Category: Madhya Pradesh

  • नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान

    नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान


    नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के ग्राम टेकापार में सोमवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। राजस्व विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों की सहायता से अतिक्रमण को हटाते हुए एक कच्चे मकान को भी ध्वस्त किया गया।

    प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। सुबह शुरू हुआ अभियान देर शाम तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और प्रशासनिक कार्रवाई को देखते रहे।

    जानकारी के अनुसार, टेकापार गांव स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था। राजस्व विभाग को इसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जांच के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया और संयुक्त अभियान चलाकर कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अभियान का नेतृत्व नायब तहसीलदार ने किया, जबकि राजस्व विभाग के पटवारी, पुलिस बल और अन्य अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।

    अतिक्रमण हटाने के लिए 4 से 5 ट्रैक्टरों के साथ एक जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश कर सीमांकन के आधार पर कब्जे हटाए। इस दौरान सरकारी भूमि पर बना एक कच्चा मकान भी प्रशासन ने हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

    कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरा अभियान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। किसी भी तरह के विरोध या विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को शासकीय भूमि पर कब्जा न करने और नियमों का पालन करने की समझाइश भी दी।

    राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिलेभर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है। जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों और भूमि की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

    टेकापार में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। प्रशासन के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

    उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

    उज्जैन उज्जैन जिले के उन्हेल थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक युवक का शव उसके ही घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की मदद से साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हेल थाना पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र के एक मकान में एक व्यक्ति मृत अवस्था में पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घर के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने देखा कि युवक का शव खून से सना हुआ था, जिससे मामला संदिग्ध नजर आया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर एक्सपर्ट टीम और डॉग स्क्वाड को बुलाया गया।

    पुलिस जांच में मृतक की पहचान विक्रम पिता अशोक, उम्र लगभग 35 वर्ष, निवासी नाग चबूतरा मंदिर के पीछे, उन्हेल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विक्रम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में पत्नी और एक बच्चा है। युवक की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं आसपास के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं।

    घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं है। आसपास के लोगों और परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकें।

    सीएसपी विक्रम सिंह अहिरवार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, इसलिए पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विवेचना जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना के कारणों तथा संभावित आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

  • राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

    राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज, पुजारी महासंघ ने PM को लिखा पत्र; CBI जांच की उठाई मांग

    अयोध्या अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं की चर्चाओं के बीच अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर ट्रस्ट को भंग करने, पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    महासंघ का कहना है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और लंबे संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर के संचालन और दान राशि के उपयोग को लेकर यदि किसी प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। संगठन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण और उसके विकास के लिए अपनी श्रद्धा के अनुसार धन, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान सामग्री दान की है। यह योगदान केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक और धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यदि चढ़ावे या दान राशि के प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

    महासंघ ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए। संगठन का कहना है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    संगठन के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि यदि वर्तमान ट्रस्ट के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले परिवारों और मंदिर निर्माण के संघर्ष से जुड़े लोगों के योग्य प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि ऐसे लोग मंदिर की परंपराओं, संघर्ष और धार्मिक महत्व को बेहतर ढंग से समझते हैं और अधिक जिम्मेदारी के साथ इसकी सेवा कर सकते हैं।

    महासंघ ने यह भी कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर किसी भी प्रकार का संशय लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

    गौरतलब है कि हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और दानपात्रों के प्रबंधन को लेकर कुछ रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनमें कथित वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। हालांकि इन मामलों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी हैं। इसी बीच पुजारी महासंघ की ओर से उठाई गई मांगों ने इस मुद्दे को नई राजनीतिक और धार्मिक चर्चा का विषय बना दिया है।

    अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले समय में इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है, यह श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • नवजात के लिंग को लेकर अस्पताल में विवाद, परिजनों ने लगाया बच्चा बदलने का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

    नवजात के लिंग को लेकर अस्पताल में विवाद, परिजनों ने लगाया बच्चा बदलने का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

