Category: Madhya Pradesh

  • सर्वाइकल कैंसर से जंग में एमपी नंबर वन एचपीवी वैक्सीनेशन में बनाया बड़ा रिकॉर्ड

    सर्वाइकल कैंसर से जंग में एमपी नंबर वन एचपीवी वैक्सीनेशन में बनाया बड़ा रिकॉर्ड


    मध्यप्रदेश । सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए चलाए जा रहे एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान में मध्यप्रदेश ने देशभर में एक मिसाल कायम कर दी है। किशोरियों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को शीर्ष स्थान पर स्थापित किया है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 7 लाख 51 हजार से अधिक किशोरियों को टीकाकरण के लिए चिन्हित किया गया था जिनमें से अब तक करीब 5 लाख बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इस तरह राज्य ने अपने लक्ष्य का लगभग 66 प्रतिशत हासिल कर लिया है जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बेहतर प्रदर्शन में गिना जा रहा है।

    अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश की यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जहां मिजोरम में लगभग 57 प्रतिशत गुजरात में 36 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 33 प्रतिशत टीकाकरण ही हो सका है वहीं पश्चिम बंगाल में अब तक यह अभियान शुरू भी नहीं हो पाया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 21 लाख किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन अब तक केवल 6 हजार के आसपास ही वैक्सीनेशन हो सका है। ऐसे में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन स्पष्ट रूप से आगे नजर आता है।

    राज्य के भीतर भी कई जिलों ने शानदार काम किया है। डिंडोरी और राजगढ़ जैसे जिलों ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वहीं खंडवा और बालाघाट जैसे जिले 95 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण के साथ लक्ष्य के बेहद करीब हैं। सागर और खरगोन में भी 90 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि दर्ज की गई है जो इस अभियान की गति और प्रभावशीलता को दर्शाती है। खास बात यह है कि सागर जिले में महज एक सप्ताह के भीतर दस हजार से अधिक टीकाकरण कर तेजी का परिचय दिया गया है।

    हालांकि इस सफलता के बीच कुछ चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई है। प्रदेश के कुछ जिले जैसे रीवा धार शिवपुरी और इंदौर टीकाकरण के मामले में काफी पीछे हैं जहां यह आंकड़ा 10 प्रतिशत से भी कम है। इन क्षेत्रों में जागरूकता की कमी सामाजिक हिचकिचाहट और अभियान की कमजोर मॉनिटरिंग को मुख्य कारण माना जा रहा है। यह अंतर इस बात की ओर संकेत करता है कि अभियान को समान रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है।

    सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हर साल लगभग सवा लाख महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं और करीब 75 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है। यह बीमारी धीरे धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण सामने नहीं आते जिससे समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार किशोरावस्था में एचपीवी वैक्सीनेशन इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका है।

    सरकार ने टीकाकरण को आसान बनाने के लिए डिजिटल और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध कराए हैं। अभिभावक यू विन प्लेटफॉर्म के जरिए स्लॉट बुक कर सकते हैं या फिर नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर भी टीकाकरण करवा सकते हैं। भोपाल सहित कई शहरों में यह सुविधा विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ आसानी से टीका लगवाया जा सकता है। मध्यप्रदेश का यह अभियान न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है बल्कि यह समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का भी संकेत है। यदि इसी तरह प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

  • मध्यप्रदेश में हीटवेव का प्रकोप, अगले दिनों और बढ़ेगा तापमान का असर

    मध्यप्रदेश में हीटवेव का प्रकोप, अगले दिनों और बढ़ेगा तापमान का असर


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में अब मानसून पूर्व की हल्की बारिश और बादलों का दौर लगभग खत्म हो चुका है और सूरज ने अपना तीखा तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे गर्मी का असर तेज महसूस किया जा रहा है।

    रतलाम सबसे गर्म, कई शहरों में पारा 40 के पार
    सोमवार को रतलाम प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.2°C दर्ज किया गया। वहीं धार, नर्मदापुरम और खरगोन में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। जबलपुर में 39.2°C, उज्जैन में 39°C और भोपाल-इंदौर में 38.8°C तापमान दर्ज किया गया, जिससे दिनभर तेज गर्मी का असर रहा।

