ा।

    कुछ यात्रियों ने अपनी यात्रा को आगे के लिए रीशेड्यूल कराया। वहीं कुछ यात्रियों ने टिकट कैंसिल कराने का विकल्प चुना। यात्रियों का कहना था कि उड़ान रद्द होने के कारण उनके समय और आगे की निर्धारित योजनाओं पर असर पड़ा।

    तकनीकी खराबी के कारण विमान संचालन रोकना विमानन सुरक्षा से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में विमान को उड़ाने के बजाय तकनीकी जांच और आवश्यक सुधार को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि यात्रियों के लिए अचानक उड़ान रद्द होना असुविधाजनक स्थिति पैदा करता है, खासकर तब जब उन्होंने आगे की यात्रा या जरूरी कार्यों के लिए समय निर्धारित किया हो।

    जबलपुर और इंदौर के बीच हवाई संपर्क यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दोनों शहरों के बीच कम समय में यात्रा की सुविधा मिलती है। ऐसे में उड़ान रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ा।

    फिलहाल प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक रूट, रीशेड्यूलिंग और टिकट रद्द कराने जैसे विकल्प उपलब्ध कराए गए। घटना के बाद यात्रियों की मुख्य चिंता अपने निर्धारित समय पर इंदौर पहुंचने की रही। तकनीकी समस्या के कारण उड़ान संचालन नहीं होने से सोमवार की यह यात्रा कई यात्रियों के लिए परेशानी भरी साबित हुई।

  • 14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    14 हजार से 30 हजार स्टाइपेंड की मांग को लेकर डॉक्टर सड़क पर उतरे, हमीदिया में पुलिस से हुई झड़प

    भोपाल: के हमीदिया अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन सोमवार को तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने की कोशिश कर रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान वाटर कैनन की चपेट में आने से एक इंटर्न डॉक्टर के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि वे इसे बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस संबंध में शासन की ओर से निर्णय लेने का मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ।

    इसी के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए मार्च निकालने का फैसला किया। डॉक्टरों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात कर अपनी समस्या रखना चाहते थे। हालांकि मार्च शुरू होने से पहले ही अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और बाहर निकलने वाले रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

    पुलिस की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ गया। कुछ इंटर्न डॉक्टरों ने हमीदिया अस्पताल के गेट और बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद वे अस्पताल परिसर से बाहर निकलकर फतेहगढ़ की मुख्य सड़क पर पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जताने लगे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर डॉक्टरों के बैठने से इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    अस्पताल परिसर में पुलिस की ओर से इमरजेंसी गेट को भी ब्लॉक किए जाने की बात सामने आई। मौके पर वाटर कैनन वाहन सहित पुलिस के अन्य वाहन तैनात रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान वाटर कैनन चलाया गया और एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पहले संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख चुके हैं और सभी नियमों का पालन किया गया, लेकिन जब उनकी मांग पर निर्णय नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने का फैसला लिया गया।

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं चाहिए। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला लिखित सरकारी आदेश के रूप में जारी किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें 14,337 रुपये नहीं, बल्कि न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड चाहिए।

    मोहित मिश्रा के मुताबिक उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की ओर से पहले कहा गया था कि यदि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया जाता है तो मध्य प्रदेश में भी उस दिशा में निर्णय लिया जाएगा। अब उत्तर प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने का आदेश जारी होने के बाद मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर भी अपने राज्य में इसी तरह के निर्णय की मांग कर रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब दो हजार शासकीय इंटर्न डॉक्टर हैं, जबकि प्रदेश में कुल इंटर्न डॉक्टरों की संख्या लगभग 3,600 बताई जा रही है। दूसरे मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों के भी आंदोलन में शामिल होने का दावा किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सागर के इंटर्न डॉक्टरों की बस को नादरा बस स्टैंड पर रोका गया।

    डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल हमीदिया अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के प्रदर्शन और पुलिस की तैनाती के कारण स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

  • MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित

    MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) की बंडा तहसील में जहरीली शराब (Spurious liquor) पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सख्त रुख अपनाया है. रविवार सुबह ही मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आबकारी और दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जबकि एक सीनियर अफसर को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।

    घटना बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में सामने आई है. शुरुआती प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय बीजेपी विधायक ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. कई अन्य लोगों के बीमार होने की भी जानकारी सामने आई है।


