Category: Madhya Pradesh

  • मैटरनिटी परिसर की घटना के बाद एक्शन देवास जिला अस्पताल ने बदली व्यवस्था अब प्रसव से पहले होगी विशेष निगरानी

    मैटरनिटी परिसर की घटना के बाद एक्शन देवास जिला अस्पताल ने बदली व्यवस्था अब प्रसव से पहले होगी विशेष निगरानी


    देवास  देवास जिला अस्पताल ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को उनकी संभावित प्रसव तिथि से सात दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया जाएगा ताकि प्रसव के दौरान किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। यह निर्णय हाल ही में मैटरनिटी परिसर में हुई एक प्रसव संबंधी घटना के बाद लिया गया है जिसमें महिला के अस्पताल देर से पहुंचने की बात सामने आई थी।

    गुरुवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सरोजनी जेम्स बैक ने जिला अस्पताल की मैटरनिटी विंग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती गर्भवती महिलाओं से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई हाई रिस्क गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद काफी देर से अस्पताल पहुंचती हैं जिससे मां और नवजात दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो जाता है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से सात दिन पहले अस्पताल में भर्ती कर उनकी नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जाएगी। इससे किसी भी जटिल स्थिति का समय रहते उपचार संभव हो सकेगा और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सिर्फ हाई रिस्क गर्भवतियों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य गर्भवती महिलाओं के लिए भी नई पहल शुरू की गई है। अस्पताल प्रशासन अब संभावित प्रसव तिथि से चार दिन पहले गर्भवती महिलाओं से फोन पर संपर्क करेगा और उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचकर भर्ती होने के लिए प्रेरित करेगा। इसका उद्देश्य अंतिम समय की भागदौड़ और प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं को कम करना है।

    निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने अस्पताल के सोनोग्राफी केंद्र और चिकित्सकों के कक्ष का भी निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को सभी आवश्यक व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और सरकार द्वारा संचालित मातृ स्वास्थ्य योजनाओं का पूरा लाभ उठाने की सलाह भी दी।

    अस्पताल प्रशासन का मानना है कि समय पर भर्ती और लगातार चिकित्सकीय निगरानी से मातृ मृत्यु और नवजात शिशुओं से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और हर गर्भवती महिला को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

  • बड़वाह की बिजली लाइन में फॉल्ट का असर इंदौर की जलापूर्ति पर नर्मदा परियोजना के सभी पंप बंद

    बड़वाह की बिजली लाइन में फॉल्ट का असर इंदौर की जलापूर्ति पर नर्मदा परियोजना के सभी पंप बंद


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार को कई क्षेत्रों के लोगों को पानी की सप्लाई में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बड़वाह जलूद क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण नर्मदा जल परियोजना के सभी प्रमुख पंप बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है और कई इलाकों में कम दबाव से पानी पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    जानकारी के अनुसार 132 केवी बड़वाह विद्युत लाइन में तकनीकी खराबी आने के कारण नर्मदा परियोजना के फेज एक फेज दो और फेज तीन के सभी पंप अचानक बंद हो गए। इन पंपों के बंद होने से नर्मदा का पानी शहर की विभिन्न जल टंकियों तक नहीं पहुंच सका जिससे टंकियों का भराव प्रभावित हुआ है। इसी वजह से गुरुवार को होने वाली नियमित जलापूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।

    नगर निगम प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया है। नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बड़वाह क्षेत्र के मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के अधिकारियों से चर्चा कर बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल करने और तकनीकी खराबी दूर करने के निर्देश दिए हैं ताकि जलापूर्ति व्यवस्था सामान्य की जा सके।

    नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि पानी का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही करें और अनावश्यक रूप से पानी की बर्बादी से बचें। जब तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती तब तक शहर के कुछ हिस्सों में पानी कम दबाव से पहुंच सकता है या निर्धारित समय से देरी भी हो सकती है।

    बिजली आपूर्ति सामान्य होते ही नर्मदा परियोजना के पंप दोबारा शुरू किए जाएंगे और जल टंकियों को भरने का कार्य तेजी से किया जाएगा। इसके बाद जल वितरण व्यवस्था भी धीरे धीरे सामान्य हो जाएगी। प्रशासन का कहना है कि तकनीकी समस्या दूर करने के लिए संबंधित विभाग लगातार काम कर रहा है ताकि लोगों को कम से कम असुविधा हो।

