Category: Madhya Pradesh

  • नागपुर रेल मंडल में 20 दिन का ब्लॉक: 2 ट्रेनें पूरी तरह रद्द, कई गाड़ियां अलग-अलग तारीखों में रहेंगी प्रभावित

    नागपुर रेल मंडल में 20 दिन का ब्लॉक: 2 ट्रेनें पूरी तरह रद्द, कई गाड़ियां अलग-अलग तारीखों में रहेंगी प्रभावित


    भोपाल । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में गोंदिया स्टेशन पर प्रस्तावित तकनीकी कार्य के चलते भोपाल मंडल से गुजरने वाली कई प्रमुख ट्रेनें प्रभावित रहेंगी। रेलवे द्वारा लाइन नंबर-05 पर वॉशेबल एप्रन हटाकर बैलेस्टेड ट्रैक में बदलाव किया जाएगा, जिसके कारण 20 दिनों तक यातायात ब्लॉक लागू रहेगा।

    गोंदिया स्टेशन पर होगा ट्रैक अपग्रेड

    रेलवे प्रशासन के मुताबिक गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म-3 से जुड़ी UP मेन लाइन (लाइन नंबर-05) पर वॉशेबल एप्रन को हटाकर बैलेस्टेड ट्रैक बिछाया जाएगा। इस कार्य का उद्देश्य ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाना और उनकी गति में सुधार करना है। काम के दौरान इस लाइन पर आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा, जिससे भोपाल मंडल की कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। 24 अप्रैल 2026 तक तीन जोड़ी ट्रेनों पर इसका असर पड़ेगा और अलग-अलग तारीखों में उनकी सेवाएं बाधित रहेंगी।

    ये ट्रेनें रहेंगी पूरी तरह रद्द

    गाड़ी संख्या 18237 कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस – 25 अप्रैल 2026 तक रद्द
    गाड़ी संख्या 18238 अमृतसर-बिलासपुर एक्सप्रेस – 27 अप्रैल 2026 तक रद्द

    इन ट्रेनों की सेवाएं रहेंगी प्रभावित (आंशिक निरस्तीकरण)

    12410 हजरत निजामुद्दीन-रायगढ़ एक्सप्रेस – 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल
    12409 रायगढ़-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस – 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल
    12807 विशाखापत्तनम-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस – 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल
    12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस – 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल

    यात्रियों के लिए जरूरी सूचना

    रेलवे प्रशासन ने इस अस्थायी असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए यात्रियों से सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य भविष्य में बेहतर सुरक्षा, तेज रफ्तार और सुगम संचालन सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

  • राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने का पूरा अधिकार, पुराने बसों की छुट्टी तय!

    राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने का पूरा अधिकार, पुराने बसों की छुट्टी तय!


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की सड़क परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है। प्रदेश में 15 साल पुरानी 899 कमर्शियल बसें जल्द ही चलन से बाहर होंगी। राज्य सरकार ने 14 नवंबर 2025 को इसका आदेश जारी किया था, जिसे हाईकोर्ट ने वैध करार दिया। बस ऑपरेटरों की याचिकाओं को जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने और स्टेज कैरिज परमिट से जुड़े निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।

    15 साल की उम्र पार कर चुकी बसें, खतरनाक हालात

    मध्यप्रदेश में 899 ऐसी बसें हैं, जो 15 साल की उम्र पार कर चुकी हैं। ये वाहन खटारा हो चुके हैं और फिर भी शहरों और जिलों के बीच यात्रियों को ढो रही हैं। जानकारी के अनुसार, सबसे ज्यादा खटारा बसें जबलपुर में हैं और सबसे कम रीवा संभाग में। परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने सभी बसों की सूची आयुक्त विवेक शर्मा को सौंप दी है। रोजाना प्रदेश में 11,000 वैध बसें चल रही हैं, जिनमें लगभग 4.5 लाख यात्री सफर करते हैं।