    उज्जैन उज्जैन में एक नवजात शिशु के लिंग को लेकर उत्पन्न विवाद ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब सामने आया जब एक परिवार ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के बाद उन्हें पुत्र जन्म की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में इलाज के दौरान उन्हें बताया गया कि नवजात बच्ची है। इस विरोधाभास के बाद परिजनों ने बच्चा बदलने की आशंका जताते हुए अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला पुलिस तक पहुंच गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार लिम्बोदा निवासी सुनील कहार की पत्नी पायल की डिलीवरी बुधवार शाम तिवारी नर्सिंग होम में हुई थी। परिजनों का कहना है कि प्रसव के तुरंत बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें लड़का होने की जानकारी दी थी। परिवार में खुशी का माहौल बन गया और परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों को बधाई स्वरूप नकद राशि भी दी। सभी लोग पुत्र जन्म की सूचना से उत्साहित थे और उसी आधार पर रिश्तेदारों एवं परिचितों को भी जानकारी दे दी गई।

    बताया जा रहा है कि जन्म के कुछ समय बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। रात करीब आठ बजे नवजात को उपचार के लिए लोटस अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ। लेकिन अगले दिन सुबह जब परिजन अस्पताल पहुंचे और बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि अस्पताल में एक बच्ची भर्ती है। यह सुनकर परिजन हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई।

    परिजनों का आरोप है कि यदि डिलीवरी के समय उन्हें लड़का होने की जानकारी दी गई थी, तो बाद में बच्ची होने की बात कैसे सामने आई। इसी आधार पर उन्होंने बच्चा बदलने की आशंका जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

    हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लोटस अस्पताल के मैनेजर अनिरुद्ध का कहना है कि तिवारी नर्सिंग होम से जिस नवजात को रेफर किया गया था, वह जन्म से ही बच्ची थी। अस्पताल में भर्ती, उपचार और मेडिकल रिकॉर्ड की सभी प्रविष्टियां इसी तथ्य की पुष्टि करती हैं। उनका कहना है कि किसी प्रकार की अदला-बदली या अनियमितता नहीं हुई है।

    वहीं तिवारी नर्सिंग होम प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर आरोपों को निराधार बताया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिलीवरी के दौरान मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की गई है और सभी ने बच्ची के जन्म की पुष्टि की है। अस्पताल के अनुसार मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल दस्तावेज और उपलब्ध वीडियो फुटेज में भी यही तथ्य दर्ज है।

    मामले के तूल पकड़ने के बाद माधवनगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान एकत्र कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर परिजन बच्चा बदलने की आशंका जता रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन अपने रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों को गलत बता रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

  • महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि को फिर मिली जान से मारने की धमकी, पत्र में लिखा- ‘अब तेरी बारी’

    महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि को फिर मिली जान से मारने की धमकी, पत्र में लिखा- ‘अब तेरी बारी’

    उज्जैन उज्जैन में स्थित गंगाघाट श्री मौन तीर्थ पीठ के पीठाधीश्वर एवं निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज को एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। धमकी एक पत्र के माध्यम से दी गई है, जिसमें उनके खिलाफ गंभीर और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें नुकसान पहुंचाने की चेतावनी दी गई है। पत्र मिलने के बाद धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में चिंता का माहौल है, वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार यह पत्र सोमवार को गंगाघाट स्थित मौन तीर्थ पीठ पहुंचा था। मंगलवार को जब आश्रम में लिफाफा खोला गया तो उसके भीतर हाथ से लिखा हुआ एक पत्र मिला। पत्र में महामंडलेश्वर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। पत्र में यह भी दावा किया गया कि उन्हें किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। पत्र में कुछ राजनीतिक नेताओं के नामों का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा गया कि कोई उन्हें बचा नहीं पाएगा।

    बताया जा रहा है कि यह पत्र उत्तर प्रदेश के महू क्षेत्र से भेजा गया है। पत्र में धार्मिक भावनाओं से जुड़े आरोप लगाते हुए धमकी भरे शब्द लिखे गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी और सुरक्षा की मांग भी उठाई।

