Category: Madhya Pradesh

  • मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान

    मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान


    ग्वालियर । ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों ने कथित प्रताड़ना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें 18 बालक और 8 बालिकाएं शामिल हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति की कार्रवाई के बाद बच्चों के बयान दर्ज किए गए। अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते समय कई बच्चे भावुक हो गए। बच्चों ने बताया कि वे अब मदरसे में नहीं रहना चाहते और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करना चाहते हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने मदरसे की इमारत सील कर दी है और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की है।

    बच्चों के आरोपों के मुताबिक मामूली गलती होने पर उन्हें लोहे की रॉड पर लटकाकर पीटा जाता था। कुछ बच्चों ने घंटों मुर्गा बनाकर रखने की बात भी कही है। उनका कहना है कि इस तरह की सजा से उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी। बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि वे वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी लेकिन बच्चों के बयान के आधार पर प्रशासन और बाल अधिकार से जुड़ी एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    बच्चों ने भोजन को लेकर भी शिकायत की है। उनके मुताबिक सुबह और शाम उन्हें दो-दो रोटियां दी जाती थीं और अधिक खाना मांगने पर मना कर दिया जाता था। बालिकाओं ने आरोप लगाया कि मदरसे में आने वाली एक महिला जिन्हें वे बाजी कहती थीं उनसे घरेलू काम करवाती थीं। उनके अनुसार उन्हें झाड़ू-पोछा लगाने बर्तन और कपड़े धोने तथा टॉयलेट साफ करने के लिए कहा जाता था। छत से कपड़े उतारने में देरी होने पर मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

    बालिकाओं ने कपड़े पहनने को लेकर दबाव बनाने की बात भी कही है। उनके आरोपों के मुताबिक उन पर हिजाब पहनने के लिए जोर दिया जाता था और विरोध करने पर डराने वाली बातें कही जाती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित महिला के बेटे की ओर से रात में खिड़की से ताक-झांक की जाती थी। बच्चों का कहना है कि शिकायत के बावजूद उनकी बात पर कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।

    प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मदरसे से इस्लामिक किताबें और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने इमारत को सील करते हुए संचालक से मदरसा चलाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। झांसी रोड के एसडीएम अतुल सिंह के मुताबिक मदरसे को सील कर नोटिस जारी किया गया है। बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की जांच और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। रेस्क्यू किए गए बच्चों ने अधिकारियों के सामने मदरसे में वापस नहीं जाने की इच्छा जताई है। अब संबंधित विभागों के सामने उनकी सुरक्षित देखभाल शिक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना भी जरूरी होगा। फिलहाल मदरसे की इमारत सील है और प्रशासन दस्तावेजों तथा बच्चों के बयानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया कर रहा है।

  • पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए

    पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए


    ग्वालियर। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर एक शादीशुदा महिला से करीब 2 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले मोबाइल नंबर से महिला को फोन किया और खुद को विदेशी नागरिक बताकर बातचीत शुरू की। कुछ समय तक दोस्ती का भरोसा जीतने के बाद उसने महिला को भारी मात्रा में सोना गिफ्ट करने का लालच दिया। इसके बाद आरोपी ने कहानी बनाई कि वह सोना लेकर भारत आ रहा था लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने खुद को छुड़ाने के लिए 2 लाख रुपए की जरूरत बताई। उसकी बातों में आकर महिला ने अलग-अलग ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए 12 बार में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में आरोपी ने और पैसे मांगने शुरू किए तो महिला को ठगी का शक हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना बताई। शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार गेरू वाले बंगले के पास त्यागी नगर मुरार निवासी 25 वर्षीय गजल बाथम सोशल मीडिया पर एक अनजान व्यक्ति के संपर्क में आई थी। आरोपी पिछले कुछ दिनों से उसकी पोस्ट पर कमेंट कर रहा था। इसी दौरान 3 अक्टूबर 2026 को महिला के मोबाइल पर पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले एक अनजान नंबर से कॉल आया। महिला को शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि नंबर पाकिस्तान के कंट्री कोड से जुड़ा है। फोन करने वाले ने खुद को विदेशी नागरिक बताया और मीठी बातें करके उससे दोस्ती बढ़ाने की कोशिश की।

