Category: Madhya Pradesh

  • सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

    सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

     मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में एक महिला द्वारा न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क पर बैठने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला अपनी बेटी के साथ हुई कथित मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे अलग-अलग थानों के बीच भटकाया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महिला घंटों तक थाने के बाहर बैठी रही और अंततः वह थक-हारकर सड़क पर ही बैठ गई, जबकि उसके साथ छोटा बच्चा भी मौजूद था। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब शाम से लेकर देर रात तक पीड़िता न्याय की उम्मीद में वहीं मौजूद रही।

    बताया जा रहा है कि घटना उस समय की है जब पीड़िता की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी और किसी विवाद के दौरान कुछ लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। परिजनों का कहना है कि इस घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हुई और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को एक थाने से दूसरे थाने भेजना शुरू कर दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला थाने के बाहर बैठने को मजबूर हो गई।

    महिला का कहना है कि वह लगातार पुलिस से गुहार लगाती रही कि उसकी शिकायत दर्ज कर उचित जांच की जाए, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उसे यह कहकर टाल दिया गया कि संबंधित थाना जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता अपने छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में रही, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल खड़े करती है। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को क्षेत्राधिकार के तकनीकी पहलू में उलझने के बजाय तुरंत प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए Zero FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को राहत मिल सके और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

    घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। फिलहाल देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए किस तरह की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।

  • अस्पताल व्यवस्था पर सवाल, सतना में मरीज को लेने आइसोलेशन वार्ड तक बाइक पहुंची, वीडियो हुआ वायरल

    अस्पताल व्यवस्था पर सवाल, सतना में मरीज को लेने आइसोलेशन वार्ड तक बाइक पहुंची, वीडियो हुआ वायरल

    मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक मरीज को वार्ड से नीचे ले जाने के लिए जब समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका, तो परिजन मजबूरी में बाइक लेकर अस्पताल के भीतर फर्स्ट फ्लोर तक पहुंच गया। यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी दृश्य जैसा प्रतीत हुआ, जिसमें व्यवस्था की कमी और आम नागरिक की परेशानी दोनों एक साथ सामने आ गए।

    मध्य प्रदेश के सतना शहर में घटी इस घटना में सीताराम सोनी नामक युवक अपने परिजन अंजनी सोनी को, जो कि आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे, इलाज के बाद रेफर किए जाने पर रीवा ले जाने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने मरीज को बेहतर उपचार के लिए अन्य अस्पताल भेजने का निर्णय लिया था, लेकिन जब मरीज को वार्ड से नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो स्ट्रेचर की अनुपलब्धता एक बड़ी बाधा बन गई। काफी देर तक इंतजार करने और प्रयास करने के बावजूद जब कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिली तो परिजन ने असामान्य कदम उठाते हुए बाइक से ही वार्ड तक पहुंचने का प्रयास किया।

    अस्पताल परिसर में बाइक का आइसोलेशन वार्ड तक पहुंच जाना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में बुनियादी संसाधनों की कमी किस तरह लोगों को मजबूरी में असामान्य कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है। मौके पर मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गए और कुछ ही समय में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। प्रारंभिक तौर पर इसे अस्पताल की बड़ी चूक माना गया, हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि युवक का उद्देश्य किसी तरह की अव्यवस्था या हंगामा करना नहीं था, बल्कि वह केवल अपने परिजन को सुरक्षित तरीके से नीचे लाने का प्रयास कर रहा था।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया और मरीज के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसके बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से एम्बुलेंस के माध्यम से रीवा के लिए रेफर किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी थी और आगे के इलाज के लिए उसे स्थानांतरित किया गया है।

    बताया जा रहा है कि मरीज अंजनी सोनी को घोड़े की लात लगने से गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की सलाह दी थी। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमी ने अस्पताल की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर आपात स्थिति में मरीजों को स्थानांतरित करने की व्यवस्था को लेकर।

    इस घटना ने एक बार फिर यह मुद्दा सामने ला दिया है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और उनका त्वरित उपयोग कितना महत्वपूर्ण है। स्ट्रेचर, एम्बुलेंस और त्वरित सहायता प्रणाली जैसी सुविधाएं यदि समय पर उपलब्ध न हों, तो मरीज और उनके परिजन को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने मामले की समीक्षा की बात कही है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।

