Category: Madhya Pradesh

  • TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग

    TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर बड़ा फैसला जल्द सामने आ सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग नए सिरे से आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगा और किन्हें छूट या सरलीकरण मिलेगा। इस संबंध में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

    नए आदेश में तय होगी अनिवार्यता और छूट
    आयुक्त ने कहा कि प्रस्तावित आदेश में यह बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा कि किन श्रेणी के शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी होगा। साथ ही नियमों के तहत कुछ शिक्षकों को राहत देने के प्रावधानों को भी परिभाषित किया जाएगा, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

    सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारी
    मामले को लेकर विभाग शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहा है। राय मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया था।

    बैठक में कई अहम प्रशासनिक निर्णय
    सोमवार को आयोजित बैठक में शिक्षक संगठनों और अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें लंबित वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने पर सहमति बनी।

    प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम की तैयारी
    यदि न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो TET में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।

    DPI स्तर पर परामर्श बैठक का निर्णय
    लंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालना है।

    शिक्षक संगठनों में असंतोष
    हालांकि इस बैठक को लेकर कुछ शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि सभी प्रभावित संगठनों को शामिल नहीं किया गया, जिससे लिए गए निर्णयों की वैधता पर सवाल उठते हैं। कुछ संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ ही चर्चा को मान्यता देंगे।

    क्या है TET परीक्षा?
    TET यानी Teacher Eligibility Test एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की योग्यता निर्धारित करती है और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत इसकी वैधानिकता तय की गई है।

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
    1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें TET पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।

  • बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू

    बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू


    नई दिल्ली। ग्वालियर नगर निगम में सफाई व्यवस्था से जुड़ी बड़ी अनियमितता सामने आई है। बिना उपस्थिति दर्ज किए एक कर्मचारी को वेतन भुगतान किए जाने के मामले में निगमायुक्त संघप्रिय ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस, स्थानांतरण और जांच के आदेश जारी किए हैं।

    लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी को मिलता रहा वेतन
    मामला वार्ड क्रमांक-65 का है, जहां पदस्थ सफाई संरक्षक शीला लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थीं। इसके बावजूद उनकी हाजिरी ऑफलाइन दर्ज कर वेतन जारी किया जाता रहा। इस खुलासे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।

    पोर्टल पर नाम नहीं, फिर भी दर्ज होती रही उपस्थिति
    जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मचारी का नगर निगम के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन तक नहीं था, फिर भी नियमित रूप से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाती रही। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

    दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
    निगमायुक्त ने वार्ड हेल्थ ऑफिसर रवि चिंडालिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर 20 अप्रैल शाम 6 बजे तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। वहीं जोन क्रमांक-25 के प्रभारी जोनल हेल्थ ऑफिसर अर्जुन दास को भी नोटिस थमाया गया है। उन पर फर्जी हाजिरी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने और भ्रामक शिकायत करने के आरोप हैं।

    तत्काल स्थानांतरण, नई जिम्मेदारी सौंपी गई
    कार्रवाई के तहत रवि चिंडालिया का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्हें वार्ड 39 में उनके मूल पद विनियमित सफाई कर्मी के रूप में पदस्थ किया गया है। वहीं वार्ड 65 का अतिरिक्त प्रभार अस्थायी रूप से दिनेश गौहर को सौंपा गया है।

    तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
    पूरे मामले की प्राथमिक जांच स्वच्छता अधिकारी दीपेन्द्र सेंगर को सौंपी गई है। उन्हें तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जा सके।

    भ्रष्टाचार पर सख्त रुख, प्रशासन का संदेश
    नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

  • आस्था या खतरा नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध से बढ़ा प्रदूषण जलीय जीवन पर संकट

    आस्था या खतरा नर्मदा में 11 हजार लीटर दूध से बढ़ा प्रदूषण जलीय जीवन पर संकट


    भोपाल । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध प्रवाहित करने की घटना अब गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गई है। धार्मिक आस्था के तहत किए गए इस आयोजन के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसका असर केवल तत्काल नहीं बल्कि लंबे समय तक देखने को मिलेगा। विशेष रूप से इसका दूसरा चरण जिसे सेकेंड फेज कहा जा रहा है वह और भी खतरनाक साबित हो सकता है।