    16 और 17 अप्रैल को लू का अलर्ट
    मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि 16 और 17 अप्रैल को प्रदेश के कई जिलों में भीषण लू चल सकती है। इनमें रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाओं का असर महसूस किया जाएगा।

    15 अप्रैल से कमजोर सिस्टम, राहत की उम्मीद कम
    हालांकि 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, लेकिन यह काफी कमजोर बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इससे गर्मी में कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे अधिक गर्म माना जाता है, जिसमें कई बार तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच जाता है।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में तापमान का ट्रेंड
    पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार भोपाल और इंदौर में तापमान 43 से 44 डिग्री तक पहुंच चुका है, जबकि जबलपुर में 44°C और ग्वालियर में 45°C तक पारा दर्ज हो चुका है। ग्वालियर को प्रदेश का सबसे गर्म शहर माना जाता है, जहां कई बार 45 डिग्री से अधिक तापमान दर्ज हुआ है।

    पुराने रिकॉर्ड बताते हैं भीषण गर्मी का इतिहास
    भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को 44.4°C तापमान दर्ज किया गया था। इंदौर में 25 अप्रैल 1958 को 44.6°C और जबलपुर में 28 अप्रैल 1970 को 45.4°C तापमान दर्ज हो चुका है। वहीं ग्वालियर में 1958 में 46.2°C तक तापमान पहुंच चुका है, जो अब तक के सबसे उच्च रिकॉर्ड में शामिल है।

    बारिश के बावजूद गर्मी का असर
    इस बार अप्रैल की शुरुआत में कई जिलों में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली थी, लेकिन इसके बावजूद गर्मी का असर अब तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम का यह उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में और ज्यादा गर्मी का संकेत है।

    सावधानी जरूरी, हीटवेव से बचाव की सलाह
    मौसम विभाग ने लोगों को दिन के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और लू से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

  • इलाज के नाम पर लापरवाही, सतना में ऑपरेशन के दौरान बड़ी चूक ,युवक की मौत से मचा हड़कंप

    इलाज के नाम पर लापरवाही, सतना में ऑपरेशन के दौरान बड़ी चूक ,युवक की मौत से मचा हड़कंप


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है जहां कथित तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा देती है। पन्ना जिले के देवेंद्रनगर निवासी रवि रजक को किडनी में पथरी की शिकायत के बाद इलाज के लिए सतना लाया गया था लेकिन जो इलाज जीवन बचाने के लिए होना था वही उसकी मौत का कारण बन गया।

    जानकारी के मुताबिक परिजन रवि को इलाज के लिए सतना के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने एक किडनी में गंभीर समस्या बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। 4 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया जो करीब पांच घंटे तक चला। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही बरती और जिस किडनी का इलाज होना था उसके साथ साथ दूसरी स्वस्थ किडनी में भी कट लगा दिया गया।

    ऑपरेशन के बाद ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई। स्थिति को गंभीर होता देख अस्पताल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए उसे रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हालांकि परिजनों का कहना है कि यह रेफरल भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश थी क्योंकि उस समय तक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।

    रीवा पहुंचने के बाद जब डॉक्टरों ने जांच की तो मामला और भी चौंकाने वाला निकला। दूसरी किडनी पर गहरा कट पाया गया था जिसे कथित तौर पर धागे से बांध दिया गया था। इससे लगातार खून का रिसाव होता रहा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में दूसरी किडनी को भी निकालना पड़ा लेकिन तब तक संक्रमण और आंतरिक क्षति इतनी बढ़ चुकी थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

    लगातार बिगड़ती हालत के बीच आखिरकार युवक ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जैसे ही मौत की खबर परिजनों को मिली उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इसके बाद कोलगवां थाना क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शन हुआ और परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक चिकित्सकीय गलती नहीं बल्कि घोर लापरवाही का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है ताकि भविष्य में किसी और को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की उम्मीद जताई जा रही है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पीड़ित परिवार को न्याय कब और कैसे मिल पाता है।

  • क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: जबलपुर में अवैध स्क्रैपिंग गिरोह के 2 आरोपी गिरफ्तार

    क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: जबलपुर में अवैध स्क्रैपिंग गिरोह के 2 आरोपी गिरफ्तार

