Category: Madhya Pradesh

  • फेसबुक फ्रेंड ने शादी का झांसा देकर किया रेप, ग्वालियर में आरोपी गिरफ्तार

    फेसबुक फ्रेंड ने शादी का झांसा देकर किया रेप, ग्वालियर में आरोपी गिरफ्तार


    ग्वालियर मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर हुई दोस्ती ने एक विवाहित महिला की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। आरोपी युवक ने पहले दोस्ती बढ़ाई, फिर शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया और बाद में धमकाने लगा। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    फेसबुक से शुरू हुई बातचीत, बढ़ा संपर्क
    पुलिस के अनुसार 37 वर्षीय महिला की करीब एक साल पहले विक्की जाटव से फेसबुक के जरिए पहचान हुई थी। आरोपी मुरैना जिले के उत्तमपुर का निवासी है। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फोन पर नियमित संपर्क होने लगा। इसी दौरान आरोपी ने महिला को अपने झांसे में ले लिया।

    होटल में ले जाकर किया दुष्कर्म
    बताया जा रहा है कि 7 जुलाई 2025 को आरोपी ग्वालियर पहुंचा और महिला को मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद वह उसे शहर के एक होटल में ले गया, जहां शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब महिला ने विरोध किया तो आरोपी ने जल्द शादी का वादा कर उसे शांत करा दिया।

    एक साल तक बनाता रहा संबंध, फिर मुकरा
    आरोप है कि इसके बाद आरोपी महिला को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे जान से मारने की धमकी देने लगा। इससे परेशान होकर महिला ने आखिरकार पुलिस की शरण ली।

    शिकायत के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
    पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मुरैना पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसे ग्वालियर लाया गया है।

    पुलिस कर रही पूछताछ
    मामले में थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस तरह की घटना कहीं और तो नहीं की।

    सावधानी भी जरूरी: सोशल मीडिया पर सतर्क रहें
    यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सतर्क रहना कितना जरूरी है। किसी भी तरह के रिश्ते में जल्दबाजी या बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करना गंभीर परिणाम दे सकता है।

  • भोपाल में अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का समापन, मंत्री पटेल ने अधिकारियों को दिए प्रभावी प्रशासन के मंत्र

    भोपाल में अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का समापन, मंत्री पटेल ने अधिकारियों को दिए प्रभावी प्रशासन के मंत्र

    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबन्ध संस्थान में नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और नवनियुक्त अधिकारियों से सीधा संवाद किया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों में ऐसा कार्य करें जिससे उन्हें स्वयं संतुष्टि प्राप्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आपकी आत्मसंतुष्टि ही इस बात का प्रमाण होगी कि आपने आमजन के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का भाव रखने की प्रेरणा दी।

    मंत्री पटेल ने अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र भविष्य की योजनाओं और संभावित चुनौतियों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रशासन में निरंतर संवाद अत्यंत आवश्यक है क्योंकि संवाद ही बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है और इससे पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ती है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सलाह दी कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और आम जनता के साथ सतत संवाद बनाए रखें ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

    उन्होंने आगे कहा कि कई बार व्यक्ति यह सोचता है कि वह सभी कार्य कर सकता है जो एक सकारात्मक सोच है लेकिन बेहतर परिणाम तब मिलते हैं जब व्यक्ति अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर कार्य को स्पष्ट लक्ष्य मजबूत योजना और टीम वर्क के साथ किया जाए तो सफलता निश्चित होती है।

    इस दौरान नव नियुक्त अधिकारियों ने प्रशिक्षण अवधि के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले 45 दिनों में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने और जमीनी स्तर पर काम करने के व्यावहारिक पहलुओं को सीखने का अवसर दिया। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया जिससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और चुनौतियों को समझने में मदद मिली।

    अधिकारियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने कार्य की रूपरेखा तैयार करने और भविष्य में बेहतर तरीके से जिम्मेदारी निभाने की दिशा में मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंत्री श्री पटेल ने सभी नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने का माध्यम बना बल्कि अधिकारियों को जनहित में कार्य करने की नई दृष्टि और ऊर्जा भी प्रदान कर गया।

  • चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद

    चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद


    अशोकनगर।
    मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बिना समुचित जांच के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर नियमों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र बनाए गए, जिससे न्यायालयों में अनावश्यक विवाद और प्रकरण बढ़ रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी निवासी रविकांत सेषा की शिकायत पर चंदेरी थाने में कमल सिंह लोधी निवासी ग्राम मोहनपुर के खिलाफ अपराध क्रमांक 0193/2026 दर्ज किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

    बताया गया है कि कमल सिंह लोधी ने तहसील कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड-154(1)/2024-25 तथा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड-154/2024-25 प्रस्तुत किया था। वहीं, भैयालाल लोधी ने कथित रूप से वसीयत तैयार करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0077/ड-154/2024-25 के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि इन सभी प्रकरणों में कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

    इन प्रमाण पत्रों के जरिए कथित रूप से भूमि के नामांतरण और पूर्व विक्रय पत्रों को शून्य कराने की कोशिश की गई, जो बाद में न्यायालयीन विवाद का कारण बनी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में तहसील प्रशासन, एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच की मांग तेज

    सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। चंदेरी तहसील में वर्षों से पदस्थ कुछ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित रूप से अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर शीट तैयार कराते हैं और उनके हस्ताक्षर करवा लेते हैं। इसी के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण प्रकरण भी स्वीकृत किए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले दो-तीन वर्षों में जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

    आम नागरिक पर कार्रवाई, जिम्मेदार सुरक्षित

    मामले में पुलिस ने कमल सिंह लोधी के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि लापरवाही या मिलीभगत के बावजूद जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है।

    जांच नहीं हुई तो बढ़ेंगे विवाद

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गहन जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में ऐसे कई मामले सामने आएंगे, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ेगा और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

    अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

  • एमपी में UCC लागू होने से पहले सरकार का बड़ा कदम, डीजी-एडीजी स्तर के अधिकारी बने संभाग प्रभारी

    एमपी में UCC लागू होने से पहले सरकार का बड़ा कदम, डीजी-एडीजी स्तर के अधिकारी बने संभाग प्रभारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था की निगरानी को और मजबूत करने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब अपर मुख्य सचिव की तर्ज पर डीजी, स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संभागीय प्रभारी बनाया गया है। ये अधिकारी रेंज में तैनात आईजी के साथसाथ पूरे संभाग की कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। इस क्रम में वरुण कपूर को भोपाल, उपेंद्र कुमार जैन को उज्जैन और पंकज कुमार श्रीवास्तव को जबलपुर संभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    यूसीसी से पहले मॉनिटरिंग मजबूत करने की तैयारी
    यह व्यवस्था मोहन यादव सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता UCC लागू करने की तैयारी के बीच लागू की गई है। गृह विभाग ने संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए यह कदम उठाया है। कैबिनेट बैठक में UCC को लेकर निर्देश मिलने के बाद विभाग ने सभी संभागों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तैनाती कर दी है, ताकि सुपरविजन और मॉनिटरिंग को मजबूत किया जा सके।

    संभागवार आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी
    प्रदेश के विभिन्न संभागों के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया है। इनमें इंदौर, ग्वालियर और रीवा संभाग में पहले से तैनाती थी, जबकि सात अन्य संभागों में नई नियुक्तियां की गई हैं।

    भोपाल – वरुण कपूर (डीजी जेल)
    इंदौर – आदर्श कटियार (स्पेशल डीजी प्रशासन)
    उज्जैन – उपेंद्र कुमार जैन (डीजी ईओडब्ल्यू)
    ग्वालियर – प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (डीजी होमगार्ड)
    जबलपुर – पंकज कुमार श्रीवास्तव (स्पेशल डीजी सीआईडी)
    रीवा – अनिल कुमार (स्पेशल डीजी महिला सुरक्षा)
    चंबल – जी अखेतो सेमा (स्पेशल डीजी जेल)
    नर्मदापुरम – रवि कुमार गुप्ता (स्पेशल डीजी रेल)
    सागर – अनंत कुमार सिंह (स्पेशल डीजी पुलिस हाउसिंग)
    शहडोल – राजाबाबू सिंह (एडीजी ट्रेनिंग)

