Category: Madhya Pradesh

  • जेसीबी कार्रवाई से बड़ा हादसा, लाखों का सामान मलबे में दबा

    जेसीबी कार्रवाई से बड़ा हादसा, लाखों का सामान मलबे में दबा


    उज्जैन । उज्जैन के योगीपुरा क्षेत्र में रामघाट जाने वाली गली में चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान शनिवार देर शाम एक बड़ा हादसा हो गया। जेसीबी से की जा रही कार्रवाई के बीच अचानक एक मकान भरभराकर गिर गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और पूरा परिवार बेघर हो गया।

    गिरा हुआ मकान राजेंद्र राव सावदेकर का बताया जा रहा है, जो मकान क्रमांक-12 में रहते थे। मकान गिरने से घर में रखा टीवी, फ्रिज, कूलर, पंखे, गीजर, पानी की टंकी, किराना सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं मलबे में दबकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मकान ढहते और मलबा सड़क पर फैलते हुए दिखाई दे रहा है।

    हादसे के समय परिवार घर पर मौजूद नहीं था, क्योंकि खतरे को देखते हुए वे पहले ही रिश्तेदार के घर चले गए थे। हालांकि जब सुबह उन्हें घटना की जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और अपने टूटे हुए घर को देखकर सदमे में आ गए।

    पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रशासन की ओर से न तो स्पष्ट सूचना दी गई और न ही सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। उनका कहना है कि पहले चौड़ीकरण 7 फीट बताया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 10 फीट कर दिया गया और इसी दौरान बिना किसी चेतावनी के मकान तोड़ दिया गया।

    स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद डर का माहौल है। कई रहवासियों ने अपने घर खाली कर दिए हैं, क्योंकि आसपास के मकानों में दरारें और धंसने की स्थिति देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में करीब 15 परिवार इस चौड़ीकरण कार्रवाई से प्रभावित हो रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगभग 25 लाख रुपए के नुकसान का दावा करते हुए मुआवजे की मांग की है। वहीं पीड़ित की मां ने रोते हुए कहा कि उनका सब कुछ खत्म हो गया और अब वे सड़क पर आ गए हैं। परिवार ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय और उचित मुआवजा दिलाने की अपील की है।

    दूसरी ओर भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा। साथ ही आसपास के मकानों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा दीवार बनाने का काम भी शुरू किया जा रहा है।

  • बिना NOC चल रहा था प्लांट? प्रदूषण और फायर सेफ्टी पर उठे सवाल

    बिना NOC चल रहा था प्लांट? प्रदूषण और फायर सेफ्टी पर उठे सवाल


    जबलपुर जबलपुर के गोसलपुर क्षेत्र में स्थित इको फ्यूल बायोमास प्लांट में शुक्रवार शाम लगी भीषण आग को 48 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो नुकसान का अंतिम पंचनामा तैयार हुआ है और न ही किसी की स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो सकी है। यह हादसा अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट के संचालन के लिए आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फायर सेफ्टी एनओसी तक मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद प्लांट लंबे समय से संचालित हो रहा था, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी का बड़ा मामला उजागर हुआ है।

    घटना उस समय हुई जब गेहूं की नरवाई (फसल अवशेष) के बड़े-बड़े बंडल खुले मैदान में रखे थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। राहत की बात यह रही कि आग पास स्थित इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप और बीपीसीएल के गैस गोदाम तक नहीं पहुंची, वरना स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

    प्रशासन की तत्परता के बावजूद घटना के 24 घंटे बाद तक नरवाई के ढेरों में धुआं और सुलगन जारी रही। दमकल दल लगातार कूलिंग में जुटे रहे, जबकि अधिकारी मौके पर निरीक्षण करते रहे।

    जानकारी के अनुसार, प्लांट का संचालन ग्राम पंचायत से सामान्य एनओसी लेकर शुरू किया गया था, जबकि बड़े औद्योगिक संचालन के लिए जरूरी अनुमति प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि पहले भी यहां आग लगने की छोटी घटनाएं हो चुकी थीं, लेकिन सुरक्षा उपायों में सुधार नहीं किया गया।

    करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बने इस प्लांट के लिए बैंक से ऋण भी लिया गया था और शासन से सब्सिडी मिलने की बात भी सामने आई है। ऐसे में बिना मानक सुरक्षा व्यवस्था के इतने संवेदनशील प्लांट का संचालन अब कई सवाल खड़े कर रहा है।

    सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतने बड़े औद्योगिक यूनिट के पास स्थित पेट्रोल पंप और गैस गोदाम जैसे हाई-रिस्क क्षेत्र में भी किसी भी स्तर पर आपत्ति दर्ज नहीं की गई।

    फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है, लेकिन दो दिन बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर आग कैसे लगी और इसके लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन है।

  • लू का असर तेज, रतलाम में मोबाइल बंद होने तक पहुंचा तापमान

    लू का असर तेज, रतलाम में मोबाइल बंद होने तक पहुंचा तापमान


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राज्य के 15 से ज्यादा शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है। शनिवार को खंडवा और नौगांव में पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं।

    इंदौर और उज्जैन संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां दिन के समय लू जैसे हालात बन गए हैं। रतलाम में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर इतना ज्यादा रहा कि मोबाइल फोन तक बंद हो गए। वहीं, राजधानी भोपाल में गर्मी के कारण बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा और आम जनजीवन प्रभावित हुआ।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है। रतलाम, खरगोन और खंडवा में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 44 डिग्री से ऊपर जा सकता है।

    इसके अलावा इंदौर, उज्जैन, धार, बड़वानी, झाबुआ, गुना, विदिशा, सागर और अन्य कई जिलों में भी तेज गर्मी और लू का असर देखने को मिलेगा। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरों में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहेगा।

    मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

  • जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी

    जबलपुर में बाराती बस पर 51 हजार का चालान, बिना परमिट दौड़ रही थी गाड़ी


    जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बाराती बस पर ₹51,500 का जुर्माना लगाया और उसे जब्त कर लिया। यह कार्रवाई आयुक्त उमेश जोगा के निर्देश पर उड़नदस्ता टीम द्वारा की गई।

    बिना परमिट चल रही थी बाराती बस
    जांच के दौरान सामने आया कि मंडला से जबलपुर जा रही राधिका ट्रैवल्स की बस (MP 13 P 1949) बिना वैध दस्तावेजों के संचालित हो रही थी। बस के पास-
    वैध परमिट नहीं था
    बीमा (Insurance) नहीं था
    प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) भी नहीं था
    इस गंभीर लापरवाही के बाद कार्रवाई की गई।

    बरगी के पास रोकी गई बस
    उड़नदस्ता प्रभारी के अनुसार बस को बरगी क्षेत्र के पास रोका गया। जब चालक से दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद मौके पर ही बस को जब्त कर लिया गया।

    बस जब्त, यात्रियों को सुरक्षित भेजा गया
    कार्रवाई के बाद बस को आरटीओ परिसर में खड़ा कराया गया। साथ ही बस में सवार यात्रियों को किसी अन्य वाहन से उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

    हादसे के बाद बढ़ी सख्ती
    हाल ही में मध्य प्रदेश में इंदौर से शिवपुरी जा रही एक बस में आग लगने की दर्दनाक घटना हुई थी, जिसमें एक 4 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिवहन विभाग ने राज्यभर में बसों की जांच तेज कर दी है।

    कई जिलों में चल रहा जांच अभियान
    परिवहन मंत्री और विभागीय निर्देशों के बाद जबलपुर, सिवनी और मंडला में बसों की सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बिना फिटनेस और दस्तावेजों के चल रहे वाहनों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
     
    प्रशासन की चेतावनी
    परिवहन विभाग ने सभी वाहन संचालकों को चेतावनी दी है कि वे अपने सभी दस्तावेज—परमिट, बीमा और PUC—अद्यतन रखें। नियमों का उल्लंघन करने पर भविष्य में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    जबलपुर में हुई यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त हो गया है। बिना वैध दस्तावेजों के चलने वाले वाहनों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

  • ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा

    ग्वालियर में सहायक कुल सचिव परीक्षा आज, 1277 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) द्वारा सहायक कुल सचिव परीक्षा-2025 का आयोजन आज रविवार को ग्वालियर में किया जा रहा है। इस परीक्षा में शहर के तीन केंद्रों पर कुल 1277 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा एक ही सत्र में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सख्त नियम लागू
    परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए इस बार बेहद सख्त नियम लागू किए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए कई वस्तुओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है-
    जूते और मोजे पहनकर प्रवेश नहीं मिलेगा
    मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर प्रतिबंध
    बेल्ट, क्लचर, बक्कल और हाथ के बैंड भी वर्जित
    केवल पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति
    उम्मीदवारों को केवल चप्पल या सैंडल पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा है।