    अगले दिन 4 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने दोबारा फोन किया। उसने महिला से आधार कार्ड मांगा लेकिन महिला ने अपना आधार कार्ड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी ने दोस्ती का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह उसे बड़ी मात्रा में सोना गिफ्ट करना चाहता है और खुद लेकर भारत आ रहा है। सोना मिलने की उम्मीद में महिला उसकी बातों पर भरोसा करने लगी।

    कुछ देर बाद आरोपी ने घबराए हुए अंदाज में फोन किया और दावा किया कि वह सोना लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन एयरपोर्ट पर एयरफोर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने महिला को बताया कि अधिकारियों ने उसे छोड़ने के लिए 2 लाख रुपए मांगे हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि उसके पास करीब 20 लाख रुपए का सोना है और यदि वह रकम भेज देगी तो वह इस परेशानी से बाहर निकल जाएगा। पुलिस के मुताबिक इसी कहानी के जरिए आरोपी ने महिला को पैसे भेजने के लिए तैयार किया।

    इसके बाद आरोपी ने महिला को अलग-अलग दुकानों के ऑनलाइन क्यूआर कोड भेजे। महिला ने उन कोड पर कुल 12 ट्रांजेक्शन में 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम कई हिस्सों में भेजी गई जिसमें 19 हजार रुपए से लेकर 36 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन शामिल थे। पैसे मिलने के बाद भी आरोपी नहीं रुका और उसने महिला से और रकम की मांग शुरू कर दी।

    जब महिला ने बताया कि उसके पास अब पैसे नहीं हैं तो आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करने लगा। इसके बाद महिला को संदेह हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना की जानकारी दी। ठगी का अहसास होने पर साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।

    मुरार थाना प्रभारी गोविंद बगोली के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए रकम ट्रांसफर की गई है उनकी बैंकिंग और तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार

    ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार


    ग्वालियर। ग्वालियर में लापता और अपहृत बालक-बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा को हरियाणा से बरामद कर लिया है। छात्रा करीब डेढ़ महीने पहले कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान छात्रा के मोबाइल की लोकेशन हरियाणा के कैथल में मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और 23 अक्टूबर को आजाद कॉलोनी स्थित एक कमरे से उसे बरामद कर लिया। पुलिस के मुताबिक एक युवक छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वह मौके से फरार हो गया। अब पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस के अनुसार ग्वालियर के उपनगर मुरार निवासी एक व्यक्ति ने 7 सितंबर 2026 को थाने में अपनी 21 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। परिजन ने बताया था कि छात्रा सुबह करीब 9 बजे मुरार स्थित गर्ल्स कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह कॉलेज से लौट आएगी लेकिन देर रात तक उसके घर नहीं पहुंचने पर चिंता बढ़ गई। परिजनों ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।

    शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देश पर और सीएसपी मुरार संदीप बांगरे के मार्गदर्शन में छात्रा की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व मुरार थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद बल्लभ बगोली ने किया। पुलिस ने संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाने के साथ ही मुखबिर तंत्र और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

    तलाश के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्रा का मोबाइल हरियाणा के कैथल में सक्रिय हुआ है। इस सुराग के आधार पर पुलिस टीम तत्काल कैथल के लिए रवाना हुई। स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद टीम ने 23 अक्टूबर 2026 को शुगर मिल के पास स्थित आजाद कॉलोनी में एक कमरे पर दबिश दी। इसी दौरान छात्रा को बरामद कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक छात्रा को सुरक्षित ग्वालियर लाया गया है। उसे 24 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे ग्वालियर पहुंचाया गया।

    पुलिस का कहना है कि छात्रा को अपने साथ ले जाने वाला युवक कार्रवाई के दौरान मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। फिलहाल पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आ सके और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

    एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार से लापता कॉलेज छात्रा को हरियाणा के कैथल से बरामद किया गया है। पुलिस अब छात्रा के बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अगला कदम उठाएगी।

  • इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव

    इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में एक निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने सब्जी व्यापारी नरेंद्र साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। युवती का आरोप है कि व्यापारी पिछले करीब 20 दिनों से उसे देखकर अश्लील इशारे करता था और आपत्तिजनक हरकतों के जरिए परेशान कर रहा था। शनिवार रात हुई घटना के बाद युवती ने पुलिस से शिकायत की जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

    द्वारकापुरी पुलिस के मुताबिक युवती फूटी कोठी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती है। अस्पताल के बाहर सब्जियों की दुकानें लगती हैं जिनमें से एक दुकान नरेंद्र साहू की बताई गई है। युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी उसे देखकर अश्लील हरकतें करता था और इस वजह से वह कई दिनों से परेशान थी। मामले में पुलिस ने युवती के आरोपों के आधार पर प्रकरण दर्ज किया है।

    शिकायत के मुताबिक शनिवार रात अस्पताल से निकलने के दौरान युवती के साथ यह घटना हुई। अस्पताल का गार्ड उसे गेट तक छोड़ने आया था। युवती उस समय अपने भाई का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोप है कि नरेंद्र साहू ने जानबूझकर अश्लील हरकत करते हुए अपना निजी अंग दिखाया। युवती ने इसका विरोध करते हुए आरोपी को ललकारा तो अस्पताल का स्टाफ भी मौके पर पहुंच गया। इसके बाद आरोपी वहां से चला गया।

    घटना के बाद युवती अपनी बहन के साथ द्वारकापुरी थाने पहुंची और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।

    इसी बीच इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में भी छेड़छाड़ और परेशान करने का एक अलग मामला सामने आया है। यहां 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने संजय नाम के युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। छात्रा का आरोप है कि उसके साथ पहले पढ़ने वाला संजय उसे लगातार मोबाइल फोन पर कॉल करता था और मिलने के लिए दबाव बनाता था।

    शिकायत के अनुसार एक दिन पहले युवक छात्रा के घर के बाहर पहुंच गया और फोन कर उससे जबरन मिलने की जिद करने लगा। लगातार परेशान किए जाने से छात्रा ने अपने पिता को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। शनिवार को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

    इंदौर में सामने आए इन दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। एक मामले में निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट ने सब्जी व्यापारी पर अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है जबकि दूसरे मामले में नाबालिग छात्रा ने परिचित युवक पर मिलने के लिए दबाव बनाने की शिकायत की है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।

  • भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए

    भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए


    इंदौर । इंदौर जिले में भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की जा रही है। वृंदावन ग्राम योजना के तहत जिले के चार गांवों में गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना आयोजित होगी। यह कार्यक्रम 27 से 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों के पालकों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। योजना के तहत प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए दिए जाएंगे। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल की गायों के पालन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक डॉ. दिनकर राव पाटील के मुताबिक जिले के रंगवासा दतोदा शिवनी और बनेड़िया गांवों में योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गांवों में पात्र पशुपालकों का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद गायों के दुग्ध उत्पादन के आधार पर विजेताओं का चयन होगा। प्रतियोगिता में उन्हीं पशुपालकों को शामिल होने का अवसर मिलेगा जिनकी भारतीय नस्ल की उन्नत गाय प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देती है।

    योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाली गाय के पालक को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए मिलेंगे। दूसरे स्थान पर आने वाले पशुपालक को 50 हजार रुपए और तीसरा स्थान हासिल करने वाले पालक को 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन के आधार पर तीन विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार राशि के जरिए पशुपालकों को बेहतर पशुपालन पद्धतियां अपनाने और अपनी गायों की देखभाल पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के संरक्षण और पालन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही दूध उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन देना भी योजना का अहम हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कई परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की आमदनी में सुधार की संभावना बन सकती है। योजना के माध्यम से बेहतर नस्लों के पालन और दुग्ध उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

    प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गाय का भारतीय उन्नत नस्ल का होना और प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देना जरूरी है। पात्र पशुपालकों को पंजीयन कराना होगा और गाय के दूध उत्पादन से संबंधित जानकारी देनी होगी। पंजीयन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में संबंधित ग्राम या पशु चिकित्सा विभाग से जानकारी ली जा सकती है।

