Category: Madhya Pradesh

  • पाइपलाइन के लिए खोदा गड्ढा बना हादसे की वजह, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

    पाइपलाइन के लिए खोदा गड्ढा बना हादसे की वजह, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में सोमवार देर रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब तेज रफ्तार बाइक 15 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरी। हादसे में दो युवक घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    पाइपलाइन के लिए खोदा गया था गड्ढा

    यह घटना रांझी थाना क्षेत्र के गोकलपुर गांव की है, जहां नगर निगम द्वारा अमृत योजना 2.0 के तहत पाइपलाइन डालने के लिए सड़क पर गहरा गड्ढा खोदा गया था। बताया जा रहा है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरिकेड भी मौके पर गिरे हुए थे, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया।

    80 किमी/घंटा की रफ्तार बनी हादसे की वजह

    सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, बाइक की रफ्तार 80 किमी प्रति घंटे से ज्यादा थी। तेज गति के कारण चालक गड्ढे को समय पर देख नहीं सका और बाइक सीधे उसमें जा गिरी।

    पुलिस ने दिखाई तत्परता

    घटना के समय रांझी पुलिस की गश्त टीम पास ही मौजूद थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को तुरंत रांझी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।

    अधिकारियों की लापरवाही पर उठे सवाल

    स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढे के आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। बैरिकेड्स का गिरा होना और चेतावनी संकेतों का अभाव इस हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जबलपुर में हुआ यह हादसा भले ही जानलेवा नहीं रहा, लेकिन यह साफ करता है कि सड़क निर्माण और खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है।

  • साथ जीने-मरने की कसम बनी हकीकत, दूल्हा-दुल्हन सा सजकर की आत्महत्या

    साथ जीने-मरने की कसम बनी हकीकत, दूल्हा-दुल्हन सा सजकर की आत्महत्या


    नई दिल्ली। मुठिया टोला, चांदपुर मुठिया टोला में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दंपती ने साथ जीने-मरने की कसम को सच करते हुए फांसी लगाकर जान दे दी। 1 अप्रैल को दोनों अपने ही घर में फंदे से लटके मिले, जिससे परिवार और पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

    सुसाइड से पहले की अजीब तैयारी

    परिजनों के अनुसार, घटना से पहले दोनों ने खुद को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाया था। घर में पॉपकॉर्न और शराब भी लाई गई थी। इतना ही नहीं, मोबाइल में “साथ जिएंगे, साथ मरेंगे…” की रिंगटोन भी सेट की गई थी। इन सभी तैयारियों से साफ है कि यह कदम अचानक नहीं, बल्कि पूरी योजना के साथ उठाया गया।

    नई रस्सी से फांसी लगाकर दी जान

    बताया जा रहा है कि दंपती ने नई रस्सी का इस्तेमाल कर फांसी लगाई। घटना के समय घर में कोई और मौजूद नहीं था। जब परिजनों ने देखा तो दोनों मृत अवस्था में लटके मिले, जिससे घर में कोहराम मच गया।

    पिता का दर्द: “घर में कोई परेशानी नहीं थी”

    मृतक युवक के पिता गणेश पटेल ने रोते हुए बताया कि दोनों की शादी परिवार की सहमति से हुई थी। रिश्तेदारी में पहचान होने के बाद दोनों की जिद पर शादी कराई गई थी। उन्होंने कहा, “शादी के ढाई साल तक सबकुछ सामान्य था। घर में कोई परेशानी नहीं थी, फिर भी उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह समझ से परे है।”

    पुराने रिश्ते को लेकर शक

    पिता ने आशंका जताई कि शादी से पहले बहू किसी अन्य युवक के संपर्क में थी। उनका कहना है कि संभव है वही व्यक्ति उसे परेशान कर रहा हो। हालांकि यह सिर्फ एक शक है और असली वजह जांच के बाद ही सामने आएगी।

    अनसुलझे सवालों में उलझी कहानी

    यह घटना कई सवाल छोड़ गई है-

    क्या दंपती किसी मानसिक दबाव में थे?
    क्या किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका थी?
    या फिर यह दोनों का आपसी फैसला था?
    इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं।

    पुलिस जांच जारी

    पुलिस मामले की जांच में जुटी है और सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। मोबाइल, कॉल रिकॉर्ड और आसपास के लोगों से पूछताछ के जरिए सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

    चांदपुर की यह घटना एक गहरी त्रासदी है, जिसने परिवार को तोड़कर रख दिया है और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • प्रॉपर्टी विवाद में खूनी हमला, महिला ने मिर्ची झोंकी, साथी ने मारी गोली!

    प्रॉपर्टी विवाद में खूनी हमला, महिला ने मिर्ची झोंकी, साथी ने मारी गोली!


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां हाई कोर्ट में मुंशी का काम करने वाले व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया गया। हमलावरों ने पहले उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डाला और फिर गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पीड़ित खुद पुलिस चौकी पहुंचा, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    महिला ने रोका, फिर शुरू हुआ हमला

    घटना पाटन थाना क्षेत्र के बेनीखेड़ा इलाके की है। जानकारी के अनुसार, आगाशोद निवासी 52 वर्षीय ठाकुर दास पटेल बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने चेहरा ढंककर उन्हें रास्ते में रोका और अचानक उनकी आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया। मिर्च लगते ही उनका संतुलन बिगड़ गया और वे बाइक सहित सड़क पर गिर पड़े।

    घात लगाए बैठे आरोपियों ने घेरकर की मारपीट

    जैसे ही ठाकुर दास नीचे गिरे, पहले से घात लगाए बैठे 6 अन्य आरोपी वहां पहुंच गए और उन्हें घेरकर मारपीट करने लगे। पीड़ित ने किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने कट्टे से उन पर फायर कर दिया। गोली उनके पेट के किनारे जा फंसी, जबकि छर्रे गले में लगे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

    लहूलुहान हालत में खुद पहुंचे पुलिस चौकी

    हैरानी की बात यह रही कि इतनी गंभीर हालत में भी ठाकुर दास ने हिम्मत नहीं हारी और खुद नुनसर पुलिस चौकी पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तत्काल अस्पताल भिजवाया।

    जमीन विवाद बना हमले की वजह

    घायल ने पुलिस को बताया कि यह हमला प्रॉपर्टी विवाद का नतीजा है। उन्होंने ‘सूखा’ क्षेत्र में एक जमीन खरीदने के लिए करीब 22 लाख रुपए दिए थे, लेकिन आरोपी रजिस्ट्री नहीं कर रहे थे। पीड़ित ने दीपक काक्षी, गोपाल काक्षी, वंदना सिंह, बृजलाल पटेल, अर्जुन और सिद्धार्थ दुबे समेत कुल 7 लोगों पर हमले का आरोप लगाया है।

    हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    नुनसर पुलिस चौकी प्रभारी विपिन तिवारी के अनुसार, पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है और घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है।

    जबलपुर में हुई यह घटना प्रॉपर्टी विवादों के खतरनाक रूप को उजागर करती है, जहां मामूली विवाद भी जानलेवा हमले में बदल सकता है। पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।

  • आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान पर एक्शन, 10 दिन में हटाने के निर्देश!

    आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान पर एक्शन, 10 दिन में हटाने के निर्देश!