  • इंदौर के ठेकेदार शकील शाह की गिरफ्तारी, आदिवासी युवती से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    इंदौर के ठेकेदार शकील शाह की गिरफ्तारी, आदिवासी युवती से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में एक आदिवासी मजदूर युवती से कथित छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने इंदौर निवासी ठेकेदार शकील शाह को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई कोतवाली थाना क्षेत्र में की गई, जहां आरोपी लंबे समय से पीड़िता को परेशान कर रहा था। मामला तब सामने आया जब शनिवार को आरोपी बस स्टैंड क्षेत्र में देखा गया और युवती के पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना देकर उसे पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया और थाने ले जाकर आगे की कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने परिवार के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा आरसेटी के पास चल रहे निर्माण कार्य में मजदूरी कर रही थी। इसी दौरान ठेकेदारी कार्य से जुड़े इंदौर निवासी शकील शाह पर युवती से छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगे। परिजनों ने शुरुआती स्तर पर ही विरोध जताया था और आरोपी को काम स्थल से दूर रहने की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से अपनी हरकतें जारी रखीं और बाद में एक बार फिर आलीराजपुर पहुंचकर युवती से संपर्क करने और उसे प्रभावित करने की कोशिश की।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपी की गतिविधियों को लेकर पहले से ही असंतोष का माहौल था। शनिवार को जब उसकी मौजूदगी बस स्टैंड क्षेत्र में देखी गई तो युवती के परिजनों ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लिया और उसे कोतवाली थाना लाया गया, जहां उससे प्रारंभिक पूछताछ की गई।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़, रास्ता रोकने और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत आवश्यक सभी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

    इस घटना के बाद क्षेत्र में सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों के प्रतिनिधि कोतवाली थाने पहुंचे और उन्होंने मांग की कि बाहरी ठेकेदारों और कार्य पर्यवेक्षकों की पृष्ठभूमि की जांच और सत्यापन को अनिवार्य बनाया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

    फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की जांच के आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि पीड़िता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।

  • बीएसएफ कॉलोनी में दर्दनाक हादसा, कार की टक्कर से बच्चा गंभीर रूप से घायल, आरोपी मौके से फरार

    बीएसएफ कॉलोनी में दर्दनाक हादसा, कार की टक्कर से बच्चा गंभीर रूप से घायल, आरोपी मौके से फरार


    मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां बीएसएफ कॉलोनी क्षेत्र में सड़क पर चल रहे एक मासूम बच्चे को कार ने जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि बच्चा टक्कर लगते ही कई फीट ऊपर उछलकर नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसे देखने के बाद स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश फैल गया है।

    जानकारी के अनुसार यह घटना शनिवार शाम करीब चार बजे की है, जब दो बच्चे अपने घर के बाहर सड़क के किनारे टहल रहे थे। इसी दौरान एक कार तेज रफ्तार और असंतुलित तरीके से सड़क पर आई और अचानक एक बच्चे को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बच्चा हवा में उछलकर दूर जा गिरा। हादसे के बाद कार पास के एक घर से टकरा गई, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कार में सवार युवक तुरंत मौके से फरार हो गए और घायल बच्चे की कोई मदद नहीं की। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और लोग सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

    सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। फुटेज के आधार पर कार और उसमें सवार युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी तेज रफ्तार वाहनों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह की गंभीर घटना पहली बार हुई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। लोगों ने मांग की है कि कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में स्पीड कंट्रोल और ट्रैफिक निगरानी को और सख्त किया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    डॉक्टरों के अनुसार घायल बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे आरोपी वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    यह घटना एक बार फिर शहरों में सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के खतरों को उजागर करती है, जहां एक छोटी सी चूक भी किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

  • बड़वानी में बड़ा खुलासा: नर्मदा किनारे अवैध भट्टों से बढ़ रहा प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट

    बड़वानी में बड़ा खुलासा: नर्मदा किनारे अवैध भट्टों से बढ़ रहा प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट


    मध्यप्रदेश। बड़वानी जिले के राजघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आई है। सावरिया हॉस्पिटल से लेकर राजघाट के पहले पुल तक महज 500 मीटर के दायरे में सड़क के दोनों ओर लगभग 140 अवैध ईंट भट्टे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर व्यावसायिक ईंट उत्पादन किया जा रहा है, जिससे प्रतिवर्ष करोड़ों ईंटें तैयार हो रही हैं और आसपास के जिलों तक सप्लाई की जा रही हैं।

    स्थानीय स्तर पर तैयार हो रही ये ईंटें 6500 रुपए प्रति हजार के भाव से बिक रही हैं और ट्रैक्टर, आयसर व ट्रकों के जरिए धार, इंदौर, खरगोन सहित महाराष्ट्र के शाहदा तक पहुंचाई जा रही हैं। हालांकि इस व्यावसायिक गतिविधि का सबसे गंभीर असर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

    ग्रामीणों और चिकित्सकों का कहना है कि भट्टों से निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों पर गिरने वाली राख से फसल उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    नियमों के अनुसार मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 और एनजीटी के प्रावधानों के तहत नदी किनारे 800 मीटर के दायरे में किसी भी ईंट भट्टे का संचालन प्रतिबंधित है। इसके अलावा जल संरचनाओं के 100 मीटर दायरे में भी खनन कार्य की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कई भट्टे बैकवाटर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर संचालित हो रहे हैं।

