Category: Madhya Pradesh

  • सिंचाई सिस्टम पर सवाल: इंदिरा सागर नहरों की बदहाली से खेती प्रभावित

    सिंचाई सिस्टम पर सवाल: इंदिरा सागर नहरों की बदहाली से खेती प्रभावित


    मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना के तहत सिंचाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 16 मई को मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि यह पानी अगले आठ से दस दिनों में बड़वानी क्षेत्र तक पहुंच जाएगा, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने वाली माइनर और सब-माइनर नहरों की जर्जर हालत किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि बीते करीब एक दशक से इन नहरों की नियमित सफाई और मरम्मत नहीं की गई है। इसके चलते कई स्थानों पर नहरों में गाद भर गई है और झाड़ियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। नहरों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर पानी का रिसाव होने और खेतों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद होने का खतरा बना हुआ है।

    सजवानी, रेहगुन, सुराना और तलवाड़ा बुजुर्ग सहित कई गांवों के किसान लंबे समय से नहरों की टूट-फूट और जर्जर स्थिति को लेकर परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि नहरें अब पहले की तुलना में काफी संकरी हो गई हैं और उनकी दीवारों में दरारें आ चुकी हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

    भारतीय किसान संघ के जिला सदस्य धर्मेंद्र राठौर ने आरोप लगाया कि विभाग हर साल केवल आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता। इसके कारण किसानों को समय पर पानी नहीं मिल पाता और उनकी फसलें प्रभावित होती हैं।

    वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नहरों की मरम्मत और सुधार के लिए शासन को 2 करोड़ 25 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है। इंदिरा सागर परियोजना के सहायक अभियंता डीके गोरी ने बताया कि मुख्य अभियंता की नियुक्ति न होने के कारण फाइलें अटकी हुई थीं, लेकिन अब बजट स्वीकृत होने के बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिए मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा।

    हालांकि, मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद समय का दबाव बढ़ गया है। किसानों में इस बात को लेकर संशय है कि क्या प्रशासन टेंडर प्रक्रिया और मरम्मत कार्य समय रहते पूरा कर पाएगा। यदि सुधार कार्य में देरी होती है तो इस सीजन में भी फसलों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाएगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।

    किसानों की मांग है कि नहरों की तत्काल सफाई और मरम्मत कर जल वितरण व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो और फसलें सुरक्षित रह सकें।

  • फुटबॉल में बड़ा उलटफेर: आर्सेनल ने हासिल किया खिताबी ताज

    फुटबॉल में बड़ा उलटफेर: आर्सेनल ने हासिल किया खिताबी ताज


    नई दिल्ली । इंग्लैंड के फुटबॉल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहां आर्सेनल एफसी ने 22 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए प्रीमियर लीग का खिताब अपने नाम कर लिया है। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि टीम ने आखिरी बार वर्ष 2004 में यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीती थी।

    टाइटल रेस का निर्णायक मोड़ उस समय आया जब मंगलवार रात बोर्नमाउथ के वाइटैलिटी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में गत चैंपियन मैनचेस्टर सिटी एफसी, एएफसी बोर्नमाउथ के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ पर रोक दी गई। पेप गार्डियोला की टीम को खिताब की दौड़ में बने रहने के लिए हर हाल में जीत जरूरी थी, लेकिन बोर्नमाउथ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

    मैच में पहला बड़ा पल 39वें मिनट में आया, जब 19 वर्षीय फ्रांसीसी खिलाड़ी एली जूनियर क्रुपी ने बेहतरीन गोल कर बोर्नमाउथ को बढ़त दिला दी। एड्रियन ट्रफर्ट के पास पर उन्होंने शानदार पहला टच लेते हुए कर्विंग शॉट लगाया, जिसे मैनचेस्टर सिटी के गोलकीपर जियानलुइजी डोनारुम्मा भी रोक नहीं सके।

    हालांकि दूसरे हाफ में एर्लिंग हालैंड ने गोल कर मैनचेस्टर सिटी को बराबरी पर ला दिया और टीम की उम्मीदों को फिर से जिंदा किया, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। कुछ ही पलों में मैच समाप्त हो गया और सिटी का लगातार खिताब जीतने का सपना टूट गया।

