Category: Madhya Pradesh

  • गुना PWD ऑफिस पर कुर्की की कार्रवाई: कर्मचारी का बकाया न चुकाने पर एक्शन

    गुना PWD ऑफिस पर कुर्की की कार्रवाई: कर्मचारी का बकाया न चुकाने पर एक्शन


    मध्य प्रदेश । गुना में लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही एक बार फिर अदालत की सख्ती का कारण बनी। सेवानिवृत्त कर्मचारी के करीब 36 लाख रुपए के एरियर और वेतन भुगतान न किए जाने पर बुधवार को जिला न्यायालय के आदेश पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय में दोबारा कुर्की की कार्रवाई की गई। इससे पहले फरवरी 2026 में भी कोर्ट की टीम विभागीय संपत्तियों की कुर्की कर चुकी थी, लेकिन विभाग ने दो महीने में भुगतान करने का लिखित आश्वासन देकर समय ले लिया था। तय अवधि बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर अदालत को फिर हस्तक्षेप करना पड़ा।

    मामला पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त कर्मचारी कौशल किशोर राठौर से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि विभाग ने लंबे समय तक उन्हें उनके पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया। न्याय पाने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह मामला निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हर स्तर पर फैसला कर्मचारी के पक्ष में आया। अदालतों ने विभाग को बकाया वेतन और एरियर का भुगतान करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।

    विभाग ने वर्ष 2013 तक के एरियर का भुगतान तो कर दिया, लेकिन 2014 से लेकर रिटायरमेंट तक की लगभग 36 लाख रुपए की राशि रोक ली गई। लगातार आदेशों और नोटिसों के बावजूद जब भुगतान नहीं हुआ, तो कौशल किशोर राठौर ने अवमानना और इजरा याचिका दायर की। इसके बाद न्यायालय ने विभाग के खिलाफ वसूली और कुर्की की कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।

    फरियादी कौशल किशोर राठौर ने बताया कि फरवरी में हुई पहली कुर्की के दौरान विभागीय अधिकारियों ने अदालत में लिखित में यह भरोसा दिया था कि दो महीने के भीतर पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी कारण कोर्ट की टीम को दोबारा पीडब्ल्यूडी कार्यालय पहुंचकर कुर्की की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।

    बुधवार को न्यायालय की टीम ने विभागीय संपत्तियों का आकलन किया और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कुर्की के माध्यम से पूरी राशि वसूलकर कर्मचारी को भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला सरकारी विभागों द्वारा अदालत के आदेशों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यदि विभाग ने अब भी भुगतान नहीं किया, तो आने वाले समय में विभाग की अन्य संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    इस कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अदालत अब इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है और आदेशों की अवहेलना पर आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।

  • ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

    ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी में बुधवार को ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में केमिस्टों की देशव्यापी हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर जिलेभर के करीब 350 मेडिकल स्टोर पूरे दिन बंद रहे। इनमें शहर के लगभग 150 मेडिकल प्रतिष्ठान भी शामिल थे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    केमिस्टों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। साथ ही भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित किया जा रहा है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से नियम GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र प्रकाश गोयल और सचिव गोपाल दास अग्रवाल ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे जन स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद सरकार इस मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।

    केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान स्थानीय मेडिकल स्टोरों ने फ्रंटलाइन हेल्थ सपोर्ट की भूमिका निभाई थी और लोगों तक दवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बावजूद आज छोटे दवा व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    हालांकि जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के बावजूद मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने पहले से ही आवश्यक और आपातकालीन दवाओं की व्यवस्था कर दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे, जहां जरूरतमंद मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि बिना निगरानी के ऑनलाइन दवा वितरण से न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

  • मंदिर विवाद को लेकर बढ़ा तनाव: हमलावरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन

    मंदिर विवाद को लेकर बढ़ा तनाव: हमलावरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन


    मध्य प्रदेश। शिवपुरी जिले के करेरा स्थित बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में पूजा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। बुधवार को राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान संघर्ष समिति, संत समाज और सकल समाज के लोगों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

    समाज के लोगों का कहना है कि 9 मई को मंदिर परिसर में हुई मारपीट और हमले की घटना में दोनों पक्ष शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल एक पक्ष पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि दूसरे पक्ष के खिलाफ अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है।

    राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि मंदिर में घुसकर हमला करने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय पीड़ित पक्ष को ही आरोपी बना दिया गया। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

    प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि राजेश दुबे उर्फ भोला पंडित करीब 200 लोगों के साथ दोबारा मंदिर पहुंचा और वहां भय और तनाव का माहौल बनाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ऐसे लोगों को मंदिर परिसर के आसपास आने से रोका जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राजेश दुबे के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    समिति के अनुसार, 9 मई की रात करीब 10:30 बजे राजेश dubey अपने 20 से 25 साथियों के साथ बगीचा सरकार मंदिर पहुंचा था। आरोप है कि वहां मौजूद महंत और श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की गई। हालांकि घटना के दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई केवल एक तरफ केंद्रित रही।