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर के महल सराय इलाके में एक शराब दुकान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने निर्धारित स्थान के बजाय आईटीआई परिसर के सामने ही दुकान खोल दी, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

    नियमों की अनदेखी पर आबकारी विभाग सख्त

    मामले की शिकायत मिलने के बाद आबकारी विभाग ने जांच की और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 10 दिनों के भीतर दुकान को हटाया जाए, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वृत्त प्रभारी तीर्थराज भारद्वाज ने बताया कि निरीक्षण के दौरान दुकान का स्थान नियमों के विपरीत पाया गया।

    शैक्षणिक संस्थानों के पास होने से बढ़ा विरोध

    इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह दुकान का लोकेशन है। शराब दुकान के पास ही आईटीआई, बीटीआई और एसबीआई ट्रेनिंग सेंटर जैसे शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं।

    इन संस्थानों में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते-जाते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों ने इसे अनुचित बताते हुए पहले भी विरोध जताया था।

    स्थानीय लोगों ने की थी शिकायत

    क्षेत्र के निवासियों ने आबकारी विभाग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि दुकान को तय स्थान से हटाकर गलत जगह संचालित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह नियमों का उल्लंघन है और इससे सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो सकता है।

    कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकती है सख्ती

    आबकारी विभाग ने साफ किया है कि यदि 10 दिन के भीतर दुकान नहीं हटाई जाती, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि ठेकेदार विभाग के निर्देशों का पालन करता है या नहीं।

    शिवपुरी में आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान का मामला नियमों की अनदेखी और स्थानीय विरोध के कारण तूल पकड़ चुका है। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए नोटिस जारी किया है, जिससे जल्द समाधान की उम्मीद है।

  • शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर, पेड़ से टकराकर रुका-बड़ा हादसा टला!

    शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर, पेड़ से टकराकर रुका-बड़ा हादसा टला!


    शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जगतपुर तिराहा पर खड़ा एक ट्रैक्टर अचानक बिना ड्राइवर के ही दौड़ पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया।

    कैसे हुआ हादसा?

    जानकारी के मुताबिक, कुमरौआ गांव के किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा किया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान खोंकर गांव के उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी।

    गियर में खड़ा था ट्रैक्टर, अचानक हो गया स्टार्ट

    बताया जा रहा है कि खड़ा ट्रैक्टर गियर में था। जैसे ही पीछे से टक्कर लगी, ट्रैक्टर स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया और बिना ड्राइवर के ही अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा।

    पेड़ से टकराकर थमा रफ्तार का कहर

    बेकाबू ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकरा गया। इसी के साथ उसकी रफ्तार थम गई और एक बड़ा हादसा टल गया।

    बड़ा हादसा टलने से लोगों ने ली राहत की सांस

    घटना के समय आसपास कोई राहगीर या अन्य वाहन मौजूद नहीं था। अगर ट्रैक्टर किसी की चपेट में आ जाता, तो गंभीर हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने इसे बड़ी राहत बताया।

    लापरवाही बन सकती थी जानलेवा

    यह घटना एक बार फिर सड़क पर वाहन खड़ा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को दर्शाती है। गाड़ी को गियर में छोड़ना या सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज करना कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है।

    कोलारस के जगतपुर तिराहा पर हुई यह घटना भले ही बिना किसी नुकसान के खत्म हो गई, लेकिन यह एक गंभीर चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

  • आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम मध्यप्रदेश में 48% स्टार्टअप महिलाओं के नाम

    आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम मध्यप्रदेश में 48% स्टार्टअप महिलाओं के नाम

    भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए एमएसएमई विकास नीति 2025 और स्टार्टअप नीति 2025 के जरिए बड़ा कदम उठाया है। इन नीतियों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में मजबूत आधार प्रदान करना है। राज्य सरकार का दावा है कि इन पहलों ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं और “वोकल फॉर लोकल” के विजन को भी मजबूती दी है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 24.34 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में से लगभग 4.11 लाख इकाइयों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो करीब 17 प्रतिशत हिस्सेदारी को दर्शाता है।

    स्टार्टअप क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कुल 7264 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 3476 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो लगभग 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा देश में महिला उद्यमिता की मजबूत स्थिति को दर्शाता है और प्रदेश को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

