Category: Madhya Pradesh

  • स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी

    स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी


    मध्य प्रदेश । भरोसेमंद और तेज डिलीवरी के लिए जानी जाने वाली स्पीड पोस्ट सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल में एक पार्सल की डिलीवरी में हुई देरी ने न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

    मामला भोपाल निवासी ज्योति शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था। इस पार्सल में धार्मिक महत्व की पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कुछ कपड़े रखे गए थे। पार्सल को सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने के लिए उन्होंने 1228 रुपए का शुल्क भी जमा किया था। स्पीड पोस्ट सेवा का चयन इस विश्वास के साथ किया गया था कि पार्सल तय समय सीमा के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा।

    दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन ज्योति शर्मा द्वारा भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच गया। लेकिन दूसरा पार्सल सात दिन बाद, यानी 19 जनवरी को पहुंचा। एक ही दिन और एक ही सेवा के तहत भेजे गए दो पार्सलों की डिलीवरी अवधि में इतना बड़ा अंतर उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पार्सल को किसी दूरस्थ क्षेत्र में नहीं बल्कि अपेक्षाकृत नजदीकी स्थान पर भेजा गया था, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट दो से तीन दिन के भीतर पहुंच जाती है। ऐसे में सात दिन की देरी को सामान्य नहीं माना जा सकता था। आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि डाक विभाग देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया।

    जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच क्रमांक-1, जिसमें अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय शामिल थे, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सेवा लेता है तो समयबद्ध सेवा प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी बन जाती है। केवल यह कह देना कि पार्सल अंततः डिलीवर हो गया, विभाग को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।

    आयोग ने अपने आदेश में कहा कि समय पर डिलीवरी न होना और उसके पीछे उचित कारण न बता पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर डाक विभाग को उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। कुल 8 हजार रुपए की यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयबद्ध सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा प्रदाताओं को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करना होगा और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेह भी बनना पड़ेगा।

  • भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

    भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों का स्वागत करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार अगले वर्ष जनवरी में दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) आयोजित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। उद्योग विभाग और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने आयोजन की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि यह समिट न केवल निवेश आकर्षित करने का बड़ा मंच बनेगी, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक छवि को और मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    फरवरी 2025 में आयोजित पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को बड़ी सफलता मिली थी। दो दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसमें देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान मध्य प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। अब सरकार को उम्मीद है कि दूसरी जीआईएस में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है तथा प्रदेश नए निवेश रिकॉर्ड बना सकता है।

    सूत्रों के अनुसार आगामी समिट के लिए कई संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जा चुका है। इनमें लाल परेड ग्राउंड, नीलबड़-रातीबड़ क्षेत्र में ज्यूडिशियल एकेडमी के आसपास की जमीन तथा राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का परिसर शामिल है। अंतिम निर्णय इस आधार पर लिया जाएगा कि आयोजन में कितने निवेशक, उद्योगपति और विदेशी प्रतिनिधि भाग लेने वाले हैं। पिछली बार मानव संग्रहालय परिसर में हुए आयोजन को भव्य रूप दिया गया था और पूरे शहर को विशेष रूप से सजाया गया था।

    सरकार इस बार केवल भव्यता पर ही नहीं, बल्कि आयोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पिछली समिट के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों और ध्वनि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में अधिकारियों ने इन मुद्दों की समीक्षा की और बेहतर व्यवस्थाओं के निर्देश दिए।

    निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कोलार रोड स्थित सतगढ़ी क्षेत्र में 172 एकड़ भूमि पर मल्टी-प्रोडक्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है। सरकार का मानना है कि ऐसे औद्योगिक क्लस्टर निवेशकों को आकर्षित करने में मददगार साबित होंगे।

