Category: Madhya Pradesh

  • जबलपुर के श्रमोदय विद्यालय में सांप्रदायिक विवाद ने पकड़ा तूल प्राचार्य पर गंभीर आरोपों के बाद जांच के आदेश

    जबलपुर के श्रमोदय विद्यालय में सांप्रदायिक विवाद ने पकड़ा तूल प्राचार्य पर गंभीर आरोपों के बाद जांच के आदेश


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रमोदय विद्यालय जो शिक्षा का मंदिर माना जाता है वहां पर सांप्रदायिक भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों ने माहौल को पूरी तरह से तनावपूर्ण बना दिया है। स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अब्दुल शाहिर शेख के खिलाफ हिंदू शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला उजागर होने के बाद लोक शिक्षा विभाग के अपर संचालक ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।

    बताया जा रहा है कि यह विवाद उस समय और गहरा गया जब रामनवमी के अवसर पर छात्रावास में कुछ विद्यार्थियों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। आरोप है कि इस पर प्राचार्य और उनके सहयोगियों ने नाराजगी जताई और छात्रों के साथ मारपीट की गई। इस घटना ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच आक्रोश को जन्म दिया। वहीं अतिथि शिक्षकों ने भी प्राचार्य पर लगातार प्रताड़ना और अपमान करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल का माहौल डर और दबाव से भरा हुआ है जहां खुलकर अपनी बात रखना भी मुश्किल हो गया है।

    मामले को और गंभीर बनाता है स्टाफ रूम में लगाए गए कैमरों को लेकर उठे सवाल। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जाती है और उसका दुरुपयोग किया जाता है। इससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हुआ है। इसके अलावा स्कूल में प्रशासनिक अनियमितताओं की भी शिकायतें सामने आई हैं जो जांच का विषय बन चुकी हैं।

    इन सभी घटनाओं का असर छात्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लगभग 120 से अधिक विद्यार्थियों ने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया है और ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है। यह संख्या अपने आप में इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिससे उनका भरोसा टूट गया।

    मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान खींचा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम विभाग से जुड़े विशेष सहायक मंत्री द्वारा भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जांच के आदेश दिए गए। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।

    यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा के स्थान पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं हो सकता। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल छात्र अभिभावक और शिक्षक सभी निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

  • एमपी में तेज गर्मी का दौर शुरू, तापमान बढ़ने की संभावना, 16-17 अप्रैल से कई जिलों में लू का अलर्ट

    एमपी में तेज गर्मी का दौर शुरू, तापमान बढ़ने की संभावना, 16-17 अप्रैल से कई जिलों में लू का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में अब मौसम पूरी तरह बदल चुका है। बादल और बारिश का दौर खत्म होते ही तेज धूप ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे गर्मी तेजी से बढ़ रही है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 16 और 17 अप्रैल से राज्य के कई जिलों में भीषण लू चलने की संभावना है।

    सोमवार को रतलाम सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया, जहां तापमान 41.2°C तक पहुंच गया। इसके अलावा धार, नर्मदापुरम और खरगोन में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 अप्रैल को रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट जिलों में लू का असर देखने को मिलेगा। वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाएं लोगों को परेशान करेंगी।

    15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, लेकिन यह काफी कमजोर रहेगा। ऐसे में इससे गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। विभाग का कहना है कि अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे ज्यादा गर्म होता है। ग्वालियर में तापमान 45°C और भोपाल में 44°C तक पहुंचने का रिकॉर्ड भी रहा है।

    इससे पहले अप्रैल के शुरुआती दिनों में मौसम अलग ही रंग में नजर आया। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश में लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर चला। 15 से ज्यादा जिलों में ओले गिरे, जबकि करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा वर्षा हुई।

  • MP: मंडला में एक घर में 795 कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स बरामद… नसबंदी के नाम पर घोटाले की आशंका

    MP: मंडला में एक घर में 795 कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स बरामद… नसबंदी के नाम पर घोटाले की आशंका


