Category: Madhya Pradesh

  • देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां

    देवशयनी एकादशी पर भोपाल में उमड़ी आस्था सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने बांधा समां


    भोपाल । देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। नवयुवक मंडल साहू समाज द्वारा श्री लक्ष्मीनारायण साहू समाज मंदिर स्थित मां कर्मा देवी रोड घोड़ा निक्कास में भव्य श्रीरामचरितमानस सुंदरकांड पाठ एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम और संकटमोचन हनुमानजी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीराम और बजरंगबली के जयघोष से गूंजता रहा।

    कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ किया। सुंदरकांड के प्रत्येक चौपाई और दोहे के साथ पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और हनुमानजी की अटूट भक्ति का स्मरण करते हुए सुख समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना की।

    सुंदरकांड पाठ के पश्चात आयोजित भजन संध्या ने पूरे माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। प्रसिद्ध भजन गायक रुपेश राज और हरीश कुशवाहा ने श्रीराम और हनुमानजी की महिमा का गुणगान करते हुए एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए। उनकी मधुर प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में लीन होकर झूमते रहे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत और जयकारों से गूंजता रहा।

    कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और भावपूर्ण क्षण 111 दीपों से की गई भव्य महाआरती रही। दीपों की दिव्य रोशनी और आरती की गूंज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। महाआरती के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने धर्म एवं समाज की उन्नति की प्रार्थना की।

    नवयुवक मंडल साहू समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह मंडल का पहला सामूहिक धार्मिक आयोजन था। इसका उद्देश्य समाज में धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिल सके।

    इस अवसर पर प्रदेश जिला और स्थानीय इकाइयों के पदाधिकारी समाज के वरिष्ठजन महिलाएं युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज को एकजुट करने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।

    देवशयनी एकादशी के इस भव्य आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे बढ़ता है तो आस्था के साथ साथ सामाजिक एकता भी मजबूत होती है। सुंदरकांड पाठ भजन संध्या और 111 दीपों की महाआरती ने इस धार्मिक उत्सव को श्रद्धा भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का यादगार आयोजन बना दिया।

  • बिजली कंपनियों में प्रमोशन पर घमासान 140 से ज्यादा पद खाली फिर भी इंजीनियरों को नहीं मिल रही पदोन्नति

    बिजली कंपनियों में प्रमोशन पर घमासान 140 से ज्यादा पद खाली फिर भी इंजीनियरों को नहीं मिल रही पदोन्नति


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियम 2025 लागू होने के बाद विभागों में प्रमोशन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सामान्य प्रशासन और वाणिज्यिक कर विभाग के बाद अब ऊर्जा विभाग की बिजली कंपनियों में भी पदोन्नति को लेकर असंतोष सामने आया है। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ ने आरोप लगाया है कि पात्र और वरिष्ठ इंजीनियरों को पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है जबकि बड़ी संख्या में पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। संघ ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

    अभियंता संघ का कहना है कि सरकार की मंशा सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरकर प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की है लेकिन बिजली कंपनियों में इसके विपरीत स्थिति बनी हुई है। संघ का आरोप है कि जुलाई 2026 में मंडल कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दे दी गई लेकिन कंपनी कैडर के योग्य और वरिष्ठ इंजीनियरों को अब तक पदोन्नति नहीं दी गई। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

    संघ के अनुसार मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता के लगभग 69 पद रिक्त हैं। वहीं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में ऐसे 72 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में भी कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता तक के कई पद रिक्त हैं लेकिन इन पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।

    अभियंता संघ ने यह भी दावा किया है कि 10 जुलाई से 17 जुलाई 2026 के बीच ऐसी स्थिति थी जब मंडल कैडर में पदोन्नति के लिए कोई पात्र अधिकारी उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद कंपनी कैडर के योग्य इंजीनियरों को अवसर नहीं दिया गया। संघ का कहना है कि अब हाल ही में जिन अधिकारियों को पदोन्नति मिली है वे कई वर्षों तक अगली पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे जिससे रिक्त पद लंबे समय तक खाली रह सकते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी।

    संघ ने ऊर्जा विभाग पर वर्ष 2011 के आदेश की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्ष 2014 में इसी प्रकार की परिस्थितियों में कंपनी कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी लेकिन इस बार अलग रवैया अपनाया जा रहा है। अभियंताओं के अनुसार यह निर्णय न तो नियमों की भावना के अनुरूप है और न ही कर्मचारियों के साथ न्याय करता है।

