Category: Madhya Pradesh

  • सेवानिवृत्ति के बाद ओमप्रकाश श्रीवास्तव को मिली नई जिम्मेदारी, राज्य आनंद संस्थान की कमान सौंपी गई

    सेवानिवृत्ति के बाद ओमप्रकाश श्रीवास्तव को मिली नई जिम्मेदारी, राज्य आनंद संस्थान की कमान सौंपी गई


    भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान का मुख्य कार्यपालन अधिकारी यानी CEO बनाया गया है। इस नई जिम्मेदारी के साथ अब वे संस्थान के कामकाज और विभिन्न गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी नियुक्ति को राज्य आनंद संस्थान की गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि नियुक्ति से संबंधित विस्तृत आदेश और कार्यकाल की जानकारी उपलब्ध होने पर इस फैसले से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति भी स्पष्ट होगी।

    राज्य आनंद संस्थान मध्यप्रदेश में आनंद और खुशहाली से जुड़े विचारों तथा गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम करता है। संस्थान की गतिविधियों का केंद्र लोगों के जीवन में सकारात्मकता को प्रोत्साहित करना और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयास करना है। ऐसे में संस्थान के प्रमुख पद पर नई नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। CEO की जिम्मेदारी संभालने के बाद ओमप्रकाश श्रीवास्तव संस्थान की योजनाओं और गतिविधियों के संचालन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। उनके नेतृत्व में संस्थान के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और व्यवस्थाओं के संचालन पर ध्यान रहेगा।

    राज्य आनंद संस्थान की अवधारणा केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य समाज में आनंद और संतुष्टि के महत्व को समझने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना भी है। आज की व्यस्त जीवनशैली में तनाव और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियों के बीच जीवन में संतुलन और सकारात्मक सोच को महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में संस्थान की गतिविधियां लोगों को अपने जीवन में बेहतर दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में भूमिका निभा सकती हैं। संस्थान की योजनाओं को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए प्रशासनिक समन्वय और नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण होती है।

    ओमप्रकाश श्रीवास्तव भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में कार्य करने का अनुभव सरकारी व्यवस्थाओं और योजनाओं के संचालन की समझ विकसित करने में सहायक हो सकता है। राज्य आनंद संस्थान के CEO के रूप में उनकी भूमिका संस्थान के दैनिक कामकाज को संचालित करने और निर्धारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने से जुड़ी होगी। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनसे संस्थान के कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने की अपेक्षा रहेगी। हालांकि उनके आगामी कार्यक्रमों और प्राथमिकताओं के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संस्थान की गतिविधियों में किन क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

    इस नियुक्ति के बाद राज्य आनंद संस्थान के कामकाज और आगामी योजनाओं पर नजर रहेगी। संस्थान के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करना और उनके उद्देश्यों को लोगों तक पहुंचाना नई जिम्मेदारी का अहम हिस्सा होगा। ओमप्रकाश श्रीवास्तव के नेतृत्व में संस्थान की गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनकी नियुक्ति मध्यप्रदेश के प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है।

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, सूखे से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के निर्देश

    मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, सूखे से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में कम बारिश के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है। प्रदेश के 12 जिलों में बारिश की स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार ने प्रभावित किसानों को विशेष सहायता देने की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में किसानों के हितों के साथ सिंचाई परियोजनाओं और सरकारी विभागों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई। मंत्री चैतन्य कश्यप ने बैठक में लिए गए फैसलों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को राहत देने और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने के संबंध में भी विचार किया जा सकता है।

    बारिश की कमी से प्रभावित जिलों में अलीराजपुर की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है। यहां सामान्य से करीब 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा इंदौर उज्जैन बैतूल हरदा नर्मदापुरम रतलाम झाबुआ धार शाजापुर और पांढुर्ना सहित अन्य क्षेत्रों में भी बारिश के आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जा रहा है। कम वर्षा का असर खेती और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि प्रभावित जिलों के किसानों को किस तरह की सहायता मिलेगी और किन क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा इसका अंतिम फैसला संबंधित आकलन के बाद स्पष्ट होगा।

