Category: Madhya Pradesh

  • रतलाम में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन से टकराया ताजिया, करंट फैलने से 2 की मौत, कई लोग झुलसे

    रतलाम में मोहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन से टकराया ताजिया, करंट फैलने से 2 की मौत, कई लोग झुलसे

    मध्य प्रदेश: के रतलाम जिले में मोहर्रम के अवसर पर निकाला जा रहा ताजिया जुलूस गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। पिपलौदा थाना क्षेत्र के हतनारा गांव में ताजिया हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया, जिससे पूरे ताजिए में करंट फैल गया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग झुलस गए और घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब साढ़े दस बजे गांव में मोहर्रम का ताजिया जुलूस निकाला जा रहा था। बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आस्था के साथ जुलूस में शामिल थे। इसी दौरान ताजिया ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गया। संपर्क होते ही तेज करंट फैल गया और ताजिया उठा रहे लोगों सहित आसपास मौजूद कई श्रद्धालु इसकी चपेट में आ गए। अचानक हुई घटना से जुलूस में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को निजी वाहनों और उपलब्ध साधनों की मदद से रतलाम मेडिकल कॉलेज तथा जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान हतनारा निवासी राशिद खान (32) और सड्डू मोहम्मद हुसैन (40) को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। अन्य घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

    घायलों में कई लोगों को करंट लगने से गंभीर चोटें आई हैं, जबकि कुछ लोग भगदड़ और गिरने के कारण भी घायल हुए हैं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रयास किया। हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग घायलों की मदद करते और उन्हें अस्पताल पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ताजिया हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आने से यह हादसा हुआ। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके।

    धार्मिक आयोजन के दौरान हुई इस दुखद घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की है और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। प्रशासन ने भी धार्मिक आयोजनों और जुलूसों के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

  • निर्मला सप्रे दल-बदल मामले में कांग्रेस को झटका, विधायकी रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की..

    निर्मला सप्रे दल-बदल मामले में कांग्रेस को झटका, विधायकी रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की..

    मध्य प्रदेश: की राजनीति में चर्चित विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में कांग्रेस को बड़ा कानूनी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसे पर्याप्त और आधिकारिक साक्ष्य नहीं हैं, जिनके आधार पर यह माना जा सके कि विधायक ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है या उन्हें कांग्रेस से निष्कासित किया गया है। ऐसे में इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

    यह मामला कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देने की मांग की थी कि बीना विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता दल-बदल कानून के तहत समाप्त की जाए। उनका तर्क था कि विधायक ने लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया और पार्टी से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया, जिससे उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह प्रमाणित हो कि निर्मला सप्रे को आधिकारिक रूप से कांग्रेस से निष्कासित किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण करने का भी कोई प्रमाण रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। केवल आरोपों या सार्वजनिक गतिविधियों के आधार पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश देना उचित नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि दल-बदल से संबंधित कार्यवाही पहले से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने का अधिकार संविधान और कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष को प्राप्त है। इसलिए न्यायालय इस स्तर पर विधानसभा अध्यक्ष को किसी निश्चित समय सीमा में निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अदालत ने माना कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की कोई ऐसी असाधारण परिस्थिति नहीं है, जो न्यायिक आदेश की आवश्यकता पैदा करे।

    पूरा विवाद वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आया था। कांग्रेस का आरोप था कि निर्मला सप्रे ने भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार किया और पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मई 2024 में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। जब इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ तो मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मौजूद तस्वीरें एवं वीडियो विधायक के भाजपा से जुड़ाव को दर्शाते हैं। हालांकि अदालत ने माना कि इस प्रकार की सामग्री अपने आप में औपचारिक सदस्यता का पर्याप्त कानूनी प्रमाण नहीं मानी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दल-बदल से जुड़े मामलों में निर्णय तथ्यों और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा।

    निर्मला सप्रे ने वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थीं। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार महेश राय को 6,155 मतों के अंतर से पराजित किया था। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल उनकी विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी, जबकि दल-बदल से जुड़ी आगे की प्रक्रिया विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष जारी रहेगी।

