Category: Madhya Pradesh

  • MP के 4 IPS अधिकारियों को नई जिम्मेदारी, एडीजी इंटेलिजेंस बने अंशुमन यादव, आदेश जारी

    MP के 4 IPS अधिकारियों को नई जिम्मेदारी, एडीजी इंटेलिजेंस बने अंशुमन यादव, आदेश जारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में एक बार फिर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य शासन के गृह विभाग ने आज, शनिवार को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के चार अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त प्रभार सौंपने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम से और आदेशानुसार गृह विभाग की सचिव शिल्पा गुप्ता द्वारा जारी किया गया है।

    मध्य प्रदेश आईपीएस तबादला सूची
    चंचल शेखर (IPS 1995): अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (वि.स.बल) तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (SISF) पुलिस मुख्यालय, भोपाल से संचालक, खेल एवं युवक कल्याण, म.प्र. के पद पर नियुक्त किया गया है।

    अंशुमन यादव (IPS 1998): संचालक, खेल एवं युवक कल्याण, म.प्र. को कार्यमुक्त कर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, गुप्तवार्ता बनाया गया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, साइबर, पुलिस मुख्यालय, भोपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।


    अनिल कुमार (IPS 1993): विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा), पुलिस मुख्यालय भोपाल को उनके वर्तमान कार्यों के साथ-साथ विशेष पुलिस महानिदेशक, अजाक (AJAK), पुलिस मुख्यालय, भोपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    डी. श्रीनिवास वर्मा (IPS 1997): अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नारकोटिक्स एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, एसटीएफ, पुलिस मुख्यालय, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) को अस्थाई रूप से उनके वर्तमान कार्य के साथ-साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वि.स.बल एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक,एस.आई.एस.एफ. पुलिस मुख्यालय, भोपाल के पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

  • मंगला एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खंडवा में ट्रेन रोककर किया इलाज

    मंगला एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खंडवा में ट्रेन रोककर किया इलाज


    भोपाल। दिल्ली से केरल लौट रहे स्कूली बच्चों के एक दल में शुक्रवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद करीब 15-20 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों ने उल्टी, जी मिचलाने और बेचैनी की शिकायत की। सूचना मिलते ही ट्रेन को खंडवा रेलवे स्टेशन पर रोका गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने ट्रेन में ही बच्चों की जांच कर प्राथमिक उपचार दिया।

    जानकारी के मुताबिक, बच्चे स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक टूर पर दिल्ली गए थे। टूर पूरा होने के बाद सभी ट्रेन से केरल लौट रहे थे। इटारसी स्टेशन के बाद बच्चों ने ट्रेन की पेंट्री कार से खाना मंगाकर खाया था। इसके कुछ समय बाद एक के बाद एक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। ट्रेन स्टाफ ने इसकी सूचना रेलवे अधिकारियों को दी।

    स्टेशन पर पहले से तैयार थी मेडिकल टीम

    बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना खंडवा रेलवे प्रशासन को ट्रेन के पहुंचने से पहले ही मिल गई थी। ऐसे में स्टेशन पर डॉक्टरों की टीम को तैयार रखा गया था। मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस रात करीब 9:05 बजे खंडवा स्टेशन पहुंची। ट्रेन रुकते ही मेडिकल टीम ने प्रभावित बच्चों की जांच शुरू कर दी।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, सीएसपी अभिनव बारंगे और सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर समेत रेलवे और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। डॉक्टरों ने बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं। चिकित्सकों ने फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है।

    40 मिनट स्टेशन पर खड़ी रही ट्रेन

    खंडवा के स्टेशन मास्टर जीएल मीणा के अनुसार, बच्चों के उपचार के दौरान ट्रेन करीब 40 मिनट स्टेशन पर खड़ी रही। मेडिकल टीम ने बच्चों की जांच कर उन्हें जरूरी दवाइयां दीं। उपचार के बाद ट्रेन को रात करीब 9:45 बजे भुसावल की ओर रवाना कर दिया गया।

    बच्चों के साथ रेलवे के डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम भी आगे के सफर के लिए रवाना की गई, ताकि रास्ते में जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता मिल सके।