    27 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस योजना के जरिए इंदौर जिले के चार गांवों में दुग्ध उत्पादन के आधार पर पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। अब यह देखना होगा कि इस पहल में कितने पशुपालक भाग लेते हैं और पुरस्कार योजना से भारतीय नस्ल की गायों के पालन तथा दूध उत्पादन को बढ़ावा देने में कितनी मदद मिलती है।

  • इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन

    इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन


    इंदौर । इंदौर और महू क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन आयोजित किए जा रहे हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन कार्यक्रम की तैयारियों के बीच स्वयंसेवक अलग-अलग बस्तियों और मंडलों में कदमताल करते नजर आ रहे हैं। इंदौर के नंदा नगर से निकले पथ संचलन में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनके बेटे तथा पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। इस आयोजन के तहत इंदौर विभाग के चार महानगरीय जिलों के 34 नगरों की करीब 345 बस्तियों में पथ संचलन निकाले जा रहे हैं। वहीं महू ग्रामीण क्षेत्र के छह खंडों के 65 मंडलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    संघ की ओर से इन आयोजनों की तैयारी पिछले एक महीने से की जा रही थी। शाखाओं में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन से पहले समता का अभ्यास किया। इन कार्यक्रमों के जरिए स्वयंसेवक अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के साथ निर्धारित मार्गों पर संचलन कर रहे हैं। इंदौर और महू में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों को संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से पहले की महत्वपूर्ण गतिविधि माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर 28 अक्टूबर को इंदौर विभाग का वृहत एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम डेली कॉलेज परिसर में शाम 4 बजकर 30 मिनट से होगा। इसमें इंदौर विभाग के पांचों जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। पथ संचलन को इस बड़े आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से स्वयंसेवक आगामी एकत्रीकरण के लिए जुट रहे हैं।

    इस एकत्रीकरण का ध्येय वाक्य चरैवेति-चरैवेति रखा गया है। इस संस्कृत वाक्य का आशय निरंतर आगे बढ़ते रहने से है। संघ के अनुसार इसका संदेश है कि स्वयंसेवक राष्ट्रकार्य को लगातार और समर्पण के साथ आगे बढ़ाते रहें। शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी समाज और राष्ट्र के लिए कार्य जारी रखने का संकल्प इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

    संघ की विचारधारा के मुताबिक राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन पर जोर दिया जाता है। एकत्रीकरण में इसी विचार को आगे बढ़ाने और स्वयंसेवकों को भविष्य के कार्यों के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया जाएगा। संघ का कहना है कि भारत को परम वैभव पर प्रतिष्ठित करने के लक्ष्य के साथ स्वयंसेवक ऊर्जा और समर्पण से कार्य करते रहेंगे।

    इंदौर और महू क्षेत्र में हो रहे पथ संचलन के साथ अब 28 अक्टूबर को होने वाले वृहत एकत्रीकरण पर भी ध्यान केंद्रित है। पांच जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम के जरिए संघ अपने शताब्दी वर्ष के समापन को चिह्नित करेगा। फिलहाल विभिन्न बस्तियों और मंडलों में संचलन के आयोजन जारी हैं और स्वयंसेवक निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार इसमें भाग ले रहे हैं।

  • इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी

    इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी


    इंदौर । इंदौर में अक्टूबर का महीना खत्म होने से पहले ही जलसंकट की चिंता बढ़ने लगी है। शहर के कई प्रमुख तालाबों में पानी का स्तर तेजी से घटा है और कुछ तालाब लगभग सूख चुके हैं। इसका असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवारों को निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर महंगे टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कुछ लोग पानी के लिए हर महीने करीब 1500 रुपए खर्च कर रहे हैं जबकि एक टैंकर के लिए 2000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों की परेशानी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है।

    शहर के वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव बजरंग नगर रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई इलाकों में लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संगीता केरोल के मुताबिक वे छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। वहीं गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में चार साल से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है। टैंकर बुलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।

