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  • शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में गूंजी खुशखबरी, बांधवगढ़ की रानी MT-3 दूसरी बार बनी मां..

    शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में गूंजी खुशखबरी, बांधवगढ़ की रानी MT-3 दूसरी बार बनी मां..

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। बांधवगढ़ से लाई गई और ‘बांधवगढ़ की रानी’ के नाम से पहचानी जाने वाली बाघिन MT-3 ने दूसरी बार दो शावकों को जन्म दिया है। इससे रिजर्व में बाघों की नई पीढ़ी के विकास को लेकर उत्साह बढ़ा है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी MT-3 दो शावकों की मां बनी थी। अब उसके साथ दो नए शावक दिखाई दिए हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोशल मीडिया पर नन्हे शावकों की तस्वीरें साझा कर इस खबर की जानकारी दी। माधव टाइगर रिजर्व में अब तक कुल छह शावकों का जन्म हो चुका है। MT-3 के दो नए शावकों के सामने आने के साथ यहां बाघों की कुल संख्या 11 पहुंच गई है। रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने का यह घटनाक्रम वन्यजीव संरक्षण और बाघों के प्राकृतिक प्रजनन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    भरकुली गेट की पूर्वी रेंज में मार्च 2023 के दौरान MT-1 मादा, MT-2 नर और MT-3 मादा बाघ को छोड़ा गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में MT-3 ने पहली बार दो शावकों को जन्म दिया। अब दूसरी बार उसके दो नए शावक सामने आए हैं। इन दोनों शावकों को मिलाकर पूर्वी रेंज में बाघों की संख्या छह हो गई है। इस क्षेत्र में बाघों की बढ़ती मौजूदगी रिजर्व में उनके कुनबे के विस्तार को दर्शाती है।

    रिजर्व की दक्षिणी रेंज में भी बाघों की मौजूदगी बनी हुई है। सेलिंग क्लब गेट के आसपास के क्षेत्र में MT-5 नर और MT-4 मादा बाघ मौजूद हैं। MT-4 के साथ पहले दिखाई दिए दो शावक अब बड़े हो रहे हैं और जंगल में घूमते नजर आने लगे हैं। इन दोनों शावकों को शामिल करने पर दक्षिणी रेंज में बाघों की संख्या चार बताई गई है। वहीं, MT-6 मादा बाघ को जुलाई में भोपाल के वन विहार भेज दिया गया था।

    रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच MT-1 की लंबे समय से निगरानी के दौरान मौजूदगी दर्ज नहीं होने का विषय भी वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। दूसरी ओर, MT-3 के दोबारा मां बनने से यहां बाघों के प्रजनन और उनके कुनबे के विस्तार की उम्मीद मजबूत हुई है।

    माधव नेशनल पार्क में बाघों को बसाने की शुरुआत 10 मार्च 2023 को हुई थी। उस दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने MT-1 मादा और MT-2 नर बाघ को जंगल में छोड़ा था। इसके बाद 14 मार्च 2023 को MT-3 मादा बाघिन को भी यहां बसाया गया। वर्ष 2024 में उसके पहले दो शावकों का जन्म हुआ।

    इसके बाद 7 मार्च 2025 को माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह मध्य प्रदेश का नौवां और देश का 58वां टाइगर रिजर्व बना। 10 मार्च 2025 को MT-4 मादा बाघिन को यहां छोड़ा गया। बाद में MT-5 नर और MT-6 मादा बाघ को भी रिजर्व में बसाया गया। इस तरह अलग-अलग चरणों में बाघों को यहां लाकर उनकी आबादी विकसित करने का प्रयास किया गया।

    माधव टाइगर रिजर्व के संचालक उत्तम शर्मा ने MT-3 के दूसरी बार दो शावकों को जन्म देने की पुष्टि की है। वर्ष 2024 में भी वह दो शावकों को जन्म दे चुकी है। अब नए शावकों के आने से रिजर्व में बाघों की संख्या 11 हो गई है। आने वाले समय में इन शावकों की बढ़त और उनकी मौजूदगी पर वन विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।

  • शिवपुरी में नो एंट्री के बावजूद घुसा ईंटों से भरा ट्रक, रामकिशन के दोनों पैर कुचले, व्यवस्था पर उठे सवाल

