Category: Madhya Pradesh

  • बड़वानी के मोहिपुरा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता दर्ज, घरों से बाहर निकले लोग

    बड़वानी के मोहिपुरा में महसूस किए गए भूकंप के झटके, 3.4 तीव्रता दर्ज, घरों से बाहर निकले लोग


    बड़वानी । बड़वानी जिले के अंजड़ थाना क्षेत्र स्थित ग्राम मोहिपुरा में बुधवार दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.4 दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि करीब दो मिनट तक धरती में कंपन होता रहा, जिससे ग्रामीणों में घबराहट फैल गई और लोग तुरंत अपने घरों से बाहर निकल आए।

    गांव के निवासी लोकेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि वे दोपहर में अपने घर पर सो रहे थे, तभी अचानक तेज झटका महसूस हुआ। समय देखा तो 12:48 बजे थे। इसके बाद वे तुरंत बाहर आए और आसपास के लोगों से पूछताछ की, तब पता चला कि यह भूकंप के झटके थे। उन्होंने कहा कि इस तरह का अनुभव गांव में पहली बार हुआ है।

    भूकंप के दौरान ग्रामीणों ने अपने घरों में रखे बर्तन, फर्नीचर और पंखों को हिलते हुए देखा। इंदिरा सागर पावर स्टेशन की भूकंप वेधशाला और राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर भी इसी समय भूकंप दर्ज किया गया है।

    जिला मुख्यालय पर संचालित भूकंप केंद्र की सिस्मोमीटर मशीन में भी इस हलचल को 3.4 रिक्टर स्केल पर रिकॉर्ड किया गया। केंद्र के ऑपरेटर हुकुम कुमार के अनुसार, एमईक्यू माइक्रोअर्थक्विक मशीन 24 घंटे सक्रिय रहती है और नर्मदा नगर पुनासा, खंडवा स्थित सेंटर से प्रतिदिन सुबह रिपोर्ट जारी की जाती है।

    उन्होंने बताया कि बुधवार दोपहर अंजड़ क्षेत्र में दर्ज इस भूकंपीय हलचल की तीव्रता 3.4 रही, जिसे एमईक्यू मशीन ने रिकॉर्ड किया। यह मशीन लगभग 40 से 50 किलोमीटर के दायरे में जमीन की हलचल को मापने में सक्षम है।

  • आग बुझाने गया किसान खुद बन गया शिकार, सतना में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत

    आग बुझाने गया किसान खुद बन गया शिकार, सतना में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत


    सतना । सतना जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया जहां अरहर के खेत में लगी आग बुझाने के प्रयास में एक वृद्ध किसान की झुलसकर मौत हो गई। यह घटना बरौंधा थाना क्षेत्र के बकोटा गांव की है जहां मंगलवार दोपहर अचानक खेत में आग भड़क उठी और देखते ही देखते उसने विकराल रूप ले लिया।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार बकोटा गांव निवासी 80 वर्षीय मुरलिया यादव अपने खेत में लगी आग को बुझाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। आग तेजी से फैल रही थी और आसपास की फसलों को भी अपनी चपेट में ले रही थी। ऐसे में मुरलिया यादव ने बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए आग बुझाने का प्रयास शुरू किया लेकिन इसी दौरान वे लपटों में घिर गए और गंभीर रूप से झुलस गए।

    ग्रामीणों ने घटना को देख तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास किया और मुरलिया यादव को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उन्हें गंभीर रूप से जलने से बचाया नहीं जा सका। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल छा गया और हर कोई इस हादसे से स्तब्ध नजर आया।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खेत में आग अचानक लगी हालांकि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खेतों में सूखी फसल और तेज हवाओं के कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में थोड़ी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए और किसानों को सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी जाए।

    यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि खेतों में आग लगने की स्थिति में बिना सुरक्षा के उसे बुझाने का प्रयास कितना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने पर तुरंत फायर ब्रिगेड या संबंधित अधिकारियों को सूचना देना चाहिए और खुद जोखिम उठाने से बचना चाहिए।

    मुरलिया यादव का यह बलिदान गांव के लोगों के लिए एक बड़ी क्षति है। वे अपने परिवार और समुदाय के लिए समर्पित किसान थे। इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    प्रशासन और पुलिस अब इस घटना की जांच कर रहे हैं और आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

  • भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

    भिण्ड में बदलते मौसम ने गेहूँ की फसल को किया प्रभावित, किसानों में बढ़ी चिंता

    भिण्ड । भिण्ड जिले में मौसम का अचानक बदलता मिजाज किसानों की चिंता का कारण बन गया है। पिछले एक सप्ताह से सुबह तेज धूप और शाम को बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस बदलते मौसम से खेतों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार गेहूँ की फसल पर नकारात्मक असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि यह अचानक बदलते मौसम ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों को प्रभावित किया है।

    कल देर शाम तेज हवाओं के साथ बादल घिर आए और रात में बूंदाबांदी शुरू हो गई। जिले के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई। हालांकि देर रात मौसम साफ होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन खेतों में फसल पर इसका असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई जगह गेहूँ के बाल कमजोर हुए और जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उनका नुकसान होने की संभावना है।

    किसानों का कहना है कि गेहूँ की कटाई का समय करीब है और ऐसी बारिश फसल के बर्बाद होने का जोखिम बढ़ा रही है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे मौसम के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं और किसानों को समय पर जानकारी प्रदान करें ताकि वे अपनी फसल की रक्षा कर सकें। इसके अलावा किसानों ने सुझाव दिया है कि मौसम के अनुकूल तकनीकी सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, जिससे कटाई के दौरान नुकसान को कम किया जा सके।

    मौसम विभाग ने भी भिण्ड जिले में अगले कुछ दिनों के लिए बारिश की संभावना जताई है। किसानों को सतर्क रहने और खेतों में सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और बारिश के चलते फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा।

    भिण्ड जिले में गेहूँ किसानों की मुख्य फसल है और यह क्षेत्रिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता से किसान परेशान हैं और वे अपने फसल के सही मूल्य और उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रहे हैं। किसान संगठन और स्थानीय प्रशासन भी इस स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और किसानों को सलाह और मदद प्रदान करने में जुटे हैं।

    कुल मिलाकर भिण्ड जिले में बदलते मौसम और लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूँ की फसल पर पड़ने वाले असर को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से मदद और समय पर जानकारी की मांग की है। विशेषज्ञ भी सुझाव दे रहे हैं कि किसानों को अपने खेतों में आवश्यक सुरक्षा उपाय करना चाहिए ताकि फसल की बर्बादी कम से कम हो। ऐसे में आगामी दिनों में मौसम की स्थिति और प्रशासन की मदद दोनों ही किसानों की चिंता को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

    किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी


    भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में 9 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूँ खरीदी को लेकर सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज और सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से वर्चुअल संवाद भी किया और उन्हें प्रदेश की गेहूँ खरीदी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन इसे 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ दिलाना और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है।

    उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसानों को तुरंत सहायता मिल सके। इसके साथ ही जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, और मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण प्रक्रिया पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से किसानों को खरीदी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने सामाजिक और सेवाभावी संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन उपार्जन केंद्रों पर आकर व्यवस्था में मदद कर सकते हैं, किसानों को मार्गदर्शन दे सकते हैं और प्रशासन के साथ मिलकर कार्य कर सकते हैं। इस वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, और इस दौरान किसानों को उनकी फसल, आय और कल्याण से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जाएगी।

    डॉ. यादव ने बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता और खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रही है कि उपार्जन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो। किसानों के कल्याण के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें सही मूल्य, उचित सुविधाएं और सरल प्रक्रिया के माध्यम से गेहूँ बेचने का अवसर मिले।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण और कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण के लिए इस प्रक्रिया में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग अनिवार्य है। कंट्रोल रूम से निरंतर निगरानी, हेल्प डेस्क पर सहायता, पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना तथा किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देना इस प्रक्रिया की सफलता की कुंजी होगी।

    इस प्रकार प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया किसानों के हित और सुविधा के अनुरूप पूरी तरह व्यवस्थित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से किसान कल्याण वर्ष 2026 में उपार्जन केंद्रों पर किसानों की संतुष्टि और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से यह प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और सहज होगी।

  • रश्मि शमी ने लिया पेट्रोलियम आपूर्ति का जायजा, पीएनजी कनेक्शन और कालाबाजारी पर निर्देश

    रश्मि शमी ने लिया पेट्रोलियम आपूर्ति का जायजा, पीएनजी कनेक्शन और कालाबाजारी पर निर्देश


    भोपाल । भोपाल में बुधवार को अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, नगर निगम और नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी के अधिकारियों के साथ पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन हाउसहोल्ड्स में पीएनजी की लाइन कनेक्ट की जा चुकी है, वहाँ आगामी दस दिनों के अंदर पीएनजी सप्लाई शुरू की जाए। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को यह भी समझाईश दी जाए कि यदि वे पीएनजी सप्लाई नहीं लेते हैं, तो भारत सरकार के निर्देशानुसार तीन माह के अंदर उनकी एलपीजी सप्लाई बंद की जा सकती है।

    एसीएस रश्मि शमी ने गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थानों, सुधार गृहों, पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय और पुलिस कॉलोनी जैसी जगहों को प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलों को निर्देशित किया कि जहां पाइपलाइन बिछी हुई है, वहाँ के रहवासियों और व्यवसायियों की सूची तैयार की जाए और कॉलोनियों में जागरूकता कैम्प लगाए जाएँ। इन कैम्पों में नगर निगम, नगर पालिका के अधिकारी, वार्ड पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना अनिवार्य होगा।

    औद्योगिक क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछी होने वाले क्षेत्रों की पहचान कर उन उद्योगों को पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए। सीजीडी संस्थाओं के मैनपावर बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन पॉलीटेक्निक, आईटीआई और अन्य प्रशिक्षण संस्थाओं से प्रशिक्षार्थियों की सूची उपलब्ध करवा रहा है, जिन्हें लघु प्रशिक्षण के बाद कार्य में लगाया जाएगा।

    बैठक में यह भी बताया गया कि जिले के माइग्रेट लेबर और छात्रों के लिए खाना पकाने के उद्देश्य से ऑयल कंपनी द्वारा 5 किलो के सिलेण्डर 1529 रुपये प्रति कनेक्शन के हिसाब से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस सिलेण्डर को एड्रेस प्रूफ के बिना भी लिया जा सकता है और रिफिल चार्ज 585 रुपये निर्धारित किया गया है। नगर निगम और नगर पालिका के माध्यम से जिंगल और कचरा गाड़ियों का उपयोग कर पीएनजी के प्रचार-प्रसार की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए। शादी गार्डन, कैटरर्स और स्ट्रीट वेंडर्स को 70 प्रतिशत सीमा के अधीन कमर्शियल सिलेण्डर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    सीजीडी संस्थाओं को पाइपलाइन बिछाने की अनुमति और ROU स्वीकृतियां 24 घंटे के भीतर जारी की जा रही हैं। अभी तक सभी स्वीकृतियां पूरी तरह जारी की जा चुकी हैं और कोई भी आवेदन शेष नहीं है।

    अपर मुख्य सचिव ने कालाबाजारी रोकने की दिशा में भी सख्त रुख अपनाया। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एलपीजी कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्यवाही जारी है। अब तक 3226 स्थानों पर जांच की गई, 3961 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किए गए और 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रक, अधिकारी और ऑयल कंपनी के अधिकारी गैस एजेंसी और पेट्रोल पंपों की नियमित जांच के लिए सतत रूप से निर्देशित हैं।

    बैठक के निष्कर्ष में यह स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में पीएनजी और एलपीजी आपूर्ति को सुचारू रूप से सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। घरों, औद्योगिक इकाइयों और संवेदनशील संस्थानों में समय पर सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • बैतूल में शीतल झिरी परियोजना का विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    बैतूल में शीतल झिरी परियोजना का विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


    बैतूल । बैतूल जिले में माचना नदी पर प्रस्तावित शीतल झिरी मध्यम सिंचाई परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। सेहरा ग्रामीण संघर्ष मोर्चा और विभिन्न जनजातीय संगठनों ने कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपा और परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। उनका आरोप है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया संविधान की पांचवीं अनुसूची भू-अर्जन अधिनियम 2013 और पेसा एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करती हुई आगे बढ़ाई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार शीतल झिरी परियोजना के लिए 23 मार्च 2026 को भूमि अर्जन की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस प्रक्रिया में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और न ही उनका पक्ष सुना गया। इस अधिसूचना के बाद से स्थानीय लोग चिंतित हैं और उन्हें डर है कि उनकी पारंपरिक जमीनें और कृषि योग्य भूमि नुकसान में आ सकती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना का लाभ केवल कुछ बड़े हितधारकों को मिलेगा और आम ग्रामीण तथा जनजातीय समुदाय इसके दुष्प्रभाव झेलेंगे।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि शीतल झिरी परियोजना के तहत प्रस्तावित बांध और जलाशय से उनके खेत और घर प्रभावित हो सकते हैं। इस कारण से उन्होंने विरोध स्वरूप कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और इस परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन कराया जाए।

    सेहरा ग्रामीण संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे लंबे समय से परियोजना के प्रभावों को लेकर सरकार और प्रशासन के संपर्क में हैं लेकिन उनकी चिंताओं को अनसुना किया गया। इस परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का जीवन खेती और स्थानीय पारिस्थितिकी प्रणाली सीधे प्रभावित होगी। ग्रामीणों का कहना है कि पेसा एक्ट के तहत उनकी स्वीकृति और पारंपरिक अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाएंगे। यदि प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी और अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करने को तैयार हैं।

    कलेक्टर कार्यालय ने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा कि ज्ञापन प्राप्त हुआ है और इसे संबंधित विभागों के पास भेजकर जांच करवाई जाएगी। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि ग्रामीणों की चिंता को ध्यान में रखते हुए परियोजना की अधिग्रहण प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शीतल झिरी परियोजना जैसे सिंचाई और जल प्रबंधन प्रयास ग्रामीणों और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए परियोजना के क्रियान्वयन से पहले स्थानीय समुदायों की सहमति पर्यावरणीय अध्ययन और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।

    बैतूल में यह विरोध प्रदर्शन न केवल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण और जनजातीय समुदाय अपनी पारंपरिक जमीनों और अधिकारों की सुरक्षा के लिए सतर्क और सजग हैं। प्रशासन और सरकार पर यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से इस तरह के विकास परियोजनाओं को लागू करें।

    ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी भूमि और जीवन-यापन की सुरक्षा करना है और वे किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाए और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए।

  • मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी

    मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी


    बैतूल । बैतूल जिले के मुलताई रेलवे स्टेशन पर मंगलवार दोपहर ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सिकंदराबाद-जयपुर एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान महाराष्ट्र के अमरावती जिले के दर्यापुर निवासी सलीम खान (42) पानी लेने के लिए ट्रेन से नीचे उतरे। इसी दौरान उनकी नज़र फिसल गई और वह ट्रैक पर गिर गए।

    पुलिस ने बताया कि हादसा बहुत जल्दी और अचानक हुआ। ट्रेन ठहरी थी लेकिन सलीम खान की गिरने की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत उठाया नहीं जा सका। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने शोर मचाया और रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी। रेलवे और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची और सलीम खान को प्राथमिक सहायता दी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे के बाद स्टेशन पर हड़कंप मच गया। यात्री और रेलवे कर्मचारी घटना स्थल पर जमा हुए। रेलवे पुलिस ने ट्रैक और प्लेटफार्म की जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुर्घटना किसी तकनीकी या सुरक्षा कारण से तो नहीं हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार यह एक व्यक्तिगत हादसा था, जिसमें यात्री की असावधानी और ट्रेन से उतरने के दौरान फिसलने की वजह से मौत हुई।

    रेलवे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजन और स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने पूरे मामले में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पर सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं, लेकिन यात्रियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

    रेलवे यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन से उतरते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाज़ी या असावधानी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। रेलवे स्टेशन पर चेतावनी बोर्ड और कर्मचारियों की मौजूदगी होती है, लेकिन यात्रियों की सतर्कता भी बेहद महत्वपूर्ण है।

    स्थानीय लोगों ने कहा कि सलीम खान का यह हादसा काफी दुखद है और रेलवे स्टेशन पर ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े उपाय किए जाने चाहिए। यात्रियों को ट्रेन के रुकने और चलने की स्थिति में प्लेटफार्म पर सावधानी से चलने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

    मुलताई स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय या उतरते समय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने समय-समय पर चेतावनी जारी की है, लेकिन असावधानी से होने वाली घटनाओं को रोकना चुनौतीपूर्ण होता है। इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया है।

