Category: Madhya Pradesh

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा, तेज रफ्तार कार तालाब में गिरी, पांच लोगों की मौत

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा, तेज रफ्तार कार तालाब में गिरी, पांच लोगों की मौत

    राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की जान चली गई। पचोर थाना क्षेत्र के भीलखेड़ी जोड़ के पास शुजालपुर की ओर जा रही तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे तालाब में जा गिरी। पानी में डूबने से कार में सवार सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। सूचना पर पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। क्रेन की मदद से तालाब में डूबी कार को बाहर निकाला गया, जिसके भीतर से पांच शव बरामद हुए।

    पुलिस के अनुसार, सभी मृतक शाजापुर जिले के अरनिया क्षेत्र के निवासी थे। दस्तावेजों के आधार पर एक मृतक की पहचान गोविंद पुत्र उमाशंकर तिवारी के रूप में हुई है। वहीं, अन्य मृतकों के नाम रोहित पटेल, अरविंद सिंह और शंकरलाल बताए गए हैं। एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है। घटना की खबर मिलते ही अरनिया गांव समेत आसपास के इलाके में शोक की लहर फैल गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं।

    प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह कार की तेज रफ्तार और वाहन का नियंत्रण खोना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही दुर्घटना के तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा केवल तेज रफ्तार के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी थी। यह हादसा एक बार फिर सड़क पर सावधानी और सुरक्षित वाहन चलाने की जरूरत की याद दिलाता है।

  • पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन

    पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों पर अब तेजी से न्यायिक कार्रवाई होगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध फैसला देना है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता मजबूत होगी।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 8(3) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है। जारी अधिसूचना में राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा संबंधी गंभीर अपराधों की सुनवाई सामान्य मामलों की तरह लंबी प्रक्रिया में न फंसे और समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।

    इन विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत पंजीकृत परीक्षा संबंधी अपराध तथा राज्य या केंद्र सरकार की अधिकृत जांच एजेंसियों द्वारा जांचे जा रहे मामलों को भी इन्हीं अदालतों में भेजा जाएगा। इससे पेपर लीक, भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी, नकल माफिया और अन्य परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।

    हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसके तहत अदालतें मामलों का संज्ञान लेने, प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम होंगी। इससे मामलों को अलग अदालतों में भेजने की आवश्यकता कम होगी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक तेज तथा प्रभावी बन सकेगी।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं के मामलों ने प्रदेश सहित पूरे देश में चिंता बढ़ाई है। कई अभ्यर्थियों को परीक्षाएं रद्द होने और दोबारा आयोजित होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में भी देरी होती रही है। नई विशेष अदालतों के गठन से इन मामलों का जल्द निपटारा होने और दोषियों को शीघ्र सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना से जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को भी मामलों की सुनवाई में बेहतर समन्वय मिलेगा। साथ ही यह व्यवस्था भविष्य में परीक्षा माफिया और संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने में प्रभावी साबित हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।

    प्रदेश सरकार और न्यायपालिका की यह पहल परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की निगाह इस बात पर होगी कि नई अदालतें कितनी तेजी से मामलों का निपटारा करती हैं और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है।

  • देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत

    देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत


    देवास । देवास की स्वास्थ्य कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार देर रात हुई तोड़फोड़ की एक घटना ने इलाके के रहवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने घर के बाहर खड़ी एक कार पर शराब की बोतल फेंककर उसका कांच तोड़ दिया। घटना के बाद कॉलोनी में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पीड़ित समता श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी कार रोज की तरह घर के सामने खड़ी थी। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने शराब की बोतल फेंककर कार का शीशा तोड़ दिया। सुबह या घटना की जानकारी मिलने पर परिवार बाहर आया तो वाहन क्षतिग्रस्त मिला। उन्होंने बताया कि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई है और इसकी फुटेज पुलिस को सौंप दी जाएगी ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जा सके।

    पुलिस ने आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगालना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

    इस घटना के बाद कॉलोनी की महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समता श्रीवास्तव का आरोप है कि शाम होते ही कुछ असामाजिक तत्व कॉलोनी के आसपास खुलेआम शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इससे महिलाओं और परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दोहराते हुए कहा कि इलाके में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। रहवासियों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी में खड़े वाहनों के साथ तोड़फोड़ और उपद्रव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से रहवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में देने की बात कही है। वहीं कॉलोनी के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि कॉलोनी में रहने वाले परिवार सुरक्षित माहौल में रह सकें।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

  • पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविन्द नारायण सिंह की कार्यशैली आज भी प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविन्द नारायण सिंह की कार्यशैली आज भी प्रेरणास्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह के परिजन उपस्थित थे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, समाज का कल्याण करना है। आज की नई पीढ़ी को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण और नैतिकता की सीख लेनी चाहिए। वे बेहद सरल जीवन और सहज व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे। जनता से उनका सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी शक्ति था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य नागरिकों की समस्याओं को निकट से समझा। ऐसे व्यक्तित्व सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह का जीवन युवाओं को ईमानदारी, संघर्ष और राष्ट्र सेवा का संदेश देता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गोविन्द नारायण सिंह वर्ष 1967 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया. लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की दिशा में कार्य किया। उनका कार्यकाल राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह की जयंती पर हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और सतत् विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1920 को रामपुर बघेलान में हुआ था। एम.ए., एलएलबी. तक शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन प्रारंभ किया। उन्होंने चतुर्थ विधानसभा (1967-1972) में 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के विकास को एक नई दिशा दी थी। सिंह का 10 मई 2005 को देहावसान हो गया।

    मीडिया से चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्पांजलि कार्यक्रम के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह राज्य में तत्कालीन संविद सरकार की राजनीति के केंद्र बिंदु थे। वे रीवा के निवासी थे। उन्होंने सादगी, निष्पक्षता के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनका स्मरण कर रहे हैं। सिंह ने राजमाता सिंधिया के कार्यकाल में जनता की आवाज बनकर यह भरोसा दिलाया था कि पक्ष हो या विपक्ष, अब राजनीति में बदलाव का समय है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती और पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम कराने की उत्कृष्ट पहल की है।

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षक और विद्यार्थी वर्ग के कल्याण से जुड़े सभी विषयों पर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विद्यार्थियों के हित में लगातार महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता के हित में जब भी कोई निर्णय लिया जाता है, मध्यप्रदेश उसे लागू करने और निर्णय के अनुरूप नीतिगत व्यवस्था बनाने वाला पहला राज्य होता है। समय की जरूरत है कि युवाओं से संबंधित न्यायिक फैसले द्रुत गति से हों। इसके लिए मध्यप्रदेश में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स (भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में) बनाये जायेंगे। पेपर लीक और परीक्षा सहित अन्य मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 3 माह में निराकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा स्थित सेंट्रल हॉल में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मन में विद्यार्थियों के कल्याण और उनसे जुड़े सभी विषयों को लेकर बेहद सकारात्मक भाव हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही नीट पेपर लीक की खबर सामने आई, उसकी जांच के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की। प्रकरण दर्ज हुआ और देशभर में तेज गति से आरोपियों की गिरफ्तारियां भी की गई, फिर दोबारा नीट परीक्षा कराई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पूरी सहानुभूति और संवेदना विद्यार्थियों के साथ है। हम हर परिस्थिति में विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में नीट परीक्षाएं बेहतर और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हों, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल्स (एसओपी) तैयार कर सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश में सबसे पहले लागू की गई। पिछले ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में विकास की गतिविधियों को गति देकर तेज़ी लाने के साथ-साथ युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कल्याण की चिंता कर इनके हित में निर्णय लेना भी हमारा कर्तव्य है। विद्यार्थियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय हमारी सरकार ले चुकी है और यह आगे भी लगातार जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। पूरे देश में पहले मात्र 641 विश्वविद्यालय थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 1400 से अधिक हो गई है। मेडिकल एजुकेशन की सीटें भी 50 हजार से बढ़कर 1 लाख से अधिक हो चुकी हैं।

  • NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज

    NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज


    भोपाल । NEET पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सबसे बड़ा आंदोलन इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर चल रहा है, जहां 30 जून को सिर्फ 5 छात्रों से शुरू हुआ धरना अब हजारों लोगों का आंदोलन बन चुका है।