     
    जबलपुर  जबलपुर में क्राइम ब्रांच और अधारताल थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध वाहन स्क्रैपिंग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि खजरी खिरिया क्षेत्र में एक गैराज के अंदर बिना किसी वैध अनुमति के पुराने वाहनों को काटकर स्क्रैप तैयार किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत मौके पर दबिश दी और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

    छापेमारी में मिली आधी कटी कार और भारी मात्रा में स्क्रैप
    छापेमारी के दौरान पुलिस को गैराज के अंदर कई चौंकाने वाले सबूत मिले। एक इंडिका विस्टा कार (MP 20 CC 7962) आधी कटी हालत में पाई गई, जिसका इंजन बाहर निकाला हुआ था। इसके अलावा मौके पर वाहन (DL-1 LR 9698) में स्क्रैप लोड मिला और तीन वाहनों का कटिंग मटेरियल भी बरामद किया गया। पुलिस ने सभी सामान को जब्त कर लिया है।

    दो आरोपी गिरफ्तार, अवैध मुनाफे का खुलासा
    इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि अरबाज (26) पुराने वाहनों की व्यवस्था करता था, जबकि आरिफ (37) उन्हें गैराज में काटकर स्क्रैप तैयार करता था। दोनों मिलकर बिना किसी वैध दस्तावेज और आरटीओ अनुमति के अवैध रूप से यह कारोबार कर रहे थे और इससे मोटा मुनाफा कमा रहे थे।

    वाहन नंबरों से जुड़े दस्तावेज भी सामने आए
    पुलिस पूछताछ में गैराज संचालक शेख आरिफ ने बताया कि उसने कई वाहनों MP 20 CA 6862, MP 20 FA 6828 और MP 20 F 6243 को काटकर स्क्रैप तैयार किया था। हालांकि जब पुलिस ने उनसे वैध दस्तावेज और अनुमति पत्र मांगे तो वह कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे अवैध गतिविधियों की पुष्टि हो गई।

    कानूनी धाराओं में मामला दर्ज, जांच जारी
    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(1), 61(2) और मध्यप्रदेश मोटर कराधान अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। कार्रवाई थाना प्रभारी प्रवीण कुमरे और क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी शैलेष मिश्रा के नेतृत्व में की गई। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन जुड़े हुए हैं।

  • तेज रफ्तार का कहर: शिवपुरी में ट्रक खाई में पलटा, दूसरे वाहन सुरक्षित रहे

    तेज रफ्तार का कहर: शिवपुरी में ट्रक खाई में पलटा, दूसरे वाहन सुरक्षित रहे


    शिवपुरी शिवपुरी जिले के लुकवासा चौकी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर सोमवार दोपहर एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के औरंगाबाद से अलीगढ़ की ओर जा रहा एक मालवाहक ट्रक दैहरदा ब्रिज से उतरते समय अचानक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा।

    ब्रिज से उतरते ही बिगड़ा संतुलन, चालक ने खोया नियंत्रण
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक जैसे ही दैहरदा ब्रिज से नीचे उतरा, वह अचानक लहराने लगा और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद ट्रक सीधे सड़क किनारे खाई में जा गिरा। ट्रक में बजाज ऑटोमोबाइल्स का सामान लदा हुआ था, जिससे दुर्घटना के समय स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।

    नींद की झपकी या तकनीकी कारण, जांच जारी
    ट्रक चालक फरीद, जो मेवात का रहने वाला है, ने बताया कि हादसा अचानक हुआ और वह कारण स्पष्ट नहीं बता सका। शुरुआती आशंका यह जताई जा रही है कि चालक को नींद की झपकी आने के कारण वाहन पर नियंत्रण खो गया होगा, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

    बड़ा हादसा टला, अन्य वाहन सुरक्षित
    इस घटना का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि ट्रक किसी अन्य वाहन से नहीं टकराया। हादसे के समय सड़क पर मौजूद अन्य चारपहिया और दोपहिया वाहन इसकी चपेट में आने से बच गए, जिससे एक बड़ा और जानलेवा हादसा टल गया।

    प्रशासनिक जांच की संभावना
    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। सड़क सुरक्षा और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की संभावना जताई जा रही है।

