Category: Madhya Pradesh

  • 2 करोड़ की जमीन के लिए 1000 किलोमीटर का सफर, ICU एंबुलेंस से इंदौर पहुंचीं बुजुर्ग महिला; बोलीं- मेरा प्लॉट वापस दिला दीजिए

    2 करोड़ की जमीन के लिए 1000 किलोमीटर का सफर, ICU एंबुलेंस से इंदौर पहुंचीं बुजुर्ग महिला; बोलीं- मेरा प्लॉट वापस दिला दीजिए

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में आयोजित कलेक्टर जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौजूद लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उत्तर प्रदेश के बिजनौर से गंभीर रूप से बीमार एक बुजुर्ग महिला को उनके परिजन विशेष आईसीयू एंबुलेंस के जरिए करीब 1000 किलोमीटर का सफर तय कर इंदौर लेकर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि उनकी करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जा कर लिया गया है और लंबे समय से शिकायतों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।

    परिजनों के अनुसार विवाद गांधीनगर क्षेत्र स्थित दो प्लॉटों को लेकर है, जो वर्ष 1969 में एक आवासीय सहकारी संस्था द्वारा बुजुर्ग महिला के नाम आवंटित किए गए थे। बाद में संबंधित संपत्तियों का नामांतरण भी विधिवत उनके नाम पर दर्ज किया गया था। परिवार का दावा है कि वे कई दशकों से इन जमीनों के वैध मालिक रहे हैं और सभी आवश्यक दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

    परिवार के सदस्यों का कहना है कि वर्षों पहले जब वे बिजनौर में रहने चले गए थे, तब संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी कुछ रिश्तेदारों को सौंपी गई थी। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने कथित रूप से सोसायटी प्रबंधन के साथ मिलीभगत की और फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। परिवार का दावा है कि वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से विवादित संपत्ति की कीमत लगभग दो करोड़ रुपये है।

    पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि विभिन्न स्तरों पर आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे उन्हें न्याय के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा।

    स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रही बुजुर्ग महिला को आखिरकार परिवार विशेष चिकित्सा सुविधाओं से लैस आईसीयू एंबुलेंस में इंदौर लेकर पहुंचा। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी पूरी बात रखी और जमीन वापस दिलाने की मांग की। परिवार का कहना है कि यह केवल संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि कई वर्षों से चल रही कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का मुद्दा है, जिसने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है।

    जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी बुजुर्ग महिला की स्थिति और उनके संघर्ष को गंभीरता से देखा। लंबी दूरी तय कर स्वास्थ्य जोखिम के बावजूद न्याय की उम्मीद में उनका इंदौर पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

    मामले में परिवार की ओर से प्रस्तुत आवेदन प्राप्त करने के बाद जिला प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और आरोपों की समीक्षा कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही है। परिवार का कहना है कि अब उनकी अंतिम उम्मीद प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है और उन्हें भरोसा है कि निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    यह मामला एक बार फिर संपत्ति विवादों, दस्तावेजों की सुरक्षा और लंबे समय तक लंबित रहने वाली शिकायतों को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल परिवार प्रशासनिक जांच के परिणाम का इंतजार कर रहा है और उम्मीद जता रहा है कि वर्षों से चली आ रही उनकी परेशानी का समाधान जल्द निकलेगा।

  • मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक अब बस दो दिन दूर, आज 42 जिलों में बारिश का अलर्ट

    मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक अब बस दो दिन दूर, आज 42 जिलों में बारिश का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश की सीमा तक पहुंच चुका है और अगले दो से तीन दिनों में इसकी औपचारिक एंट्री होने की संभावना है। अनुमान है कि मानसून बालाघाट, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के रास्ते राज्य में प्रवेश करेगा। इसके पहले प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार बनी रहेंगी।

    मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के 42 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है।

    नरसिंहपुर में लू की चेतावनी
    बारिश की संभावना के बीच मौसम विभाग ने नरसिंहपुर जिले में हीटवेव का अलर्ट भी जारी किया है। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, अशोकनगर, श्योपुर, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन और आगर-मालवा जिलों में गर्मी का असर बना रहने की संभावना है।

    कई जिलों में बरसे बादल, तापमान में आई गिरावट
    मंगलवार को प्रदेश के अनेक हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बालाघाट में सवा इंच और रायसेन में पौन इंच वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा धार, नर्मदापुरम, इंदौर, खरगोन, राजगढ़, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और बड़वानी सहित कई जिलों में बारिश हुई।

    बारिश और तेज हवाओं के कारण दिन के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। खरगोन में 30.4 डिग्री, धार में 31 डिग्री, सिवनी में 32.2 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.3 डिग्री, बैतूल और मंडला में 35.5 डिग्री तथा रायसेन में 35.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