    अभियंता संघ का कहना है कि वरिष्ठ इंजीनियरों को समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से केवल अधिकारियों का करियर प्रभावित नहीं होगा बल्कि नीचे के पद भी रिक्त नहीं हो पाएंगे। इसका सीधा असर नई भर्तियों पर पड़ेगा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी कम हो जाएंगे। इसलिए रिक्त पदों को समय पर भरना प्रशासनिक और रोजगार दोनों दृष्टि से आवश्यक है।

    संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि पदोन्नति नियम 2025 के तहत पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर सभी रिक्त पदों पर जल्द पदोन्नति दी जाए। साथ ही सभी बिजली कंपनियों के लिए एक समान और स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

    अभियंता संघ ने चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इंजीनियरों का बढ़ता असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और अधिकारियों की होगी।

  • दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र

    दतिया की चुनावी जंग में आरोप प्रत्यारोप तेज भाजपा की नई रणनीति नरोत्तम का टैंकर और सिंधिया के तंज बने चर्चा का केंद्र


    भोपाल । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनाव प्रचार अब पूरी तरह गर्मा चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी सभाओं में विकास के मुद्दों के साथ साथ तंज व्यंग्य और राजनीतिक बयानबाजी भी सुर्खियां बटोर रही है। नेताओं के बयान और चुनावी रणनीतियां इस उपचुनाव को लगातार दिलचस्प बना रही हैं।

    भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाया है लेकिन प्रचार अभियान में पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका भी बेहद अहम नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दतिया में आयोजित चुनावी सभा के दौरान आशुतोष तिवारी और नरोत्तम मिश्रा को मंच पर साथ खड़ा करते हुए दोनों को राम लक्ष्मण की जोड़ी बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे भाजपा की ऐसी रणनीति बता रहे हैं जिसमें प्रत्याशी के साथ वरिष्ठ नेता की लोकप्रियता का भी पूरा लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है।

    इसी बीच दतिया में सड़क किनारे खड़े एक पुराने टैंकर ने भी चुनावी माहौल को नया मोड़ दे दिया। टैंकर पर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम लिखा होने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। कांग्रेस नेताओं ने इसे लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए दावा किया कि पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता को राजनीतिक रूप से पीछे कर दिया है। हालांकि भाजपा नेताओं ने इस तरह की टिप्पणियों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया।

    उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी दतिया में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि उनका पूरा ध्यान दतिया उपचुनाव पर है और कांग्रेस इस सीट को हर हाल में जीतना चाहती है। भाजपा ने भी इस बयान पर पलटवार किया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जीतू पटवारी आजकल हर जगह घूम रहे हैं लेकिन उनका अपना कोई हल्का नहीं है। इस बयान के बाद दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।

    चुनावी प्रचार के दौरान नेताओं ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी अपने अपने तरीके से उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी की पृष्ठभूमि को लेकर बयान दिए तो कांग्रेस ने लोकतंत्र में जनता को सबसे बड़ा बताया। दोनों दल अपने समर्थकों को यह भरोसा दिलाने में जुटे हैं कि वही जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दतिया पहुंचकर भाजपा के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल की बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए पुराने दिनों का उदाहरण दिया और अपने खास अंदाज में कांग्रेस पर निशाना साधा। उनके भाषण और मंचीय प्रस्तुति को लेकर भी सभा में मौजूद लोगों के बीच खूब चर्चा रही।

    राजनीतिक हलकों में चुनाव प्रचार से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी चर्चा का विषय बना। भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक के दौरान एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने मजाकिया अंदाज में संगठन के एक पदाधिकारी से मुख्यमंत्री बनने की बात कह दी। इस टिप्पणी पर कुछ देर के लिए बैठक में मौजूद नेताओं के बीच हल्की मुस्कान और हास्य का माहौल बन गया।

    दतिया उपचुनाव में अब प्रचार अंतिम दौर में पहुंच रहा है। दोनों प्रमुख दल अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी बयानबाजी और रणनीतियां और तेज होने की संभावना है जबकि अंतिम फैसला मतदाता अपने वोट के जरिए करेंगे।

  • भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता

    भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रविवार को नशे के खिलाफ जनजागरूकता का बड़ा संदेश देते हुए रन फॉर लाइफ मैराथन का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी महाअभियान नशे से दूरी है जरूरी 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं खिलाड़ियों पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुलिस और सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त पहल से आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन की शुरुआत सुबह टीटी नगर स्टेडियम से हुई। प्रतिभागियों के लिए दो किलोमीटर वॉकथॉन पांच किलोमीटर हाफ मैराथन और दस किलोमीटर मैराथन जैसी अलग अलग श्रेणियां रखी गई थीं ताकि हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान से जुड़ सकें। तिरंगा हाथों में लेकर दौड़ते युवाओं ने नशामुक्त समाज का संदेश दिया और पूरे आयोजन में देशभक्ति तथा सामाजिक जिम्मेदारी का उत्साह दिखाई दिया।

    कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नशे के खिलाफ यह केवल एक प्रतीकात्मक दौड़ नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    इस अवसर पर एडीजी नारकोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है और नशे से दूर रहकर ही बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इसलिए सभी नागरिकों को से नो टू ड्रग्स का संकल्प लेकर समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देना चाहिए।

    एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस मुख्यालय एवं अपराध डॉ मोनिका शुक्ला ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी दोनों पीढ़ियों को मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    मैराथन के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने इस अभियान को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि खेल और फिटनेस की गतिविधियां युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता अभियानों को लगातार जारी रखने का भरोसा दिलाया।

    मध्य प्रदेश पुलिस का नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान प्रदेशभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति की मजबूत संस्कृति विकसित करना है। भोपाल में आयोजित रन फॉर लाइफ मैराथन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिसने युवाओं को सामाजिक बदलाव की मुहिम से जोड़ने का प्रभावी संदेश दिया।

  • खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई

    खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के दौरान खाद संकट को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य को जरूरत से कहीं अधिक यूरिया उपलब्ध कराने के बावजूद किसान खाद के लिए भटकते रहे। संसद में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2026 तक खरीफ सीजन के लिए मध्य प्रदेश को लगभग 9.61 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी जबकि केंद्र सरकार ने 14.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया। यानी राज्य को मांग से लगभग 147 प्रतिशत अधिक यूरिया मिला। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और अव्यवस्था देखने को मिली।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या यूरिया की उपलब्धता नहीं बल्कि उसके वितरण और प्रबंधन में रही। केंद्र सरकार का दायित्व राज्य तक खाद पहुंचाने का होता है जबकि जिलों ब्लॉकों और सहकारी समितियों तक समय पर और पारदर्शी वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होती है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाना वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    दूसरी ओर खरीफ सीजन में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डीएपी खाद की कमी बनकर सामने आई। राज्य को इस अवधि में लगभग 3.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी लेकिन केवल 3.05 लाख मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो सकी। यानी करीब 52 हजार मीट्रिक टन डीएपी की कमी रही। यही वजह रही कि बुवाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ी और कई स्थानों पर धक्का मुक्की तथा हंगामे की स्थिति भी बनी।

    संसद में पेश आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि एनपीकेएस उर्वरक की स्थिति बेहतर रही। लगभग 4.21 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले राज्य को 6.67 लाख मीट्रिक टन एनपीकेएस उपलब्ध कराया गया। यानी इस उर्वरक की भी पर्याप्त उपलब्धता रही। इसके बावजूद डीएपी की कमी ने खेती की तैयारियों को प्रभावित किया और किसानों की चिंता बढ़ा दी।

    केंद्र सरकार ने खाद आपूर्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और निगरानी आधारित बताया है। फसल सीजन शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकार के साथ मिलकर महीनेवार जरूरत तय करता है। इसके बाद उर्वरक विभाग राज्यों को आवंटन जारी करता है और रेलवे रैक के माध्यम से खाद की आपूर्ति की जाती है। सभी रैक की निगरानी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिए की जाती है तथा हर सप्ताह केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक भी होती है।

    मध्य प्रदेश स्वयं भी देश के प्रमुख यूरिया उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में राज्य में लगभग 19.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ जबकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जून तक ही 5.40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। इससे पहले वर्ष 2022-23 में राज्य ने 22.37 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था। देश में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 के बाद कई नई यूरिया उत्पादन इकाइयों की भी शुरुआत की है।

    खाद उपलब्धता के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में वास्तविक चुनौती उत्पादन या केंद्रीय आवंटन की नहीं बल्कि जरूरत के अनुरूप डीएपी उपलब्ध कराने और अंतिम छोर तक समय पर वितरण सुनिश्चित करने की है। यदि वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को हर खरीफ सीजन में इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • दतिया उपचुनाव में बदली चुनावी तस्वीर किन्नर प्रत्याशी संजना के समर्थन में पहुंचीं साध्वी सौम्या दीदी वोटरों से की खास अपील

