Category: Madhya Pradesh

  • MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!

    MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister Digvijay Singh) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार (Central government) पर अपनी सरकार के फैसले को अपनाने का जिक्र किया और बताया कि मोदी सरकार (Modi government) उनके मुख्यमंत्री काल के ‘पालक-शिक्षक संघ’ (Parent-Teacher Association- PTA) मॉडल को देश के 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने साल 1993 से 2003 के बीच मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने के दौरान लिया था। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को धन्यवाद भी दिया। इस दौरान उन्होंने पूरे देश में लाखों सरकारी स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई।

    इस बारे में ‘एक्स’ पर शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘मेरे मुख्यमंत्री काल का पालक शिक्षक संघ (PTA) का मॉडल जिसे अब केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। धन्यवाद। मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल 1993-2003 में मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि में हासिल की थी मुझे उस पर गर्व है। अब BJP सरकार मेरे मॉडल को स्वीकार कर लागू कर रही है मुझे प्रसन्नता है। देर से आए दुरुस्त आए। ‘


    सरकारी स्कूल बंद करने के फैसले पर जताई आपत्ति

    आगे उन्होंने केंद्र सरकार के एक फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, ‘देश के शासकीय स्कूलों में सुधार आवश्यक है। पूरे देश में लाखों शासकीय स्कूल बंद किए जा रहे हैं। ये उचित नहीं है। अब शासकीय स्कूलों में वही बच्चे पढ़ रहे हैं जो निजी स्कूलों में फीस नहीं दे पा रहे हैं। शासकीय स्कूलों में छात्रों के पालकों को व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी जाना चाहिए। इन शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है। जय सिया राम।’


    पोस्ट के साथ शेयर किया कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक

    अपनी पोस्ट के साथ दिग्विजय सिंह ने अपनी पार्टी के एक कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक भी शेयर किया था, जिसमें उसने केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि, ‘पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी का पालक-शिक्षक संघ (PTA) का वो मॉडल जिसे केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि आदरणीय दिग्विजय सिंह जी के 10 वर्षीय मुख्यमंत्री काल 1993-2003 में हासिल की, ये अभूतपूर्व हैं।’ अपनी पोस्ट के अंत में उस शख्स ने बताया कि ‘दिग्विजय सिंह जी वर्तमान में शिक्षा, महिला, बाल और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं।’


    शिक्षक-पालक संघ खुद लेगा इतने लाख रुपए तक के फैसले

    पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जिस कार्यकर्ता की पोस्ट के लिंक को शेयर किया, उसने इस खबर से जुड़ा एक न्यूज आर्टिकल भी शेयर किया था, जिसमें केंद्र सरकार के इस फैसले की जानकारी दी गई थी। इसमें बताया गया कि ‘देश के लगभग 15 लाख स्कूलों का प्रबंधन अब सीधे तौर पर अभिभावकों के हाथों में होगा। नए नियमों के मुताबिक, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को 30 लाख रुपए तक के निर्माण कार्य बिना लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के खुद कराने की वित्तीय शक्ति दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इन सुधारों को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 और शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) 2009 के तहत अंतिम रूप दिया है, जिससे अब स्कूल केवल सरकारी संस्थान न रहकर ‘सामुदायिक संपत्ति’ के रूप में विकसित होंगे।’

  • MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

    MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं।

    उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


    भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटाया

    ऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

    भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


    नियुक्ति निरस्त की गई

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।”

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।

  • एमपी में पड़ रही भीषण गर्मी, 40 जिलों में हीट वेव, 5 जिलों में तेज लू की चेतावनी, शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म

    एमपी में पड़ रही भीषण गर्मी, 40 जिलों में हीट वेव, 5 जिलों में तेज लू की चेतावनी, शाजापुर-नौगांव सबसे गर्म