  • ग्वालियर की बेटी कृष्णा शर्मा ने बढ़ाया मध्य प्रदेश का गौरव, भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम में चयन के साथ यूनाइटेड किंगडम दौरे का मिला मौका

    ग्वालियर की बेटी कृष्णा शर्मा ने बढ़ाया मध्य प्रदेश का गौरव, भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम में चयन के साथ यूनाइटेड किंगडम दौरे का मिला मौका

    मध्य प्रदेश: के ग्वालियर की युवा हॉकी खिलाड़ी कृष्णा शर्मा ने अपनी प्रतिभा और लगातार मेहनत के दम पर भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम में जगह बनाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उनका चयन आगामी यूनाइटेड किंगडम दौरे के लिए घोषित भारतीय टीम में हुआ है। अब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्कॉटलैंड और इंग्लैंड में आयोजित होने वाले टेस्ट मुकाबलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। इस उपलब्धि से ग्वालियर ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश में खुशी का माहौल है।

    भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम पांच जुलाई से शुरू होने वाले यूनाइटेड किंगडम दौरे पर स्कॉटलैंड, इंग्लैंड, अमेरिका और बेल्जियम की जूनियर टीमों के खिलाफ कई टेस्ट मैच खेलेगी। इस दौरे को युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। कृष्णा शर्मा भी इसी टीम का हिस्सा बनकर अपने प्रदर्शन से भारतीय हॉकी में नई पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं।

    कृष्णा शर्मा की सफलता का सफर आसान नहीं रहा। शुरुआती दिनों में उन्हें सामाजिक सोच और कई तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हॉकी खेलते समय स्कर्ट पहनने को लेकर लोगों ने ताने भी दिए, लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपना पूरा ध्यान खेल और प्रदर्शन पर केंद्रित रखा। आज वही संघर्ष उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है और वह भारतीय टीम की जर्सी पहनने जा रही हैं।

    साधारण परिवार से आने वाली कृष्णा को उनके परिवार का हर कदम पर पूरा सहयोग मिला। उनके पिता सुनील शर्मा ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी के सपनों को कभी रुकने नहीं दिया। परिवार के प्रोत्साहन और अपनी मेहनत के बल पर कृष्णा ने लगातार आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सपना भी साकार कर लिया है।

    कृष्णा ने वर्ष 2019 में मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी से अपने खेल करियर की शुरुआत की थी। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास के दम पर उन्होंने कम समय में शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2023 में उन्हें भारतीय अंडर-18 टीम के साथ नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित टेस्ट सीरीज में खेलने का अवसर मिला। इस अनुभव ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया तथा आगे बढ़ने की नई दिशा दी।

    पिछले कुछ वर्षों में कृष्णा ने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। सब जूनियर राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के साथ दो बार प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गईं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, चरनजीत राय नेहरू गर्ल्स हॉकी टूर्नामेंट, हॉकी इंडिया जूनियर वेस्ट ज़ोन चैंपियनशिप और इंटर ज़ोन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। कई प्रतियोगिताओं में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान भी मिला, जिसने उनके खेल करियर को नई ऊंचाई दी।

    भारतीय अंडर-21 महिला हॉकी टीम में चयन के बाद ग्वालियर और पूरे मध्य प्रदेश में खुशी की लहर है। खेल जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि कृष्णा आने वाले वर्षों में सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में भी अपनी जगह बना सकती हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर प्रयास के बल पर सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। कृष्णा शर्मा की उपलब्धि प्रदेश की हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो खेल के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करना चाहती हैं।

  • मध्य प्रदेश में आज रहेगा सियासी और प्रशासनिक हलचल का दिन, सीएम के कार्यक्रम, बीजेपी की ऑनलाइन परीक्षा और राज्यपाल के कार्यकाल पर रहेगी नजर

    मध्य प्रदेश में आज रहेगा सियासी और प्रशासनिक हलचल का दिन, सीएम के कार्यक्रम, बीजेपी की ऑनलाइन परीक्षा और राज्यपाल के कार्यकाल पर रहेगी नजर


