Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में कबाड़ गोदाम में आग का तांडव, मालीखेड़ी में मिनटों में खाक हुआ पूरा सामान..

    भोपाल में कबाड़ गोदाम में आग का तांडव, मालीखेड़ी में मिनटों में खाक हुआ पूरा सामान..


    भोपाल
    के मालीखेड़ी इलाके में बुधवार दोपहर अचानक एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र का माहौल कुछ ही पलों में बदल दिया। एक कबाड़ गोदाम में अचानक आग लग गई और देखते ही देखते लपटों ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में आग इतनी तेज हो गई कि गोदाम से उठता काला धुआं आसमान में फैलने लगा और आसपास का इलाका घने धुएं की परत से ढक गया।

    घटना के समय आसपास मौजूद लोगों ने पहले तो खुद ही आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि प्रयास सफल नहीं हो सके। इसके बाद तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी गई, जिसके बाद एक के बाद एक दमकल वाहन मौके पर पहुंचने लगे। आग पर काबू पाने की कोशिशें लगातार जारी रहीं और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    इस पूरी घटना में राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। गोदाम जिस स्थान पर था, वह अपेक्षाकृत खुला क्षेत्र था और आसपास घनी आबादी नहीं थी, जिसके कारण आग फैलने से बड़ा नुकसान टल गया। हालांकि गोदाम में रखा कबाड़ का सारा सामान जलकर पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे आर्थिक नुकसान का आंकलन लाखों रुपये में किया जा रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगते ही पूरे क्षेत्र में अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए और धुएं के कारण सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। कुछ ही देर में आसमान काले धुएं से भर गया, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई और लोगों में चिंता बढ़ गई।

    प्रारंभिक स्तर पर आग लगने के कारणों को लेकर अलग-अलग आशंकाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि आसपास के खेतों में जलाई गई सूखी घास यानी नरवाई की आग हवा के साथ फैलते हुए गोदाम तक पहुंच गई हो सकती है, जिससे यह हादसा हुआ। हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    दमकल कर्मियों ने बताया कि आग जिस तरह से तेजी से फैली, वह काफी चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। गोदाम में रखे सामान की प्रकृति के कारण आग पर तुरंत नियंत्रण पाना आसान नहीं था, लेकिन लगातार प्रयासों के बाद इसे फैलने से रोक लिया गया। यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो यह आग आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच सकती थी और स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    इस घटना ने एक बार फिर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर गर्मी के मौसम में सूखी घास और ज्वलनशील सामग्री के कारण इस तरह की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद सतर्कता का माहौल है और प्रशासन से सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की मांग भी उठ रही है।

    फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। यह घटना भले ही बड़े हादसे में तब्दील नहीं हुई, लेकिन इसने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

  • मध्यप्रदेश में प्रशासनिक बदलाव की आहट: ट्रांसफर पॉलिसी पर सरकार का बड़ा फैसला, मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश में प्रशासनिक बदलाव की आहट: ट्रांसफर पॉलिसी पर सरकार का बड़ा फैसला, मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां सरकार ट्रांसफर प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। लंबे समय से लागू ट्रांसफर बैन को हटाने पर गंभीर विचार किया जा रहा है और इसके लिए नई नीति का प्रारूप लगभग तैयार माना जा रहा है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाना बताया जा रहा है, ताकि जरूरी फैसले समय पर लिए जा सकें और व्यवस्था में लचीलापन बना रहे।

    सरकार के स्तर पर जो संकेत सामने आए हैं, उनके अनुसार नई व्यवस्था में प्रभारी मंत्रियों की भूमिका को सीमित लेकिन महत्वपूर्ण बनाया जा सकता है। यानी जिलों और विभागों में कुछ आवश्यक तबादलों का अधिकार मंत्रियों को दिया जा सकता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह खुला नहीं होगा। इसका मकसद यह है कि प्रशासनिक निर्णय तेजी से हों, लेकिन किसी भी स्तर पर अनावश्यक बदलाव की स्थिति उत्पन्न न हो। इस पूरी प्रक्रिया को एक नियंत्रित ढांचे के भीतर लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।

    हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई, जहां यह भी सामने आया कि ट्रांसफर पॉलिसी को पहले ही तैयार हो जाना चाहिए था। इस देरी पर चिंता जताई गई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जल्द से जल्द एक ठोस और व्यवहारिक नीति तैयार की जाए। सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा असर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर दिखाई दे।