    इसी परिणाम के साथ आर्सेनल को प्रीमियर लीग 2025 का चैंपियन घोषित कर दिया गया। मिकेल आर्टेटा के नेतृत्व में टीम ने पूरे सीजन में शानदार और संतुलित प्रदर्शन किया। आर्सेनल ने एक दिन पहले ही बर्नले एफसी को 1-0 से हराकर खिताब की अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी थी।

    इस सीजन में आर्सेनल ने सेट पीस यानी कॉर्नर से सबसे ज्यादा गोल करने का नया प्रीमियर लीग रिकॉर्ड भी बनाया, जो उनकी रणनीतिक मजबूती को दर्शाता है। आर्टेटा की टीम ने पूरे सीजन में निरंतरता और अनुशासन के दम पर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

    जैसे ही मैनचेस्टर सिटी और बोर्नमाउथ मैच के ड्रॉ की खबर फैली, लंदन स्थित एमिरेट्स स्टेडियम के बाहर हजारों की संख्या में आर्सेनल समर्थक जुट गए और जश्न मनाना शुरू कर दिया। पूरे शहर में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

    अब आर्सेनल के पास एक और बड़ा मौका है इतिहास रचने का, क्योंकि टीम 30 मई को बुडापेस्ट में होने वाले यूईएफए चैंपियंस लीग फाइनल 2025 में पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) का सामना करेगी। इस जीत के साथ आर्सेनल ने न सिर्फ ट्रॉफी जीती है, बल्कि यूरोपीय फुटबॉल में अपनी मजबूत वापसी का संकेत भी दिया है।

  • केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज

    केमिस्ट एसोसिएशन का बड़ा प्रदर्शन: सरकार से हस्तक्षेप की मांग तेज


    मध्य प्रदेश । खंडवा जिले में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में व्यापक असर देखने को मिला, जहां करीब 450 मेडिकल स्टोर एक दिन के लिए बंद रहे। जिलेभर के केमिस्टों ने एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्य मौजूद रहे और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को ज्ञापन सौंपा।

    दोपहर के समय आयोजित इस प्रदर्शन में खंडवा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के साथ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया, जिससे आंदोलन और अधिक व्यापक रूप में दिखाई दिया। केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श और फर्जी या असत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    एसोसिएशन अध्यक्ष गोवर्धन गोलानी ने आरोप लगाया कि इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रही अवैध दवा बिक्री, फ्री होम डिलीवरी और भारी छूट की नीति छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट व्यापारियों के अस्तित्व को संकट में डाल रही है। उनका कहना है कि यह स्थिति न केवल बाजार को असंतुलित कर रही है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

    केमिस्टों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और 1945 के नियमों में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं का वितरण कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और कोविड काल में जारी GSR 220(E) का हवाला देते हुए कहा कि इनका गलत उपयोग किया जा रहा है, जिससे अनियंत्रित दवा वितरण को बढ़ावा मिल रहा है।

    केमिस्ट संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवा वितरण पर तुरंत रोक लगाई जाए और अवैध ऑनलाइन बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही GSR 817(E) और GSR 220(E) को वापस लेने तथा ऑनलाइन कंपनियों की प्रीडेटरी प्राइसिंग और अत्यधिक छूट नीति पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन के दौरान केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान उन्होंने बिना रुके दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखा था, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित गतिविधियों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।

    एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और छोटे दवा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रणाली दोनों संतुलित रह सकें।

  • मौसम विभाग की चेतावनी: 25 मई तक लू का असर, धार में बढ़ी परेशानी

    मौसम विभाग की चेतावनी: 25 मई तक लू का असर, धार में बढ़ी परेशानी


    मध्य प्रदेश । धार शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान और तपती लू के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि दोपहर के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पिछले कई दिनों से जिले का अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जिससे आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