    मध्य प्रदेश:  में शुक्रवार का दिन राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिनभर राजधानी भोपाल में आयोजित विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वहीं लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह, भारतीय जनता पार्टी के डिजिटल प्रशिक्षण अभियान, राज्यपाल के कार्यकाल को लेकर संभावित चर्चाओं और प्रशासनिक समीक्षा बैठकों से जुड़े मुद्दों पर भी पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिन दोपहर से शुरू होने वाले कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से व्यस्त रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह दोपहर 12 बजे रविंद्र भवन पहुंचकर लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में भाग लेंगे। शाम पांच बजे आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी रहेगी, जबकि शाम छह बजे मानस भवन में आयोजित एक स्थानीय कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री सहभागिता करेंगे।

    आपातकाल दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में लोकतंत्र सेनानियों और मीसाबंदी परिवारों के सम्मान के लिए विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में योगदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

    भारतीय जनता पार्टी भी शुक्रवार को अपने संगठनात्मक अभियान के तहत बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगी। बूथ और मंडल स्तर के लगभग सात लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयोजित की जाएगी। इस प्रशिक्षण में पार्टी की विचारधारा, संगठन का विकास, केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएं और नेतृत्व से जुड़े विषय शामिल किए गए हैं। पार्टी का लक्ष्य छह जुलाई तक पूरे प्रदेश में डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करना है।

    प्रदेश की राजनीति में राज्यपाल के पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वर्तमान राज्यपाल मंगूभाई पटेल का कार्यकाल छह जुलाई को पूरा होने जा रहा है। करीब डेढ़ दशक बाद ऐसा अवसर आया है जब मध्य प्रदेश का कोई राज्यपाल अपना निर्धारित पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा करेगा। अब यह निर्णय राष्ट्रपति स्तर पर लिया जाएगा कि मंगूभाई पटेल को दूसरा कार्यकाल दिया जाएगा या राज्य को नया राज्यपाल मिलेगा। इस विषय पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

    इधर प्रशासनिक स्तर पर भी हाल ही में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर सम्मेलन की चर्चा जारी है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान कई जिलों के प्रदर्शन पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य संकेतकों में अपेक्षित सुधार नहीं होने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी पर अधिकारियों को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    कुल मिलाकर शुक्रवार को मध्य प्रदेश में शासन, प्रशासन और राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आने वाले हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों, प्रशासनिक समीक्षा और संवैधानिक पदों से जुड़े संभावित निर्णयों तक, पूरे दिन प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियां सुर्खियों में बनी रहने की संभावना है।

  • 26 जून महाकाल भस्म आरती में त्रिपुंड और चंद्र से सजे भगवान महाकाल, दिव्य श्रृंगार और वैदिक अनुष्ठानों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    26 जून महाकाल भस्म आरती में त्रिपुंड और चंद्र से सजे भगवान महाकाल, दिव्य श्रृंगार और वैदिक अनुष्ठानों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर प्रातःकालीन भस्म आरती श्रद्धा, परंपरा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। पूरे मंदिर परिसर में शिवभक्ति का वातावरण बना रहा और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा।

    मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके उपरांत भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों का लेप अर्पित किया गया तथा आभूषणों और पुष्पों से उनका आकर्षक श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती की प्रक्रिया के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को परंपरानुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विविध पुष्पमालाएं अर्पित कर अलंकृत किया गया। त्रिपुंड और चंद्र से सुसज्जित भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    सनातन परंपरा में महाकाल की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भस्म आरती को देखने और भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने को श्रद्धालु अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।

    आरती के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा के अनुसार अनेक श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हुए सुख, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते दिखाई दिए। पूरे मंदिर परिसर में ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष लगातार गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह शिवमय बना रहा।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। प्रतिदिन होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, प्राचीन धार्मिक विधियों और सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाता है। शुक्रवार को संपन्न हुई विशेष भस्म आरती में भी श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक संतोष का अनुभव कराया।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ट्रैफिक सुधार के लिए वन-वे और पिक-ड्रॉप सिस्टम अनिवार्य

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: ट्रैफिक सुधार के लिए वन-वे और पिक-ड्रॉप सिस्टम अनिवार्य


    जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर शहर में बढ़ती ट्रैफिक अव्यवस्था और अदालत परिसरों के आसपास हो रही अवैध पार्किंग को गंभीर समस्या मानते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से अंतरिम यातायात व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रस्तावित मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू की जाएं।

    ‘पिक एंड ड्रॉप’ सिस्टम अपनाने पर जोर

    हाईकोर्ट ने अदालत आने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘पिक एंड ड्रॉप’ व्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, एडवोकेट जनरल राज्य सरकार के सभी विभागों के प्रमुखों को एडवाइजरी जारी करेंगे, ताकि कोर्ट आने वाले अधिकारी अपनी गाड़ियों को लंबे समय तक पार्क करने के बजाय ‘पिक एंड ड्रॉप’ प्रणाली का उपयोग करें।

    इसी तरह, केंद्र सरकार के अधिकारियों के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेंगे। न्यायालय का मानना है कि इससे अदालतों के आसपास वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में राहत मिलेगी।

    वकीलों से कार-पूलिंग की अपील

    कोर्ट ने अधिवक्ताओं से भी सहयोग की अपेक्षा जताई है। जिन वकीलों के पास निजी ड्राइवर उपलब्ध हैं, उन्हें ‘पिक एंड ड्रॉप’ सिस्टम अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही पार्किंग पर दबाव कम करने के लिए कार-पूलिंग को प्रोत्साहित करने की अपील की गई है।

    सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रहेगा ‘वन-वे’

    यातायात को सुचारू बनाने के लिए हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि कलेक्टर ऑफिस क्रॉसिंग से तहसील क्रॉसिंग तक का मार्ग सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वन-वे घोषित किया जाए। इस दौरान वाहनों की आवाजाही एक ही दिशा में नियंत्रित की जाएगी, जिससे सड़क पर जाम की स्थिति कम हो सके।

    इसके अलावा हाईकोर्ट और जिला अदालत के सामने ट्रैफिक नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    फ्लाईओवर निर्माण पर भी नजर

    याचिका में अदालत के सामने से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर फ्लाईओवर निर्माण की मांग भी उठाई गई है। इस संबंध में पहले से दो याचिकाएं न्यायालय में लंबित हैं। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है।

    शहरवासियों को मिल सकती है राहत

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘पिक एंड ड्रॉप’, कार-पूलिंग और ‘वन-वे’ जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी ढंग से पालन कराया गया, तो अदालत क्षेत्र और आसपास की सड़कों पर लगने वाले जाम में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा इन निर्देशों के क्रियान्वयन पर टिकी हैं।
  • जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल

    जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल


    जबलपुर। जबलपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ की गई कार्रवाई से पहले का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर आरोपी महिला को कार्रवाई के दौरान क्या कहना है और कैसे व्यवहार करना है इसकी जानकारी देता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने एक स्थान पर दबिश दी थी। कार्रवाई में हवलदार सुग्रीव तिवारी, एफआरवी दल, महिला आरक्षक और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने मौके से एक महिला को अवैध शराब के साथ पकड़ा था। हालांकि विवाद का केंद्र कार्रवाई नहीं बल्कि उससे पहले का कथित घटनाक्रम बन गया है।

    वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक आरक्षक कार्रवाई से पहले आरोपी महिला को पूरी स्थिति समझा रहा है। वीडियो में महिला को यह बताया जाता दिखाई दे रहा है कि कार्रवाई के दौरान उसे क्या कहना है और किस तरह प्रतिक्रिया देनी है। आरोप है कि महिला को सहानुभूति प्राप्त करने और खुद को मजबूर दिखाने के लिए भी निर्देश दिए गए। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिख रही बातचीत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। वहीं कुछ लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

    मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था की विश्वसनीयता सीधे तौर पर जनता के भरोसे से जुड़ी होती है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई है और पुलिस विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। तब तक यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।

  • सुपरफास्ट ट्रेन के सामने कूदी किशोरी, युवक की बहादुरी ने बचाई जिंदगी

    सुपरफास्ट ट्रेन के सामने कूदी किशोरी, युवक की बहादुरी ने बचाई जिंदगी

    ग्वालियर। ग्वालियर में बुधवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने कुछ क्षणों के लिए लोगों की सांसें थाम दीं। शहर के एजी ऑफिस पुल के नीचे स्थित रेलवे ट्रैक पर एक किशोरी ने कथित रूप से आत्महत्या का प्रयास किया, लेकिन एक युवक की सतर्कता और साहस के कारण उसकी जान बच गई। इस घटना ने जहां लोगों को भावुक कर दिया, वहीं युवक की बहादुरी की हर तरफ सराहना हो रही है।