    महामंडलेश्वर ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन्हें इस प्रकार की धमकी मिली हो। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और धार्मिक जागरण के लिए किए जा रहे कार्यों के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि इससे पहले भी उन पर उज्जैन और बड़ौदा में हमले हो चुके हैं। बावजूद इसके अब तक उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    गौरतलब है कि वर्ष 2023 और 2025 में भी उन्हें इसी प्रकार के धमकी भरे पत्र प्राप्त हुए थे। वर्ष 2025 में प्रयागराज से भेजे गए एक पत्र में भी उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। वहीं 2023 में अखाड़ा परिषद की बैठक के दौरान भी एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा धमकी भरा पत्र भेजा गया था। लगातार मिल रही धमकियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

    डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज का आश्रम पिछले कुछ वर्षों में कई धार्मिक अनुष्ठानों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के कारण चर्चा में रहा है। आश्रम में विभिन्न समुदायों से जुड़े कुछ लोगों द्वारा सनातन धर्म अपनाने और वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह करने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इन्हीं गतिविधियों को लेकर समय-समय पर विवाद और विरोध भी देखने को मिला है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पत्र किसने भेजा, उसका उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कोई संगठित साजिश है या नहीं, इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पत्र की लिखावट, डाक संबंधी जानकारी और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा सकती है।

    इस घटना के बाद धार्मिक संगठनों और संत समाज में भी चिंता व्यक्त की जा रही है। सभी की नजरें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही धमकी भेजने वाले व्यक्ति की पहचान कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • होटल में प्रेमिका संग मिले रेंजर, कॉन्स्टेबल पत्नी ने रंगे हाथों पकड़ा; रीवा में सड़क तक पहुंचा विवाद

    होटल में प्रेमिका संग मिले रेंजर, कॉन्स्टेबल पत्नी ने रंगे हाथों पकड़ा; रीवा में सड़क तक पहुंचा विवाद

    रीवा रीवा में एक हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब सतना जिले में पदस्थ एक वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) को उनकी पत्नी ने कथित रूप से एक युवती के साथ होटल के कमरे में पकड़ लिया। घटना के बाद होटल परिसर में जमकर हंगामा हुआ और देखते ही देखते मामला सड़क तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।

    जानकारी के अनुसार सतना जिले के बरौंधा सर्किल में पदस्थ वन परिक्षेत्र अधिकारी बृजेंद्र पाण्डेय रीवा के एक निजी होटल में रुके हुए थे। इसी दौरान उनकी पत्नी, जो स्वयं पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर कार्यरत हैं, को सूचना मिली कि उनके पति होटल में किसी युवती के साथ मौजूद हैं। सूचना मिलने के बाद वह सीधे होटल पहुंच गईं और संबंधित कमरे तक पहुंचकर दरवाजा खटखटाया।

    बताया जा रहा है कि दरवाजा खुलने पर पत्नी ने पति से कमरे में किसी अन्य व्यक्ति की मौजूदगी के बारे में सवाल किया। शुरुआत में रेंजर ने किसी के होने से इनकार किया, लेकिन पत्नी जब कमरे के भीतर पहुंचीं तो वहां एक युवती मौजूद मिली। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और होटल परिसर में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पत्नी ने युवती को कमरे से बाहर लाकर दोनों के संबंधों को लेकर सवाल-जवाब किए। होटल परिसर में काफी देर तक विवाद चलता रहा, जिससे वहां मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोगों ने पूरे घटनाक्रम के वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिए, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए।

    मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि विवाद बढ़ने के बाद रेंजर और उनके साथ मौजूद युवती होटल से बाहर निकले और एक डंपर में बैठकर वहां से चले गए। वहीं उनकी पत्नी काफी देर तक होटल परिसर में मौजूद रहीं और नाराजगी जताती रहीं। घटना के कारण होटल परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई थी।

    मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। जानकारी के अनुसार रीवा के चोरहटा थाना में रेंजर बृजेंद्र पाण्डेय और उनकी महिला मित्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शिकायत किन धाराओं के तहत दर्ज की गई है और आरोपों का स्वरूप क्या है। पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा वायरल वीडियो और उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