    सुबह के समय भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि तापमान 27 से 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है। जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, तेज धूप और गर्म हवाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं। दोपहर के समय बाजार और सड़कें लगभग सुनसान हो जाती हैं, और केवल जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।

    भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, बुखार, कमजोरी और लू लगने से संबंधित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो रही है।

    गर्मी और लू के कारण रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। मजदूर वर्ग को खुले आसमान के नीचे काम करने में भारी परेशानी हो रही है, वहीं छोटे व्यापारियों और राहगीरों को भी गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है और लोग छांव और ठंडी जगहों की तलाश में नजर आते हैं।

    मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए चेतावनी जारी की है कि आने वाले 25 मई तक जिले में लू का प्रभाव जारी रह सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तापमान में फिलहाल कोई बड़ी गिरावट के आसार नहीं हैं, बल्कि गर्म हवाओं का असर और बढ़ सकता है।

    प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने भी आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा धूप से बचाव के लिए सिर को ढककर ही बाहर निकलें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भीषण गर्मी में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि लू का असर अचानक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल पूरे जिले में गर्मी का यह दौर लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • भोजशाला की अनोखी प्रतिमा: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी मां वाग्देवी

    भोजशाला की अनोखी प्रतिमा: 26 कलाकारों ने 35 दिन में तैयार की थी मां वाग्देवी


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक बेहद ऐतिहासिक और संवेदनशील धार्मिक धरोहर पिछले 15 वर्षों से कड़ी सुरक्षा के बीच संरक्षित रखी हुई है। यह प्रतिमा धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के गर्भगृह के लिए तैयार की गई मां वाग्देवी (मां सरस्वती) की अष्टधातु मूर्ति है, जिसे वर्ष 2011 में स्थापित किया जाना था, लेकिन उस समय उत्पन्न हुए विवाद और प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया था।

    हाल ही में भोजशाला को लेकर अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर इस प्रतिमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए सालभर बिना रोक-टोक पूजा-अर्चना की अनुमति दी है, जिसके बाद इस प्रतिमा के भविष्य को लेकर नए सिरे से उम्मीदें जागी हैं।

    जानकारी के अनुसार, इस दिव्य अष्टधातु प्रतिमा को ग्वालियर के मूर्तिकार प्रभात राय और उनकी टीम ने तैयार किया था। मूर्तिकार के बेटे अनुज राय ने बताया कि वर्ष 2011 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता नवल किशोर जी के आदेश पर यह प्रतिमा तैयार की गई थी। इसे केवल 35 दिनों में 26 कुशल कलाकारों की मेहनत से गढ़ा गया था। प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी, लेकिन अंतिम समय में विवाद बढ़ने के कारण इसे ग्वालियर में ही रोक दिया गया।

    परिवार के अनुसार, उस समय स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि कई दिनों तक पुलिस सुरक्षा में प्रतिमा को घर में रखा गया। वर्षों तक बसंत पंचमी जैसे अवसरों पर भी सीमित समय के लिए पुलिस सुरक्षा के बीच ही प्रतिमा को बाहर निकाला जाता था और फिर सुरक्षित रख दिया जाता था।

    मूर्तिकार परिवार आज भी इस प्रतिमा को अपने लिए एक गौरव और ऐतिहासिक धरोहर मानता है। अनुज राय ने भावुक होकर कहा कि यदि भविष्य में यह प्रतिमा स्थापित नहीं भी होती है, तो भी वे इसे गर्व के साथ अपने पास सुरक्षित रखेंगे, क्योंकि यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

    इधर, आरएसएस से जुड़े स्थानीय पदाधिकारियों के अनुसार उस समय प्रतिमा के संरक्षक रहे नवल किशोर अब आध्यात्मिक जीवन अपनाकर मौन धारण कर चुके हैं, जिससे इस प्रतिमा के भविष्य को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं।

