Category: Madhya Pradesh

  • जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते


    कटनी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के अलग अलग अंदाज चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते नजर आए तो कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व जन्म का जिक्र कर लोगों का ध्यान खींचा। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ता को खुद जूते पहनाए जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी ग्रामीणों के साथ थिरकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में जनसंपर्क और नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड

    कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

    पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।

    दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

    सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज

    बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।

    वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।

    प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।

  • रेल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने की पहल, भोपाल में विशेष उपकरण से बदली गई बोगी की तकनीक

    रेल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने की पहल, भोपाल में विशेष उपकरण से बदली गई बोगी की तकनीक


    भोपाल । भोपाल स्थित सवारी डिब्बा पुनर्वास कारखाने यानी सीआरडब्ल्यूएस ने रेलवे के तकनीकी कामकाज में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कारखाने में पहली बार कॉइल स्प्रिंग बोगी को एयर सस्पेंशन बोगी में बदलने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य रेल यात्रा के दौरान कोच में महसूस होने वाले झटकों और कंपन के प्रभाव को कम करना है। इससे यात्रियों को अपेक्षाकृत आरामदायक सफर का अनुभव मिल सकता है। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह तकनीकी सुधार उपयोगी साबित हो सकता है।

    पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले इस कारखाने में बोगी के निचले ढांचे में एयर सस्पेंशन प्रणाली लगाने के लिए विशेष उपकरण तैयार किया गया। इस काम की खास बात यह रही कि कारखाने में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए तकनीकी जरूरत के अनुसार उपकरण बनाया गया। इसकी सहायता से बोगी में चारों कंसोल को निर्धारित स्थान पर सटीकता के साथ लगाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस तरह के तकनीकी बदलाव में सटीक माप और सही फिटिंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि बोगी के विभिन्न हिस्सों की स्थिति और उनकी कार्यप्रणाली का असर कोच के संचालन पर पड़ता है।

    इस प्रक्रिया के दौरान पुराने कंसोल को हटाकर उनकी जगह नए कंसोल और ब्रैकेट लगाए गए। यह काम तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मौजूदा ढांचे में बदलाव करते हुए नए सस्पेंशन सिस्टम के अनुरूप व्यवस्था तैयार करनी थी। कारखाने के कर्मचारियों ने विशेष उपकरण की मदद से इस काम को पूरा किया। इससे यह भी सामने आया कि जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर उपकरण विकसित करके तकनीकी कार्यों को अधिक सटीकता के साथ अंजाम दिया जा सकता है।

    कॉइल स्प्रिंग और एयर सस्पेंशन प्रणाली में मुख्य अंतर उनके काम करने के तरीके का है। कॉइल स्प्रिंग में धातु की स्प्रिंग के माध्यम से झटकों को संभालने में मदद मिलती है जबकि एयर सस्पेंशन में हवा के दबाव पर काम करने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। एयर सस्पेंशन प्रणाली का उद्देश्य कोच को मिलने वाले झटकों और कंपन के असर को कम करना है। हालांकि वास्तविक आराम और प्रदर्शन का आकलन संबंधित तकनीकी परीक्षणों और परिचालन परिणामों के आधार पर ही किया जा सकता है।

    रेलवे में यात्रियों की सुविधा के साथ कोचों की गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। भोपाल के सीआरडब्ल्यूएस में किया गया यह काम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। विशेष उपकरण तैयार करने और मौजूदा बोगी के ढांचे में जरूरी बदलाव करने का अनुभव भविष्य में इस तरह के अन्य तकनीकी कार्यों में भी मददगार हो सकता है।

    इस उपलब्धि से कारखाने के कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की भूमिका भी सामने आई है। एयर सस्पेंशन प्रणाली से लैस बोगी का वास्तविक लाभ उसके परीक्षण और संचालन के बाद स्पष्ट होगा। फिर भी इस तरह के प्रयोग रेलवे को कोचों की तकनीक में सुधार करने और यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में नए विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं।

  • मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर

    मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर


    भोपाल । मध्यप्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के लिए भाजपा एक नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक भाजपा सांसद को केंद्र सरकार के एक मंत्रालय के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव सामने आया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मध्यप्रदेश से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं परियोजनाओं और लंबित स्वीकृतियों के मामलों को तेजी से आगे बढ़ाना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित पार्टी की कोर ग्रुप बैठक में यह सुझाव रखा। प्रस्ताव के अनुसार सांसद अपने निर्धारित मंत्रालय से संबंधित प्रदेश के मामलों की निगरानी करेंगे और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय स्तर पर उनकी पैरवी करेंगे।