    बस ऑपरेटरों की याचिकाओं पर कोर्ट का फैसला

    बस ऑपरेटरों ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उनकी बसों को जब परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट मिला, तब उनकी उम्र 15 साल नहीं हुई थी। लेकिन अदालत ने कहा कि नियम और संशोधन पहले ही वैध ठहराए जा चुके हैं और उनके आधार पर जारी आदेश अवैध नहीं है। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने 27 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद सभी 10 याचिकाएं खारिज कर दीं। अब प्रदेश में 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

    पुराने वाहनों पर नियम और सख्ती

    मध्यप्रदेश मोटरयान नियम, 1994 के तहत:

    10 साल से पुरानी स्टेज कैरिज बस को अंतरराज्यीय परमिट नहीं मिलेगा।
    15 साल से पुरानी मंजिली बस को राज्य के अंदर साधारण रूट का परमिट नहीं मिलेगा।
    20 साल से पुरानी गाड़ी को किसी भी तरह का परमिट नहीं मिलेगा।

    हालांकि, अधिकारियों की लापरवाही के कारण 899 खटारा बसें अब तक सड़कों पर चल रही थीं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में थी।

    नई ‘जनबस’ योजना से मिलेगा आधुनिक परिवहन

    पुरानी बसों के हटने के बाद सरकार ‘जनबस’ योजना लागू करेगी। अप्रैल 2026 से इंदौर से शुरुआत होगी और पहले चरण में 25 जिलों में 10,879 बसों का संचालन किया जाएगा। योजना में ई-बस, मोबाइल ऐप, सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग और कार्गो सुविधा जैसी आधुनिक सेवाएं शामिल होंगी। इसके संचालन के लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड नामक नई कंपनी बनाई गई है, जबकि बसें निजी ऑपरेटर चलाएंगे।

     मध्यप्रदेश सरकार ने 15 साल से पुरानी 899 बसों को सड़क से हटाने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने आदेश को वैध करार दिया, बस ऑपरेटरों की सभी याचिकाएं खारिज की गईं। पुरानी बसें हटने के बाद ‘जनबस’ योजना शुरू होगी, जिससे आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था प्रदेशवासियों को मिलेगी।

  • नर्मदापुरम में दर्दनाक हादसा: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में महुआ बीनने गए आदिवासी को बाघ ने बनाया शिकार

    नर्मदापुरम में दर्दनाक हादसा: सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में महुआ बीनने गए आदिवासी को बाघ ने बनाया शिकार


    नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र में महुआ बीनने गए एक 49 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण को बाघ ने हमला कर मार डाला। घटना के बाद बाघ शव के पास ही बैठा रहा। गुरुवार सुबह जब परिजन तलाश करते हुए मौके पर पहुंचे तो उन्होंने बाघ को वहीं देखा जिसे बाद में भगाया गया।

    महुआ बीनने गया था अगले दिन मिला शव

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान सुधराम 49 पिता हजारी चौहान निवासी चनागढ़ झुनकर के रूप में हुई है। वह बुधवार दोपहर तवा नदी पार कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में महुआ बीनने गया था। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने गुरुवार सुबह उसकी तलाश शुरू की। जंगल में खोजबीन के दौरान महुआ के पेड़ के पास बाघ बैठा दिखाई दिया। पास जाकर देखा तो मृतक का सिर और धड़ पड़ा था जबकि बाघ उसके हाथ-पैर खा चुका था।

    शव के पास बैठा मिला बाघ

    परिजन और ग्रामीण बाघ को देखकर घबरा गए लेकिन हिम्मत जुटाकर उसे वहां से भगाया। इसके बाद घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शव को सुखतवा भिजवाया। केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि मृतक महुआ बीनने गया था और वापस नहीं लौटा। बाघ ने उसके हाथ-पैर खा लिए थे और केवल सिर व धड़ ही मिला है। मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। वहीं एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना टाइगर रिजर्व के बैकवॉटर क्षेत्र के पास हुई है।

  • रैकी कर चोरी का प्लान, कबाड़ बीनने वाला बन गया हड़प का आरोपी

    रैकी कर चोरी का प्लान, कबाड़ बीनने वाला बन गया हड़प का आरोपी


    नई दिल्ली। नर्मदापुरम के जुमेराती क्षेत्र में 3 अप्रैल को एक सूने मकान का ताला तोड़कर 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी करने वाले 19 वर्षीय आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    चोरी की घटना