    शिवपुरी में नो एंट्री के बावजूद घुसा ईंटों से भरा ट्रक, रामकिशन के दोनों पैर कुचले, व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश। शिवपुरी शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और यातायात व्यवस्था के पालन को लेकर एक हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं। शहर के फतेहपुर क्षेत्र में पुलिस सहायता केंद्र के सामने ईंटों से भरे एक ट्रक की चपेट में आने से रामकिशन आदिवासी के दोनों पैर कुचल गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाने के बाद उनकी हालत को देखते हुए शासकीय मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में भर्ती कराया गया।

    जानकारी के अनुसार, शिवपुरी निवासी 35 वर्षीय रामकिशन आदिवासी रविवार सुबह करीब 10:30 बजे फतेहपुर में पुलिस सहायता केंद्र के सामने स्थित तिराहे पर खड़े थे। इसी दौरान बड़ौदी की ओर से ईंटों से भरा एक ट्रक वहां पहुंचा। ट्रक का पंजीकरण नंबर यूपी 78 डीएन 1927 बताया गया है। तिराहे पर मुड़ते समय रामकिशन ट्रक के पहियों की चपेट में आ गए।

    इस हादसे में उनके दोनों पैर ट्रक के पहियों के नीचे आ गए, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए। एक पैर में गंभीर चोट आने की जानकारी भी सामने आई है। घटनास्थल से उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए बाद में उन्हें शासकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। घटना के बाद क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और नो एंट्री के नियमों के पालन को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    हादसे की जगह को लेकर भी यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दुर्घटना फतेहपुर पुलिस सहायता केंद्र के सामने हुई, जबकि थीम रोड पर बड़ौदी स्थित चिंकारा प्लांटेशन के पास वन नाका मौजूद है। इसी स्थान के सामने से फतेहपुर की ओर जाने वाली पक्की सड़क जुड़ती है। इस मार्ग से शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने हाइट लिमिट पोल लगाया था।

    हालांकि, कुछ समय बाद किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से यह पोल टूट गया। इसके बाद इसे दोबारा लगाने की दिशा में कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में भारी वाहनों को निर्धारित सीमा के भीतर रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लंबे समय से प्रभावी नहीं है। स्थानीय यातायात व्यवस्था में इस कमी को हादसे के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यातायात पुलिस के अनुसार, नो एंट्री के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई जारी है। यातायात थाना शिवपुरी के प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि जनवरी से अब तक 78 वाहनों के चालान काटे गए हैं और उनसे 3.90 लाख रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है। उन्होंने कहा कि यदि नगर पालिका हाइट लिमिट पोल दोबारा लगा देती है, तो भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने में मदद मिलेगी।

    वहीं, संबंधित व्यवस्था को लेकर दिन के समय नो एंट्री में ट्रक और डंपरों का प्रवेश रोकने के लिए कदम उठाने की बात कही गई है। बड़ौदी वन नाके पर पहले लगे हाइट लिमिट पोल के बारे में जानकारी जुटाने और निर्धारित स्थान पर इसे फिर से लगवाने की बात भी कही गई है।

    रामकिशन के साथ हुए हादसे ने शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और नो एंट्री के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। अब इस मामले में हाइट लिमिट पोल दोबारा लगाने और प्रतिबंधित समय में भारी वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

  • ‘जीव-जगत-जगदीश्वर’ थीम पर सजा आध्यात्मिक मंच, आधुनिक तकनीक और ध्यान के संगम ने दिया शांति का संदेश

    ‘जीव-जगत-जगदीश्वर’ थीम पर सजा आध्यात्मिक मंच, आधुनिक तकनीक और ध्यान के संगम ने दिया शांति का संदेश


    भोपाल  । भोपाल में Healing for World Peace 2.0 का आयोजन व्यक्तिगत शांति और वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ संपन्न हुआ। इस आध्यात्मिक पहल का उद्देश्य लोगों को ध्यान योग और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने भीतर शांति तलाशने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम की केंद्रीय थीम जीव-जगत-जगदीश्वर रही। इसके जरिए मानव जीवन प्रकृति और परम चेतना के बीच संबंध को समझने तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। आयोजन में पारंपरिक आध्यात्मिक विधाओं के साथ आधुनिक तकनीक का अनूठा मेल देखने को मिला।

