Category: Madhya Pradesh

  • एमपी में गर्मी ने पकड़ी रफ्तार, 5 डिग्री तक उछला पारा, नर्मदापुरम सबसे गर्म शहर दर्ज

    एमपी में गर्मी ने पकड़ी रफ्तार, 5 डिग्री तक उछला पारा, नर्मदापुरम सबसे गर्म शहर दर्ज

    भोपाल। मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश का दौर खत्म होते ही गर्मी ने तेजी से असर दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन के तापमान में 1 से 5.4 डिग्री तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में पारा ज्यादा चढ़ा, वहीं भोपाल और रतलाम में भी तापमान बढ़ा। सबसे अधिक 5.4 डिग्री की बढ़ोतरी रतलाम में दर्ज की गई। शनिवार को भी तापमान में और इजाफा होने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार 15 अप्रैल से एक नया सिस्टम सक्रिय होगा, लेकिन इसका असर कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश में अब तेज गर्मी का दौर जारी रहेगा। तापमान बढ़ने के साथ ही लोग गर्मी से राहत पाने के उपाय अपनाने लगे हैं। कोई चेहरे को कपड़े से ढंककर बाहर निकल रहा है, तो कोई गन्ने का रस, कोल्ड्रिंक और आइसक्रीम का सहारा ले रहा है।

    गर्मी बढ़ने के चलते मौसम विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को दिनभर पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने और दोपहर में तेज धूप से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही हल्के रंग और सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।

    तापमान की बात करें तो शुक्रवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रतलाम में 38.6 डिग्री और खरगोन में 38 डिग्री तापमान रहा। इसके अलावा धार, खंडवा, नरसिंहपुर और खजुराहो में पारा 36 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 35.5 डिग्री दर्ज हुआ। भोपाल और जबलपुर में 34.6 डिग्री, इंदौर में 35 डिग्री और ग्वालियर में 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    गौरतलब है कि इस बार अप्रैल की शुरुआत में भीषण गर्मी की बजाय आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का असर रहा। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला रहा। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। 15 से अधिक जिलों में ओलावृष्टि हुई, जबकि करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, जैसे सर्दी के लिए दिसंबर-जनवरी और बारिश के लिए जुलाई-अगस्त प्रमुख महीने होते हैं, वैसे ही गर्मी के लिए अप्रैल और मई अहम माने जाते हैं। खासकर अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से तेज गर्मी का असर अधिक देखने को मिलता है।

  • महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल

    महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के फिल्म ‘धुरंधर’ की अभिनेत्री सारा अर्जुन अपने परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचीं। इस अवसर पर उनके पिता राज अर्जुन और मां सान्या भी मौजूद रहीं। अभिनेत्री सारा ने सुबह करीब 4 बजे होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने नंदी हॉल से भगवान महाकाल के दर्शन कर “जय महाकाल” के जयकारे लगाए।


    मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद

    सारा अर्जुन पहली बार महाकाल मंदिर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वे अपनी मां के जन्मदिन के अवसर पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आई हैं। दर्शन के दौरान उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। भस्म आरती के बाद सारा ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद गर्भगृह की देहरी से जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उनका स्वागत भी किया गया। दर्शन के बाद सारा ने कहा कि महाकाल के दरबार में आकर उन्हें बेहद शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी सराहना की।


    सारा अर्जुन का करियर

    सारा अर्जुन ने बहुत कम उम्र में विज्ञापनों से अपने करियर की शुरुआत की थी। हाल ही में रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ से उन्हें खास पहचान मिली है। वे हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं।


    भस्म आरती में दिखा अलौकिक नजारा

    इधर शनिवार तड़के महाकाल मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से पूजन शुरू हुआ। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान का रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला, बिल्वपत्र और सुगंधित पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू का अलंकरण किया गया, जिससे भगवान महाकाल का राजाधिराज स्वरूप प्रकट हुआ। कपूर आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।


    भक्तिमय हुआ वातावरण

    भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। “जय श्री महाकाल” के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं।

  • भोजशाला मामले में लगातार पांचवे दिन हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, हिंदू पक्ष ने रखे ऐतिहासिक साक्ष्य

    भोजशाला मामले में लगातार पांचवे दिन हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, हिंदू पक्ष ने रखे ऐतिहासिक साक्ष्य


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन हुई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने कोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक, शिल्पकला एवं प्राचीन ग्रंथों के आधार पर विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए।