    हालांकि पिछली जीआईएस के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्य विवादों में भी रहे। फाउंटेन और अन्य सजावटी कार्यों पर हुए खर्च को लेकर जांच हुई और कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए। लोकायुक्त तक पहुंची शिकायतों के बाद जांच में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई थी। ऐसे में इस बार सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही पर अधिक जोर देती दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्य प्रदेश के लिए निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर लेकर आ सकती है। यदि सरकार पिछली कमियों को दूर कर बेहतर आयोजन करने में सफल रहती है तो भोपाल एक बार फिर देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा सकता है।

  • 'बेटों ने घर से निकाला, अब वृद्धाश्रम ही सहारा', बुजुर्ग दंपती ने एक करोड़ की जमीन दान करने की जताई इच्छा

    'बेटों ने घर से निकाला, अब वृद्धाश्रम ही सहारा', बुजुर्ग दंपती ने एक करोड़ की जमीन दान करने की जताई इच्छा


    देवास देवास में पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग दंपती ने अपने ही बेटों और बहुओं पर संपत्ति के लालच में प्रताड़ित करने तथा घर से निकाल देने के आरोप लगाए हैं। न्याय और सुरक्षा की उम्मीद लेकर मंगलवार को बुजुर्ग दंपती कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने अपनी करोड़ों की संपत्ति बेटों के बजाय किसी वृद्धाश्रम को दान करने की इच्छा भी जाहिर की।

    76 वर्षीय जीवनसिंह और उनकी 72 वर्षीय पत्नी लीलाबाई ने प्रशासन को दिए आवेदन में बताया कि उनके बेटे उनकी जमीन अपने नाम करवाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। दंपती का आरोप है कि जब उन्होंने जमीन हस्तांतरित करने से इनकार किया तो उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अपने ही घर में अपमान और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

    बुजुर्ग महिला लीलाबाई ने भावुक होकर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को उन्होंने बड़े प्यार से पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया और जीवनभर उनकी खुशियों के लिए संघर्ष किया, आज वही बच्चे उन्हें बोझ समझने लगे हैं। उनका आरोप है कि बेटे और बहुएं उनके साथ मारपीट करते हैं और घर में रहने तक नहीं देते। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने घर से ज्यादा भरोसा वृद्धाश्रम पर है।

    जीवनसिंह ने बताया कि उनकी पत्नी लीलाबाई के नाम करीब चार बीघा जमीन दर्ज है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग एक करोड़ रुपए बताई जा रही है। यही जमीन पूरे विवाद की मुख्य वजह बनी हुई है। उनका कहना है कि बेटे इस जमीन को अपने नाम करवाने के लिए दबाव बना रहे हैं और विरोध करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता है।

    दंपती ने प्रशासन को बताया कि वे अब अपनी संपत्ति बेटों को देने के इच्छुक नहीं हैं। उनका मानना है कि जिस परिवार ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा नहीं दी, उसे उनकी मेहनत की कमाई पर अधिकार नहीं होना चाहिए। इसी कारण उन्होंने अपनी जमीन किसी ऐसे वृद्धाश्रम या सामाजिक संस्था को दान करने की इच्छा व्यक्त की है, जहां जरूरतमंद बुजुर्गों की सेवा और देखभाल की जाती हो।

    कलेक्टर कार्यालय में आवेदन मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने बुजुर्ग दंपती की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अपर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही दंपती को अस्थायी रूप से वृद्धाश्रम में रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    यह मामला केवल एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि समाज में बुजुर्गों की स्थिति और उनके सम्मान से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है। जीवन के अंतिम पड़ाव में माता-पिता को सहारे और सम्मान की आवश्यकता होती है, लेकिन जब अपने ही उन्हें ठुकरा दें तो यह स्थिति बेहद पीड़ादायक बन जाती है। फिलहाल बुजुर्ग दंपती प्रशासन से न्याय और सुरक्षित जीवन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

  • बुजुर्ग और बाइक के ऊपर से गुजर गया कंटेनर, फिर भी बच गई जान; पैर में गंभीर चोट, लगे 20 टांके

    बुजुर्ग और बाइक के ऊपर से गुजर गया कंटेनर, फिर भी बच गई जान; पैर में गंभीर चोट, लगे 20 टांके


    देवास  देवास में मंगलवार दोपहर एक ऐसा सड़क हादसा हुआ, जिसने मौके पर मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया। मक्सी बाईपास चौराहे पर एक तेज रफ्तार कंटेनर ने बाइक सवार बुजुर्ग को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद बुजुर्ग सड़क पर गिर गए और उनकी बाइक कंटेनर के नीचे फंस गई। इसके बावजूद सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कंटेनर उनके और बाइक के ऊपर से गुजर गया, लेकिन बुजुर्ग की जान बच गई। हालांकि हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई है और डॉक्टरों को लगभग 20 टांके लगाने पड़े।

    जानकारी के अनुसार अचपल मालवीय नामक बुजुर्ग किसी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने गांव लौट रहे थे। वे अपनी बाइक से मक्सी बाईपास चौराहे के पास पहुंचे ही थे कि पीछे से आ रहे एक कंटेनर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कंटेनर की रफ्तार काफी तेज थी, जिसके कारण बुजुर्ग को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

    टक्कर लगते ही अचपल मालवीय सड़क पर गिर पड़े और उनकी बाइक कंटेनर के पहियों के नीचे फंस गई। हादसे का दृश्य इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोगों को लगा कि बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई होगी। लेकिन कुछ ही क्षण बाद जब उन्होंने बुजुर्ग को हरकत करते देखा तो सभी हैरान रह गए। लोगों ने तत्काल मदद के लिए दौड़ लगाई और पुलिस को सूचना दी।

    घायल बुजुर्ग ने बताया कि वे अंतिम संस्कार से लौट रहे थे और सामान्य गति से बाइक चला रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए कंटेनर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के बाद उन्हें पैर में असहनीय दर्द महसूस हुआ और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

    सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल देवास जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनके पैर में गहरे घाव होने की पुष्टि की। डॉक्टरों ने घायल पैर में करीब 20 टांके लगाए और उन्हें निगरानी में भर्ती कर लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इतना बड़ा कंटेनर एक व्यक्ति और उसकी बाइक के ऊपर से गुजर गया और फिर भी उसकी जान बच गई। हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि व्यस्त चौराहों और बाईपास मार्गों पर यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल बुजुर्ग का उपचार जारी है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

  • बकाया किराया मांगना पड़ा भारी, युवक पर चाकू से हमला; बचाव में आए परिजन भी घायल

    बकाया किराया मांगना पड़ा भारी, युवक पर चाकू से हमला; बचाव में आए परिजन भी घायल


    देवास  देवास में बकाया किराया मांगने को लेकर हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत बुद्धा पार्क कॉलोनी में एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया गया। घटना में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसे बचाने पहुंचे परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आई हैं। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    जानकारी के अनुसार फरियादी किशोर पिता विक्रमसिंह मालवीय ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई कि उसके पुराने किरायेदार के बकाया रुपए दिलाने को लेकर राजेश लाठिया से विवाद हो गया था। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई।

    आरोप है कि विवाद बढ़ने पर राजेश लाठिया ने अपना आपा खो दिया और चाकू निकालकर किशोर पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायल युवक की चीख-पुकार सुनकर उसके परिजन मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने उनके साथ भी मारपीट की, जिससे उन्हें भी चोटें आईं।

    पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमले के दौरान आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद आसपास के लोगों ने घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।

    थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के निर्देशन में आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी जानकारी और मुखबिर तंत्र की मदद से फरार आरोपी की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद दबिश देकर आरोपी राजेश पिता कमलकिशोर लाठिया (29) को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मूल रूप से भयागांव, थाना पीपलरावां का निवासी है और वर्तमान में बुद्धा पार्क कॉलोनी में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं क्षेत्र के लोगों ने भी घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि मामूली आर्थिक विवाद का हिंसक रूप लेना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस अब मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और घायलों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

  • शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी

    शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी


    अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा के बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सनातन धर्म बोर्ड या सनातन धर्म संरक्षण समिति के गठन की मांग भी रखी।

    परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना होने से पहले जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब किसी कार्य की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी जाती है, जिन्हें उस विषय का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं होता, तब इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि मंदिरों की देखरेख करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी मंदिरों को धार्मिक आस्था के केंद्र के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन, साधना और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के अधिकांश मंदिर शासन के अधीन हैं और इनकी देखरेख करने वाले अधिकारियों का लगातार तबादला होता रहता है। ऐसे में उन्हें न तो धार्मिक परंपराओं की गहरी समझ होती है और न ही शास्त्रों, विधि-विधान तथा पाप-पुण्य की अवधारणा का पर्याप्त ज्ञान होता है। यही कारण है कि मंदिरों के संचालन और संरक्षण में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

    अयोध्या में सामने आई कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मेहनत और विश्वास की कमाई मंदिरों में अर्पित करते हैं, इसलिए उस धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि किसी ने इस प्रकार का अपराध किया है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग गौशालाओं, पाठशालाओं, यज्ञशालाओं, धर्मशालाओं और औषधालयों जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का भी समुचित विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

    उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा पद्धति और परंपराओं को अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा जाना चाहिए जिन्हें धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ हो। उन्होंने सरकारों से भी आग्रह किया कि वे मंदिरों की संपत्तियों और धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन धार्मिक संस्थानों के धन और संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें।

  • जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा

    जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा


    जबलपुर जबलपुर में मंगलवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के निवास पर छापामार कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। सुबह शुरू हुई जांच देर तक जारी रही, जिसमें अधिकारियों ने संपत्ति, बैंक खातों और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।

    जानकारी के अनुसार, पोला राव वर्तमान में जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। मूल रूप से आंध्रप्रदेश निवासी पोला राव का निवास विजय नगर क्षेत्र स्थित मुस्कान प्लाजा में है, जहां ईओडब्ल्यू की टीम ने पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की।

    प्रारंभिक जांच में ईओडब्ल्यू को जबलपुर में पोला राव के नाम एक फ्लैट और लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश में करीब एक एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और उनकी खरीद के स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

    ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार जांच में चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन की जानकारी भी मिली है, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपए बताई जा रही है। टीम ने इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश और बीमा योजनाओं से संबंधित अभिलेखों को भी जब्त किया गया है।

    जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान पोला राव के पारिवारिक संबंधों और उनसे जुड़े संपत्ति विवरणों पर भी गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार उनकी बहन और बहनोई भी जबलपुर में निवास करते हैं। उनके मकान और उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित संपत्ति नजूल भूमि पर बनी हुई है, इसलिए उसके वैधानिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि पोला राव वर्तमान में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्डों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। देर शाम तक जारी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके पास कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है और उसका स्रोत क्या है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को जबलपुर दौरे पर, योग दिवस और दीक्षांत समारोह में लेंगी हिस्सा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को जबलपुर दौरे पर, योग दिवस और दीक्षांत समारोह में लेंगी हिस्सा


    जबलपुर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर दौरे पर आ रही हैं। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पूरे शहर में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।

    जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून की शाम लगभग 6 बजे जबलपुर पहुंचेंगी। वह करीब 18 घंटे तक शहर में रहेंगी और इस दौरान दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर केंद्र सरकार की सुरक्षा गाइडलाइन और ब्लू बुक के अनुसार व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और समन्वय के साथ तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    राष्ट्रपति के आगमन से पहले प्रशासन द्वारा 20 जून को फाइनल रिहर्सल भी आयोजित की जाएगी। इस रिहर्सल में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, प्रोटोकॉल और कार्यक्रम संचालन से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। पुलिस विभाग ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगी। योग दिवस के इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना देगी।

    योग दिवस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पहुंचेंगी, जहां वह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां और सम्मान प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

    दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी विद्यार्थियों को दिए जाने की संभावना है।