    इसी चर्चा के दौरान राज्य में बढ़ते जल संकट का मुद्दा भी गंभीरता से सामने आया। कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता लगातार घटती जा रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में परेशानी बढ़ रही है। जल आपूर्ति से जुड़े ढांचे पर भी दबाव देखा जा रहा है और कुछ स्थानों पर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता को देखते हुए प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी क्षेत्र में जल संकट गंभीर रूप न ले सके।

    सरकार का रुख यह दर्शाता है कि वह एक साथ दो स्तरों पर काम कर रही है। एक ओर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक गतिशील और जवाबदेह बनाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रांसफर प्रणाली में बदलाव से जहां प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा आने की संभावना है, वहीं जल संकट पर त्वरित कार्रवाई से सरकार की संवेदनशीलता भी स्पष्ट होती है।

    अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि नई ट्रांसफर नीति कब तक लागू होती है और जमीनी स्तर पर इसका असर कितना प्रभावी रहता है। यदि इसे संतुलित तरीके से लागू किया गया तो यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन साबित हो सकता है, जिससे पूरे राज्य की कार्यप्रणाली में नई गति आने की उम्मीद है।

  • विवाद से वारदात तक, ग्वालियर में फायरिंग कांड ने पूरे इलाके को दहला दिया

    विवाद से वारदात तक, ग्वालियर में फायरिंग कांड ने पूरे इलाके को दहला दिया

    ग्वालियर में एक साधारण सा दिखने वाला विवाद अचानक इतना खतरनाक रूप ले लेगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। मुरार थाना क्षेत्र के बड़ा गांव खुरैरी इलाके में देर रात जो हुआ, उसने पूरे क्षेत्र को दहशत और सन्नाटे में बदल दिया। एक छोटी सी बात, जो घूरकर देखने को लेकर शुरू हुई थी, धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि मामला सीधे जानलेवा हिंसा तक पहुंच गया।

    रात का समय था, करीब साढ़े ग्यारह बजे के आसपास, जब इलाके में अचानक तनाव बढ़ने लगा। पहले कहासुनी हुई, फिर दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि पथराव शुरू हो गया। माहौल पहले ही गर्म हो चुका था, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई।

    इसी दौरान एक पक्ष की ओर से रायफल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी गई। बताया जा रहा है कि लगातार कई राउंड गोलियां चलाई गईं, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए अपने घरों में छिप गए और सड़कें अचानक खाली हो गईं।

    इस फायरिंग में रमेश कुशवाह की मौके पर ही मौत हो गई। गोली लगने के बाद वह भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह बच नहीं सके। उनके परिवार पर भी इस घटना का बड़ा असर पड़ा, क्योंकि उनकी पत्नी और दो बेटे भी गोलीबारी की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार एक बेटे की हालत काफी गंभीर बनी हुई है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। परिवार पर अचानक आए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया गया। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि विवाद की जड़ एक मामूली कहासुनी थी, लेकिन इसके पीछे पुरानी रंजिश की आशंका भी जताई जा रही है। दोनों पक्षों के बीच पहले भी तनाव की स्थिति रही है, जो समय-समय पर टकराव में बदलती रही है।

    पुलिस के अनुसार फायरिंग करने वाले कुछ लोगों की पहचान हो चुकी है और उनकी तलाश की जा रही है। घटना के बाद से आरोपी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। इलाके में किसी भी तरह की स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात कर दिया गया है।

    यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि छोटे विवाद किस तरह बड़े अपराध में बदल सकते हैं और कैसे एक पल का गुस्सा कई जिंदगियों को प्रभावित कर देता है। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस हर पहलू को गंभीरता से देख रही है।

  • राजगढ़ में मिलावट और स्वास्थ्य संकट पर सांसद की चेतावनी, 27 बच्चों में गंभीर बीमारी का दावा

    राजगढ़ में मिलावट और स्वास्थ्य संकट पर सांसद की चेतावनी, 27 बच्चों में गंभीर बीमारी का दावा

    राजगढ़ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सामने आए बयान ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। इस कार्यक्रम में सांसद रोडमल नागर ने अपने संबोधन के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों, नकली दूध और खेती में बढ़ते रासायनिक उपयोग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर संकट बनती जा रही है।

    सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में गांव और शहर दोनों ही क्षेत्रों में मिलावट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से दूध और दैनिक उपयोग की सब्जियों में हो रही कथित मिलावट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर फसलों को जल्दी तैयार करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनावश्यक रसायनों का उपयोग किया जा रहा है, जो लंबे समय में मिट्टी और मानव शरीर दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक गंभीर दावा करते हुए बताया कि उनकी कॉलोनी में पिछले चार वर्षों में 27 बच्चों को ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा है। इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को चिंतित कर दिया और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। हालांकि इस दावे को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इसने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरणीय कारणों पर बहस को जरूर तेज कर दिया है।

    सांसद ने आगे कहा कि मिलावट का यह बढ़ता कारोबार केवल आर्थिक लालच का परिणाम है, जो समाज के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी नकली दूध या मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाए जाने की जानकारी मिले तो उसे तुरंत प्रशासन तक पहुंचाया जाए ताकि इस पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि इस समस्या को केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

    उन्होंने सब्जियों और दालों में होने वाली कथित मिलावट पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, आज के समय में कुछ उत्पादों को तेजी से बढ़ाने के लिए असामान्य तरीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

    कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसान अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक खाद और यूरिया का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे भूमि की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में खेती की जमीन की उत्पादकता और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    पूरे बयान के बाद क्षेत्र में मिलावट, स्वास्थ्य और कृषि पद्धतियों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर जहां लोग इन मुद्दों पर चिंता जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि इन दावों की वास्तविकता और वैज्ञानिक आधार पर आगे क्या स्थिति सामने आती है।

  • एमपी में मौसम के दो सिस्टम सक्रिय, 28 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जिलों में चलेंगी तेज हवाएं

    एमपी में मौसम के दो सिस्टम सक्रिय, 28 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, कई जिलों में चलेंगी तेज हवाएं


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में इस समय मौसम के दो सिस्टम सक्रिय हैं, जिसके चलते प्रदेश के करीब आधे हिस्से यानी 28 जिलों में बुधवार को तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कई इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है।

    बुधवार को ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, शाम के समय मौसम में बदलाव ज्यादा स्पष्ट होगा, हालांकि कुछ जिलों में दिन के दौरान भी आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    वहीं, प्रदेश के कुछ हिस्सों में दिन के समय गर्मी का असर बना रहेगा। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर शामिल हैं। मंगलवार को प्रदेश में लगातार पांचवें दिन भी आंधी-बारिश का सिलसिला जारी रहा। ग्वालियर, छतरपुर, धार, बड़वानी, डिंडौरी और बालाघाट सहित कई जिलों में सुबह से ही मौसम बदला रहा, जबकि रात में भोपाल समेत अन्य क्षेत्रों में तेज हवाएं चलीं।

    तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख शहरों में भोपाल का अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री, इंदौर 37.6 डिग्री, ग्वालियर 34.7 डिग्री, उज्जैन 38 डिग्री और जबलपुर 37 डिग्री सेल्सियस रहा। खरगोन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा खंडवा में 41.5 डिग्री और नरसिंहपुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। वहीं, नौगांव में सबसे कम 33.5 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। अन्य शहरों में भी तापमान सामान्य से कम रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में फिलहाल आंधी-बारिश का दौर कुछ दिन और जारी रह सकता है। वर्तमान में एक चक्रवाती परिसंचरण प्रदेश के मध्य भाग में सक्रिय है, जबकि दूसरा ऊपरी हिस्से में बना हुआ है। इसके साथ ही पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है, जिसके कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। साथ ही 10 मई से एक नया सिस्टम भी सक्रिय होने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी

    मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में दिखे लुप्तप्राय इंडियन स्किमर पक्षी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के तवा जलाशय में लुप्तप्राय पक्षी इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) की मौजूदगी दर्ज की गई है। बोट गश्ती के दौरान वन विभाग के स्टाफ को कुल 8 इंडियन स्कीमर दिखाई पड़े, जिनकी तस्वीर मढ़ई रेंजर द्वारा ली गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व बाघों का उत्कृष्ट प्राकृतिक आवास (हैबिटेट) माना जाता है। इसी रिजर्व में स्थित तवा जलाशय में इंडियन स्कीमर की उपस्थिति से यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित आवास के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि इंडियन स्किमर भारत के अत्यंत संकटग्रस्त नदी-आधारित पक्षियों में शामिल है, जिसकी संख्या लगातार घट रही है। यह पक्षी अपनी विशिष्ट लंबी निचली चोंच के लिए जाना जाता है, जिसके माध्यम से यह पानी की सतह को चीरते हुए मछलियों का शिकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रजाति केवल स्वच्छ जल, प्रचुर मछली संसाधन और निर्बाध रेतीले तटों वाले क्षेत्रों में ही अपना आवास बनाती है। इस लुप्तप्राय पक्षी की उपस्थिति से सतपुड़ा को विशिष्ट पहचान मिलेगी।

