Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल। देश भर में स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे एक ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और तटीय व ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के पनिया गांव में स्कूली छात्र हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे अत्यंत कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए विद्यालय पहुंचे। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह से कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो चुका था। छोटे-छोटे बच्चों को इसी दुर्गम रास्ते से गुजरकर ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने के लिए जाना पड़ा।

    परेशानियों का सिलसिला केवल खराब रास्ते तक ही सीमित नहीं रहा। जब छात्र विद्यालय परिसर में पहुंचे, तो वहां जर्जर भवन की खतरनाक स्थिति सामने आई। विद्यालय के एक कमरे की छत का प्लास्टर टूटकर जमीन पर गिर गया, जिससे वहां उपस्थित लोगों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। इस प्रकार की स्थिति में दैनिक रूप से पठन-पाठन कार्य संचालित होना बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।

    तमाम विपरीत परिस्थितियों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के बावजूद विद्यार्थियों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। छात्रों ने अनुशासित रूप से पंक्तिबद्ध होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान का गायन किया। बच्चों के चेहरे पर देशभक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि पृष्ठभूमि में जर्जर इमारत और कीचड़युक्त परिसर व्यवस्थागत कमियों को उजागर कर रहा था।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के मौसम के दौरान इस प्रकार की समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ग्रामीण इलाकों में पक्के संपर्कों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पनिया गांव की यह घटना यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का विकास अभी भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनाक्रम पर संज्ञान लेने की बात कही है। जिला कलेक्टर ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और आश्वस्त किया है कि संबंधित विभाग के माध्यम से विद्यालय भवन की मरम्मत तथा पहुंच मार्ग को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय निवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र अति शीघ्र नए भवन और पक्की सड़क की मांग की है।

    स्थानीय समुदाय का मानना है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षा के लिए सुरक्षित कक्षाएं, पेयजल और पक्के पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जर्जर इमारतों की समय पर मरम्मत न होने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

    फिलहाल, इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद पनिया गांव के इस प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार कब तक पूरा हो पाता है और छात्रों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण कब उपलब्ध कराया जाता है।

  • भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत

    भोपाल वालों के लिए मौसम का अपडेट: 18 अगस्त को बारिश की संभावना और सुहाने तापमान के संकेत


    नई दिल्ली । भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ नजर आ रहा है। 18 अगस्त को राजधानी में बारिश के आसार बने हुए हैं और आसमान में बादलों की आवाजाही देखने को मिल सकती है। उपलब्ध पूर्वानुमान के अनुसार मंगलवार को भोपाल में हल्की बारिश की संभावना है जबकि तापमान अपेक्षाकृत सामान्य रहने की उम्मीद है। सोमवार शाम तक भोपाल में बादल छाए हुए थे और मौसम में नमी बनी हुई थी।

    मौसम विभाग और उपलब्ध पूर्वानुमानों के संकेतों को देखें तो मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ी हैं। राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है और अगले कुछ दिनों में इसका प्रभाव अलग अलग क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। भोपाल भी उन इलाकों में शामिल है जहां हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में शहरवासियों को आने वाले दिनों में मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

    18 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। बीच बीच में बारिश होने से मौसम सुहावना रह सकता है। बारिश के कारण तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। उपलब्ध पूर्वानुमान में मंगलवार को अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

    भोपाल में लगातार बारिश के दौरान शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आ सकती है। सड़क पर निकलने वाले लोगों को मौसम की स्थिति देखकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों के लिए बारिश के दौरान विशेष सावधानी जरूरी होगी क्योंकि गीली सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है। तेज बारिश होने की स्थिति में खुले इलाकों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना भी बेहतर रहेगा।

    मानसून के दौरान भोपाल की झीलों और आसपास के इलाकों में भी मौसम का असर देखने को मिलता है। बारिश के बाद शहर का तापमान कम होने से लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। हालांकि लगातार बारिश के कारण यातायात प्रभावित होने और कुछ इलाकों में पानी जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।