    प्रदर्शनकारियों ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए दावा किया कि वीडियो में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। समाज के लोगों ने कहा कि फुटेज में सुधीर दुबे, प्रिंस दुबे, अंशुमान और धर्मेंद्र सहित कई लोगों की पहचान स्पष्ट रूप से हो रही है। इसके बावजूद पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की।

    गुर्जर समाज और संत समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को 10 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और दोनों पक्षों पर समान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अन्यथा जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा।

  • मंदसौर में सोसायटी पंजीयन निरस्तीकरण की तैयारी, प्रशासन ने जारी किया नोटिस

    मंदसौर में सोसायटी पंजीयन निरस्तीकरण की तैयारी, प्रशासन ने जारी किया नोटिस


    मध्य प्रदेश । मंदसौर में सहकारिता विभाग ने वर्षों से बंद पड़ी और निष्क्रिय सहकारी संस्थाओं के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल के निर्देश पर जिले में ऐसी दर्जनों सोसायटियों के पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जो लंबे समय से काम नहीं कर रही थीं या परिसमापन की स्थिति में थीं। इस कार्रवाई को जिले में सहकारिता व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक पहल माना जा रहा है।

    सहकारिता उप आयुक्त परमानंद गोडरिया ने बताया कि वर्षों से निष्क्रिय पड़ी संस्थाओं के कारण विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और सहकारिता तंत्र दोनों प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में अब इन संस्थाओं को सहकारिता पटल से हटाने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू की गई है। विभाग ने मई 2026 के भीतर पूरी कार्रवाई समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है।

    कार्रवाई की जद में जिले की कई दुग्ध उत्पादक, साख, बीज और ग्रामीण विकास से जुड़ी सहकारी संस्थाएं शामिल हैं। इनमें पीर गुराडिया, लखमाखेड़ी, फतेहपुर, टिडवास, आंत्रीखुर्द, कांचरिया चन्द्रावत, बोतलगंज, हरमाला, कचनारा, नारायणगढ़, मुवाला, भोलिया, बेलारा, उदपुरा, लामगरा, अर्निया गौड़, कवला, गांगसी, ओसरना, कुण्डला खुर्द, निपानिया, धामनिया झाली, गोपालपुरा, गरोठ, लसुडिया, श्रीनगर, पिपलखुटा, मगराना और डोराना जैसी कई सहकारी समितियां शामिल हैं। इनके अलावा सार्थक साख मंदसौर, ग्रामीण विकास साख संस्था बरखेड़ा देव डूंगरी, कंचन साख मंदसौर, प्रबल निधि साख संस्था, सांवलिया बीज धमनार, जय बालाजी बीज राणाखेड़ा और शिवकृपा बीज मकड़ावन जैसी संस्थाओं पर भी पंजीयन निरस्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित है।

    विभाग की ओर से सभी संबंधित संस्था संचालकों, सदस्यों और पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। यदि किसी संस्था को कार्रवाई पर आपत्ति है या वह अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहती है, तो उन्हें एक सप्ताह के भीतर उपायुक्त सहकारिता कार्यालय, मित्र वत्सला रामटेकरी, मंदसौर में उपस्थित होकर आवेदन देना होगा। तय समय सीमा के बाद विभाग आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।

    सहकारिता विभाग का कहना है कि कई संस्थाएं वर्षों से केवल कागजों में चल रही थीं, जबकि उनका कोई वास्तविक संचालन नहीं हो रहा था। इससे न केवल सरकारी रिकॉर्ड प्रभावित हो रहे थे, बल्कि सहकारिता व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा था। विभाग अब सक्रिय और निष्क्रिय संस्थाओं के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित कर व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में अन्य निष्क्रिय संस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी। यदि कोई संस्था लंबे समय तक कार्य नहीं करती पाई गई, तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और सक्रिय संस्थाओं को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

  • भाजपा नेता का कथित धमकी भरा ऑडियो वायरल: टोल मैनेजर को दी चेतावनी

    भाजपा नेता का कथित धमकी भरा ऑडियो वायरल: टोल मैनेजर को दी चेतावनी


    मध्य प्रदेश । रतलाम (मध्यप्रदेश) डेस्क। रतलाम जिले में भाजपा युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी का कथित धमकी भरा ऑडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। मामला चिकलिया फोरलेन टोल प्लाजा का है, जहां भाजयुमो आईटी सेल प्रभारी Shubham Gurjar पर टोल मैनेजर को फोन पर धमकाने, गाली-गलौज करने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की चेतावनी देने के आरोप लगे हैं। टोल मैनेजर Arijit Das Gupta ने इस मामले की शिकायत रतलाम एसपी और बिलपांक थाने में की है। शिकायत के साथ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत 18 मई की दोपहर हुई थी।

    “नेतागीरी नहीं चलेगी… उलटा टांग दूंगा”
    वायरल ऑडियो में कथित तौर पर शुभम गुर्जर टोल कर्मचारियों पर स्थानीय लोगों की गाड़ियां रोकने का आरोप लगाते हुए आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते सुनाई दे रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “भागते फिरोगे एसपी और टीआई के पास”, “लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ दूंगा” और “ज्यादा होशियारी दिखाई तो उलटा टांग दूंगा” जैसी धमकियां दीं। ऑडियो में टोल मैनेजर उन्हें शांत करने की कोशिश करते सुनाई देते हैं, लेकिन कथित तौर पर भाजपा नेता लगातार गुस्से में अपशब्द बोलते रहते हैं।

    टोल मैनेजर ने लगाए गंभीर आरोप
    शिकायत में टोल मैनेजर ने आरोप लगाया है कि शुभम गुर्जर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रोजाना करीब 100 बाहरी वाहनों को बिना टोल शुल्क दिए निकलवाते हैं। जब टोल कर्मचारी नियमों के अनुसार शुल्क मांगते हैं तो वाहन चालक शुभम गुर्जर से फोन पर बात करवाते हैं और इसके बाद स्टाफ पर दबाव बनाया जाता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों से एमपीआरडीसी को प्रतिदिन लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

    पहले भी विवादों में रह चुके हैं शुभम गुर्जर
    मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि शुभम गुर्जर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2024 में भी बिलपांक थाने में उनके खिलाफ टोल प्लाजा पर कर्मचारियों को पिस्टल दिखाकर धमकाने और मारपीट करने का केस दर्ज हुआ था।

    उस समय सामने आए सीसीटीवी फुटेज के बाद तत्कालीन एसपी ने कार्रवाई कर मामला दर्ज कराया था और उन्हें भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। बाद में कोर्ट में सरेंडर करने के बाद वे जमानत पर बाहर आए थे। करीब दो महीने पहले उन्हें फिर से भाजयुमो आईटी सेल प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी।

    टोल कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा
    टोल प्रबंधन ने पुलिस से मांग की है कि शुभम गुर्जर के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, धमकी, गाली-गलौज और राजस्व हानि पहुंचाने की धाराओं में केस दर्ज किया जाए। साथ ही टोल कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से फिलहाल विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिकायत और ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच शुरू कर दी गई है।

  • रतलाम में राजनीतिक हलचल: कोठारी बोले- सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ दूंगा

    रतलाम में राजनीतिक हलचल: कोठारी बोले- सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ दूंगा


    रतलाम (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता Himmat Kothari बुधवार को रतलाम एसपी ऑफिस में अचानक धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आम जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आमरण अनशन करेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी भी छोड़ देंगे।

    दरअसल मामला उनके बचपन के साथी और मीसाबंदी बसंत पुरोहित की जमीन पर कथित कब्जे से जुड़ा है। पूर्व मंत्री का आरोप है कि इस संबंध में पहले थाने में शिकायत की गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कुछ दिन पहले स्वयं एसपी अमित कुमार से मिलकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन फिर भी मामला आगे नहीं बढ़ा।

    बुधवार दोपहर हिम्मत कोठारी सीधे एसपी कार्यालय पहुंचे और एसपी के चेंबर के बाहर जमीन पर बैठकर विरोध जताने लगे। अचानक हुई इस घटना से पुलिस महकमे में हलचल मच गई। एसपी Amit Kumar तुरंत अपने चेंबर से बाहर आए और पूर्व मंत्री को अंदर चलकर बात करने के लिए कहा।

    इसके बाद डीडी नगर थाना प्रभारी को भी मौके पर बुलाया गया और पूरे प्रकरण की जानकारी ली गई। एसपी ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए और मामले में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।

    धरने के दौरान मीडिया से बातचीत में हिम्मत कोठारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि की बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में अराजकता का माहौल बन गया है और जमीन कब्जे जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    पूर्व मंत्री ने कहा, “यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो मैं पार्टी से अनुमति लेकर आमरण अनशन करूंगा। फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो पार्टी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।”

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जनप्रतिनिधि और नेता “गूंगे-बहरे” बन गए हैं और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उनके अनुसार, यदि ऐसे मामलों में सख्ती नहीं हुई तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की जमीन पर कब्जा कर सकता है।

    वहीं एसपी अमित कुमार ने मामले को लेकर कहा कि पूर्व मंत्री उनसे मिलने आए थे और संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया गया था, लेकिन वह पूरे कागजात नहीं ला पाए। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया जाएगा।

  • धूप में परेशान हुए हितग्राही: सर्वर डाउन बताकर रोका गया राशन, अफसरों पर सवाल

    धूप में परेशान हुए हितग्राही: सर्वर डाउन बताकर रोका गया राशन, अफसरों पर सवाल

    बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)। जिले के सिरपुर स्थित एक शासकीय उचित मूल्य दुकान पर बुधवार सुबह राशन वितरण में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया। दुकान संचालक ने “सर्वर डाउन” का हवाला देकर करीब तीन घंटे तक उपभोक्ताओं को राशन नहीं दिया, जिससे बड़ी संख्या में लोग धूप में खड़े होकर परेशान होते रहे।

    सुबह से ही दुकान के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। कई उपभोक्ता अपने घरों से थैलियां लेकर पहुंचे थे और घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें अनाज नहीं मिला। तेज धूप और भीड़ के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    SDM ने मौके पर पहुंचकर लगाई फटकार
    इसी दौरान नेपानगर एसडीएम भागीरथ वाखला सिरपुर क्षेत्र से गुजर रहे थे। उन्होंने दुकान के बाहर भारी भीड़ देखकर गाड़ी रोक दी और स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने मौके पर दुकान संचालक से देरी का कारण पूछा।

    संचालक ने सफाई दी कि तकनीकी कारणों से सर्वर डाउन है, जिसके चलते राशन वितरण नहीं हो पा रहा है। इस पर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे लापरवाही माना और तत्काल प्रभाव से वितरण शुरू करने के निर्देश दिए। एसडीएम की सख्ती के बाद दुकान पर राशन वितरण तुरंत शुरू कर दिया गया और लोगों को अनाज मिलना प्रारंभ हो गया।

    पोर्टेबिलिटी बंद होने से बढ़ी परेशानी
    स्थानीय जानकारी के अनुसार, सिरपुर की यह शासकीय राशन दुकान आसपास के कई क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अनाज उपलब्ध कराती है। इस बार पोर्टेबिलिटी सुविधा बंद होने के कारण उपभोक्ताओं को केवल अपनी निर्धारित (पंजीकृत) दुकान से ही राशन लेना पड़ रहा है।

    पहले उपभोक्ता किसी भी नजदीकी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त कर सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा बंद होने से एक ही दुकान पर दबाव बढ़ गया है। इसके चलते भीड़ और लंबी कतारों की स्थिति लगातार बन रही है।

  • नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद

    नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद


    बुरहानपुर/मध्यप्रदेश। जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री और कथित नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई के विरोध में बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनता को दवाइयों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सुबह से ही कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। दोपहर होते-होते बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

    दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे न केवल छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। एसोसिएशन के सचिव शरद जैन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख दवा दुकानें बंद रहीं और यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

    ज्ञापन में केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की निगरानी कमजोर पड़ रही है और इसी का फायदा उठाकर कुछ अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं।

    केमिस्टों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और गर्भपात किट (अबॉर्शन किट) की अनियंत्रित सप्लाई बढ़ रही है, जिससे युवा वर्ग में नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा सप्लाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।

    इसी तरह नेपानगर क्षेत्र में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल स्टोर बंद रहे। वहां के दवा विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि बिना नियंत्रण के हो रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों को गलत या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे इलाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

    हालांकि, इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें दिनभर दवाओं के लिए परेशान होना पड़ा। ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।

  • आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन

    आजीविका पर संकट का आरोप: ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का प्रदर्शन


    मध्यप्रदेश। देशभर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में केमिस्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को कई जिलों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों में देखने को मिला, जहां सुबह से ही दवा दुकानों के शटर गिरे रहे और मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा।

    झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

    वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे।

    इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी।

    ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

    हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।

  • रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल

    रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल


    मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में सड़क सुरक्षा की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल चार लोग घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पहला हादसा शहर के सांवरिया मंदिर के सामने हुआ, जहां दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्चना पति निलेश, हंसिका और मंथन बाइक पर सवार होकर मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों लोग सड़क पर गिरकर घायल हो गए।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस मार्ग पर कई वाहन चालक लगातार लापरवाही से रॉन्ग साइड ड्राइविंग करते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    दूसरा हादसा राजघाट रोड स्थित सर्किट हाउस के पास हुआ, जहां ईंट भट्टे से निकलने वाले घने धुएं ने एक युवक की जान पर भारी संकट खड़ा कर दिया। कुकरा बसाहट निवासी संजय वर्मा ने बताया कि ईंट भट्टे का धुआं सड़क पर फैलने के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है।

    इसी दौरान 17 वर्षीय अखिलेश केवट, जो मछली पकड़कर बाइक से घर लौट रहे थे, धुएं के कारण रास्ता ठीक से न देख पाने की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही के कारण भी भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है, जिससे सड़क पर दृश्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्टों और भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

    जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार, सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दोनों हादसों ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।