    सुभाषचंद्र मेरु की परेशानी भी गंभीर है। वह रिक्शे में बर्तन रखकर करीब तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि टैंकर भी उनकी गली तक नहीं पहुंचते। मनोरमा जैन ने भी करीब एक साल से जलसंकट झेलने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें महंगे टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है। इन हालात ने शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था और प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती को उजागर किया है।

    क्षेत्र में पानी की टंकी होने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक इलाके में 2015 से 2018 के बीच टंकी बनाई गई थी और वर्ष 2020 से उसमें पानी आने लगा। उनका दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है लेकिन स्थानीय रहवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि टंकी में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्थिति सामने आना बाकी है।

    शहर के तालाबों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यशवंत सागर में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 16.4 फीट पानी है। पिपल्यापाला में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले जलस्तर 7.2 फीट रह गया है। बड़ी बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले 11.9 फीट पानी दर्ज किया गया है। छोटी बिलावली में पानी नहीं बचा है जबकि लिंबोदी तालाब भी लगभग सूख चुका है। बड़ा सिरपुर में 10.9 फीट और छोटा सिरपुर में करीब 13 फीट पानी बताया गया है। तालाबों में पानी घटने से भूजल स्तर और आने वाले महीनों में बोरिंग की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

    सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के मुताबिक बीते 60 साल में इंदौर में दूसरी बार इस तरह का जलसंकट सामने आया है। उनका कहना है कि वर्ष 1965 में सामान्य से 15.8 इंच कम बारिश हुई थी जबकि इस साल बारिश में करीब 14 इंच की कमी रही। उन्होंने बिलावली और लिंबोदी तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र में जरूरी काम नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।

    दूसरी ओर नगर निगम जलसंकट से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक यशवंत सागर से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलता है। निगम मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने 100 नए टैंकर खरीदने करीब छह हजार सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने और चार नई पानी की टंकियां शुरू करने की योजना है। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने और प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।

  • हाथों में हथकड़ी फिर भी बेफिक्र आरोपी! भोपाल जिला अदालत के बाहर सिगरेट पीने और फोन चलाने का वीडियो वायरल

    हाथों में हथकड़ी फिर भी बेफिक्र आरोपी! भोपाल जिला अदालत के बाहर सिगरेट पीने और फोन चलाने का वीडियो वायरल


    भोपाल । भोपाल की जिला अदालत के बाहर पुलिस अभिरक्षा में मौजूद हथकड़ी पहने एक आरोपी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में आरोपी पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सिगरेट पीते हुए और मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए दिखाई दे रहा है। घटना का वीडियो शनिवार का बताया जा रहा है जो रविवार को सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो के प्रसारित होने के बाद यह सवाल चर्चा में है कि अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरोपी को इस तरह की सुविधाएं कैसे मिल रही थीं।

    वायरल वीडियो में एक व्यक्ति के हाथों में हथकड़ी लगी दिखाई देती है। इसके बावजूद वह सामान्य अंदाज में सिगरेट पीता हुआ मोबाइल फोन पर बात करता नजर आ रहा है। वीडियो में आसपास पुलिसकर्मी भी मौजूद दिखाई देते हैं। ऐसे में यह मामला पुलिस अभिरक्षा के दौरान निगरानी और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन से जुड़ा सवाल बन गया है।

    पुलिस अभिरक्षा में किसी आरोपी को अदालत में पेश करने या उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में हथकड़ी लगे व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन दिखाई देना और उसका सिगरेट पीना कई सवाल खड़े करता है। सबसे अहम सवाल यह है कि मोबाइल फोन उसे किसने उपलब्ध कराया और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में वह कितनी देर तक इसका इस्तेमाल करता रहा। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट नहीं किया जा सकता कि घटना से पहले और बाद में क्या परिस्थितियां थीं या मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी क्या थी।