    आईएएस अधिकारियों को भी सौंपी जिम्मेदारी

    प्रशासनिक स्तर पर भी संभागवार आईएएस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
    उज्जैन – डॉ. राजेश राजौरा
    ग्वालियर – अशोक बर्णवाल
    चंबल – मनु श्रीवास्तव
    जबलपुर – संजय दुबे
    नर्मदापुरम – नीरज मंडलोई
    इंदौर – अनुपम राजन
    भोपाल – संजय कुमार शुक्ल
    रीवा – रश्मि अरुण शमी
    सागर – दीपाली रस्तोगी
    शहडोल – शिवशेखर शुक्ला

  • एमपी में गेहूं खरीदी पर गरमाई सियासत, देरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए घोटाले के आरोप

    एमपी में गेहूं खरीदी पर गरमाई सियासत, देरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए घोटाले के आरोप

    भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की देरी को लेकर सियासत गरमा गई है। गुरुवार से प्रदेश के चार संभागों में खरीदी शुरू हो गई, लेकिन देरी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। सरकार जहां इस देरी के पीछे इजराइल-ईरान युद्ध का हवाला दे रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के साथ अन्याय बता रहा है।

    प्रदेशभर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की, जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। रतलाम में जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कृषि उपज मंडी में धरना दिया गया, जहां बड़ी संख्या में किसान भी पहुंचे। भोपाल और श्योपुर में भी विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी देखने को मिली।

    जीतू पटवारी के आरोप

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गेहूं खरीदी में देरी एक “रणनीतिक घोटाला” है। उन्होंने आरोप लगाया कि बारदाने की कमी का बहाना बनाकर खरीदी टाली गई और किसानों को नुकसान पहुंचाया गया।

    पटवारी ने कहा कि करीब 10 लाख क्विंटल गेहूं ओपन मार्केट में बिक चुका है और लगभग 25% गेहूं 1600 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं, 3100 रुपए धान और 6000 रुपए सोयाबीन के दाम अब तक लागू नहीं किए गए हैं।

    व्यवस्थाओं की कमी से किसान परेशान

    रायसेन जिले में कई खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। बम्होरी केंद्र पर न तो पर्याप्त बारदाना पहुंचा और न ही किसानों के लिए छाया की व्यवस्था थी। स्लॉट बुकिंग के बावजूद किसानों को असमंजस का सामना करना पड़ा। वहीं, सागर में मंडी बंद होने पर जीतू पटवारी ने कलेक्टर को फोन कर नाराजगी जताई और कहा कि तेज गर्मी में किसान कई दिनों से परेशान हैं।

    श्योपुर और भोपाल में भी प्रदर्शन

    श्योपुर में जिला कांग्रेस कमेटी ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा, जिसमें विधायक बाबू जंडेल भी शामिल रहे। वहीं भोपाल में कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेराव कर खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठाए।

    सरकार का पलटवार
    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में एक दाना भी गेहूं नहीं खरीदा गया था, जबकि वर्तमान सरकार किसानों से खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण थोड़ी देरी हुई, लेकिन अब व्यवस्थाएं पटरी पर आ रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का काम केवल विरोध करना है, जबकि सरकार किसानों के हित में काम कर रही है।

  • बुरहानपुर का बोरसर गांव बना गाली गलौच मुक्त, जुर्माने और झाड़ू से सजा का अनोखा नियम

    बुरहानपुर का बोरसर गांव बना गाली गलौच मुक्त, जुर्माने और झाड़ू से सजा का अनोखा नियम

    बुरहानपुर । मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव अब देश में गाली-गलौच मुक्त गांव के रूप में मशहूर हो गया है। यह गांव जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां करीब 6 हजार लोग रहते हैं। बोरसर गांव ने एक अनोखी पहल करते हुए पूरे गांव में गाली देने पर कड़ी सजा और जुर्माने का नियम लागू किया है। अगर कोई व्यक्ति यहां गाली देता है, तो उसे 500 रुपये का जुर्माना या एक घंटे तक गांव में झाड़ू मारकर सफाई करने की सजा भुगतनी पड़ती है।