    इस प्रस्ताव के तहत सांसदों की भूमिका केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उन्हें केंद्र और राज्य के बीच संपर्क की एक अतिरिक्त कड़ी के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग विभागों को केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी परियोजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से लगातार संपर्क करना पड़ता है। कई बार इन मामलों में जानकारी जुटाने और निर्णय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में समय लगता है। ऐसे में यदि प्रत्येक मंत्रालय के लिए एक सांसद की जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित विभागों को अपने मुद्दे उठाने के लिए एक निर्धारित माध्यम मिल सकता है।

    प्रस्ताव के मुताबिक संबंधित सांसद मुख्यमंत्री मुख्य सचिव और मध्यप्रदेश के संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के साथ समन्वय करेंगे। प्रदेश में किसी योजना या परियोजना से जुड़ा मामला केंद्रीय मंत्रालय में लंबित होने पर सांसद उसकी स्थिति की जानकारी लेकर दिल्ली में संबंधित अधिकारियों के सामने विषय रख सकेंगे। इससे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को केंद्र तक पहुंचाने और आवश्यक मंजूरियों के लिए नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिम्मेदारियां किस तरह बांटी जाती हैं और मामलों की समीक्षा कितनी नियमित होती है।

    मध्यप्रदेश में लोकसभा की सभी 29 सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में पार्टी के पास इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सांसदों का व्यापक समूह उपलब्ध है। सांसदों के अनुभव उनकी प्रशासनिक समझ और संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी का उपयोग प्रदेश की योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में सड़क परिवहन ग्रामीण विकास कृषि ऊर्जा आवास स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। इनसे संबंधित मध्यप्रदेश के प्रस्तावों पर समन्वय की जिम्मेदारी तय होने से विभागों को अपने मामलों की स्थिति पर नजर रखने में सुविधा मिल सकती है।

    इस व्यवस्था से लंबित परियोजनाओं की पैरवी और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को व्यवस्थित करने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि किसी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता या प्रशासनिक मंजूरी जरूरी है तो संबंधित सांसद विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेकर केंद्रीय मंत्रालय के साथ संपर्क कर सकेंगे। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के स्तर पर प्राथमिकता वाले मामलों की समीक्षा होने से राज्य सरकार की जरूरतों और केंद्र के निर्णयों के बीच तालमेल बेहतर करने का प्रयास किया जा सकता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था का एक अहम पहलू जवाबदेही भी है। मंत्रालयवार जिम्मेदारी तय होने पर यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि किस केंद्रीय मंत्रालय से जुड़े मामलों की पैरवी कौन-सा सांसद कर रहा है और उन पर कितनी प्रगति हुई है। इससे लंबित प्रस्तावों की स्थिति की समीक्षा करना आसान हो सकता है। साथ ही अधिकारियों को विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संपर्क करने के बजाय सांसद के माध्यम से समन्वय का एक अतिरिक्त रास्ता मिलेगा।

    फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे किस रूप में लागू किया जाएगा और सांसदों को कौन-कौन से मंत्रालय सौंपे जाएंगे इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। यदि योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाता है तो इससे मध्यप्रदेश की केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

  • रिटायर्ड IAS की हत्या के 26 दिन बाद भी फरार वरुण का सुराग नहीं, मोबाइल की सर्च हिस्ट्री और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही SIT

    रिटायर्ड IAS की हत्या के 26 दिन बाद भी फरार वरुण का सुराग नहीं, मोबाइल की सर्च हिस्ट्री और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही SIT


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में फरार केयरटेकर वरुण कुमार को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस की जांच में उसके पुराने पारिवारिक विवादों और आक्रामक व्यवहार से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक वरुण अपने पिता की दूसरी शादी से नाराज था और इस वजह से उन पर हमला भी कर चुका था। इसके अलावा पंजाब में रहने वाली अपनी नाबालिग गर्लफ्रेंड के साथ मारपीट के मामले में भी उसका नाम सामने आया है। हालांकि पुलिस के अनुसार इन पुराने विवादों का राकेश अग्रवाल की हत्या से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस आरोपी की तलाश और हत्या से जुड़े सबूतों की पड़ताल पर है।

    राकेश अग्रवाल की हत्या 30 सितंबर को भोपाल के रातीबड़ इलाके के सूरज नगर स्थित उनके घर में हुई थी। वारदात के बाद से केयरटेकर वरुण कुमार फरार है। मामले में गठित विशेष जांच टीम यानी एसआईटी अब नए सिरे से जांच कर रही है। पुलिस अलग-अलग शहरों में आरोपी के संपर्कों और संभावित ठिकानों का पता लगाने में जुटी है। जांच के दौरान सामने आया है कि वरुण ग्वालियर आगरा दिल्ली और भोपाल जैसे शहरों में केयरटेकर के तौर पर काम कर चुका है। वह करीब छह साल से अपने परिवार से अलग रह रहा था। उसके परिजनों और करीबी लोगों से पूछताछ के दौरान पुराने विवादों और उसके व्यवहार से संबंधित जानकारियां मिली हैं।

    इस हत्याकांड की जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग मृतक का मोबाइल फोन भी है। पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद वरुण राकेश अग्रवाल का मोबाइल अपने साथ ले गया था। क्राइम ब्रांच ने बाद में फोन बरामद कर लिया। जांच से जुड़े इनपुट के अनुसार आरोपी ने करीब दो दिन तक इस मोबाइल का इस्तेमाल किया था। अब पुलिस फोन की सर्च हिस्ट्री कॉल रिकॉर्ड मैसेज और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की पड़ताल कर रही है। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से वारदात के बाद आरोपी की गतिविधियों और उसके संपर्क में रहे लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

    पुलिस ने वरुण की तलाश में कई जगहों पर जांच की है। उसकी आखिरी लोकेशन आगरा-वृंदावन रोड पर ट्रेस किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद से उसका कोई पुख्ता सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस पंजाब में रहने वाली उसकी बहन आगरा में उसके दोस्तों और ग्वालियर में रहने वाले पिता से भी पूछताछ कर चुकी है। अलग-अलग शहरों में उसके पुराने संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि फरारी के दौरान उसे मदद मिलने की संभावनाओं की जांच की जा सके।

    एसआईटी अब सीसीटीवी फुटेज और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों का दोबारा विश्लेषण कर रही है। वारदात के बाद आरोपी के भागने के रास्ते और उसकी गतिविधियों को समझने के लिए उपलब्ध फुटेज की जांच की जा रही है। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार हत्या के बाद वरुण घर से निकलकर करीब दो किलोमीटर तक गया था और फिर ट्रेन से फरार होने की आशंका जताई गई थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों को अन्य तथ्यों से मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।

    इस मामले में पुराने आर्थिक विवाद का पहलू भी जांच के दायरे में बताया गया है। सामने आई जानकारी के अनुसार राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ एक करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को लेकर शिकायत की थी। पुलिस जांच में इस पहलू की क्या भूमिका है यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल वरुण की गिरफ्तारी इस मामले की जांच के लिए अहम बनी हुई है। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि फरार आरोपी का पता लगाकर हत्या के पीछे की परिस्थितियों और घटनाक्रम को साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाए।

  • MP: भारी घाटे में चल रही भोपाल मेट्रो…. जितनी महीने की कमाई, उतना एक दिन का खर्च!

    MP: भारी घाटे में चल रही भोपाल मेट्रो…. जितनी महीने की कमाई, उतना एक दिन का खर्च!


    भोपाल।
    राजधानी भोपाल (Bhopal) में मेट्रो (Metro) की चमक तो दिखाई दे रही है, लेकिन यात्रियों की संख्या और कमाई के आंकड़े इसकी रफ्तार पर सवाल खड़े कर रहे हैं. आधुनिक सफर का सपना लेकर शुरू हुई मेट्रो फिलहाल सीमित यात्रियों के सहारे दौड़ रही है. हर दिन करीब 5 लाख रुपये के संचालन खर्च के मुकाबले पूरे महीने में टिकटों से महज 4 से 5 लाख रुपये की आय हो रही है. यानी एक दिन के संचालन पर जितनी रकम खर्च हो रही है, उतनी कमाई जुटाने में मेट्रो को पूरा महीना लग रहा है. हालांकि, मेट्रो प्रबंधन (Metro Management) का कहना है कि इसे केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था (Public Transport System) का अहम हिस्सा है।


    सात किलोमीटर के ट्रैक पर सवारी का इंतजार

    भोपाल में एम्स से सुभाष नगर के बीच करीब सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दिसंबर 2025 में मेट्रो सेवा शुरू हुई थी. शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि मेट्रो शहर के यातायात को नई दिशा देगी और लोगों को जाम से राहत दिलाने में मदद करेगी. लेकिन फिलहाल आठ स्टेशनों तक सीमित इस रूट पर यात्रियों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महीनेभर में करीब 13 से 15 हजार यात्री मेट्रो से सफर कर रहे हैं. सीमित नेटवर्क के चलते मेट्रो अभी शहर के बड़े हिस्से को सीधे जोड़ने में सक्षम नहीं हैं, जिसका असर इसकी उपयोगिता और कमाई दोनों पर पड़ रहा है।


    एक दिन का खर्च पांच लाख, महीने की कमाई भी इतनी नहीं

    मेट्रो के संचालन पर प्रतिदिन करीब पांच लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. इस हिसाब से मासिक संचालन खर्च लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंचता है. वहीं, यात्रियों से मिलने वाला किराया पूरे महीने में केवल 4 से 5 लाख रुपये के आसपास है. इन आंकड़ों के बीच का अंतर मेट्रो के सामने खड़ी आर्थिक चुनौती को साफ तौर पर दिखाता है. हालांकि, यह गणना संचालन खर्च और टिकटों से होने वाली आय पर आधारित है. मेट्रो को विज्ञापन और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाला राजस्व अलग है, इसलिए कुल आय का आकलन करने के लिए सभी स्रोतों के आंकड़े जरूरी हैं।


    जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला क्या बोले ?

    मेट्रो के खर्च और कमाई के बीच बड़े अंतर पर मेट्रो के जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला का कहना है कि भोपाल मेट्रो लगातार यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. उनके मुताबिक मेट्रो का एक दिन का संचालन खर्च करीब पांच लाख रुपये है, जबकि महीनेभर में 13 से 15 हजार यात्री सफर करते हैं. इन यात्रियों से लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय होती है।

    धीरज शुक्ला का कहना है कि मेट्रो सार्वजनिक परिवहन का साधन है, इसलिए इसे केवल मौजूदा कमाई के आधार पर नहीं देखा जा सकता. फिलहाल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. जब शहर के अलग-अलग हिस्सों तक मेट्रो की कनेक्टिविटी पहुंचेगी, तब यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ आय में भी इजाफा होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यात्री सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और मेट्रो को ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए उपयोगी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।


    जन्मदिन, प्री-वेडिंग शूट और विज्ञापन से कमाई की कोशिश

    टिकटों से सीमित आय के बीच मेट्रो प्रबंधन गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है. इसके तहत मेट्रो के अंदर जन्मदिन मनाने, किटी पार्टी और प्री-वेडिंग शूट जैसे आयोजनों की सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा विज्ञापनों के जरिए भी राजस्व जुटाने की कोशिश की जा रही है. प्रबंधन का मानना है कि ऐसी गतिविधियां मेट्रो की कमाई बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं. हालांकि, इन माध्यमों से अब तक कितनी अतिरिक्त आय हुई है, इसका विस्तृत आंकड़ा सामने आना बाकी है।


    स्टेशन तक पहुंच आसान नहीं, तो यात्री क्यों चुनेंगे मेट्रो?

    मेट्रो में कम यात्रियों की एक बड़ी वजह सीमित रूट के साथ-साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी की चुनौती भी मानी जा रही है. किसी भी मेट्रो सेवा की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि यात्री अपने घर से स्टेशन तक और स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं. यदि स्टेशन तक पहुंचने के लिए पर्याप्त फीडर बसें, ई-रिक्शा या दूसरे साधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो लोग निजी वाहनों और पारंपरिक सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    इसके अलावा रोजाना कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और दूसरे नियमित यात्रियों के लिए मेट्रो तभी सुविधाजनक विकल्प बनेगी, जब उसका नेटवर्क शहर के प्रमुख व्यावसायिक, शैक्षणिक और रिहायशी इलाकों से बेहतर तरीके से जुड़ेगा।


    विस्तार से उम्मीद, लेकिन फिलहाल घाटे का दबाव

    भोपाल मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन तब तक संचालन खर्च और सीमित आय के बीच संतुलन बनाना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी, नियमित यात्रियों के लिए सुविधाजनक योजनाएं, स्टेशनों तक पहुंचने के साधन और विज्ञापन जैसी गतिविधियों से होने वाली आय इस चुनौती को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    फिलहाल भोपाल मेट्रो के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ट्रेनें कितनी रफ्तार से दौड़ रही हैं, बल्कि यह भी है कि उनमें सफर करने वालों की संख्या कब बढ़ेगी. प्रबंधन को उम्मीद है कि पूरे शहर में नेटवर्क फैलने के बाद तस्वीर बदलेगी. लेकिन मौजूदा स्थिति यही बताती है कि मेट्रो को शहर की रोजमर्रा की जरूरत बनाने के लिए अभी यात्रियों का भरोसा जीतना होगा. अब देखना होगा कि विस्तार की योजनाएं कब तक मेट्रो को खाली सीटों से आगे बढ़ाकर आम लोगों की पहली पसंद बना पाती हैं।

  • MP में मानसून जैसा सिस्टम एक्टिव, 3 दिन भारी बारिश के आसार, 29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा असर

    MP में मानसून जैसा सिस्टम एक्टिव, 3 दिन भारी बारिश के आसार, 29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय सिस्टम के असर से प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 28 से 30 अक्टूबर तक भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मंगलवार को जबलपुर सहित 11 जिलों में आंधी-बारिश होने का अनुमान है, जबकि 29 अक्टूबर को इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।

    बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम, पूर्वी MP में ज्यादा असर

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गहरा अवदाब अब गंभीर चक्रवातीय तूफान में बदल गया है। 27 अक्टूबर से इसके और मजबूत होने का अनुमान है। सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में तेज आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

    29 अक्टूबर को सबसे ज्यादा बारिश की संभावना

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को सिस्टम का असर सबसे अधिक रह सकता है। इसी दिन करवा चौथ भी है। ऐसे में बादल और बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में रात को चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है।

    सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बताया गया है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से ज्यादा बारिश होने की आशंका है।

    वहीं, जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, कटनी, दमोह, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सागर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है।

    30 अक्टूबर को भी इन जिलों में बारिश के आसार

    बारिश का दौर 30 अक्टूबर को भी जारी रह सकता है। इस दिन छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर और शहडोल में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में मौसम का असर ज्यादा रहने का अनुमान है।

    पचमढ़ी में रात का पारा 13 डिग्री पर पहुंचा

    बारिश की चेतावनी के बीच प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। बीती रात पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कटनी के करौंदी में 13.9 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 14.2 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 14.7 डिग्री और मंडला में 14.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

    दूसरी ओर, दिन के तापमान में भी करीब एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, उज्जैन, गुना, नर्मदापुरम, धार, ग्वालियर, इंदौर, खजुराहो और सागर में अधिकतम तापमान 35 से 35.5 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा।

  • भेड़ाघाट नर्मदा महोत्सव में अरुणिता और ऋचा शर्मा की गायकी ने बांधा समां, ढोल-ताशा की गूंज से झूमे दर्शक

    भेड़ाघाट नर्मदा महोत्सव में अरुणिता और ऋचा शर्मा की गायकी ने बांधा समां, ढोल-ताशा की गूंज से झूमे दर्शक


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित भेड़ाघाट में आयोजित दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव का समापन रविवार को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। महोत्सव की अंतिम शाम में गायिका अरुणिता कांजीलाल और पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने अपने गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, महाराष्ट्र से आए कलाकारों की पारंपरिक ढोल-ताशा प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। शरद पूर्णिमा की चांदनी और भेड़ाघाट की संगमरमरी चट्टानों के बीच आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में भक्ति संगीत, शास्त्रीय नृत्य और फिल्मी गीतों का संगम देखने को मिला।

    कार्यक्रम की शुरुआत मां नर्मदा के पूजन से हुई। इसके बाद जबलपुर की त्रिभंग कला अकादमी की कलाकार कौतुकी उपाध्याय ने कथक शैली में शिव स्तुति प्रस्तुत की। शास्त्रीय नृत्य की इस प्रस्तुति के बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने पारंपरिक ढोल-ताशा वादन किया। कलाकारों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा और सांस्कृतिक संध्या का माहौल उत्साहपूर्ण बना दिया।

