Category: Madhya Pradesh

  • नवजात की मौत से सनसनी: शरीर पर चींटियां, डॉक्टरों ने बताई 1 हफ्ते पुरानी डिलीवरी

    नवजात की मौत से सनसनी: शरीर पर चींटियां, डॉक्टरों ने बताई 1 हफ्ते पुरानी डिलीवरी


    टीकमगढ़ । टीकमगढ़ शहर के सिविल लाइन रोड स्थित नगर पालिका की ‘नेकी की दीवार’ परिसर में बुधवार दोपहर उस समय सनसनी फैल गई, जब कपड़ों के ढेर के बीच एक नवजात शिशु का शव मिला। यह वही जगह है, जहां लोग जरूरतमंदों के लिए कपड़े दान करते हैं और मानवता की मिसाल पेश करते हैं, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।

    सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और हर कोई इस अमानवीय कृत्य पर हैरान नजर आया।

    डॉक्टरों का अनुमान: करीब एक सप्ताह पहले हुआ था जन्
    जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि नवजात की उम्र लगभग एक सप्ताह के आसपास हो सकती है। ड्यूटी डॉक्टर विजय जैन के अनुसार बच्चे के शरीर पर चींटियां लगी हुई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शव काफी समय से वहां पड़ा हुआ था।

    डॉक्टरों का यह भी कहना है कि बच्चे के हाथ पर मिले निशानों से संभावना जताई जा रही है कि उसका जन्म किसी निजी अस्पताल में हुआ हो सकता है। हालांकि, मौत के सही समय और कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

     पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे
    कोतवाली थाना प्रभारी रवि भूषण पाठक ने बताया कि पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर नवजात को इस तरह ‘नेकी की दीवार’ परिसर में कौन और कब छोड़कर गया। इसके लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

    इलाके में गुस्सा और चिंता का माहौल
    इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और दुख का माहौल पैदा कर दिया है। जिस जगह को जरूरतमंदों की मदद और इंसानियत की मिसाल माना जाता है, वहीं इस तरह की घटना सामने आने से लोग स्तब्ध हैं।

  • इंदौर में बैंक कर्मचारी पर धोखाधड़ी का आरोप: खातों से लाखों रुपये गायब

    इंदौर में बैंक कर्मचारी पर धोखाधड़ी का आरोप: खातों से लाखों रुपये गायब


    इंदौर । इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में स्थित बीजलपुर की आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में कार्यरत एक कर्मचारी पर बड़ा वित्तीय घोटाले का आरोप सामने आया है। शिकायत के अनुसार बैंक कर्मचारी विष्णु शर्मा ने एक महिला और उसके देवर के खातों से बिना अनुमति लाखों रुपए निकाल लिए। पीड़िता द्रोपती बाई पति हीरालाल वर्मा ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उनके देवर सत्यनारायण के बैंक खाते से लगातार अवैध लेन-देन किया और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।

    एटीएम जारी कर खुद ही रख लिया, फिर निकाली रकम
    आरोपों के मुताबिक, बैंक कर्मचारी ने पहले सत्यनारायण के नाम पर एटीएम कार्ड जारी कराया और उसे अपने पास ही रख लिया। इसके बाद 3 अगस्त से 14 अगस्त 2025 के बीच एटीएम ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए खाते से लाखों रुपए निकाल लिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खाताधारक को इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी कि उसके नाम से एटीएम कार्ड जारी हो चुका है।

    ओटीपी लेकर महिला के खाते से भी उड़ाए पैसे
    शिकायत में यह भी सामने आया है कि 16 सितंबर 2025 को आरोपी द्रोपती बाई के घर पहुंचा और कहा कि बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है। इसी बहाने उसने ओटीपी हासिल कर लिया और उनके खाते से करीब 4 लाख 85 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसी तरह देवर सत्यनारायण के खाते से भी करीब 4 लाख 89 हजार रुपए निकाले जाने का आरोप है, जिससे कुल धोखाधड़ी की रकम लाखों में पहुंच गई है।

     खाता खुलवाने के बहाने शुरू हुई धोखाधड़ी
    पीड़िता के अनुसार आरोपी पहले सत्यनारायण की दुकान पर खाता खुलवाने के लिए पहुंचा था। वहीं से उसके संपर्क में आया और धीरे-धीरे बैंकिंग प्रक्रिया के नाम पर पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। आरोप यह भी है कि कुछ रकम भूपेंद्र नामक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर की गई, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है।

     पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी
    राजेंद्र नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी बैंक कर्मचारी से पूछताछ शुरू कर दी गई है। पुलिस अब पूरे ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और बैंकिंग प्रक्रिया की गहन जांच कर रही है। फिलहाल यह मामला बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और ग्राहक डेटा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • इंदौर में हड़कंप: ऑफिस में भीषण आग से लाखों का नुकसान, जांच शुरू

    इंदौर में हड़कंप: ऑफिस में भीषण आग से लाखों का नुकसान, जांच शुरू


    नई दिल्ली । इंदौर के लसूडिया क्षेत्र स्थित बेलमोर्ट पार्क के मेंटेनेंस ऑफिस में बुधवार तड़के अचानक आग लग गई। सुबह करीब 5 बजे गार्ड ने ऑफिस से धुआं निकलते देखा, जिसके बाद तुरंत आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैल गई।

    सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कई दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाया गया। फायर ब्रिगेड के एएसआई सुशील कुमार दुबे के अनुसार आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि शॉर्ट सर्किट इसकी वजह हो सकता है। इस हादसे में ऑफिस में रखे सभी दस्तावेज, फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    खंडवा रोड पर सब्जी दुकान जलकर राख
    इसी दिन सुबह खंडवा रोड स्थित अनुराधा नगर में भी एक सब्जी की दुकान में आग लग गई। दुकान बबली पति प्रीतम सिंह की बताई जा रही है। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा सामान जल गया। दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर करीब 1000 लीटर पानी डालकर आग पर काबू पाया। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

    रेडिसन चौराहे के पास फर्नीचर बिल्डिंग में आग
    तीसरी घटना इंदौर के रेडिसन चौराहे के पास स्थित महिदपुर वाला फर्नीचर की बिल्डिंग में हुई, जहां सातवें माले पर आग लग गई। यह घटना सुबह करीब 10:30 बजे की है। सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मात्र 15 मिनट में मौके पर पहुंच गईं और कर्मचारियों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि आग के दौरान पूरे भवन में घना धुआं फैल गया, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के अनुसार विजयनगर और खजराना थाना क्षेत्र की टीमें भी मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित किया गया।

    लगातार आग की घटनाओं से बढ़ी चिंता
    इंदौर में एक ही दिन में तीन अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में अधिकतर मामलों में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, जिससे बिजली व्यवस्था और वायरिंग की जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

  • ग्लैमरस करियर और अचानक मौत: ट्विशा शर्मा की जिंदगी के अनसुने पहलू

    ग्लैमरस करियर और अचानक मौत: ट्विशा शर्मा की जिंदगी के अनसुने पहलू


    मध्य प्रदेश । भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस ने अब नया मोड़ ले लिया है। अब तक रिटायर्ड जज की बहू और वकील की पत्नी के रूप में पहचानी जाने वाली ट्विशा की जिंदगी का ग्लैमरस चेहरा सामने आया है। मॉडलिंग, फिल्मों और कॉर्पोरेट दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी ट्विशा शर्मा कभी फैशन और ग्लैमर इंडस्ट्री का चर्चित नाम थीं। लेकिन चमक-दमक से भरी जिंदगी का अंत जिस दर्दनाक तरीके से हुआ, उसने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है।

    ट्विशा शर्मा ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखने के बाद कई नामी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए विज्ञापन शूट किए थे। उन्होंने तेलुगु शॉर्ट फिल्मों और फिल्मों में भी अभिनय किया। अपने आकर्षक व्यक्तित्व और कॉन्फिडेंस की वजह से उन्होंने “मिस पुणे” का खिताब भी हासिल किया था। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें उनका ग्लैमरस अंदाज दिखाई दे रहा है।

    हालांकि अभिनय के क्षेत्र में बड़ी सफलता नहीं मिलने के बाद ट्विशा ने पढ़ाई पर ध्यान दिया और एमबीए कर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की। इसी दौरान उनकी मुलाकात मेट्रिमोनियल साइट के जरिए भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और दिसंबर 2025 में शादी हो गई। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद रिश्ते में तनाव और विवाद की बातें सामने आने लगीं।

    ट्विशा की संदिग्ध मौत के बाद परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। घटना को आठ दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन परिजनों ने अब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। परिवार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ है। मामले में दहेज मृत्यु का केस दर्ज किया गया है। वहीं, पूर्व जिला जज और ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि पति समर्थ सिंह अब भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है और कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान भी समर्थ सिंह का व्यवहार हिंसक था। परिवार का कहना है कि उन्होंने शुरुआती शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसका आज उन्हें पछतावा है।

    ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एफआईआर दर्ज कराने में देरी की गई और आरोपियों को बचाने की कोशिश हुई। वहीं ट्विशा की बहन नैना शर्मा ने वायरल सीसीटीवी फुटेज पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वीडियो अधूरा है और घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्से सामने नहीं लाए गए।

    इस बीच राज्यसभा सांसद Vivek Tankha ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी जरूरी है, क्योंकि परिवार का स्थानीय पुलिस पर भरोसा कमजोर हुआ है।

    उधर, पूर्व सैनिकों ने भी ट्विशा को न्याय दिलाने के समर्थन में भोपाल में बाइक रैली निकालकर प्रदर्शन किया। मामले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और फरार आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।

  • केमिस्टों की हड़ताल का असर: आज दवा दुकानों पर ताले, प्रशासन अलर्ट

    केमिस्टों की हड़ताल का असर: आज दवा दुकानों पर ताले, प्रशासन अलर्ट


    मध्य प्रदेश । ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री के विरोध में देशभर के केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर आज झाबुआ जिले में मेडिकल स्टोर बंद रखे गए। इस बंद का असर झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित पूरे जिले में देखने को मिला। स्थानीय दवा विक्रेताओं ने इस विरोध को समर्थन देते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री बढ़ने से पारंपरिक मेडिकल स्टोरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    केमिस्टों का आरोप: नियमों का उल्लंघन कर हो रही ऑनलाइन बिक्री
    शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री में नियमों की अनदेखी हो रही है। बिना उचित निगरानी और सत्यापन के दवाइयों की होम डिलीवरी से न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। केमिस्टों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से गलत दवा उपयोग की संभावना बढ़ जाती है, जो जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है।

    मरीजों की परेशानी से बचने प्रशासन ने की वैकल्पिक व्यवस्था
    मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने पहले से व्यवस्था की है। ड्रग इंस्पेक्टर के अनुसार, जिले में कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर आज खुले रखे गए हैं। इनमें जिला चिकित्सालय स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के साथ-साथ मेघनगर और थांदला के जन औषधि केंद्र शामिल हैं।

    निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर भी खुले
    प्रशासन ने कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों को भी संचालन की अनुमति दी है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकें। इनमें झाबुआ, थांदला और पेटलावद क्षेत्र के कई मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल शामिल हैं। इन केंद्रों पर आम नागरिक अपनी आवश्यक दवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

    प्रशासन की अपील
    ड्रग इंस्पेक्टर ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल निर्धारित मेडिकल स्टोरों से ही दवाएं खरीदें। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आवश्यक दवाओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

  • तबादला नीति में राहत: गंभीर बीमार कर्मचारियों को मिल सकती है छूट

    तबादला नीति में राहत: गंभीर बीमार कर्मचारियों को मिल सकती है छूट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद तबादलों का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार की तबादला नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। नई नीति के तहत प्रदेश में 1 जून से 15 जून तक कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले किए जा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया था, जिसे अंतिम मंजूरी मिलने के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया।

    नई तबादला नीति में कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण राहतें दी गई हैं। सरकार ने साफ किया है कि पति-पत्नी की पोस्टिंग एक ही स्थान पर रखने के मामलों पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा। इसके अलावा गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को भी तबादलों में विशेष रियायत दी जाएगी। सरकार ने ऐसे मामलों को संवेदनशील मानते हुए उन्हें प्राथमिक श्रेणी में रखने का फैसला किया है।

    कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की ‘ए प्लस’ नोटशीट वाले तबादलों को 31 मई तक पूरा किया जाएगा। लंबित आवेदन भी इसी अवधि में निपटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी की पोस्टिंग और गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा गया है, ताकि इन मामलों में त्वरित निर्णय लिए जा सकें।

    नई नीति में प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादलों की सीमा अलग-अलग तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। अब तक दोनों को एक ही कोटे में शामिल किया जाता था, जिससे प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक फेरबदल करने में परेशानी होती थी। सरकार का मानना है कि अलग कोटा तय होने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

    तबादलों की सीमा को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं, वहां कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। 200 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में 15 प्रतिशत, 1000 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10 प्रतिशत और 2000 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में पांच प्रतिशत तबादले किए जाएंगे।

    स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति हर वर्ष की तरह अलग रहेगी। वहीं जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अपनी अलग नीति जारी कर सकेंगे, लेकिन वे मूल ढांचे से अलग व्यवस्था नहीं बना पाएंगे। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की अनुशंसा से होंगे, जबकि प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी होगी।

    सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी ट्रांसफर ऑर्डर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए जारी किए जाएंगे। हालांकि जिन विभागों में ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां ऑफलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। अनुसूचित क्षेत्रों में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने का निर्णय लिया गया है। साथ ही किसी जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद ही तबादले किए जाएंगे और वरिष्ठता का भी ध्यान रखा जाएगा।

    कर्मचारी संगठनों के नेताओं को नियुक्ति के बाद चार साल तक तबादलों से छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। वहीं गंभीर बीमारी से जूझ रहे और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को तबादले से राहत दी जाएगी। अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य संस्थानों में समायोजित करने की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी।

    कैबिनेट बैठक में तबादला नीति के अलावा कई अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में वर्ष 2027 में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक का उल्लेख किया और कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का भी निरीक्षण करेंगे। बैठक में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

  • अंधविश्वास बना मौत की वजह: अशोकनगर में 13 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत

    अंधविश्वास बना मौत की वजह: अशोकनगर में 13 साल की बच्ची की दर्दनाक मौत


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिले के मोला डेम गांव में अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में एक 13 वर्षीय किशोरी की जान चली गई। बुधवार तड़के सांप के काटने के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन उसे देव स्थान पर झाड़-फूंक कराने ले गए। इलाज में हुई देरी आखिरकार मासूम के लिए जानलेवा साबित हुई और जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

    मृतक किशोरी की पहचान लक्ष्मी आदिवासी के रूप में हुई है। घटना बुधवार सुबह करीब 4:30 बजे की बताई जा रही है। लक्ष्मी अपने माता-पिता के साथ घर में जमीन पर सो रही थी। इसी दौरान अचानक एक जहरीले सांप ने उसके पैर में काट लिया। तेज दर्द महसूस होते ही किशोरी जोर-जोर से चीखने लगी। बेटी की आवाज सुनकर माता-पिता घबराकर उठे तो वहां सांप दिखाई दिया। घटना के बाद परिवार और आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।

    ग्रामीणों ने परिजनों को तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह देने के बजाय बच्ची को स्थानीय देव स्थान ले जाने की बात कही। इसके बाद परिवार लक्ष्मी को अस्पताल पहुंचाने के बजाय झाड़-फूंक कराने ले गया। वहां काफी देर तक कथित उपचार चलता रहा। ग्रामीण मान्यताओं और अंधविश्वास के कारण समय लगातार बीतता गया, जबकि किशोरी की हालत बिगड़ती चली गई।

    जब काफी देर बाद भी बच्ची की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी हालत गंभीर होने लगी, तब परिजनों को अस्पताल ले जाने की जरूरत महसूस हुई। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल के लिए रवाना किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने तक किशोरी की सांसें लगभग थम चुकी थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद अस्पताल में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव का पोस्टमार्टम कराया और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को उजागर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सांप काटने की स्थिति में मरीज को बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, क्योंकि शुरुआती इलाज और एंटी-वेनम इंजेक्शन ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका होता है। लेकिन कई ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग झाड़-फूंक और टोने-टोटके पर भरोसा कर इलाज में देरी कर देते हैं, जिसका परिणाम कई बार जानलेवा साबित होता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान की बेहद जरूरत है, ताकि लोग अंधविश्वास छोड़कर समय पर चिकित्सा सुविधा का सहारा लें और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

  • केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध

    केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मेडिकल दुकानों का एक दिवसीय बंद देखने को मिला। जिलेभर के दवा व्यापारियों ने ई-फार्मेसी और बड़े कॉरपोरेट्स की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। शहर की लगभग 180 और जिले की कुल 297 मेडिकल दुकानों ने इस बंद में भाग लिया, जिससे दिनभर बाजार में मेडिकल स्टोरों के शटर बंद नजर आए।

    दोपहर के समय बड़ी संख्या में केमिस्ट और दवा व्यापारी एकत्रित हुए और शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़ी अधिसूचनाएं वापस लेने और ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण लगाने की मांग की गई।

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जिला संगठन मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन और राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स से संबद्ध है, जो देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और बड़े कॉरपोरेट्स भारी छूट और प्रिडेटोरी प्राइसिंग के जरिए छोटे और मध्यम मेडिकल संचालकों के व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    दवा व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर पर्चे के दवाइयों की बिक्री हो रही है। एंटीबायोटिक्स, नशीली और आदत बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। साथ ही नकली प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं के गलत भंडारण जैसी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ सकती है।

    ज्ञापन में विशेष रूप से केंद्र सरकार की 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना GSR 220(E) को वापस लेने की मांग उठाई गई। व्यापारियों का कहना है कि कोविड काल में लागू की गई इन व्यवस्थाओं का अब गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक मेडिकल व्यापार प्रभावित हो रहा है।

    प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने कहा कि वे सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि जनस्वास्थ्य सुरक्षित रहे और छोटे व्यापारियों का अस्तित्व बचाया जा सके। पूरे दिन चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और कई लोगों को मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।

    अशोकनगर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 297 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर खतरे की बात कही।

  • 13 लाख के मोबाइल बरामद: अब हर थाने में दर्ज होगी गुम फोन की शिकायत

    13 लाख के मोबाइल बरामद: अब हर थाने में दर्ज होगी गुम फोन की शिकायत

    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में पुलिस ने गुम हुए मोबाइल फोन तलाशने के अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 120 गुम मोबाइल उनके असली मालिकों को लौटाए गए। बरामद किए गए इन मोबाइल फोन की कुल कीमत करीब 13 लाख 20 हजार रुपए बताई जा रही है। लंबे समय बाद अपने मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई और कई लोगों ने पुलिस टीम का आभार जताया।

    यह पूरा अभियान पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा के निर्देशन में चलाया गया। जिले की सायबर सेल और सभी थाना प्रभारियों की संयुक्त टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने तकनीकी सहायता और मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से जिले के अलावा अन्य जिलों और राज्यों से भी मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कई मोबाइल ऐसे थे जो महीनों पहले गुम हो चुके थे, लेकिन तकनीकी निगरानी के जरिए उन्हें सफलतापूर्वक खोज लिया गया।

    इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि अब आम लोगों को मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज कराने के लिए सायबर सेल कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पुलिस विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए जिले के सभी थानों में मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू कर दी है। अब कोई भी व्यक्ति अपने नजदीकी थाने में आवेदन, आधार कार्ड की कॉपी और मोबाइल खरीद का बिल जमा कर शिकायत दर्ज करा सकेगा। इससे आम नागरिकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस प्रशासन ने ऑनलाइन शिकायत की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। अब लोग स्वयं भी ऑनलाइन माध्यम से अपने गुम मोबाइल की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे शिकायत प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी। पुलिस का कहना है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से मोबाइल ट्रेसिंग अभियान को और प्रभावी बनाया जाएगा।

    मोबाइल वापस मिलने पहुंचे कई लोगों ने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका फोन दोबारा मिल पाएगा। कुछ लोगों के लिए मोबाइल सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि जरूरी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी और निजी डेटा का भी महत्वपूर्ण जरिया था। ऐसे में मोबाइल वापस मिलना उनके लिए बड़ी राहत साबित हुआ।

    एसपी राजीव मिश्रा ने इस सफल कार्रवाई के लिए सायबर सेल और संबंधित थाना पुलिस टीमों की सराहना की है। उन्होंने घोषणा की कि इस अभियान में बेहतर कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही भविष्य में भी गुम मोबाइल खोजने का अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस पहल से लोगों का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर और मजबूत होगा।

    अशोकनगर पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 120 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए। करीब 13.20 लाख रुपए कीमत के मोबाइल अब सायबर सेल और थाना पुलिस की मदद से ट्रेस किए गए। साथ ही हर थाने में मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज करने की नई सुविधा भी शुरू की गई है।

  • बाइक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे दवा व्यापारी, ई-फार्मेसी पर रोक की मांग

    बाइक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे दवा व्यापारी, ई-फार्मेसी पर रोक की मांग


    मध्य प्रदेश । गुना में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर के दवा व्यापारियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान जिले की करीब 700 मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जिनमें शहर की लगभग 350 दुकानें शामिल थीं। मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों और आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा, हालांकि प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्थाओं के चलते गंभीर मरीजों को राहत मिलती रही।

    दवा व्यापारियों ने शहर के सुगन चौराहे पर एकत्रित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद सभी व्यापारी बाइक रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।

    जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे छोटे मेडिकल व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध चिकित्सकीय सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    एसोसिएशन के सचिव राकेश शर्मा ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई कंपनियां लंबे समय से अवैध तरीके से कारोबार कर रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए।

    प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग नीति का भी विरोध किया। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। ज्ञापन में GSR 817(E) और GSR 220(E) अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।

    मेडिकल स्टोर बंद रहने से कई मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए भटकना पड़ा, लेकिन जिला प्रशासन ने पहले से वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लागू कर दी थीं। प्रशासन के निर्देश पर जन औषधि केंद्र, निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोर और शासकीय अस्पतालों की दवा दुकानें खुली रहीं। सिविल अस्पताल, कैंट चौराहा और भगत सिंह चौक स्थित जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा आशीर्वाद हॉस्पिटल, सहयोग नर्सिंग होम, बालाजी नर्सिंग होम, ममता नर्सिंग


    होम और एजेएस हॉस्पिटल की मेडिकल दुकानें भी संचालित रहीं।

    दवा व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।