    हिन्दू पक्षकारों ने दावा किया कि भोजशाला कोई साधारण ढांचा नहीं, बल्कि मां सरस्वती को समर्पित मंदिर एवं संस्कृत शिक्षण केंद्र था, जिसका उल्लेख विभिन्न प्राचीन ग्रंथों, ब्रिटिशकालीन गजेटियर और राजा भोज द्वारा रचित ग्रंथों में मिलता है।

    वहीं, वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए मामले को 28 अप्रैल तक टालने की मांग की, जिसे उच्च न्यायालय ने सख्ती से खारिज कर दिया और रोजाना (नियमित) सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया।

    हिंदू पक्ष की दूसरी याचिका पर सुनवाई के दौरान लखनऊ निवासी याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि राजा भोज द्वारा लिखित प्रसिद्ध ग्रंथ समरांग सूत्रधार में नगर नियोजन और मंदिर वास्तुकला का विस्तृत वर्णन है। इस ग्रंथ में मंदिरों की संरचना, आयाम, खंभों की बनावट, मूर्तियों की शैली और शिल्पकला के सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है।

    अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने तर्क दिया कि भोजशाला परिसर की संरचना, उसके आयाम, स्तंभों की बनावट एवं मूर्तिकला की शैली समरांग सूत्रधार में वर्णित सिद्धांतों से मेल खाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त स्थल मूल रूप से मंदिर था। उन्होंने 1304 ईस्वी में लिखित चिंतामणि, 19वीं सदी के धार गजेटियर तथा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि प्राचीन काल में धार ज्ञान-विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है और भोजशाला विद्या परंपरा का मुख्य स्थल थी।


    ब्रह्माजी की एक दुर्लभ मूर्ति समरांग सूत्रधार में वर्णित

    सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई में प्राप्त ब्रह्माजी की एक दुर्लभ मूर्ति समरांग सूत्रधार में वर्णित युवा ब्रह्मा के स्वरूप से साम्यता रखती है। साथ ही हिंगलाजगढ़, मंदसौर और रायसेन से प्राप्त मूर्तियों की शिल्प परंपरा भी उसी कालखंड से जुड़ी बताई गई। हिंदू पक्ष ने यह भी कहा कि परमार कालीन राजवंश द्वारा अपनाई गई निर्माण शैली तथा उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर की वास्तुकला में भी समानताएं देखी जा सकती हैं।


    अगली सुनवाई 15 अप्रैल को

    हिंदू पक्ष ने कोर्ट में प्रस्तुत तर्कों के आधार पर दावा किया कि भोजशाला स्थल प्राचीन सरस्वती मंदिर था, जहां विद्या, कला और शास्त्रों का अध्ययन किया जाता था। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को नीयत की गई है। इसमें हिंदू पक्ष समरांग सूत्रधार के आयामों और भोजशाला की संरचना के बीच समानताओं को और विस्तार से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

  • MP: ग्वालियर में 9 साल की मासूम और 8वीं की छात्रा से दुष्कर्म….दोनों आरोपी गिरफ्तार

    MP: ग्वालियर में 9 साल की मासूम और 8वीं की छात्रा से दुष्कर्म….दोनों आरोपी गिरफ्तार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में 2 नाबालिग बच्चियों से रेप करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने दोनों मामले में आरोपियों को पकड़ लिया है। इनमें से एक आरोपी नाबालिग (Accused Minor) है और पीड़ित छात्रा का सहपाठी भी है।

    ग्वालियर में 9 साल की बच्ची से रेप करने का मामला सामने आया है। यह घटना शाम बिजौली थाना क्षेत्र के सुपावली गांव में हुई। बच्ची अपने ताऊ को खेत पर खाना देने गई थी। खाना देने के बाद वह वहीं खेलने लगी। उसके ताऊ अपने काम में व्यस्त थे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे रामवीर जाटव ने बच्ची को अकेला देखा।

    आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर एक एकांत स्थान पर ले गया। आरोपी रामवीर जाटव ने वहां बच्ची के साथ रेप किया। जब बच्ची ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बच्ची को धमकाकर मौके से फरार हो गया।