    सूत्रों के मुताबिक रेंजर की पत्नी सतना जिले के बरौंधा थाने में आरक्षक के रूप में पदस्थ हैं। यह भी चर्चा है कि वह बिना अवकाश स्वीकृत कराए रीवा पहुंची थीं। हालांकि इस संबंध में विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और होटल में हुए विवाद ने इस मामले को क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना दिया है।

  • 102 दिनों से लापता पूर्व TI गजेंद्र सिंह धाकड़, अब तकनीकी जांच के सहारे तलाश में जुटी पुलिस

    102 दिनों से लापता पूर्व TI गजेंद्र सिंह धाकड़, अब तकनीकी जांच के सहारे तलाश में जुटी पुलिस

    रीवा  रीवा जिले के मनगवां थाने के पूर्व प्रभारी निरीक्षक (टीआई) गजेंद्र सिंह धाकड़ के रहस्यमय ढंग से लापता होने का मामला अब और अधिक गंभीर होता जा रहा है। विभागीय निलंबन के बाद से बीते 102 दिनों में उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। एक पुलिस अधिकारी का इतने लंबे समय तक विभाग और परिवार दोनों के संपर्क से बाहर रहना पुलिस महकमे के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब उनकी तलाश के लिए पुलिस ने तकनीकी जांच का सहारा लिया है और मोबाइल लोकेशन से लेकर कॉल डिटेल रिकॉर्ड तक की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में गजेंद्र सिंह धाकड़ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया था। निलंबन आदेश मिलने के बाद उन्होंने मनगवां थाने के रोजनामचा में स्वयं को बीमार बताते हुए ‘सिक’ की एंट्री दर्ज कराई थी। इसके बाद वे थाने से रवाना हो गए, लेकिन फिर कभी विभाग के संपर्क में नहीं आए। न तो उन्होंने किसी वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क किया और न ही अपनी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई जानकारी दी।

    विभागीय नियमों के तहत निलंबन के बाद उन्हें पुलिस लाइन रीवा में आमद देना अनिवार्य था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। लगातार अनुपस्थित रहने के कारण विभाग ने उन्हें कई बार नोटिस जारी किए। हालांकि इन नोटिसों का भी कोई जवाब नहीं मिला। इससे मामला और अधिक संदिग्ध एवं चिंताजनक बनता चला गया।

    जब विभागीय स्तर पर संपर्क के सभी प्रयास विफल हो गए तो पुलिस ने उनके ग्वालियर स्थित पैतृक निवास पर भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया। वहां भी उनकी मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो सकी। परिजनों ने भी उनके लंबे समय से संपर्क में न होने को लेकर चिंता व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि परिवार अपने स्तर पर भी उनकी तलाश में जुटा हुआ है, लेकिन अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए अब पुलिस ने तकनीकी जांच को प्राथमिकता दी है। जांच एजेंसियां उनके मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), अंतिम सक्रिय लोकेशन, फोन गतिविधियों और संभावित संपर्कों की जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निलंबन के बाद उन्होंने किन लोगों से बातचीत की और आखिरी बार उनकी लोकेशन कहां दर्ज हुई थी।

    जांच टीम उन लोगों से भी पूछताछ कर सकती है जो हाल के दिनों में उनके संपर्क में रहे हों। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है, जिससे उनकी वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके।

    रीवा पुलिस अधीक्षक गुरकरन सिंह ने बताया कि निलंबित निरीक्षक गजेंद्र सिंह धाकड़ अभी भी गैरहाजिर हैं। उन्होंने पुलिस लाइन में आमद नहीं दी है और विभाग के संपर्क में भी नहीं हैं। उनकी लोकेशन ट्रेस करने और वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं।

    फिलहाल यह मामला पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का 102 दिनों तक बिना किसी सूचना के लापता रहना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें तकनीकी जांच के नतीजों पर टिकी हैं, जिनसे इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद की जा रही है।