    गांव में यह पहल ग्राम पंचायत बोरसर के सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे के नेतृत्व में की गई। इस योजना में अभिनेता और समाजसेवी अश्विन पाटिल भी शामिल हुए, जिन्होंने गांव को सभ्य और गाली मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने बताया कि अमीर हो या गरीब, यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि छोटे झगड़ों में अक्सर विवाद गालियों की वजह से बढ़ जाते थे। इस समस्या को देखते हुए पंचायत ने इसे रोकने का ठोस कदम उठाया।

    बोरसर गांव में लोगों को जागरूक और शिक्षित बनाने के लिए पुस्तकालय भी खोला गया है। यहां धर्म-कर्म, जनरल नॉलेज और स्कूली पाठ्यक्रम की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। बच्चों और युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान और सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए गांव में चार जगहों पर फ्री वाईफाई की सुविधा भी दी गई है। इस पहल से हर व्यक्ति फ्री इंटरनेट का लाभ उठा रहा है और जानकारी तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो रही है।

    गांव में गाली-गलौच रोकने के नियम के साथ-साथ हर घर हरियाली अभियान भी शुरू किया गया है। लोगों को पौधे वितरित किए गए हैं ताकि गांव हरित और साफ-सुथरा बने। इसके अलावा, सेवा भाव कक्ष की भी स्थापना की गई है। यहां जरूरतमंदों के लिए दानदाता और समाजसेवियों द्वारा विभिन्न सामग्री उपलब्ध कराई गई है। किसी भी धर्म और जाति का व्यक्ति इसका लाभ उठा सकता है।

    अभिनेता अश्विन पाटिल ने बताया कि जब वह मुंबई से गांव लौटे, तो देखा कि छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौच की वजह से विवाद बढ़ जाते थे। उन्होंने सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे से संपर्क किया और पंचायत में बैठक बुलाई गई। सभी ग्रामीणों की मौजूदगी में निर्णय लिया गया और गांव को गाली मुक्त बनाने का आदेश जारी किया गया। अब गांव में जगह-जगह पोस्टर लगे हैं, जिसमें साफ शब्दों में लिखा है कि बोरसर मध्यप्रदेश का पहला गाली मुक्त गांव है।

    इस पहल ने पूरे गांव में एक सभ्यता और जागरूकता का माहौल पैदा किया है। छोटे विवाद भी अब शांति और समझदारी से सुलझाए जा रहे हैं। गाली-गलौच के बिना गांव में सामाजिक सामंजस्य और सहयोग की भावना मजबूत हो रही है। यह मॉडल अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन सकता है। बोरसर गांव ने दिखा दिया कि अनुशासन, शिक्षा और जागरूकता से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

  • बारात लेकर पहुंचा दूल्हा, तभी आया रेप केस का फोन-उज्जैन में सनसनी!

    बारात लेकर पहुंचा दूल्हा, तभी आया रेप केस का फोन-उज्जैन में सनसनी!


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन और रतलाम के बीच एक शादी समारोह उस वक्त अचानक थम गया, जब दूल्हे पर नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया। बारात दरवाजे तक पहुंच चुकी थी और दूल्हा मंडप में एंट्री लेने ही वाला था, लेकिन पुलिस के एक फोन कॉल ने पूरे माहौल को बदल दिया।

    बारात के बीच पुलिस का फोन, मच गया हड़कंप
    जानकारी के मुताबिक, उज्जैन के पास बड़नगर की शिक्षक कॉलोनी निवासी अभिषेक सेन की शादी रतलाम की युवती से तय थी। शादी के कार्यक्रम दो दिन से चल रहे थे और बुधवार रात करीब 8 बजे बारात धूमधाम से निकली। लेकिन जैसे ही बारात दुल्हन के घर पहुंचने वाली थी, पुलिस ने दुल्हन पक्ष को फोन कर बताया कि दूल्हे के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज होने जा रहा है। यह सुनते ही शादी वाले घर में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत बातचीत के बाद शादी रोक दी गई।