    पुलिस के अनुसार, फरियादी रामगोपाल पाण्डे अपने परिवार के साथ 3 अप्रैल को गांव गए थे। इसी दौरान 19 वर्षीय शेख शादाब (पिता शेख नौशाद), जो कबाड़ बीनने का काम करता है, मकान की रैकी कर चोरी को अंजाम दिया। उसने गोदरेज का ताला तोड़कर सोने-चांदी के आभूषण और 2,500 रुपए नकद चोरी किए।

    पुलिस की कार्रवाई

    कोतवाली टीआई कंचन सिंह ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस ने घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी की लोकेशन खंडवा के ग्राम सिहाड़ा में ट्रेस की। टीम ने शेख शादाब को गिरफ्तार कर लिया।

    माल बरामद

    पूछताछ में आरोपी ने चोरी स्वीकार की। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी की गई 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर और भगवान की चांदी की मूर्ति बरामद की।

    कबाड़ बीनने वाला 19 वर्षीय शादाब नर्मदापुरम में सूने मकान की रैकी कर 5 लाख रुपए की चोरी कर गया था। पुलिस ने उसे खंडवा से गिरफ्तार कर चोरी का पूरा माल बरामद कर लिया है।

  • योजना में कटौती का असर, बैतूल में पात्र जोड़े वंचित, प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

    योजना में कटौती का असर, बैतूल में पात्र जोड़े वंचित, प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

    बैतूल । बैतूल मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में इस वर्ष की गई कटौती का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। जिले में सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिए निर्धारित सीमित संख्या के चलते बड़ी संख्या में पात्र जोड़े योजना का लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आवेदन करने पहुंचे कई जोड़ों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा, जिससे मौके पर हंगामे जैसी स्थिति भी देखने को मिली।

    प्रशासन ने इस वर्ष जिले में चार स्थानों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। प्रत्येक आयोजन में अधिकतम 200 जोड़ों को ही शामिल किए जाने की अनुमति दी गई है। इस प्रकार पूरे जिले में केवल 800 जोड़ों का ही विवाह इस योजना के तहत संपन्न हो सकेगा। जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या कई गुना अधिक रही है और बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिलता रहा है।

    योजना में इस कटौती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष का माहौल बन गया है। कई परिवारों ने पहले से ही अपनी बेटियों के विवाह के लिए इस योजना पर भरोसा किया था, लेकिन सीमित संख्या के कारण वे अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि वे सभी जरूरी पात्रता पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें केवल संख्या सीमा के कारण योजना से बाहर कर दिया गया है, जो उनके लिए बेहद निराशाजनक है।

    मौके पर पहुंचे कई लोगों ने प्रशासन के इस फैसले पर सवाल उठाए और संख्या बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है, लेकिन संख्या सीमित कर देने से इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ स्थानों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को लोगों को समझाइश देकर शांत करना पड़ा।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय शासन स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार लिया गया है और उन्हें उसी के तहत कार्यक्रम आयोजित करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

    मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लंबे समय से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा रही है, जिसके तहत सामूहिक विवाह के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। लेकिन इस वर्ष संख्या में की गई कटौती ने इस योजना की पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    फिलहाल बैतूल में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे, ताकि अधिक से अधिक पात्र जोड़ों को इस योजना का लाभ मिल सके और किसी को भी निराश होकर लौटना न पड़े।

  • नर्मदापुरम का ग्रामीण बाघ का शिकार, जंगल में हुई जानलेवा घटना!

    नर्मदापुरम का ग्रामीण बाघ का शिकार, जंगल में हुई जानलेवा घटना!


    नर्मदापुरमनर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र में गुरुवार को एक 49 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण सुधराम पर बाघ ने हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया। घटना के अनुसार, बाघ ने सुधराम के हाथ और पैर खा लिए और शव के पास बैठा रहा।

    घटना का विवरण

    पुलिस के अनुसार, मृतक सुधराम, पिता हजारी चौहान (निवासी चनागढ़ झुनकर), बुधवार दोपहर तवा नदी पार कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में महुआ बीनने गया था। शाम तक घर न लौटने पर परिजन गुरुवार सुबह जंगल में खोजबीन के लिए निकले। जंगल में खोज के दौरान सुधराम का शव महुआ के पेड़ के पास मिला, जबकि बाघ उसके धड़ के पास बैठा था। परिजनों ने हिम्मत करके बाघ को वहां से भगाया और घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी।

    पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई

    केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि शव के सिर और धड़ को सुखतवा लाया गया, जबकि हाथ-पैर बाघ ने खा लिए थे। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने पुष्टि की कि यह घटना बैक वॉटर क्षेत्र में हुई, जो एसटीआर के अंतर्गत आता है।

    घटना से प्रभावित परिजन

    शव के पास बाघ को देखकर परिजन और ग्रामीण बुरी तरह सहम गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने हिम्मत करके बाघ को भगाया और शव को सुरक्षित निकाला।

  • 11 हजार लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक, सीहोर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन

    11 हजार लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक, सीहोर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन


    सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले से आस्था और भक्ति का एक अद्भुत दृश्य सामने आया है जहां भेरूंदा क्षेत्र के सातदेव स्थित प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मां नर्मदा का 11 हजार लीटर दूध से अभिषेक किया गया जिसका दृश्य देखने वालों के लिए श्रद्धा और आश्चर्य का संगम बन गया। इस अनोखे आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे भक्ति का विराट रूप बता रहे हैं।

    यह आयोजन संत शिवानंद महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ जिसमें दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महायज्ञ की शुरुआत 18 मार्च से हुई थी और 21 दिनों तक लगातार धार्मिक अनुष्ठान पूजा-पाठ और हवन का क्रम चलता रहा। प्रतिदिन करीब 21 क्विंटल हवन सामग्री से महाहवन किया गया जिसमें विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों के साथ विशेष सामग्रियों का उपयोग किया गया। पूरे आयोजन के दौरान लगभग 41 टन हवन सामग्री की आहुति दी गई जिसमें सोने और चांदी की आहुति भी शामिल रही।

    समापन के दिन सबसे खास क्षण वह रहा जब टैंकरों के माध्यम से 11 हजार लीटर दूध लाकर मां नर्मदा का अभिषेक किया गया। यह दृश्य बेहद भव्य और भावुक करने वाला था। श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए और पूरे क्षेत्र में मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज सुनाई देती रही। दीपों की रोशनी और धार्मिक माहौल ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

    महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में नारियल अर्पित किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन के लिए करीब 5 एकड़ क्षेत्र में विशाल पंडाल तैयार किया गया था जहां व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित तरीके से की गई थीं।

    सातदेव क्षेत्र को प्राचीन काल से सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी के मानस पुत्र सप्त ऋषियों ने यहां कठोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

    इतिहास के अनुसार यह क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन रहा और बाद में मराठा साम्राज्य की महान शासक अहिल्याबाई होल्कर ने यहां कई धार्मिक निर्माण कराए जिससे इसकी महत्ता और बढ़ गई। आज भी यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस तरह सीहोर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना बल्कि सामूहिक सहभागिता और परंपरा के संरक्षण का भी एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।

  • दतिया बस हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

    दतिया बस हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा


    ग्वालियरग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया बस हादसे से जुड़े अहम मामले में बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए साफ संदेश दिया है कि न्याय केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा, न कि अनुमान या अप्रमाणित सामग्री पर। कोर्ट ने पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा।

    क्या है पूरा मामला
    यह मामला 8 नवंबर 2022 को दतिया जिले के भांहेर-दतिया रोड पर हुए दर्दनाक बस हादसे से जुड़ा है। इस दुर्घटना में बस पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    पहले ही मिल चुका था मुआवजे का आदेश
    मामले की सुनवाई के बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) दतिया ने बस चालक की लापरवाही मानते हुए मृतक के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। लेकिन बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    बीमा कंपनी की दलील पर कोर्ट का सख्त रुख
    बीमा कंपनी का कहना था कि दुर्घटना जिस बस से हुई, वह बीमित बस नहीं थी। कंपनी ने दावा किया कि किसी अन्य बिना बीमा वाली बस को बचाने के लिए इस बस को फर्जी तरीके से मामले में शामिल किया गया है।