    मंडला।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंडला (Mandla) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक घर से सैकड़ों की संख्या में कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (Dogs Reproductive Organs) बरामद हुए हैं. इस पूरे मामले ने नसबंदी (Sterilization) के नाम पर बड़े घोटाले की आशंका को जन्म दे दिया है. पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

    दरअसल, नगर पालिका मंडला (Municipality Mandla) ने कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर जारी किया गया था, जिसमें प्रति नसबंदी 679 रुपये तय किए गए थे. जबलपुर की एक प्राइवेट एनजीओ ‘मां अंबे एंटरप्राइजेज’ को यह ठेका दिया गया था, लेकिन आरोप है कि एजेंसी ने शहर में एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की।

    तय समय में काम शुरू न करने पर 2 अप्रैल को टेंडर निरस्त कर दिया गया था. इसी बीच एक एनिमल एक्टिविस्ट निशा सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि जिस कमरे में एनजीओ के लोग ठहरे थे, वहां संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं।

    शिकायत के बाद नगर पालिका, पुलिस, तहसीलदार और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की. छापे के दौरान दो कंटेनरों में फॉर्मलीन में डूबे 795 कुत्तों के अंग बरामद किए गए, जिनमें 518 नर और 277 मादा कुत्तों के अंग शामिल हैं।

    शिकायतकर्ता निशा सिंह का आरोप है कि इन अंगों को बाहर से लाकर स्टॉक में रखा गया था, ताकि इन्हें दिखाकर नसबंदी के नाम पर फर्जी बिल पास कराए जा सकें।


    पशु चिकित्सकों ने भी जताई हैरानी

    पशु चिकित्सक सुमित पटेल ने बताया कि नसबंदी प्रक्रिया में नर कुत्तों के टेस्टिकल्स और मादा कुत्तों के ओवरी व यूट्रस निकाले जाते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अंगों का मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है।


    नगर पालिका ने FIR के लिए दिया आवेदन

    इस मामले में मंडला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजेंद्र नाफड़े ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी के लिए टेंडर निकला था. जबलपुर की एजेंसी ने इसका टेंडर भरा था. उनका टेंडर सैंक्शन भी हुआ था, लेकिन एजेंसी लने कोई काम नहीं किया. उनको दो-तीन नोटिस भी दिए गए थे, तो काम नहीं करने से 2 अप्रैल को उनका टेंडर निरस्त कर दिया गया था. इसकी सूचना भी उन्हें दे दी गई थी।

    7 अप्रैल को पशु प्रेमी ने शिकायत दर्ज कराई कि प्राइवेट कंपनी ने जहां रूम लिया था, वहां पर कुत्तों के कुछ संदेहास्पद अंग है. इस संबंध में कलेक्टर की ओर से जांच के निर्देश दिए गए थे, जिस पर तहसीलदार के मार्गदर्शन में नगर पालिका, कोतवाली थाने और वेटरनरी की टीम ने उस कमरे का निरीक्षण किया तो वहां कुछ अंग पाए गए।

    गजेंद्र नाफड़े ने बताया कि यह अंग कहां से ले गए, इसका क्या उद्देश्य था, यह तो जांच का विषय है. इस संबंध में हमने थाना प्रभारी को एफआईआर के लिए आवेदन दिया है. वो उसकी जांच कर रहे हैं और वह अंग कहां से आए थे. यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

    सरकार अधिकारी के अनुसार, टेंडर के तहत एक नसबंदी के एवज में 679 रुपये की दर निर्धारित की गई थी. लेकिन एजेंसी ने कोई नसबंदी नहीं की. काम शुरू होने के पहले ही यह मामला सामने आ गया और इस मामले के सामने आने के पहले ही उनका ठेका निरस्त किया जा चुका था। नगर पालिका ने इस मामले में पुलिस को शिकायत सौंप दी है. मंडला एसपी का कहना है कि सभी पक्षों से पूछताछ और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये अंग कहां से आए और इसके पीछे किसका खेल है?

  • MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत

    MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चौकाने वाला मामला… युवाओं को लगी खून लेने की लत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया (Government Hospital Hamidia) के मनोरोग विभाग में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने डॉक्टरों को भी सोच में डाल दिया है. यहां हमीदिया अस्पताल में पिछले एक साल में अब तक ऐसे 5 युवा इलाज के लिए पहुंचे हैं, जिन्हें ब्लड कंपोनेंट्स (Blood Components) लेने की आदत पड़ गई है. अब तक आपने शराब, सिगरेट और ड्रग्स जैसे नशों के बारे में सुना होगा. लेकिन यह मामला एक नए और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करता है. जहां कुछ युवा खून के तत्वों को ही ताकत बढ़ाने का जरिया मान रहे हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार, इन सभी युवाओं की उम्र 18 से 25 साल के बीच है और इन मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है. जैसे ही परिवार को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने युवाओं की गतिविधियों पर रोक लगा दी. कई दिनों तक समझाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद युवक चिड़चिड़े और आक्रामक हो गए. हालत बिगड़ने पर परिवार उन्हें मनोरोग विशेषज्ञों के पास काउंसलिंग के लिए लेकर पहुंचे।

    डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच में तीन मुख्य वजहें सामने आई हैं जिज्ञासा, गलत जानकारी और अवैध माध्यमों की उपलब्धता. बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ वीडियो इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं, जहां यह दावा किया जाता है कि प्लाज्मा या अन्य ब्लड कंपोनेंट्स लेने से ताकत बढ़ती है. तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा आती है।

    हालांकि, विशेषज्ञ इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी चिकित्सकीय जरूरत के ब्लड कंपोनेंट्स लेना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. इससे इंफेक्शन, एलर्जी, सूजन और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है यानी जिस फायदे की उम्मीद में यह कदम उठाया जा रहा है. वह सिर्फ एक भ्रम है, जबकि नुकसान बेहद गंभीर हो सकते हैं।


    विशेषज्ञों की चेतावनी

    हमीदिया अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश अग्रवाल के अनुसार, युवा जिसे ताकत समझ रहे हैं, वह सिर्फ एक ‘हाइपोथेटिकल’ यानी काल्पनिक सुख है। इसके वास्तविक परिणाम बेहद खतरनाक हैं. इससे से गैंग्रीन का खतरा यानी गलत तरीके से इन्फ्यूजन लेने से अंग सड़ सकते हैं।

    इसके अलावा, डॉक्टर ने चेताया कि HIV और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा होता है. वहीं, बिना डॉक्टरी सलाह के ब्लड कंपोनेंट लेना तत्काल ‘एनाफिलेक्टिक शॉक’ दे सकता है. यही नहीं, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गंभीर सूजन और अंग भी फेल हो सकते हैं।

  • इंदौर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कलेक्टर के आदेश से तहसील स्तर पर अधिकारियों के तबादले, राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद तेज

    इंदौर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कलेक्टर के आदेश से तहसील स्तर पर अधिकारियों के तबादले, राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद तेज

    इंदौर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कई अधिकारियों को हटाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में गति लाना और राजस्व प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाना बताया जा रहा है।

    जिले की विभिन्न तहसीलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। हालांकि महू और सांवेर तहसीलों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। कई अधिकारियों को उनकी मौजूदा शाखाओं से हटाकर अन्य विभागों में स्थानांतरित किया गया है, जबकि कुछ को राजस्व न्यायालयों से हटाकर प्रोटोकॉल और अन्य प्रशासनिक शाखाओं में जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रशासनिक आदेशों के अनुसार कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को नई तहसीलों की कमान सौंपी गई है, वहीं कई को विशेष शाखाओं में स्थानांतरित किया गया है। इससे न केवल कार्य विभाजन में बदलाव हुआ है बल्कि प्रशासनिक ढांचे को अधिक संतुलित करने का प्रयास भी किया गया है।

    कई तहसीलों में नए अधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही पुराने अधिकारियों को अन्य महत्वपूर्ण विभागों में भेजा गया है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि जमीनी स्तर पर राजस्व कार्यों में तेजी आएगी और नागरिकों को सेवाएं अधिक प्रभावी तरीके से मिल सकेंगी।

