Category: Madhya Pradesh

  • समर्थन मूल्य पर खरीदी ने बदली तस्वीर किसानों ने जश्न में किया डांडिया स्वागत

    समर्थन मूल्य पर खरीदी ने बदली तस्वीर किसानों ने जश्न में किया डांडिया स्वागत


    इछावर । मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की शुरुआत ने किसानों के चेहरे पर लंबे समय बाद सच्ची मुस्कान ला दी है सीहोर जिले के चंदेरी गांव में इसका अनोखा और उत्साहपूर्ण नजारा देखने को मिला जहां किसानों ने खुशी में डांडिया नृत्य कर जश्न मनाया खेतों की मेहनत का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद ने पूरे गांव का माहौल उत्सव में बदल दिया

    दरअसल बीते दिनों सीहोर जिले के किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया था किसानों का कहना था कि उनकी फसल तैयार होने के बावजूद खरीदी में देरी हो रही थी और बाजार में उन्हें गेहूं का सही दाम नहीं मिल पा रहा था मंडियों में गेहूं 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा था जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था वहीं दूसरी ओर कर्ज का दबाव और खराब होती फसल ने उनकी चिंता और बढ़ा दी थी

    इस स्थिति को देखते हुए किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से जल्द खरीदी शुरू कराने की मांग की थी किसानों की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू कर दी है अब किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य मिलेगा जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जगी है

    खरीदी शुरू होते ही चंदेरी गांव समेत आसपास के राम खेड़ी और अन्य गांवों के किसानों ने एकजुट होकर अपनी खुशी का इजहार किया पारंपरिक डांडिया नृत्य के माध्यम से किसानों ने न केवल जश्न मनाया बल्कि सरकार के प्रति आभार भी जताया यह दृश्य न केवल गांव के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बन गया जहां मेहनत करने वाले अन्नदाता अपनी जीत का जश्न मना रहे थे

    किसानों ने इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का धन्यवाद किया उनका कहना है कि सरकार के इस कदम से उन्हें बड़ी राहत मिली है और अब वे अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त कर सकेंगे

    यह पहल केवल आर्थिक राहत ही नहीं बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को भी मजबूत करने वाली साबित हो रही है लंबे समय से संघर्ष कर रहे किसानों के लिए यह फैसला उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है गांवों में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल है और किसान भविष्य को लेकर अब पहले से ज्यादा आश्वस्त नजर आ रहे हैं

    गेहूं खरीदी की यह शुरुआत प्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो न केवल उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि कृषि क्षेत्र को भी नई दिशा देगी इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जब किसानों की आवाज सुनी जाती है तो उसका परिणाम खुशहाली और उत्सव के रूप में सामने आता है

  • एमपी में 10 अप्रैल से बढ़ेगी गर्मी, 5-6 डिग्री तक चढ़ेगा पारा, आज 7 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    एमपी में 10 अप्रैल से बढ़ेगी गर्मी, 5-6 डिग्री तक चढ़ेगा पारा, आज 7 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    भोपाल। मध्यप्रदेश में 10 अप्रैल से गर्मी का असर तेज होने वाला है। मौसम विभाग, भोपाल के अनुसार आने वाले दिनों में दिन के तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। हालांकि, गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला हुआ रह सकता है और कुछ जगहों पर बारिश, आंधी व गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की संभावना को लेकर अलर्ट जारी किया है।

    इससे पहले बुधवार को भोपाल, जबलपुर, रायसेन, शिवपुरी, रतलाम, छतरपुर, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर और धार सहित 15 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण दिन के तापमान में गिरावट भी देखने को मिली।

    दरअसल, प्रदेश के उत्तर, पूर्व और पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के चलते यह मौसम बदलाव हुआ। राजधानी भोपाल में भी हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। मौसम विभाग के अनुसार, 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, लेकिन इसका असर मध्यप्रदेश में सीमित ही रहने की संभावना है।

    गुरुवार को प्रदेश में तेज हवाएं भी चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। मौसम में बदलाव दोपहर के बाद अधिक स्पष्ट होगा।

  • MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक

    MP: टीईटी आदेश के खिलाफ प्रदेशभर में उबाल, नौकरी पर संकट का डर, सड़कों पर उतरे शिक्षक


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के नए आदेश के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों ने लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) मुख्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    राजधानी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में इस आदेश के विरोध में एक साथ आंदोलन हुआ। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने टीईटी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।


    डीपीआई आदेश बना विरोध की वजह

    हाल ही में डीपीआई द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो वर्ष के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। यही प्रावधान अब शिक्षकों के आक्रोश की सबसे बड़ी वजह बन गया है।


    “सुप्रीम कोर्ट के नाम पर अन्याय”

    प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर सरकार ऐसा फैसला थोप रही है, जिससे हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में शिक्षक भोपाल पहुंचे और डीपीआई के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना है।


    पुराने शिक्षकों पर नई शर्त का विरोध

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने के बाद 2011 से टीईटी अनिवार्य किया गया, जबकि हजारों शिक्षक इससे पहले नियुक्त हो चुके थे। ऐसे में अब उन पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” निर्णय है, जो अन्यायपूर्ण और कानूनी रूप से भी कमजोर है।


    1.5 लाख शिक्षक प्रभावित

    संगठनों के मुताबिक इस आदेश का असर करीब 1.5 लाख शिक्षकों पर पड़ सकता है। इनमें लगभग 70 हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय यह शर्त लागू नहीं थी, इसलिए अब इसे आधार बनाकर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा करना उचित नहीं है।


    संयुक्त मोर्चा की चेतावनी

    प्रदर्शन के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने डीपीआई अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बाहर मौजूद शिक्षकों को आश्वासन दिया गया कि उनकी बात शासन तक पहुंचाई जाएगी। वहीं, शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे, जबकि 18 अप्रैल को प्रदेशव्यापी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके भविष्य, सम्मान और वर्षों की सेवा का सवाल है और इसके लिए अब वे आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

  • इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल

    इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बुधवार को 8,455 करोड़ रुपए का बजट शोर-शराबे के बीच बहुमत से पारित किया गया। बजट चर्चा के दौरान पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया। इससे भाजपा पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया।

    सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

    दरअसल, इंदौर शहर के विकास को लेकर मंगलवार को आठ हजार करोड़ के बजट पेश किया गया था, जिस पर बुधवार को चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस की दो पार्षद वंदे मातरम बोलने के मुद्दे पर आमने-सामने हो गए। वंदे मातरम गीत में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के शामिल नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके समर्थन में एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान भी बोलने लगीं और उन्होंने तैश में कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो हमसे वंदे मातरम बुलवा कर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो हमसे बुलवा कर दिखाएं।

    हालांकि, शोर-गुल में उनकी बातों पर भाजपा पार्षद ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। कुछ देर बाद सभापति ने पार्षद फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। वे कुछ देर बैठी रहीं, तो भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करने लगे। इसके बाद फौजिया शेख सदन से बाहर चली गईं। रुबीना ने कहा कि कुरान में वंदे मातरम की मनाही है। पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि हम राष्ट्रगान गाते हैं। अब हमें कहा जाता है कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा। क्या यह कोई दादागिरी है?

    उन्होंने कहा कि गलत बात हम अपने पिता की भी नहीं सुनते, तो इन भाजपा वालों की क्यों सुनें। कुरान में वंदे मातरम की मनाही है, क्योंकि इबादत के लिए अल्लाह ही योग्य है। वंदे मातरम का मतलब माता की इबादत करना है। हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, तो फिर वंदे मातरम क्यों बोलें?

    मामले पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है।

    कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई मामलों की जानकारी नहीं होती और सवाल पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। महापौर ने कहा कि सभी सवालों के जवाब सात दिन में दे दिए जाएंगे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया जब राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ‘गद्दार’ कहा। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और फिर सदन में हंगामा हुआ। विरोध के बाद भदौरिया ने माफी मांगी, जिसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।


    माफी की मांग पर अड़े भाजपा पार्षद, सदन में गूंजे नारे

    भागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था। बताया गया कि कल दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगो’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।


    हंगामे के बीच बहुमत से बजट पारित

    सभापति मुन्नालाल यादव ने कहा कि सदन में कई बार अमर्यादित बातें हो जाती हैं, लेकिन हंगामे की वजह से बजट पर ठीक से चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि लगातार शोर-शराबे के बीच बहुमत के आधार पर बजट पारित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना गलत है, इसी कारण कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर किया गया।

  • MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान

    MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) के एमवाय अस्पताल (MY Hospital) में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां खेलते-खेलते एक साल के मासूम (One Year old Innocent) की जिंदगी पर संकट आ गया। बच्चे के गले में जिंदा मछली फंस (Live Fish Stuck Child’s Throat) गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों की तत्परता और जटिल सर्जरी के बाद आखिरकार बच्चे की जान बचाई जा सकी।


    सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा

    परिजनों के अनुसार, घर में एक्वेरियम की सफाई के दौरान मछलियों को बाहर निकालकर रखा गया था। इसी दौरान पास में खेल रहे बच्चों में से एक ने मछली को हाथ में उठा लिया। यह देख एक वर्षीय बच्चा जोर-जोर से हंसने लगा। तभी हाथ में छटपटा रही मछली फिसलकर सीधे बच्चे के मुंह में चली गई और गले के अंदर जाकर फंस गई।


    बच्चे को होने लगी सांस लेने में तकलीफ

    घटना के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। वह बेचैनी और घबराहट से जूझने लगा। उसके मुंह से खून भी निकलने लगा, जिससे परिजन घबरा गए और तुरंत उसे एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि मछली गले के पिछले हिस्से में फंसी हुई है और जिंदा होने के कारण लगातार हलचल कर रही है, जिससे अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा था।


    सबसे बड़ी चुनौती, मछली जीवित

    ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता के नेतृत्व में तुरंत आपातकालीन टीम गठित की गई और बिना देर किए सर्जरी का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मछली जीवित थी और उसके पंख व गलफड़े हिल रहे थे, जिससे स्वर-यंत्र और भोजन नली को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ था। करीब तीन इंच लंबी और डेढ़ इंच चौड़ी गोरामी मछली को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। सर्जरी सफल रही और उपचार के बाद बच्चे की सांस सामान्य हो गई। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।


    मामला बेहद दुर्लभ

    विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का मामला बेहद दुर्लभ है और मध्य भारत में यह पहला मामला माना जा रहा है। समय पर इलाज मिलने से एक बड़ी अनहोनी टल गई। डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को हमेशा निगरानी में रखें और उन्हें छोटी या जीवित वस्तुओं से दूर रखें, क्योंकि इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

  • इश्क साजिश और कत्ल: 1 लाख की सुपारी देकर पति को मरवाने वाली पत्नी गिरफ्तार

    इश्क साजिश और कत्ल: 1 लाख की सुपारी देकर पति को मरवाने वाली पत्नी गिरफ्तार

    धार। मध्यप्रदेश के धार जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां पति-पत्नी के रिश्ते को तार-तार करते हुए एक महिला ने अपने प्रेम संबंधों के चलते पति की हत्या की साजिश रच डाली। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि मिर्च व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की हत्या किसी लूटपाट का परिणाम नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी जिसकी मास्टरमाइंड उसकी पत्नी प्रियंका ही निकली।

    घटना सरदारपुर थाना क्षेत्र की है जहां सोमवार रात व्यापारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में इसे लूट की वारदात बताया जा रहा था लेकिन पुलिस को घटनास्थल और परिस्थितियों में कई ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया। जब पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की और मृतक की पत्नी प्रियंका से पूछताछ की तो कहानी का चौंकाने वाला सच सामने आया।

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रियंका ने अपने प्रेमी कमलेश के साथ मिलकर इस हत्या की पूरी साजिश रची थी। दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे और इसी रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रियंका अपने पति को रास्ते से हटाना चाहती थी। इसके लिए उसने करीब 1 लाख रुपये की सुपारी देकर अपने परिचितों के जरिए हत्या करवाने का प्लान बनाया।

    घटना की रात प्रियंका ने आरोपियों को घर की पूरी जानकारी दी और यह भी बताया कि उस समय घर में सिर्फ वही और उसका पति मौजूद हैं। योजना के मुताबिक आरोपी घर में घुसे पहले पत्नी को अलग करने का नाटक किया और फिर व्यापारी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरे घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया गया ताकि यह मामला डकैती जैसा लगे।

    इतना ही नहीं खुद को निर्दोष साबित करने के लिए प्रियंका ने अपने हाथ-पैर बंधवाकर एक झूठी कहानी भी गढ़ी। आरोपियों ने उसे शोर मचाने के लिए कहा ताकि घटना वास्तविक लगे। लेकिन पुलिस की सख्त जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने इस झूठ की परतें खोल दीं।

    आरोपी कमलेश ने पूछताछ में बताया कि प्रियंका अपने पति से परेशान थी और इसी वजह से उसने उसे खत्म करने की योजना बनाई। हत्या के बाद प्रियंका ने आरोपियों को कुछ जेवर और 30 से 40 हजार रुपये नकद भी दिए थे।

    धार पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह एक सुनियोजित हत्या थी जिसे लूट का रूप देने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने 12 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।

    यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध संबंध किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकते हैं। रिश्तों में विश्वास की जगह जब साजिश ले लेती है तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है इसका यह मामला एक कड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

  • एससी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, छात्रगृह योजना में अब हर महीने मिलेंगे 10 हजार रुपये

    एससी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, छात्रगृह योजना में अब हर महीने मिलेंगे 10 हजार रुपये


    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है, जिससे उनकी उच्च शिक्षा का रास्ता और आसान हो सकेगा। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि छात्रगृह योजना में संशोधन कर अब पात्र विद्यार्थियों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

    यह निर्णय विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं या वहां प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं। महंगे शहरों में रहने और पढ़ाई के खर्च को देखते हुए यह सहायता उनके लिए काफी मददगार साबित होगी।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना के तहत हर साल कुल 100 विद्यार्थियों को लाभ दिया जाएगा। इसमें 50 विद्यार्थी स्नातक स्तर के होंगे और 50 विद्यार्थी स्नातकोत्तर स्तर के होंगे। इसके अलावा जो विद्यार्थी पहले से इस योजना के अंतर्गत अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलता रहेगा।

    इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक पहुंच दिलाना भी है। अक्सर देखा जाता है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थी आर्थिक तंगी के कारण बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते, जिससे उनके करियर की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। ऐसे में यह योजना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

    सरकार का मानना है कि जब विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन और अवसर मिलेंगे, तो वे न केवल अपनी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर सकेंगे। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे समाज में अपनी एक मजबूत पहचान बना पाएंगे।

    मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसी योजनाएं बेहद जरूरी हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को कम करने में मदद मिलेगी।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की योजनाएं न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाती हैं, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी योगदान देती हैं। जब अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे, तो इससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

    कुल मिलाकर, यह निर्णय अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी राहत और अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन्हें न केवल बेहतर शिक्षा मिलेगी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने के लिए एक मजबूत आधार भी मिलेगा।

  • 9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

    9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

    भोपाल। मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक 8वां पोषण पखवाड़ा मनाया जाएगा जिसमें इस वर्ष बच्चों के मस्तिष्क विकास को केंद्र में रखते हुए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस बार पखवाड़े की थीम जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास निर्धारित की गई है जो बाल विकास के सबसे महत्वपूर्ण चरण को रेखांकित करती है।

    पोषण पखवाड़े का शुभारंभ 9 अप्रैल को प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केन्द्रों और समुदाय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान “पोषण पर चर्चा” कार्यक्रम आयोजित कर आम लोगों को मातृ एवं शिशु पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य परिवार और समाज को बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के प्रति जागरूक बनाना है।