    भोपाल। मध्य प्रदेश में गर्मी लगातार विकराल रूप लेती जा रही है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से के कुछ इलाकों को छोड़ दें तो अधिकांश जिले इस समय हीट वेव की चपेट में हैं। अगले चार दिनों तक भीषण गर्मी पड़ने की चेतावनी जारी की है। शुक्रवार को करीब 40 जिलों में गर्म हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार और देवास में 15 से 17 मई के बीच तेज लू चलने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक गर्मी का असर सबसे अधिक रहेगा। लोगों को सलाह दी गई है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। गुरुवार को भी प्रदेश में भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। शाजापुर और छतरपुर के नौगांव में अधिकतम तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। इसके अलावा खरगोन में 44.6 डिग्री, खंडवा और रतलाम में 44.5 डिग्री, खजुराहो में 44.3 डिग्री तथा रायसेन और दमोह में 44 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44 डिग्री तक पहुंच गया। भोपाल में 43.4 डिग्री, जबलपुर में 43.3 डिग्री, इंदौर में 43 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और धार में दिन के साथ रातें भी गर्म रहने वाली हैं। मौसम विभाग ने इन जिलों में “वॉर्म नाइट” की चेतावनी भी जारी की है, जिससे रात के तापमान में भी राहत मिलने की संभावना कम है।

    भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, गुना, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, शाजापुर, सीहोर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, टीकमगढ़, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि यहां फिलहाल लू का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
    भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, गुना, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, शाजापुर, सीहोर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, छतरपुर, टीकमगढ़, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली समेत कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। वहीं जबलपुर, कटनी, उमरिया, शहडोल, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि यहां फिलहाल लू का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    प्रदेश में मई की शुरुआत से मौसम लगातार बदलता रहा है। 30 अप्रैल से शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर 10 मई तक जारी रहा। पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवात और ट्रफ सिस्टम के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। 11 मई को मौसम साफ हुआ, लेकिन 12 से 14 मई के बीच फिर कई इलाकों में आंधी और बारिश देखने को मिली। इस तरह मई के 14 दिनों में से 12 दिन प्रदेश में कहीं न कहीं बारिश, आंधी या ओलावृष्टि का असर रहा। हालांकि शुक्रवार के लिए बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब TET पास किए बिना नहीं बन सकेंगे शिक्षक

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब TET पास किए बिना नहीं बन सकेंगे शिक्षक


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में शिक्षक भर्ती और प्रमोशन को लेकर बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। अब शिक्षक बनने या पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सामने आया है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि बिना योग्यता परीक्षा के कोई भी व्यक्ति शिक्षक नहीं बन सकता। यह निर्णय Supreme Court of India के हालिया आदेश के बाद चर्चा में आया है, जिसके तहत शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए TET को न्यूनतम पात्रता मानक माना गया है।

    क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पात्रता परीक्षा जरूरी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जिन शिक्षकों को पहले से कुछ छूट या राहत मिल चुकी है, उन्हें अब अतिरिक्त लाभ नहीं दिया जा सकता।

    इस फैसले के बाद अब Madhya Pradesh सहित सभी राज्यों को अपने भर्ती नियमों में बदलाव करना होगा और TET को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।

    किस पर पड़ेगा सीधा असर
    इस फैसले का सीधा असर तीन श्रेणियों पर पड़ेगा-
    पहला, नए उम्मीदवार जो शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं।
    दूसरा, पहले से कार्यरत शिक्षक जो प्रमोशन की उम्मीद कर रहे हैं।
    तीसरा, वे शिक्षक जो बिना TET पास किए सेवा में हैं।
    अब इन सभी के लिए TET पास करना अनिवार्य शर्त बन गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    क्यों जरूरी माना गया TET?
    Teacher Eligibility Test (TET) को इसलिए जरूरी माना जाता है ताकि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक न्यूनतम शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता रखते हों। इस परीक्षा में उम्मीदवारों की विषय समझ, शिक्षण क्षमता और बाल मनोविज्ञान की जांच की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा।

    शिक्षकों और सिस्टम पर असर
    इस फैसले से शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ गई है। कई राज्यों को अपनी भर्ती और प्रमोशन नीतियों को नए सिरे से तैयार करना होगा। हालांकि, लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए यह नियम चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है।

    आगे क्या होगा
    अब राज्य सरकारों को Supreme Court of India के निर्देशों के अनुसार भर्ती नियम अपडेट करने होंगे। आने वाले समय में TET की वैधता, छूट और अन्य नियमों पर भी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा सकती है।

    Madhya Pradesh में शिक्षा व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षक बनने और प्रमोशन की प्रक्रिया अधिक सख्त और योग्यता आधारित हो गई है। इससे जहां शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं कई शिक्षकों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

  • देवास में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, मौत और घायलों से मचा हड़कंप

    देवास में बड़ा हादसा: पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, मौत और घायलों से मचा हड़कंप


    देवास (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के देवास जिले के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में अब तक 3 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और फैक्ट्री परिसर मलबे में तब्दील हो गया।

    यह हादसा करीब सुबह 11:30 बजे हुआ, जब फैक्ट्री में मजदूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। धमाके से फैक्ट्री की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं और आसपास का इलाका दहशत में आ गया।

    हादसे में मृत मजदूरों की पहचान धीरज, सनी और सुमित के रूप में हुई है। घायलों में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई मजदूर शामिल हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

    कई घायलों का इलाज जारी, कुछ की हालत गंभी
    प्रशासन के अनुसार, घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। देवास जिला अस्पताल में 12 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 6 लोग अमलतास अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं 7 गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गया है, जहां MY अस्पताल और चोइथराम अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

    केमिकल मिक्सिंग के दौरान हुआ विस्फोट
    मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, फैक्ट्री में दो केमिकल मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान केमिकल की मात्रा में गड़बड़ी होने से अचानक जोरदार धमाका हो गया। उस समय करीब 15 से 20 मजदूर मौके पर मौजूद थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे से कुछ मिनट पहले ही मजदूरों का लंच तैयार था, लेकिन उससे पहले ही धमाका हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई मजदूर झुलसी हालत में खुद बाहर निकलते दिखाई दिए।

    अवैध फैक्ट्री और सुरक्षा पर उठे सवा
    हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फैक्ट्री के खिलाफ पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का दावा है कि यहां 400 से 500 मजदूर काम करते थे और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। इस घटना के बाद फैक्ट्री को प्रशासन ने सील कर दिया है और मालिक अनिल मालवीय को हिरासत में ले लिया गया है।

    सीएम ने दिए जांच के आदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताया है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।

    पहले भी हो चुका था हादसा
    स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी फैक्ट्री में मार्च 2026 में भी ब्लास्ट हुआ था। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया, जिससे एक बार फिर यह बड़ा हादसा हो गया।

    इलाके में दहशत का माहौ
    धमाके के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। फैक्ट्री परिसर में अब भी रुक-रुककर छोटे धमाकों जैसी आवाजें आ रही हैं, जिससे रेस्क्यू टीम को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है।

  • सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत

    सागर में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई: अनाज रिकॉर्ड दर्ज करने के बदले ली थी रिश्वत


    नई दिल्ली। उज्जैन की जीवनरेखा मानी जाने वाली शिप्रा नदी एक बार फिर अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को लेकर चर्चा में है। करोड़ों रुपए खर्च कर नदी के शुद्धिकरण और सौंदर्यीकरण के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर शिप्रा के दोनों किनारों पर ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ की संरक्षित जमीन पर तेजी से अवैध निर्माण खड़े हो रहे हैं। होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, स्कूल और कॉलोनियों के रूप में फैल रहे इन निर्माणों पर अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को तलब किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिप्रा नदी के 200 मीटर दायरे में हुए सभी अवैध निर्माणों की जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि इन्हें हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नदी तट के आसपास बनाए गए होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन क्षेत्रों को पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टि से संरक्षित माना गया है, वहां निर्माण गतिविधियां लगातार जारी हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नदी तट के समीप किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बलदीप सिंह गांधी ने कोर्ट को बताया कि नदी किनारे 100 से 200 मीटर की सीमा के भीतर 200 से अधिक अवैध निर्माण मौजूद हैं। इनमें कई ऐसे निर्माण भी हैं, जो बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    कोर्ट ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि 15 जून तक सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही तब तक इन अवैध निर्माणों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होने देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने नदी निधि विकास योजना से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। माना जा रहा है कि यदि नगर निगम संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाया तो हाईकोर्ट और सख्त कदम उठा सकता है। शिप्रा नदी को बचाने और सिंहस्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने को लेकर यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

  • भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े

    भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े


    नई दिल्ली। सागर जिला अस्पताल में भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच मंगलवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। महिला मेडिसिन वार्ड क्रमांक-6 में मरीजों के परिजनों के बीच कूलर की हवा में सोने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। रात करीब डेढ़ बजे हुए इस विवाद में दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे और बेल्ट चले, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    घटना का वीडियो बुधवार को सामने आया, जिसमें वार्ड के भीतर लोगों को एक-दूसरे पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। मारपीट के दौरान वार्ड में भर्ती मरीज भयभीत हो गए और कई लोग अपने बिस्तरों से उठकर बाहर निकलते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद कूलर के सामने जगह को लेकर शुरू हुआ था। गर्मी से परेशान परिजन कूलर के पास सोने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान कहासुनी हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

    वार्ड में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और ड्यूटी स्टाफ मौके पर पहुंचे। काफी समझाइश के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया।

    मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल की खराब व्यवस्थाओं के कारण इस तरह के विवाद पैदा हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला वार्ड में 30 से अधिक मरीज भर्ती हैं, लेकिन पूरे वार्ड में सिर्फ दो कूलर लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, कई सीलिंग पंखे भी खराब पड़े हैं, जिससे उमस और गर्मी से मरीजों की हालत खराब हो रही है।

    परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। भीषण गर्मी में मरीजों और उनके साथ रहने वाले अटेंडरों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ रही है।

    घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि वार्डों में कूलर, पंखे और हवा की पर्याप्त व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा

    स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा


    नई दिल्ली। रीवा शहर में बुधवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के उपरहटी स्थित मछरिया गेट इलाके में दो गुटों के बीच मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। शराब के नशे में शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट और पथराव तक पहुंच गई। देर रात सड़क पर हुए इस हंगामे से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई और फिर अचानक लात-घूंसे चलने लगे। कुछ ही देर में लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। सड़क पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा और आसपास मौजूद लोग डर के कारण इधर-उधर भागते नजर आए।

    इसी दौरान एक युवक स्कूटी से मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था, तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और स्कूटी सीधे सड़क किनारे दीवार से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई और वह सड़क पर खून से लथपथ पड़ा रहा।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल युवक को संभाला और संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार युवक की हालत गंभीर बनी हुई है।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली। रहवासियों का आरोप है कि घटना की सूचना कई बार पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर पहुंच जाती तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं और हिंसा को रोका जा सकता था।

    इलाके के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगातार असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। देर रात हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

    फिलहाल पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि मारपीट और पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

  • रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट

    रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली।  रीवा शहर में बुधवार देर रात एक शादी समारोह उस समय हंगामे में बदल गया, जब दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। मामला शहर के व्यस्त इलाके स्थित गायत्री हॉल के सामने का है, जहां बीच सड़क पर दोनों पक्षों के लोगों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। खास बात यह रही कि यह पूरी घटना सिविल लाइन थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे इलाके में देर रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के अनुसार, घोघर निवासी संतोष सेन और रामरती सेन की बेटी पलक सेन का विवाह समारोह गायत्री हॉल में आयोजित किया गया था। बारात रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से आई थी। दूल्हा पंकज सेन अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचा था। कार्यक्रम के दौरान कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए मारपीट में बदल गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के लोग अचानक सड़क पर आ गए और एक-दूसरे पर हमला करने लगे। काफी देर तक सड़क पर लात-घूंसे चलते रहे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सड़क पर हंगामे के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस की मौजूदगी के बाद हालात नियंत्रण में आए।

    घटना के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने पूरी मारपीट का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दोनों पक्षों के लोग सड़क पर एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और विवाद की असली वजह जानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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    नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई।

    निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

    निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए।

    अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

    इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।