    15 से 18 साल के हैं सभी बच्चे

    बताया गया है कि बीमार हुए सभी बच्चे केरल के रहने वाले हैं और एक क्रिश्चियन स्कूल से जुड़े हुए हैं। उनकी उम्र करीब 15 से 18 वर्ष बताई गई है। बच्चे स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक भ्रमण के लिए दिल्ली गए थे। टूर खत्म होने के बाद वे ट्रेन से वापस केरल लौट रहे थे।

    अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की हालत फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरे मामले पर नजर रख रही है। खाना खाने के बाद एक साथ कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने के कारण फूड पॉइजनिंग की आशंका के आधार पर मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वाल्मीकि धाम आश्रम में किया छड़ी-पूजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वाल्मीकि धाम आश्रम में किया छड़ी-पूजन


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार सुबह उज्जैन स्थित श्री वाल्मीकि धाम सिद्धपीठ (आश्रम) पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में अनंत श्री विभूषित 1008 स्वामी सोहनदास जी की समाधि और प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ दर्शन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाल्मीकि धाम आए जाहरवीर गोगादेव के निशान ध्वज का भी विधि-विधान से छड़ी-पूजन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यसभा सदस्य एवं बालयोगी संत उमेशनाथ महाराज से भेंट कर उनका शुभाशीष भी प्राप्त किया। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष मुकेश यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।

    मीडिया प्रतिनिधियों से की चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री वाल्मीकि धाम सिद्धपीठ आश्रम में दर्शन-पूजन के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। वर्तमान समय में यह जरूरी है कि हम साधु-संतों के आशीर्वाद से अपने अतीत के गौरव को पुनः स्थापित करें। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य महंत उमेश नाथ महाराज ने अनेक वर्षों से उज्जैन के वाल्मीकि धाम आश्रम को चैतन्य बनाया है। वाल्मीकि जी के आदर्श और कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बाबा जाहरवीर गोगा महाराज ने अपना सर्वस्व नौछावर कर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सबके लिए सौभाग्य का विषय है कि बाबा महाकाल की नगरी में बाबा गोगा महाराज के ध्वज चिह्न निकलेंगे। इससे सामाजिक समरसता और एकात्मता का अद्भुत संदेश देशभर में पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रदेशवासियों को भुजरिया पर्व, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गोगा नवमी की भी शुभकामनाएं दीं।

  • MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक

    MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) के शंकरपुर में बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के विरोध में कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर (Congress MLA Sahib Singh Gurjar) पानी से भरी सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने नगर निगम पर नालियों की सफाई और जल निकासी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।

    दरअसल, ग्वालियर शहर में झमाझम बारिश ने एक बार फिर नगर निगम के जल निकासी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 64 के शंकरपुर इलाके में हालात ऐसे हो गए कि सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश के बीच जलभराव की समस्या का विरोध करने के लिए कांग्रेस के ग्रामीण विधायक साहब सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी से लबालब सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। विधायक के धरने में स्थानीय नागरिक भी शामिल हो गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    विधायक साहब सिंह गुर्जर ने मौके से फेसबुक लाइव किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शंकरपुर में जलभराव की समस्या आज की नहीं है, बल्कि पिछले दो साल से लगातार बनी हुई है। इस समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। विधायक का आरोप है कि इलाके में नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश होते ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं। स्थानीय लोगों को हर बार इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    बारिश के बीच विधायक के धरने के दौरान लोगों ने ‘नगर निगम होश में आओ’ के नारे लगाए। जलभराव के बीच किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि लोगों के लिए घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बारिश के बाद सामने आ जाती है।

    विधायक और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शंकरपुर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक इलाके में बेहतर जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक हर बारिश में लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी। बारिश थमी तो पानी भी धीरे-धीरे उतर गया, लेकिन शंकरपुर में जलभराव को लेकर नगर निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल जरूर खड़े हो गए।