    3 अधिकारी सस्पेंड, 1 मुख्यालय अटैच

    मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने जाने पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, मामले में समान रूप से जिम्मेदार माने जाने पर उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. यानी जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कुल 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

    पुलिस विभाग ने भी इस प्रकरण में बंडा थाना प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुगरा चौकी प्रभारी एसआई श्री पूरन लाल लड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार, 6 सितंबर की सुबह ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि इस घटना के लिए दोषी किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।


    CM मोहन यादव ने कहा- दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई दिल्ली प्रवास के दौरान जैसे ही उन्हें सागर की घटना की जानकारी मिली, उन्होंने सागर जिले के प्रभारी मंत्री और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को राहत और बीमार लोगों के लिए समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


    मौके पर पहुंचा सीनियर अफसरों का दल

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे. अधिकारी दल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली. इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है, ताकि शराब पीने के बाद बीमार हुए लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।


    10 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि, विधायक ने बताया आंकड़ा 11

    सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में अवैध जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, स्थानीय बीजेपी विधायक वीरेंद्र लोधी ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. उन्होंने बताया कि बंडा सिविल अस्पताल से करीब 25 लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है।

    कलेक्टर ने बताया कि बुखार और सिरदर्द जैसी शिकायत वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. ऐसे तीन लोगों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (BMCH) भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है. उनके मुताबिक, इन मरीजों की हालत गंभीर नहीं है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका को लेकर कलेक्टर ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।


    ललितपुर से जहरीली शराब की सप्लाई का शक

    घटना की जांच में शराब के संभावित स्रोत को लेकर भी बड़ा खुलासा सामने आया है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हुई थी।

    कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, शुरुआती जांच में ललितपुर से इस तरह की जहरीली शराब की सप्लाई करने वाले एक गिरोह की जानकारी सामने आई है. चूंकि सागर का यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक है, इसलिए इस एंगल की भी जांच की जा रही है. हालांकि, शराब की वास्तविक सप्लाई चेन और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।


    प्रभावित इलाके की 7 शराब दुकानें सील

    घटना के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. प्रभावित क्षेत्र में सात शराब दुकानों को सील कर दिया गया है और शराब के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने अधिकारियों को अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।


    शराब पीने वालों से प्रशासन की अपील

    प्रशासन ने उन लोगों से तत्काल स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है, जिन्होंने हाल के दिनों में शराब का सेवन किया था और अब उन्हें उल्टी, सिरदर्द, बुखार या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो रही है. अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर मेडिकल जांच कराएं।


    कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की

    घटना को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब माफिया बेखौफ होकर लोगों की जान ले रहे हैं।

    वहीं, बंडा के पूर्व कांग्रेस विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि बंडा विकासखंड के कई गांवों में शनिवार रात लोगों ने शराब पी थी, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्होंने बताया कि कई लोगों को बंडा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य को सागर रेफर किया गया।


    गुजरात की घटना के बाद MP में जहरीली शराब से मौतों ने बढ़ाई चिंता

    मध्य प्रदेश में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत की घटना सामने आई थी। सागर की घटना के बाद अब प्रशासन की नजर अवैध शराब के नेटवर्क और इसके संभावित सप्लाई स्रोत पर है. फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शराब के सैंपल और जांच के आधार पर यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जहरीली शराब की सप्लाई में कौन-कौन लोग शामिल थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • अपने पति को ढूंढते हुए दुबई से सतना पहुंची महिला…. ससुराल वालों पर छुपाने का आरोप

    अपने पति को ढूंढते हुए दुबई से सतना पहुंची महिला…. ससुराल वालों पर छुपाने का आरोप


    सतना।
    सात समंदर पार दुबई (Dubai) में नौकरी करने वाली एक महिला अपने लापता पति (Missing Husband) की तलाश में सतना (Satna) की गलियों और पुलिस थानों के चक्कर काट रही है। पीड़िता अश्विंदर कौर (Ashwinder Kaur) का आरोप है कि उसका पति सुनील ठाकुर (Sunil Thakur) अचानक दुबई से भारत लौट आया और अब ससुराल पक्ष के लोग उसे सतना में छिपाकर रखे हुए हैं। पीड़िता का आरोप है कि उसे ससुराल वाले उसे मिलने नहीं दे रहे हैं। पीड़िता ने महिला थाने पहुंचकर पुलिस से पति को ढूंढने की गुहार लगाई है।