    इस बीच, हिंदू पक्ष से जुड़े संगठन भोज उत्सव समिति ने भी इस मुद्दे को फिर से उठाया है। समिति का कहना है कि लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला में स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि यह प्रतिमा ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    हालांकि, ग्वालियर में सुरक्षित रखी गई प्रतिमा को भोजशाला में स्थापित करने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और यह विषय फिलहाल विचाराधीन है। संगठन के अनुसार, आगे की सभी प्रक्रियाएं न्यायालय के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही पूरी की जाएंगी।

    भोजशाला विवाद का यह अध्याय अब एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक ओर न्यायालय के फैसले ने आस्था से जुड़े पक्ष को राहत दी है, वहीं ग्वालियर में सुरक्षित रखी प्रतिमा का भविष्य भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • देवास ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मुख्य आरोपी का भाई दिल्ली से गिरफ्तार

    देवास ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: मुख्य आरोपी का भाई दिल्ली से गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश ।  देवास जिले के टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट मामले में जांच एजेंसी SIT ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मुकेश विज के भाई कपिल विज को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। इस दर्दनाक हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद से जांच एजेंसियां लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थीं। गिरफ्तारी के बाद कपिल विज से पूछताछ जारी है और उससे मामले से जुड़े कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार, SIT पिछले कई दिनों से दिल्ली के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही थी। लगातार निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर मंगलवार को कपिल विज को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्ट्री के संचालन में कपिल विज की अहम भूमिका थी और वह पूरे नेटवर्क का हिस्सा था। इसी आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाया गया है।

    वहीं, मुख्य आरोपी मुकेश विज फिलहाल फरार बताया जा रहा है और उसके चीन में छिपे होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह पटाखा बनाने वाली मशीनें लेने के लिए चीन गया था। पुलिस और जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी तलाश में जुट गई हैं।

    गौरतलब है कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिसमें फैक्ट्री में हुए विस्फोट के कारण 6 मजदूरों की जान चली गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था और प्रशासनिक स्तर पर भी कई सवाल खड़े हुए थे। जांच में यह सामने आया कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी और बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री अवैध रूप से रखी गई थी।

    एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि प्रारंभिक जांच के दौरान चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मुख्य संचालक के रूप में मुकेश विज का नाम सामने आया। अब उसके भाई कपिल विज की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

    पुलिस के अनुसार, देवास से भेजी गई विशेष टीम ने दिल्ली में कार्रवाई करते हुए कपिल विज को पकड़ा और अब उसे देवास लाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अब कुल छह आरोपियों को नामजद किया जा चुका है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    इस बीच हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि फैक्ट्री में लाइसेंस से अधिक विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था। यहां तक कि बिना पूर्ण निर्माण और सुरक्षा इंतजामों के ही फैक्ट्री में उत्पादन शुरू कर दिया गया था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है। राजनीतिक स्तर पर भी इस हादसे को लेकर बयानबाजी जारी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    फिलहाल SIT की प्राथमिकता मुख्य आरोपी मुकेश विज को गिरफ्तार करना है, ताकि पूरे रैकेट और फैक्ट्री संचालन के पीछे की असल सच्चाई सामने लाई जा सके। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपी को भी पकड़ लिया जाएगा।

  • जटाधारी बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

    जटाधारी बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: भक्तों ने किए दिव्य दर्शन


    मध्य प्रदेश ।  विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में बुधवार तड़के भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बाबा महाकाल के गर्भगृह में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और विधिवत आज्ञा लेने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर बाबा महाकाल के दर्शन का क्रम प्रारंभ हुआ।

    आरती की शुरुआत में पुजारियों द्वारा भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा गया और जलाभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत से विशेष पूजन किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग कर भगवान का अभिषेक किया गया। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और आरती की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया।

    पंचामृत पूजन के बाद कर्पूर आरती की गई और इसके पश्चात बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। जटाधारी स्वरूप में भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही उन्हें ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग भी अर्पित किया गया।