    पर्यावरण विशेषज्ञ सुभाष सी पांडे के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में दूध नदी में जाने से पानी का संतुलन तेजी से बिगड़ जाता है। शुरुआत में सबसे बड़ा असर घुलित ऑक्सीजन के स्तर पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में पानी में ऑक्सीजन का स्तर 6 से 8 mg प्रति लीटर होता है लेकिन दूध के मिश्रण के बाद यह घटकर 1 से 3 mg प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए जीवन संकट खड़ा हो जाता है और उनकी मौत शुरू हो सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी मात्रा में दूध को वैज्ञानिक दृष्टि से डेयरी वेस्ट माना जाता है जो सामान्य सीवेज से भी अधिक खतरनाक होता है। दूध में मौजूद कार्बनिक तत्व पानी में घुलकर तेजी से बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं जिससे प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड यानी बीओडी का स्तर सामान्य 3 mg प्रति लीटर से बढ़कर 1000 से 1300 mg प्रति लीटर तक पहुंच सकता है जो बेहद खतरनाक स्थिति है।

    इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू सेकेंड फेज में सामने आता है। पहले चरण में जहां ऑक्सीजन की कमी से जलीय जीव मरते हैं वहीं दूसरे चरण में उनके सड़ने से पानी में बैक्टीरिया और फंगस की मात्रा तेजी से बढ़ती है। यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है जिसमें पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जाती है और प्रदूषण लंबे समय तक बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर महीनों तक देखा जा सकता है।

    इसका प्रभाव केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहता बल्कि जहां दूध प्रवाहित किया गया वहां से कई किलोमीटर डाउनस्ट्रीम तक पानी पीने योग्य नहीं रहता। इससे आसपास के गांवों और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। नर्मदा का पानी सामान्यतः क्षारीय प्रकृति का होता है लेकिन दूध के अम्लीय गुण इसके संतुलन को बिगाड़ सकते हैं जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि नदियों के प्रदूषण का मुख्य कारण मानव गतिविधियां ही हैं चाहे वे धार्मिक हों या सामाजिक। पूजा सामग्री फल फूल और अन्य वस्तुओं का विसर्जन भी नदी की सेहत को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। कानूनी रूप से भी इस तरह की गतिविधियों पर रोक है। जल निवारण एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974, राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 और जैविक विविधता अधिनियम 2002 के तहत जल संसाधनों को व्यवस्थित करना दंडनीय है लेकिन जमीनी स्तर पर सख्ती की कमी के कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल कानून से नहीं बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी से संभव है। आस्था और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है ताकि धार्मिक परंपराएं भी निभें और प्रकृति को नुकसान भी न पहुंचे। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में नर्मदा जैसी महत्वपूर्ण नदी की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

  • डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा

    डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा


    नई दिल्ली। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक अहम मानवीय निर्णय लिया गया। इस मौके पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। शासन द्वारा यह निर्णय उनके अच्छे आचरण और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए लिया गया।

    14 साल से अधिक सजा काट चुके थे सभी बंदी
    रिहा किए गए सभी बंदी हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके थे। वे एक ही प्रकरण से जुड़े थे और लंबे समय से उनके व्यवहार और सुधार को लगातार परखा जा रहा था।

    शासन की मंजूरी के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
    जेल प्रशासन ने इन बंदियों के नाम और आचरण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल अधीक्षक विदित सरवईया के अनुसार, सभी बंदियों का आचरण संतोषजनक रहा, जिसके आधार पर उनकी शेष सजा माफ की गई।

    परिजनों से मिलकर भावुक हुए बंदी
    जेल से बाहर आते ही बंदियों ने अपने परिवारजनों से मुलाकात की। लंबे समय बाद मिलन के इस भावुक क्षण में कई बंदी और उनके परिजन भावुक नजर आए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जताई।

    सम्मान के साथ दी गई विदाई
    रिहाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अब अन्य अवसरों पर भी मिल रही राहत
    पहले केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही इस तरह की सजा माफी दी जाती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सुधार की दिशा में बंदियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    रिहा हुए बंदियों के नाम
    रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।

  • परंपरा और राजनीति का संगम, बैतूल में बैलगाड़ी पर पहुंचे ,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

    परंपरा और राजनीति का संगम, बैतूल में बैलगाड़ी पर पहुंचे ,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में राजनीतिक गतिविधियों के बीच एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने ‘गांव बस्ती चलो अभियान’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उनका अंदाज पारंपरिक और सादगी से भरा रहा जिसने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय भी बन गया।

    घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम चिरापाटला में जब वे पहुंचे तो उन्होंने आधुनिक वाहनों की बजाय बैलगाड़ी का सहारा लिया। बैलगाड़ी पर सवार होकर गांव में प्रवेश करते ही ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन गया। लोगों ने इस पहल को जमीन से जुड़े नेता की पहचान के रूप में देखा और उनका स्वागत भी गर्मजोशी से किया।

    यह दृश्य केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं था बल्कि इसके जरिए ग्रामीण जीवन से जुड़ाव और परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश देने की कोशिश भी साफ नजर आई। अक्सर राजनीतिक दौरों में दिखने वाली औपचारिकता से हटकर यह अंदाज लोगों को ज्यादा करीब और वास्तविक लगा। ग्रामीणों ने इसे अपनी संस्कृति और जीवनशैली के प्रति सम्मान के रूप में लिया जिससे जनसंपर्क अभियान को और मजबूती मिली।

    इस दौरे का उद्देश्य केवल लोगों से मिलना जुलना ही नहीं बल्कि उनकी समस्याओं को समझना और सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना भी था। अभियान के तहत उन्होंने गांव के लोगों से सीधा संवाद किया उनकी समस्याएं सुनी और समाधान के लिए भरोसा दिलाया।

    राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में इस तरह के प्रयास चुनावी रणनीति का भी हिस्सा होते हैं जहां नेता सीधे जनता के बीच जाकर विश्वास बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि आम लोगों के लिए यह पहल इसलिए खास बन जाती है क्योंकि इससे उन्हें यह महसूस होता है कि उनका प्रतिनिधि उनकी जिंदगी और समस्याओं को करीब से समझता है।

    गांव बस्ती चलो अभियान के माध्यम से पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में है और इस तरह के प्रतीकात्मक कदम उस रणनीति को और प्रभावी बना रहे हैं। बैलगाड़ी पर सवार होकर गांव पहुंचना एक ऐसा दृश्य रहा जिसने यह संदेश दिया कि राजनीति केवल मंच और भाषण तक सीमित नहीं है बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी भाषा और जीवनशैली को समझना भी उतना ही जरूरी है।

    बैतूल में इस दौरे ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर जुड़ाव बनाने के लिए सादगी और प्रतीकात्मकता दोनों ही अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले समय में इस अभियान का असर कितना व्यापक होता है यह देखना दिलचस्प होगा लेकिन फिलहाल यह पहल लोगों के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

  • श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर: घाट तक पहुंचने के लिए प्लान A और B तैयार

    श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर: घाट तक पहुंचने के लिए प्लान A और B तैयार


    उज्जैन  धार्मिक नगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखते हुए पार्किंग और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

    मेला अधिकारी और कलेक्टर ने किया स्थलीय निरीक्षण

    सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इंदौर-देवास मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए प्रस्तावित पार्किंग स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न स्थानों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए गए।

    संभागायुक्त का निर्देश: घाट तक आसान हो पहुंच

    निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्किंग स्थल से शिप्रा नदी घाट तक श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम और सुरक्षित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में श्रद्धालुओं को घाट तक पहुंचने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

    प्रमुख स्नान पर्वों के लिए वैकल्पिक योजना तैयार

    प्रशासन ने प्रमुख स्नान तिथियों के दौरान भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्लान A और प्लान B तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि यदि एक पार्किंग स्थल पर दबाव बढ़े, तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जा सके और यातायात बाधित न हो।