    इस मामले में आरोपी की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो किस समय बनाया गया और उस दौरान आरोपी को अदालत परिसर के बाहर किस मामले में लाया गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी किस थाने या पुलिस इकाई से संबंधित थे इसकी जानकारी भी फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मामले को लेकर एक और महत्वपूर्ण सवाल संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और जवाबदेही का है। यदि वीडियो में दिखाई दे रही परिस्थितियां सही हैं तो यह जांच का विषय होगा कि आरोपी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया या नहीं। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की प्रामाणिकता और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की आधिकारिक जांच जरूरी होगी।

    फिलहाल भोपाल पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस मामले में किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो की जांच की जाती है या नहीं और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर कोई स्पष्टीकरण जारी होता है या नहीं। वीडियो ने अदालत परिसर के बाहर पुलिस अभिरक्षा में निगरानी की व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन

    MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बीना रेलवे स्टेशन पर चल रहे यार्ड रीमॉडलिंग के काम का असर रेल संचालन पर पड़ रहा है। रविवार 25 अक्टूबर को बीना और रूठियाई के बीच चलने वाली चार मेमू ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इसके अलावा भोपाल कटनी कोटा नागदा दमोह और ललितपुर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों के शुरुआती या अंतिम स्टेशन में बदलाव किया गया है। कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी निर्धारित मार्ग के बजाय वैकल्पिक रूट से चलाने की व्यवस्था की गई है। इन बदलावों के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    रेलवे के अनुसार बीना स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के दौरान ट्रैक और प्लेटफॉर्म की उपलब्धता के साथ परिचालन संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए अस्थायी बदलाव किए गए हैं। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति और बदले हुए स्टॉपेज की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। इसके लिए रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 या आधिकारिक पूछताछ माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।

    रविवार को बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61611 और रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61612 के साथ बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61625 तथा रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61626 निरस्त रहेंगी। इन ट्रेनों के बंद रहने से इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

    भोपाल और बीना के बीच चलने वाली ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया गया है। भोपाल-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61631 और 11605 बीना के बजाय मंडी बामोरा स्टेशन पर अपनी यात्रा समाप्त करेंगी। वहीं बीना-भोपाल मेमू ट्रेन नंबर 11606 और 61632 मंडी बामोरा से रवाना होंगी। यह बदलाव 25 अक्टूबर तक निर्धारित है। ऐसे में भोपाल और बीना के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को मंडी बामोरा से आगे जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    दमोह और ग्वालियर रूट पर भी ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। बीना-दमोह पैसेंजर ट्रेन नंबर 51885 मालखेड़ी स्टेशन से शाम 6 बजकर 10 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। वहीं दमोह-बीना पैसेंजर ट्रेन नंबर 51886 की यात्रा मालखेड़ी में समाप्त होने का समय सुबह 11 बजकर 45 मिनट तय किया गया था। बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन नंबर 51883 भी 24 अक्टूबर तक मालखेड़ी से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। इन ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को तारीख के अनुसार परिचालन की पुष्टि करनी चाहिए।

    नागदा रूट पर नागदा-बीना एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19341 गुना स्टेशन पर यात्रा समाप्त करेगी जबकि बीना-नागदा एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19342 25 अक्टूबर तक गुना से रवाना होने के लिए निर्धारित है। ललितपुर रूट पर ललितपुर-बीना मेमू ट्रेन नंबर 64618 आगासोद स्टेशन पर समाप्त होगी और बीना-ललितपुर मेमू ट्रेन नंबर 64617 आगासोद से शुरू होगी।

    कटनी रूट पर कटनी-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11602 खुरई स्टेशन पर समाप्त होगी जबकि बीना-कटनी मेमू ट्रेन नंबर 11601 26 अक्टूबर तक खुरई से रवाना होगी। कोटा रूट पर कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11603 महादेवखेड़ी में समाप्त होगी और बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 61634 वहीं से शुरू होगी। कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61633 मुंगावली में समाप्त होगी जबकि बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 11604 26 अक्टूबर तक मुंगावली से रवाना होने के लिए निर्धारित है।

    बीना-कटनी मुड़वारा मेमू ट्रेन नंबर 61619 भी 26 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी से फ्लाईओवर मार्ग के जरिए सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर चलने के लिए निर्धारित है। वहीं कटनी मुड़वारा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61620 को 25 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी तक विस्तारित किया गया है। इसका निर्धारित आगमन समय रात 12 बजकर 50 मिनट है।