    नाबालिग ने दर्ज कराया केस, पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई
    पुलिस ने 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत पर आरोपी अभिषेक सेन के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया है। केस दर्ज होते ही दूल्हा फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है।

    चार महीने पहले हुई वारदात, शादी वाले दिन खुला सच
    पीड़िता के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी की है, जब आरोपी उसके घर पहुंचा और उसे डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। उसने किसी को बताने पर धमकी भी दी। लंबे समय तक चुप रहने के बाद, जब आरोपी की शादी तय हुई तो पीड़िता मानसिक रूप से टूट गई।

    गर्भवती होने का खुलासा, आत्महत्या की कोशिश
    शादी से तीन दिन पहले, 6 अप्रैल को नाबालिग ने एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की। इलाज के दौरान 8 अप्रैल को डॉक्टरों को उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद उसने परिजनों को पूरी घटना बताई और मामला पुलिस तक पहुंचा।

    स्थानीय मदद से रुकी शादी, पुलिस ने की तत्पर कार्रवाई
    थाना प्रभारी अशोक पाटीदार के अनुसार, पीड़िता और आरोपी एक ही कॉलोनी में रहते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत दुल्हन पक्ष से संपर्क किया। एक स्थानीय पार्षद की मदद से समय रहते शादी रुकवाई गई, जिससे एक बड़ा सामाजिक और कानूनी विवाद टल गया।

    फरार आरोपी की तलाश जारी
    घटना के बाद आरोपी रतलाम पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही है और जल्द गिरफ्तारी की बात कही जा रही है।

  • कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी

    कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के अंदर ही बड़ा राजनीतिक तूफ़ान बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने इस मामले पर अपनी पार्टी के भीतर खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने अपने ट्वीट्स में न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला बल्कि कांग्रेस की पार्षद रूबीना खान को भी आड़े हाथों लिया। मिश्रा ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि जो लोग राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते और वंदे मातरम नहीं बोल सकते वे भाड़ में जाएं और पाकिस्तान जाकर बसें। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।

    रूबीना खान के बयान को मिश्रा ने राजनीतिक ब्लैकमेलिंग करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर खेला गया है। मिश्रा ने यह भी कहा कि रूबीना खान के बयान से उन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों का अपमान हुआ है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देश के लिए दी। उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को चुनौती देने वाला मामला है।

    केके मिश्रा ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने अपने ही मंत्री विजय शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मिश्रा ने भाजपा पर राष्ट्रधर्म के मुद्दे पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उछालना और अपने ही लोगों की अनदेखी करना लोकतंत्र और राष्ट्रीय भावना के लिए खतरनाक है।

    मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व को भी खुली चुनौती दी। इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार रूबीना खान को पार्टी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा जहां जाना चाहती हैं चली जाएं। मिश्रा ने पार्टी को चेतावनी दी कि ऐसे संदिग्ध निष्ठा वाले लोगों को शामिल करने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल पार्टी का मामला नहीं बल्कि देश के प्रति प्रतिबद्धता का भी सवाल है।

    इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मामले में कांग्रेस की छवि और संगठनात्मक क्षमता दोनों चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं।

    इंदौर के यह विवाद केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। केके मिश्रा का यह कड़ा रुख और पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती देना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस को अपने भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की आवश्यकता है। इस विवाद का राजनीतिक भविष्य और असर आने वाले दिनों में साफ होगा लेकिन फिलहाल यह वंदे मातरम विवाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अंदरूनी तूफानों में से एक बन चुका है।