    कई गांवों में विकसित होंगे पार्किंग स्थल

    निरीक्षण के दौरान ग्राम गंगेडी, धरमबड़ला, सिकंदरी, दाऊदखेड़ी, हाटकेश्वर और गोठड़ा क्षेत्रों का दौरा किया गया। इन स्थानों पर बड़े स्तर पर पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिससे बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को व्यवस्थित रूप से रोका जा सके।

    कलेक्टर का निर्देश: जल्द बने विस्तृत कार्य योजना

    कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व में पार्किंग व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय बनाकर जल्द से जल्द विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी की जा सकें।

    बेहतर यातायात के लिए प्रशासन का फोकस

    उज्जैन विकास प्राधिकरण, एमपीआईडीसी और यातायात विभाग के अधिकारी भी इस निरीक्षण में शामिल रहे। सभी विभाग मिलकर इस महापर्व को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

  • उज्जैन में भक्ति का रंग: महाकाल के भस्म आरती में हुआ विशेष श्रृंगार दर्शन

    उज्जैन में भक्ति का रंग: महाकाल के भस्म आरती में हुआ विशेष श्रृंगार दर्शन


    उज्जैन धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का अद्भुत और दिव्य श्रृंगार किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजन-अर्चना प्रारंभ की।

    जलाभिषेक से पंचामृत तक, परंपराओं का पूर्ण निर्वाह

    पूजन की शुरुआत गर्भगृह में स्थापित देव प्रतिमाओं के पूजन से हुई, जिसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। ‘हरिओम’ मंत्रों के साथ जल अर्पित कर भगवान का ध्यान किया गया और कपूर आरती उतारकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया गया।

    भांग-चंदन और त्रिपुंड तिलक से राजा स्वरूप श्रृंगार

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन और त्रिपुंड तिलक अर्पित किया गया। इसके साथ ही आभूषणों से सुसज्जित कर उन्हें राजा स्वरूप में सजाया गया। जटाधारी स्वरूप में सजे भगवान महाकाल की छवि अत्यंत मनमोहक और दिव्य प्रतीत हो रही थी, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

    फूलों की सुगंध और भोग से महका मंदिर परिसर

    भगवान महाकाल को मोगरा और गुलाब के सुगंधित फूलों से सजाया गया। इसके साथ ही फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने।

    महा निर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण की परंपरा

    भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है।

    आस्था का अद्वितीय संगम, भक्तों की उमड़ी भीड़

    भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंगलवार को भी बड़ी संख्या में भक्तों ने इस दिव्य आरती में भाग लिया और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

  • बैतूल में जल संकट पर बड़ा एक्शन कलेक्टर ने बनाई 15 साल की मास्टर प्लान रणनीति

    बैतूल में जल संकट पर बड़ा एक्शन कलेक्टर ने बनाई 15 साल की मास्टर प्लान रणनीति

     
    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बढ़ते जल संकट को लेकर प्रशासन अब सक्रिय मोड में नजर आ रहा है। नवागत कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समस्या को केवल अस्थायी उपायों से नहीं बल्कि दीर्घकालीन रणनीति के जरिए हल किया जाएगा। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि जिले में पेयजल संकट अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है और इसे नजरअंदाज करना संभव नहीं है।

    कलेक्टर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है जिसका सीधा असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर पड़ा है। खासकर गर्मी के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं जब कई इलाकों में पानी की भारी कमी महसूस की जाती है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन 10 से 15 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर ठोस और व्यापक प्रोजेक्ट तैयार करने की दिशा में काम करेगा।

    उन्होंने कहा कि केवल टैंकर या अस्थायी जल आपूर्ति जैसे उपाय समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। इसके बजाय जल संरक्षण भूजल पुनर्भरण और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों को अपनाना बेहद जरूरी है। आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जाएगा जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करें बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल संसाधनों को सुरक्षित रखें।

    कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह संकेत प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जल संकट से निपटने के लिए जनभागीदारी को भी अहम बताया गया है। कलेक्टर का कहना है कि केवल सरकारी प्रयासों से समस्या का समाधान संभव नहीं है बल्कि आम नागरिकों को भी जल संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा। वर्षा जल संचयन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग जैसे उपायों को अपनाकर इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    इस पहल के तहत जिले में विभिन्न स्तरों पर सर्वे और अध्ययन भी किए जाएंगे ताकि जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके आधार पर ही योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