    प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति की छोटी बेटी के भी इस दौरे में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद राष्ट्रपति उसी दिन दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जबलपुर में उत्साह का माहौल है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हों और सुरक्षा व व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे। राष्ट्रपति का यह दौरा शहर के लिए गौरव और महत्व का अवसर माना जा रहा है।

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

    ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत


    भोपाल भोपाल  के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को हुई अदालत की सुनवाई ने एक बार फिर इस बहुचर्चित प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने जेल में मिलने वाली सुविधाओं और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अदालत के समक्ष रखे।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कहा कि जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से संबंधित खबरों को काट दिया जाता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार पढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने मामले से जुड़ी खबरों और घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकें।

    इसके अलावा उन्होंने वकीलों से मुलाकात के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे समाप्त करने या बढ़ाने की मांग की। गिरिबाला का कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए प्रभावी कानूनी सलाह के लिए अधिक समय जरूरी है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक साथ अपने अधिवक्ताओं से मिलने की अनुमति दी जाए, जिससे कानूनी रणनीति पर बेहतर समन्वय किया जा सके।

    गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि ट्विशा शर्मा के परिजन और रिश्तेदार लगातार मीडिया में बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान ट्विशा की जब्त की गई दवाइयों का जब्ती पंचनामा अभी तक बचाव पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला ने सीबीआई द्वारा दाखिल न्यायिक हिरासत बढ़ाने संबंधी आवेदन की प्रति भी मांगी। अदालत के निर्देश पर संबंधित दस्तावेज उनके वकीलों को उपलब्ध करा दिए गए। वहीं ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने अदालत को बताया कि सीबीआई को अभी तक दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 जून तक बढ़ा दिया। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    इधर, मामले में लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को शिकायत भेजकर कुछ लीगल एड वकीलों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष से जुड़े दिखाई दिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की निगाहें सीबीआई की आगे की जांच, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही इस मामले की आगामी दिशा तय करेंगे।

  • जबलपुर एसपी ऑफिस में महिलाओं के बीच मारपीट, बाल खींचे-गाल नोचे; पुलिस ने कराया बीच-बचाव

    जबलपुर एसपी ऑफिस में महिलाओं के बीच मारपीट, बाल खींचे-गाल नोचे; पुलिस ने कराया बीच-बचाव

    जबलपुर जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय परिसर में मंगलवार दोपहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब दो महिलाएं आपस में भिड़ गईं। देखते ही देखते दोनों के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई और कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे को धक्का दिया, बाल खींचे और जमीन पर पटकने तक की नौबत आ गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग कराया।

    जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार दोपहर करीब एक बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों महिलाओं के बीच पहले तीखी बहस हुई, जिसके बाद विवाद अचानक बढ़ गया। दोनों महिलाएं एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए हाथापाई करने लगीं। इस दौरान एक महिला के चेहरे पर नाखून लगने से चोट आई और उसके गाल से खून निकलने लगा। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों महिलाओं को अलग कराया। इसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस को बुलाया गया। पुलिस दोनों महिलाओं को अपने साथ थाने ले गई, जहां उनसे पूछताछ की गई। बाद में मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भी भेजा गया।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि खुद को यूट्यूब पत्रकार बताने वाली विद्या रैकवार और पिंकी नामक महिला के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर कहासुनी हुई थी। इसी विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

    दूसरी ओर, पिंकी ने आरोप लगाया कि वह एक शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंची थी। उसके अनुसार, वहां पहले से मौजूद विद्या रैकवार ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और विवाद बढ़ने पर मारपीट शुरू हो गई। पिंकी का कहना है कि उसने पहले भी संबंधित मामले की शिकायत पुलिस में की थी और उसे पूर्व में धमकियां भी मिल चुकी हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि दोनों महिलाओं के बीच पहले भी विवाद हो चुका है, जिसकी शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई गई थी। अब पुलिस पुराने विवाद और वर्तमान घटना के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।

    फिलहाल दोनों महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी कार्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।