    जानकारी के अनुसार दोपहर के समय एक किशोरी अचानक रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई। उसी दौरान ट्रैक पर एक सुपरफास्ट ट्रेन तेज गति से आगे बढ़ रही थी। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार ट्रेन और किशोरी के बीच केवल कुछ सेकंड का ही फासला बचा था। हालात ऐसे थे कि किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता था और किशोरी की जान जा सकती थी।

    इसी बीच वहां मौजूद प्रहलाद सिंह तोमर नामक युवक की नजर किशोरी पर पड़ी। उन्होंने तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना अपनी जान की परवाह किए ट्रैक की ओर दौड़ पड़े। युवक ने तेजी दिखाते हुए किशोरी को पकड़कर पटरी से दूर खींच लिया। यह सब कुछ इतने कम समय में हुआ कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए।

    युवक की इस बहादुरी के बाद आसपास खड़े अन्य लोग भी मदद के लिए आगे आए। सभी ने मिलकर किशोरी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कुछ ही क्षण बाद सुपरफास्ट ट्रेन वहां से गुजर गई। यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो परिणाम बेहद दुखद हो सकते थे।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किशोरी को अपने संरक्षण में लिया। प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि किशोरी किसी पारिवारिक कारण से परेशान थी। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि वह अपने माता-पिता से किसी बात को लेकर नाराज थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशोरी के परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनसे बातचीत की जा रही है। साथ ही यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में किशोरी ने इतना बड़ा कदम उठाने की कोशिश की। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा प्रहलाद सिंह तोमर की बहादुरी की हो रही है। उनकी सूझबूझ और साहस ने एक परिवार को गहरे दुख में डूबने से बचा लिया। स्थानीय लोगों ने युवक को सच्चा हीरो बताते हुए सम्मानित किए जाने की मांग भी की है।

    यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि संकट की घड़ी में दिखाई गई तत्परता और मानवता किसी की जिंदगी बचा सकती है। साथ ही मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए समय रहते संवाद और सहयोग कितना जरूरी है, यह भी इस घटना से स्पष्ट होता है।

  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    इंदौर। इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की बहुमूल्य जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामला केवल जमीन पर कब्जे या पुलिसकर्मियों पर हमले तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इसमें सबूत गायब होने, कथित आर्थिक लेनदेन और आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार विवादित जमीन को लेकर हुए संघर्ष के दौरान बीट पर तैनात पुलिस जवानों पर हमला किया गया था। घटना स्थल के पास स्थित एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जांच के लिए सीसीटीवी का डीवीआर अपने कब्जे में लिया था, लेकिन बाद में वही डीवीआर गायब हो गया। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपियों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई। खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर ने कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली और उनकी भूमिका की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। जांच के आदेश के बाद अब पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना के वीडियो उपलब्ध थे और आरोपियों की पहचान भी कथित रूप से हो चुकी थी, तब एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई। इस निर्णय ने पुलिस की मंशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि यदि पहचान स्पष्ट थी तो नामजद मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।

    सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि विवाद से एक दिन पहले मोहसिन नामक व्यक्ति द्वारा थाने में 10 लाख रुपये पहुंचाए गए थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। यह भी आरोप है कि इसी प्रभाव के चलते संबंधित व्यक्ति ने थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार किया और उसका वीडियो भी मौजूद है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया।

    मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है कि उज्जैन का एक व्यक्ति जो इस विवाद से जुड़ा हुआ था, उसे पुलिस वाहन के माध्यम से वहां से रवाना किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।

    घटना में घायल हुए पुलिस जवानों पर मीडिया से दूरी बनाए रखने का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल हमले का मामला नहीं बल्कि पूरे घटनाक्रम को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा।

    फिलहाल विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।