    घटना के बाद बालिका घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई। परिजन तत्काल बालिका को लेकर बिजौली थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बालिका की शिकायत पर आरोपी रामवीर जाटव के खिलाफ दुष्कर्म सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। बिजौली थाना सर्किल के सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि बालिका से दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    वहीं, दूसरी घटना ग्वालियर में एक आठवीं की छात्रा के साथ उसके ही साथ में पढ़ने वाले छात्र ने रेप किया है। घटना के समय छात्रा घर पर अकेली थी। आरोपी सहपाठी घर में दाखिल हुआ और विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का पता उस समय चला जब आरोपी घर से भाग रहा था तो छात्रा की मां वहां पहुंच गई।

    मां के पूछने पर छात्रा ने पूरी घटना बता दी। पहले परिवार बदनामी के डर से खामोश रहा, लेकिन परिवार ने मामले की शिकायत की। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए आरोपी को पकड़ लिया। आरोपी भी नाबालिग है और उसे बाल सुधार गृह भेजा गया है।

  • MP में पिछले 14 महीनों में 149 तेंदुओं की मौत… आंकड़ों ने बढ़ाई वन्यजीव प्रेमियों की चिंता

    MP में पिछले 14 महीनों में 149 तेंदुओं की मौत… आंकड़ों ने बढ़ाई वन्यजीव प्रेमियों की चिंता


    भोपाल।
    भारत (India) में सबसे ज्यादा तेंदुए (Leopard) मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh.) में पाए जाते हैं और इसी वजह से इसे तेंदुओं का प्राकृतिक आवास (Leopards Natural habitat ) भी कहा जाता है। लेकिन हाल ही में सामने आए एक चिंताजनक आंकड़े (Worrying statistics) ने देश के वन्यजीव प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। दरअसल सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी से पता चला है कि बीते 14 महीनों में राज्य में कुल 149 तेंदुओं की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा जनवरी 2025 से लेकर मार्च 2026 तक का है।

    खास बात यह है कि इन मौतों के पीछे की सबसे बड़ी वजह तेंदुओं का शिकार होना नहीं है, बल्कि इन मौतों का बड़ा कारण सड़क हादसे रहे हैं। वहीं वन विभाग ने मौतों के इन आंकड़ों को सामान्य बताया है और उसका कहना है कि तेंदुओं के मामले में चार प्रतिशत की मृत्यु दर स्वीकार्य सीमा के भीतर है।


    31 प्रतिशत मौतों के पीछे सड़क हादसे वजह

    तेंदुओं की मौत की जानकारी पाने के लिए RTI कार्यकर्ता अजय दुबे ने आवेदन लगाया था। जिसके जवाब में उन्हें बताया गया कि जनवरी 2025 से इस साल मार्च तक के 14 महीनों में मध्य प्रदेश में 149 तेंदुओं की मौत हुई। इनमें से 31 प्रतिशत मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हुईं। डेटा के अनुसार इनमें से भी 19 मौतें हाईवे पर हुईं। वहीं बुढ़ापा और बीमारी जैसे प्राकृतिक कारणों के कारण 24 प्रतिशत मौतें हुईं, जबकि 21 प्रतिशत मौतें वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष के कारण हुईं।


    8 तेंदुओं की जान करंट लगने की वजह से गई

    आंकड़ों के अनुसार शिकार और बदले की भावना के कारण लगभग 14 प्रतिशत तेंदुओं की जानें गईं। 8 लेपर्ड की मौत बिजली का झटका लगने से हुई, फिर चाहे वह जानबूझकर लगाया गया हो या गलती से लगा हो, जबकि दो जानवर फंदों में फंसकर मारे गए। इसके अलावा लगभग नौ प्रतिशत मामलों में, मौत का कारण पता नहीं चल पाया।


    तेंदुओं की लिए कब्रिस्तान बन रहा MP- RTI कार्यकर्ता

    इस RTI को लगाने वाले एक्टिविस्ट अजय दुबे मौतों के इन आंकड़ों को भयावह बता रहे हैं, उनका कहना है कि ये आंकड़े एक गंभीर सच्चाई है। उन्होंने कहा, ‘टाइगर स्टेट (MP) तेंदुओं के लिए एक कब्रिस्तान बन गया है। NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) के प्रोटोकॉल को लागू करने में सिस्टम की नाकामी और सुरक्षित रास्तों की कमी उन्हें खत्म कर रही है।’