  • सार्वजनिक रास्ता बंद होने पर भड़के ग्रामीण, 200 लोग पहुंचे कलेक्ट्रेट; मार्ग बहाल करने की लगाई गुहार

    सार्वजनिक रास्ता बंद होने पर भड़के ग्रामीण, 200 लोग पहुंचे कलेक्ट्रेट; मार्ग बहाल करने की लगाई गुहार

    रीवा रीवा जिले के ग्राम शाहपुर में सार्वजनिक मार्ग बंद किए जाने का मामला मंगलवार को जनसुनवाई में प्रमुखता से उठाया गया। गांव के करीब 200 ग्रामीण एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए रास्ते को तत्काल बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से उपयोग में आ रहे सार्वजनिक मार्ग को मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया है, जिससे पूरे गांव के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    ग्रामीणों के अनुसार ग्राम शाहपुर में अपर पूर्वी नहर सिंचाई विभाग की डगरी टोला सब माइनर क्रमांक-2 के समीप एक मार्ग लंबे समय से आवागमन के लिए उपयोग में था। इस रास्ते का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि ग्राम पंचायत ने यहां पहले पीसीसी सड़क का निर्माण भी कराया था। लेकिन 14 जून को कथित रूप से दो ट्रक मिट्टी डलवाकर इस मार्ग को बंद कर दिया गया, जिससे गांव के लोगों का आवागमन बाधित हो गया।

    रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों के लिए लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर किसानों, विद्यार्थियों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है। खेतों तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है, जबकि स्कूली बच्चों को भी स्कूल आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते से वे वर्षों से आसानी से आवागमन करते थे, उसके बंद होने से उनकी दिनचर्या प्रभावित हो गई है।

    जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीण कमलेश कुमार प्रजापति ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए कई बार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और संबंधित पक्षों से संपर्क किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

    ग्रामीण राजेश प्रजापति ने कहा कि यह मार्ग सार्वजनिक उपयोग का रास्ता रहा है और गांव के अनेक परिवार इसी पर निर्भर हैं। ऐसे में इसे बंद कर देना लोगों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने और मार्ग को पुनः चालू कराने की मांग की।

    संतोष प्रजापति ने बताया कि रास्ता बंद होने के कारण लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ सकती है।

    ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि नहर विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए तथा मिट्टी डालकर बंद किए गए सार्वजनिक मार्ग को तत्काल बहाल किया जाए। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस मुद्दे की गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं और वे जल्द राहत मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

  • सोसाइटी विवाद में पुलिस पर पक्षपात के आरोप: महिला बोली- FIR से आरक्षक का नाम हटाया, न्याय के लिए भटक रहा परिवार

    सोसाइटी विवाद में पुलिस पर पक्षपात के आरोप: महिला बोली- FIR से आरक्षक का नाम हटाया, न्याय के लिए भटक रहा परिवार

     
    इंदौर ; इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र स्थित गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में चल रहा विवाद अब केवल सोसाइटी प्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोसाइटी की रहवासी सुलोचना शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे के साथ हुई मारपीट के मामले में एक पुलिस आरक्षक को बचाने के लिए एफआईआर में उसका नाम शामिल नहीं किया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि न्याय पाने के लिए वे थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    महिला के अनुसार पूरा विवाद सोसाइटी के हैंडओवर, मेंटेनेंस फंड और कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चल रहा है। उनका आरोप है कि सोसाइटी के फंड से करीब 15 लाख रुपए का गबन किया गया है और कुछ पदाधिकारी चार्ज हस्तांतरण से इसलिए बच रहे हैं ताकि कथित अनियमितताएं उजागर न हों। इसके अलावा नगर निगम की जमीन पर कथित अतिक्रमण और वहां धार्मिक संरचना स्थापित करने को लेकर भी विवाद बना हुआ है।