  • एमपी के पूर्वी हिस्से में 4 दिन रहेगा बारिश का दौर, 7 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी के पूर्वी हिस्से में 4 दिन रहेगा बारिश का दौर, 7 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश का दौर फिलहाल पूर्वी हिस्से तक सीमित रहने के आसार हैं। शनिवार को रीवा, सीधी, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज बारिश हो सकती है। राजधानी भोपाल में रिमझिम बारिश होने की संभावना है, जबकि इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश के आसार कम हैं।

    जबलपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। इन इलाकों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ एक्टिव

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार प्रदेश के ऊपर लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और मानसून ट्रफ सक्रिय हैं। हालांकि इन सिस्टम का प्रभाव पूरे मध्य प्रदेश में नहीं है। इसी कारण सभी जिलों में एक समान बारिश होने की संभावना नहीं है। पूर्वी हिस्से में अगले चार दिन बारिश का दौर बने रहने के आसार हैं।

    सामान्य से 2.6 इंच कम बारिश

    प्रदेश में अब तक 683.9 मिमी यानी 26.9 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह इस अवधि की सामान्य बारिश 750.9 मिमी यानी 29.5 इंच से 2.6 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 9% कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बारिश 6% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम रही है।

    37 जिलों में 1 से 49% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी और निवाड़ी में 1% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 4% से 50% तक कम पानी गिरा है।

    18 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग

    रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग


    उज्जैन। रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल के दरबार से हुई। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को 2 फीट लंबी विशेष राखी अर्पित की। इसके साथ ही भगवान को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इसे देश में सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करने की परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि सनातन परंपरा के प्रमुख पर्वों का शुभारंभ राजाधिराज महाकाल के आंगन से होता है।

    राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद 2 फीट लंबी विशेष राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन व्रत रखने वाली महिलाओं ने महाकाल का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला और बाद में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।

    सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग

    रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में प्रसाद वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों की ओर से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार कराए गए।

    एक सप्ताह में तैयार हुई विशेष राखी

    पुजारी आकाश गुरु के मुताबिक, करीब 2 फीट लंबी यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं ने लगभग एक सप्ताह की मेहनत से तैयार की। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं।

    राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिन्ह भी राखी में लगाए गए।

  • ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता

    ‘सबकी जान खतरे में है…’ नेपाल हादसे के बीच भोपाल के एक परिवार की बढ़ी चिंता, 24 घंटे से चार सदस्य लापता


    भोपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच भोपाल से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। शहर की रहने वाली देविका अधिकारी के परिवार के चार सदस्य नेपाल हादसे के बाद से संपर्क से बाहर हैं। इनमें उनके बड़े भाई, छोटे भाई और दोनों भाभियां शामिल हैं।

    देविका अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चारों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। इस दौरान परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

    आखिरी बातचीत में कहा- ‘सबकी जान खतरे में है’

    देविका के मुताबिक, परिवार की आखिरी बार बड़े भाई से बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने बताया था कि ‘सबकी जान खतरे में है’ और वे लोग जान बचाने के लिए पहाड़ पर जाकर छिपे हुए हैं।

    परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चों का ध्यान रखने की बात भी कही थी। इसके बाद से ही चारों का फोन संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार अब नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन से मिलने वाली जानकारी का इंतजार कर रहा है।

    सरकार ने जारी की हेल्पलाइन

    नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भोपाल के नेपाली समाज और लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-26772005 और व्हाट्सऐप नंबर 9818963273 जारी किया है।

    परिजन इन नंबरों पर संपर्क कर नेपाल में फंसे या लापता लोगों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं।

    392 लोगों की मौत, 1500 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद आई भीषण तबाही में अब तक 392 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है।

    नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सड़क और संपर्क व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इससे कई इलाकों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।

    नेपाल की इस आपदा के बीच अब भोपाल समेत मध्य प्रदेश के उन परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है, जिनके अपने लोग वहां फंसे हुए हैं या जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

  • नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने

    नेपाल में आई तबाही के बाद भोपाल के 29 लोग लापता…. गोसाईकुंडा तीर्थ गए थे घूमने


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक परिवार और उनसे जुड़े कुल 29 लोग नेपाल (Nepal) में अचानक आई भीषण बाढ़ (Devastating floods) के बाद से लापता हैं। परिवार की एक महिला ने उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये सभी लोग जोड़े से नेपाल के रसुवा जिले में स्थित गोसाईकुंडा तीर्थ (Gosaikunda Pilgrimage) में घूमने गए थे। इसी दौरान वहां आई इस बाढ़ में फंस गए।