    बैतूल में जल संकट को लेकर उठाया गया यह कदम प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। यदि योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में जिले को जल संकट से बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल नागरिकों को उम्मीद है कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जमीनी स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव लेकर आएगी।

  • उज्जैन में महाकाल के दरबार में दिखे मिलिंद सोमन-नितीश राणा, नंदी हॉल में किया जाप

    उज्जैन में महाकाल के दरबार में दिखे मिलिंद सोमन-नितीश राणा, नंदी हॉल में किया जाप


    नई दिल्ली। धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती में फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन और भारतीय क्रिकेटर नितीश राणा ने अपनी-अपनी पत्नियों के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए। दोनों ने सुबह 4 बजे होने वाली इस विशेष आरती में भाग लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    रात 2 बजे पहुंचे, नंदी हॉल में साधना का माहौल
    दोनों सेलिब्रिटी देर रात करीब 2 बजे मंदिर पहुंचे। नितीश राणा अपनी पत्नी साँची मारवाह के साथ, जबकि मिलिंद सोमन अपनी पत्नी अंकिता कोंवर के साथ यहां आए। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे तक भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान वे ध्यान और जाप में लीन नजर आए, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।

    नंदी जी के कान में कही मनोकामना
    भस्म आरती के दौरान दोनों ने नंदी भगवान का पूजन किया और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की। आरती के पश्चात उन्होंने गर्भगृह की देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए और जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।

    मंदिर समिति ने किया सम्मान
    दर्शन के बाद मंदिर समिति की ओर से दोनों का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम भी किए गए थे, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे थे।

    “बाबा का बुलावा आया” – मिलिंद सोमन
    मिलिंद सोमन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लंबे समय से महाकाल के दर्शन करने की इच्छा रखते थे, लेकिन अब जाकर उन्हें यह अवसर मिला। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ। लगता है कि बाबा का बुलावा आया, तभी यहां आना संभव हो पाया।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी की भी यहां आने की इच्छा थी, जो अब पूरी हो गई।

    आस्था और भक्ति का अनूठा संगम
    महाकाल मंदिर में भस्म आरती का धार्मिक महत्व बेहद खास है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी इस आध्यात्मिक आयोजन को और भी खास बना देती है।

  • जबलपुर में सुमित्रा वाल्मीकि का बयान: 16 अप्रैल को पास होगा महिला आरक्षण बिल

    जबलपुर में सुमित्रा वाल्मीकि का बयान: 16 अप्रैल को पास होगा महिला आरक्षण बिल


    नई दिल्ली। जबलपुर के रानीताल स्थित भाजपा कार्यालय में भारतीय जनता पार्टी द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’ को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार के रुख और उसकी तैयारियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

    विपक्ष पर साधा निशाना, पुराने विरोध की दिलाई याद
    सांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग पहले महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहे थे, वही अब इसके लागू होने की तारीख पूछ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर दोहरे रवैये के साथ जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने इसे पूरी गंभीरता से आगे बढ़ाया है।

    16 अप्रैल को बिल पारित होने का दावा
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद वाल्मीकि ने दावा किया कि महिला आरक्षण बिल 16 अप्रैल को पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। इस कानून के लागू होने से देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।

    महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी पर जोर
    सांसद ने कहा कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में समान अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्माण में भी उनकी भूमिका अधिक प्रभावी होगी। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों में से एक बताया।

    बंगाल और विपक्ष पर भी टिप्पणी
    इस दौरान बंगाल चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर सुमित्रा वाल्मीकि ने कहा कि वहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के मुद्दों पर काम कर रही है और अत्याचारों के खिलाफ मजबूती से खड़ी है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी कई राज्यों में संघर्ष कर रही है और जनता अब भाजपा की नीतियों पर भरोसा जता रही है।

    राजनीतिक माहौल गरमाया
    महिला आरक्षण बिल को लेकर दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष के रुख और प्रतिक्रिया को लेकर सियासी बहस जारी है।