    इंदौर में शनिवार को एक छात्रा नीम की पत्तियां लेकर प्रदर्शन में पहुंची। उसने कहा कि जिस तरह नीम बैक्टीरिया खत्म करती है, उसी तरह शिक्षा व्यवस्था में फैली गड़बड़ियों को भी साफ करने की जरूरत है। लगातार बारिश के बावजूद छात्र पिछले 25 दिनों से धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर पुलिस ड्रोन से निगरानी कर रही है।

    भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भी छात्रों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    ग्वालियर में आंदोलन को लेकर समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए, जबकि जबलपुर में “कॉकरोच जनता पार्टी” के विरोध में “लाल हिट जनता पार्टी” ने प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा कि छात्रों की मांगें उचित हैं, लेकिन विरोध का तरीका सही नहीं है।

    धार, मऊगंज, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली, भिंड, टीकमगढ़, शाजापुर, सतना, सीधी, रतलाम, रीवा, बैतूल, उमरिया, बड़वानी और श्योपुर सहित कई जिलों में भी रैलियां, धरने और ज्ञापन सौंपे गए। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई तथा कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है, जिससे यह विरोध अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक फैसला 20 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर 6 जिलों में नए कलेक्टर तैनात

    मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक फैसला 20 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर 6 जिलों में नए कलेक्टर तैनात


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की नियुक्ति के 24 घंटे के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 20 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस व्यापक प्रशासनिक सर्जरी में छह जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय और कई महत्वपूर्ण विभागों में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार का यह कदम आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा को प्रशासन अकादमी का महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया है। वहीं इंदौर संभाग के आयुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव बनाया गया है। उनकी जगह भास्कर लक्षकार को नया इंदौर संभागायुक्त नियुक्त किया गया है।

    मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई को जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें उद्योग एवं एमएसएमई विभाग का प्रभार भी दिया गया है। यह विभाग अब तक प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह के पास था।

    सरकार ने छह जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की है। अजय कटेसरिया को रतलाम, मिशा सिंह को शहडोल, रत्नाकर झा को अनूपपुर, गुरु प्रसाद को खरगोन, दिव्यांक सिंह को मंदसौर और डॉ. शेर सिंह मीना को आगर मालवा का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं शहडोल के पूर्व कलेक्टर केदार सिंह को लोक निर्माण विभाग में अपर सचिव के रूप में पदस्थ किया गया है।

    मंदसौर की कलेक्टर अदिति गर्ग को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में ओएसडी सह आयुक्त बनाया गया है, जबकि आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव को औद्योगिक विकास निगम, इंदौर का कार्यकारी संचालक नियुक्त किया गया है। खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल दो वर्ष की अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) पर चली गई हैं, जिसके चलते वहां गुरु प्रसाद को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया की नियुक्ति विशेष चर्चा में है। सामान्य प्रशासन विभाग में रहते हुए उन्होंने पदोन्नति नियम-2025 तैयार करने और सरकार की प्राथमिकता वाले समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रारूप को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पहली बार उन्हें किसी जिले की कलेक्टरी का दायित्व सौंपा गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत प्रमुख सचिव संदीप यादव को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अब केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी भी वही करेंगे। नर्मदा घाटी विकास (NVD) विभाग का प्रभार प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार को सौंपा गया है। वहीं मनीष सिंह को ऊर्जा विभाग का अतिरिक्त प्रभार और सचिन सिन्हा को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। राघवेंद्र सिंह को वन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त करते हुए आनंद विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

    इस फेरबदल का असर महिला कलेक्टरों की संख्या पर भी पड़ा है। एक माह पहले प्रदेश के 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टर कार्यरत थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 15 रह गई है। हालांकि मिशा सिंह की शहडोल में नियुक्ति से आंशिक संतुलन बना है। माना जा रहा है कि यह प्रशासनिक बदलाव सरकार की आगामी विकास योजनाओं और निवेश आधारित परियोजनाओं को गति देने की रणनीति का हिस्सा है।

  • भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू

    भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव: आज से हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन, दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी; 50 ट्रिप का शेड्यूल लागू


