Category: Madhya Pradesh

  • मुरैना हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त 13 अप्रैल से होगी अहम सुनवाई

    मुरैना हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त 13 अप्रैल से होगी अहम सुनवाई


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में वन आरक्षक की निर्मम हत्या का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई का फैसला किया है जिससे अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    जानकारी के अनुसार 13 अप्रैल से इस मामले की सुनवाई शुरू होगी और यह सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच द्वारा की जाएगी। इस दौरान अदालत अवैध रेत खनन और उससे जुड़े अपराधों पर व्यापक और कड़े दिशा निर्देश जारी कर सकती है जो भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    यह मामला चंबल क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन से जुड़ा है जहां लंबे समय से रेत माफिया सक्रिय हैं। इस पूरे मुद्दे को कोर्ट के सामने न्याय मित्र रूपाली सैमुअल ने उठाया और वन आरक्षक की हत्या का जिक्र करते हुए अदालत का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई का निर्णय लिया।

    घटना के अनुसार मुरैना जिले में चंबल नदी के ऐसाह घाट पर अवैध रेत खनन और परिवहन की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम कार्रवाई के लिए निकली थी। अंबाह रेंज के गश्ती दल ने रथोल का पुरा और रानपुर के बीच रेत से भरे एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान चालक ने वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर को बेरहमी से ट्रैक्टर से कुचल दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    मृतक हरिकेश गुर्जर मुरैना जिले के जनकपुर गांव के निवासी थे और हाल ही में उनका स्थानांतरण अंबाह रेंज में हुआ था। इस दुखद घटना के बाद वन विभाग की टीम ने शव को जिला अस्पताल पहुंचाया जबकि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

    यह घटना केवल एक हत्या नहीं बल्कि अवैध खनन माफिया के बढ़ते हौसलों का संकेत भी मानी जा रही है। चंबल क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन एक गंभीर समस्या बना हुआ है और कई बार प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।

    अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इस मुद्दे पर बड़ा फैसला आने की उम्मीद है। यदि अदालत सख्त दिशा निर्देश जारी करती है तो इससे न केवल मुरैना बल्कि पूरे देश में अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं और 13 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है।

  • वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं

    वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं


    खरगोन। प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

    प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • मध्य प्रदेश में बढ़ेगी गर्मी की तपिश, तापमान 6 डिग्री तक चढ़ने का अनुमान

    मध्य प्रदेश में बढ़ेगी गर्मी की तपिश, तापमान 6 डिग्री तक चढ़ने का अनुमान

    भोपाल। मध्यप्रदेश में इस साल अप्रैल की शुरुआत तेज गर्मी के बजाय आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के साथ हुई। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम लगातार बदलता रहा। हालांकि अब यह दौर खत्म होने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार से प्रदेश में बारिश रुक जाएगी और गर्मी का असर तेजी से बढ़ेगा। इसके चलते दिन के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

    अप्रैल की शुरुआत में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश में लगातार बदलाव देखने को मिला। गुरुवार को भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवाती परिसंचरण) सक्रिय रहा, जिससे पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में मौसम प्रभावित रहा। कहीं तेज आंधी चली, तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार से इन सिस्टम्स का असर समाप्त हो जाएगा। अगले पांच दिनों तक प्रदेश में कहीं भी बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान मौसम शुष्क रहेगा और तापमान लगातार बढ़ेगा। 15 अप्रैल के आसपास उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो सकता है, लेकिन इसका प्रभाव मध्यप्रदेश में बहुत कम रहने की संभावना है।

    गर्मी के लिहाज से अप्रैल और मई सबसे अहम महीने माने जाते हैं। विभाग के अनुसार, जैसे दिसंबर-जनवरी सर्दी के और जुलाई-अगस्त बारिश के चरम महीने होते हैं, वैसे ही अप्रैल-मई में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस साल मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।

    आमतौर पर मार्च के अंतिम दिनों से तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन इस बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से तापमान में गिरावट देखने को मिली। इसी कारण अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी प्रदेश में बारिश, ओले और आंधी का दौर जारी रहा। पिछले आठ दिनों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कहीं न कहीं बारिश दर्ज की जा रही थी।

  • MP: रतलाम पहुंची थी बारात तभी उज्जैन पुलिस का फोन आया… दूल्हे पर दुष्कर्म का केस… मौका पाकर हुआ फरार