    Healing for World Peace 2.0 को एक ऐसे साझा मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया जहां लोग रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर होकर अपने मन और विचारों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। कार्यक्रम में 360 डिग्री इमर्सिव विजुअल अनुभव और हेडफोन आधारित ऑडियो के माध्यम से प्रतिभागियों को एक अलग तरह का अनुभव देने का प्रयास किया गया। योग ध्यान एनर्जी हीलिंग और कथा जैमिंग जैसी गतिविधियों ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आत्मचिंतन करने और मानसिक संतुलन की अहमियत समझने का अवसर मिला।

    कार्यक्रम में ऊर्जा गुरु आयुष गुप्ता योगिनी आरविका गुप्ता और कथावाचिका पलक किशोरी की उपस्थिति ने आध्यात्मिक वातावरण को खास बनाया। आयोजन के दौरान यह संदेश दिया गया कि विश्व शांति की शुरुआत किसी बड़े बदलाव से पहले व्यक्ति के अपने भीतर से होती है। जब मनुष्य अपने विचारों भावनाओं और व्यवहार में संतुलन विकसित करता है तो उसका असर उसके परिवार और आसपास के समाज पर भी पड़ता है। इसी सकारात्मक प्रभाव को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाकर अधिक संवेदनशील और शांतिपूर्ण समाज की कल्पना की जा सकती है।

    आयोजन का उद्देश्य केवल लोगों को कुछ समय के लिए ध्यान और आध्यात्मिकता से जोड़ना नहीं था बल्कि शांति के विचार को निरंतर जनअभियान का रूप देना भी रहा। कार्यक्रम ने अलग अलग स्थानों और देशों से जुड़े प्रतिभागियों को साझा उद्देश्य के साथ जोड़ने का प्रयास किया। सामूहिक प्रार्थना सकारात्मक संकल्प और आध्यात्मिक जागरूकता के जरिए लोगों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि समाज में शांति और सद्भाव कायम करने के लिए हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव और मानसिक दबाव के बीच ऐसे आयोजन लोगों को अपने लिए समय निकालने और जीवन को अधिक सजगता से देखने की प्रेरणा दे सकते हैं। योग और ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों को समझने तथा भावनात्मक संतुलन विकसित करने की दिशा में प्रयास कर सकता है। कार्यक्रम में प्रस्तुत आध्यात्मिक विचारों का केंद्र भी यही रहा कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए और व्यक्ति की सकारात्मकता उसके व्यवहार के जरिए दूसरों तक पहुंच सकती है।

    आयोजकों की दीर्घकालिक परिकल्पना भोपाल को ध्यान आध्यात्मिकता आत्म-अन्वेषण और विश्व शांति से जुड़े आयोजनों के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की है। इस दिशा में ऐसे कार्यक्रमों को अहम माना जा रहा है जो विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को साझा मंच पर लाकर संवाद और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें।

    इस आयोजन को सफल बनाने में कई शैक्षणिक संस्थानों संगठनों और सहयोगी भागीदारों का योगदान रहा। इनमें SAGE University Manasrovar College LNCT Sagar Group Taj Lakefront Sukoon-e-Bhopal WiseLife Madhya Pradesh Tourism MP Culture Department Media Square GA Studios Anantam Agarwal Jewellers और The Fifth Veda सहित अन्य सहयोगी शामिल रहे। आयोजकों ने दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दिलीप सूर्यवंशी और SAGE University के संजीव अग्रवाल सहित सभी सहयोगियों प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    Healing for World Peace 2.0 का मूल संदेश यही रहा कि शांति की शुरुआत स्वयं से होती है। व्यक्ति जब अपने भीतर करुणा सकारात्मकता और संतुलन विकसित करता है तो वह अपने आसपास भी बेहतर वातावरण बनाने में योगदान दे सकता है। इसी सोच के साथ भोपाल में आयोजित यह पहल व्यक्तिगत जागरूकता को व्यापक सामाजिक सद्भाव और विश्व शांति के विचार से जोड़ने का प्रयास बनी।

  • करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात

    करैरा में 27 और 28 अक्टूबर को लगेगा धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार, कलयुग के राक्षसों पर कही बड़ी बात


    शिवपुरी जिले: 
    के करैरा स्थित बगीचा सरकार मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कलयुग में राक्षसी प्रवृत्तियों के बदलते स्वरूप पर अपनी बात रखी। उन्होंने त्रेतायुग के राक्षसों और वर्तमान समय के नकारात्मक व्यवहार की तुलना करते हुए श्रद्धालुओं से सवाल किया कि पहले राक्षस किस तरह के काम करते थे और आज उनके व्यवहार तथा गतिविधियों में क्या बदलाव आया है। कथा के दौरान उन्होंने जीवन, कर्म और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।

    पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से कथा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहले के समय में राक्षस यज्ञ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में हड्डियां डालकर बाधा उत्पन्न करते थे। वहीं, आज के दौर में राक्षसी प्रवृत्तियां अलग रूप में दिखाई देती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर भ्रामक और नकारात्मक पोस्ट के जरिए लोगों के बीच गलत संदेश फैलाना भी ऐसी प्रवृत्ति का उदाहरण है।

    कथा के दौरान उन्होंने परमात्मा की सर्वव्यापकता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर को पाने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के क्रोध और पाप रूपी तृष्णा का त्याग करना चाहिए। उन्होंने जीवन में सुधार के लिए रामायण के विभिन्न पात्रों और प्रसंगों से सीख लेने की बात कही। उनके मुताबिक, रामायण व्यक्ति को सामान्य अवस्था से महान बनने की प्रेरणा देती है, जबकि केवट और शबरी जैसे पात्र विनम्रता और विशिष्टता का संदेश देते हैं।

    उन्होंने सुग्रीव और विभीषण के प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की शरण में जाने के महत्व को समझाया। साथ ही हनुमानजी के जीवन और समर्पण का उदाहरण देते हुए साधारण जीवात्मा से आध्यात्मिक रूप से ऊंचे स्तर तक पहुंचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सुधार के लिए रामकथा, कर्मों को बेहतर बनाने के लिए गीता और मृत्यु के विषय को समझने के लिए भागवत का श्रवण महत्वपूर्ण है।

    पंडित शास्त्री ने कथा में एक पौराणिक प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने हनुमानजी को रामचरितमानस का वास्तविक रचयिता बताते हुए कहा कि हनुमानजी ने अपने नाखूनों से पत्थरों पर रामकथा लिखी थी। उनके अनुसार, महर्षि वाल्मीकि के मन में द्वेष उत्पन्न होने की आशंका से हनुमानजी ने उस रचना को समुद्र में विसर्जित कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानजी के वचन के कारण वाल्मीकि ने कलयुग में गोस्वामी तुलसीदास के रूप में अवतार लेकर रामचरितमानस को जनभाषा में लोगों तक पहुंचाया। यह प्रसंग उन्होंने रामकथा के महत्व को समझाने के लिए सुनाया।

    कथा में श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर चर्चा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रैलियों में भीड़ जुटाई जाती है, जबकि कथा में सच्चे भक्त पहुंचते हैं। उन्होंने अपने प्रति आकर्षण का श्रेय हनुमानजी को देते हुए कहा कि उनका क्रेज नहीं, बल्कि हनुमानजी का प्रभाव है, जो कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने अधिक भीड़ देखने के इच्छुक लोगों को 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले दिव्य दरबार में आने के लिए कहा।

    करैरा में रामकथा के साथ दिव्य दरबार को लेकर भी लोगों की रुचि बनी हुई है। 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले आयोजन का उल्लेख करते हुए पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। कथा के दौरान उनके प्रवचनों में धार्मिक आस्था, जीवन सुधार, कर्म और आधुनिक समय में नकारात्मकता जैसे विषय प्रमुख रहे।

  • नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर

    नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर


    बड़वानी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के ग्राम अजगरिया में आयोजित शिवपंथी नशामुक्ति कार्यक्रम में नशे के खिलाफ जनजागरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा नाश की जड़ है और अपने साथ कई तरह की बुराइयां तथा सामाजिक विकृतियां लेकर आता है। हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने के लिए प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री ने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशामुक्ति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक भागीदारी से इस अभियान को जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवपंथ के संस्थापक परम पूज्य गुरुवर्य श्री वनसिंह महाराज को नमन किया। उन्होंने श्री कालूसिंह महाराज और सुमली माताजी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और इसे नशे की प्रवृत्ति में बर्बाद करने के बजाय ऐसे कार्यों में लगाना चाहिए जिनसे जीवन सार्थक बने। आध्यात्मिकता और सत्संग के माध्यम से लोगों को सकारात्मक दिशा देने का शिवपंथ का प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नशामुक्त समाज बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें परिवारों सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक नशे की बुराई को दूर करने के लक्ष्य की दिशा में सभी को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था और जनजागरण को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष मना रही है। किसान और ग्रामीण परिवार गौपालन तथा दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सरकार गौशालाओं के संचालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता देगी। दूध समितियों के माध्यम से दूध बेचने पर ग्रामीणों को आमदनी का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोगों से दूध और पौष्टिक आहार अपनाने तथा नशे से दूर रहने की अपील की।

    बड़वानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भी कीं। इनमें ग्राम में खुपजदेव धाम का निर्माण और वहां तक सड़क बनाने की घोषणा शामिल है। ग्राम अजगरिया में बालक और बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास बनाए जाने की बात कही गई। ग्राम पांजरिया ध में 50 लाख रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त शेड बनाने तथा ग्राम धवली में पुलिस चौकी स्थापित करने की घोषणा भी की गई।

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषा और जनजातीय समुदाय से जुड़े विषयों पर भी ध्यान देने की बात कही। बारेली भाषा के संरक्षण और विकास के लिए दस्तावेजों के संरक्षण तथा शोध पर काम किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं जांच परामर्श और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही वन औषधियों के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़वानी में वन औषधि शोध संस्थान स्थापित करने की बात कही गई।

    वन अधिकार के तहत जिन जनजातीय परिवारों को अभी पट्टे नहीं मिले हैं उन्हें पट्टे देने और जिन परिवारों को पट्टे मिल चुके हैं उनकी रजिस्ट्री कराने की घोषणा भी की गई। इन घोषणाओं का उद्देश्य क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रयासों को गति देना है।

    शिवपंथी सत्संग संगठन लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। संगठन की मान्यता है कि आध्यात्मिकता सत्संग और अनुशासित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति को नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिल सकती है। शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। धार्मिक भजनों के साथ दूध प्रसादी और चावल की खिचड़ी का वितरण किया गया। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज बनाने और क्षेत्र के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया।

  • शिवपुरी में करवा चौथ पर रात 8:25 बजे होगा चंद्रोदय, भद्रा और शुक्रास्त का दोष नहीं, जानें व्रत से जुड़ी खास बातें

    शिवपुरी में करवा चौथ पर रात 8:25 बजे होगा चंद्रोदय, भद्रा और शुक्रास्त का दोष नहीं, जानें व्रत से जुड़ी खास बातें


    शिवपुरी: में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को इस बार चंद्रमा के दर्शन के लिए रात 8:25 बजे तक इंतजार करना पड़ सकता है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को पर्व के अवसर पर चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:25 बजे बताया गया है। पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ महिलाएं दिनभर व्रत रखेंगी। शाम को पूजा-अर्चना के बाद चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाएगी।

    करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास करती हैं और शाम को निर्धारित विधि से पूजा करती हैं। चंद्रमा निकलने के बाद उसके दर्शन और पूजा के साथ व्रत का पारण किया जाता है। इसी वजह से चंद्रोदय के समय को लेकर महिलाओं में खास उत्सुकता रहती है।

    इस बार पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए भी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए किसी विशेष धार्मिक बाधा का उल्लेख नहीं है। ऐसे में नवविवाहित महिलाएं भी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इस पर्व की तैयारी कर सकती हैं।

    आचार्य पं. प्रमोद शास्त्री के अनुसार, करवा चौथ के दिन शुक्रास्त का दोष नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, शुक्र का उदय 28 अक्टूबर की सुबह हो जाएगा। इसके साथ ही इस बार पर्व के दिन भद्रा भी नहीं है। इन ज्योतिषीय स्थितियों के कारण व्रत रखने वाली महिलाएं बिना इन विशेष बाधाओं की चिंता किए पूजा की तैयारी कर सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन स्थितियों को पर्व के आयोजन से जोड़कर देखा जाता है।

    इस बार करवा चौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के साथ शिव योग का संयोग भी बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा का वृषभ राशि में होना शुभ माना जाता है। इसे वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और आपसी तालमेल का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, ये धारणाएं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    करवा चौथ का पर्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना से भी जुड़ा हुआ है। महिलाएं इस दिन विशेष पूजा की तैयारी करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत रखती हैं। दिनभर उपवास के बाद शाम को पूजा की जाती है और चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है।

    चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं उसे अर्घ्य देती हैं और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं। कई घरों में इस अवसर पर परिवार के सदस्य भी पूजा में शामिल होते हैं। छतों और खुले स्थानों पर चांद का इंतजार करते परिवारों के बीच यह परंपरा पर्व का प्रमुख हिस्सा बनी रहती है।

    करवा चौथ को बंगाल में दशरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व से जुड़ी परंपराओं और पूजा की विधियों में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना इसका प्रमुख भाव है। शिवपुरी में भी महिलाएं चंद्रोदय के संभावित समय को ध्यान में रखते हुए पूजा और व्रत की तैयारियां करेंगी।

  • आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर

    आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर


    बड़वानी । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी के आदिवासी अंचल में शिवपंथ समुदाय और गायत्री परिवार की ओर से किए जा रहे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार सनातन संस्कृति के मूल्य और अनुशासन सिखाना बेहद जरूरी है। इससे आने वाली पीढ़ी संस्कारवान चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बन सकेगी। उन्होंने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को भी समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 अक्टूबर को अपने बड़वानी प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा में कहा कि शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आदिवासी अंचल में रात्रि विश्राम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले कई प्रयासों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय के महाराज बंशी और उनके अनुयायी भगवान की भक्ति तथा महादेव की आराधना के साथ नशे के विरुद्ध जनजागरण अभियान चला रहे हैं। आदिवासी समाज में नशे की समस्या को दूर करने के लिए इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए। जब लोगों की भागीदारी से नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे अभियान चलाए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय की ओर से धार्मिक आस्था को सामाजिक सुधार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे अभियान लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने गायत्री परिवार की गतिविधियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि बीती रात गायत्री परिवार के आश्रम में रुकने का अवसर मिला। यहां बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कार आधारित कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। आश्रम में सुबह योगाभ्यास सहित विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें सुखद अनुभूति हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा के साथ अनुशासन और नैतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को अपने परिवार समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराना भी जरूरी है। सनातन संस्कृति की परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित कराकर उनमें अच्छे व्यवहार सेवा भावना और चरित्र निर्माण की नींव मजबूत की जा सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार इस तरह के प्रयास युवाओं को सही दिशा देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बड़वानी को निमाड़ का पेरिस बताते हुए कहा कि इस प्रवास के दौरान समाज निर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े कई प्रेरणादायी कार्य देखने को मिले। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा से दीपावली तक का समय सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। ऐसे पर्व समाज में सद्भाव सेवा और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जनकल्याण सामाजिक उत्थान और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और समाज के साझा प्रयासों से संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने नशे से दूर रहने और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने जैसे उद्देश्यों को मजबूती मिलेगी।

  • शिवपुरी में छात्रा से सरेराह अभद्रता और मारपीट, बाल पकड़कर पीटा, विरोध पर बचाने आई युवती से भी बदसलूकी

    शिवपुरी में छात्रा से सरेराह अभद्रता और मारपीट, बाल पकड़कर पीटा, विरोध पर बचाने आई युवती से भी बदसलूकी

    शिवपुरी: में रविवार शाम एक छात्रा के साथ सरेराह अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया है। शहर के फिजिकल थाना क्षेत्र में विष्णु मंदिर के सामने कार सवार चार युवकों पर 17 वर्षीय छात्रा को परेशान करने, अश्लील टिप्पणियां करने और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट करने के आरोप हैं। छात्रा को बचाने के लिए पहुंची एक अन्य युवती के साथ भी आरोपियों ने कथित तौर पर झूमाझटकी की। घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप किया और एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। बाकी तीन आरोपी मौके से फरार हो गए।

    जानकारी के अनुसार, छात्रा रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे अपनी स्कूटी से पुरानी शिवपुरी में एक दोस्त के यहां पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान सिद्धेश्वर मेला ग्राउंड की ओर से एक कार में सवार चार युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि युवकों ने छात्रा की स्कूटी का पीछा किया और लगातार हॉर्न बजाकर उसे परेशान करने लगे। इसके बाद उन्होंने उसकी स्कूटी के सामने वाहन लाकर रास्ता रोकने जैसी हरकत की और अश्लील टिप्पणियां कीं।

    छात्रा ने युवकों की हरकतों का विरोध किया और विष्णु मंदिर के सामने अपनी स्कूटी रोक दी। आरोप है कि इसके बाद कार से उतरे चारों युवकों ने उसके साथ बदसलूकी की और उसकी चोटी पकड़कर मारपीट शुरू कर दी। व्यस्त सड़क पर हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंच गए। जब एक युवती ने छात्रा को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया, तो आरोपियों ने उसके बाल पकड़कर उसे भी घसीटा और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया।

    घटना देख रहे लोगों ने विरोध करते हुए आरोपियों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान एक युवक को पकड़ लिया गया, जबकि तीन अन्य युवक कार लेकर वहां से भाग निकले। स्थानीय लोगों ने पकड़े गए युवक को फिजिकल थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।

    पकड़े गए युवक की पहचान पुराना अमोला निवासी बृजेंद्र गुर्जर के रूप में बताई गई है। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर अपने तीन साथियों के नाम बृजमोहन गुर्जर, मोनू चंदेल और विक्रम बुंदेला बताए। घटना में इस्तेमाल की गई कार विक्रम बुंदेला की बताई जा रही है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ वाहन का भी पता लगाने में जुटी है।

    पीड़ित छात्रा की मां ने घटना पर नाराजगी जताते हुए पुलिस अधीक्षक से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी कोचिंग और पढ़ाई से जुड़े काम के लिए घर से निकली थी, लेकिन रास्ते में उसे इस तरह की घटना का सामना करना पड़ा। उन्होंने चिंता जताई कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर छात्राओं के साथ ऐसी घटनाएं होती रहेंगी, तो उनकी पढ़ाई और रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होगी।

    मामले में पुलिस के अनुसार, छात्रा की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य की तलाश जारी है। पुलिस घटना में इस्तेमाल की गई कार को भी तलाश रही है। थाना प्रभारी अविनाश राठौड़ के मुताबिक, फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर में देवी जागरण और भंडारे में खूनी बवाल, बुलेट धीरे चलाने की बात पर लौटे 6-7 युवक और मचा दिया तांडव

    जबलपुर में देवी जागरण और भंडारे में खूनी बवाल, बुलेट धीरे चलाने की बात पर लौटे 6-7 युवक और मचा दिया तांडव


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में देवी जागरण और भंडारे के दौरान मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद हिंसक हो गया। रांझी थाना क्षेत्र के आजाद नगर में रविवार देर रात कुछ युवकों ने लाठी डंडों और धारदार हथियारों से लोगों पर हमला कर दिया। इस घटना में दो महिलाओं सहित आठ लोग घायल हो गए। घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

    जानकारी के मुताबिक आजाद नगर में दुर्गा उत्सव के समापन के अवसर पर देवी जागरण और भंडारे का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए थे। रात करीब एक बजे जब जागरण चल रहा था और भंडारे में लोगों की भीड़ मौजूद थी तभी बुलेट पर सवार दो युवक तेज रफ्तार से वहां से निकले। आयोजन स्थल पर बच्चे और महिलाएं भी मौजूद थे। ऐसे में लोगों ने दोनों युवकों को रोककर बाइक धीरे चलाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ देर तक कहासुनी होने के बाद दोनों युवक वहां से चले गए।

    प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार विवाद खत्म होने के करीब 15 से 20 मिनट बाद छह से सात युवक लाठी डंडे और धारदार हथियार लेकर वापस पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से कार्यक्रम में अफरा तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे। हमले में रवि गोटिंया रागिनी गोटिंया पप्पू वर्मा अनुज कोल पारस यादव आदि गोटिंया बिट्टू झारिया और मनीषा गोटिंया घायल हुए हैं। घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। स्थानीय निवासी और पार्षद पति राजेश कुमार यादव ने बताया कि यहां हर साल दुर्गा उत्सव के समापन पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें आसपास के क्षेत्रों से भी लोग शामिल होते हैं। उनके मुताबिक इस बार भी जागरण और भंडारे में काफी भीड़ थी। बाइक तेज गति से निकालने से रोकने पर विवाद शुरू हुआ और बाद में आरोपियों ने लौटकर हमला कर दिया।

    राजेश यादव ने बताया कि घटना के पीछे किसी पुरानी रंजिश की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने पुलिस से आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई में देरी होती है तो स्थानीय लोग प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

    रांझी थाना प्रभारी उमेश गोल्हानी के मुताबिक शुरुआती जांच में समीर वंशकार का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस के अनुसार पहले कुछ लोगों पर हमला किया गया और जब अन्य लोग बीच बचाव करने पहुंचे तो उन्हें भी निशाना बनाया गया। आरोप है कि हमलावरों में से एक ने धारदार हथियार से वार किया। पुलिस सभी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।

    घटना से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई है कि जिस देवी जागरण में विवाद हुआ वहां स्थानीय विधायक भी शामिल हुए थे। हालांकि वे घटना से कुछ देर पहले ही कार्यक्रम स्थल से निकल चुके थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

  • वोट बचाओ रैली में MP से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य, कांग्रेस नेताओं से तैयारियों का हिसाब मांग रहे पटवारी

    वोट बचाओ रैली में MP से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य, कांग्रेस नेताओं से तैयारियों का हिसाब मांग रहे पटवारी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली वोट बचाओ देश बचाओ जन मार्च और महारैलीJitu Patwari, Madhya Pradesh Congress, Delhi Rally, Vote Chori Protest, Bhopal Political News की तैयारियां तेज कर दी हैं। एसआईआर और कथित वोट चोरी के विरोध में आयोजित होने वाली इस रैली में मध्यप्रदेश से एक लाख लोगों को ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला अध्यक्षों जिला प्रभारियों और विधानसभा प्रभारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में केवल लोगों की संख्या ही नहीं बल्कि बसों की बुकिंग रेल टिकटों के आरक्षण और यात्रा से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली जा रही है।

    कांग्रेस की योजना के मुताबिक प्रदेश के अलग अलग जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों को जिलेवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जीतू पटवारी समीक्षा के दौरान यह पूछ रहे हैं कि किस जिले से कितने लोग दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं और अब तक कितनी बसें तथा चार पहिया वाहन बुक किए जा चुके हैं। इसके अलावा रेलवे में कितने टिकट आरक्षित कराए गए हैं और यात्रा करने वालों की सूची कितनी तैयार हुई है इसकी भी जानकारी मांगी जा रही है। पार्टी का जोर समय रहते परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने पर है।

    ग्वालियर चंबल संभाग में रैली की तैयारियों को लेकर विशेष लक्ष्य तय किया गया है। यहां जिला अध्यक्षों विधायकों पूर्व विधायकों विधानसभा प्रभारियों और जिला प्रभारियों को दो दो हजार लोगों को दिल्ली ले जाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में संबंधित पदाधिकारियों को एक एक हजार लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है। समीक्षा बैठकों में इन निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले अब तक हुई तैयारियों का आकलन किया जा रहा है। पदाधिकारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र में लोगों से संपर्क कर रहे हैं या नहीं और यात्रा की व्यवस्था किस स्तर तक पहुंची है।

    दिल्ली महारैली की तैयारियों के साथ प्रदेश कांग्रेस संगठन के कामकाज की समीक्षा भी की जा रही है। जीतू पटवारी विधानसभा प्रभारियों से उनके क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तृत ब्योरा मांग रहे हैं। इसमें बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए दो के गठन और उनके भौतिक सत्यापन की स्थिति प्रमुख है। इसके साथ ही मंडलम के गठन और सत्यापन तथा वार्ड और पंचायत समितियों के गठन से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पार्टी यह देखना चाहती है कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए निर्धारित काम कितनी प्रगति पर हैं।

    विधानसभा प्रभारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि उन्होंने अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र का कितनी बार दौरा किया और हर महीने कितने दिन वहां प्रवास किया। इन जानकारियों के जरिए संगठन की वास्तविक स्थिति और स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की सक्रियता का आकलन किया जा रहा है। पार्टी की रणनीति में बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कांग्रेस की इन बैठकों में अब दो मोर्चों पर जवाबदेही तय होती दिखाई दे रही है। एक तरफ दिल्ली की महारैली में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परिवहन और यात्रियों की व्यवस्था पर जोर है तो दूसरी तरफ संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के काम की समीक्षा की जा रही है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लोगों को दिल्ली पहुंचाना और संगठन की गतिविधियों को जमीन पर आगे बढ़ाना जिला तथा विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों के लिए अहम जिम्मेदारी बन गई है।

    एक नवंबर को होने वाली महारैली में मध्यप्रदेश से वास्तविक भागीदारी कितनी रहती है यह आयोजन के दिन स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि तैयारियों में कोई कमी न रहे और जिलेवार जिम्मेदारियों के अनुसार परिवहन तथा संगठन से जुड़े काम समय पर पूरे कर लिए जाएं।