    एमएसएमई विकास नीति 2025 के तहत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिन महिला उद्यमियों द्वारा संयंत्र और मशीनरी में निवेश किया जाता है, उन्हें ₹10 करोड़ तक के निवेश पर अधिकतम 48 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए यह सहायता बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह 40 प्रतिशत निर्धारित है। यह प्रावधान महिलाओं को बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 में भी महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों को 18 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें प्रति ट्रॉंच ₹18 लाख तक और कुल मिलाकर ₹72 लाख तक की सहायता शामिल है। वहीं अन्य स्टार्टअप्स के लिए यह सीमा 15 प्रतिशत या ₹15 लाख तक सीमित है।

    इन नीतियों के चलते मध्यप्रदेश में महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और राज्य सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और भी मजबूत होगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

  • जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज

    जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम झालरिया में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां 3 साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं।

    जानकारी के अनुसार बच्चा भागीरथ अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के लिए क्षेत्र में आया था। खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया जहां पहले ढक्कन लगा हुआ था लेकिन बताया जा रहा है कि जानवरों के चरने के दौरान वह ढक्कन हट गया और इसी कारण यह हादसा हो गया।

    हादसा गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच हुआ जिसके बाद तुरंत प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। घटना के बाद से रातभर लगातार राहत और बचाव कार्य चलता रहा और मशीनों की मदद से ऑपरेशन को तेज किया गया।

    पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चे को करीब 75 फीट की गहराई पर लोकेट कर लिया गया है। बोरवेल के अंदर कैमरे और विशेष उपकरण डालकर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि हर पल की जानकारी मिल सके और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

    रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए मौके पर 5 पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही बोरवेल के पास समानांतर गड्ढा खोदकर टनल बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि वैकल्पिक रास्ते से बच्चे तक पहुंचा जा सके।

    प्रशासन ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर दिया है और किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौके पर न जुटें और राहत कार्य में सहयोग करें।

    मासूम भागीरथ, जो राजस्थान के पाली जिले के निवासी बताए जा रहे हैं, अपने परिवार के साथ कुछ दिनों से इस क्षेत्र में रुके हुए थे। फिलहाल पूरे प्रशासन का ध्यान केवल एक ही लक्ष्य पर है किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना।

    यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत टीमों का ऑपरेशन लगातार जारी है और सभी की नजर अब सिर्फ इस बात पर है कि मासूम को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

  • फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा

    फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा


    भोपाल । भोपाल में एयरलाइन सेवाओं को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है जहां फ्लाई ओला एयरलाइंस पर सेवा में कमी और यात्रियों को परेशान करने के आरोप में 50 लाख रुपये का दावा ठोका गया है। यह दावा कमलाकर सिंह द्वारा उपभोक्ता आयोग में दायर किया गया है जिससे एयरलाइन सेक्टर में हलचल मच गई है।

    पूर्व कुलपति कमलाकर सिंह ने एयरलाइन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी यात्रा के दौरान न केवल लापरवाही बरती गई बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया गया। इस मामले की सुनवाई अब 21 अप्रैल को उपभोक्ता आयोग में तय की गई है जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

    शिकायत के अनुसार कमलाकर सिंह ने 22 मार्च को रीवा से भोपाल के लिए टिकट बुक कराया था और 26 मार्च की उड़ान के लिए उनका टिकट कन्फर्म था। तय समय पर वे रीवा एयरपोर्ट पहुंच गए लेकिन उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। बाद में एयरलाइन की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए फ्लाइट रद्द कर दी गई।

    सबसे गंभीर बात यह रही कि एयरलाइन ने यात्रियों को समय रहते कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कमलाकर सिंह को मजबूरी में निजी वाहन से करीब 10 से 12 घंटे का लंबा और थकाऊ सफर तय कर भोपाल पहुंचना पड़ा।

    इस दौरान उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के दिशा निर्देशों का भी पालन नहीं किया जो यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।

    उपभोक्ता आयोग में दायर इस मामले में सेवा में कमी के साथ साथ मानसिक उत्पीड़न को भी आधार बनाया गया है। यदि आयोग इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देता है तो यह एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश होगा कि यात्रियों की सुविधाओं और अधिकारों की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है।

    यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रही हैं या नहीं। अब सभी की नजर 21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है जहां इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।

  • LPG कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार 2840 जगह छापे हजारों सिलेंडर जब्त

    LPG कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार 2840 जगह छापे हजारों सिलेंडर जब्त

    भोपाल । मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा और सख्त अभियान चलाया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अगुवाई में पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया गया जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं।

    अभियान के तहत प्रदेशभर में कुल 2840 स्थानों पर जांच की गई जहां से 3691 एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए गए। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। इस दौरान 11 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई जबकि पेट्रोल पंपों पर भी सख्ती दिखाई गई और 734 रिटेल आउटलेट की जांच में एक मामला दर्ज किया गया।

    सरकार ने केवल कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि आगे की व्यवस्था को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की पाइपलाइन पहुंच चुकी है वहां के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द पीएनजी कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि उपभोक्ता आगामी तीन महीनों में पीएनजी कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन्हें एलपीजी गैस की सप्लाई बंद की जा सकती है। यह कदम गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है ताकि कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

    सरकार ने सीजीडी संस्थाओं को भी निर्देशित किया है कि वे पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन मिलने के 24 घंटे के भीतर पाइपलाइन बिछाने की स्वीकृति जारी करें। इसके साथ ही पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठान, सरकारी कॉलोनियों और सुधार गृहों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने को कहा गया है।

    औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस बदलाव में शामिल किया जा रहा है। जहां जहां पाइपलाइन उपलब्ध है वहां की औद्योगिक इकाइयों को चिन्हित कर उन्हें पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक नियंत्रित और प्रभावी बन सके।

    इस अभियान के तहत विभिन्न गैस कंपनियों जैसे GAIL Gas Limited Indian Oil Corporation Bharat Petroleum और Gujarat Gas को कंट्रोल रूम नंबर जारी कर उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने की सुविधा दी गई है।

    सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब गैस वितरण में पारदर्शिता और सख्ती दोनों साथ साथ लागू की जाएंगी। एलपीजी की कालाबाजारी पर लगाम कसने के साथ साथ पीएनजी को बढ़ावा देकर एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • थाने में जहर से मौत पर बवाल पीड़ित परिवार से मिले पटवारी निष्पक्ष जांच की मांग तेज

    थाने में जहर से मौत पर बवाल पीड़ित परिवार से मिले पटवारी निष्पक्ष जांच की मांग तेज


    छतरपुर । मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में थाने के अंदर जहर खाकर हुई सुरेंद्र सिंह की मौत का मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में अब जीतू पटवारी ने हस्तक्षेप करते हुए इसकी जांच CBI से कराने की मांग उठाई है जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।

    पटवारी आज छतरपुर जिले के सरानी गांव पहुंचे जहां उन्होंने मृतक सुरेंद्र सिंह के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिवार से बातचीत के बाद उन्होंने साफ कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है क्योंकि इसमें गंभीर आरोप सामने आए हैं और स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इस मामले में सबसे बड़ा आरोप छतरपुर की भाजपा विधायक ललिता यादव के पुत्र मोनू यादव पर लगा है। आरोप है कि मोनू यादव ने सुरेंद्र सिंह के साथ मारपीट की थी जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। इस आरोप ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है क्योंकि इसमें राजनीतिक प्रभाव की आशंका भी जताई जा रही है।

    मृतक की पत्नी ने भी इस मामले में गंभीर खुलासा करते हुए बताया कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान सुरेंद्र सिंह ने खुद उसे बताया था कि मोनू यादव ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की थी। इस बयान के बाद परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया है और वे लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

    जीतू पटवारी ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में सही तरीके से कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

    यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। थाने के भीतर हुई इस घटना ने पुलिस कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है।

    फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव और परिजनों के आरोपों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि क्या इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी जाती है या फिर स्थानीय स्तर पर ही इसका निपटारा किया जाता है।