    इस पखवाड़े में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही परिवारों को बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और उनके समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जीवन के पहले छह वर्षों में ही हो जाता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में ऐसे व्यवहारों और गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूत बनाते हैं।

    पोषण पखवाड़े के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें स्वास्थ्य शिविर पोषण संबंधी कहानी वाचन दादी-नानी के अनुभव साझा कार्यक्रम स्थानीय खाद्य सामग्री से पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता और जंक फूड के दुष्प्रभावों पर जागरूकता रैली शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान माता-पिता के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सत्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों को सशक्त बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे।

    22 अप्रैल को पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सामुदायिक सहयोग और दान अभियान चलाया जाएगा जबकि 23 अप्रैल को पोषण मेला आयोजित कर जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

    प्रदेश के सभी जिलों में इस अभियान के तहत रैलियां पोषण वाटिका निर्माण प्रश्नोत्तरी पोस्टर और नारा लेखन प्रतियोगिता तथा सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही इन गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी जिससे इसकी निगरानी और प्रभाव का आकलन किया जा सके।

    इस अभियान को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य पंचायत जनजातीय कार्य नगरीय प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर काम करेंगे। यह समन्वित प्रयास सुनिश्चित करेगा कि पोषण पखवाड़ा केवल एक कार्यक्रम न होकर एक जन-आंदोलन के रूप में सामने आए।

    कुल मिलाकर यह पहल प्रदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसमें परिवार समाज और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।

  • एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार

    एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार


    नरसिंहपुर इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। आए दिन सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जा रहे हैं जिससे शासन-प्रशासन की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामले इंदौर और नरसिंहपुर से सामने आए हैं जहां लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    इंदौर में लोकायुक्त टीम ने लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियरों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। जानकारी के अनुसार बालकुमार जैन और धीरेंद्र नीमा नामक इंजीनियरों ने एक भुगतान के बदले 6 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने योजना बनाकर दोनों को 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    वहीं नरसिंहपुर में भी जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका में पदस्थ बाबू संजय तिवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि बाबू ने पेवर ब्लॉक लगाने वाले एक ठेकेदार से बिल भुगतान के एवज में 38 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।

    दोनों मामलों में लोकायुक्त पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

    प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह साफ होता है कि भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। आम नागरिकों और ठेकेदारों को अपने काम के लिए रिश्वत देने पर मजबूर होना पड़ता है जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। हालांकि लोकायुक्त की सक्रियता से ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है लेकिन इन घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर और भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन बनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    फिलहाल इंदौर और नरसिंहपुर में हुई इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती जारी है लेकिन इसे जड़ से खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई आम लोगों के लिए राहत की खबर जरूर है लेकिन साथ ही यह भी दर्शाती है कि अभी इस दिशा में लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

  • एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका

    एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका


    नई दिल्ली/भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल ने इस वर्ष से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए पारंपरिक पूरक परीक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब द्वितीय परीक्षा शुरू की जा रही है जिसमें फेल और पास दोनों ही प्रकार के छात्र शामिल हो सकेंगे। यह परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी।

    नई व्यवस्था के तहत छात्र केवल अनुत्तीर्ण विषयों के लिए ही नहीं बल्कि अपने अंक सुधारने के उद्देश्य से भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने परिणाम बेहतर करने का अधिक अवसर मिलेगा।

    पहले की व्यवस्था में हाईस्कूल 10वीं में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी 12वीं में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। लेकिन अब इस नई द्वितीय परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान किया गया है।

    नियमों के अनुसार जो छात्र किसी विषय में फेल हैं उनके लिए उस विषय की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। वहीं पास छात्र अपनी इच्छा से किसी भी विषय में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इसे छात्रों के लिए राहतभरा कदम माना जा रहा है।

    जारी टाइमटेबल के मुताबिक 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित होगी जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच होगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर कराई जाएंगी।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा के समान ही होगी। छात्र के दोनों परिणामों में से जो बेहतर होगा वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।

    द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।