    कैबिनेट बैठक में आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ यानी EOW के लिए 345 करोड़ रुपये की स्वीकृति की जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही कैंपा फंड के तहत 2050 करोड़ रुपये के प्लान को मंजूरी दी गई है। नर्मदा घाटी विकास विभाग की वर्ष 2019-20 से संचालित चार योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया गया। इन योजनाओं के अंतर्गत कुल 3378 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। ये परियोजनाएं छिंदवाड़ा मुरैना सिवनी और सागर जिलों से संबंधित हैं। सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से कृषि क्षेत्र को पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    सामाजिक न्याय विभाग की सात योजनाओं के लिए भी 351 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बैठक में नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार 201 प्रकरणों में 392 अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकारी व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। मंत्रियों को अपने अपने क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी करने के लिए भी कहा गया है।

    मध्यप्रदेश स्थापना दिवस को लेकर भी कैबिनेट में तैयारियों पर चर्चा हुई। एक नवंबर से तीन दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और मंत्रियों को कार्यक्रमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दीपावली के अवसर पर मिट्टी से बने उत्पादों और माटी कला को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने सेवा संकल्प अभियान के तहत किए गए कार्यों और किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा भी की। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में राहत की घोषणा कब होती है और सहायता का लाभ किस तरह पहुंचाया जाता है।

  • शिवपुरी के बदरवास में 9 रुपये के विवाद ने लिया हिंसक रूप, गुमटी संचालक के सिर पर डंडे से हमला

    शिवपुरी के बदरवास में 9 रुपये के विवाद ने लिया हिंसक रूप, गुमटी संचालक के सिर पर डंडे से हमला

    मध्य प्रदेश। शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के बदरवास थाना क्षेत्र में महज 9 रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि बकाया रकम मांगने पर एक युवक ने गुमटी संचालक के सिर और दाहिने कंधे पर डंडे से हमला कर दिया। घटना में दुकानदार घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    घटना 25 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे की बताई गई है। बदरवास में थाने के पीछे रहने वाले राजेश रजक के अनुसार, वह रात में कलारी के पास स्थित अपनी गुटखा दुकान पर बैठा था। इसी दौरान बदरवास का रहने वाला आनंद यादव उसकी दुकान पर पहुंचा और चार सिगरेट मांगीं।

    राजेश के मुताबिक, चार सिगरेट की कुल कीमत 24 रुपये थी। आनंद यादव ने भुगतान के लिए फोनपे का इस्तेमाल किया, लेकिन उसके खाते से दुकानदार को केवल 15 रुपये ही मिले। राजेश ने जब शेष 9 रुपये मांगे, तो आरोपी ने बाकी रकम देने से इनकार कर दिया। इसी भुगतान को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    शिकायत के अनुसार, बकाया राशि मांगने पर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आनंद यादव ने राजेश रजक के साथ गाली-गलौज की। जब राजेश ने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने डंडे से उस पर हमला कर दिया। हमले में राजेश के सिर और दाहिने कंधे पर चोटें आईं।

    घटना के बाद घायल दुकानदार को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसके सिर और कंधे पर डंडे से वार किया गया था। हालांकि, घायल की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और चोटों की गंभीरता को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। अब पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान विवाद की परिस्थितियों, भुगतान को लेकर हुए घटनाक्रम और हमले के आरोपों की पड़ताल की जाएगी।

    बदरवास क्षेत्र में सामने आया यह मामला एक छोटी रकम के लेनदेन से शुरू हुए विवाद के हिंसक रूप लेने से जुड़ा है। दुकानदार के बयान के अनुसार, विवाद की शुरुआत चार सिगरेट के 24 रुपये के भुगतान से हुई थी। इसमें से 15 रुपये मिलने के बाद जब उसने बाकी 9 रुपये मांगे, तो मामला बढ़ गया।

    फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है। घटना में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी। आरोपी के पक्ष और मामले में आगे की कार्रवाई से संबंधित कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।

  • शिवपुरी में बंद मकान से पुराना मीटर हटाने पर विवाद, वकील और रहवासियों के विरोध के बाद लौटे बिजलीकर्मी