    यूट्यूब वीडियो और गवाह दोनों खारिज
    सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपने पक्ष में एक यूट्यूब वीडियो पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इसकी प्रमाणिकता और स्रोत स्पष्ट न होने के कारण इसे सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही, कंपनी द्वारा पेश किए गए गवाह को ‘तैयार किया हुआ’ मानते हुए उसकी गवाही को भी अविश्वसनीय करार दिया गया।

    पुलिस जांच पर सवाल उठाना पड़ा भारी
    बीमा कंपनी ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर जांच गलत थी, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में पेश क्यों नहीं किया गया। यह तर्क भी कंपनी के खिलाफ गया।

    जांच रिपोर्ट को नहीं माना ठोस साक्ष्य
    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट केवल एक राय हो सकती है, उसे पुख्ता साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में केवल रिपोर्ट के आधार पर फैसले को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट का अंतिम फैसला
    सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि हादसा बस क्रमांक MP32 P 0184 से ही हुआ था। इसके साथ ही बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी गई और पीड़ितों को मुआवजा देने के अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा गया।

  • धार भोजशाला मामला फिर गरमाया, पूजा अधिकार को लेकर हिन्दू पक्ष ने पेश किए अहम कानूनी तर्क

    धार भोजशाला मामला फिर गरमाया, पूजा अधिकार को लेकर हिन्दू पक्ष ने पेश किए अहम कानूनी तर्क


    धार । मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में हिन्दू पक्ष ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा दावा पेश किया है। हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस ने अदालत में कहा कि जिस स्थान पर एक बार मंदिर स्थापित हो जाता है, वह हमेशा मंदिर ही रहता है और इसी आधार पर उन्हें वहां पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए।

    हिन्दू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में अपने तर्क रखते हुए कहा कि उनका दावा केवल इस आधार पर नहीं है कि वे लंबे समय से वहां पूजा करते आ रहे हैं, बल्कि उनका मुख्य तर्क यह है कि मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले वहां एक मंदिर मौजूद था। उन्होंने कहा कि जब किसी स्थान का मूल स्वरूप मंदिर का रहा हो, तो वह धार्मिक पहचान समाप्त नहीं होती।

    वकील ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण मामलों का हवाला भी दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मामले में दिए गए न्यायालय के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी देवता की ज्यूरिस्टिक पर्सनैलिटी यानी कानूनी व्यक्तित्व की मान्यता तब भी बनी रहती है, जब उसकी मूर्ति या संरचना को नुकसान पहुंचाया गया हो या उसे बदल दिया गया हो। उन्होंने तर्क दिया कि यही सिद्धांत भोजशाला मामले में भी लागू होता है।

    हिन्दू पक्ष ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने धार्मिक अधिकारों की वैधानिक मान्यता प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि इतिहास और परंपरा के आधार पर यह स्थान मां सरस्वती के मंदिर के रूप में जाना जाता रहा है, जिसे वाग्देवी मंदिर कहा जाता है।

    दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह परिसर कमाल मौला मस्जिद है और उन्हें यहां नमाज अदा करने का अधिकार मिलना चाहिए। इस विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी और सामाजिक तनाव बना हुआ है।

    भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व भी इस विवाद को और संवेदनशील बना देता है। माना जाता है कि इस इमारत का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा कराया गया था और यह एक प्रमुख शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र हुआ करता था। समय के साथ इसके स्वरूप और उपयोग को लेकर अलग अलग दावे सामने आते रहे हैं, जिससे यह विवाद गहराता गया है।

    हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी है और गुरुवार को भी इस पर बहस होने की संभावना है। इस केस का फैसला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि यह धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े बड़े कानूनी सवालों को छूता है। फिलहाल सभी की नजरें अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस ऐतिहासिक स्थल पर पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर किस पक्ष के तर्कों को कानूनी मान्यता मिलती है।