    ग्वालियर में 41 डिग्री पार, दतिया और सीधी सबसे गर्म
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में इंदौर का अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री, भोपाल का 32.2 डिग्री, उज्जैन का 34.8 डिग्री और जबलपुर का 35.4 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं ग्वालियर में पारा 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दतिया और सीधी प्रदेश के सबसे गर्म जिले रहे, जहां अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

  • बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण

    बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण


    मध्यप्रदेश  मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी सूची में कुल 106 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। इस नई टीम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पार्टी के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को महत्व देते हुए अनेक नए चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नई कार्यसमिति को भाजपा के आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक अभियानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने इस सूची के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन स्थापित किया जाएगा। प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के साथ महिला प्रतिनिधित्व को भी पर्याप्त महत्व दिया गया है। कई महिला नेताओं को शामिल कर भाजपा ने संगठन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया है।

    घोषित सूची में जगदीश देवड़ा कैलाश विजयवर्गीय प्रह्लाद पटेल विष्णु दत्त शर्मा नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी नेताओं सहित कई अनुभवी कार्यकर्ताओं को स्थान मिला है। वहीं विभिन्न संभागों और जिलों से जुड़े नेताओं को भी प्रतिनिधित्व देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस नई कार्यसमिति के जरिए संगठन के भीतर सभी प्रमुख वर्गों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है।

    सूची जारी होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कार्यसमिति में शामिल नेताओं ने इसे संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी और पार्टी नेतृत्व के विश्वास का सम्मान बताया है। वहीं जिन नए चेहरों को मौका मिला है उनके लिए यह राजनीतिक रूप से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और इसी सोच के तहत कार्यसमिति का गठन किया गया है।

    राजनीतिक दृष्टि से यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश में आने वाले समय में नगरीय निकाय चुनाव पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू होने वाली हैं। ऐसे में भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए नई टीम पर भरोसा जता रही है। पार्टी की रणनीति साफ है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर राजनीतिक आधार को और मजबूत किया जाए।

    नई प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा कार्यकर्ताओं की ऊर्जा का समावेश भाजपा की भविष्य की रणनीति को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यह टीम न केवल संगठनात्मक गतिविधियों को गति देगी बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए भी पार्टी को मजबूत आधार प्रदान करेगी। भाजपा की इस घोषणा को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम माना जा रहा है जिसकी राजनीतिक चर्चा आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।

  • हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई

    हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। आय से अधिक संपत्ति और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के बीच आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा ने अब प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस कदम के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण की कानूनी लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।

    हाईकोर्ट में दायर याचिका में सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर नहीं दिया गया। याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 233(1) के तहत किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि जांच एजेंसी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना पक्ष सुने ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। उनका कहना है कि यह निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के विपरीत है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत की मांग की है।

    सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का भी उल्लेख किया है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। याचिका के अनुसार इस मामले में उन्हें ऐसा अवसर नहीं दिया गया, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं।

    गौरतलब है कि सौरभ शर्मा का नाम उस समय सुर्खियों में आया था जब उनके और उनसे जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति और नकदी से जुड़े दस्तावेज सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की थी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    यह मामला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उससे जुड़े खुलासों ने इसे हाई प्रोफाइल बना दिया है। अब सौरभ शर्मा द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद इस मामले की कानूनी दिशा पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानूनी मानकों के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस बहुचर्चित मामले में नए कानूनी तर्क और बहसें सामने आने की संभावना बढ़ गई है।

    आने वाले दिनों में अदालत का रुख और सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले पक्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तब तक यह प्रकरण प्रदेश के सबसे चर्चित कानूनी और प्रशासनिक मामलों में बना रहेगा।

  • हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप

    हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक हैचरी विकसित की जाए। सरकार का उद्देश्य मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश को मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस नीति के चलते प्रदेश में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अगले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है जहां मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो जाए। इसके लिए हर जिले में आधुनिक हैचरी विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही इस क्षेत्र के सतत विकास की कुंजी होगी।

    बैठक में मोती उत्पादन को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मोती उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों की सफल योजनाओं तथा बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनाकर प्रदेश में मोती उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए।

    मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कोल्ड चेन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने के साथ भंडारण और परिवहन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है ताकि उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन और जलीय जीवों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साथ ही जल संपदा आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।

    बैठक में यह जानकारी भी सामने आई कि मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने इसे संतोषजनक उपलब्धि बताते हुए कहा कि मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रखा जाए। राज्य सरकार की नई पहलें संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश मत्स्य उत्पादन, मछली बीज निर्माण और जलीय संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

  • MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली

    MP में आग का कहर उज्जैन के कालभैरव मंदिर के सामने दुकानों में लगी आग ,इंदौर में मोबाइल शॉप जली


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार को आगजनी की दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों को दहला दिया। उज्जैन और इंदौर में लगी आग से लाखों रुपये के सामान के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

    पहली घटना धार्मिक नगरी उज्जैन में सामने आई जहां प्रसिद्ध कालभैरव मंदिर के सामने स्थित पूजा सामग्री की दुकानों में अचानक आग लग गई। सुबह करीब साढ़े पांच बजे आग लगने की सूचना फायर कंट्रोल रूम को मिली। मंदिर क्षेत्र में आग की खबर फैलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड के कई वाहन मौके पर रवाना किए गए। अधिकारियों के अनुसार आग बुझाने के लिए तीन दमकल वाहनों और एक पानी के टैंकर की मदद ली गई। आग ने दो दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया था जिनमें एक छोटी और एक बड़ी दुकान शामिल थी। दोनों दुकानों में पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली सामग्री रखी हुई थी।

    दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर नियंत्रण पा लिया जिससे आग आसपास की अन्य दुकानों तक नहीं फैल सकी। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है लेकिन वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल देखा गया।

    दूसरी घटना इंदौर में सामने आई जहां एयरपोर्ट क्षेत्र के 60 फीट रोड स्थित एक मोबाइल दुकान में देर रात अचानक आग लग गई। आग लगते ही आसपास के लोगों ने धुआं और लपटें देखीं तथा तत्काल इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। स्थानीय लोगों ने भी अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और दुकान का शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। आग की चपेट में आने से दुकान में रखे मोबाइल एसेसरीज और अन्य सामान पूरी तरह जलकर राख हो गए। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है और जांच जारी है।

    दोनों घटनाओं ने एक बार फिर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन ने लोगों से विद्युत उपकरणों और वायरिंग की नियमित जांच कराने तथा सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील की है। वहीं पुलिस और संबंधित विभाग आग लगने के कारणों की जांच में जुटे हुए हैं।

  • राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित

    राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला चर्चा में आ गया है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल द्वारा मांगी गई रिपोर्ट दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजभवन तक नहीं पहुंची है। मामला आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों और उन पर खर्च किए गए बजट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट में देरी को लेकर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने आदिवासी क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से अप्रैल महीने में जल संसाधन विभाग की प्रमुख अभियंता को पत्र भेजा था। इस पत्र में विशेष रूप से आदिवासी अंचलों में जल आपूर्ति और जल जीवन मिशन से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इन योजनाओं का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा।

    राजभवन की ओर से भेजे गए इस पत्र को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। बताया जा रहा है कि विभाग के 116 मुख्य अभियंताओं को इस संबंध में जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जून महीने में जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के संचनालय और मध्य प्रदेश शासन ने भी विभाग को अलग से पत्र लिखकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई और मामला लंबित बना हुआ है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल बजट खर्च को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में 38 विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 1085 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभाग आवंटित बजट का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा उपयोग भी कर चुका है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद योजनाओं से लाभान्वित हुए लोगों का स्पष्ट ब्यौरा अब तक राजभवन को उपलब्ध नहीं कराया गया है।

    राज्यपाल ने अपने पत्र में विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि इन परियोजनाओं से कितने आदिवासी परिवारों को वास्तविक लाभ मिला और योजनाओं का जमीनी प्रभाव क्या रहा। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लाभार्थियों की संख्या और परियोजनाओं के परिणामों को लेकर रिपोर्ट लंबित रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी योजना पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होता है। ऐसे में राजभवन द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराना विभागीय समन्वय और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और आदिवासी क्षेत्रों में खर्च किए गए करोड़ों रुपये के वास्तविक परिणामों का विवरण राजभवन के सामने कब आता है। यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां

    कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार का दिन सड़क हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक साबित हुआ। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए पांच बड़े सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं तेज रफ्तार ट्रकों की टक्कर ने जान ले ली तो कहीं अनियंत्रित वाहन पलटने से लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हादसों के बाद कई स्थानों पर अफरा-तफरी और चीख पुकार का माहौल देखने को मिला।

    अनूपपुर जिले में नेशनल हाईवे 43 पर टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    वहीं शाजापुर जिले में नेशनल हाईवे 52 पर उकावता चौकी के पास दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि पीछे से आ रहे ट्रक चालक को नींद की झपकी आ गई जिसके कारण ट्रक आगे चल रहे वाहन से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को वाहन से बाहर निकाला और घायल को अस्पताल पहुंचाया।