    MP: रतलाम पहुंची थी बारात तभी उज्जैन पुलिस का फोन आया… दूल्हे पर दुष्कर्म का केस… मौका पाकर हुआ फरार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम जिले (Ratlam district) में उस दौरान हड़कंप मच गया जब उज्जैन जिले (Ujjain district) की बड़नगर पुलिस ने दुल्हन पक्ष से संपर्क कर बताया कि दूल्हे के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी लगते ही दुल्हन पक्ष के परिवार में माहौल खराब हो गया। वधू पक्ष को पुलिस ने समझा बूझाकर शादी की रस्म को रोकने के लिए तैयार किया, इस दौरान मौका पाकर दूल्हा फरार हो गया, मिली जानकारी के अनुसार बुधवार रतलाम में बड़नगर के एक युवक की शादी हो रही थी, बड़नगर से बारात पहुंच चुकी थी।

    दूल्हा मंडप में आने ही वाला था कि तभी दुल्हन पक्ष के परिवार को इसका पता चल गया। परिवार को पता चला कि जिस लड़के से लड़की की शादी होने वाली है, उस पर तो नाबालिग ने रेप का केस दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि इस मामले का पटाक्षेप करने में एक स्थानीय पार्षद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


    जब वह घर पर अकेली थी

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन से करीब 60 किमी दूर बड़नगर थाना क्षेत्र के शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले युवक अभिषेक सेन के द्वारा 15 वर्षीय नाबालिग से जनवरी के माह में उस वक्त दुष्कर्म किया गया जब वह घर पर अकेली थी। इस दौरान उसे डरा धमका कर इस घटना को किसी को भी बताने के लिए धमकाया गया था। जब पिछले दिनों अभिषेक की शादी की खबर नाबालिग तक पहुंची तो उसने इस शादी का विरोध किया। लेकिन अभिषेक ने उसे डराते हुए अपनी शादी को नहीं रोका और बारात लेकर रतलाम पहुंच गया।

    इसी बीच 6 अप्रैल को नाबालिग के द्वारा इस घटनाक्रम से दुखी होकर आत्महत्या करने की नीयत से एसिड पीकर जान देने का प्रयास किया गया तो यह मामला सामने आया। बालिका को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसका मेडिकल कराने पर स्पष्ट हुआ कि पीड़िता गर्भवती भी है।


    पुलिस ने फोन पर दुल्हन पक्ष को समझाया

    उज्जैन से करीब 60 किमी दूर बड़नगर की शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले अभिषेक सेन की शादी रतलाम जिले की युवती से तय थी, पिछले दो दिन से शादी के कार्यक्रम चल रहे थे और बुधवार रात करीब 8 बजे दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकल चुका था। बारात लगने से पहले पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर फोन पर दुल्हन पक्ष को समझाया। वधु पक्ष को सूचना मिलते ही शादी वाले घर में हड़कंप मच गया। दोनों पक्षों की बातचीत के बाद शादी रोक दी गई। नाबालिग पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि आरोपी ने डरा-धमकाकर रेप किया। जिस दिन अभिषेक की शादी थी, उसी दिन पता चला कि पीड़िता प्रेग्नेंट है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 5 जनवरी को आरोपी उसके घर आया, जब वह अकेली थी। उसने धमकाकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने से मना किया। आरोपी की शादी तय होने के बाद उसने आत्महत्या का प्रयास किया।


    POCSO एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला दर्ज

    थाना प्रभारी अशोक पाटीदार के अनुसार, 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि पीड़िता और आरोपी एक ही कॉलोनी में रहते हैं। दूल्हे की शादी के तीन दिन पहले पीड़िता ने 6 अप्रैल को एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी।

    इलाज के दौरान 8 अप्रैल को उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद उसने परिजन को पूरी बात बताई।बालिका की शिकायत पर पुलिस ने पास्को एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है फिलहाल आरोपी फरार है उसे जल्द ही हिरासत में लिया जाएगा।

  • Weather: मध्य प्रदेश में थमा ओला-बारिश का दौर, अब गर्मी दिखाएगी अपना रौद्र रूप

    Weather: मध्य प्रदेश में थमा ओला-बारिश का दौर, अब गर्मी दिखाएगी अपना रौद्र रूप


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में पिछले कई दिनों से जारी आंधी-बारिश (Storm and Rain) और ओलों (Hail) का दौर अब खत्म होने की कगार पर है। मौसम का यह राहत भरा फेज अब तेजी से बदल रहा है और प्रदेश एक बार फिर झुलसाने वाली गर्मी की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग (Meteorological Department.) के अनुसार, शुक्रवार से मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा और तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।


    9 दिन बाद खत्म हुआ राहत वाला दौर

    अप्रैल की शुरुआत इस बार अलग रही। जहां आमतौर पर इस समय तक तेज गर्मी पड़ने लगती है, वहीं इस साल 1 से 9 अप्रैल तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलों का असर बना रहा। लगातार एक्टिव रहे साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस ने गर्मी पर ब्रेक लगा दिया था। गुरुवार को भी पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। कहीं तेज आंधी चली तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई।