    तवा जलाशय के आवास में इंडियन स्किमर की उपस्थिति इस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। वन विभाग के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का संरक्षित क्षेत्र न केवल बाघों के संरक्षण में अग्रणी है, बल्कि यह अन्य संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों के लिए भी एक पूरी तरह से अनुकूल और सुरक्षित आवास प्रदान कर रहा है।

  • मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू

    मप्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए एनएचएम और सनोफी इंडिया के बीच हुआ एमओयू


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने मध्य प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सनोफी इंडिया लिमिटेड के साथ मंगलवार को एक महत्वपूर्ण एमओयू किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य मधुमेह जैसे गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी शीघ्र पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों को बेहतर सहयोग प्रदान करना है।

    एमओयू पर एनएचएम मध्य प्रदेश की मिशन डायरेक्टर डॉ. सलोनी सिडाना और सनोफी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक अरोड़ा द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    एनएचएम एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने इस अवसर पर कहा कि यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को उनके क्षेत्र में ही निःशुल्क जांच, उपचार और डॉक्टरों से टेली-परामर्श की सुविधा मिलेगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के लिए जागरूकता, प्रारंभिक जोखिम पहचान और रेफरल सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दुर्लभ रोगों के लिए शीघ्र पहचान, निःशुल्क जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे मरीजों को समय पर उचित देखभाल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से संबंधित सही जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे स्वयं स्वस्थ आदतें अपनाने के साथ अपने परिवार और समुदाय में भी जागरूकता फैला सकें।

    सनोफी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोड़ा ने भारत में बढ़ते एनसीडी के दृष्टिगत शीघ्र पहचान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनोफी स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने और मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की साझेदारियों के प्रति प्रतिबद्ध है। यह साझेदारी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी।

    इस अवसर पर बताया कि एमओयू के तहत दुर्लभ रोगों के निदान और उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, उन्नत तकनीकों के माध्यम से शीघ्र पहचान तथा चयनित बीमारियों की निःशुल्क जांच की सुविधा चिन्हित संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही मधुमेह एवं अन्य एनसीडी के लिए प्रारंभिक जोखिम पहचान, जागरूकता अभियान और रेफरल सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिसमें राज्यभर में तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत “किड्स एंड डायबिटीज इन स्कूल्स (KiDS)” जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ एवं सामुदायिक कार्यकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।

    एमओयू के तहत सिंगरौली, बालाघाट और अनूपपुर जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की तैनाती की जाएगी, जिससे दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकेंगी। इन यूनिट्स के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मुख कैंसर जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे तथा डॉक्टरों से टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। प्रारंभिक चरण में यह सेवा इन तीन जिलों में शुरू की जाएगी और आवश्यकता अनुसार अन्य जिलों में भी विस्तार किया जाएगा।

  • भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर अंकित हैं कई मंत्र, सर्वे में मिले ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख

    भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर अंकित हैं कई मंत्र, सर्वे में मिले ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के धार जिला मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में चल रही नियमित सुनवाई के दौरान मंगलवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दावा किया ऐतिहासिक भोजशाला के प्राचीन पत्थरों पर कई मंत्र अंकित हैं, जिन्हें मिटाने के सबूत भी मौजूद हैं। वहीं, सर्वे के दौरान ऐतिहासिक तांबे के सिक्के और शिलालेख भी मिले हैं।

    भोजशाला मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया कि इस बार भोजशाला का सर्वे पूर्व की तुलना में अधिक व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से किया गया है।

    एएसआई की ओर से बताया गया कि पूर्व में केवल तीन अधिकारियों द्वारा सीमित स्तर पर सर्वे किया गया था, जबकि इस बार 22 अप्रैल 2024 से 98 दिनों तक संरक्षित स्मारक के सभी हिस्सों का विस्तृत अध्ययन किया गया। इस सर्वे में सात एक्सपर्ट्स अधिकारी, पुरातत्वविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे, जिन्होंने दोनों पक्षों की उपस्थिति में प्रतिदिन सुबह से शाम तक कार्य किया। सर्वे के दौरान विशेष सावधानी बरती गई कि खुदाई से भोजशाला की मूल संरचना को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। सर्वे की विस्तृत रिपोर्ट 10 वॉल्यूम में तैयार की गई है, जिसमें कुल 2189 पृष्ठ शामिल हैं। रिपोर्ट में सर्वे के दौरान मिले विभिन्न पुरातात्विक साक्ष्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।