    इसी बीच नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। भुगतान संबंधी मामलों में मस्टरकर्मियों की नाराजगी सामने आई है और लंबे समय से बकाया भुगतान को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। अदालत के आदेशों के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

    प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे बदलाव को व्यवस्था सुधार और कार्यप्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

    ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

    जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में ठगी के दो अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर साइबर फ्रॉड और अंधविश्वास से जुड़ी धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर किया है। एक ओर जहां ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर एक कॉलेज छात्रा से एक लाख रुपये की ठगी की गई, वहीं दूसरी ओर साधु के भेष में आए दो ठगों ने 5 करोड़ रुपये दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 28 हजार रुपये ऐंठ लिए।

    पहले मामले में घमापुर क्षेत्र की एक कॉलेज छात्रा को टेलीग्राम पर संपर्क कर ऑनलाइन जॉब और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर फंसाया गया। उसे शुरुआत में छोटे-छोटे काम देकर भरोसा दिलाया गया और बाद में निवेश तथा प्रोसेसिंग के नाम पर अलग-अलग चरणों में पैसे जमा करने के लिए कहा गया।

    झांसे में आकर छात्रा ने धीरे-धीरे करीब एक लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब न तो उसे कोई नौकरी मिली और न ही कोई कमाई वापस मिली, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    दूसरे मामले में बरगी थाना क्षेत्र में दो लोगों ने साधु का भेष धारण कर एक युवक को अपने जाल में फंसा लिया। पहले तो उन्होंने मदद के नाम पर पैसे मांगे, फिर हाथ देखकर भविष्य में 5 करोड़ रुपये मिलने का लालच दिया। इसके बाद पूजा-पाठ और कथित चमत्कार के नाम पर युवक को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया।

    जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग तरीकों से युवक से कुल 28 हजार रुपये वसूल लिए। कुछ देर बाद जब युवक को शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को भ्रमित करने के लिए अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाते थे और लालच व अंधविश्वास का सहारा लेकर ठगी करते थे। दोनों मामलों में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • जबलपुर में प्रदर्शन हुआ उग्र: कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बरसाया पानी

    जबलपुर में प्रदर्शन हुआ उग्र: कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बरसाया पानी


    जबलपुर मध्यप्रदेश के जबलपुर में सोमवार को ट्रेड डील के विरोध को लेकर यूथ कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट घेराव के लिए रैली निकाली, लेकिन पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए बैरिकेडिंग कर दी। जैसे ही प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

    घंटाघर पर भिड़ंत, वाटर कैनन से रोकने की कोशिश

    घंटाघर क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक हालात तनावपूर्ण बने रहे। फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों से प्रदर्शनकारियों पर लगातार पानी की तेज बौछारें की गईं, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ता बैरिकेड पर चढ़कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। माहौल काफी देर तक गरमाता रहा।

    100 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में

    पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए सख्ती बरती और प्रदेश अध्यक्ष सहित यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। प्रदर्शन में विधायक लखन घनघोरिया सहित कई स्थानीय नेता और बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता शामिल हुए थे। प्रशासन ने पहले से ही कलेक्ट्रेट और आसपास के प्रमुख मार्गों पर भारी बैरिकेडिंग और पुलिस बल तैनात कर रखा था।

    यूथ कांग्रेस का सरकार पर आरोप

    यूथ कांग्रेस ने प्रस्तावित यूएस ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। संगठन का कहना है कि इस डील से किसानों और मजदूरों को नुकसान पहुंचेगा, इसलिए इसे जनविरोधी बताया गया।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर में इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने महंगाई, गैस सिलेंडर की कीमतों और विदेश नीति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।

    तनावपूर्ण माहौल के बीच शांत कराया गया प्रदर्शन

    प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती रही और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को लगातार प्रयास करने पड़े। अंततः गिरफ्तारियों और वाटर कैनन के उपयोग के बाद हालात काबू में आए।

  • खंडवा के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस और वन कर्मी पर जानलेवा हमला