    भोपाल । भोपाल मेट्रो ने शहर के यात्रियों को बड़ी सौगात दी है। शनिवार, 25 जुलाई से राजधानी में मेट्रो सेवा और अधिक तेज, सुविधाजनक और आधुनिक हो गई है। अब सुभाषनगर से एम्स स्टेशन के बीच मेट्रो दोनों ट्रैक पर संचालित होगी और पीक ऑवर्स में यात्रियों को हर 15 मिनट में ट्रेन उपलब्ध होगी। पहले जहां मेट्रो सिंगल ट्रैक पर चलने के कारण यात्रियों को करीब 75 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब यह अंतर काफी कम हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MPMRCL) के अनुसार, नए सिग्नलिंग सिस्टम के लागू होने के बाद प्रतिदिन कुल 50 ट्रिप संचालित की जाएंगी। सुभाषनगर स्टेशन से पहली मेट्रो सुबह 9 बजे रवाना होगी। व्यस्त समय में हर 15 मिनट और सामान्य समय में हर 30 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध रहेगी। इससे ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    भोपाल मेट्रो की शुरुआत 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की थी। अगले दिन से आम यात्रियों के लिए सेवा शुरू हुई थी, लेकिन अब तक मेट्रो केवल एक ट्रैक पर संचालित हो रही थी। करीब सात महीने बाद आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के चालू होने से पहली बार दोनों ट्रैक पर नियमित संचालन संभव हो पाया है।

    इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले जून महीने में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने दो दिन तक निरीक्षण किया था। आवश्यक सुरक्षा परीक्षण पूरे होने और मंजूरी मिलने के बाद शनिवार से नए सिस्टम के अनुसार संचालन शुरू कर दिया गया है।

    यात्रियों को आकर्षित करने के लिए मेट्रो प्रबंधन ने विशेष प्रमोशनल डिस्काउंट भी लागू किया है। रिटर्न जर्नी टिकट पर 5 प्रतिशत तथा ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। वहीं, MPMRCL मोबाइल ऐप के जरिए ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर 8 से 15 प्रतिशत तक अतिरिक्त बोनस राशि दी जाएगी। 200 से 499 रुपए तक के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, 500 से 999 रुपए पर 10 प्रतिशत, 1000 से 1499 रुपए पर 12 प्रतिशत और 1500 से 2000 रुपए तक के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस का लाभ मिलेगा।

    यात्रियों की सुविधा के लिए सभी स्टेशन पहली ट्रेन के निर्धारित समय से 15 मिनट पहले खोल दिए जाएंगे, ताकि सुरक्षा जांच और टिकट लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। प्रत्येक स्टेशन के निर्धारित प्रवेश द्वार पर मैनुअल टिकटिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।

    करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया यह अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, सुरक्षित दूरी बनाए रखने, दोनों ट्रैक पर संचालन और भविष्य में मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था के बाद भोपाल मेट्रो का संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो जाएगा।

  • बरसात का नया दौर शुरू भोपाल इंदौर सहित 35 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी मानसून ने पकड़ी रफ्तार

    बरसात का नया दौर शुरू भोपाल इंदौर सहित 35 जिलों में भारी वर्षा की चेतावनी मानसून ने पकड़ी रफ्तार


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार शनिवार को भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 35 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में बारिश का यही सिलसिला जारी रहेगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम मजबूत बना हुआ है, जिससे कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है और मानसून ट्रफ मध्य प्रदेश से होकर गुजर रही है। इसके चलते हवा में नमी का स्तर 80 से 95 प्रतिशत तक बना हुआ है, जिससे लगातार बारिश की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा समेत 35 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं रीवा, सतना, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, शहडोल और आसपास के जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    लगातार चार दिनों से हो रही बारिश का असर प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। 20 जुलाई तक जहां प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब यह कमी घटकर 11 प्रतिशत रह गई है। प्रदेश में अब तक औसतन 330.4 मिमी यानी करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो पूरे मानसून के निर्धारित कोटे का लगभग 35 प्रतिशत है।

    बारिश के मामले में देवास जिला सबसे आगे है, जहां अब तक करीब 19.6 इंच वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, बुरहानपुर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड और मंदसौर सहित 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि प्रदेश के 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों में उफान और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। मैहर में तेज बारिश के दौरान एक पांच वर्षीय बच्चा पानी के तेज बहाव में बहने लगा, जिसे स्थानीय लोगों ने समय रहते सुरक्षित बचा लिया। ऐसे में प्रशासन ने नागरिकों से सावधानी बरतने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।