    शिवपुरी में बंद मकान से पुराना मीटर हटाने पर विवाद, वकील और रहवासियों के विरोध के बाद लौटे बिजलीकर्मी


    मध्य प्रदेश।
    के शिवपुरी शहर की तारकेश्वरी कॉलोनी में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। बिजली कंपनी के ठेकेदार के कर्मचारी एक बंद मकान में पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचे थे। इस दौरान मकान मालिक की गैरमौजूदगी में पुराना मीटर निकाल दिया गया। जानकारी मिलने पर मकान मालिक एडवोकेट कैलाश जैन मौके पर पहुंचे और इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इसके बाद कॉलोनी के अन्य रहवासी भी एकत्रित हो गए और कर्मचारियों से सवाल करने लगे। विरोध बढ़ने पर कर्मचारियों को पुराना मीटर दोबारा लगाकर लौटना पड़ा।

    यह घटना सोमवार दोपहर की बताई गई है। बिजली कंपनी के ठेकेदार की टीम तारकेश्वरी कॉलोनी में पुराने बिजली मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही थी। इसी दौरान कर्मचारी एडवोकेट कैलाश जैन के ताला लगे मकान पर पहुंचे। मकान मालिक उस समय वहां मौजूद नहीं थे। कर्मचारियों ने पुराना मीटर निकाल दिया, लेकिन स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही विवाद खड़ा हो गया।

    कैलाश जैन को जब अपने मकान का मीटर हटाए जाने की जानकारी मिली, तो वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया कि मकान बंद होने और मालिक की गैरमौजूदगी में मीटर हटाने की कार्रवाई किस अनुमति के आधार पर की गई। उनकी आपत्ति के बाद वहां बहस शुरू हो गई। कुछ ही देर में आसपास रहने वाले लोग भी मौके पर पहुंच गए और बिजली कंपनी के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे।

    रहवासियों का कहना था कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ता को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। यदि किसी मकान में कोई मौजूद नहीं है, तो वहां मीटर बदलने की प्रक्रिया किस तरह पूरी की जाएगी, इस बारे में स्पष्टता जरूरी है। लोगों ने मांग की कि संबंधित ठेकेदार और बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करें। उनका कहना था कि उपभोक्ताओं की आपत्तियों को सुने बिना ऐसी कार्रवाई करने से विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

    मौके पर काफी देर तक बहस और विरोध जारी रहा। हालांकि, संबंधित अधिकारियों के मौके पर पहुंचने की मांग के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी वहां नहीं आया। स्थिति को देखते हुए कर्मचारियों ने स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। उन्होंने पुराने मीटर को फिर से लगा दिया और वहां से रवाना हो गए। इस तरह जिस मकान में नया स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, वहां विरोध के बाद पुराना मीटर ही बहाल करना पड़ा।

    शहर में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। स्थानीय रहवासियों की चिंता है कि मीटर बदलने के दौरान उन्हें पर्याप्त जानकारी दी जाए और उनकी आपत्तियों का समाधान किया जाए। प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट संवाद नहीं होने पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच असमंजस पैदा होने की आशंका बनी रहती है।

    इस मामले में बिजली कंपनी के महाप्रबंधक सुमित अग्रवाल ने बताया कि वरिष्ठ कार्यालय से सभी उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मीटर लगाने के दौरान उपभोक्ता की सहमति लेना जरूरी है। यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर को लेकर परेशानी है, तो उसकी संतुष्टि के लिए स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर भी लगाया जा सकता है। जो उपभोक्ता सहमत नहीं हैं, उनके मामलों में आगे मिलने वाले निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    तारकेश्वरी कॉलोनी की घटना के बाद स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और उपभोक्ताओं की सहमति को लेकर सवाल उठे हैं। फिलहाल संबंधित मकान में पुराना मीटर दोबारा लगा दिया गया है। हालांकि, इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

  • शिवपुरी के बाग वाले हनुमान मंदिर में चोरी, चांदी के कुंडल-कड़ा और पीतल के सात घंटे गायब.