    दतिया उपचुनाव में बदली चुनावी तस्वीर किन्नर प्रत्याशी संजना के समर्थन में पहुंचीं साध्वी सौम्या दीदी वोटरों से की खास अपील


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार चुनावी मुकाबला कई वजहों से चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय गण वार्ता पार्टी की प्रत्याशी संजना सिंह अपनी अलग शैली के चुनाव प्रचार और सामाजिक संदेश के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। उनके चुनाव अभियान में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से किन्नर समुदाय के सदस्य शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की साध्वी सौम्या दीदी भी दतिया पहुंची हैं जिन्हें अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले नजर उतारने की परंपरा निभाने के कारण पहचान मिली थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी सखी संजना सिंह के समर्थन में दतिया की नजर उतारने आई हैं।

    संजना सिंह का चुनाव प्रचार पारंपरिक राजनीतिक रैलियों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। उनके साथ न तो बड़ी गाड़ियों का काफिला चलता है और न ही भारी भीड़ नजर आती है। उनकी पार्टी का प्रचार वाहन पहले गांव और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों को उनके आने की जानकारी देता है। इसके बाद संजना हाथ जोड़कर लोगों के बीच पहुंचती हैं और आत्मीयता के साथ समर्थन मांगती हैं। कई स्थानों पर वह बच्चों को दुलारते हुए उनकी नजर उतारती हैं और महिलाओं के साथ बैठकर मंगल गीत भी गाती हैं। इसके बाद वह लोगों से अपील करती हैं कि जिस तरह उन्होंने वर्षों तक बड़े राजनीतिक दलों को मौका दिया है उसी तरह इस बार एक किन्नर प्रत्याशी को भी अवसर देकर देखें।

    संजना सिंह का कहना है कि यह चुनाव केवल विधायक बनने का प्रयास नहीं बल्कि समाज में किन्नर समुदाय को सम्मानजनक पहचान दिलाने की लड़ाई भी है। उनका दावा है कि नामांकन के दौरान उन्हें कुछ लोगों की अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार ऐसे अनुभव बताते हैं कि समाज की सोच में बदलाव की अभी भी जरूरत है। वह चाहती हैं कि किन्नर समुदाय को भी समाज का सम्मानित और बराबरी का हिस्सा माना जाए तथा राजनीति में उनकी भागीदारी को सामान्य रूप से स्वीकार किया जाए।

    अपने चुनाव अभियान के दौरान संजना सिंह स्थानीय लोगों से विकास और जनसमस्याओं पर भी चर्चा कर रही हैं। उनका कहना है कि जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना और उनका समाधान करना उनकी प्राथमिकता होगी। वह मानती हैं कि समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों की आवाज को विधानसभा तक पहुंचाना भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    दतिया को अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत के लिए चुनने पर संजना कहती हैं कि मां पीतांबरा की पावन नगरी आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और किन्नर समुदाय का भी अध्यात्म से गहरा जुड़ाव रहा है। उनका कहना है कि किन्नर समाज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर में उनकी मौजूदगी है और इसी भावना के साथ उन्होंने दतिया से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

    साध्वी सौम्या दीदी भी चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से अपील कर रही हैं कि वे पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नया विकल्प चुनें। उनका कहना है कि पुरुष और महिलाओं की तरह किन्नर समुदाय भी समाज और राजनीति की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने में सक्षम है। उनके अनुसार यह चुनाव केवल एक उम्मीदवार का नहीं बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता और समान अवसर की भावना को मजबूत करने का भी अवसर है।

    दतिया उपचुनाव में संजना सिंह की उम्मीदवारी ने राजनीतिक मुकाबले को एक नया सामाजिक आयाम दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस अनोखी चुनावी मुहिम और सामाजिक संदेश को किस रूप में स्वीकार करते हैं।

  • राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त

    राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त


    भोपाल। राजधानी भोपाल के संवेदनशील माने जाने वाले इतवारा इलाके में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात पुलिस ने नशे के कारोबार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम ने सुनियोजित तरीके से इलाके के 24 से अधिक घरों और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। देर रात शुरू हुआ यह ऑपरेशन कई घंटों तक चलता रहा जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    पुलिस की यह कार्रवाई पहले से तैयार रणनीति के तहत की गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अलग अलग टीमों ने एक ही समय पर कई स्थानों पर छापेमारी की ताकि किसी भी संदिग्ध को भागने या सबूत नष्ट करने का मौका न मिल सके। कार्रवाई के दौरान कई घरों की गहन तलाशी ली गई और पुलिस ने गांजा सहित अन्य अवैध मादक पदार्थ बरामद किए। हालांकि जब्त किए गए नशीले पदार्थों की कुल मात्रा का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक दर्जन से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है। अधिकारियों के अनुसार इन सभी से पूछताछ की जा रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तथा नशे के अवैध कारोबार से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा या पूछताछ के बाद कुछ को छोड़ दिया जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और मामले की जांच लगातार जारी है। बरामद मादक पदार्थों की जांच की जा रही है तथा अन्य संभावित ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।

    सूत्रों के अनुसार यह अभियान लंबे समय से मिल रही शिकायतों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाया गया। इतवारा क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने एक साथ बड़े स्तर पर कार्रवाई का फैसला लिया ताकि पूरे नेटवर्क को एक ही अभियान में निशाना बनाया जा सके।

    पुलिस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी। इसमें बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की पूरी जानकारी दी जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि राजधानी में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह के विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके और शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

  • एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना

    एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटे के लिए शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। वहीं, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर समेत करीब 50 जिलों में हल्की बारिश और बादल छाए रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों तक कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, शियर जोन और पूर्वी व पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय दो निम्न दबाव क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं। हालांकि शनिवार को अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी ही दर्ज की गई।

    पांच दिनों में सुधरे बारिश के आंकड़े
    बीते पांच दिनों की बारिश से प्रदेश में वर्षा की कमी में सुधार आया है। 20 जुलाई तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद यह अंतर घटकर 21 जुलाई को 14 प्रतिशत, 22 जुलाई को 11 प्रतिशत, 23 जुलाई को 10 प्रतिशत और 24-25 जुलाई को 11 प्रतिशत रह गया। अब तक प्रदेश में औसतन 330.4 मिमी (करीब 13 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 370.9 मिमी (14.6 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन जिलों में बारिश की संभावना
    अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं।

    जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, जून में मानसून कमजोर रहने से बारिश का आंकड़ा कम रहा। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन इसके बाद लगातार कई दिनों तक भारी बारिश नहीं होने के कारण वर्षा का ग्राफ फिर सामान्य से नीचे आ गया।

    आमतौर पर जुलाई महीने में प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। मध्य प्रदेश की सामान्य वार्षिक वर्षा 37.3 इंच है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है। इनमें जबलपुर ऐसा प्रमुख शहर है, जहां जुलाई में औसतन 17 इंच से अधिक बारिश दर्ज की जाती है।

  • सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली

    सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली


    जबलपुर । जबलपुर जिले के सिहोरा की पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह सड़क की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आ गई। बच्चों को लेने पहुंची मेरिडियन स्कूल की बस कीचड़ और दलदल में इस तरह फंस गई कि उसे निकालने में करीब ढाई घंटे का समय लग गया। आखिरकार ट्रैक्टर की मदद से बस को बाहर निकाला जा सका। इस घटना ने न केवल कॉलोनी की खराब सड़क व्यवस्था की पोल खोल दी बल्कि बच्चों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार खितौला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 12 स्थित पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह लगभग नौ बजे मेरिडियन स्कूल की बस बच्चों को लेने पहुंची थी। कॉलोनी में सड़क का निर्माण नहीं होने और लगातार बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह दलदल में बदल चुका था। जैसे ही बस अंदर पहुंची उसका पहिया कीचड़ में धंस गया और वाहन वहीं फंस गया। चालक ने काफी प्रयास किया लेकिन बस बाहर नहीं निकल सकी।

    बस के फंसने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और बस को निकालने की कोशिश शुरू की गई। करीब ढाई घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद ट्रैक्टर बुलाया गया। ट्रैक्टर से टोचन कर आखिरकार बस को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बस अपने निर्धारित अन्य स्टॉप तक नहीं पहुंच सकी जिससे कई बच्चों को समय पर स्कूल नहीं ले जाया जा सका।

    बस के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने से कई अभिभावकों को अपने बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा और सुबह का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क की स्थिति समय रहते सुधारी गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

    रहवासियों ने बताया कि पालीवाल कॉलोनी के इस हिस्से में वर्षों से सड़क निर्माण नहीं हुआ है। हर बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। स्कूल बसों एंबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है और जिम्मेदार विभाग को कई बार शिकायतें भी दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण या जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि जल्द पक्की सड़क और बेहतर ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

    रहवासियों ने नगर पालिका और प्रशासन से मांग की है कि पालीवाल कॉलोनी में प्राथमिकता के आधार पर सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके और बारिश के मौसम में लोगों को बार-बार ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है और अब इस समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी है।