    अब 5 दिन नहीं होगी बारिश

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब ये सिस्टम कमजोर पड़ चुके हैं। शुक्रवार से मौसम साफ रहेगा और अगले पांच दिन तक प्रदेश में कहीं भी बारिश के आसार नहीं हैं। यानी पूरा प्रदेश ड्राई जोन में रहेगा और तापमान तेजी से बढ़ेगा।


    15 अप्रैल को नया सिस्टम, असर कम

    मौसम विभाग के अनुसार, 15 अप्रैल के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा, लेकिन इसका असर मध्यप्रदेश में सीमित ही रहेगा। ऐसे में गर्मी से राहत की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।मौसम विभाग मानता है कि जैसे सर्दी के लिए दिसंबर-जनवरी और बारिश के लिए जुलाई-अगस्त अहम होते हैं, वैसे ही गर्मी के लिए अप्रैल और मई सबसे महत्वपूर्ण महीने हैं। इस बार मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही तापमान 41°C के पार पहुंच गया था, लेकिन बाद में मौसम बदलने से गर्मी की रफ्तार थम गई थी।


    बार-बार बदला मौसम, फसलों को नुकसान

    इस साल फरवरी और मार्च में चार-चार बार मौसम बदला। कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ। गेहूं, पपीता और केले की फसलें प्रभावित हुईं। मार्च के आखिरी और अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। मौसम अब अपने पुराने ट्रेंड पर लौट रहा है। बारिश का दौर थमते ही तेज धूप और गर्म हवाएं असर दिखाने लगेंगी। आने वाले दिनों में लू चलने की स्थिति भी बन सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होगा।

  • MP: रीवा के सरकारी स्कूल में पढ़ाना छोड़ कानों में एयर फोन लगाकर गाने सुन रही मैडम, छात्र झाल रहा पंखा…

    MP: रीवा के सरकारी स्कूल में पढ़ाना छोड़ कानों में एयर फोन लगाकर गाने सुन रही मैडम, छात्र झाल रहा पंखा…


    रीवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रीवा (Rewa) से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां एक सरकारी स्कूल (Government School) में महिला हेडमास्टर (Female Headmaster) खुद कुर्सी पर बैठकर आराम करती नजर आईं, जबकि एक छात्र उनसे पंखा झलवाता दिखा. इतना ही नहीं, हेडमास्टर के कान में ईयरफोन भी लगा हुआ था. इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला यह मामला रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के शासकीय माध्यमिक शाला पनासी का बताया जा रहा है. जहां स्कूल की महिला हेडमास्टर वर्षा मांझी एक छात्र से पंखा झलवाती नजर आईं।

    https://twitter.com/priyarajputlive/status/2041876637890048412
    वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हेडमास्टर कुर्सी पर आराम से बैठी हुई हैं, उनके कान में ईयरफोन लगा हुआ है, जबकि एक छात्र हाथ में पंखा लेकर उन्हें हवा कर रहा है. यह दृश्य न सिर्फ हैरान करने वाला है, बल्कि शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों की स्थिति पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करती है. सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पहले से ही सवालों के घेरे में है और अब इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: ओंकारेश्वर में संत की हत्या की आशंका… मौत के 5 दिन बाद समाधि से निकलवाया शव

    MP: ओंकारेश्वर में संत की हत्या की आशंका… मौत के 5 दिन बाद समाधि से निकलवाया शव


    खंडवा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ओंकारेश्वर (Omkareshwar) स्थित उदासीन अखाड़े (Udasin Akhara) से जुड़े संत ब्रजराज पुरी महाराज (Saint Brajraj Puri Maharaj) की हाल ही में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आश्रम से जुड़े लोगों ने उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताते हुए जल्दबाजी में उनके शव को समाधि दे दी थी, लेकिन बाद में संत समाज, हिंदू महासभा, परिजनों और अखाड़े के महंतों ने उनकी हत्या की आशंका जताते हुए शव को समाधि से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम कराने की मांग कई। जिसके बाद प्रशासन ने गुरुवार को संत की समाधि खोदकर पार्थिव देह बाहर निकाली और पोस्टमार्टम कराया।