  • इंदौर में दर्दनाक सड़क हादसा पैदल युवक और बाइक सवार की गई जान तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह

    इंदौर में दर्दनाक सड़क हादसा पैदल युवक और बाइक सवार की गई जान तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में तेज रफ्तार एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। राऊ थाना क्षेत्र में बुधवार शाम हुए सड़क हादसे में सड़क पार कर रहे एक युवक और बाइक चालक दोनों की मौत हो गई। हादसे के बाद दोनों को गंभीर हालत में निजी अस्पताल पहुंचाया गया था लेकिन इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार हादसा सेज यूनिवर्सिटी के सामने हुआ। अलीराजपुर जिले के कदावली गांव निवासी 22 वर्षीय नरपत सिंह चौहान काम खत्म करने के बाद अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान वह सड़क पार कर रहे थे तभी राऊ की ओर से तेज गति से आ रही एक बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नरपत सिंह और बाइक चालक दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मानवता दिखाते हुए दोनों घायलों को नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने दोनों का इलाज शुरू किया लेकिन गंभीर चोटों के कारण रात के दौरान दोनों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    मृतक नरपत सिंह चौहान इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे। उनके परिवार में माता पिता और तीन भाई हैं जो अलीराजपुर जिले के कदावली गांव में रहते हैं। परिजनों के अनुसार उनकी शादी इसी वर्ष हुई थी और वे परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए इंदौर में काम कर रहे थे। उनकी असमय मौत से परिवार गहरे सदमे में है।

    दूसरे मृतक की पहचान 22 वर्षीय आयान पुत्र इमरान खान के रूप में हुई है जो सोनवाय क्षेत्र का रहने वाला था। वह एक कपड़ों की दुकान पर काम करता था जबकि उसके पिता छोटा व्यवसाय करते हैं। पुलिस के अनुसार हादसे के समय आयान अपनी नानी से मिलने मुंडला क्षेत्र जा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बाइक की रफ्तार काफी अधिक थी और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका जिससे यह दर्दनाक हादसा हो गया।

    राऊ थाना पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। अधिकारियों ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे निर्धारित गति सीमा का पालन करें और सड़क पर विशेष सावधानी बरतें क्योंकि तेज रफ्तार की छोटी सी लापरवाही भी किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन सकती है।

  • इंदौर में हरियाली का महाअभियान इस बार लगेंगे 21 लाख पौधे मंत्री विजयवर्गीय बोले पेड़ बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी

    इंदौर में हरियाली का महाअभियान इस बार लगेंगे 21 लाख पौधे मंत्री विजयवर्गीय बोले पेड़ बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी


    इंदौर । इंदौर में इस वर्ष बड़े स्तर पर हरियाली बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर में 21 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के साथ व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में नगर निगम विभिन्न सरकारी विभाग सामाजिक संगठनों औद्योगिक संस्थानों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही नहीं बल्कि उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी ताकि आने वाले वर्षों में इंदौर को देश का सबसे हराभरा शहर बनाया जा सके।

    बुधवार को एआईसीटीएसएल कार्यालय में आयोजित बैठक में अभियान की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों नगर निगम अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इस बार ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसमें लगाए गए प्रत्येक पौधे की देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि नगर निगम के साथ सभी सरकारी विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा ताकि अभियान जन आंदोलन का रूप ले सके।

    उन्होंने जानकारी दी कि देवगुराड़िया क्षेत्र के पास स्थित एक टेकरी को हराभरा बनाने की विशेष योजना तैयार की गई है। यहां एक से दो लाख पौधे लगाए जाएंगे। कोशिश होगी कि पांच फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले पौधे लगाए जाएं ताकि उनके जीवित रहने की संभावना अधिक रहे और कम समय में हरियाली विकसित हो सके।

    मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और वृक्षारोपण एक दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। उन्होंने चिंता जताई कि पहले जहां एक सौ से डेढ़ सौ फीट की गहराई पर पानी मिल जाता था वहीं अब कई स्थानों पर सात सौ फीट तक बोरिंग करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार इसका प्रमुख कारण वर्षा जल का संरक्षण नहीं होना और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति लापरवाही है। उन्होंने कहा कि अब कृत्रिम जल पुनर्भरण की दिशा में गंभीर प्रयास करना समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि जिनके मकानों की छत लगभग पंद्रह सौ वर्गफीट है वे वर्षा जल को सीधे जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था करें। उनके अनुसार पांच से सात हजार रुपये के खर्च से यह व्यवस्था आसानी से की जा सकती है जिससे भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि ऐसी व्यवस्था करने वाले लोगों को नगर निगम की ओर से संपत्ति कर में रियायत देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए इंदौर को सुरक्षित और रहने योग्य बनाना है तो जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा।