    लिव-इन से शादी तक का सफर

    अश्विंदर कौर के अनुसार, वह पिछले 23 वर्षों से दुबई में नौकरी कर रही हैं। वे पहले से तलाकशुदा थीं और यह बात सुनील व उसके पूरे परिवार को अच्छे से पता थी। सुनील उनसे उम्र में 12 साल छोटा है। दोनों नवंबर 2020 से दुबई में लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रह रहे थे। इसके बाद दोनों ने 23 फरवरी 2025 को जबलपुर आए और गुरुद्वारे में परिजनों व रिश्तेदारों की मौजूदगी में शादी कर ली।


    31 जुलाई को भारत आया था सुनील

    शादी के बाद भी दोनों दुबई में साथ रह रहे थे, लेकिन 31 जुलाई को सुनील अचानक बिना कुछ बताए भारत लौट आया। अश्विंदर ने बताया कि जब उन्होंने जबलपुर से लेकर सतना तक तलाश की, तो पता चला कि सुनील सतना में अपनी बहन के घर पर है और उसकी मां सुनीता रोरा भी वहीं मौजूद है। पीड़िता का सीधा आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग सुनील को जबरन भड़का रहे हैं और कह रहे हैं कि वह अब उसके साथ नहीं रहेगा।


    महिला का कहना है वह विवाहित है

    महिला का कहना है कि वह कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, फिर भी उसे पति से बात तक नहीं करने दी जा रही है। डीएसपी मनोज दीक्षित ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दुबई से आई महिला ने सतना के महिला थाने में आवेदन देकर अपने पति की तलाश की गुहार लगाई है।


    अभी नहीं दर्ज हुई FIR

    पुलिस के अनुसार, यह पति-पत्नी के आपसी विवाद का मामला है। महिला ने अभी कोई आपराधिक एफआईआर दर्ज नहीं कराई है, वह केवल अपने पति से मिलना और बात करना चाहती है। पुलिस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर तथ्यों की तस्दीक कर रही है।

  • MP: सागर-रीवा संभाग के 6 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 4 दिन सक्रिय रहेंगे मानसूनी सिस्टम

    MP: सागर-रीवा संभाग के 6 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 4 दिन सक्रिय रहेंगे मानसूनी सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो मौसम प्रणालियां बनी हुई हैं, जिनके प्रभाव से अगले चार दिन तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। सोमवार को सागर और रीवा संभाग के 6 जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं मालवा-निमाड़ क्षेत्र यानी इंदौर और उज्जैन संभाग में हल्की बारिश होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर और दमोह में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    कलियासोत बांध के फिर खोले गए गेट

    प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार को भी तेज बारिश हुई। भोपाल में कलियासोत बांध के दो गेट दोबारा खोलने पड़े। इससे एक दिन पहले शनिवार रात करीब 11 बजे बांध के चार गेट खोले गए थे। पानी छोड़े जाने के बाद रात 12 बजे इन्हें एक-एक करके बंद कर दिया गया था।

    उज्जैन में बारिश के चलते शनिवार देर रात महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक महाकाल द्वार गिर गया।

    शिवपुरी जिले के सिकराऊदा गांव के 21 वर्षीय राम रावत का शव गहलोनी के पास नदी किनारे मिला। वह शुक्रवार को रपटा पार करते समय तेज बहाव में बह गया था। शनिवार को SDERF की टीम ने पूरे दिन सर्च ऑपरेशन चलाया था, लेकिन युवक का पता नहीं चल पाया था। रविवार को नदी का जलस्तर घटने पर ग्रामीणों को उसका शव दिखाई दिया।

    खेतों में पानी भरा, सड़क पर पुल डूबा

    शाजापुर के अकोदिया में बारिश का सिलसिला कभी धीमा तो कभी तेज रहा। खेतों में पानी भरने से सोयाबीन की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

    मुरैना के कैलारस में भी बारिश के बाद खेरली-पचोखरा रोड पर स्थित गुराह नाले का पुल पानी में डूब गया। जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों ने नाला पार करने के लिए बड़ी कढ़ाही जैसे बर्तन का सहारा लिया। वे इसमें बैठकर रस्सी के सहारे नाले के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंच रहे हैं।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 23 जिलों में अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    32 जिलों में सामान्य से 2% से 23% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 1% तक कम दर्ज की गई है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा ऊपर आया। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों के लिहाज से बेहतर स्थिति में पहुंचा है और यहां बारिश का आंकड़ा 2% ज्यादा हो गया है।

    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।