    पीड़िता का कहना है कि 8 जून की रात सोसाइटी परिसर में विवाद के दौरान उनके बेटे कार्तिक शर्मा ने केवल गाली-गलौज का विरोध किया था। इसके बाद कुछ लोगों ने उस पर लाठियों, लात-घूंसों से हमला कर दिया। परिवार का आरोप है कि हमले में कार्तिक गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके गले से सोने की चेन भी गायब हो गई। घटना के बाद परिवार शिकायत लेकर कनाड़िया थाने पहुंचा, लेकिन रातभर इंतजार कराने के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई।

    सबसे गंभीर आरोप यह है कि घटना में शामिल बताए जा रहे कनाड़िया थाने के आरक्षक नारायण जाट का नाम एफआईआर से हटा दिया गया। महिला का कहना है कि उन्होंने पुलिस को कई नाम बताए थे, लेकिन रिपोर्ट में केवल कुछ लोगों के नाम शामिल किए गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस विभाग से जुड़े होने के कारण आरक्षक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    सुलोचना शर्मा ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वे कार्रवाई की मांग लेकर थाने पहुंचीं तो उन्हें केवल जांच का आश्वासन दिया गया। दूसरी ओर कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव का कहना है कि मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है और जिस आरक्षक पर आरोप लगाए गए हैं, उसकी भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस का दावा है कि महिला द्वारा बताए गए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    उधर, आरक्षक नारायण जाट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी प्रकार की मारपीट में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी पहले सोसाइटी में सचिव पद पर थीं, जिसके कारण उनका नाम विवाद में घसीटा जा रहा है।

    इस पूरे मामले ने सोसाइटी के रहवासियों के बीच तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पीड़ित परिवार ने पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज

    जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज


    इंदौर इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। लोकायुक्त पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद अब ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे जांच का दायरा और बढ़ सकता है। कंडवाल के परिवार के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्तियां, निवेश और व्यवसाय मिलने के साथ-साथ सूदखोरी और चेक बाउंस मामलों को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

    लोकायुक्त पुलिस ने हाल ही में कंडवाल के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनकी पत्नी शारदा कंडवाल, पुत्रवधु तनु और हर्षिता के नाम पर कई संपत्तियों और निवेश का पता चला। शुरुआती जांच में इन संपत्तियों का मूल्य करोड़ों रुपए में आंका गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कंडवाल के पुत्र अभिषेक के नाम से वर्ष 2022 में रमेश मलकानी के खिलाफ चेक बाउंस के छह मामले दर्ज कराए गए थे। ये मामले न्यायालय तक पहुंचे और बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। हालांकि इन मामलों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

    सूत्रों के अनुसार जिन चेकों को लेकर मुकदमे दर्ज हुए थे, वे केसरबाग रोड स्थित एक संपत्ति के सौदे से जुड़े बताए जाते हैं। बाद में समझौते के तहत राशि प्राप्त होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया था। लेकिन जांच एजेंसियां अब यह जानने का प्रयास कर सकती हैं कि उस समय पढ़ाई कर रहे अभिषेक के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और संपत्ति निवेश के लिए धन का स्रोत क्या था।

    जानकारों का कहना है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निवेश की राशि वास्तव में लक्ष्मी नारायण कंडवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, तो बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी गहन जांच हो सकती है। लोकायुक्त टीम इस बात का भी परीक्षण कर सकती है कि कहीं परिवार के नाम का उपयोग कर संपत्तियां तो नहीं बनाई गईं।

    कंडवाल ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में ग्राम सुनाला के माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद वे विभिन्न पदों पर पदोन्नत होते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद तक पहुंचे। नौकरी के दौरान उनकी पदस्थापना नीमच, खरगोन, उज्जैन, जबलपुर, भोपाल, रीवा सहित कई जिलों में रही।

    लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया है कि उनके पुत्र अभिषेक और पवन के नाम पर एक सुपर मार्केट संचालित है, जिसमें लाखों रुपए का निवेश किया गया है। इसके अलावा एक आधुनिक और आलीशान जिम की जानकारी भी सामने आई है, जहां अत्याधुनिक फिटनेस उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन निवेशों और व्यवसायों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। सभी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाएगी। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भी पत्र भेजा जा सकता है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है और अब सभी की नजर लोकायुक्त की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।