  • नाबालिगों के साथ कथित अपराध का मामला: चाइल्ड होम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    नाबालिगों के साथ कथित अपराध का मामला: चाइल्ड होम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    शिवपुरी  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आया यह मामला पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। वर्ष 2016 में एक चाइल्ड केयर सेंटर से भागी दो नाबालिग लड़कियों ने पुलिस पूछताछ में जो खुलासे किए, उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। शुरुआत में गुमशुदगी के तौर पर दर्ज यह मामला तब सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया जब लड़कियों ने बालगृह के अंदर कथित शोषण की बात बताई।

    सुरक्षित आश्रय बना डर का ठिकाना
    शहर के बीच स्थित माधव बाल आश्रम को अनाथ और बेसहारा लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता था। यहां पुलिस द्वारा बरामद नाबालिग बच्चियों को भी रखा जाता था। 1997 से संचालित इस संस्था का संचालन समाजसेवी शैला अग्रवाल और उनके पिता केएन अग्रवाल द्वारा किया जाता था। बाहर से यह संस्था बेहद प्रतिष्ठित और विश्वसनीय मानी जाती थी, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की भी भागीदारी रहती थी।

    काउंसलिंग में सामने आए चौंकाने वाले संकेत
    चाइल्ड काउंसलर द्वारा की गई शुरुआती काउंसलिंग के दौरान ही माहौल पर संदेह गहराने लगा। एक पीड़िता ने इशारों में बताया कि बालगृह में सब कुछ ठीक नहीं है और विरोध करने पर मारपीट की जाती है। जैसे ही संचालक वहां पहुंचीं, बच्ची चुप हो गई, जिससे संदेह और मजबूत हो गया। इसके बाद मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।

    रात में नशीला खाना और कथित शोषण के आरोप
    काउंसलिंग के दौरान सामने आए आरोपों में कहा गया कि रात के समय भोजन में नशीला पदार्थ मिलाया जाता था, जिसके बाद कई लड़कियां बेहोशी की स्थिति में चली जाती थीं। पीड़िताओं ने यह भी बताया कि सुबह उठने पर उन्हें दर्द और असहजता महसूस होती थी। कई बार विरोध करने पर मारपीट और धमकियों का भी सामना करना पड़ता था।

    मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप
    लड़कियों के अनुसार, आश्रम में डर और दहशत का माहौल था। किसी भी विरोध पर उन्हें अपमानित किया जाता और धमकाया जाता था। यहां तक कि उनके कपड़े फटे हुए या अस्त-व्यस्त हालत में पाए जाने की बातें भी सामने आईं। पीड़िताओं ने बताया कि वे लंबे समय तक डर के कारण कुछ भी बोल नहीं पाईं।

    प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच के आदेश
    मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल आश्रम में जांच शुरू की गई और अन्य बच्चियों की भी काउंसलिंग कराई गई ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए उच्च स्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू की।

    कई गंभीर सवाल खड़े हुए
    इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या बालगृह में चल रहे इस कथित अपराध में अंदरूनी लोग शामिल थे या बाहरी लोग? कितनी बच्चियां इस शोषण का शिकार हुईं? और सबसे बड़ा सवाल, क्या वर्षों तक चल रही यह गतिविधि प्रशासन की नजर से छिपी रही?

  • ग्वालियर में पुलिस पर सवाल: रेप केस में आरोपी इंस्पेक्टर गायब, जांच में तेजी

    ग्वालियर में पुलिस पर सवाल: रेप केस में आरोपी इंस्पेक्टर गायब, जांच में तेजी


    ग्वालियर ग्वालियर में एक फैशन डिजाइनर द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के गंभीर आरोपों ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। 38 वर्षीय महिला की शिकायत पर झांसी रोड थाना पुलिस ने इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने शादी का झांसा देकर महिला के साथ लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए और बाद में सच सामने आने पर धमकियां भी दीं।

    FIR के बाद मोबाइल बंद कर हुआ फरार, पुलिस तलाश में जुटी
    मामला दर्ज होने के बाद आरोपी इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा अचानक मोबाइल बंद कर फरार हो गए। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश जारी है और कई संभावित ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    ट्रांसफर और रिलीविंग को लेकर भी उठे सवाल
    जानकारी के अनुसार, डीजीपी के आदेश पर सोमवार सुबह आरोपी इंस्पेक्टर का पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) तिघरा से पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) में ट्रांसफर किया गया था। इसके बाद उन्हें रिलीव भी कर दिया गया। हालांकि हैरानी की बात यह है कि पुलिस अभी भी उन्हें फरार मानकर तलाश कर रही है और यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने पीएचक्यू में जॉइन किया या नहीं।