    महिला ने बताया कि परिवार के एक सदस्य से जो आखिरी बार बात हुई थी, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग एक मकान की छत पर खड़े हुए हैं, लेकिन हमारा बचना मुश्किल है, आप लोग हमारे बच्चों को देख लेना, आप उनकी देखभाल करना।

    नेपाल में लापता हुए 29 सदस्यों की जानकारी देते हुए परिवार की महिला देवकी अधिकारी ने बताया, ‘मेरे जेठ-जेठानी, देवर-देवरानी, दीदी-जीजाजी को मिलाकर कुल 29 लोग वहां गए हैं। ये सभी लोग जोड़े से वहां एक तीर्थ की यात्रा करने गए हैं, जहां पर पूर्णिमा पर दर्शन करने जाते हैं।’


    खाना अधूरा छोड़कर भागे, सामान भी नहीं उठाया

    महिला ने बताया कि ये लोग बुधवार को जब निकले थे, तो वहां ऐसी कोई आशंका नहीं थी, कि आगे जाकर कोई खतरा हो सकता है। लेकिन आगे जाकर जब वे खाना खाने के लिए रुके थे, वहां उन्हें पता चला कि पीछे से कोई बाढ़ आ रही है, जिसमें जान का खतरा है। जिसके बाद वे जल्दबाजी में अधूरा खाना छोड़कर उठे और अपनी बस व सामान को छोड़कर वहां से भागे, और जैसे-तैसे पास में स्थिति पहाड़ पर चढ़कर वहां बने एक मकान की छत पर जाकर रूके।’


    ‘आधा घर डूब चुका है, अब हम लोग नहीं बचेंगे’

    महिला ने आगे कहा कि ‘वहां पहुंचकर उन्हें लगा था कि शायद वो बच जाएंगे। लेकिन जब ऐसा होना मुश्किल लगा तो उनमें से एक रिश्तेदार में घर पर फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया और कहा कि हमारी बस तो चली गई है और हम फिलहाल छत पर आकर रूके हैं, लेकिन अब हमारी जान को भी खतरा है। उन्होंने बताया कि ‘आधा घर डूब चुका है, और अब हम लोग नहीं बच पाएंगे। हमारे बच्चों को देख लेना’, महिला ने कहा, ‘बस उनके मुंह से इतना ही निकला था, कि फिर बगैर फोन कटे ही सामने से आवाज आना बंद हो गई।’


    बुधवार सुबह हुई बात के बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया

    महिला ने बताया कि यह बात उनसे कल सुबह करीब साढ़े नौ बजे हुई थी और अब 24 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी वहां गए किसी भी व्यक्ति से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। महिला ने कहा, ‘जिस बस से वो लोग गए थे उसका भी कुछ पता नहीं है और उन 29 लोगों का भी फिलहाल कुछ पता नहीं चला है। एक की भी बॉडी अबतक नहीं मिली है।’


    बच्चों का रो रोकर बुरा हाल, सरकार से मांगी मदद

    महिला के अनुसार वहां गए सभी लोग आपस में परिचित थे और सभी कहीं ना कहीं एक-दूसरे के रिश्ते में लगते थे। उधर उनके लापता होने के बाद सभी के बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, कोई ससुराल में है तो कोई नौकरी करने गया हुआ है और वे सभी अपने माता-पिता के लिए परेशान हो रहे हैं। महिला ने सरकार से उन लोगों का पता लगाने में मदद करने की गुहार लगाई है।

  • MP के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अब तक 26.5 इंच बरसा पानी, 37 जिले अब भी बारिश में पिछड़े

    MP के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अब तक 26.5 इंच बरसा पानी, 37 जिले अब भी बारिश में पिछड़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का दौर जारी है। शुक्रवार को जबलपुर और सागर संभाग के 7 जिलों—टीकमगढ़, छतरपुर, कटनी, सीधी, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान ढाई से 4 इंच तक बारिश हो सकती है। भोपाल में हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह और निवाड़ी शामिल हैं।