  • जेसीबी का पंजा, फूटी पीएनजी लाइन, मुरैना में मची अफरातफरी

    जेसीबी का पंजा, फूटी पीएनजी लाइन, मुरैना में मची अफरातफरी


    मुरैना । मुरैना में नेहरू पार्क के पास एक सप्ताह से फूटी पानी की पाइपलाइन को ठीक करने के लिए नगर निगम की जेसीबी मशीन ने खोदाई शुरू की थी तभी हादसा हुआ। पानी की लाइन के ऊपर से गुजर रही पीएनजी घरेलू गैस लाइन जेसीबी के पंजे से कट गई। गैस लाइन कटते ही आग की भयानक लपटें उठीं और 20 मीटर तक गुबार फैल गया। पास में नाश्ते की दुकान में जल रही भट्टी से आग और भड़क गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान के बाहर का छप्पर जलकर राख हो गया।

    कन्हैया मिष्ठान की दुकान के संचालक विमल गुप्ता और उनके बेटे पावश गुप्ता झुलस गए। आग की लपटें पास की मोटरवाइडिंग की दुकान तक पहुंचीं और अख्तर खान का पूरा चेहरा और बाल झुलस गए। सूचना मिलते ही पीएनजी लाइन के कर्मचारी और नगर निगम की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे। आग को तुरंत काबू किया गया। पीएनजी के कर्मचारियों ने बताया कि पाइपलाइन में फिलहाल सप्लाई बंद थी और केवल टेस्टिंग के लिए गैस रखी गई थी। अगर सप्लाई चालू होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

    यह घटना मुरैना में बिछाई गई पीएनजी लाइन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। नगर निगम और पीएनजी विभाग के कर्मचारी तुरंत फूटी गैस और पानी की लाइन को ठीक करने में लग गए। पानी की पाइपलाइन निकालने के लिए सड़क पर खुदाई की गई और नेहरू पार्क के सामने एमएस रोड का एक साइड बंद कर दिया गया।

    बैरिकेड लगने के कारण हनुमान चौराहा की तरफ जाने वाले वाहन शिक्षा नगर और जीवाजीगंज की सड़कों से मोड़ दिए गए। इसके चलते एमएस रोड पर लगभग एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की भारी भीड़ के कारण मिल एरिया रोड, गर्ल्स रोड और शिक्षा नगर रोड पर भी जाम बढ़ गया। हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि पाइपलाइन सुरक्षा के मानक पर्याप्त नहीं हैं। प्रशासन और पीएनजी विभाग की सतर्कता ही भविष्य में ऐसे बड़े हादसों को रोक सकती है।

  • TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें

    TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें


    भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। 20 से 25 साल तक सेवा दे चुके शिक्षक इस फैसले को अपने अनुभव और सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

    ‘अनुभव की अनदेखी, नियमों का अन्यायपूर्ण लागू होना’
    प्रदर्शन कर रहीं शिक्षिका शीबा खान ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह अव्यवहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 26 साल के अनुभवी कलेक्टर से भी दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? वहीं शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने इसे “तानाशाही निर्णय” बताते हुए कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उनका पालन किया गया था। अब पुराने शिक्षकों पर नए नियम लागू करना पूरी तरह गलत है।

    रिटायरमेंट के करीब शिक्षकों पर बढ़ा दबाव
    शिक्षकों का कहना है कि जिनकी सेवा में केवल कुछ ही साल बचे हैं, उनसे दोबारा परीक्षा की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि इतने वर्षों का अनुभव किसी भी परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    सरकार को रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग
    प्रदर्शन में शामिल शिक्षिका संगीता कुशवाहा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है और इसे जल्द से जल्द संशोधित किया जाना चाहिए।

    18 अप्रैल को परिवार सहित बड़ा प्रदर्शन
    अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने बताया कि 8 अप्रैल को जिला स्तर पर प्रदर्शन के बाद DPI भोपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 11 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 18 अप्रैल को प्रदेशभर के शिक्षक परिवार सहित भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे।

    DPI का आदेश और उसके प्रभाव
    लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति का खतरा रहेगा। विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है।

    1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे में
    शिक्षक संगठनों के अनुसार इस आदेश से करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। उनका कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 और टीईटी 2011 के बाद लागू हुआ था, इसलिए पुराने शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पिछली तारीख से नियम लागू करने जैसा है।

    संयुक्त लड़ाई की तैयारी, आंदोलन होगा तेज
    शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अब वे एकजुट होकर इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।