    भितरवार और शिवपुरी में पुलिस की दबिश
    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा भितरवार के श्रीराम कॉलोनी के निवासी हैं, जबकि उनकी ससुराल शिवपुरी में है। इसी आधार पर झांसी रोड थाना पुलिस की दो टीमें भितरवार और शिवपुरी भेजी गईं, जहां दबिश दी गई, लेकिन आरोपी का कोई पता नहीं चल सका।

    पीड़िता का मेडिकल और कोर्ट में बयान दर्ज
    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पीड़िता का ग्वालियर के कमलाराजा अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया। इसके बाद धारा 164 के तहत कोर्ट में पीड़िता के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने FIR में दिए गए अपने आरोपों को दोहराया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    सोशल मीडिया से शुरू हुई पहचान और रिश्ते में बदल गई कहानी
    पुलिस जांच में सामने आया कि पीड़िता एक फैशन डिजाइनर हैं, जिनके पति का 2018 में निधन हो चुका है और उनका एक 9 साल का बच्चा है। वर्ष 2024 में फेसबुक के जरिए उनकी पहचान इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा से हुई थी। शुरुआत में बातचीत दोस्ती में बदली और फिर नजदीकियां बढ़ गईं।

    शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप
    पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपनी शादीशुदा स्थिति छुपाकर उससे शादी का वादा किया और 16 अगस्त 2024 को बुटीक में आकर जबरन संबंध बनाए। इसके बाद वह लगातार संपर्क में रहा और शादी का आश्वासन देता रहा। बाद में जब सच्चाई सामने आई तो उसने महिला को धमकाना शुरू कर दिया।

    9 महीने की गर्भवती पीड़िता, राजनीतिक दबाव के भी आरोप
    पीड़िता वर्तमान में 9 महीने की गर्भवती बताई जा रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वह एक भाजपा नेत्री की करीबी हैं, जिससे मामले को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ रही है।

    पुलिस जांच जारी, गिरफ्तारी पर सबकी नजर
    फिलहाल पुलिस आरोपी इंस्पेक्टर की तलाश में लगातार जुटी हुई है और कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। वहीं, मामला पुलिस विभाग के भीतर ही आरोपी होने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है।

  • शिवपुरी में रेस्क्यू ऑपरेशन: कुएं में गिरी गाय को ग्रामीणों और गो सेवा समिति ने बचाया

    शिवपुरी में रेस्क्यू ऑपरेशन: कुएं में गिरी गाय को ग्रामीणों और गो सेवा समिति ने बचाया


    शिवपुरी शिवपुरी जिले के बदरवास तहसील अंतर्गत श्रीपुर गांव में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान के खेत में स्थित कुएं में एक गाय गिर गई। यह घटना घनश्याम परिहार के खेत की बताई जा रही है। अंधेरे और रात के समय अज्ञात कारणों से गाय कुएं में जा गिरी, जिसकी जानकारी सुबह ग्रामीणों को लगी तो तुरंत मौके पर भीड़ जुट गई।

    ग्रामीणों ने दिखाई तत्परता, समिति को दी सूचना
    घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने बिना देर किए सनातनी गो सेवा समिति को जानकारी दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए समिति के सदस्य तुरंत सक्रिय हो गए और राहत एवं बचाव कार्य के लिए टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान गांव के कई लोग भी सहायता के लिए घटनास्थल पर एकत्र हो गए।

    रेस्क्यू ऑपरेशन में रस्सियों का सहारा, कुएं में उतरा स्वयंसेवक
    बचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गाय को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। इसके लिए रस्सियों की मदद से एक साहसी स्वयंसेवक को कुएं में उतारा गया। समिति के सदस्यों ऋषि भारती, निखिल बैरागी, अमित यादव, कान्हा परिहार और गोलू क्षारी सहित अन्य ग्रामीणों ने मिलकर समन्वय के साथ रेस्क्यू अभियान चलाया। कुएं में उतरे सदस्य ने बड़ी सावधानी से गाय को रस्सियों से बांधा, जिसके बाद सभी ने मिलकर उसे धीरे-धीरे ऊपर खींचा।