    18 अगस्त के बाद भी भोपाल में बारिश की संभावना बनी रहने के संकेत हैं। उपलब्ध साप्ताहिक पूर्वानुमान में 19 अगस्त को भी छिटपुट बारिश और 20 अगस्त को जोरदार बौछारों की संभावना दिखाई गई है। इसके बाद भी सप्ताह के बाकी दिनों में बारिश का दौर बने रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर भोपाल में 18 अगस्त का मौसम राहत देने वाला रह सकता है। बादलों की मौजूदगी और हल्की बारिश से तापमान नियंत्रित रहने की संभावना है। हालांकि मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए किसी भी यात्रा या जरूरी काम से पहले ताजा मौसम अपडेट देखना सबसे बेहतर रहेगा।

  • पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत

    पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत


    इंदौर इंदौर के कनाड़िया इलाके में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। झलारिया गांव में रहने वाले 37 वर्षीय ड्राइवर सुनील चौहान पर अपनी पत्नी की हत्या करने और इसके बाद दोनों बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप है। घटना के बाद 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह तालाब से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर आने के बाद बच्चे ने वहां से गुजर रही पुलिस की एफआरवी टीम को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस के अनुसार सुनील अपनी पत्नी अनीता बाई के साथ झलारिया गांव में किराए के मकान में रहता था। सोमवार रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस को दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी पर चाकू से हमला किया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर हिंगोनिया गांव के पास स्थित एक तालाब पर पहुंचा। आरोप है कि उसने दोनों बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस दौरान 8 वर्षीय अजय किसी तरह पानी से बाहर निकल आया और अपनी जान बचाई। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस टीम को घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम झलारिया गांव पहुंची लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक वह रात में इलाके से निकलने की तैयारी में था। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई। इसी दौरान पुलिस को वह आसपास घूमता हुआ मिला और उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी पर हमला करने और बच्चों को तालाब में ले जाने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महिला का शव बरामद किया।

    दूसरी ओर तालाब में बच्ची की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात करीब ढाई बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद 10 वर्षीय माही का शव तालाब से बरामद किया गया। शुरुआती तौर पर बच्ची की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

    महिला के शरीर पर भी चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस गला दबाने के आरोप की भी जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर एफएसएल टीम की मदद से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस क्रम में हुई और घटना के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

    पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी खजराना थाना प्रभारी कनाड़िया सहित पुलिस टीम एफएसएल और एसडीआरएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मृतका और बच्ची के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी से पूछताछ के साथ घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

    बताया गया है कि सुनील पेशे से ड्राइवर था और कुछ समय पहले ही परिवार के साथ बापू गांधी नगर इलाके से झलारिया में किराए के मकान में रहने आया था। उसके माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य लसूड़िया क्षेत्र के बापू गांधी नगर में रहते हैं। अनीता मूल रूप से देवास जिले के कांटाफोड़ की रहने वाली थी। सुनील का परिवार भी कांटाफोड़ से जुड़ा बताया गया है और करीब 17 से 18 वर्षों से इंदौर में रह रहा है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए

    बारिश ने खोली इंतजामों की पोल! भोपाल में 35 जलभराव वाले स्पॉट के बाद अब 8 नए स्थान सामने आए


    भोपाल । भोपाल में बारिश के साथ जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर सामने आ गई है। पिछले साल ट्रैफिक पुलिस ने शहर में जलभराव वाले 35 स्थानों को चिह्नित कर नगर निगम पीडब्ल्यूडी और दूसरी संबंधित एजेंसियों को इनकी सूची भेजी थी। इन जगहों पर जलभराव की वजह तलाशने के साथ जरूरी सुधार करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने 17 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने का दावा किया। कहीं नालों की सफाई और मरम्मत कराई गई तो कहीं सड़क का लेवल ठीक किया गया। कुछ स्थानों पर गड्ढे भरने और सीसी रोड बनाने का काम भी किया गया। लेकिन इस बार बारिश ने इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है।