    वन विभाग ने कहा- 4% का आंकड़ा सामान्य

    उधर वन विभाग इन मौतों को सामान्य बता रहा है। इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग के अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) एल.कृष्णमूर्ति ने कहा कि राज्य में तेंदुओं की मृत्यु दर को कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘तेंदुए आकार में छोटे होते हैं और आसानी से दिखाई नहीं देते, इसलिए वे पूरे राज्य में फैले हुए हैं। वे अक्सर इंसानी बस्तियों के करीब पाए जाते हैं।’

    आगे उन्होंने कहा कि ‘मौतों के आंकड़े को कम करने के लिए हम योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं और नई सड़कों पर जानवरों के लिए सुरक्षित निकलने के रास्ते बनाने (एनिमल पैसेज), चेतावनी के संकेतक लगाने और नियमित गश्त करने जैसे उपाय लागू कर रहे हैं।’ साथ ही उन्होंने आगे कहा, ‘हम सड़कों के पास पानी के स्रोत न बनाने की भी सलाह दे रहे हैं, क्योंकि जानवर अक्सर पानी की तलाश में सड़कों की ओर आ जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार बन जाते हैं।’


    बिग कैट फैमिली में 10 से 20 प्रतिशत मौतें सामान्य

    एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ‘करीब 4,000 तेंदुओं में से 149 की मौत होना केवल 4 प्रतिशत का नुकसान है, जबकि बिल्ली परिवार में सालाना 10 से 20 प्रतिशत तक की मृत्यु दर को स्वीकार्य माना जाता है।’ बता दें कि फरवरी 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार देश में तेंदुओं की सबसे ज्यादा संख्या मध्य प्रदेश में है। उस वक्त मध्य प्रदेश में 3,907 तेंदुए थे। इससे पहले साल 2018 में राज्य में 3,421 तेंदुए थे। मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का नंबर आता है।

  • गर्मी में तुरंत राहत देगा यह सुपर ड्रिंक नारियल पानी और बीज का कमाल जानकर हैरान रह जाएंगे

    गर्मी में तुरंत राहत देगा यह सुपर ड्रिंक नारियल पानी और बीज का कमाल जानकर हैरान रह जाएंगे


    नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान और लगातार पसीना निकलने की वजह से शरीर में डिहाइड्रेशन और थकान की समस्या आम हो जाती है। ऐसे में शरीर को केवल पानी नहीं बल्कि ऐसे प्राकृतिक पेय की जरूरत होती है जो इलेक्ट्रोलाइट्स और पोषक तत्वों से भरपूर हो। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए नारियल पानी और सब्जा सीड्स का संयोजन एक बेहद प्रभावी सुपरड्रिंक माना जा रहा है जो शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा प्रदान करता है।

    नारियल पानी अपने आप में एक प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक है जिसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और सोडियम जैसे जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद करते हैं। जब इसमें सब्जा सीड्स यानी तुलसी के बीज मिलाए जाते हैं तो इसका असर और भी बढ़ जाता है। सब्जा सीड्स पानी में फूलकर जेल जैसा रूप ले लेते हैं जिससे शरीर में पानी लंबे समय तक बना रहता है और व्यक्ति खुद को अधिक समय तक हाइड्रेटेड महसूस करता है।

    गर्मियों में अक्सर लोग पेट की समस्याओं जैसे गैस एसिडिटी और कब्ज से परेशान रहते हैं। ऐसे में यह ड्रिंक पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। सब्जा सीड्स में मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है जबकि नारियल पानी पेट की जलन को शांत करता है। दोनों का संयोजन पाचन को बेहतर बनाकर शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखता है।

    थकान और कमजोरी भी गर्मियों में एक बड़ी समस्या होती है। नारियल पानी में प्राकृतिक शर्करा होती है जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करती है जबकि सब्जा सीड्स धीरे धीरे ऊर्जा रिलीज करते हैं। इस वजह से यह ड्रिंक लंबे समय तक शरीर को एक्टिव रखता है और बार बार होने वाली थकान को कम करता है।

    वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह मिश्रण बेहद उपयोगी माना जाता है। सब्जा सीड्स पेट में जाकर फूल जाते हैं जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और अनावश्यक भूख कम लगती है। वहीं नारियल पानी लो कैलोरी होने के कारण मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर फैट बर्निंग प्रक्रिया में मदद करता है।

    इसके अलावा यह ड्रिंक त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। नारियल पानी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है। सब्जा सीड्स के साथ नियमित सेवन करने से मुंहासों की समस्या कम हो सकती है और स्किन में प्राकृतिक निखार आता है।