    विजयवर्गीय ने बताया कि इस अभियान में औद्योगिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों से उनके सामाजिक दायित्व के तहत सहयोग मांगा गया है। उनसे बड़े आकार के पौधे उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है ताकि पौधारोपण के बेहतर परिणाम मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार वन विभाग ने अभियान में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है जबकि पिछले अभियान के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया था।

    मुख्यमंत्री को लिखे गए कथित पत्र के संबंध में पूछे गए सवाल पर मंत्री ने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि वह मामला अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और उस अध्याय को बंद समझा जाए। फिलहाल उनका पूरा ध्यान इंदौर को अधिक हराभरा बनाने और जल संरक्षण के व्यापक अभियान पर केंद्रित है।

  • मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता

    मूसलाधार बारिश के बाद इंदौर में दर्दनाक हादसा नाले में बहे युवक का शव बरामद अहीरखेड़ी का युवक अब भी लापता


    इंदौर । इंदौर में लगातार हो रही तेज बारिश के बीच हुए हादसों ने शहर को झकझोर दिया है। बुधवार शाम हुई मूसलाधार बारिश के दौरान अलग अलग स्थानों पर तेज बहाव में दो युवक बह गए थे। इनमें लसूड़िया क्षेत्र से लापता हुए युवक का शव गुरुवार सुबह बरामद कर लिया गया जबकि अहीरखेड़ी क्षेत्र से बहा युवक अब भी लापता है। पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही है।

    पुलिस के अनुसार लसूड़िया मोरी निवासी 34 वर्षीय गोलू पंवार बुधवार रात करीब नौ बजे अपने पिता के लिए खाना लेकर जा रहा था। रास्ते में वह नाले के किनारे से गुजर रहा था तभी तेज बारिश के कारण बढ़े पानी के बहाव में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नाले में बह गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने रात में उसकी तलाश शुरू की लेकिन अंधेरा और तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

    गुरुवार सुबह एसडीईआरएफ की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद गोलू का शव पुल के नीचे कचरे में फंसा मिला। टीम ने शव को बाहर निकालकर पुलिस को सौंप दिया जिसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। गोलू ईंट निर्माण फैक्ट्री में काम करता था। उसके परिवार में माता पिता और छोटा भाई हैं। उसके पिता एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    दूसरी ओर अहीरखेड़ी क्षेत्र में बुधवार को तेज बहाव में बहा युवक महेश चौहान अब भी लापता है। जानकारी के अनुसार महेश अपने दोस्त मनीष के साथ पुल की रपट पार कर रहा था। इसी दौरान दोनों पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए। मनीष किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहा लेकिन महेश बह गया और तब से उसका कोई पता नहीं चल सका है।

    पुलिस और राहत दल ने बुधवार रात से ही आसपास के इलाकों में खोज अभियान शुरू कर दिया था। गुरुवार सुबह भी एसडीईआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया लेकिन समाचार लिखे जाने तक महेश का कोई सुराग नहीं मिला था। अधिकारियों का कहना है कि पानी का बहाव कम होने के साथ खोज अभियान लगातार जारी रहेगा।

    लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई नाले और पुलिया उफान पर हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों नालों और रपटों को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही भी ऐसे मौसम में बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

  • क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया डिलीवरी बॉय ने उठाया खौफनाक कदम इंदौर में दो युवकों की मौत से सनसनी

    क्रेडिट कार्ड का कर्ज नहीं चुका पाया डिलीवरी बॉय ने उठाया खौफनाक कदम इंदौर में दो युवकों की मौत से सनसनी


    इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच एक युवा डिलीवरी बॉय की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चंदन नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से आर्थिक परेशानियों और क्रेडिट कार्ड के कर्ज को लेकर तनाव में था। वहीं शहर के आजाद नगर क्षेत्र में भी एक 21 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। दोनों मामलों की पुलिस जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार चंदन नगर के व्यास नगर निवासी लखन कोटे ने बुधवार को अपने घर में जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर उसकी पत्नी ने परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी जिसके बाद परिजन उसे तत्काल एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन गुरुवार तड़के उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

    परिजनों ने पुलिस को बताया कि लखन पार्सल डिलीवरी का काम करने के साथ साथ रेपिडो चलाकर भी परिवार का खर्च उठाता था। पिछले कुछ समय से आमदनी कम हो गई थी जबकि खर्च लगातार बढ़ रहे थे। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज लिया था। परिजनों के अनुसार वह समय पर भुगतान नहीं कर पा रहा था और इसी कारण मानसिक तनाव में रहने लगा था। हालांकि उसने कितना कर्ज लिया था इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    लखन की शादी करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। परिवार में उसके माता पिता पत्नी और बड़ा भाई हैं। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है इसलिए आत्महत्या के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस आर्थिक लेनदेन और अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

    इधर आजाद नगर थाना क्षेत्र के इदरीश नगर में रहने वाले 21 वर्षीय अनोज एड्रयू ने भी अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। उसका शव कुछ परिचित लोग अस्पताल लेकर पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि शव अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल इस मामले में भी जांच जारी है और आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीरता की ओर संकेत करती हैं। पुलिस दोनों मामलों में सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात मध्य प्रदेश में शुरू हुई जी राम जी स्कीम 125 दिन रोजगार की गारंटी और मजदूरी में देरी पर मुआवजा

    ग्रामीणों के लिए बड़ी सौगात मध्य प्रदेश में शुरू हुई जी राम जी स्कीम 125 दिन रोजगार की गारंटी और मजदूरी में देरी पर मुआवजा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गांवों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक जुलाई से जी राम जी योजना लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन के अकुशल रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह अवधि मौजूदा मनरेगा के 100 दिनों की तुलना में 25 दिन अधिक है। योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं बल्कि गांवों में स्थायी विकास कार्यों को गति देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी है।

    योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि कोई पात्र व्यक्ति रोजगार के लिए आवेदन करता है तो उसे 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में रोजगार नहीं दिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले 30 दिनों तक मजदूरी दर का 25 प्रतिशत और इसके बाद 50 प्रतिशत तक भत्ता देने की व्यवस्था की गई है। इससे रोजगार की कानूनी गारंटी को और मजबूत बनाया गया है।

    सरकार ने मजदूरी भुगतान को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं। योजना में काम करने वाले श्रमिकों को साप्ताहिक आधार पर भुगतान किया जाएगा और किसी भी स्थिति में काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी देना अनिवार्य होगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो 16वें दिन से बकाया मजदूरी पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से मुआवजा भी दिया जाएगा। इससे समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और श्रमिकों को आर्थिक नुकसान से बचाने का प्रयास किया गया है।

    रोजगार प्राप्त करने के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी सरल बनाई गई है। पात्र व्यक्ति मौखिक लिखित या डिजिटल माध्यम से आवेदन कर सकेगा। आवेदन ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य कार्यक्रम अधिकारी अथवा अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा। आवेदन करने पर रसीद देना भी अनिवार्य होगा ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

    योजना का लाभ केवल उन्हीं ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिनका पंजीकरण होगा और जिनके वयस्क सदस्यों का नाम रोजगार गारंटी कार्ड में दर्ज होगा। परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य रोजगार के लिए आवेदन कर सकेगा। सरकार ने वंचित और जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता देने का भी प्रावधान किया है ताकि रोजगार का लाभ सबसे पहले उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

    जी राम जी योजना के तहत जल संरक्षण सिंचाई ग्रामीण सड़कें आजीविका बढ़ाने वाले कार्य आधारभूत ग्रामीण अधोसंरचना और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विकास कार्य कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसी स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करना है जिनका लाभ गांवों को लंबे समय तक मिलता रहे। साथ ही विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से पंचायत स्तर की योजनाओं को जिला राज्य और राष्ट्रीय विकास योजनाओं से जोड़ने की भी तैयारी की गई है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। जीपीएस आधारित निगरानी मोबाइल उपस्थिति प्रणाली रियल टाइम डैशबोर्ड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के जरिए कार्यों की निगरानी होगी। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने पारदर्शिता बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    इस योजना के वित्तीय मॉडल में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के साथ गांवों के स्थायी विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • एमपी की राजनीति में बयानों का बवाल सीएम की अतिशयोक्ति भरी तारीफ दिग्विजय को भाजपा का ऑफर और विजयवर्गीय का मासूम जवाब चर्चा में