    हार्ट अटैक या फांसी? मौत की वजह पर विरोधाभास

    4 अप्रैल को संत ब्रजराज पुरी महाराज के निधन के बाद आश्रम के लोगों ने हार्ट अटैक से मौत की जानकारी दी थी। वहीं, खाचरौद से पहुंचे उदासीन अखाड़े के महंत ओंकारदास उदासीन ने दावा किया कि उन्हें संत द्वारा फांसी लगाने की सूचना दी गई थी। इस विरोधाभासी जानकारी ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया। महंत ओंकारदास का कहना है कि उनके ओंकारेश्वर पहुंचने से पहले ही संत को दोपहर में जल्दबाजी में समाधि दे दी गई, जबकि परंपरा के अनुसार दूर-दराज से आने वाले संतों का इंतजार किया जाता है।


    अधिकारियों की मौजूदगी में निकाला गया शव, फिर हुआ पोस्टमार्टम

    मामले के तूल पकड़ने के बाद ओंकारेश्वर एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी की मौजूदगी में संत ब्रजराज पुरी महाराज की समाधि खोदी गई। प्रशासनिक निगरानी में पार्थिव देह को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद विधि-विधान के साथ संत की दोबारा समाधि दी गई। अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी।


    गायब आभूषण, मोबाइल और नकदी ने बढ़ाया शक

    महंत ओंकारदास उदासीन ने आरोप लगाया है कि संत के गले में पहनी सोने की चेन, रुद्राक्ष माला, मोबाइल फोन और नकदी मौके पर नहीं मिले। इसी वजह से हत्या या साजिश की आशंका और गहरा गई है। उन्होंने मांधाता थाने में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम की मांग की थी।


    73 एकड़ जमीन विवाद बना जांच का बड़ा एंगल

    पूरे मामले में 73 एकड़ जमीन का विवाद भी सामने आया है। हिंदू महासभा और संत समाज के अनुसार, संत ब्रजराज पुरी महाराज ने पहले इस जमीन को लेकर विवाद का जिक्र किया था। आरोप है कि निरंजनी अखाड़े से जुड़ी इस जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए दूसरे नाम पर दर्ज करा लिया गया था। संत समाज इस विवाद को भी मौत से जोड़कर देख रहा है।


    प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

    खंडवा डीआईजी मनोज कुमार राय पहले ही मामले की जांच के आदेश दे चुके हैं। वहीं हिंदू महासभा के आवेदन पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने भी पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि मांधाता थाना पुलिस अब तक नजदीकी परिजनों से औपचारिक शिकायत नहीं मिलने का हवाला देकर कार्रवाई से बचती रही है।


    पहले से खुदवाया था समाधि का गड्ढा

    स्थानीय संत समाज के अनुसार, बाबा ब्रजराज पुरी महाराज ने करीब एक साल पहले अपनी कुटिया के सामने समाधि के लिए गड्ढा खुदवा दिया था और चेलों को निर्देश दिया था कि निधन के बाद उन्हें वहीं समाधि दी जाए। इसी कारण पहली बार भी उसी स्थान पर समाधि दी गई थी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस हाई-प्रोफाइल संत मृत्यु प्रकरण की सबसे अहम कड़ी बन गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा कि यह स्वाभाविक मौत थी, आत्महत्या थी या फिर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।

  • चारधाम दर्शन 2026: अक्षय तृतीया पर मोक्ष और पुण्य की यात्रा

    चारधाम दर्शन 2026: अक्षय तृतीया पर मोक्ष और पुण्य की यात्रा


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है और इसे श्रद्धालु जीवन में एक बार अवश्य करने का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि चारों धामों  यमुनोत्री गंगोत्री केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन करने से जीवन के समस्त पाप धुल जाते हैं और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस साल चारधाम यात्रा 19 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है और इसे लेकर श्रद्धालुओं में अत्यधिक उत्साह और आस्था देखी जा रही है।

    वैदिक पंचांग के अनुसार चारधाम यात्रा के कपाट अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर खुलते हैं। इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे प्रारंभ होकर 20 अप्रैल को सुबह 07:27 बजे समाप्त होगी। यही समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त माना गया है। अक्षय तृतीया के दिन यात्रा आरंभ करने से यह माना जाता है कि किए गए दान तप और तीर्थ यात्रा का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।

    चारों धामों का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है। यमुनोत्री धाम यमुना नदी के पावन उद्गम स्थल पर स्थित है जहां स्नान करने से साधक को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। गंगोत्री धाम मां गंगा को समर्पित है और यहां के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह भक्तों को महादेव की असीम कृपा शांति और मानसिक संतुलन प्रदान करता है। बद्रीनाथ धाम जगत के पालनहार भगवान विष्णु का निवासस्थल माना गया है और यहां की यात्रा से पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति पाने का अवसर मिलता है।