    कुल मिलाकर यह प्राकृतिक सुपरड्रिंक गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने डिहाइड्रेशन से बचाने और ऊर्जा बनाए रखने का एक आसान और प्रभावी उपाय है। महंगे एनर्जी ड्रिंक्स की तुलना में यह एक सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प साबित हो सकता है जिसे रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

  • बांधवगढ़ में फिर टाइगर अटैक, महुआ बीनने गई महिला को बाघ ने बनाया शिकार

    बांधवगढ़ में फिर टाइगर अटैक, महुआ बीनने गई महिला को बाघ ने बनाया शिकार


    उमरिया। मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बार फिर बाघ के हमले में महिला की मौत हो गई। पनपथा कोर क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल फैल गया है।

    महुआ बीनने गई महिला पर हमला

    जानकारी के मुताबिक, ग्राम झलवार निवासी कुसुम बाई गोड़ शुक्रवार को जंगल में महुआ बीनने गई थीं। इसी दौरान पनपथा कोर क्षेत्र के झिरिया जंगल में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बाघ महिला को पकड़कर झाड़ियों की ओर घसीट ले गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना जंगल के कक्ष क्रमांक आरएफ 460 के पास बी-2 कैंप क्षेत्र में हुई। दोपहर में ग्रामीणों ने घटना देखी और तुरंत पुलिस व वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और आगे की कार्रवाई शुरू की।

    परिजनों को दी गई तत्काल सहायता

    वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक महिला के परिजनों को सांत्वना देते हुए तत्काल 5 हजार रुपये की सहायता राशि दी है। शासन की ओर से निर्धारित 8 लाख रुपये की मुआवजा राशि भी नियमानुसार दी जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में बाघों की बढ़ती गतिविधियों के चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।

  • कालाष्टमी 2026 पर करें ये अचूक उपाय बच्चों को नजर दोष से मिलेगी तुरंत सुरक्षा

    कालाष्टमी 2026 पर करें ये अचूक उपाय बच्चों को नजर दोष से मिलेगी तुरंत सुरक्षा


    नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में बच्चों को नजर दोष से बचाने के लिए कई धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं और इनमें कालाष्टमी का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है जिन्हें संकटों का नाश करने वाला और समय का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन किए गए उपाय नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और बच्चों को बुरी नजर से सुरक्षित रखते हैं। वर्ष 2026 में 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जा रहा है और इस दिन किए गए सरल उपाय बेहद प्रभावी माने जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी होती है। काशी में काल भैरव को कोतवाल कहा जाता है और उन्हें सुरक्षा और न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से भय संकट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को तंत्र मंत्र और रक्षा उपायों के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।

    यदि आपके घर में छोटे बच्चे हैं और आपको लगता है कि उन्हें बार बार नजर लग जाती है तो कालाष्टमी के दिन कुछ आसान उपाय जरूर करने चाहिए। सबसे पहले घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद उसकी लौ से काजल तैयार करें और इस काजल को बच्चे के माथे या कान के पीछे हल्का सा लगा दें। ऐसा करने से नजर दोष से बचाव होता है और बच्चे के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है।

    इसके अलावा आप मंदिर जाकर भगवान काल भैरव के चरणों में काला धागा अर्पित कर सकते हैं। इस धागे पर थोड़ा सा सिंदूर लगाकर इसे बच्चे के हाथ या गले में बांध दें। मान्यता है कि यह काला धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर के प्रभाव को दूर करता है। इस दौरान “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है।

    कालाष्टमी के दिन रात 9 बजे से 11 बजे के बीच पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा जल्दी फल देती है और भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं दीप जलाते हैं और भगवान से अपने परिवार विशेषकर बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

    यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह विश्वास और आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे उपाय लोगों को मानसिक शांति और सुरक्षा का एहसास देते हैं। हालांकि इन उपायों के साथ साथ बच्चों की देखभाल स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। कालाष्टमी पर किए गए ये सरल उपाय न केवल परंपरा का हिस्सा हैं बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास का प्रतीक भी हैं जो आज भी लोगों के जीवन में उतने ही प्रभावी माने जाते हैं।

  • मध्यप्रदेश में जुए के खिलाफ सख्त एक्शन पन्ना में छापा नौ गिरफ्तार लाखों की जब्ती