    28 से 30 अगस्त तक गरज-चमक के आसार

    IMD भोपाल के अनुसार, 28 से 30 अगस्त तक प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। हालांकि, इस दौरान कुछ चुनिंदा जिलों में ही तेज बारिश होगी। 29 अगस्त को शहडोल, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट, जबकि 31 अगस्त को मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, सिस्टम के कमजोर होने से प्रदेश में तेज बारिश का दौर कुछ समय के लिए थम सकता है और कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने की संभावना है।

    अब तक 26.5 इंच बारिश, कोटे की 71%

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 674.6 मिमी यानी 26.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 742.3 मिमी यानी 29.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 2.7 इंच यानी करीब 9% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 6% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश दर्ज की गई है।

    37 जिलों में कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 1 से 49% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4 से 50% तक कम पानी गिरा है।

    18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख

    अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख


    भोपाल  भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने करीब 96 दिनों तक दंपती को वीडियो कॉल के जरिए अपने नियंत्रण में रखा और उन्हें करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। कभी खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया गया तो कभी चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर दंपती को डराया गया। आरोपियों ने गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति सीज होने का भय दिखाकर उनसे 22 लाख रुपए ऐंठ लिए। रकम देने के बाद भी जब ठगों ने उन्हें डिजिटल निगरानी से मुक्त नहीं किया तो दंपती को शक हुआ और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस के अनुसार कृष्णा कॉम्प्लेक्स गणपति एन्क्लेव निवासी सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं। परिवार के साथ फरवरी में शिवरात्रि मनाने के लिए वे आंध्र प्रदेश गए थे। इसी दौरान 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताया और दावा किया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्हें बताया गया कि दिल्ली केनरा बैंक से जुड़े एक खाते के जरिए नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है और उसमें उनका नाम सामने आया है।

    इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ शुरू कर दी। दंपती को निर्देश दिया गया कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे और घर से बाहर भी नहीं निकलेंगे। 21 मई को एक महिला ने खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताते हुए बैंक खातों और दूसरी वित्तीय जानकारी मांगी। अगले दिन दंपती की वीडियो कॉल पर एक कथित जज से बात कराई गई। इस फर्जी जज ने उनके आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी दिखाकर कार्रवाई का डर पैदा किया और उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं।

    9 जून को कथित जज ने वीडियो कॉल पर दंपती को संपत्ति सीज करने की धमकी दी। इसके बाद निशा पटेल नाम की महिला ने उन्हें भोपाल लौटने के लिए कहा। ठगों ने मामले को खत्म करने के नाम पर एफडी और जेवर बेचने या गिरवी रखने का दबाव बनाया। डर के कारण दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से भोपाल के लिए रवाना हुए और 11 जून को यहां पहुंचे। अगले ही दिन उन्होंने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए जुटाए।

    आरोपियों के निर्देश पर दंपती ने पांच अलग-अलग बार रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा की। ठगों ने संपर्क बनाए रखने के लिए सात अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी दंपती को राहत नहीं मिली। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और किसी से बात नहीं करने का दबाव बनाया जाता रहा। यह सिलसिला 23 अगस्त तक चलता रहा। यानी 19 मई से 23 अगस्त तक करीब 96 दिनों तक बुजुर्ग दंपती साइबर ठगों के डर और दबाव में रहे।

    बाद में दंपती को पूरे मामले पर संदेह हुआ और उन्होंने जब संबंधित जानकारी की जांच कराई तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिखाया गया आदेश भी फर्जी था। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल से संपर्क किया। 27 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज की गई और केस डायरी कोलार थाने भेजी गई। पुलिस अब सातों WhatsApp नंबरों पांच बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शन वीडियो कॉल और आरोपियों की पहचान से जुड़े डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर डर पैदा कर पैसे मांगना साइबर ठगी का बड़ा तरीका बन चुका है। किसी भी जांच या गिरफ्तारी के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगने वालों पर भरोसा करने के बजाय तत्काल संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना जरूरी है।