    बारिश के दौरान जिन जगहों पर सुधार किए जाने की बात कही गई थी उनमें से कई स्थानों पर फिर पानी जमा हो गया। हालात इतने खराब हुए कि कुछ जगहों पर सड़क तक बंद करनी पड़ी। 11 अगस्त को हुई बारिश में भी शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला था। अब समस्या सिर्फ पुराने स्थानों तक सीमित नहीं रही है। इस मानसून के दौरान शहर में जलभराव के 8 नए स्थान भी सामने आए हैं। ट्रैफिक पुलिस इन नए स्पॉट की सूची तैयार कर संबंधित एजेंसियों को भेजने की तैयारी कर रही है।

    इस बार किलोल पार्क डिपो चौराहा आरआरएल से एम्स रोड बाणगंगा रानी कमलापति बंसल प्लाजा वीआईपी रोड पर सेल्फी पार्क से पहले और लालघाटी से बैरागढ़ लेफ्ट टर्न तक के क्षेत्र नए जलभराव वाले स्थान के रूप में सामने आए हैं। इन जगहों पर बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    पुराने जलभराव वाले स्थानों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। गणेश मंदिर तिराहे पर जलभराव रोकने के लिए साइड वर्ज हटाकर पानी की निकासी का रास्ता बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बावजूद बारिश के दौरान यहां रास्ता बाधित होने की स्थिति बन गई। अब पीडब्ल्यूडी की ओर से निकासी व्यवस्था को और बेहतर करने का काम किया जा रहा है।

    ओल्ड केम्पियन तिराहे पर सड़क का लेवल सुधारने के लिए उसे ऊंचा किया गया और सीसी रोड भी बनाई गई। इसके बावजूद बारिश में यहां पानी जमा हो गया। खटलापुरा मंदिर क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए सड़क का समतलीकरण कराया गया था लेकिन बारिश के बाद यहां भी पानी रुकने की समस्या सामने आई। नर्मदापुरम रोड की सर्विस रोड पर गड्ढे भरने सहित कई सुधार कार्य किए गए थे लेकिन बारिश के दौरान यहां भी पानी की निकासी ठीक नहीं रही।

    बैरागढ़ क्षेत्र की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। ईसाइ कब्रिस्तान से सीहोर नाके तक सड़क के दोनों तरफ 150 से अधिक बड़े गड्ढे होने की बात सामने आई है। इन गड्ढों को भरने का दावा भी किया गया था लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया। जलभराव के साथ सड़क पर गड्ढे होने से वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।

    ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले साल चिह्नित किए गए 35 स्थानों की सूची संबंधित एजेंसियों को दी गई थी और इनमें अधिकांश जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं। इस बारिश में सामने आए 8 नए स्थानों की सूची भी संबंधित विभागों को भेजी जाएगी। वहीं नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों पर जलभराव के बजाय जल रुकाव की समस्या है और इसका समाधान किया जा रहा है। विभाग से जुड़े स्थानों पर सुधार कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।

    हालांकि लगातार सामने आ रही तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि अगर सुधार कार्य किए जा चुके हैं तो मामूली बारिश में कई स्थानों पर दोबारा पानी क्यों भर रहा है। भोपाल जैसे बड़े शहर में जलभराव सिर्फ यातायात की समस्या नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए स्पॉट के साथ पुराने स्थानों की निकासी व्यवस्था की भी दोबारा जांच जरूरी हो गई है ताकि हर बारिश में वही समस्या दोबारा खड़ी न हो।

  • भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों का बदलेगा शेड्यूल, 16 ट्रेनें कैंसिल और 48 का रूट डायवर्ट; सफर से पहले देखें लिस्ट

    भोपाल से गुजरने वाली ट्रेनों का बदलेगा शेड्यूल, 16 ट्रेनें कैंसिल और 48 का रूट डायवर्ट; सफर से पहले देखें लिस्ट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में रेल यात्रियों के लिए सितंबर और अक्टूबर के दौरान सफर की योजना बनाने से पहले ट्रेनों का नया शेड्यूल देखना जरूरी होगा। बीना स्टेशन पर आगासौद से बीना के बीच तीसरी रेल लाइन को जोड़ने के लिए यार्ड में बड़े स्तर पर काम किया जाना है। इस निर्माण कार्य के चलते 20 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया जाएगा। रेलवे की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अलग अलग तारीखों में 16 ट्रेनें निरस्त रहेंगी जबकि 48 ट्रेनों को बदले हुए मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के शुरुआती और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव किया जाएगा।

    इस बदलाव का असर भोपाल और रानी कमलापति से चलने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों पर भी पड़ेगा। भोपाल ग्वालियर एक्सप्रेस को 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक निरस्त रखा जाएगा। इसी तरह रानी कमलापति से रीवा के बीच चलने वाली ट्रेन भी कुछ दिनों तक अपने निर्धारित रास्ते के बजाय दूसरे मार्ग से चलेगी। ऐसे में जिन यात्रियों ने अक्टूबर में भोपाल से रीवा या दूसरे शहरों की यात्रा की योजना बनाई है उन्हें टिकट बुक करने या स्टेशन पहुंचने से पहले ट्रेन की स्थिति जरूर जांचनी होगी।

    रानी कमलापति रीवा ट्रेन 12186 को 8 से 14 अक्टूबर तक इटारसी कटनी जबलपुर और रीवा के रास्ते चलाया जाएगा। वापसी में रीवा से रानी कमलापति आने वाली ट्रेन 12185 भी इसी अवधि में कटनी जबलपुर और इटारसी होकर चलेगी। भोपाल धनबाद ट्रेन 11631 को 9 12 और 15 अक्टूबर को इटारसी जबलपुर कटनी साउथ और न्यू कटनी के रास्ते चलाया जाएगा। वहीं धनबाद से भोपाल आने वाली ट्रेन 11632 भी निर्धारित तारीखों पर बदले हुए मार्ग से संचालित होगी।

    भोपाल सिंगरौली ट्रेन 22165 को 10 13 और 14 अक्टूबर को इटारसी जबलपुर कटनी साउथ और न्यू कटनी के रास्ते चलाया जाएगा। सिंगरौली से भोपाल आने वाली ट्रेन 22166 को भी 9 और 13 अक्टूबर को बदले हुए मार्ग से चलाया जाएगा। भोपाल जोधपुर ट्रेन 14814 को 1 से 15 अक्टूबर तक संत हिरदाराम नगर मक्सी नागदा और कोटा होकर चलाया जाएगा। वापसी में जोधपुर भोपाल ट्रेन 14813 भी 1 से 14 अक्टूबर तक कोटा नागदा संत हिरदाराम नगर और मक्सी होकर भोपाल पहुंचेगी।

    भोपाल हावड़ा ट्रेन 13026 को 14 अक्टूबर और हावड़ा भोपाल ट्रेन 13025 को 12 अक्टूबर को इटारसी जबलपुर कटनी साउथ और न्यू कटनी के रास्ते चलाया जाएगा। इसी तरह भोपाल चोपन ट्रेन 11633 को 11 अक्टूबर और चोपन भोपाल ट्रेन 11634 को 12 अक्टूबर को बदले हुए मार्ग से संचालित किया जाएगा।

    कुछ ट्रेनों के प्रारंभिक और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव रहेगा। बिलासपुर भोपाल ट्रेन 18236 को 6 से 14 अक्टूबर तक मालखेड़ी में ही समाप्त किया जाएगा। वहीं भोपाल बिलासपुर ट्रेन 18235 को 7 से 15 अक्टूबर तक मालखेड़ी से शुरू किया जाएगा। भोपाल बीना की ट्रेन 61631 को 7 से 15 अक्टूबर तक मंडीबामोरा में समाप्त किया जाएगा। इसी अवधि में कुछ अन्य भोपाल बीना ट्रेनों के शुरुआती और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव किया जाएगा।

    रेलवे के इस काम का उद्देश्य बीना क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना और भविष्य में ट्रेनों के संचालन को अधिक सुगम बनाना है। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। खासकर भोपाल बीना और उत्तर भारत तथा पूर्वी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय का ध्यान रखना होगा। इसलिए यात्रा से पहले ट्रेन के निर्धारित समय मार्ग और प्रारंभिक या अंतिम स्टेशन की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यम से जांच लेना बेहतर रहेगा।

  • शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म

    शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET 2026 को लेकर लंबे समय से चल रही तैयारी अब अगले चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारी चयन मंडल ESB ने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पढ़ा रहे संबंधित शिक्षकों के लिए परीक्षा की नियम पुस्तिका जारी कर दी है। इसके साथ ही परीक्षा की तारीख और आवेदन प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के इस परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा जबकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू की जाएगी।

    अभ्यर्थी 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर संशोधन का अवसर भी दिया गया है। इसके लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए 1000 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा। इसके अलावा आवेदन के माध्यम के हिसाब से पोर्टल या कियोस्क शुल्क भी देना होगा। MP Online पोर्टल के जरिए आवेदन करने पर 60 रुपये और रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन करने पर 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में संशोधन के लिए भी अलग शुल्क लगेगा। पहली बार संशोधन करने पर 20 रुपये और अंतिम चरण में संशोधन के लिए 40 रुपये शुल्क तय किया गया है।

    TET की फीस को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों से परीक्षा शुल्क लिए जाने का विरोध किया है। संगठन की ओर से आवेदन और परीक्षा शुल्क माफ करने के साथ ऑनलाइन परीक्षा की जगह ऑफलाइन परीक्षा कराने की मांग की गई है। इसके अलावा शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष अध्ययन अवकाश देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाजनक परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग भी उठाई गई है।

    प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। इस तरह परीक्षा कुल 150 अंकों की होगी। उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। खास बात यह है कि परीक्षा में नकारात्मक अंक यानी नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। गलत उत्तर देने पर उम्मीदवार के प्राप्त अंकों में कटौती नहीं की जाएगी।

    परीक्षा में सफलता के लिए भी वर्ग के अनुसार न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। वहीं अन्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी प्रत्येक प्रश्न एक अंक का रहेगा और नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा की अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कार्यरत संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी किया गया है। नियमों के तहत पात्र शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। प्राथमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक प्राथमिक शिक्षक सहायक अध्यापक संविदा शाला शिक्षक वर्ग 3 प्रयोगशाला सहायक प्राथमिक शिक्षक विज्ञान सहित संबंधित श्रेणियों के शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी सख्त नियम लागू रहेंगे। मोबाइल फोन कैलकुलेटर स्मार्ट वॉच ब्लूटूथ डिवाइस ईयरफोन डिजिटल वॉच रिकॉर्डिंग उपकरण पेजर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान परीक्षा केंद्र में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। नकल अनुचित साधनों का इस्तेमाल फर्जी पहचान या किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार अतिरिक्त समय और Scribe यानी लेखन सहायक की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए निर्धारित पात्रता और जरूरी शर्तों का पालन करना होगा। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। इसमें परीक्षा केंद्र तारीख और समय समेत जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी। परीक्षा के बाद रिजल्ट और विषयवार मॉडल आंसर भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।

    अभ्यर्थियों को प्रश्नों और उत्तरों को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों पर विषय विशेषज्ञों की समिति विचार करेगी। यदि किसी प्रश्न को निरस्त किया जाता है तो उसके अंकों की गणना नियम पुस्तिका में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। ऐसे में परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख से लेकर परीक्षा केंद्र के नियम और न्यूनतम उत्तीर्ण अंक तक सभी जानकारियों को ध्यान से समझना जरूरी होगा।

  • निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च

    निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च


    भोपाल । मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मोहन सरकार ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट NICDIT की तीसरी एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में औद्योगिक विस्तार का रोडमैप सामने रखा। केंद्र सरकार की भव्य यानी BHAVYA योजना के तहत मध्य प्रदेश में 11 नए आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं पर करीब 8144.35 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इसके जरिए 9 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।

    सरकार का जोर केवल नए उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर भी है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को रणनीतिक रूप से अलग अलग शहरों और क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा ताकि रोजगार और निवेश के अवसर कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहें। इन पार्कों में प्लग एंड प्ले मॉडल के तहत कंपनियों को पहले से तैयार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि निवेश करने वाली कंपनियों को जमीन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी शुरुआती अड़चनों को कम करने में मदद मिलेगी और वे अपेक्षाकृत तेजी से उत्पादन या अपनी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकेंगी।

    प्रस्तावित 11 औद्योगिक पार्क उज्जैन के अवंतिका इंडस्ट्रियल सेंटर धार के भेंसोला देवास और शाजापुर के पिपलरावांन पालीकालन रतलाम के पलसोड़ी सीहोर के आष्टा इंडस्ट्रियल क्लस्टर सागर के मसवासी ग्रांट गुना के चैनपुरा ग्वालियर के मोहना जबलपुर के धरमपुरा कटनी के सिमरा और रीवा के शिवसागर में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन औद्योगिक क्षेत्रों के जरिए अलग अलग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है।

    धार के भेंसोला में प्रस्तावित पार्क को खास तौर पर टेक्सटाइल सेक्टर से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यह क्षेत्र पहले से मौजूद पीएम मित्रा पार्क के विस्तार के रूप में काम करेगा। इसके अलावा दूसरे औद्योगिक पार्कों में फार्मा ऑटोमोबाइल रिन्यूएबल एनर्जी सेमीकंडक्टर और आईटी एवं आईटीईएस जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की योजना है। इससे प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों के साथ नए दौर की तकनीक आधारित इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    औद्योगिक विकास के साथ सरकार ने महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी डे केयर सेंटर स्वास्थ्य सुविधाएं आधुनिक कैंटीन और विशेष हॉस्टल जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल तैयार करना है ताकि उद्योगों में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।

    नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मध्य प्रदेश के औद्योगिक विस्तार और निवेश को लेकर प्रस्तुत किए गए विजन पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से इन परियोजनाओं को गति मिलेगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश में नए उद्योग निवेश और रोजगार के बड़े अवसर तैयार हो सकते हैं।

  • MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल

    MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं का गवाह बना। कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर शिवलिंग को कंधे पर उठाते नजर आए तो कहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री की तुलना भगवान द्वारिकाधीश से कर दी। देवास में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान नेताओं की भीड़ एक खुली जीप पर भारी पड़ गई और कुछ नेता नीचे जा गिरे। वहीं छतरपुर में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोककर अपने स्कूल और सड़क से जुड़ी समस्याएं सामने रख दीं। इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इनकी खूब चर्चा हो रही है।

    इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग हाथ में लेते ही मुख्यमंत्री ने उसे अपने कंधे पर उठा लिया। उनका यह अंदाज फिल्म बाहुबली के चर्चित दृश्य की याद दिलाता नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पल का वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद इस दृश्य को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया।

    इसी कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री को लेकर अपने संबोधन में भगवान द्वारिकाधीश का संदर्भ दिया। उन्होंने चंदन नगर में सड़क निर्माण से जुड़ी मांग रखते हुए मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की अपील की। संबोधन के दौरान महापौर से एक और दिलचस्प गलती हो गई। वे मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेना चाह रहे थे लेकिन जुबान फिसलने के कारण उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को जल संसाधन मंत्री बता दिया। मुख्यमंत्री के इशारे के बाद महापौर ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली।

    उधर देवास के कांटाफोड़ में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई। यात्रा में शामिल होने के लिए एक खुली जीप में कई कांग्रेस नेता सवार हो गए। बताया गया कि जीप में 10 से ज्यादा लोग मौजूद थे। पीछे अधिक वजन होने के कारण जीप का अगला हिस्सा ऊपर उठ गया और पीछे बैठे कुछ नेता नीचे जा गिरे। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े समेत कई नेता जीप में मौजूद थे। हादसे में एक महिला कांग्रेस नेता के घायल होने की बात सामने आई है जिन्हें उपचार के दौरान टांके लगाए गए।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के सबका साथ जैसे राजनीतिक नारों को लेकर भी चुटकी ली गई। हालांकि रैली के दौरान वाहन पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की स्थिति सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है।

    छतरपुर के बसराही गांव में मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला बच्चों ने रोक लिया। मंत्री चंदला विधानसभा क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी बच्चों ने रास्ते में आकर उनसे अपने स्कूल और गांव की समस्याओं के बारे में बात की। बच्चों ने स्कूल तक खराब सड़क स्कूल की बाउंड्री वॉल और बिजली से जुड़ी परेशानियां बताईं। मंत्री ने वाहन से उतरकर बच्चों की बातें सुनीं और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।

    यह घटना इस मायने में भी खास रही कि बच्चों ने बिना किसी झिझक के सीधे मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर बच्चों की सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब देखना होगा कि बच्चों की ओर से बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। राजधानी में हाल ही में पदस्थ हुए एक आईएएस अधिकारी को सरकारी बंगला आवंटित होने और उसमें उनकी पसंद के अनुसार रेनोवेशन शुरू होने की बात कही जा रही है। इसी बीच अधिकारी की कटारा हिल्स इलाके में एक निजी बंगले में रुचि की चर्चा भी प्रशासनिक हलकों में है। हालांकि इस मामले से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़ी इन घटनाओं ने एक ही दिन में कई रंग दिखा दिए। मुख्यमंत्री का शिवलिंग उठाने वाला अंदाज हो या महापौर की जुबान फिसलने का मामला कांग्रेस नेताओं का जीप से गिरना हो या बच्चों का मंत्री का काफिला रोककर अपनी बात कहना इन सभी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • MP Weather Alert: पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का खतरा रीवा-बालाघाट समेत 14 जिलों में अलर्ट बांधों पर भी बढ़ा दबाव

    MP Weather Alert: पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का खतरा रीवा-बालाघाट समेत 14 जिलों में अलर्ट बांधों पर भी बढ़ा दबाव


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के असर से अगले तीन दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार मंगलवार को रीवा और बालाघाट में अति भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं टीकमगढ़ छतरपुर सागर छिंदवाड़ा पांढुर्णा नरसिंहपुर सिवनी मंडला कटनी शहडोल सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी मौसम का असर देखने को मिल सकता है। भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर जबलपुर डिंडौरी सतना मऊगंज मैहर उमरिया अनूपपुर पन्ना दमोह और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    बारिश के इस दौर के बीच बांधों और जलाशयों में भी पानी की आवक बढ़ने लगी है। मंडला डिंडौरी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण बरगी बांध के गेट इस साल पहली बार खोले जाने की तैयारी है। 18 अगस्त को सुबह 11 बजे बांध के 9 गेट 0.78 मीटर की औसत ऊंचाई तक खोलकर करीब 1031 क्यूमेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। 17 अगस्त की रात बांध का जलस्तर 420.80 मीटर दर्ज किया गया था जबकि पानी की आवक करीब 1620 क्यूमेक बताई गई।

    उमरिया में भी जोहिला डैम के दो गेट एक एक मीटर खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में नदी नालों और बांधों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है।

    हालांकि प्रदेश में बारिश का वितरण अभी भी एक समान नहीं है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में अब तक औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में बारिश की कमी 4 से 58 प्रतिशत तक बताई गई है। पश्चिमी हिस्से के भी कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। दूसरी तरफ अनूपपुर शहडोल सीधी सिंगरौली उमरिया बड़वानी भिंड भोपाल बुरहानपुर देवास ग्वालियर खंडवा खरगोन राजगढ़ और गुना में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। इसके अलावा ऊपरी स्तर पर दो अन्य चक्रवाती परिसंचरण और दक्षिणी हिस्से से शीयर जोन गुजर रहा है। इन मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 21 अगस्त के दौरान मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश की संभावना बनी रहेगी।

    ऐसे में अगले तीन दिन प्रदेश के कई हिस्सों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। भारी बारिश वाले जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी जा सकती है। खासकर नदी नालों और जलाशयों के आसपास जाने से बचना जरूरी है क्योंकि लगातार बारिश के दौरान जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।

  • भोपाल में टैक्सी हड़ताल का सीधा असर: रेलवे स्टेशन पर घंटों कैब का इंतजार ऑटो बना सहारा तो किराया भी बढ़ा

    भोपाल में टैक्सी हड़ताल का सीधा असर: रेलवे स्टेशन पर घंटों कैब का इंतजार ऑटो बना सहारा तो किराया भी बढ़ा


    भोपाल । भोपाल में टैक्सी चालक संघ की हड़ताल का असर अब आम यात्रियों पर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार रात 12 बजे से Ola Uber और दूसरी ऐप आधारित कैब सेवाओं का संचालन बंद होने के बाद बुधवार सुबह भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्टेशन पहुंचने वाले कई यात्रियों ने ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन लंबे इंतजार के बावजूद वाहन उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसे में यात्रियों को मजबूरी में ऑटो और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि कैब सेवा बंद होने का फायदा उठाकर कुछ ऑटो चालक सामान्य किराए से डेढ़ से दो गुना तक किराया मांग रहे हैं।

    स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों को सामान के साथ काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कई लोगों के साथ बच्चे और बुजुर्ग भी थे जिससे परेशानी और बढ़ गई। यात्री आकांक्षा ने बताया कि वह करीब आधे घंटे से कैब का इंतजार कर रही थीं। उनके घुटने में परेशानी है और उनके साथ दो बेटियां भी हैं। एक बच्ची की उम्र दो साल और दूसरी की आठ साल है। उन्हें रोहित नगर स्थित अपोलो अस्पताल जाना था लेकिन कैब उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे विकल्प तलाशने पड़े।

    इसी तरह कर्नाटक से भोपाल पहुंचे यात्री सत्यम को सुल्तानिया अस्पताल जाना था। उन्होंने बताया कि वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं और कर्नाटक से भोपाल पहुंचे हैं। उन्होंने काफी देर तक ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की लेकिन वाहन नहीं मिला। इसके बाद उन्हें स्टेशन के बाहर दूसरे साधन तलाशने पड़े। ऐसे यात्रियों के लिए हड़ताल के दौरान ऑटो ही प्रमुख विकल्प बन गया है।

    इस बीच टैक्सी चालक संगठनों की ओर से हड़ताल को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ उनकी मुख्य मांग टैक्सी का उचित और स्थायी किराया तय करने की है। ड्राइवरों का कहना है कि पेट्रोल और दूसरे ईंधन की कीमतों के साथ वाहन की किस्त बीमा मरम्मत और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है जबकि कंपनियों की ओर से मिलने वाला किराया उनकी लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

    संघ की मांग है कि सरकार टैक्सी के लिए प्रति किलोमीटर उचित किराया तय करे। संगठन पहले ही 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर के साथ टाइम चार्ज और बेस फेयर की मांग कर चुका है। इसके अलावा प्राइवेट नंबर की कार बाइक और ई रिक्शा के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भी की जा रही है। संगठन का आरोप है कि ऐसे वाहनों के एग्रीगेटर सेवाओं में इस्तेमाल से कमर्शियल टैक्सी चालकों की कमाई प्रभावित होती है।

    हड़ताल के दौरान भोपाल स्टेशन पर यात्रियों को छोड़ने पहुंच रही कुछ कैब को संगठन से जुड़े लोगों द्वारा रोकने की बात भी सामने आई है। अवधपुरी से स्टेशन पहुंचे एक यात्री ने बताया कि उनकी कैब को भी स्टेशन पर रोक लिया गया और उन्हें किराया भुगतान करने नहीं दिया गया। हालांकि आरटीओ की ओर से साफ कहा गया है कि ओवरचार्जिंग की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

    टैक्सी संगठनों की ओर से 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना प्रदर्शन करने की बात कही गई है। संगठन मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन देकर अपनी मांगों के जल्द समाधान की मांग करेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन टैक्सी बंद में बदला जा सकता है।

    हड़ताल का सबसे ज्यादा असर रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट बस स्टैंड और शहर के प्रमुख इलाकों के बीच सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ने की संभावना है। संगठन ने आम लोगों को हो रही परेशानी के लिए खेद जताते हुए कहा है कि ड्राइवर अपनी आजीविका से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन कर रहे हैं और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।