    महोत्सव की प्रमुख प्रस्तुतियों में अरुणिता कांजीलाल का गायन शामिल रहा। इंडियन आइडल सीजन-12 की प्रथम उपविजेता अरुणिता ने ‘अई गिरि नंदिनी’ स्तोत्र से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘राम सियाराम’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘हीरे मोती मैं न चाहूं’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ जैसे गीत सुनाए। उनके गायन में भक्ति और लोकप्रिय संगीत का मेल देखने को मिला।

    अरुणिता ने मां नर्मदा को समर्पित भजन ‘मां रेवा थारो पानी निर्मल’ भी प्रस्तुत किया। इस भजन ने कार्यक्रम में भक्तिमय वातावरण बनाया। नर्मदा महोत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के बीच यह प्रस्तुति शाम के खास हिस्सों में शामिल रही।

    इसके बाद पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने मंच संभाला। उन्होंने ‘सोनिया वे रांझणा वे’, ‘जिंदगी में कभी कोई आए न रब्बा’ और ‘माही वे’ जैसे लोकप्रिय फिल्मी गीत प्रस्तुत किए। उनकी गायकी के दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह जताया। ऋचा शर्मा की प्रस्तुति के साथ महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।

    शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले इस महोत्सव में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक भेड़ाघाट पहुंचते हैं। यहां की संगमरमरी चट्टानें, नर्मदा तट का प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन को विशेष पहचान देते हैं। इस बार भी कथक, भजन, फिल्मी गीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विविध रंग दिए।

    समापन समारोह में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं, जबकि विधायक नीरज सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी वर्चुअल माध्यम से समारोह से जुड़े। उन्होंने नर्मदा महोत्सव को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया। साथ ही आयोजन को और भव्य बनाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने की बात कही। महोत्सव के समापन के साथ भेड़ाघाट की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन महत्व एक बार फिर सामने आया।

  • मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा बनाएगी 4-5 नामों का पैनल, वनथी श्रीनिवासन समेत कई नेता चर्चा में

    मध्य प्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा बनाएगी 4-5 नामों का पैनल, वनथी श्रीनिवासन समेत कई नेता चर्चा में

    मध्य प्रदेश: में राज्यसभा की खाली हुई एक सीट पर उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर हुई भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया। बैठक में 4 से 5 नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने पर चर्चा हुई। हालांकि, पार्टी ने अभी तक उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    संभावित नामों में तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा मध्य प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं के नामों पर भी चर्चा हो रही है। उम्मीदवार के चयन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। बैठक में राज्यसभा उपचुनाव के साथ संगठनात्मक गतिविधियों और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी मंथन हुआ।

    यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद खाली हुई है। वह अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव के जरिए नए सदस्य का चयन किया जाना है। इसी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए भाजपा संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रही है।

    मध्य प्रदेश भाजपा के जिन नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं, उनमें पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल शामिल हैं। हालांकि, इन नामों को लेकर भी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    राज्यसभा उपचुनाव में विधानसभा के विधायकों की संख्या महत्वपूर्ण होगी। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, इसलिए चुनावी गणित में 229 विधायकों की भूमिका का आकलन किया जा रहा है। बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति पर भी नजर रहेगी। वह खुद को कांग्रेस में बताती हैं, जबकि भाजपा के कार्यक्रमों में भी नजर आती रही हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही दोनों दलों की प्रभावी संख्या का सटीक आकलन हो सकेगा।

    बैठक में भाजपा ने आगामी राजनीतिक अभियानों को लेकर भी योजना बनाई। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत भोपाल, इंदौर और जबलपुर में बड़ी रैलियां आयोजित करने पर चर्चा हुई। इन कार्यक्रमों में एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।

    केंद्र सरकार की योजनाओं और मध्य प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए मंत्रियों के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित करने और केंद्र के विभिन्न मंत्रालयों से सांसदों को जोड़ने की व्यवस्था पर विचार हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार के तीन साल के कामकाज को जनता के सामने रखने की रणनीति भी चर्चा का हिस्सा रही। मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के कामकाज को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी मंथन किया गया।

    बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे और 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध में निंदा प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी भी सामने आई। राज्यसभा उम्मीदवार के चयन के साथ भाजपा ने संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी ध्यान केंद्रित किया।

  • मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मध्य प्रदेश: में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर पदों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से कुल 1.24 लाख पद स्वीकृत किए हैं। इनमें ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, गृह और परिवहन विभाग सहित अन्य पद शामिल हैं। इस फैसले से प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना सामने आई है।

