Category: Madhya Pradesh

  • पीथमपुर की रामकी एनवायरो कंपनी में हुए 3 धमाके, 1 किमी तक गूंजी आवाज, आसपास के इलाके में दहशत

    पीथमपुर की रामकी एनवायरो कंपनी में हुए 3 धमाके, 1 किमी तक गूंजी आवाज, आसपास के इलाके में दहशत


    धार। मध्य प्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रामकी एनवायरो कंपनी में मंगलवार को लगातार तीन धमाके होने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धमाकों की आवाज करीब एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई और हालात को नियंत्रण में लिया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    तीन जोरदार विस्फोट हुए
    यह घटना पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-2 स्थित तारपुरा इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक, कंपनी परिसर में अचानक एक के बाद एक तीन जोरदार विस्फोट हुए। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि पास के तारपुरा और बजरंगपुरा गांवों में लोगों ने झटके महसूस किए। ग्रामीणों ने बताया कि धमाकों के कारण उनके घरों में रखे बर्तन, टीवी और अन्य सामान तक हिल गए और कई चीजें स्टैंड से नीचे गिर गईं। तेज आवाज से लोग घबरा गए और घरों से बाहर निकल आए। कुछ समय के लिए पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया।

    पुलिस बल मौके पर पहुंचा
    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। सीएसपी रवि सोनेर ने बताया कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि धमाकों के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। थाना प्रभारी ओम प्रकाश अहीर ने भी बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। कंपनी प्रबंधन की ओर से भी किसी प्रकार की जनहानि से इनकार किया गया है।

    गौरतलब है कि यह वही कंपनी है, जहां पहले भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के निपटान का काम किया गया था। इस कारण यह कंपनी पहले भी चर्चा में रह चुकी है। ताजा घटना के बाद एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम कंपनी परिसर में मौजूद है और खबर लिखे जाने तक धमाकों के वास्तविक कारणों की जांच में जुटी हुई है।

  • हाटी मोड़ पर बड़ा सड़क हादसा, ऑटो बचाने में अनियंत्रित होकर पलटी बस, यात्रियों में हड़कंप

    हाटी मोड़ पर बड़ा सड़क हादसा, ऑटो बचाने में अनियंत्रित होकर पलटी बस, यात्रियों में हड़कंप


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया जिसने यात्रियों में दहशत फैला दी। सतना से चित्रकूट जा रही नफीस ट्रेवल्स की बस स्टेट हाईवे पर हाटी मोड़ के पास अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 10 से अधिक यात्री घायल हो गए हैं जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस तेज रफ्तार में चल रही थी और जैसे ही वह हाटी मोड़ पर पहुंची तभी सामने अचानक एक ऑटो आ गया। ऑटो को बचाने के प्रयास में चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस सड़क किनारे पलट गई। हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और यात्रियों में अफरा तफरी फैल गई।

    स्थानीय लोगों ने बिना देरी किए राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालने में मदद की। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने घायलों को 112 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल सतना भेजा जहां उनका इलाज जारी है।

    डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। वहीं पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और बस चालक के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर करती है। जरा सी लापरवाही कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने यात्रियों से सावधानी बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।

  • अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत

    अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के अंतर्गत हाटा चौकी के ग्राम लोढ़ी में अवैध उत्खनन का काला कारोबार एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। लगातार जारी अवैध खनन गतिविधियों के बीच हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को दहशत और आक्रोश में डाल दिया है। पत्थर से लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।

    मृतक की पहचान राजभान साकेत के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय ट्रैक्टर में भारी मात्रा में पत्थर लोड था और वह तेज गति से गुजर रहा था। इसी दौरान युवक ट्रैक्टर के पहिए की चपेट में आ गया और गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही हाटा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। बाद में थाना प्रभारी अनिल काकड़े भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। यह घटना लोढ़ी गांव में ट्रांसफार्मर प्लांट के पास पप्पू सिंह की मड़ई के सामने हुई बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह ट्रैक्टर राजेंद्र बहादुर सिंह उर्फ पप्पू से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

    ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध पत्थर खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। लगातार शिकायतों और रिपोर्ट के बावजूद इस पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज आवाजाही और बिना नियमों के खनन कार्य से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    घटना के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस पर भी दबाव बनाए जाने की बात कही है जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि स्थानीय लोगों की जान के लिए भी गंभीर जोखिम बन चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।

  • अंबेडकर जयंती पर CM मोहन यादव का नमन बाबा साहेब को बताया संविधान का शिल्पकार

    अंबेडकर जयंती पर CM मोहन यादव का नमन बाबा साहेब को बताया संविधान का शिल्पकार


    भोपाल । भोपाल में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर पूरे प्रदेश में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा साहेब को भावपूर्ण नमन किया और उन्हें भारतीय संविधान का शिल्पकार तथा सामाजिक न्याय का महान पुरोधा बताया।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने जीवनभर शिक्षा समानता और अधिकारों के आधार पर एक सशक्त और समतामूलक भारत की नींव रखी। उनके विचार आज भी देश के विकास और सामाजिक उत्थान की दिशा में मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था बल्कि उन्होंने समाज के वंचित शोषित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए संघर्ष को जीवन का उद्देश्य बनाया।

    सीएम यादव ने यह भी कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आए। उनके प्रयासों ने देश में एक ऐसी व्यवस्था की नींव रखी जिसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर मिल सकें।

    इस अवसर पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें श्रद्धांजलि सभाएं, विचार गोष्ठियां और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल रहे। लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर बाबा साहेब के विचारों को याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

    मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार बाबा साहेब के सिद्धांतों और उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समता न्याय और अधिकार आधारित समाज की स्थापना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस प्रकार अंबेडकर जयंती का यह अवसर न केवल श्रद्धांजलि का दिन रहा बल्कि सामाजिक एकता और समानता के संदेश को मजबूत करने का भी प्रतीक बना।

  • सड़क पार करते समय हादसा: सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम

    सड़क पार करते समय हादसा: सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम


    नई दिल्ली। ग्वालियर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सोमवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। गुब्बारा फाटक के पास सड़क पार कर रहे 62 वर्षीय सुरेंद्र सिंह राठौर को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया।

    सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम
    हादसे में बुजुर्ग के सिर में गंभीर चोट आई। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार चोट काफी गंभीर थी, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    परिजनों का आरोप: ऑटो ने मारी टक्कर
    मृतक के भतीजे विक्रांत ने आरोप लगाया कि टक्कर एक ऑटो ने मारी थी। उनका कहना है कि हादसे के बाद बुजुर्ग ऑटो में फंस गए और कुछ दूरी तक घिसटते रहे, लेकिन चालक वाहन लेकर मौके से भाग गया।

    CCTV में कैद हुई घटना
    घटनास्थल के पास लगी एक दुकान के CCTV कैमरे में हादसा रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में वाहन टक्कर मारने के बाद बुजुर्ग को घसीटते हुए नजर आ रहा है। हालांकि, पुलिस को जो फुटेज मिला है, वह दूरी के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    आरोपी वाहन की तलाश जारी
    थाना प्रभारी के अनुसार आसपास के अन्य CCTV कैमरों की भी जांच की जा रही है, ताकि आरोपी वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपी तक पहुंचने का दावा किया है।

    लोगों ने दिखाई मदद, फिर भी नहीं बच सकी जान
    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोग मदद के लिए दौड़े और घायल को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी, जिससे इलाके में शोक का माहौल है।

  • सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

    सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा


    पीथमपुर । मध्यप्रदेश के धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में श्रमिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में दिल्ली एनसीआर में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब इसका असर मध्यप्रदेश के औद्योगिक इलाकों में भी दिखने लगा है। पीथमपुर स्थित सेक्टर 3 में मदरसन कंपनी की यूनिट 1 के बाहर लगभग 500 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मच गई है।

    कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लंबे समय से आर्थिक शोषण कर रहा है और काम के निर्धारित घंटे लागू नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि उनसे आठ घंटे से अधिक काम कराया जाता है लेकिन इसके बदले में उचित वेतन नहीं दिया जाता जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में जीवनयापन मुश्किल होता जा रहा है।

    हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों को हाल ही में नौकरी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई को कर्मचारियों ने दबाव बनाने और डराने की रणनीति बताया है। इससे अन्य कर्मचारियों में भी आक्रोश बढ़ गया है और वे सामूहिक रूप से विरोध में उतर आए हैं।

    प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल रश्मि नामक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी में न तो काम के घंटे तय हैं और न ही महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को छुट्टी नहीं दी जाती और किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी सुविधा या डॉक्टर की व्यवस्था भी कंपनी परिसर में मौजूद नहीं है।

    कर्मचारियों की मुख्य मांगों में निकाले गए साथियों की तत्काल बहाली वेतन में वृद्धि और काम के घंटे तय करना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस आंदोलन का असर अब अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी देखने को मिल रहा है जहां कर्मचारी एकजुट होकर समर्थन जता रहे हैं। कंपनी गेट पर लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन जारी है जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं ताकि मामला शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक अधिकारों और कार्यस्थल की स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन

    मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन


    भोपाल। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार को मध्यप्रदेश में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इंदौर जिले के डॉ. अंबेडकर नगर (महू), जो उनकी जन्मस्थली है, वहां मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां देशभर से श्रद्धालु, सामाजिक संगठन और बौद्ध भिक्षु बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान ‘जय भीम’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा और डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राज्यभर में माल्यार्पण, रैलियों और सभाओं का आयोजन किया गया।

    संविधान ने मजबूत की लोकतंत्र की नींव- मुख्यमंत्री यादव


    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान निर्माण के जरिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत आधार दिया और उनका सामाजिक समरसता व समानता का संदेश आज भी प्रासंगिक है।

    महू में मुख्य आयोजन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे
    महू में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में देशभर से आए लोगों ने बाबा साहेब को नमन किया। यहां बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी भी रही और पूरा क्षेत्र श्रद्धा और उत्साह के माहौल में नजर आया।

    प्रदेश के अन्य शहरों में भी आयोजन
    भोपाल में अंबेडकर चौक पर माल्यार्पण के साथ सभा आयोजित की गई। ग्वालियर के फूलबाग अंबेडकर पार्क में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और रैलियों का समापन वहीं हुआ। जबलपुर में विभिन्न संगठनों ने माल्यार्पण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। रतलाम में कैबिनेट मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी और लोगों को छाछ वितरित की गई।

    बैतूल में अंबेडकर चौक पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने अंबेडकर के योगदान को महान बताते हुए उनके विचारों को प्रेरक बताया। नरसिंहपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बेलहाई अंबेडकर पार्क में प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

    उज्जैन में अखिल भारतीय बैरवा महासंघ ने अंबेडकर जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और प्रभात फेरी निकाली, जिसमें बाबा साहब के योगदान को याद किया गया। नर्मदापुरम में भाजपा कार्यालय के सामने स्थित प्रतिमा स्थल कार्यक्रम आयोजित हुआ अधिकारियों ने माल्यार्पण किया और भीम आर्मी ने बाइक रैली निकाली। बैतूल, नरसिंहपुर, उज्जैन और नर्मदापुरम में भी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बाबा साहेब को याद किया गया। कई स्थानों पर प्रभात फेरी, बाइक रैली और सामूहिक माल्यार्पण का आयोजन हुआ।

    बता दें कि पूरे मध्य प्रदेश में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

  • देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया

    देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया


    मैहर । मध्यप्रदेश के मैहर रेलवे स्टेशन पर उस समय बड़ा हादसा टल गया जब चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही एक महिला अचानक संतुलन खो बैठी और प्लेटफॉर्म के किनारे से नीचे गिरने लगी। यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही सेकेंड में हुआ लेकिन मौके पर मौजूद GRP और RPF जवानों की तत्परता ने एक बड़ी दुर्घटना को होने से रोक दिया। उनकी सूझबूझ और तेजी से लिए गए निर्णय ने महिला की जान बचा ली।

    यह घटना ट्रेन संख्या 11754 रीवा–इतवारी एक्सप्रेस के जनरल कोच के पास हुई। जानकारी के अनुसार योगिता श्रीवास उम्र 38 वर्ष अपने पति के साथ यात्रा कर रही थीं और ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह असंतुलित होकर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक स्थिति में पहुंच गईं। कुछ ही पल में स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी।

    इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात GRP आरक्षक 104 दिनेश कुमार पटेल और RPF आरक्षक प्रमोद मिश्रा ने स्थिति को देखते ही बिना देरी किए कार्रवाई की। दोनों जवानों ने तेजी से दौड़कर महिला को पकड़ लिया और खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अगर कुछ सेकेंड की भी देरी होती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन उनकी तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह घटना बेहद डरावनी थी और आसपास मौजूद यात्री भी कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए थे। लेकिन जवानों की बहादुरी के बाद सभी ने राहत की सांस ली और उनकी सराहना की।

    यह घटना एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की लापरवाही की ओर ध्यान खींचती है। अक्सर देखा जाता है कि यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश करते हैं जो बेहद खतरनाक होता है और कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।

    रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील करता है कि ट्रेन पूरी तरह रुकने के बाद ही उसमें चढ़ें या उतरें। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। मैहर की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है।

  • दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द

    दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट ने पार्टी के अंदर नई खींचतान को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं रहा बल्कि जातीय समीकरणों के इर्दगिर्द घूमता नजर आ रहा है जहां अलग अलग वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

    शुरुआत में अनुसूचित जाति वर्ग की ओर से मांग उठी थी कि इस बार राज्यसभा में दलित नेता को मौका दिया जाए। इस मांग को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रमुखता से उठाया और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भी समर्थन मिला। इसके बाद विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने भी सक्रियता दिखाई और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखी।

    हाल ही में विंध्य क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से मुलाकात कर यह तर्क दिया कि क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का प्रभाव काफी अधिक है और उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर जातीय संतुलन का मुद्दा अब और गहराता जा रहा है।

    इसी बीच अब सिंधी समाज की एंट्री ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से प्रतिनिधि भेजने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को संबोधित पत्र में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए खुद को एक योग्य दावेदार बताया है।

    ठारवानी का कहना है कि सिंधी समाज का कांग्रेस के प्रति वर्षों से जुड़ाव रहा है और पार्टी को इस वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे संसद में पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और प्रदेशभर में संगठन को और मजबूत करेंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है जहां दलित ब्राह्मण और सिंधी समाज तीनों अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होगी ताकि किसी भी वर्ग की नाराजगी सामने न आए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी अहम सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस वर्ग को प्राथमिकता देता है और किस तरह इस आंतरिक दबाव को संतुलित करता है।

    फिलहाल यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस पर फैसला पार्टी की रणनीति और भविष्य की राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

  • दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द

    दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द


    भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट ने पार्टी के अंदर नई खींचतान को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं रहा बल्कि जातीय समीकरणों के इर्दगिर्द घूमता नजर आ रहा है जहां अलग अलग वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।

    शुरुआत में अनुसूचित जाति वर्ग की ओर से मांग उठी थी कि इस बार राज्यसभा में दलित नेता को मौका दिया जाए। इस मांग को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रमुखता से उठाया और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भी समर्थन मिला। इसके बाद विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने भी सक्रियता दिखाई और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखी।

    हाल ही में विंध्य क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से मुलाकात कर यह तर्क दिया कि क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का प्रभाव काफी अधिक है और उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर जातीय संतुलन का मुद्दा अब और गहराता जा रहा है।

    इसी बीच अब सिंधी समाज की एंट्री ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से प्रतिनिधि भेजने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को संबोधित पत्र में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए खुद को एक योग्य दावेदार बताया है।

    ठारवानी का कहना है कि सिंधी समाज का कांग्रेस के प्रति वर्षों से जुड़ाव रहा है और पार्टी को इस वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे संसद में पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और प्रदेशभर में संगठन को और मजबूत करेंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है जहां दलित ब्राह्मण और सिंधी समाज तीनों अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होगी ताकि किसी भी वर्ग की नाराजगी सामने न आए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी अहम सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस वर्ग को प्राथमिकता देता है और किस तरह इस आंतरिक दबाव को संतुलित करता है।

    फिलहाल यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस पर फैसला पार्टी की रणनीति और भविष्य की राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।