    एएसआई की ओर से सर्वे का विवरण बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कहा कि ऐतिहासिक भोजशाला में प्राचीन पत्थरों पर ऊं नम: शिवाय समेत कई मंत्र अंकित पाए गए। गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित कई देवी-देवताओं की आकृतियां मिलीं। धार्मिक और स्थापत्य महत्व को दर्शातीं 94 कलाकृतियां भी पाई गईं। ये सिद्ध करते हैं कि भोजशाला प्राचीन मंदिर ही थी। इसके साथ ही कई पत्थरों पर अंकित संस्कृत-प्राकृत अक्षरों को मिटाने के साक्ष्य भी मिले हैं। उन पर अरबी-फारसी शब्द स्याही से लिखे होने से छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।

    राजा भोज के काल में बनी भोजशाला

    अधिवक्ता जैन ने यह भी कहा कि अत्याधुनिक तकनीक से किए गए सर्वे से पता चला है कि भोजशाला का निर्माण 10वीं-11वीं सदी के बीच परमार राजा भोज के काल में किया गया था। यहां पाई गईं मिट्टी की ईंटों से बनीं काफी चौड़ी दीवारों की बनावट वैसी ही पाई गई, जैसा उल्लेख राजा भोज की पुस्तकों में मिलता है।

    अब्दुल शाह चंगेज ने बना दिया था मंदिरों को नमाज की जगह

    एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन ने प्राचीन साहित्य का उल्लेख करते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि खिलजी शासन के दौरान अब्दुल शाह चंगेज ने फौज के साथ मालवा की राजधानी धार में प्रवेश किया था और ताकत के बल पर कई मंदिरों को नमाज पढ़ने की जगह के रूप में परिवर्तित कर दिया था।

    सर्वे में क्या-क्या मिला, एएसआई ने बताया

    एएसआई के अनुसार, सर्वे में भोजशाला में संस्कृत और प्राकृत भाषा में 150 से अधिक शब्द और शिलालेख मिले। इनमें प्राचीन लेखन स्पष्ट दिखाई देता है। ऊं नम: शिवाय और ऊं सरस्वतैय: नम: जैसे मंत्र पत्थरों पर उकेरे हुए पाए गए। गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह, भैरव सहित कई देव आकृतियां मिलीं। कुल 94 प्राचीन कलाकृतियां पाई गईं, जो धार्मिक और स्थापत्य महत्व दर्शाती हैं। स्तंभों और दीवारों पर शेर, बंदर, सांप और कीर्तिमुख की आकृतियां मिलीं। सीलिंग और पत्थरों पर कमल के डिजाइन मिले, जो मंदिर वास्तुशैली की पहचान माने जाते हैं। संस्कृत-प्राकृत अक्षरों वाले पत्थरों को मिटाकर दोबारा उपयोग के संकेत मिले। ईंट, बेसाल्ट, चूना पत्थर और मार्बल का उपयोग पाया। इससे विभिन्न कालखंडों में निर्माण के संकेत हैं। दक्षिणी हिस्से की मेहराब बाद में जोड़ी गई, जिसका मटेरियल बाकी ढांचे से अलग है। पत्थरों पर स्याही से लिखे गए शब्द भी मिले, जो बाद में जोड़े जाने का संकेत देते हैं।

    मंगलवार को एएसआई के तर्क पूरे हो गए। अगली सुनवाई 6 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें मध्य प्रदेश शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सलेक चंद जैन की ओर से एडवोकेट दिनेश राजभर अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे।

  • MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई

    MP सरकार का किसानों के हित में बड़ा फैसला… गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की डेडलाइन बढ़ाई


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने किसानों के हित में गेहूं खरीद (Purchasing wheat) के लिए स्लॉट बुकिंग (Slot Booking) की समय-सीमा बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है ताकि कोई भी किसान एमएसपी के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सोमवार को यह घोषणा की। पहले इसकी अंतिम तिथि नौ मई थी। एक अधिकारी ने बताया कि यह फैसला इस उद्देश्य से लिया गया है कि समर्थन मूल्य योजना से कोई भी किसान वंचित न रह जाए।

    चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन
    अधिकारी के अनुसार, दो मई तक राज्य में किसानों से 34.73 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। साल 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत लगभग 600 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। चना और मसूर की खरीद की डेडलाइन 30 मार्च से 28 मई तक निर्धारित की गई है।