    शिवपुरी के बाग वाले हनुमान मंदिर में चोरी, चांदी के कुंडल-कड़ा और पीतल के सात घंटे गायब.


    मध्य प्रदेश: 
    के शिवपुरी जिले के सतनवाड़ा क्षेत्र स्थित बाग वाले हनुमान मंदिर में चोरी की घटना सामने आई है। अज्ञात चोर मंदिर के मुख्य द्वार का ताला तोड़कर हनुमान जी की मूर्ति पर लगे चांदी के दो कुंडल, एक चांदी का कड़ा और मंदिर परिसर में लगे पीतल के सात घंटे चोरी कर ले गया। चोरी गए सामान की कुल कीमत करीब 30 हजार रुपये बताई गई है। घटना का पता सोमवार, 26 अक्टूबर की सुबह उस समय चला, जब एक श्रद्धालु मंदिर में पूजा करने पहुंचा।

    सुबह पूजा करने पहुंचे तो टूटा मिला ताला
    जानकारी के अनुसार, सतनवाड़ा कलां गांव निवासी नंदकिशोर धाकड़ पुत्र हरनारायण धाकड़ सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे बाग वाले हनुमान मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। मंदिर पहुंचने पर उन्होंने मुख्य गेट का ताला टूटा हुआ देखा। इसके बाद उन्होंने मंदिर के भीतर जाकर सामान की जांच की, तो चोरी का पता चला।

    मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति पर लगे चांदी के दोनों कुंडल गायब थे। इसके अलावा एक पैर का चांदी का कड़ा और मंदिर परिसर में लगे पीतल के सात घंटे भी वहां नहीं मिले। मंदिर का ताला टूटा होने और पूजा से संबंधित सामान गायब मिलने के बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

    रात करीब दो बजे चोरी की आशंका
    फरियादी नंदकिशोर धाकड़ ने आशंका जताई कि अज्ञात चोर रात करीब दो बजे के आसपास मंदिर में घुसे और चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। हालांकि, घटना के सही समय और चोरी करने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    सुबह मंदिर पहुंचने पर चोरी का पता चलने के बाद फरियादी सतनवाड़ा थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। शिकायत में मंदिर से चांदी के आभूषण और पीतल के घंटे चोरी होने की बात बताई गई। चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत करीब 30 हजार रुपये बताई गई है।

    अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज
    पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जिम्मेदारी कार्यवाहक प्रधान आरक्षक सोनू रजक को सौंपी गई है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और आरोपी का पता लगाने के साथ चोरी गए सामान की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।

    मंदिर के मुख्य गेट का ताला तोड़कर चांदी के आभूषण और पीतल के घंटे चोरी किए जाने की इस घटना के बाद पुलिस के सामने आरोपी की पहचान करने और सामान बरामद करने की चुनौती है। फिलहाल, मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी या चोरी गए सामान की बरामदगी की जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच के बाद ही वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों का पता चल सकेगा।

  • इंदौर-देवास बायपास पर हादसों का खतरा बरकरार? हाईकोर्ट में आज खुलेगी सड़क सुधार के दावों की पोल

    इंदौर-देवास बायपास पर हादसों का खतरा बरकरार? हाईकोर्ट में आज खुलेगी सड़क सुधार के दावों की पोल


    इंदौर । इंदौर-देवास बायपास की बदहाल स्थिति और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में आज एक बार फिर जनहित याचिका पर सुनवाई होगी। इस सुनवाई में सबसे अहम बात यह रहेगी कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की ओर से गड्ढे भरने और सड़क की समस्याएं दूर करने के दावे कितने सही साबित होते हैं। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मौके पर जाकर बायपास की मौजूदा स्थिति देखने और अगली सुनवाई में वास्तविक हालात की जानकारी देने के निर्देश दिए थे। अब याचिकाकर्ता की रिपोर्ट से सड़क पर हुए सुधार की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज ने वर्ष 2021 में दायर की थी। इसमें इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत के साथ वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर जगह-जगह बड़े गड्ढे मौजूद रहे हैं। सर्विस रोड की हालत भी खराब बताई गई है। इसके अलावा खुले ड्रेनेज जलभराव और खराब या बंद स्ट्रीट लाइट के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के चलते दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।