    रेलवे प्रशासन ने कहा कि घटना की पूरी जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। यात्रियों से अपील की गई है कि ट्रेन के चलने या रुकने के समय प्लेटफार्म पर सावधानी बरतें और कभी भी ट्रेन से भागते हुए या जल्दी में उतरते हुए जोखिम न लें।

    इस घटना ने मुलताई रेलवे स्टेशन और आसपास के यात्रियों में सुरक्षा के प्रति चेतना बढ़ा दी है। रेलवे और पुलिस मिलकर जांच और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के दुखद हादसे रोके जा सकें।

  • राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव: बाला बच्चन ने जताई भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका

    राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव: बाला बच्चन ने जताई भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका


    बड़वानी । मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री और राजपुर विधायक बाला बच्चन ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यसभा चुनाव में षड्यंत्र की आशंका जताई। बाला बच्चन का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को राज्यसभा पहुंचने से रोकने के लिए अपनी रणनीति के तहत विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रही है।

    बाला बच्चन बुधवार को बड़वानी पहुंचे और मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहले भी भाजपा ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकारें बनाई हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मध्य प्रदेश में 27 विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए सरकार बनाई गई थी और यह प्रयोग अन्य राज्यों में भी होते रहे हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की संभावना है, जिसे रोकने के लिए कांग्रेस पूरी तरह सतर्क है।

    पूर्व गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशी के पक्ष में सभी विधायक मतदान करेंगे और उनके विजयी होने के लिए पूरी सक्रियता के साथ काम करेंगे। बाला बच्चन ने जोर देकर कहा कि बड़वानी जिले के तीनों कांग्रेस विधायक पूरी तरह से पार्टी के साथ हैं और किसी भी प्रकार की बाहरी राजनीति से प्रभावित नहीं होंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस पूरे राज्य में अपने विधायकों को संभालने और राज्यसभा में पूर्ण बहुमत सुनिश्चित करने के लिए सजग और अलर्ट है।

    बाला बच्चन ने यह भी कहा कि भाजपा की कथित षड्यंत्रपूर्ण गतिविधियों से लोकतंत्र कमजोर होता है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने और विधायकों की स्वतंत्र भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बाला बच्चन का यह बयान राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा सकता है।

    पूर्व गृहमंत्री ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस के विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग निष्पक्ष और पार्टी लाइन के अनुसार करेंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार विजयी होगा और पार्टी अपने विधायकों के साथ मजबूती से खड़ी है।

    राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। बाला बच्चन के बयान ने भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी लड़ाई को और अधिक गर्म कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पूरी तरह अपने विधायकों को जुटाकर राज्यसभा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेगी।

    इस प्रकार, बाला बच्चन ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राज्यसभा चुनाव में अपने हित साधने के लिए षड्यंत्र कर रही है, जबकि कांग्रेस पूरी सजगता और सक्रियता के साथ अपने प्रत्याशी को विजयी बनाने की योजना में लगी हुई है। यह बयान मध्य प्रदेश की राजनीतिक पटल पर आगामी राज्यसभा चुनाव की सख्त लड़ाई और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

  • AC कोच में पर्स छीनकर भागा शातिर चोर, फिल्मी अंदाज में पुलिस से बचता रहा

    AC कोच में पर्स छीनकर भागा शातिर चोर, फिल्मी अंदाज में पुलिस से बचता रहा


    जबलपुरमध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस और एक शातिर अंतरराज्यीय चोर के बीच मंगलवार शाम ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, मानो किसी फिल्म का सीन हो। एसी कोच में महिला का पर्स छीनकर भगा उत्तरदायी पुलिस से बचने के लिए खितौला रेलवे स्टेशन के पास एक काई से भरे तालाब में कूद गया और करीब 5 घंटे तक पानी के भीतर छिपा रहा। हैरानी की बात यह रही कि वह सांस लेने के लिए कमल की नाल का इस्तेमाल करता रहा।
    ट्रेन में वारदात, फिर कूदकर भागा आरोपी

    घटना Rewa-Itwari Express की है, जहां एसी कोच में एक महिला का पर्स छीनने की कोशिश के दौरान आरोपी आरपीएफ की नजर में आ गया। जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड स्टेशन के पास धीमी हुई, आरोपी चेन पुलिंग कर ट्रेन से कूद गया और मौके से भागने लगा। आरपीएफ जवानों ने पीछा किया तो वह खितौला क्षेत्र के एक गहरे तालाब में जा कूदा।

    तालाब में छिपकर बनाया अनोखा प्लान

    पुलिस और गोताखोरों की टीम ने जब तलाश शुरू की, तो आरोपी कहीं नजर नहीं आया। बाद में पता चला कि उसने खुद को पूरी तरह पानी में डुबो रखा था और केवल कमल की नाल के जरिए सांस ले रहा था। घनी काई और अंधेरे की वजह से उसे ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसे पकड़ लिया।

    ‘सनी’ नाम से खुली पहचान की गुत्थी

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने अपना नाम बबलू और पता चंडीगढ़ बताया। लेकिन आरपीएफ थाना प्रभारी को शक हुआ और उन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगाले। जैसे ही उन्होंने उसे ‘सनी’ नाम से पुकारा, आरोपी घबरा गया और अपनी असली पहचान बता दी।

    400 से ज्यादा चोरियों का मास्टरमाइंड

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी का असली नाम Harvinder Singh है, जिसकी उम्र 32 साल है और वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह देशभर में 400 से ज्यादा चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि वह 2017 में अपने इलाके में निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है।

    ट्रेन में चोरी का मास्टर प्लान

    आरोपी का तरीका भी बेहद शातिर था। वह अक्सर एसी कोच को निशाना बनाता था और बिना टिकट सफर करता था। टीसी से बचने के लिए बाथरूम में छिप जाता और मौका मिलते ही यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता। 2018 में उसके पास से करीब 70 लाख रुपए के हीरे-जवाहरात भी बरामद किए गए थे।

    कई राज्यों की पुलिस को थी तलाश

    हरविंदर सिंह के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। वह हर वारदात के बाद सिम बदल लेता था और पहचान छिपाने के लिए कोई आईडी अपने पास नहीं रखता था। फिलहाल पुलिस और आरपीएफ उससे अन्य मामलों में पूछताछ कर रही है।

  • जबलपुर में एक साल बाद कब्र से निकाला गया शव, हाईकोर्ट ने जताई सख्ती

    जबलपुर में एक साल बाद कब्र से निकाला गया शव, हाईकोर्ट ने जताई सख्ती


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक साल पुराने मामले ने नया मोड़ ले लिया है। गयासुद्दीन कुरैशी का शव बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद कब्र से निकाला गया। पूरी प्रक्रिया एसडीएम अधारताल की स्वीकृति में कराई गई और शव को गवाहों के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उसी दिन जांच कराई जानी है।

    हाईकोर्ट का सख्त रुख: “देरी बर्दाश्त नहीं होगी”

    मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें Justice Vivek Agarwal और Justice AK Singh शामिल थे, ने स्पष्ट कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट ने आदेश दिया था कि बुधवार दोपहर 1 बजे तक शव को कब्र से निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराया जाए। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए कि पूरी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो।

    परिवार को भी दिए गए थे निर्देश

    कोर्ट ने मृतक के परिवार पत्नी, पुत्र और भाई को सुबह 11 बजे एसडीएम के समक्ष उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    सड़क हादसे के बाद हुई थी मौत, भाई ने जताई हत्या की आशंका

    गयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को सड़क हादसे में घायल हुए थे। पहले उनका इलाज जबलपुर में और बाद में नागपुर में कराया गया, जहां 27 मार्च को उनकी मौत हो गई। इसके बाद बिना विस्तृत जांच के शव को दफना दिया गया था।
    हालांकि, मृतक के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई। उनका कहना है कि डिस्चार्ज रिपोर्ट में सीने पर चोट के निशान थे, जिससे मामले में संदेह पैदा हुआ। पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्होंने जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    सुनवाई में दोनों पक्षों ने रखे तर्क

    राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता वीर विक्रांत सिंह ने कहा कि अपीलकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील अभिनव उमाशंकर तिवारी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए पोस्टमार्टम की मांग की। अन्य पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और अधिवक्ता मयंक शर्मा भी उपस्थित रहे।

    अब पोस्टमार्टम से खुलेगा राज

    इस पूरे मामले में अब सबसे अहम कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी, जिससे यह साफ हो सकेगा कि गयासुद्दीन की मौत सामान्य दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई साजिश थी।

    पुलिस जांच पर भी उठे सवाल

    मृतक के भाई का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम के शव को दफना दिया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पहले जबलपुर एसपी से जांच की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।