    मध्यप्रदेश में जुए के खिलाफ सख्त एक्शन पन्ना में छापा नौ गिरफ्तार लाखों की जब्ती


    पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है जहां अमानगंज थाना क्षेत्र में जुए के फड़ पर दबिश देकर नौ जुआरियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने न केवल आरोपियों को पकड़ा बल्कि मौके से लाखों रुपये के मशरुका को भी जब्त किया जिससे इलाके में हड़कंप मच गया और अवैध जुआ संचालन करने वालों में डर का माहौल बन गया है।

    जानकारी के अनुसार पुलिस को लंबे समय से अमानगंज क्षेत्र में जुए के बड़े फड़ संचालित होने की सूचना मिल रही थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने पूरी योजना बनाकर टीम गठित की और देर रात छापेमार कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस की टीम जैसे ही मौके पर पहुंची वहां जुआ खेल रहे लोगों में भगदड़ मच गई लेकिन घेराबंदी पहले से ही मजबूत होने के कारण कोई भी आरोपी भाग नहीं सका और सभी को मौके पर ही दबोच लिया गया।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल नौ जुआरियों को गिरफ्तार किया जिनके कब्जे से 77 हजार 580 रुपये नगद बरामद किए गए। इसके अलावा जुआ खेलने में उपयोग की जा रही 52 पत्तों की ताश की गड्डी भी जब्त की गई। पुलिस ने मौके से एक बिना नंबर की सेल्टोस कार एक स्कूटी चार मोटरसाइकिल और नौ मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिए हैं। जब्त किए गए कुल मशरुका की कीमत 14 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है जो इस पूरे नेटवर्क के बड़े स्तर पर संचालित होने की ओर इशारा करती है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अवैध जुए के अड्डे न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं बल्कि समाज में अपराध को भी बढ़ावा देते हैं। जुए की लत में फंसे लोग अक्सर आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाते हैं और कई बार आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस लगातार ऐसे ठिकानों पर नजर बनाए हुए है और सख्त कार्रवाई कर रही है।

    इस कार्रवाई के बाद इलाके के लोगों ने भी राहत की सांस ली है क्योंकि लंबे समय से यहां जुए के फड़ की शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बेहतर होगी और असामाजिक तत्वों पर लगाम लगेगी।

    पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा सके। साथ ही जब्त किए गए वाहनों और मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है जिससे और सुराग मिलने की उम्मीद है।

    पन्ना पुलिस ने साफ संकेत दिए हैं कि जिले में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है।

  • खजराना में भीषण आग से मची अफरा तफरी समय रहते बचाए गए तीन बच्चे टला बड़ा हादसा

    खजराना में भीषण आग से मची अफरा तफरी समय रहते बचाए गए तीन बच्चे टला बड़ा हादसा


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब खजराना थाना क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला मकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा घर धुएं और लपटों से घिर गया। घर में मौजूद परिवार के सदस्य किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे लेकिन तीसरी मंजिल पर तीन छोटे बच्चे फंस गए जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को समझते हुए बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। उस समय तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी ऐसे में पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत टैंकर मंगवाया। टैंकर पर सीढ़ी लगाकर तीसरी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश की गई। घना धुआं और अंधेरा इस काम को बेहद मुश्किल बना रहे थे लेकिन पुलिसकर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी।

    पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर मानव श्रृंखला बनाई और बेहद जोखिम उठाते हुए सीढ़ी के सहारे तीसरी मंजिल तक पहुंचे। वहां फंसे बच्चों को एक एक कर सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान हर पल खतरा बना हुआ था क्योंकि आग लगातार फैल रही थी लेकिन सूझबूझ और तेजी से काम करते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चों के सुरक्षित बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

    इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई जो कि सबसे बड़ी राहत की बात रही। हालांकि मकान का कुछ हिस्सा आग की चपेट में आ गया लेकिन समय रहते बचाव कार्य होने से बड़ा नुकसान टल गया। बाद में फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पिछले महीने ही इंदौर में एक दर्दनाक हादसा हुआ था जहां एक मकान के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में आग लगने से पूरे घर में आग फैल गई थी। उस हादसे में घर के अंदर फंसे लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके और इलेक्ट्रॉनिक लॉक नहीं खुलने के कारण आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। उस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था।

    ताजा घटना में जिस तरह पुलिस ने तत्परता दिखाई और बिना किसी संसाधन के तत्काल निर्णय लेकर बच्चों की जान बचाई वह सराहनीय है। यह घटना न केवल आपात स्थिति में सूझबूझ की अहमियत को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है।