    नरसिंहपुर जिले में तेंदूखेड़ा के पास एक स्कॉर्पियो वाहन गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन में सवार छह लोग घायल हो गए जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल रीवा जिले के निवासी हैं जो इंदौर से अपनी बहन का इलाज कराकर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन तीन बार पलटा जिसके कारण उसका अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में कचौरी मोड़ के पास एक और भीषण हादसा सामने आया। कटनी से पन्ना जा रहा तेज रफ्तार ट्रक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से उतरकर खेतों में घुस गया। लगभग सौ मीटर तक घिसटने के बाद ट्रक एक जामुन के पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में ट्रक के परिचालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों को वाहन से बाहर निकाला।

    इधर सीहोर जिले में जताखेड़ा के पास चावल से भरा एक ट्रक पलट गया। ट्रक पलटने के बाद उसमें आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए गए। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    लगातार हो रहे सड़क हादसे एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही और थकान जैसी वजहें अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनती हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

  • MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे

    MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त हो गया है। यह उपलब्धि न केवल सिवनी की कृषि पहचान को मजबूत करेगी बल्कि यहां के हजारों किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई संभावनाएं भी उपलब्ध कराएगी। लंबे समय से अपने अनोखे स्वाद और विशाल आकार के लिए पहचाने जाने वाले इस फल को अब आधिकारिक रूप से विशिष्ट उत्पाद का दर्जा मिल गया है।

    जीआई टैग किसी उत्पाद की विशेष भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उस नाम का उपयोग केवल उसी क्षेत्र में उत्पादित वस्तु के लिए किया जा सके। सिवनी के जम्बो सीताफल को यह मान्यता मिलने के बाद इसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित हो जाएगी और अन्य क्षेत्रों में उत्पादित फल इसके नाम का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    सिवनी का जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सामान्य रूप से एक सीताफल का वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है लेकिन जिले के भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई सीताफल 800 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं। यही विशेषता इसे सामान्य सीताफलों से अलग बनाती है।

    इसके अलावा इस फल का स्वाद भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। इसमें बीज अपेक्षाकृत कम होते हैं जबकि सफेद और गाढ़ा गूदा अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद मीठा स्वाद इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनाता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों में इसकी काफी मांग रहती है।

    पोषण के लिहाज से भी यह फल बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और विभिन्न आवश्यक विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

    जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। अब वे अपने उत्पाद को विशेष पहचान के साथ बाजार में बेच सकेंगे जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सिवनी के जम्बो सीताफल की अलग पहचान बनेगी।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इससे सीताफल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को गुणवत्ता आधारित खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर सिवनी के जम्बो सीताफल को मिला जीआई टैग जिले की कृषि विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण

    अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण


    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश का एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर से जुड़ा है जहां वर्ष 2017 में चंदे की राशि और आभूषणों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। उस समय इस घटना ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी थी और मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

    ओरछा का रामराजा सरकार मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है और देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे और संपत्तियों में कथित अनियमितता की खबर सामने आने के बाद लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई थीं।

    मामला उस समय का है जब निवाड़ी जिला अस्तित्व में नहीं आया था और ओरछा अविभाजित टीकमगढ़ जिले का हिस्सा था। आरोप लगाए गए कि मंदिर के खातों दान राशि आभूषणों नगद बही खातों स्टॉक रजिस्टर तथा मंदिर की चल और अचल संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि मंदिर से नकदी और कुछ आभूषण गायब पाए गए थे।

    इस मामले में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि जांच लंबे समय तक चलती रही लेकिन कथित चंदा चोरी कांड का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। यही कारण रहा कि यह मामला वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा रहा।

    बाद में मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक के सिर पर आपराधिक मुकदमे की तलवार अनिश्चितकाल तक नहीं लटकाई जा सकती। केवल प्रशासनिक कठिनाइयों अधिकारियों के तबादलों सेवानिवृत्ति या दस्तावेज जुटाने में लगने वाला समय जांच को वर्षों तक लंबित रखने का आधार नहीं बन सकता।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अत्यधिक देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त त्वरित और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। यह फैसला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि अदालत ने जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।

    हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले से असहमति जताई थी और बाद में एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ अपील करने की तैयारी भी शुरू की थी। ऐसे में यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना गया और कानूनी स्तर पर इसकी चर्चा जारी रही।

    अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे ताजा विवाद के बीच ओरछा का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। दोनों घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।