    स्वीकृत पदों की संख्या के लिहाज से ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग सबसे आगे हैं। हालांकि, पदों को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया एक साथ शुरू हो जाएगी। उम्मीदवारों को संबंधित विभागों की आधिकारिक भर्ती अधिसूचनाओं और नियुक्ति कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऊर्जा विभाग में 52 हजार पदों को मंजूरी दी गई है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 47 हजार पद स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों विभागों में पदों की संख्या सबसे अधिक है। भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इन क्षेत्रों में विभिन्न योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि, पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में 13,200 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गृह विभाग में 9,662 और परिवहन विभाग में 1,800 पद स्वीकृत किए गए हैं। राज्य में तीन नए जिलों के लिए भी 1,240 पदों को मंजूरी मिली है। इन विभागों और नए जिलों से जुड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया किस चरण में और कब शुरू होगी, इसकी जानकारी आगे जारी होने वाले सरकारी आदेशों और भर्ती सूचनाओं से मिलेगी।

    पुलिस में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी भर्ती बोर्ड से जुड़ा प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिए अलग बोर्ड गठित करने की योजना है। फिलहाल इसका गठन प्रस्तावित है और प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। बोर्ड के गठन के बाद पुलिस भर्ती से संबंधित व्यवस्था को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, भर्ती बोर्ड के गठन, पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा के बिना किसी निश्चित समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

    सरकार की योजना में नियमित नियुक्तियों के साथ संविदा और आउटसोर्स पद भी शामिल हैं। इसलिए मंजूर किए गए 1.24 लाख पदों को एक साथ निकलने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या समझना सही नहीं होगा। स्वीकृत पदों में से किस विभाग में कितनी नियुक्तियां होंगी और भर्ती किस चरण में आगे बढ़ेगी, यह संबंधित विभागों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अब विभागवार भर्ती विज्ञापनों पर नजर रखना अहम होगा। आवेदन करने से पहले पद का विवरण, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से जांचनी चाहिए। पदों को मंजूरी मिलना भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक अवसरों की स्थिति भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • दूध लेने घर से निकला किसान फिर नहीं लौटा, उज्जैन में घेरकर हमला करने का आरोप, तीन पर केस दर्ज

    दूध लेने घर से निकला किसान फिर नहीं लौटा, उज्जैन में घेरकर हमला करने का आरोप, तीन पर केस दर्ज


    उज्जैन  । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में जमीन विवाद को लेकर एक किसान की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माकड़ोन थाना क्षेत्र में किसान जीवन शर्मा पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया। गंभीर चोटें लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और इसी रंजिश के चलते जीवन को घेरकर हमला किया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने मामले में तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक जीवन शर्मा बीती रात दूध लेने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान आरोपियों ने उसे घेर लिया और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। हमले में जीवन को गंभीर चोटें आईं और उसकी जान चली गई। घटना की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का कहना है कि जमीन को लेकर कई दिनों से विवाद चल रहा था। दशहरे के दिन भी इसी मुद्दे पर विवाद हुआ था। परिवार को आशंका है कि पुरानी रंजिश के कारण ही इस वारदात को अंजाम दिया गया।

    परिजनों ने कई लोगों पर लगाया हमले का आरोप
    मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि राजाराम कृष्णपाल नंदकिशोर बाबूलाल सहित अन्य लोगों ने जीवन को घेरकर हमला किया था। हालांकि पुलिस ने शिकायत के आधार पर वीरेंद्र शर्मा नंदकिशोर और बाबूलाल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि वारदात में अन्य लोगों की भूमिका होने की जानकारी भी सामने आई है। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है।
    पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजन और समर्थक
    घटना की सूचना मिलने पर माकड़ोन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए उज्जैन भेजा गया। घटना की जानकारी फैलने के बाद बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। मृतक के कांग्रेस से जुड़े होने के कारण राजनीतिक हलकों में भी मामला चर्चा में आ गया। विधायक महेश परमार भी समर्थकों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
    पुलिस जांच में जुटी
    जमीन विवाद से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों के आरोपों के साथ ही पुराने विवाद और वारदात में संभावित रूप से शामिल अन्य लोगों की भूमिका को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। फिलहाल तीन आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस की जांच के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। इस घटना ने एक बार फिर जमीन संबंधी विवादों के हिंसक रूप लेने और आपसी रंजिश के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है।