    खंडवा के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों का दुस्साहस और वन कर्मी पर जानलेवा हमला


    मध्यप्रदेश/खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में अतिक्रमणकारियों के बढ़ते दुस्साहस ने प्रशासनिक तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलाईखेड़ा के जंगलों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा करने की नियत से पहुंचे करीब तीस से चालीस हमलावरों ने वन विभाग की टीम पर हिंसक हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब विभाग के कर्मचारी नियमित गश्त और सूचना के आधार पर जंगल की सुरक्षा के लिए मौके पर पहुंचे थे। अतिक्रमणकारियों का समूह सुनियोजित तरीके से वन भूमि को कृषि भूमि में बदलने की तैयारी कर रहा था और उनके पास जंगल की जमीन साफ करने के उपकरण भी मौजूद थे।

    वन विभाग के अमले ने जैसे ही उन्हें रोकने की कोशिश की तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। जंगल में अवैध खेत तैयार करने की जिद पर अड़े इन लोगों ने सरकारी ड्यूटी पर तैनात चौकीदार रामदास को अपना निशाना बनाया। हमलावरों ने न केवल उनके साथ गाली गलौज की बल्कि शारीरिक रूप से भी उन पर टूट पड़े। इस हिंसक झड़प में हमलावरों ने चौकीदार का गला दबाने और उन्हें नाखूनों से घायल करने जैसी क्रूर हरकतें कीं। इस दौरान वर्दी फाड़ दी गई और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों को भी जान से मारने की धमकी दी गई। यह हमला इतना अचानक और उग्र था कि शुरुआती क्षणों में कर्मचारियों को अपनी जान बचाना भारी पड़ गया।

    अतिक्रमणकारियों की यह भीड़ पड़ोसी जिलों बड़वानी खरगोन और बुरहानपुर से संगठित होकर यहां पहुंची थी। जंगलों के बीच जमीन कब्जाने का यह सिलसिला नया नहीं है लेकिन जिस तरह से हमलावरों ने कानून को अपने हाथ में लिया उससे वन कर्मियों के बीच भारी आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है। घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद वन विभाग का अतिरिक्त अमला और पुलिस बल सक्रिय हुआ जिसके बाद हमलावर वहां से भाग खड़े हुए। इस संबंध में पिपलौद पुलिस थाने में नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार आमाखुजरी क्षेत्र में लगभग पचास हेक्टेयर वन भूमि पर वर्तमान में अतिक्रमण का बड़ा संकट मंडरा रहा है। यहां बड़ी संख्या में लोग बुवाई की तैयारी कर रहे हैं जो पर्यावरण और वन संपदा के लिए एक अपूरणीय क्षति साबित हो सकती है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इन बाहरी तत्वों पर नकेल नहीं कसी गई तो घने जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। फिलहाल घायल कर्मचारी का उपचार कराया जा रहा है और पुलिस प्रशासन के सहयोग से पूरे क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी हिंसक वारदात को टाला जा सके और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना से किसानों की आर्थिक स्थिति में आया बड़ा बदलाव शिवराज सिंह चौहान

    किसान क्रेडिट कार्ड योजना से किसानों की आर्थिक स्थिति में आया बड़ा बदलाव शिवराज सिंह चौहान

    रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव 2026 के अंतिम दिन किसान सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना ने देश के किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने इस योजना को किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बताते हुए कहा कि इससे किसानों को समय पर सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध हो रहा है, जिससे वे खेती से जुड़े आवश्यक कार्य बिना आर्थिक दबाव के कर पा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और कृषि क्षेत्र में हो रहे नए नवाचारों से अवगत कराना भी है। किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत उपकरणों और नई कृषि पद्धतियों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पहले किसानों को खाद और बीज जैसी आवश्यकताओं के लिए ऊंचे ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था, जिससे उनकी पूरी फसल का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में ही चला जाता था। ऐसे में किसान क्रेडिट कार्ड योजना ने इस समस्या का समाधान किया है और किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

    उन्होंने कृषि अवसंरचना को मजबूत करने पर भी जोर देते हुए कहा कि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी योजनाएं किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही हैं। इसके माध्यम से भंडारण, प्रसंस्करण और अन्य कृषि सुविधाओं का विकास हो रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल पा रहा है।

    साथ ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप और सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए पर्याप्त सब्सिडी दी जा रही है। इससे न केवल ऊर्जा लागत में कमी आ रही है बल्कि किसान स्वच्छ ऊर्जा की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में किसान योजनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाते, इसलिए जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

    किसान सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण की भी झलक देखने को मिली, जहां किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पादों और नवाचारों के माध्यम से विशेष पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं अपनी मेहनत और उद्यमशीलता से न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही हैं।

    महोत्सव के दौरान आधुनिक तकनीक, नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया, जिससे खेती को एक नई दिशा मिल रही है। यह आयोजन किसानों के लिए नए अवसरों और संभावनाओं का मंच बनकर उभरा है, जहां वे भविष्य की कृषि के लिए तैयार हो रहे हैं।

  • केआरसीएल में दो पदों पर भर्ती का अवसर, 63 वर्ष तक के उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका

    केआरसीएल में दो पदों पर भर्ती का अवसर, 63 वर्ष तक के उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका


    भोपाल। भारतीय रेलवे में नौकरी की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड की ओर से एक महत्वपूर्ण भर्ती सूचना जारी की गई है। इस भर्ती के तहत वर्क मैनेजर और असिस्टेंट वर्क मैनेजर के कुल दो पदों को भरा जाना है। यह अवसर विशेष रूप से उन योग्य उम्मीदवारों के लिए आकर्षक माना जा रहा है जो रेलवे क्षेत्र में तकनीकी और प्रबंधन अनुभव रखते हैं या सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने कौशल का उपयोग करना चाहते हैं। विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार चयन प्रक्रिया और आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक पात्र उम्मीदवार इसमें भाग ले सकें।

    इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों को 30 अप्रैल तक अपना आवेदन जमा करना होगा। आवेदन केवल ईमेल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे, इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय की तकनीकी या अन्य किसी भी प्रकार की समस्या से बचने के लिए समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। आवेदन पत्र को सही तरीके से भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में भेजना अनिवार्य होगा।

    इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल या प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए। इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि उम्मीदवार रेलवे या उससे संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत रहे हों या सेवानिवृत्त यांत्रिक विभाग के अधिकारी हों। अभ्यर्थियों के पास निर्धारित वर्षों का व्यावहारिक अनुभव होना भी जरूरी रखा गया है ताकि कार्य की गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। अधिकतम आयु सीमा 63 वर्ष निर्धारित की गई है जिसकी गणना 10 अप्रैल के आधार पर की जाएगी।

    वेतन संरचना की बात करें तो चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 39100 रुपये से लेकर 15600 रुपये तक का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य भत्ते और लाभ भी नियमानुसार प्रदान किए जाएंगे। चयनित अभ्यर्थियों की पोस्टिंग विशाखापत्तनम स्थित वडालापुडी कार्यशाला में की जाएगी जहां उन्हें तकनीकी और प्रबंधकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। यह पद उन अनुभवी उम्मीदवारों के लिए एक बेहतर अवसर है जो अपने लंबे करियर अनुभव को एक संगठित रेलवे परियोजना में योगदान के रूप में उपयोग करना चाहते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों को पहले संबंधित भर्ती अधिसूचना के अनुसार आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा। इसके बाद उसे ध्यानपूर्वक भरकर सभी आवश्यक विवरण सही तरीके से दर्ज करने होंगे। मांगे गए दस्तावेजों की प्रतियां भी आवेदन के साथ संलग्न करनी होंगी। पूरा आवेदन एक ही फाइल में तैयार कर निर्धारित ईमेल पते पर भेजना होगा। अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आवेदन अंतिम तिथि के दिन शाम साढ़े पांच बजे से पहले पहुंच जाए। आवेदन भेजने के बाद भविष्य के संदर्भ के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखना भी आवश्यक होगा।