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि लगातार बढ़ता प्रदूषण न केवल नर्मदा के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक असर डाल सकता है। प्रशासनिक कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

  • मध्य प्रदेश में सत्ता वापसी की कोशिश: कांग्रेस ने बनाया नया ट्राइबल वोट रणनीति फॉर्मूला

    मध्य प्रदेश में सत्ता वापसी की कोशिश: कांग्रेस ने बनाया नया ट्राइबल वोट रणनीति फॉर्मूला


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में ‘मसाला गुटखा’ पर 2012 में लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। सरकार ने उस समय तंबाकू और सुपारी के खतरनाक मिश्रण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का दावा किया था, लेकिन 14 साल बाद भी ओरल कैंसर के मामलों में कमी के बजाय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

    जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार प्रतिबंध के बाद से ओरल कैंसर के मरीजों में लगभग 42.37 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंध का वास्तविक असर इसलिए नहीं दिखा क्योंकि गुटखा कंपनियों ने अपने उत्पाद बेचने का तरीका बदल दिया।

    प्रतिबंध के बाद कंपनियों ने ‘ट्विन-पाउच’ सिस्टम शुरू किया, जिसमें पान मसाला और तंबाकू को अलग-अलग पैकेट में बेचा जाने लगा। उपभोक्ता दोनों को मिलाकर उपयोग करते हैं, जिससे अंतिम उत्पाद वही खतरनाक मिश्रण बन जाता है जिसे रोकने के लिए बैन लगाया गया था।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवस्था कानून की एक तकनीकी खामी का फायदा उठाती है, क्योंकि नियम केवल मिश्रित उत्पाद पर रोक लगाते हैं, जबकि अलग-अलग पैकेट में बिक्री वैध मानी जाती है। परिणामस्वरूप बाजार में तंबाकू की उपलब्धता और उसका सेवन लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है।

    डॉक्टरों का कहना है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को मुंह खोलने में दिक्कत, लंबे समय तक घाव या सफेद-लाल धब्बे जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में इलाज से बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि जब तक तंबाकू उत्पादों पर सख्त और व्यावहारिक नियंत्रण नहीं होगा, तब तक ओरल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाना मुश्किल रहेगा।

  • गुटखा बैन की हकीकत: कानून के बावजूद नहीं थमा तंबाकू, बढ़ते रहे कैंसर केस

    गुटखा बैन की हकीकत: कानून के बावजूद नहीं थमा तंबाकू, बढ़ते रहे कैंसर केस


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में ‘मसाला गुटखा’ पर 2012 में लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। सरकार ने उस समय तंबाकू और सुपारी के खतरनाक मिश्रण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का दावा किया था, लेकिन 14 साल बाद भी ओरल कैंसर के मामलों में कमी के बजाय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

    जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार प्रतिबंध के बाद से ओरल कैंसर के मरीजों में लगभग 42.37 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंध का वास्तविक असर इसलिए नहीं दिखा क्योंकि गुटखा कंपनियों ने अपने उत्पाद बेचने का तरीका बदल दिया।

    प्रतिबंध के बाद कंपनियों ने ‘ट्विन-पाउच’ सिस्टम शुरू किया, जिसमें पान मसाला और तंबाकू को अलग-अलग पैकेट में बेचा जाने लगा। उपभोक्ता दोनों को मिलाकर उपयोग करते हैं, जिससे अंतिम उत्पाद वही खतरनाक मिश्रण बन जाता है जिसे रोकने के लिए बैन लगाया गया था।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवस्था कानून की एक तकनीकी खामी का फायदा उठाती है, क्योंकि नियम केवल मिश्रित उत्पाद पर रोक लगाते हैं, जबकि अलग-अलग पैकेट में बिक्री वैध मानी जाती है। परिणामस्वरूप बाजार में तंबाकू की उपलब्धता और उसका सेवन लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है।

    डॉक्टरों का कहना है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को मुंह खोलने में दिक्कत, लंबे समय तक घाव या सफेद-लाल धब्बे जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में इलाज से बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि जब तक तंबाकू उत्पादों पर सख्त और व्यावहारिक नियंत्रण नहीं होगा, तब तक ओरल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाना मुश्किल रहेगा।

  • जल संकट के बीच चेतावनी: तालाबों की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण से बिगड़ सकता है हालात

    जल संकट के बीच चेतावनी: तालाबों की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण से बिगड़ सकता है हालात


    मध्यप्रदेश। इंदौर में बढ़ते जल संकट के बीच तालाबों की स्थिति को लेकर सामने आई नगर निगम की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। 27 मई 2026 तक की समीक्षा में शहर के 26 प्रमुख तालाबों में से 23 पर अतिक्रमण पाया गया है। इनमें से केवल 8 मामलों में ही अतिक्रमण हटाया जा सका है, जबकि 9 मामलों में कार्रवाई अभी भी जारी है।

    रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक अतिक्रमण सिरपुर तालाब क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं। छोटा सिरपुर तालाब पर पांच और बड़ा सिरपुर तालाब पर तीन अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा पीपल्यापाला, बिलावली और अन्य जलाशयों के आसपास भी अवैध कब्जों की स्थिति सामने आई है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक अधिकांश अतिक्रमण तालाब की भूमि और उसके कैचमेंट क्षेत्र में किए गए हैं, जो बारिश के पानी के संग्रहण और भूजल पुनर्भरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कई मामलों में प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं और सीमांकन की कार्रवाई भी की गई है, लेकिन अभी तक सभी अवैध कब्जे पूरी तरह हटाए नहीं जा सके हैं।

    शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर तालाबों के सौंदर्यीकरण, गहरीकरण और संरक्षण के प्रयास किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण की समस्या लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तालाबों की जमीन और जलग्रहण क्षेत्र पर कब्जे इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में इंदौर में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।

    विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि तालाब केवल जल संग्रहण का साधन नहीं हैं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनका संरक्षण और अतिक्रमण हटाना बेहद जरूरी है, ताकि शहर की जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • ओरल कैंसर का बढ़ता संकट: शुरुआती पहचान से बच सकते हैं 90% मरीज, फिर भी देरी जारी

    ओरल कैंसर का बढ़ता संकट: शुरुआती पहचान से बच सकते हैं 90% मरीज, फिर भी देरी जारी


    मध्यप्रदेश। इंदौर में ओरल (मुख) कैंसर को लेकर बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आई है। दंत विशेषज्ञों के अनुसार देश में लगभग 60 से 80 प्रतिशत मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी तीसरी या चौथी यानी अंतिम स्टेज में पहुंच चुकी होती है। इसका मुख्य कारण तंबाकू, गुटखा, बीड़ी-सिगरेट जैसे नशे की आदतों को सामान्य मान लेना और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो लगभग 90 प्रतिशत मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। लेकिन देरी होने पर इलाज की सफलता दर घटकर केवल 20 से 30 प्रतिशत रह जाती है, जिससे मरीज की जान पर गंभीर खतरा बना रहता है।

    यह खुलासा ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक दंत एवं मुख परीक्षण शिविर में सामने आया, जहां 500 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई। यह शिविर इंडियन डेंटल एसोसिएशन (IDA) मध्यप्रदेश, इंदौर शाखा और शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया।

    डॉक्टरों के अनुसार शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय में प्रतिदिन औसतन 3 से 5 ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं, जिनमें प्रीकैंसर यानी कैंसर से पहले के लक्षण पाए जाते हैं। समय पर जांच, बायोप्सी और इलाज से इन मामलों को गंभीर अवस्था में जाने से रोका जा सकता है। सरकारी अस्पतालों में ओरल कैंसर का इलाज निशुल्क उपलब्ध है।

    चिकित्सकों ने सलाह दी है कि जो लोग तंबाकू या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, उन्हें हर छह महीने में नियमित रूप से मुख परीक्षण जरूर कराना चाहिए।

    जागरूकता बढ़ाने के लिए रविवार सुबह कृष्णपुरा छत्री से राजबाड़ा तक एक रैली भी निकाली जाएगी, जिसमें डॉक्टर, छात्र और सामाजिक संगठन शामिल होंगे। इसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू से होने वाले खतरों और मुख कैंसर के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक करना है।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुंह में लंबे समय तक न भरने वाले घाव, सफेद या लाल धब्बे, भोजन निगलने में दिक्कत और आवाज में बदलाव जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही आगे चलकर गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं।

  • महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: पंचामृत से अभिषेक, रजत आभूषणों से श्रृंगार

    महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती: पंचामृत से अभिषेक, रजत आभूषणों से श्रृंगार


    मध्यप्रदेश। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान भक्तों ने अलौकिक और दिव्य दर्शन का अनुभव किया। सुबह चार बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत—दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस—से अभिषेक कर आरती की शुरुआत हुई।

    भस्म आरती के दौरान प्रथम घंटा बजाकर भगवान को हरि ओम जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन एवं त्रिपुंड अर्पित कर भव्य श्रृंगार प्रारंभ किया गया। श्रृंगार पूरा होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर विधिवत भस्म रमाई गई।

    इसके बाद भगवान महाकाल का राजसी स्वरूप में अलंकरण किया गया, जिसमें भांग, ड्रायफ्रूट, चंदन, आभूषण और विभिन्न प्रकार के पुष्पों का उपयोग किया गया। विशेष रूप से रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं भगवान को अर्पित की गईं। मोगरा और गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित स्वरूप ने मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

    आरती के दौरान भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण की परंपरा का निर्वहन किया गया।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और अलौकिक आरती माना जाता है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं।