Category: Madhya Pradesh

  • MP में दिन होने लगे गर्म, लेकिन रातें अभी भी ठंडी, 15 शहरों में बढ़ने लगा पारा

    MP में दिन होने लगे गर्म, लेकिन रातें अभी भी ठंडी, 15 शहरों में बढ़ने लगा पारा


    भोपाल।  मध्य प्रदेश में अब दिन धीरे-धीरे गर्म होने लगे हैं। मंगलवार को भोपाल, इंदौर और अन्य 13 शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। लेकिन रातें अभी भी ठंडी बनी हुई हैं। मंगलवार की रात प्रदेश के 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तापमान में थोड़ी गिरावट हो सकती है। फिलहाल देश में दो मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन कमजोर होने की वजह से प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। वहीं, 13 और 16 फरवरी को पश्चिमी हिमालय में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे दिन और रात के तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है।

    दिन में नर्मदापुरम सबसे गर्म, रात में कल्याणपुर सबसे ठंडी

    मंगलवार को प्रदेश के भोपाल, इंदौर, दमोह, खजुराहो, मंडला, सागर, टीकमगढ़, बैतूल, गुना, धार, खंडवा, खरगोन, रायसेन, रतलाम और नर्मदापुरम में पारा 30 डिग्री से ऊपर गया। नर्मदापुरम सबसे ज्यादा गर्म, 33 डिग्री के साथ, रहा। रात में सबसे ठंडा रहा शहडोल का कल्याणपुर, जहां न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया।

    अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा:
    कटनी (करौंदी) – 5.9 डिग्री
    अनूपपुर (अमरकंटक) – 7.8 डिग्री
    खजुराहो – 8.2 डिग्री
    पचमढ़ी-उमरिया – 8.4 डिग्री
    रीवा – 8.5 डिग्री
    शिवपुरी – 9 डिग्री
    मंडला – 9.1 डिग्री
    दतिया – 9.5 डिग्री
    नौगांव – 9.8 डिग्री

    पहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद मौसम में आएगा बदलाव

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इससे अगले दो दिन प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में मंगलवार को तेज धूप खिली रही, जिससे दिन का तापमान बढ़ा। लेकिन रात और सुबह ठंड का असर बरकरार रहेगा।

    आने वाले दिनों का पूर्वानुमान:

    12 फरवरी: दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज धूप
    13 फरवरी: तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट, रात और सुबह ठंड बनी रहेगी
    लेकिन रातें अभी भी ठंडी बनी हुई हैं। मंगलवार की रात प्रदेश के 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तापमान में थोड़ी गिरावट हो सकती है। फिलहाल देश में दो मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन कमजोर होने की वजह से प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। वहीं, 13 और 16 फरवरी को पश्चिमी हिमालय में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे दिन और रात के तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है।

    दिन में नर्मदापुरम सबसे गर्म, रात में कल्याणपुर सबसे ठंडी

    मंगलवार को प्रदेश के भोपाल, इंदौर, दमोह, खजुराहो, मंडला, सागर, टीकमगढ़, बैतूल, गुना, धार, खंडवा, खरगोन, रायसेन, रतलाम और नर्मदापुरम में पारा 30 डिग्री से ऊपर गया। नर्मदापुरम सबसे ज्यादा गर्म, 33 डिग्री के साथ, रहा। रात में सबसे ठंडा रहा शहडोल का कल्याणपुर, जहां न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया।

    अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा:
    कटनी (करौंदी) – 5.9 डिग्री
    अनूपपुर (अमरकंटक) – 7.8 डिग्री
    खजुराहो – 8.2 डिग्री
    पचमढ़ी-उमरिया – 8.4 डिग्री
    रीवा – 8.5 डिग्री
    शिवपुरी – 9 डिग्री
    मंडला – 9.1 डिग्री
    दतिया – 9.5 डिग्री
    नौगांव – 9.8 डिग्री

    पहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद मौसम में आएगा बदलाव

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इससे अगले दो दिन प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में मंगलवार को तेज धूप खिली रही, जिससे दिन का तापमान बढ़ा। लेकिन रात और सुबह ठंड का असर बरकरार रहेगा।

    आने वाले दिनों का पूर्वानुमान:

    12 फरवरी: दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज धूप
    13 फरवरी: तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट, रात और सुबह ठंड बनी रहेगी

  • समर्थन मूल्य पर सात मार्च तक होगा गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन

    समर्थन मूल्य पर सात मार्च तक होगा गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन


    भोपाल! 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूं का उपार्जन के लिये पंजीयन 7 फरवरी से आरंभ हो गया है, यह 7 मार्च तक जारी रहेगा। प्रदेश में 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य गत वर्ष से 160 रुपए अधिक है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश मिला है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश देश के 5 शीर्ष राज्यों में शामिल है। सिकल सेल उन्मूलन के लिए प्रदेश में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। आयुष्मान योजना के माध्यम से उपचार में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। एयर एंबुलेंस सेवा और राहवीर योजना के क्रियान्वयन में भी निरंतर प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे मातरम के सामूहिक गान के बाद, अपने संबोधन में यह जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि सभी जिलों में विक्रमोत्सव और गुड़ी पड़वा का पर्व उल्लास और उत्साह से मनाया जाए। उन्होंने कहा कि इसके तत्काल बाद प्रदेश में जल गंगा अभियान आरंभ हो जाएगा जो 3 महीने तक जारी रहेगा। उन्होंने मंत्रीगण को अपने-अपने जिलों में अभियान की गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सलियों से मुक्त करने के उपलक्ष में 9 फरवरी को बालाघाट में आयोजित कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र की कृषि कैबिनेट बालाघाट में की जाएगी, जो पूरे क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा में लाने के संकल्प का प्रतीक होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को रेल के क्षेत्र में सिंगरौली जबलपुर ट्रेन की सौगात प्राप्त होने वाली है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेस्क्यू सेंटर और जू एक साथ विकसित करने की योजना है, इसके अंतर्गत जबलपुर और उज्जैन में गतिविधियां आरंभ हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां अभयारण्य हैं वहां रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन, वन और संस्कृति विभाग समन्वित रूप से कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चीतों के परिवार में वृद्धि की बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया मैं विलुप्त हो रही वन्य प्रजाति पुनर्जीवित हो रही है। प्रदेश में चीतों की संख्या 35 हो गई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही और भी खुशखबरी मिलेगी। उन्होंने बताया कि इंदौर जू से भी व्हाइट टाइगर की संख्या में वृद्धि का शुभ समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से प्रदेश में वन्य जीवों के पुनर्स्थापना के संबंध में हुई चर्चा के परिणाम स्वरूप अब प्रदेश में जंगली भैंसा भी लाए जा रहे हैं। साथ ही बोत्सवाना से 8 चीते 28 फरवरी को प्रदेश में लाऐ जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपए रखा गया है, जो पिछली बार की एमएसपी से अधिक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 51 लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ। प्रदेश में 8 लाख 59 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया, जिसमें से 7 लाख 89 हजार से अधिक किसानों ने स्पॉट बुकिंग कर धान उत्पादन में अपना योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा इस वर्ष प्रदेश में गेहूं की पर्याप्त पैदावार होने की संभावना है, राज्य सरकार के पास भंडारण की समुचित व्यवस्था है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में वस्त्र उद्योग इकाई स्थापना की संभावनाओं को भी देखें तथा मूलभूत आवश्यकता वाले रोजगारपरक टेक्सटाइल यूनिटों की अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापना के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस हुई उनकी हरिद्वार यात्रा के संबंध में भी जानकारी दी।

  • महाकाल वन मेला "समृद्ध वन, खुशहालजन थीम पर 11 से 16 फरवरी तक

    महाकाल वन मेला "समृद्ध वन, खुशहालजन थीम पर 11 से 16 फरवरी तक


    उज्‍जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में बुधवार को शाम 4 बजे दशहरा मैदान, सेठी नगर उज्जैन में वन मेले का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक “होली रंग गुलाल” एवं “महाकाल स्मृति उपहार” का विमोचन करेंगे। साथ ही वन विभाग की एक नवीन पहल “महाकाल वन प्रसादम” का भी शुभारंभ करेंगे। महाकाल वन मेला “समृद्ध वन, खुशहालजन” थीम पर आधारित होगा, जो 11 से 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन में वन मेले का आयोजन पहली बार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन विभाग की प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन करेंगे। साथ ही वन मंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना एवं वन रक्षक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना को प्रशस्ति-पत्र प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं प्रशासक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ श्री अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अंबाडे और प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा उपस्थित रहेंगे।

    मेले में प्रदेश के वनवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली अकाष्ठीय वनोपज के प्रदर्शन, संरक्षण, संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेले का आयोजन किया जा रहा है। वन मेला प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता के वैभव को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है। अकाष्ठीय वनोपज संग्राहक, वन धन केन्द्रों, प्राथमिक लघु वनोपज समितियाँ, व्यापारीगण, हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योग के प्रतिनिधि इस आयोजन में भाग लेंगे और अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। वनों में उपलब्ध अकाष्ठीय वनोपज व्यापक तौर पर ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रदेश में अकाष्ठीय वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।

    वन मेले में लगभग 250 भव्य एवं आकर्षक स्टॉल्स लगाये जा रहे हैं, जिसमें 16 स्टॉल्स विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के लिये, 76 स्टॉल्स प्राथमिक लघु वनोपज समितियों एवं वन धन केन्द्रों के लिये, एक भव्य स्टॉल विंध्य हर्बल्स के लिये, 5 स्टॉल्स लघु वनोपज के जीवंत प्रदर्शन के लिये, ओपीडी (नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श) के लिये 50 स्टॉल्स आरक्षित रखे गये हैं। इसके अलावा 76 स्टॉल्स निजी क्षेत्र के स्टॉल धारकों के लिये और 16 स्टॉल्स फूड जेन के लिये रखे गये हैं। मेले में किड्स जोन, व्हील चेयर्स, गोल्फ कार्ट, सिटिंग एरिया, वॉटर पाइंट, सेल्फी पाइंट की सुविधाएँ भी आगंतुकों को उपलब्ध रहेंगी। मेले में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, आयुर्वेर्दिक डॉक्टर्स एवं परम्परागत वैद्यों द्वारा नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श, ज्ञानवर्धक सांस्कृतिक कार्यक्रम और परम्परागत भोज्य पदार्थों की उपलब्धता रहेगी।

    वन मेले में चीता परिवार एवं डायनासोर का विशाल स्कल्पचर, वरिष्ठ नागरिकों के लिये व्हील-चेयर एवं गोल्फ कॉर्ट की सुविधा, ओपीडी में उपचार कराने वाले लोगों के लिये पृथक से बैठक व्यवस्था, महाकाल मंदिर से मेला परिसर तक नि:शुल्क बस सुविधा, बच्चों के लिये आकर्षक एवं मजेदार किड्स जोन की सुविधा, फूड जोन में बाँधवगढ़ का गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा का वन भोज रसोई और अलीराजपुर का दाल पानिया आकर्षण का विशेष केन्द्र रहेगा।

  • मंत्रि-परिषद के बड़े फैसले: जनजातीय व महिला-बाल विकास योजनाओं को 2031 तक निरंतरता, 7,133 करोड़ की स्वीकृति; पेंशन नियम 2026 को मंजूरी

    मंत्रि-परिषद के बड़े फैसले: जनजातीय व महिला-बाल विकास योजनाओं को 2031 तक निरंतरता, 7,133 करोड़ की स्वीकृति; पेंशन नियम 2026 को मंजूरी


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सामाजिक कल्याण, जनजातीय विकास, ऊर्जा, न्यायिक सेवा और पेंशन व्यवस्था से जुड़े कई बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक की शुरुआत वंदे-मातरम् के सामूहिक गायन से हुई।

    मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जनजातीय कार्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए कुल 7,133 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। इस स्वीकृति के तहत जनजातीय कार्य विभाग की प्रमुख योजनाओं में पीवीटीजी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़ 15 लाख रुपये, सीएम राइज विद्यालय योजना के लिए 1,416 करोड़ 91 लाख रुपये और आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रुपये शामिल हैं।

    इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति तथा कक्षा 9वीं की छात्रवृत्ति के लिए 522 करोड़ 8 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के लिए 31 करोड़ 3 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।

    मंत्रि-परिषद ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया। इसके तहत 63,077 अविद्युतीकृत घरों और 650 शासकीय संस्थानों के विद्युतीकरण के लिए 366 करोड़ 72 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें केंद्र सरकार का अंश 220 करोड़ 3 लाख रुपये और राज्य सरकार का अंश 146 करोड़ 69 लाख रुपये रहेगा। इसके साथ ही म.प्र. ऊर्जा विकास निगम द्वारा 8,521 घरों के ऑफ-ग्रिड सोलर + बैटरी विद्युतीकरण के लिए लगभग 97 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति दी गई है।

    बैठक में उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के आईटी संवर्ग में कार्यरत कर्मचारियों को तकनीकी संवर्ग की भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए एक बार के लिए आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देने का निर्णय भी लिया गया। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा पेंशन नियम 2026 और पेंशन के सारांशीकरण नियम 2026 को मंजूरी दी। इन नियमों के तहत पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। खास बात यह है कि अब परिवार पेंशन के पात्र सदस्यों में अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्री को भी शामिल किया गया है।

    इसके साथ ही मध्यप्रदेश सिविल सेवा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली नियम 2026 और एनपीएस के अंतर्गत उपदान संदाय नियम 2026 को भी मंजूरी दी गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इनमें अभिदाता की मृत्यु पर परिवार पेंशन, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, ई-सेवा पुस्तिका, उपदान भुगतान और विभागीय जांच से जुड़े स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। सरकार के इन फैसलों को सामाजिक सुरक्षा, जनजातीय उत्थान और प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • भोपाल वृत्त के 3 लाख उपभोक्ताओं को जनवरी में 2 करोड़ से ज्यादा की राहत, स्मार्ट मीटर से मिला टाइम ऑफ डे छूट का लाभ

    भोपाल वृत्त के 3 लाख उपभोक्ताओं को जनवरी में 2 करोड़ से ज्यादा की राहत, स्मार्ट मीटर से मिला टाइम ऑफ डे छूट का लाभ


    भोपाल। स्मार्ट मीटरिंग पहल के तहत भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जनवरी 2026 में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कंपनी के कार्य क्षेत्र में कुल 5 लाख 20 हजार 457 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके मासिक बिजली बिल में टाइम ऑफ डे छूट का लाभ दिया गया है। इस दौरान उपभोक्ताओं को कुल 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार रुपये की रियायत प्रदान की गई।

    इसमें सबसे बड़ा लाभ भोपाल शहरी और ग्रामीण वृत्त के उपभोक्ताओं को मिला है। इन दोनों वृत्तों के 2 लाख 97 हजार 813 उपभोक्ताओं को केवल दिन के टैरिफ में 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार रुपये की छूट दी गई। यह छूट स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी बिजली खपत के आधार पर प्रदान की गई है।

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह छूट सरकारी सब्सिडी को छोड़कर दी गई है। यानी उपभोक्ताओं को जो भी राहत मिली है वह सीधे स्मार्ट मीटर और टाइम ऑफ डे टैरिफ व्यवस्था के कारण मिली है। यह पहल उपभोक्ताओं को दिन के समय खासकर सोलर ऑवर में बिजली उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की गई है जिसमें 20 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान है।

    कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और इससे जुड़ी किसी भी तरह की आशंका से बचें। कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित सटीक और पारदर्शी प्रणाली पर आधारित हैं। इनमें रीडिंग और बिलिंग में किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं रहती।

    स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण देने में भी मदद करते हैं। मोबाइल ऐप के जरिए उपभोक्ता रियल-टाइम डेटा देख सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि किस समय अधिक बिजली की खपत हो रही है। इससे न केवल बिजली बचाने में मदद मिलती है बल्कि अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगती है।

    इसके अलावा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता की जानकारी भी देते हैं जिससे वे अपनी खपत की आदतों में सुधार कर सकते हैं। उपभोक्ता किसी भी समय और कहीं से भी मोबाइल एप के माध्यम से अपनी बिजली खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर न सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं बल्कि इससे ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    कुल मिलाकर स्मार्ट मीटरिंग और टाइम ऑफ डे छूट योजना ने जनवरी 2026 में भोपाल क्षेत्र के लाखों उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया है और भविष्य में इससे और अधिक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

  • 2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट

    2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राज्य के सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के विकास तथा कल्याण का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और संतुलित बताते हुए उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण की सराहना की।

    मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बजट निर्माण में लगे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिश्रम की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि यह प्रदेश के विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी सहित वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रेजेंटेशन के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं विकास कार्यों सामाजिक कल्याण अधोसंरचना शिक्षा स्वास्थ्य कृषि और रोजगार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। बजट में गरीब किसान महिला युवा और श्रमिक वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही औद्योगिक विकास निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाले प्रस्तावों को भी इसमें शामिल किया गया है।

    मुख्यमंत्री के समक्ष प्रेजेंटेशन के बाद मंत्रि-परिषद के समक्ष भी बजट प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण किया गया जिसे कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है। मंत्रि-परिषद से मंजूरी मिलने के बाद अब यह बजट 18 फरवरी को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

    सरकार का दावा है कि यह बजट विकासोन्मुख होने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी ध्यान में रखेगा। इसमें राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने आधारभूत ढांचे के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने पर जोर रहेगा।

    प्रदेश सरकार के इस बजट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि 2026-27 का बजट मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा और राज्य को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • भोपाल की सड़कों पर मौत से खेल: चलती बाइक पर खड़े होकर नाबालिग का खतरनाक स्टंट, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    भोपाल की सड़कों पर मौत से खेल: चलती बाइक पर खड़े होकर नाबालिग का खतरनाक स्टंट, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप


    भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला एक ऐसे वायरल वीडियो का है, जिसने आम लोगों से लेकर प्रशासन तक को चौंका दिया है। इस वीडियो में वीआईपी चौराहे से इकबाल मैदान की ओर जाती सड़क पर एक नाबालिग बच्चा चलती दोपहिया गाड़ी पर खड़े होकर जानलेवा स्टंट करता नजर आ रहा है।

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाइक पर पीछे बैठा बच्चा सीट पर खड़ा है और संतुलन बनाते हुए खतरनाक करतब दिखा रहा है, जबकि बाइक चालक पूरी तरह बेफिक्र होकर वाहन चला रहा है। सड़क पर अन्य वाहन भी चल रहे हैं और जरा सी चूक किसी बड़े हादसे में बदल सकती थी। यह दृश्य न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    यह मामला मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। नाबालिग को इस तरह खुलेआम स्टंट करने देना उसकी जान से खिलवाड़ है, साथ ही यह अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। नियमों के अनुसार, दोपहिया वाहन पर इस तरह का स्टंट और नाबालिग की सुरक्षा से समझौता करना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई यूजर्स ने ट्रैफिक पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ चालान काटना ही काफी नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की लापरवाही न करे।

    गौरतलब है कि भोपाल में पिछले कुछ समय से इस तरह के स्टंट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले वीआईपी रोड पर एक बाइक पर सात लोग सवार होकर स्टंट करते पाए गए थे। इसके बावजूद ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या ट्रैफिक पुलिस इस वायरल वीडियो के आधार पर वाहन चालक की पहचान कर पाएगी और क्या नाबालिग को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होगी। राजधानी की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ऐसे जानलेवा स्टंट पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

  • राजधानी की हरियाली पर स्लो प्वाइजन हमला: पेड़ काटे नहीं जा रहे, जहर देकर सुखाए जा रहे भोपाल की ग्रीनरी खतरे में

    राजधानी की हरियाली पर स्लो प्वाइजन हमला: पेड़ काटे नहीं जा रहे, जहर देकर सुखाए जा रहे भोपाल की ग्रीनरी खतरे में


    भोपाल। राजधानी भोपाल की पहचान मानी जाने वाली हरियाली पर अब खुलकर बुरी नजर लग चुकी है। विकास के नाम पर पहले ही लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं और अब पेड़ों को खत्म करने का एक नया और खतरनाक तरीका सामने आया है। पेड़ काटने के बजाय उन्हें स्लो प्वाइजन देकर सुखाया जा रहा है, ताकि कटाई की अनुमति लेने की जरूरत ही न पड़े।

    राजधानी के सबसे अधिक ग्रीन कवर वाले इलाकों में शामिल प्रोफेसर कॉलोनी में यह गंभीर मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों में छेद करके केमिकल भरा गया है और ऊपर से मिट्टी लगा दी गई है। इसका असर यह हो रहा है कि पेड़ खड़े-खड़े सूख रहे हैं। कई पेड़ पहले ही सूख चुके हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई पहला मामला नहीं है। अब बारी उन पेड़ों की है, जो अभी हरे हैं और लोगों को ऑक्सीजन व फल दोनों दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे न तो पेड़ काटने की अनुमति लेनी पड़ती है और न ही तत्काल कार्रवाई का शक होता है। धीरे-धीरे पेड़ सूख जाते हैं और फिर उन्हें काट दिया जाता है।

    एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भोपाल में 6 लाख से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। वर्ष 2016 की तुलना में राजधानी का ग्रीन कवर तेजी से घटा है। मेट्रो प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी, सड़क चौड़ीकरण, वीवीआईपी बंगलों के पुनर्विकास और खनन परियोजनाओं के कारण हजारों पेड़ों की बलि दी गई है। रिपोर्ट बताती है कि शहर का ग्रीन कवर 22 से 26 प्रतिशत तक घट चुका है, जिससे तापमान और प्रदूषण दोनों में इजाफा हुआ है।

    इस मामले पर महापौर मालती राय ने कहा है कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और हरियाली को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। वहीं कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    पर्यावरण विशेषज्ञ नूर राशिद खान का कहना है कि यह सीधा कानूनी अपराध है। हरे-भरे पेड़ों को जहर देकर मारना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि यह इलाका रामसर साइट से भी जुड़ा हुआ है, जहां बिना अनुमति निर्माण और इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह गैरकानूनी हैं।

    कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सवाल उठाया कि नगर निगम आखिर क्या कर रहा है। जिन जगहों पर पेड़ों में सुराख कर जहर डाला गया है, वहां निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब भोपाल में पेड़ सिर्फ नाम के रह जाएंगे। हरियाली बचेगी तभी शहर की हवा साफ रहेगी, वरना भोपाल भी सिंगरौली जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है।

  • रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी

    रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी


    भोपाल /मध्यप्रदेश में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है राजधानी भोपाल में दूसरे दिन भी चयनित अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर डटे रहे और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया भावी शिक्षकों का कहना है कि वे चयनित होने के बावजूद नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद आज भी खाली पड़े हैं

    सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय का घेराव किया था इसके बाद मंगलवार को आंदोलन और उग्र रूप में सामने आया जब भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने मुंडन कराकर अपना आक्रोश जताया कई अभ्यर्थी अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते नजर आए उनका कहना है कि यह आंदोलन सम्मान और रोजगार के लिए हैप्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद रिक्त होने के बावजूद सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में सीटों की संख्या कम कर दी गई है उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं वर्तमान में केवल 13 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई है जबकि आवश्यकता कहीं अधिक है

    अभ्यर्थियों के अनुसार माध्यमिक शिक्षकों के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं जबकि प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 3 हजार पद खाली हैं इसके बावजूद सरकार ने केवल सीमित संख्या में ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की है चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं फिर भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनका भविष्य अंधकार में है

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती की संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार पदों पर नियुक्ति की जाए इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण भी जल्द शुरू किया जाए ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है

    भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की है

    राजधानी भोपाल में चल रहे इस प्रदर्शन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला हैचयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है मुंडन और अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं जब तक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा

  • प्री वैलेंटाइन पर जेल का गिफ्ट इंदौर में पत्नी ने पति को पहुंचाया सलाखों के पीछे

    प्री वैलेंटाइन पर जेल का गिफ्ट इंदौर में पत्नी ने पति को पहुंचाया सलाखों के पीछे


    मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि समाज और सिस्टम दोनों को आईना दिखाने वाला भी है। यहां एक महिला ने रिश्तों से ऊपर कानून को रखते हुए अपने ही पति के खिलाफ ड्रग्स कारोबार की शिकायत कर उसे जेल भिजवा दिया। यह घटना साबित करती है कि जब एक महिला ठान ले तो गलत के खिलाफ सबसे पहले वही खड़ी होती है चाहे सामने उसका अपना पति ही क्यों न हो।

    मल्हारगंज क्षेत्र में रहने वाली एक अकाउंटेंट महिला ने पुलिस कमिश्नर इंदौर को शिकायत दी थी जिसमें उसने बताया कि उसका पति लंबे समय से गांजा और पाउडरनुमा ड्रग्स का अवैध कारोबार कर रहा है। आरोप है कि आरोपी ने अपने ही घर को ड्रग्स का गोदाम बना रखा था और महालक्ष्मी नगर स्थित एक पान दुकान के जरिए कॉलेज और हॉस्टल की लड़कियों तक नशा सप्लाई करता था। महिला का कहना है कि घर में दो नाबालिग बेटियां भी रहती हैं और इस गंदे धंधे का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा था।

    महिला ने बताया कि जब उसने इस अवैध कारोबार का विरोध किया तो पति और ससुराल पक्ष ने उसे चुप रहने की धमकी दी। चार फरवरी को तो मामला इस हद तक पहुंच गया कि पति ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जिससे उसकी आंख के ऊपर गंभीर चोट आई और सात से आठ टांके लगाने पड़े। इसके बाद महिला ने हिम्मत जुटाकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया।

    पीड़िता ने सबसे पहले मल्हारगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस घर तक पहुंची लेकिन आरोप है कि सामने रखे गांजा और ड्रग्स के बावजूद न तो कोई जब्ती की गई और न ही एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। इस कथित ढिलाई के बाद महिला को लगा कि स्थानीय स्तर पर उसे न्याय नहीं मिलेगा।

    इसके बाद महिला ने सोशल मीडिया पर चल रही नशामुक्ति मुहिम से प्रेरणा ली और नौ फरवरी को पति के घर से बाहर जाने के बाद घर में रखे ड्रग्स का वीडियो बना लिया। उसने यह वीडियो और पूरी शिकायत सीधे पुलिस कमिश्नर इंदौर कार्यालय को भेज दी। शिकायत मिलते ही कमिश्नर कार्यालय हरकत में आया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    कमिश्नर के आदेश पर विजय नगर जोन के माध्यम से लसूड़िया थाना पुलिस ने मल्हारगंज थाना क्षेत्र में ही दबिश दी। देर रात हुई कार्रवाई में घर से भारी मात्रा में गांजा और ड्रग्स की पुड़िया बरामद की गई और आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई के बाद मल्हारगंज थाने की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    पीड़िता के वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे का कहना है कि महिला ने पत्नी धर्म से ऊपर कानून को रखा है जिससे कई युवाओं की जिंदगी नशे में बर्बाद होने से बच सकती है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रूपाली राठौर ने बताया कि महिला पूरे सबूतों के साथ उनके पास पहुंची थी और शिकायत सीधे कमिश्नर तक पहुंचाने में मदद की गई जिस पर तुरंत कार्रवाई हुई।

    यह मामला केवल एक गिरफ्तारी की कहानी नहीं है बल्कि सिस्टम के दो चेहरों को भी उजागर करता है। एक तरफ वह प्रशासन जो शिकायत मिलते ही सक्रिय हुआ और दूसरी तरफ वह स्थानीय थाना जो सब कुछ सामने होने के बावजूद चुप बैठा रहा। इस पूरी कहानी की सबसे मजबूत कड़ी वह मां है जिसने अपने बच्चों और शहर को नशे से बचाने के लिए अपने ही पति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।