    याचिकाकर्ता ने पहले की सुनवाई में कोर्ट को बताया था कि बायपास की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उनका आरोप था कि सड़क पर गड्ढों और अन्य खामियों के कारण हादसों का खतरा बना हुआ है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। याचिकाकर्ता ने सड़क सुरक्षा से जुड़े न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए संबंधित एजेंसियों से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

    पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने NHAI से यह जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए। इसके जवाब में NHAI ने तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया था कि सड़क के गड्ढे भर दिए गए हैं और समस्याओं को दूर करने के लिए जरूरी काम किए गए हैं। हालांकि कोर्ट ने केवल इन दावों के आधार पर स्थिति को अंतिम रूप से स्पष्ट मानने के बजाय याचिकाकर्ता को स्वयं मौके पर जाकर निरीक्षण करने को कहा था।

    आज की सुनवाई में सड़क की वास्तविक स्थिति और प्राधिकरण की ओर से किए गए सुधार कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि गड्ढों की समस्या कितनी दूर हुई है और सर्विस रोड जल निकासी तथा प्रकाश व्यवस्था जैसी समस्याओं में कितना सुधार हुआ है। हालांकि सुनवाई से पहले यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी समस्याएं दूर हो चुकी हैं या अभी भी पहले जैसी स्थिति बनी हुई है।

    याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा संबंधी निर्देशों के पालन का मुद्दा भी शामिल है। इसमें दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने के साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अवैध पार्किंग अवैध ढाबों और व्यावसायिक अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण तथा आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है।

    याचिकाकर्ता की मांग है कि संबंधित एजेंसियां बायपास की सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएं। जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए और दुर्घटना संभावित स्थानों पर जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि NHAI के सुधार संबंधी दावों और मौके पर सामने आने वाली स्थिति में कितना अंतर है।

  • राजा मानधाता की कठोर तपस्या से जुड़ा ओंकारेश्वर धाम, जानें 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र मंदिर की खास मान्यताएं

    राजा मानधाता की कठोर तपस्या से जुड़ा ओंकारेश्वर धाम, जानें 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस पवित्र मंदिर की खास मान्यताएं


    मध्य प्रदेश: में नर्मदा नदी के किनारे स्थित ओंकारेश्वर धाम भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल इस तीर्थस्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां नर्मदा नदी के घाट, प्राचीन मंदिर और पूजा-अर्चना का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का संगम होने के कारण ओंकारेश्वर देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में विशेष स्थान रखता है।

    ओंकारेश्वर की पहचान यहां स्थित मानधाता द्वीप से भी जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस द्वीप को ऊपर से देखने पर इसका आकार ओम जैसा दिखाई देता है। हिंदू धर्म में ओम को पवित्र ध्वनि और आध्यात्मिक प्रतीक माना जाता है। इसी मान्यता के कारण इस स्थान का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा के साथ द्वीप की धार्मिक पहचान से भी परिचित होते हैं।

    ओंकारेश्वर धाम की सबसे प्रमुख पौराणिक मान्यताओं में राजा मानधाता की तपस्या का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि राजा मानधाता ने इसी पर्वत पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक कठोर तप किया था। उनकी साधना से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। इसी कथा को ओंकारेश्वर धाम की धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह प्रसंग भक्ति, साधना और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

    इस तीर्थस्थल का संबंध आदि शंकराचार्य से भी बताया जाता है। मान्यता है कि अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने यहां समय बिताया था। अद्वैत वेदांत की परंपरा में भी ओंकारेश्वर का विशेष महत्व माना जाता है। इस कारण यहां केवल भगवान शिव के भक्त ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग भी पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और नर्मदा नदी के आसपास का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को ध्यान और साधना के लिए आकर्षित करता है।

    ओंकारेश्वर की यात्रा में ममलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह मंदिर नर्मदा नदी के दूसरे तट पर स्थित है और इसे अमलेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ओंकारेश्वर आने वाले अनेक श्रद्धालु ममलेश्वर महादेव की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि दोनों मंदिरों के दर्शन करने से तीर्थयात्रा पूर्ण होती है। इसी वजह से भक्त नर्मदा के दोनों किनारों पर स्थित इन प्राचीन शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर धाम की विशेषता केवल उनकी धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। नर्मदा नदी के घाट, मंदिरों में होने वाली पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की मौजूदगी यहां के वातावरण को विशिष्ट बनाते हैं। नदी के किनारे स्थित मंदिरों का प्राकृतिक परिवेश इस तीर्थस्थल की पहचान को और आकर्षक बनाता है।

    भगवान शिव के दर्शन, धार्मिक आस्था और मानसिक शांति की तलाश में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं। राजा मानधाता की तपस्या से जुड़ी पौराणिक कथा, मानधाता द्वीप का ओम जैसा आकार, आदि शंकराचार्य से संबंधित मान्यता और ममलेश्वर मंदिर के दर्शन इस धाम को विशेष धार्मिक पहचान देते हैं। यही कारण है कि ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के प्रमुख शिव तीर्थों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

  • इंदौर की राजकमल रेसीडेंसी में मिला बिजली कर्मचारी का शव, महिला मित्र से पूछताछ, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

    इंदौर की राजकमल रेसीडेंसी में मिला बिजली कर्मचारी का शव, महिला मित्र से पूछताछ, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार


    इंदौर । इंदौर के गांधी नगर क्षेत्र स्थित राजकमल रेसीडेंसी में एक बिजली कर्मचारी का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान निर्मल राजपूत के रूप में हुई है जो बिजली विभाग में लाइनमैन के पद पर काम करता था। उसका शव एक महिला मित्र के फ्लैट में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। पुलिस को उसके शरीर पर हल्के चोट के निशान भी मिले हैं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक मौत करीब 12 घंटे पहले हुई हो सकती है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है और पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

    आधी रात को मिली सूचना के बाद पहुंची पुलिस

    पुलिस के मुताबिक सोमवार रात करीब 12 बजकर 30 मिनट पर घटना की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम राजकमल रेसीडेंसी स्थित फ्लैट पर पहुंची और जांच शुरू की। मौके पर शव की स्थिति का निरीक्षण किया गया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया। शरीर पर चोट के हल्के निशान मिलने के बाद पुलिस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

    निर्मल मूल रूप से बागड़दा एरोड्रम क्षेत्र का निवासी था। वह बिजली विभाग में लाइनमैन के रूप में कार्यरत था। पुलिस के अनुसार वह राजकमल रेसीडेंसी में रहने वाली महिला का परिचित था। महिला अपने पति से अलग रहती है। फिलहाल पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की है ताकि घटना से जुड़ी परिस्थितियों और मृतक के फ्लैट तक पहुंचने के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

    सीसीटीवी फुटेज भी जांच के दायरे में

    पुलिस जांच में सोसायटी के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कैमरों में निर्मल बिल्डिंग में पीछे के रास्ते से आता दिखाई दिया है। पुलिस अब फुटेज और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्मल फ्लैट पर कब पहुंचा था और उसके बाद वहां क्या परिस्थितियां बनीं।

    हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। शरीर पर मिले चोट के निशानों की प्रकृति और उनकी मौत से संभावित संबंध का पता मेडिकल जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस महिला से पूछताछ के साथ दूसरे जरूरी पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

    एसीपी निधि सक्सेना के मुताबिक शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है और महिला मित्र से पूछताछ की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चोट के निशान कैसे आए और क्या उनका मौत से कोई संबंध है।

    निर्मल के परिवार में पत्नी और एक बेटी हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लिए भी यह मामला चिंता और सदमे का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस ने मौत को लेकर किसी अंतिम नतीजे की घोषणा नहीं की है। जांच के नतीजे और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल सीसीटीवी फुटेज पूछताछ और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • बालाघाट में 17 साल तक फर्जी डॉक्टर बनकर करता रहा इलाज, बीएमओ भी बना, FIR होते ही फरार

    बालाघाट में 17 साल तक फर्जी डॉक्टर बनकर करता रहा इलाज, बीएमओ भी बना, FIR होते ही फरार


    बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति दूसरे डॉक्टर के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करीब 17 साल तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करता रहा। इतना ही नहीं वह ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर यानी बीएमओ जैसे जिम्मेदार पद पर भी काम करता रहा। जांच में उसकी पहचान रीवा निवासी शिवकुमार पांडे के रूप में सामने आई है जो कथित तौर पर डॉ. सुनील कुमार सिंह के नाम से नौकरी कर रहा था। मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

    दूसरे डॉक्टर के नाम पर हासिल की सरकारी नौकरी

    विभागीय आदेश और बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के प्रतिवेदन के मुताबिक असली डॉ. सुनील कुमार चिकित्सा अधिकारी के पद पर देवास जिले में पदस्थ हैं। वहीं शिवकुमार पांडे पर आरोप है कि उसने डॉ. सुनील कुमार सिंह के नाम शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और स्वास्थ्य विभाग में संविदा चिकित्सक की नौकरी हासिल कर ली। वह कई वर्षों तक बिरसा और दमोह क्षेत्र में काम करता रहा। इस दौरान उसे प्रभारी बीएमओ की जिम्मेदारी भी मिली। इतने लंबे समय तक सरकारी व्यवस्था में काम करने के बावजूद उसकी वास्तविक पहचान सामने नहीं आ सकी।

    इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि एक ही डॉक्टर के नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर दो अलग-अलग व्यक्तियों के सरकारी सेवा में होने का मामला लंबे समय तक विभागीय निगरानी से बाहर रहा। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस तरह हुआ और आरोपी इतने वर्षों तक जांच से कैसे बचा रहा।

    2024 में शिकायत के बाद भी नहीं खुला मामला

    रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में भी बिरसा में पदस्थ डॉ. सुनील सिंह की डिग्री को लेकर शिकायत की गई थी। उस समय जांच के बाद आरोपी को क्लीनचिट दे दी गई थी। तत्कालीन बालाघाट सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडे ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए बताया था कि शिकायत मिलने पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर रीवा मेडिकल कॉलेज से संपर्क किया गया था। उनके अनुसार कॉलेज की ओर से बताया गया था कि सुनील सिंह नाम का व्यक्ति वहां पढ़ा था और उसने पढ़ाई पूरी की थी। इसी जानकारी के आधार पर उस समय कार्रवाई की गई थी।

    हालांकि अब सामने आए मामले ने पिछली जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि क्या मूल डॉक्टर के दस्तावेजों और आरोपी की पहचान का आपस में मिलान किया गया था। क्या मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर की स्वतंत्र रूप से जांच हुई थी और क्या देवास में पदस्थ असली डॉक्टर के रिकॉर्ड से तुलना की गई थी। इन सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।

    भास्कर की खबर के बाद राज्य स्तर पर जांच

    दैनिक भास्कर डिजिटल पर दस्तावेजों के साथ खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य स्तर पर जांच समिति गठित की। जांच में बालाघाट में डॉ. सुनील कुमार सिंह के नाम से नौकरी करने वाले व्यक्ति की पहचान शिवकुमार पांडे के रूप में किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद बिरसा थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।

    पुलिस आरोपी की तलाश में रीवा जिले के बड़ागांव और खुटेही क्षेत्र तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक स्थानीय लोगों ने तस्वीर देखकर व्यक्ति की पहचान शिवकुमार पांडे के रूप में की। खुटेही स्थित मकान पर पहुंचने पर उसके बेटे और बेटी ने भी तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति को अपना पिता बताया। हालांकि पुलिस की दबिश के दौरान आरोपी घर पर नहीं मिला।

    पुलिस को आरोपी की तलाश और संपत्ति की जांच

    प्रभारी बीएमओ डॉ. नरेश मारन की शिकायत पर शिवकुमार पांडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) 340(2) और 336(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपी की गिरफ्तारी के साथ उसकी चल और अचल संपत्ति का विवरण भी जुटा रही है। इसके लिए रीवा की गुढ़ और हुजूर तहसीलों को पत्र भेजे गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी की तलाश के लिए टीमें बनाई गई हैं और उस पर इनाम भी घोषित किया गया है।

    यह मामला केवल कथित फर्जी नियुक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। मरीजों के इलाज से जुड़े पदों पर नियुक्ति के दौरान शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की सही जांच बेहद जरूरी है। अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित फर्जीवाड़ा कैसे हुआ और इतने वर्षों तक संबंधित विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी।

  • मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा

    मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में चमकविहीन गेहूं के पुराने मामले सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक के एजेंडे में कुल 21 विषय शामिल हैं। इनमें खाद्य विभाग से जुड़े गेहूं के निराकरण के प्रस्ताव के साथ सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता नए जिलों में शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों के गठन पेंशन और चिकित्सा देयकों से जुड़े मामले भी रखे गए हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं को जारी रखने और सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा नियुक्ति देने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

    छह साल पुराने गेहूं के मामले पर नजर

    कैबिनेट बैठक के प्रमुख विषयों में वर्ष 2020-21 के दौरान खरीदे गए चमकविहीन गेहूं के निराकरण का मामला शामिल है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 7 लाख मीट्रिक टन चमकविहीन गेहूं के टेंडर के जरिए निराकरण की प्रक्रिया पूरी करने और 5.80 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निराकरण को कार्योत्तर मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव पर सरकार विचार करेगी। कार्योत्तर मंजूरी का अर्थ किसी कार्य या प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उसके लिए औपचारिक स्वीकृति लेने से है। हालांकि बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी या नहीं इसका फैसला कैबिनेट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने पर चर्चा

    जल संसाधन विभाग की तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में शामिल हैं। इनमें छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स चेटरखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना और पचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इन परियोजनाओं की निरंतरता को लेकर सरकार विचार करेगी। इसके साथ पांच वर्ष की अवधि वाली एक वृहद परियोजना को आगे जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में रखा गया है। इन प्रस्तावों का संबंध सिंचाई व्यवस्था और परियोजनाओं के काम को निरंतर आगे बढ़ाने से है।

    वन विभाग की कैम्पा निधि के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने नवगठित जिलों निवाड़ी मऊगंज पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए नए पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा है। इससे इन जिलों में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

    पेंशन और चिकित्सा बिलों पर भी विचार

    कैबिनेट के एजेंडे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों की पेंशन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रस्ताव में सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-2 मार्तंड सिंह परिहार की देय पेंशन वापस लेने का विषय रखा गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत पूर्व सहायक यंत्रियों की पेंशन से जुड़े मामलों पर भी विचार होगा। इनमें बड़वानी जिले की जनपद पंचायत निवाली का मामला शामिल है।

    गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस अधिकारी नीलकंठ बढ़ार की वेतनवृद्धि से जुड़े पुराने प्रकरण पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा छतरपुर में पदस्थ वैज्ञानिक अधिकारी रितेश चंद्र शुक्ल और दिवंगत आरक्षक 515 अभिषेक सिंह भदौरिया के निजी अस्पतालों में हुए उपचार के चिकित्सा देयकों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी रखे गए हैं। जबलपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चिकित्सा देयकों के भुगतान का मामला भी बैठक में शामिल है।

    योजनाओं की निरंतरता और संविदा नियुक्तियां

    सामान्य प्रशासन विभाग के एजेंडे में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू के वेतन भत्ते प्रशासनिक भवन निर्माण और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी योजना जारी रखने का प्रस्ताव है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की योजनाओं को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने पर भी विचार किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग की सात योजनाओं के स्वीकृत मदों को इसी अवधि तक जारी रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    आनंद विभाग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया है। नर्मदा घाटी विकास विभाग में शिकायत निवारण प्राधिकरण के सदस्य न्यायिक पद पर नियुक्ति और संस्कृति विभाग में सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी सुरेश कुमार पाठक को संविदा नियुक्ति देने के विषय पर भी चर्चा होगी। अब इन सभी प्रस्तावों पर कैबिनेट के फैसले का इंतजार रहेगा।