    त्रिस्तरीय जांच और CCTV निगरानी
    परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अभ्यर्थियों की त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई है।
    पहले चरण में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन
    सभी केंद्रों पर CCTV कैमरों से निगरानी
    कलेक्टर कार्यालय में डिजिटल कंट्रोल रूम की स्थापना
    यह कंट्रोल रूम सुबह 8 बजे से परीक्षा समाप्ति तक सक्रिय रहेगा।

    शिकायत के लिए कंट्रोल रूम सक्रिय
    परीक्षा से संबंधित किसी भी समस्या या शिकायत के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है।
    दूरभाष: 0751-2446214
    मोबाइल: 9425135143
    निगरानी की जिम्मेदारी अधीक्षक आर.आई. भगत के निर्देशन में की जा रही है।

    ग्वालियर में आयोजित यह परीक्षा कड़े सुरक्षा इंतजामों और डिजिटल निगरानी के बीच संपन्न हो रही है। सख्त नियमों का उद्देश्य केवल एक ही है-निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करना।

  • बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक

    बिना OTP और कॉल के व्यापारी से बड़ी ठगी, सिम क्लोनिंग का शक


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।

    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।

    कहां-कहां किया जा चुका है इस्तेमाल?
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है। इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग: बी-1 कोच जलकर खाक, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

    राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग: बी-1 कोच जलकर खाक, यात्रियों में मची अफरा-तफरी

    मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में रविवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया जब राजधानी एक्सप्रेस के एक कोच में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना उस समय हुई जब ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग पर तेज गति से आगे बढ़ रही थी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और बी-1 कोच को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती कुछ ही मिनटों में कोच से धुआं और लपटें उठने लगीं, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।

    जानकारी के अनुसार ट्रेन मध्यप्रदेश के रतलाम मंडल के अंतर्गत आलोट और विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच से गुजर रही थी, जब अचानक बी-1 कोच में आग लग गई। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आया और ट्रेन को नियंत्रित तरीके से रोका गया। आग फैलने से पहले प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया गया, जिससे एक बड़े हादसे को टालने में सफलता मिली।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार कोच में लगभग 68 यात्री सवार थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर अन्य डिब्बों या सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। यात्रियों को निकालने के बाद आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए गए और कुछ ही समय में स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया, हालांकि तब तक कोच लगभग पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुका था। मौके पर राहत और बचाव टीमों को तुरंत भेजा गया और आसपास के क्षेत्रों से अतिरिक्त स्टाफ को भी बुलाया गया ताकि हालात को जल्द सामान्य किया जा सके।

    घटना के बाद दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर कुछ समय के लिए ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे कई ट्रेनों को रोकना पड़ा या उनके मार्ग में बदलाव किया गया। रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी टीमें मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच में जुट गई हैं। प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना है कि आखिर इस अचानक लगी आग के पीछे वास्तविक कारण क्या था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।

    इस घटना ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि राहत की बात यह है कि समय पर की गई कार्रवाई से सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई। रेलवे प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके और इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद

    इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद


    इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।
    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है।

    इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • ढाई साल की उपलब्धियों पर मंत्रियों की समीक्षा, आज होगा बड़ा रिव्यू मीटिंग

    ढाई साल की उपलब्धियों पर मंत्रियों की समीक्षा, आज होगा बड़ा रिव्यू मीटिंग


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की मोहन सरकार जल्द ही अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे करने जा रही है। 13 जून को सरकार के 2.5 साल पूरे होने से पहले ही आज भोपाल में मंत्रियों की बड़ी समीक्षा बैठक होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल सभी मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगे। यह बैठक मुख्यमंत्री निवास के समत्व कार्यालय में पूरे दिन चलेगी।

    टारगेट बनाम अचीवमेंट का होगा पूरा हिसाब
    इस बैठक में मंत्रियों से दिसंबर 2023 से अब तक के कामकाज का पूरा लेखा-जोखा लिया जाएगा। साथ ही अगले ढाई साल के टारगेट भी पूछे जाएंगे।
    हर मंत्री को यह बताना होगा कि-
    कितने वादे पूरे हुए
    कितने काम प्रगति पर हैं
    कौन से लक्ष्य अभी अधूरे हैं