    रेलवे की सूचना के अनुसार कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी अलग-अलग तारीखों में वैकल्पिक मार्ग से चलाने की व्यवस्था की गई थी। इनमें बांद्रा टर्मिनस-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस अहमदाबाद-बनारस सिटी एक्सप्रेस और बनारस सिटी-अहमदाबाद एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों के लिए बताई गई कई तारीखें 20 से 24 अक्टूबर के बीच की हैं। इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार ताजा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के चलते हुए इन अस्थायी बदलावों के बीच सही जानकारी लेकर स्टेशन पहुंचना यात्रियों के लिए जरूरी है।

  • बैंक ने कहा- FDR जारी ही नहीं की, फिर भी शराब ठेके में कैसे हुई स्वीकार? भोपाल मामले में लोकायुक्त की FIR से मचा हड़कंप

    बैंक ने कहा- FDR जारी ही नहीं की, फिर भी शराब ठेके में कैसे हुई स्वीकार? भोपाल मामले में लोकायुक्त की FIR से मचा हड़कंप


    भोपाल । भोपाल में शराब दुकान का ठेका हासिल करने के लिए करीब 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपये की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद यानी एफडीआर जमा कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिस बैंक के नाम पर एफडीआर प्रस्तुत की गई उसने इसे जारी करने से ही इनकार कर दिया था। इसके बावजूद दस्तावेज को प्रतिभूति के तौर पर स्वीकार कर लिया गया और शराब दुकान का ठेका आवंटित हो गया। अब लोकायुक्त संगठन ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कथित फर्जी दस्तावेजों को किस आधार पर मंजूरी दी गई और इस पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों तथा निजी व्यक्तियों की भूमिका रही।

    लोकायुक्त ने इस मामले में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा तथा हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को आरोपी बनाया है। मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल के पीएंडटी चौराहा कंपोजिट शराब दुकान समूह के ठेके से जुड़ा है। आरोप है कि ठेका हासिल करने के लिए कथित फर्जी एफडीआर के साथ उसकी सत्यापन रिपोर्ट भी सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में प्रस्तुत की गई। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेज कहां तैयार हुए और सत्यापन की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।

    इस मामले में दीपम रायचूरा की भूमिका भी जांच के दायरे में है। विभागीय जांच के बाद उन्हें 12 अक्टूबर को निलंबित किया गया था। इससे पहले उन्हें उप मुख्यमंत्री के ओएसडी के अतिरिक्त प्रभार से भी मुक्त कर दिया गया था। अब लोकायुक्त की ओर से एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के फैसलों और दस्तावेजों को मंजूरी देने की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।

    लोकायुक्त जांच में सबसे अहम सवाल एफडीआर के सत्यापन से जुड़ा है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित एफडीआर किसने तैयार कराई और बैंक के नाम पर सत्यापन रिपोर्ट किसने बनाई। इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार करने से पहले आवश्यक पुष्टि की थी या नहीं। यदि बैंक ने वास्तव में एफडीआर जारी नहीं की थी तो उसके बावजूद उसे वैध प्रतिभूति मानने का आधार क्या था यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

    जांच एजेंसी ठेका आवंटन और लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी पड़ताल कर सकती है। इसमें यह देखा जाएगा कि निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं और दस्तावेजों की पुष्टि के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी भूमिका किस तरह निभाई। लोकायुक्त संगठन के अनुसार जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि संबंधित सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जाएगी।

    इस मामले में कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें जमा कराने और स्वीकार किए जाने तक की पूरी कड़ी स्पष्ट करना जांच एजेंसी के सामने चुनौती होगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि ठेका आवंटन की प्रक्रिया में किसी स्तर पर जानबूझकर अनियमितता की गई थी या दस्तावेजों की जांच में लापरवाही हुई। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद भोपाल के शराब ठेका आवंटन से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक और आबकारी विभाग के स्तर पर चर्चा में है।