    इस साल का संयोग विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि अक्षय तृतीया को ‘स्वयंसिद्ध मुहूर्त’ माना गया है। ग्रहों के शुभ संयोग इस समय को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं। इसलिए श्रद्धालु इस समय यात्रा पर निकलकर अधिक पुण्य आशीर्वाद और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यात्रा के दौरान भक्तों द्वारा किया गया दान स्नान और पूजा अर्घ्य जीवन में सुख समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।

    संक्षेप में चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह आध्यात्मिक शांति मानसिक संतुलन और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी खोलती है। 19 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली यह पावन यात्रा अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में होने के कारण विशेष पुण्यदायी है। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर जीवन में एक बार अवश्य लेना चाहिए ताकि चारों धामों के दर्शन और धार्मिक कर्मों से उन्हें मोक्ष स्वास्थ्य सुख और समृद्धि प्राप्त हो।

  • शौर्य और बलिदान की मिसाल सीआरपीएफ, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीर जवानों को किया नमन

    शौर्य और बलिदान की मिसाल सीआरपीएफ, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीर जवानों को किया नमन

    भोपाल । भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शौर्य दिवस के अवसर पर देश के वीर जवानों को शुभकामनाएं दी हैं। इस मौके पर उन्होंने सीआरपीएफ के शौर्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि यह बल देश की सुरक्षा का एक मजबूत आधार है और इसके जवान अदम्य साहस अटूट संकल्प और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सीआरपीएफ के जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करते हैं। चाहे आंतरिक सुरक्षा की चुनौती हो या आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटना हो सीआरपीएफ के जवान हर मोर्चे पर डटकर देश की रक्षा करते हैं। उनका साहस और त्याग पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    डॉ यादव ने कहा कि सीआरपीएफ का इतिहास वीरता और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा हुआ है। इस बल के जवानों ने कई बार अपने प्राणों की आहुति देकर देश की एकता और अखंडता की रक्षा की है। उनका यह समर्पण देशवासियों के मन में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करता है।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि शौर्य दिवस हमें उन वीर जवानों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह दिन उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके साहस से प्रेरणा लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि हमें अपने सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और समर्थन की भावना हमेशा बनाए रखनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि सीआरपीएफ के जवानों का अनुशासन परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा उन्हें अन्य बलों से विशिष्ट बनाती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि देश सेवा सर्वोपरि है और इसके लिए हर कठिनाई का सामना करना चाहिए।

    प्रदेशवासियों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भी इन वीर जवानों के त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें और देश की प्रगति में अपना योगदान दें।

    इस अवसर पर पूरे देश में सीआरपीएफ के शौर्य दिवस को सम्मान और गर्व के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल बल के वीर जवानों के शौर्य को याद करने का अवसर है बल्कि उनके प्रति आभार व्यक्त करने का भी प्रतीक है।

  • गुरु अर्जन देव जी के प्रकाश पर्व पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का संदेश, मानवता और सेवा की राह पर चलने का आह्वान

    गुरु अर्जन देव जी के प्रकाश पर्व पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का संदेश, मानवता और सेवा की राह पर चलने का आह्वान


    भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सिख धर्म के पांचवें गुरु गुरु अर्जन देव जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। इस पावन अवसर पर उन्होंने गुरु अर्जन देव जी के जीवन और उनके आदर्शों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका त्याग सेवा समर्पण और सहिष्णुता का संदेश आज भी पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने मानवता को जो मार्ग दिखाया वह केवल एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है बल्कि संपूर्ण समाज और विश्व के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि गुरु जी के विचार हमें यह सिखाते हैं कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए हमें हर परिस्थिति में धैर्य और करुणा बनाए रखनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब समाज कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है तब गुरु अर्जन देव जी की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो जाती हैं। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सेवा और समर्पण के माध्यम से ही सच्ची मानवता की स्थापना की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे गुरु जी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में प्रेम भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करें।

    डॉ यादव ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का जीवन त्याग और बलिदान की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने समाज को एकता और समरसता का संदेश दिया और हर वर्ग को साथ लेकर चलने की प्रेरणा दी। उनके विचारों ने न केवल सिख समाज बल्कि पूरे मानव समाज को दिशा देने का कार्य किया है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हमें गुरु अर्जन देव जी के दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा भाव और परोपकार की भावना ही समाज को मजबूत बनाती है और यही किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती है।

    इस अवसर पर प्रदेशभर में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जहां श्रद्धालु गुरु अर्जन देव जी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके उपदेशों को याद कर रहे हैं। गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर सेवा और भक्ति का संदेश आत्मसात कर रहे हैं। इस प्रकार गुरु अर्जन देव जी का प्रकाश पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि मानवता सेवा और भाईचारे के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर भी है, जो समाज को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करता है।