    समितियों और जिलों के काम की होगी समीक्षा
    मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में बनी विभिन्न समितियों की रिपोर्ट ली जाएगी, जिनमें शामिल हैं—
    दिशा समिति
    जनभागीदारी समिति
    जिला स्तरीय समन्वय समिति
    मॉनिटरिंग कमेटी
    इन समितियों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होगी।

    चुनावी तैयारियों पर भी होगी चर्चा
    बैठक में आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर भी चर्चा होगी। मंत्रियों से पूछा जाएगा—
    मजबूत और कमजोर सीटों की स्थिति
    बूथ स्तर की तैयारी
    प्रत्याशी चयन की रणनीति
    विपक्ष की गतिविधियों का आकलन

    विभागीय काम और संगठन समन्वय पर फोकस
    मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों, चुनौतियों और नई पहलों पर भी जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा—
    विभागीय योजनाओं की प्रगति
    निगम-मंडलों के साथ समन्वय
    अफसरों के कामकाज पर फीडबैक
    संगठन के साथ तालमेल
    इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

    राज्यमंत्रियों के कार्य विभाजन पर भी नजर
    बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्रियों के बीच काम का बंटवारा कितना स्पष्ट है वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्यमंत्रियों को सीमित प्रशासनिक अधिकार मिले हुए हैं, ऐसे में कार्य विभाजन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

    जिलों के दौरे और योजनाओं की मॉनिटरिंग
    हर मंत्री को यह भी बताना होगा कि-
    उन्होंने कितने जिलों का दौरा किया
    कितनी समीक्षा बैठकें लीं
    कौन से विकास कार्य शुरू या पूरे हुए
    साथ ही मुख्यमंत्री की प्रमुख योजनाओं में उनकी भागीदारी भी परखी जाएगी।

    यह बैठक सिर्फ औपचारिक समीक्षा नहीं बल्कि आने वाले चुनावी और प्रशासनिक रोडमैप का अहम हिस्सा मानी जा रही है। सरकार अब हर मंत्री के प्रदर्शन को टारगेट और रिजल्ट के आधार पर परखने की तैयारी में है।

  • ईंधन महंगाई का असर: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG के दाम भी बढ़े

    ईंधन महंगाई का असर: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG के दाम भी बढ़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं। शनिवार रात को थिंक एजेंसी द्वारा जारी नई दरों के मुताबिक CNG की कीमतों में ₹3 प्रति किलो तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद भोपाल में CNG का नया रेट ₹93.75 प्रति किलो तक पहुंच गया है। नई कीमतें आज से लागू हो चुकी हैं।

    भोपाल, सीहोर, राजगढ़ और विदिशा जैसे जिलों में CNG की सप्लाई मुख्य रूप से THINK Gas द्वारा की जाती है। कंपनी की ओर से पिछले दो महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे कुल मिलाकर CNG करीब ₹5 प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है।

    लगातार बढ़ते ईंधन दामों से बढ़ी चिंता
    सीएनजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पहले ही पेट्रोल-डीजल और LPG के दामों में उछाल देखा जा चुका है। हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3 से ₹3.50 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई थी। इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडर और दूध की कीमतों में भी पिछले महीनों में इजाफा हुआ है। भोपाल में पेट्रोल अब ₹109.71 प्रति लीटर और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। वहीं CNG की बढ़ी हुई कीमतों ने ऑटो, टैक्सी और CNG वाहनों की चलने लागत बढ़ा दी है।

    CNG वाहनों की बढ़ती संख्या पर असर
    पिछले तीन वर्षों में भोपाल में CNG वाहनों की बिक्री में लगभग 50% तक की बढ़ोतरी हुई थी। रोजाना 10 से 15 नए CNG वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह कम रनिंग कॉस्ट और पेट्रोल-डीजल की तुलना में सस्ता ईंधन था। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने अब इस फायदे को कम कर दिया है। ऑटो चालकों और छोटे ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, जिससे किराए बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    लगातार बढ़ती महंगाई का सिलसिला
    मार्च से मई 2026 के बीच मध्य प्रदेश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले LPG सिलेंडर महंगा हुआ, फिर दूध, उसके बाद पेट्रोल-डीजल और अब CNG की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम जनता की रसोई और यात्रा दोनों का बजट बिगाड़ दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट, सब्जियों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर भी असर डाल सकती है। CNG की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए एक और झटका साबित हो रही हैं। पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए यह बढ़ोतरी बजट और अधिक बिगाड़ सकती है।