    सरकार ने चना के लिए 6.49 लाख टन और मसूर के लिए 6.01 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया है, जबकि अरहर की 1.31 लाख टन खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खरीदी गई उपज का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है।

    अधिकारी ने बताया कि किसानों की उपज की सुरक्षा के लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत लगभग 3.55 लाख टन क्षमता का भंडारण तैयार किया गया है। सामग्री भंडारण योजना के अंतर्गत 1.5 लाख टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 1.1 लाख टन क्षमता वाले गोदामों का पंजीकरण पूरा हो चुका है।


    भूमि और फसल का होगा पूरा डिजिटल रिकॉर्ड

    सीएम मोहन यादव ने बताया कि ‘ई-विकास’ और ‘ई-किसान’ प्रणाली के जरिए किसानों को योजनाओं, बाजार भाव, मौसम और तकनीकी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराई जा रही है। एक अप्रैल से राज्य के सभी जिलों में लागू ई-किसान प्रणाली के तहत हर किसान को एक विशिष्ट आईडी दी जा रही है, जिसमें उसकी भूमि और फसल का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड होगा।


    हर खेत का किया जा रहा भू-टैगिंग

    किसान रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक खेत का भू-टैगिंग किया जा रहा है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन से छिड़काव में सुविधा होगी।


    1,000 से अधिक कृषि ड्रोन आपरेटरों को ट्रेनिंग

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में मध्य प्रदेश देश और दुनिया में अग्रणी है, जहां 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खेती हो रही है और 6,000 से अधिक संकुल बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि प्रणाली के तहत 1,000 से अधिक कृषि ड्रोन ऑपरेटरों को जैविक कीटनाशकों के छिड़काव के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

  • रद्द हो सकती है सोनम रघुवंशी की जमानत…. मेघालय सरकार ने HC में दी चुनौती

    रद्द हो सकती है सोनम रघुवंशी की जमानत…. मेघालय सरकार ने HC में दी चुनौती


    इंदौर।
    राजा रघुवंशी (Raja Raghuvanshi) की हत्या की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी (Main accused Sonam Raghuvanshi) की जमानत अब कानूनी मुश्किलों में फंसती नजर आ रही है। मेघालय सरकार (Government of Meghalaya) ने इस जमानत को हाई कोर्ट (High Court) में चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। राज्य सरकार का तर्क है कि मामला अत्यंत गंभीर है और सेशंस कोर्ट का फैसला न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इससे पहले, निचली अदालत ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और दस्तावेजों में स्पष्टता की कमी के आधार पर सोनम रघुवंशी को जमानत दी थी। अब मेघालय हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी किया है।


    सरकार बोली- सख्त रुख अपनाए कोर्ट

    मेघालय सरकार ने अपनी अर्जी में कहा है कि ईस्ट खासी हिल्स की सेशंस कोर्ट ने जो जमानत दी है। वह जुर्म की प्रकृति के हिसाब से सही नहीं है। इससे इंसाफ मिलने में दिक्कत आ सकती है। मेघालय सरकार का मानना है कि आरोप बहुत ही संगीन हैं और ऐसे मामलों में अदालत को सख्त रुख अपनाना चाहिए।

    गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कुछ गलतियां
    27 अप्रैल को शिलॉन्ग में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ज्यूडिशियल) ने सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी क्योंकि उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कुछ गलतियां थीं। लगभग एक साल बाद मिली इस जमानत के दौरान अदालत ने यह पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े कागजों में जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया था।


    नहीं भरे गए थे चेक बॉक्स

    दस्तावेजों में चेकबॉक्स तक नहीं भरे गए थे और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के बारे में भी साफ तौर पर कुछ नहीं लिखा गया था। अदालत ने यह भी कहा था कि आरोपी को यह स्पष्ट रूप से अवगत नहीं कराया गया कि उसे किस गंभीर धारा में गिरफ्तार किया जा रहा है।


    सोनम रघुवंशी को नोटिस

    इसके अलावा, प्रारंभिक पेशी के दौरान विधिक सहायता की उपलब्धता को लेकर भी रिकॉर्ड में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। मेघालय हाई कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख निर्धारित की गई है।

    तकनीकी आधार पर दी गई बेल को बरकरार रखना उचित नहीं
    मेघालय सरकार का पक्ष है कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी थी और संबंधित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर दी गई जमानत को बरकरार रखना उचित नहीं होगा।