    सफलता के बाद राहत की सांस, गाय सुरक्षित बाहर निकली
    कड़ी मशक्कत और कुछ समय तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि जांच के दौरान गाय पूरी तरह स्वस्थ पाई गई और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। इस सफल बचाव अभियान के बाद ग्रामीणों और समिति सदस्यों ने राहत की सांस ली।

    ग्रामीण एकता और सेवा भावना की मिसाल
    यह घटना एक बार फिर इस बात का उदाहरण बनी कि आपात स्थिति में ग्रामीण एकजुट होकर बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी हल कर सकते हैं। गो सेवा समिति और स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता ने न केवल एक बेजुबान जानवर की जान बचाई, बल्कि मानवता और सेवा भाव की मिसाल भी पेश की।

  • इंदौर के पाटनीपुरा में पूजा सामग्री की दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का नुकसान

    इंदौर के पाटनीपुरा में पूजा सामग्री की दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का नुकसान


    इंदौर।
    इंदौर शहर के पाटनीपुरा इलाके में सोमवार देर रात पूजा सामग्री की एक दुकान में भीषण आग लग गई, जिससे लाखों रुपए का सामान जलकर खाक हो गया। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास की दुकानों को एहतियातन खाली करा लिया गया।

    फायर ब्रिगेड के अनुसार, देर रात करीब 1:40 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत दो दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। आग पर काबू पाने के लिए करीब 17 हजार लीटर से अधिक पानी का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने में सहयोग किया। आग ‘विनायक पूजा पाठ सामग्री’ नामक दुकान में लगी। घटना के समय दुकान का शटर बंद था, जिससे अंदर तेजी से धुआं भर गया और आग ने विकराल रूप ले लिया। दमकल कर्मियों ने शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया और काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया।

    जनहानि नहीं, लेकिन भारी नुकसान
    पुलिस के अनुसार इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। दुकान मालिक सुधीर अग्रवाल के भाई दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंच गए थे। घटना की सूचना मिलते ही एमआईजी थाना प्रभारी सीबी सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने आसपास की अन्य पूजा सामग्री दुकानों को तुरंत खाली कराकर बड़ा हादसा टाल दिया।

  • मप्र में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को होगा जारी

    मप्र में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को होगा जारी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस वर्ष आयोजित कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दोनों कक्षाओं के परिणाम एक साथ घोषित करेंगे।

    स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को बताया कि परिणाम के साथ दोनों कक्षाओं की मेरिट लिस्ट (टॉपर्स सूची) भी जारी की जाएगी। राज्य स्तर पर टॉप करने वाले मेधावी छात्रों को सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। छात्रों को अपना परिणाम देखने के लिए केवल अपने रोल नंबर की आवश्यकता होगी। बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने का कार्य पहले ही पूर्ण कर लिया है।

    उन्होंने बताया कि परिणाम जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से पूरा किया गया। हर स्तर पर जांच की गई, ताकि कोई गलती न रहे। रिजल्ट “फुलप्रूफ” रखा गया है, जिससे छात्रों को परेशानी न हो।


    10वीं में 9 लाख से ज्यादा छात्र शामिल

    प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। इनमें करीब 9 लाख 7 हजार छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं में बैठे। परीक्षा के लिए 3856 केंद्र बनाए गए थे। नकल रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद प्रदेश में करीब 100 नकल प्रकरण सामने आए। मुरैना में सबसे ज्यादा 41 और भोपाल में 20 मामले दर्ज हुए।

    डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर दबाव न डालें और मानसिक सहयोग दें। गांधी मेडिकल कॉलेज की डॉ. रुचि सोनी ने कहा कि हर बच्चा अच्छा रिजल्ट चाहता है, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। एक परीक्षा जीवन तय नहीं करती। बच्चों के तनाव में होने पर उनसे बात करें और उनका साथ दें।

    शिक्षा विभाग का उद्देश्य समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। तय समय पर परिणाम आने से छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलेगी।