Category: Madhya Pradesh

  • सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला

    सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला


    नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

    निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए।

    अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

    इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर

    उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर


    नई दिल्ली। उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के किनारे लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, रेस्टोरेंट और कॉलोनियों के रूप में 200 से अधिक अवैध निर्माण खड़े होने का मामला अब न्यायालय की निगरानी में है।

    इस पूरे मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह नदी किनारे 100 से 200 मीटर के दायरे में हुए सभी अतिक्रमणों की विस्तृत सूची तैयार करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि अब तक इन अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई की गई है और उन्हें हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को यह रिपोर्ट 15 जून तक हर हाल में पेश करने का आदेश दिया है। इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि तब तक किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि इन क्षेत्रों में जारी नहीं रहनी चाहिए।

    यह याचिका वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर नियमों को दरकिनार करते हुए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। इनमें होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और आवासीय कॉलोनियां तक शामिल हैं। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे शिप्रा का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि नदी के किनारे व्यावसायिक निर्माण न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अनुचित है। कोर्ट ने भी टिप्पणी की कि नदी तट पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या स्थायी निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती।

    पूर्व सुनवाई में 5 मई को भी कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए थे कि सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि नदी किनारे कोई अवैध गतिविधि संचालित न हो। इसके साथ ही नदी निधि विकास योजना से जुड़ी रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए थे।

    अब सभी की नजरें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट यह तय करेगी कि अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने कितनी गंभीरता से कदम उठाए हैं।

  • हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें

    हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले पर सुनवाई होने जा रही है, जिस पर पूरे राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है, जो 2018 के एक चुनावी भाषण पर आधारित है।

    यह मामला झाबुआ में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों का नाम लिया था। इसी बयान को लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने एमपी-एमएलए विशेष अदालत भोपाल में मानहानि का परिवाद दायर किया था।

    बाद में विशेष अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को समन जारी किया, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने Jabalpur हाईकोर्ट का रुख किया। राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका में समन और पूरे परिवाद को निरस्त करने की मांग की गई है।

    पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें पेश की गई थीं। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह परिवाद तथ्यात्मक रूप से कमजोर है और इसमें लगाए गए आरोप ठोस सबूतों पर आधारित नहीं हैं।

    वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि 2018 में कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने झाबुआ की चुनावी सभा में अपने भाषण के दौरान पनामा पेपर्स लीक का उल्लेख करते हुए कथित रूप से गलत जानकारी दी थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मध्यप्रदेश में भी ऐसी कार्रवाई न होने की बात कही थी, जिससे शिकायतकर्ता पक्ष को आपत्ति है।

    हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया था कि बयान के दौरान उनसे नाम को लेकर भ्रम हो गया था और उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति से था।

    Jabalpur हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पहले भी हो चुकी है, जिसमें कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। पिछली सुनवाई में समय मांगने पर अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया था।

    आज की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि यह अंतिम चरण हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय कर सकता है कि ट्रायल जारी रहेगा या नहीं। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • जबलपुर में खौफनाक वारदात: गले और चेहरे पर चाकू मारकर युवक की हत्या

    जबलपुर में खौफनाक वारदात: गले और चेहरे पर चाकू मारकर युवक की हत्या


    नई दिल्ली।  मध्यप्रदेश के Jabalpur में एक बार फिर देर रात हुई हिंसक वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी है। गोहलपुर थाना क्षेत्र में 20 वर्षीय युवक की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। यह घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है, जिसमें पुरानी रंजिश को मुख्य वजह माना जा रहा है।

    मृतक की पहचान समता कॉलोनी निवासी भावेश वीरानी के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, भावेश अपने घर के पास देर रात घूम रहा था, तभी बाइक पर सवार होकर तीन युवक वहां पहुंचे। आरोपियों की पहचान अरुण, आयुष और शिव के रूप में हुई है।

    बताया जा रहा है कि आरोपियों ने पहुंचते ही भावेश को घेर लिया और पुराने विवाद को लेकर बहस शुरू कर दी। कुछ ही मिनटों में यह बहस हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि तीनों हमलावरों ने युवक पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए, जिसमें गले और हाथ पर गंभीर चोटें आईं।

    हमले के बाद भावेश मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी तुरंत वहां से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    Jabalpur के गोहलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और गंभीर रूप से घायल युवक को तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। हालांकि अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिजनों का कहना है कि करीब छह महीने पहले भावेश का आरोपियों से विवाद हुआ था, जिसके बाद से दोनों पक्षों में तनाव चल रहा था। उसी रंजिश का बदला लेने के लिए इस हत्या को अंजाम दिया गया।

    घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नामजद हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। लगातार हो रही चाकूबाजी की घटनाओं ने शहर की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मामूली विवाद बना खूनी संघर्ष: ग्वालियर में सूजे से वार, पुलिस ने दर्ज किया केस

    मामूली विवाद बना खूनी संघर्ष: ग्वालियर में सूजे से वार, पुलिस ने दर्ज किया केस


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में नशे के दौरान हुआ एक विवाद गंभीर हिंसा में बदल गया। थाटीपुर थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हुई, जिसमें एक युवक पर बर्फ फोड़ने वाले सूजे से हमला कर दिया गया और वह घायल हो गया।

    घटना बुधवार शाम की बताई जा रही है और यह विवेकानंद चौराहे के पास हुई। जानकारी के अनुसार, थाटीपुर निवासी बाबा वाल्मीकि और दिव्यांशु हमाल तथा कुमारपुर निवासी गोलू भदौरिया एक साथ द्वारकाधीश मंदिर के पास बैठकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    शुरुआत में विवाद केवल गाली-गलौज तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह झगड़े में बदल गया। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर गोलू भदौरिया के साथ मारपीट शुरू कर दी और उसे जमीन पर पटक दिया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।

    बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान पास में रखा बर्फ फोड़ने वाला सूजा (आइस पिक) उठा लिया गया और उसी से गोलू पर हमला किया गया। इस हमले में वह घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी वहां से फरार हो गए।

    घायल युवक किसी तरह थाटीपुर थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    थाटीपुर थाना प्रभारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि घटना शराब पीने के दौरान हुए विवाद का परिणाम थी। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    Gwalior में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि नशे में छोटी सी कहासुनी भी गंभीर अपराध में बदल सकती है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश कर रही है और घायल का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है।

  • SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला

    SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने एसएएफ (स्पेशल आर्म्ड फोर्स) के एक आरक्षक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में शादी से इनकार करने का आरोप लगाया है। मामला माधौगंज थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह एमए अंतिम वर्ष की छात्रा है। उसके अनुसार 15 फरवरी को हिंदू रीति-रिवाज से उसका रोका हुआ था और 20 मार्च को परिवार की सहमति से उसकी सगाई अंकित ओझा नाम के युवक से हुई थी, जो एसएएफ सेकेंड बटालियन में आरक्षक के पद पर पदस्थ है और तिलक नगर स्थित सरकारी आवास में रहता है।

    युवती का आरोप है कि सगाई के बाद दोनों के बीच बातचीत बढ़ गई और वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे। इसी दौरान 5 मई को दोनों की शादी तय की गई थी। शिकायत के अनुसार 3 मार्च को आरोपी ने तिलक नगर स्थित सरकारी आवास पर पहली बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद 9 मार्च और 18 मार्च को भी ऐसे संबंध बने, जिसमें आरोपी ने यह भरोसा दिलाया कि शादी निश्चित है, इसलिए इसमें कोई समस्या नहीं है।

    पीड़िता का कहना है कि जब परिवार ने शादी की रस्मों को आगे बढ़ाने के लिए लगन की बात की, तो आरोपी ने अचानक शादी से इनकार कर दिया। काफी समझाने और बातचीत के बावजूद आरोपी अपने फैसले पर अड़ा रहा और शादी करने से साफ मना कर दिया।

    इसके बाद पीड़िता ने माधौगंज थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

    माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    Gwalior में सामने आया यह मामला एक बार फिर रिश्तों में भरोसे और कानूनी जटिलताओं को लेकर चर्चा में आ गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • स्विमिंग पूल में बड़ा हादसा: छलांग लगाने के बाद नहीं निकल पाया बच्चा, सुरक्षा पर सवाल

    स्विमिंग पूल में बड़ा हादसा: छलांग लगाने के बाद नहीं निकल पाया बच्चा, सुरक्षा पर सवाल


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Gwalior से सामने आया यह मामला पूरे राज्य को झकझोर देने वाला है। एक होटल में स्विमिंग पूल पार्टी के दौरान 7 साल के बच्चे वेद की डूबने से मौत हो गई, और घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    यह दर्दनाक हादसा 11 मई की रात का बताया जा रहा है, जब वेद अपने परिवार के साथ होटल में आयोजित एक पूल पार्टी में शामिल था। फुटेज में साफ दिखाई देता है कि बच्चा पहले पूल से बाहर निकलता है, लेकिन कुछ ही मिनट बाद वह दोबारा पानी में कूद जाता है। इसी दौरान वह गलती से उथले हिस्से की बजाय गहरे हिस्से में चला जाता है।

    करीब 5 फीट गहरे पानी में फंसने के बाद बच्चा बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, लेकिन वह लगातार संघर्ष करते हुए डूबने लगता है। CCTV में यह भी दिखाई देता है कि आसपास कई लोग मौजूद थे, लेकिन किसी का ध्यान तुरंत उस पर नहीं गया। कुछ लोग उसके पास से गुजरते रहे, लेकिन स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ सके।

    परिजनों का आरोप है कि होटल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। उनका कहना है कि पूल में गहराई को दर्शाने के लिए कोई स्पष्ट संकेत नहीं थे और न ही बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई गई थी। सबसे गंभीर आरोप यह है कि मौके पर कोई प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद नहीं था।

    घटना के बाद परिजनों ने पहले बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन बाद में मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। इसके बाद शव को दोबारा निकाला गया और पोस्टमॉर्टम कराया गया, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सके।

    Gwalior पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि होटल मैनेजमेंट, पूल पार्टी आयोजकों और मौजूद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और वीडियो फुटेज का मिलान कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर होटल और सार्वजनिक स्विमिंग पूल्स में सुरक्षा मानकों की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है, जबकि परिवार गहरे सदमे में है।

  • चेकिंग से बचने की कोशिश में बेकाबू ट्राला, पुलिस ने रोका तो फोड़े गए कांच

    चेकिंग से बचने की कोशिश में बेकाबू ट्राला, पुलिस ने रोका तो फोड़े गए कांच


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore में गुरुवार को एक बड़ा हंगामा उस समय हो गया जब छत्रीपुरा इलाके में पुलिस चेकिंग के दौरान एक ट्राला चालक ने बैरिकेड तोड़कर भागने की कोशिश की। यह घटना गंगवाल बस स्टैंड क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस ने वाहन जांच के लिए बैरिकेड और स्टॉपर लगाए हुए थे।

    पुलिस के अनुसार, चेकिंग के दौरान एक ट्राला तेज रफ्तार में आया और रोकने के प्रयास के बावजूद चालक ने बैरिकेड्स को टक्कर मारते हुए आगे बढ़ा दिया। इसके बाद ट्राला जवाहर मार्ग की ओर तेज गति से भाग निकला, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    घटना के बाद पुलिस ने तुरंत ट्राले का पीछा शुरू किया। सूचना मिलते ही अलग-अलग टीमों ने इलाके में नाकेबंदी कर दी। ट्राला जब बंबई बाजार क्षेत्र में पहुंचा तो पुलिस ने एफआरवी वाहन लगाकर उसे रोक लिया।

    हालांकि ट्राले के रुकते ही स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। मौके पर मौजूद लोगों में गुस्सा फैल गया और भीड़ ने ट्राले के कांच फोड़ दिए। कुछ देर के लिए वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।

    अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह अफवाह भी फैल गई कि ट्राले ने रास्ते में कुछ लोगों को टक्कर मार दी है। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस तरह की किसी भी घटना से इनकार किया है और स्पष्ट किया है कि कोई जनहानि नहीं हुई है।

    पुलिस ने ट्राले को जब्त कर लिया है और चालक से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि चालक नशे की हालत में हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल जांच के बाद ही की जाएगी।

    Indore में हुई इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और नशे में वाहन चलाने के खतरे को उजागर कर दिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चालक चेकिंग से क्यों भागा और क्या वाहन में कोई अन्य अनियमितता थी।

    फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद कुछ समय तक बंबई बाजार क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा।

  • इंदौर में स्वास्थ्य संस्थान पर सवाल: नर्सों ने लगाए गंभीर आरोप, मैनेजमेंट पर बढ़ा दबाव

    इंदौर में स्वास्थ्य संस्थान पर सवाल: नर्सों ने लगाए गंभीर आरोप, मैनेजमेंट पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore स्थित बॉम्बे हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में आ गया है। यहां कार्यरत नर्सों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा 2026 में शामिल होने के लिए आवश्यक छुट्टी नहीं दी जा रही है। इस मामले ने अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अस्पताल की करीब 30 से 35 नर्सों ने सरकारी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन किया है, जो 15 मई को आयोजित होनी है। इनमें से कई नर्सों के परीक्षा केंद्र भोपाल सहित अन्य शहरों में हैं, जिसके चलते उन्हें यात्रा और परीक्षा में शामिल होने के लिए अवकाश की आवश्यकता है।

    नर्सों का आरोप है कि उन्होंने प्रबंधन से छुट्टी की मांग की थी, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई कर्मचारी परीक्षा देने जाता है तो वह अपनी जिम्मेदारी पर जाएगा और ड्यूटी व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।

    नर्सों के अनुसार, अस्पताल की नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सीबी जॉर्ज की ओर से एक ऑडियो संदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया कि नियुक्ति के समय परीक्षा के लिए छुट्टी देने का कोई वादा नहीं किया गया था, इसलिए किसी भी प्रकार की छुट्टी या समायोजन संभव नहीं है।

    इस स्थिति से नर्सों में नाराजगी के साथ-साथ चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करना उनका अधिकार है, लेकिन वर्तमान नौकरी में दबाव बनाकर उन्हें परीक्षा से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अनुपस्थित रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और हॉस्टल खाली कराने तक की चेतावनी दी गई है।

    हॉस्टल में रहने वाली नर्सों को कथित तौर पर यह संदेश भी दिया गया है कि 14 और 15 मई को किसी भी कर्मचारी को नाइट पास नहीं दिया जाएगा और ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इससे कई नर्सें मानसिक दबाव में हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।

    हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को अलग दृष्टिकोण से देखा है। बॉम्बे हॉस्पिटल के डायरेक्टर का कहना है कि यदि एक साथ बड़ी संख्या में नर्सें छुट्टी पर चली जाती हैं, तो अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होगी। विशेषकर इमरजेंसी और किडनी यूनिट जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

    प्रबंधन का यह भी कहना है कि उन्होंने किसी को परीक्षा देने से रोका नहीं है, लेकिन नियमित अवकाश (सीएल आदि) देना संभव नहीं है क्योंकि इससे अस्पताल संचालन प्रभावित हो सकता है।

    Indore में इस विवाद ने स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ प्रबंधन और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • आग का कहर: इंदौर पेट्रोल पंप पर टैंकर में लगी आग, ड्राइवर की सूझबूझ से बची बड़ी दुर्घटना

    आग का कहर: इंदौर पेट्रोल पंप पर टैंकर में लगी आग, ड्राइवर की सूझबूझ से बची बड़ी दुर्घटना


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore में गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब मांगलिया इलाके में स्थित एक पेट्रोल पंप पर खड़े ईंधन टैंकर में अचानक आग लग गई। यह घटना सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है, जिसने कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।

    जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पंप पर एक खाली हो चुका टैंकर खड़ा था, जिसमें अचानक केबिन के हिस्से में शॉर्ट सर्किट के कारण आग भड़क उठी। आग लगते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी, क्योंकि पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील स्थान पर जरा सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में ड्राइवर की सूझबूझ ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। जैसे ही उसे आग का अहसास हुआ, उसने तुरंत जलते हुए टैंकर को पेट्रोल पंप से दूर ले जाकर खड़ा कर दिया। इस त्वरित निर्णय से आग पंप के फ्यूल एरिया तक नहीं पहुंच पाई और बड़ा विस्फोट होने से बच गया।

    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब एक टैंकर पानी की मदद से आग पर काबू पाया। आग बुझाने के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में यातायात को आंशिक रूप से रोक दिया, जबकि आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया।

    पेट्रोल पंप कर्मचारियों को भी तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई।

    Indore में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि जरा सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है, खासकर ईंधन भंडारण वाले स्थानों पर। हालांकि ड्राइवर की समय रहते की गई कार्रवाई और दमकल विभाग की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

    घटना के बाद कुछ समय तक इलाके में दहशत का माहौल रहा, लेकिन आग पर काबू पाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है कि आखिर शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।