    भस्म अर्पण की यह विशेष परंपरा महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से निभाई गई, जिसे महाकालेश्वर मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस दौरान नंदी हाल में नंदी महाराज का भी विशेष स्नान, ध्यान और पूजन किया गया, जिसके बाद पूरी भस्म आरती की प्रक्रिया पूर्ण हुई। आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और आस्था के इस अद्भुत दृश्य ने पूरे मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। हर ओर “जय श्री महाकाल” के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा और भक्तों ने इस अलौकिक क्षण को अपने जीवन का सौभाग्य माना।

  • पानी की किल्लत से गुस्सा फूटा: महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान वाहन निकालने पर विवाद

    पानी की किल्लत से गुस्सा फूटा: महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान वाहन निकालने पर विवाद


    मध्य प्रदेश । देवास शहर के आवास नगर क्षेत्र में बुधवार को जल संकट को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। लंबे समय से पानी की नियमित सप्लाई न होने और नलों के सीमित समय तक चालू रहने से नाराज महिलाओं ने मुख्य मार्ग पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया और करीब 15 से 20 मिनट तक नारेबाजी के साथ विरोध प्रदर्शन चलता रहा।

    प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए जब एक ट्रक चालक ने जाम के बीच से अपना वाहन निकालने की कोशिश की। इस पर मौजूद लोगों और चालक के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। इसी दौरान पार्षद प्रतिनिधि राज वर्मा ने गुस्से में आकर ट्रक ड्राइवर पर चप्पल फेंक दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    आवास नगर की महिलाओं का कहना था कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा। महिलाओं ने एकजुट होकर मुख्य मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    इस प्रदर्शन में पूर्व पार्षद प्रत्याशी उषा अग्रवाल भी मौजूद रहीं, जिन्होंने महिलाओं के साथ धरने में हिस्सा लिया। चक्काजाम के दौरान पार्षद प्रतिनिधि राज वर्मा और उषा अग्रवाल के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। राज वर्मा ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति के घर में पहले से ही दो नल कनेक्शन मौजूद हैं, जिसके कारण असमान जल वितरण को लेकर विवाद और गहरा गया।

    स्थिति बिगड़ती देख मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक बातचीत और समझाइश के बाद प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम समाप्त किया और यातायात बहाल हुआ।

    प्रदर्शन खत्म होने के बाद पार्षद प्रतिनिधि राज वर्मा ने कहा कि जल संकट एक गंभीर समस्या है और इस मुद्दे को लेकर संबंधित अधिकारियों से चर्चा की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र में पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    हालांकि इस घटना ने एक बार फिर शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा ताकि उन्हें इस तरह के विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर न होना पड़े।

  • ई-प्रिस्क्रिप्शन को लेकर विवाद: दवा बिक्री नियमों पर उठी सख्त मांग

    ई-प्रिस्क्रिप्शन को लेकर विवाद: दवा बिक्री नियमों पर उठी सख्त मांग


    मध्य प्रदेश । शाजापुर जिले में बुधवार को दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री और इससे जुड़े नियमों के विरोध में एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल की, जिससे पूरे जिले के मेडिकल स्टोर दिनभर बंद रहे। यह हड़ताल शाजापुर जिला केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर की गई, जिसमें बड़ी संख्या में केमिस्ट शामिल हुए। विरोध के दौरान दवा व्यापारियों ने कलेक्ट कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम मनीषा वास्कले को सौंपा।

    ज्ञापन में मुख्य रूप से इस बात पर चिंता जताई गई कि इंटरनेट के माध्यम से बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाइयों की बिक्री और होम डिलीवरी तेजी से बढ़ रही है। केमिस्टों का कहना है कि यह प्रवृत्ति जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, क्योंकि इससे दवाओं के गलत और अनियंत्रित उपयोग की आशंका बढ़ जाती है।

    दवा व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारी छूट देकर दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं, जिससे स्थानीय और लाइसेंसधारी केमिस्टों का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि छोटे मेडिकल स्टोर इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद कई ई-कॉमर्स कंपनियां लंबे समय से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा जारी GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग भी की है।

    दवा व्यापारियों ने सरकार से यह भी अपील की कि बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के किसी भी प्रकार की दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा अपनाई जा रही डीप डिस्काउंटिंग और प्रीडेटरी प्राइसिंग जैसी नीतियों पर भी सख्त रोक लगाने की मांग की गई है, ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

    जिला अध्यक्ष विकास सिंदल ने बताया कि यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

    पूरे जिले में मेडिकल स्टोर बंद रहने से सामान्य दवा खरीदने वाले लोगों को भी थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ा, हालांकि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं।

  • हाईवे पर वारदात: जंगल में ले जाकर भाजपा नेता से मारपीट, जांच शुरू

    हाईवे पर वारदात: जंगल में ले जाकर भाजपा नेता से मारपीट, जांच शुरू


    मध्य प्रदेश । राजगढ़ जिले में एक सनसनीखेज आपराधिक वारदात ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है, जहां भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दीपक शर्मा को हाईवे पर लिफ्ट के बहाने फंसाकर बंधक बना लिया गया और उनके साथ गंभीर मारपीट, लूटपाट और ब्लैकमेलिंग की गई। आरोप है कि यह पूरी घटना एक सुनियोजित हनीट्रैप जैसी साजिश थी, जिसमें एक परिचित महिला और उसके साथियों ने मिलकर उन्हें निशाना बनाया।

    घटना 10 मई की बताई जा रही है, जब दीपक शर्मा भोपाल से राजगढ़ लौट रहे थे। नरसिंहगढ़ और कुरावर के बीच हाईवे पर एक परिचित महिला ने उन्हें हाथ देकर रोका। परिचित होने के कारण उन्होंने कार रोक दी, लेकिन जैसे ही वाहन रुका, पहले से घात लगाए 7-8 युवक वहां पहुंच गए और उन्हें जबरन कार में बैठाकर जंगल की ओर ले गए।

    आरोप है कि बदमाशों ने सीहोर जिले की काली पहाड़ी के जंगल में उन्हें बंधक बनाकर करीब तीन घंटे तक बेरहमी से पीटा। इस दौरान उनके हाथ-पैर पर चोटें आईं और आंखों में भी गंभीर चोट लगी। आरोपियों ने उनसे 20 लाख रुपये की मांग की और धमकी दी कि पैसे नहीं देने पर जान से मार देंगे। दबाव बनाकर उन्होंने परिजनों से फोन कराकर करीब 61 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए।

    दीपक शर्मा के अनुसार, आरोपियों ने उनके साथ लूटपाट भी की और घड़ी, अंगूठी, लॉकेट, मोबाइल फोन और नकदी छीन ली। इसके अलावा एटीएम कार्ड और पिन लेकर उससे भी करीब 60 हजार रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित का आरोप है कि बदमाशों ने उनके कपड़े फाड़कर उनका न्यूड वीडियो बनाया और उसे वायरल करने की धमकी देकर लगातार मानसिक दबाव बनाया।

    घटना के बाद पीड़ित काफी डरे हुए थे, जिसके चलते उन्होंने तुरंत पुलिस में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। बाद में 12 मई को एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच शुरू की, जिससे पूरे गिरोह की परतें खुलने लगीं।

    जांच में सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह था, जिसमें एक महिला भी शामिल थी। पुलिस ने एक-एक कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में देवा वंशकार, रवींद्र जीत डग, अदनान खान, कृष्णा यादव, तरुण मेवाड़ा, रितिक वाल्मीकि और मंजू प्रजापति शामिल हैं। सभी आरोपी पहले से आपराधिक गतिविधियों में शामिल बताए जा रहे हैं।

    पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 5.97 लाख रुपये का सामान बरामद किया है, जिसमें नकदी, एटीएम से निकाले गए पैसे और लूटा गया सामान शामिल है। इस पूरे मामले में डकैती, अपहरण, बंधक बनाना और वसूली जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    एसपी अमित तोलानी के अनुसार, यह एक सुनियोजित अपराध था जिसमें हाईवे पर लिफ्ट दिलाने के बहाने शिकार को फंसाया गया। पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह के अन्य नेटवर्क और संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

    इस घटना ने हाईवे सुरक्षा और संगठित अपराध के बढ़ते नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।