    एमपी की राजनीति में बयानों का बवाल सीएम की अतिशयोक्ति भरी तारीफ दिग्विजय को भाजपा का ऑफर और विजयवर्गीय का मासूम जवाब चर्चा में


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों और राजनीतिक संकेतों का दौर लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंच से हुई लंबी प्रशंसा दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला न्योता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित चिट्ठी पर दिया गया जवाब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इन घटनाओं ने सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।

    राजगढ़ जिले के सारंगपुर में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम के दौरान उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई जब मंत्री गौतम टेटवाल ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की लगातार प्रशंसा शुरू कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को जनप्रिय लोकप्रिय बहुमुखी प्रतिभा के धनी इतिहासकार ज्योतिषाचार्य लेखक साहित्यकार खगोल और भूगोल का जानकार पहलवानों का पहलवान और बाबा महाकाल का लाल जैसी कई उपमाओं से संबोधित किया। इतना ही नहीं उन्होंने प्रदेश में जल संरक्षण और सिंचाई के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री को भागीरथ तक बता दिया। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री मुस्कुराते रहे लेकिन जब तारीफ का सिलसिला लंबा होता गया तो उन्होंने मंत्री को बीच में ही रोकते हुए आगे बढ़ने का संकेत दिया। कार्यक्रम के बाद यह प्रसंग राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर भी एक नया राजनीतिक बयान सामने आया। भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण दे दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह धीरे से भाजपा में आ जाएं और जोर का झटका धीरे से दें। विधायक ने यह भी कहा कि जब महाराज भाजपा में आ चुके हैं तो अब राजा भी आ जाएं जिससे दोनों की जोड़ी बन जाएगी। उन्होंने दिग्विजय सिंह को अनुभवी नेता बताते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को उनसे सीख लेने की सलाह भी दी। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    इधर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी एक अलग वजह से सुर्खियों में बने हुए हैं। मुख्यमंत्री को लिखी गई कथित चिट्ठी को लेकर जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें पता ही नहीं कि ऐसी सूचना कहां से आई। इससे पहले चर्चा थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पिछले कुछ समय से उपेक्षा और सहयोग नहीं मिलने जैसी बातें उठाई थीं। हालांकि उनके ताजा बयान के बाद इस पूरे मामले पर और अटकलें लगने लगी हैं।

    इसी बीच मंत्रालय के भीतर एक वरिष्ठ महिला अधिकारी को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं जारी हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सख्त कार्यशैली के कारण कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें हटाने की कोशिश करते रहे लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाए। चर्चा यह भी है कि विभाग के शीर्ष अधिकारी का उन पर पूरा भरोसा बना हुआ है जिसके कारण वे अपने पद पर मजबूती से काम कर रही हैं।

    प्रदेश की राजनीति में बयानों और घटनाओं का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री की मंच पर हुई प्रशंसा भाजपा का राजनीतिक न्योता और कथित चिट्ठी पर उठे सवाल सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • ई रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हाईटेक ठग मोबाइल ऐप से लॉक कर देते हैं बैटरी फिर अनलॉक करने के नाम पर वसूलते हैं पैसे

    ई रिक्शा चालकों को निशाना बना रहे हाईटेक ठग मोबाइल ऐप से लॉक कर देते हैं बैटरी फिर अनलॉक करने के नाम पर वसूलते हैं पैसे


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल और उज्जैन में ई रिक्शा चालकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी का एक नया तरीका सामने आया है जिसने हजारों चालकों की चिंता बढ़ा दी है। मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाकर वाहन को बीच रास्ते में बंद कर दिया जाता है। इसके बाद आरोपी खुद को मैकेनिक बताकर मौके पर पहुंचता है और कुछ ही मिनटों में बैटरी दोबारा चालू करने के बदले दो सौ से चार सौ रुपये तक वसूल लेता है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जबकि पूरे नेटवर्क और तकनीकी खामियों की जांच जारी है।

    उज्जैन में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कई ई रिक्शा चलते चलते अचानक बंद हो गए। हर बार एक युवक मौके पर पहुंचता और खुद को मैकेनिक बताकर कुछ ही देर में वाहन चालू कर देता। शुरुआत में चालकों को यह सामान्य तकनीकी खराबी लगी लेकिन जब एक जैसी घटनाएं बार बार होने लगीं तो ई रिक्शा एसोसिएशन को शक हुआ। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और चालकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई।

    बुधवार शाम लोटी स्कूल तिराहे पर एक ई रिक्शा अचानक बंद हुआ। कुछ देर बाद एक युवक वाहन ठीक करने के नाम पर तीन सौ रुपये मांगने पहुंचा। पहले से सतर्क चालक ने उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पूछताछ में उसकी पहचान रीतेश भानूपा के रूप में हुई। जांच में खुलासा हुआ कि वह मोबाइल में उपलब्ध एक बैटरी मैनेजमेंट ऐप के जरिए ब्लूटूथ से आसपास मौजूद ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम तक पहुंच बनाता था। जहां सुरक्षा के लिए पासवर्ड नहीं लगा होता था वहां से वह बैटरी लॉक कर देता और बाद में पैसे लेकर उसे दोबारा चालू कर देता था।

    इस तरह की घटनाएं केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहीं। भोपाल के पुराने शहर में भी कई ई रिक्शा बीच रास्ते में अचानक बंद हो गए। चालकों का आरोप है कि बैटरी लॉक होने के बाद उन्हें कंपनी के सर्विस सेंटर तक जाना पड़ा जहां अनलॉक करने के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे लिए गए। इससे उनकी रोजी रोटी प्रभावित हुई और यात्रियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई जगह विवाद की स्थिति भी बन गई।

    ई रिक्शा चालकों का कहना है कि वाहन अचानक बंद होने से दिनभर की कमाई पर असर पड़ता है। स्कूल के बच्चों को लाने ले जाने वाले चालकों और रोजाना सवारी ढोने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कई चालकों ने बताया कि एक ही दिन में उनकी गाड़ी कई बार बंद हुई जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया।

    पुलिस के अनुसार संबंधित मोबाइल ऐप सामान्य रूप से उपलब्ध है और यदि ई रिक्शा की बैटरी का ब्लूटूथ पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो कुछ मॉडलों में उसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से अब कई कंपनियां ब्लूटूथ के लिए पासवर्ड सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बैटरी का सुरक्षा पासवर्ड तुरंत सक्रिय कराएं और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को वाहन या मोबाइल सिस्टम तक पहुंच न दें।

    पुलिस पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने चालकों को इस तरीके से निशाना बनाया गया और सुरक्षा में कहां चूक हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक जितनी सुविधाजनक है उतनी ही सतर्कता की भी मांग करती है। समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाकर ही इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।

  • पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को मानसून ने प्रदेश के सभी जिलों को कवर कर लिया जिसके साथ ही पूरे राज्य में बारिश का दौर तेज होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट घोषित किया गया है जबकि कई क्षेत्रों में जलभराव तेज बहाव और बिजली गिरने जैसी स्थितियों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

    इस वर्ष प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी और नौ दिनों के भीतर पूरे मध्य प्रदेश में फैल गया। हालांकि सामान्य स्थिति में मानसून 15 जून तक प्रदेश में पहुंच जाता है इसलिए इस बार इसकी एंट्री करीब नौ दिन देर से हुई। इसके बावजूद अब मानसून तेजी से सक्रिय हो चुका है और अधिकांश जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार हरदा नर्मदापुरम रायसेन छिंदवाड़ा पांढुर्णा और बालाघाट जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में अगले चौबीस घंटों के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं अशोकनगर देवास खंडवा बैतूल सागर मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का यलो अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून का असर साफ दिखाई दिया। इंदौर में तेज बारिश के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में पानी भर गया। एक थार वाहन तेज बहाव में नाले में गिर गया जिसमें पूरा परिवार सवार था। स्थानीय लोगों की सतर्कता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं इंदौर के अहीरखेड़ी काकड़ क्षेत्र में रपटा पार करते समय दो युवक तेज बहाव में बह गए। एक युवक को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश पुलिस और बचाव दल लगातार कर रहे हैं। महू में भी एक कार पानी के तेज बहाव में फंस गई जिसे ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि पांच जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तीन जुलाई को धार और बड़वानी में रेड अलर्ट जारी किया गया है जबकि चार जुलाई को खरगोन में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    हालांकि प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। एक जुलाई तक मध्य प्रदेश में लगभग चार इंच वर्षा हुई है जबकि सामान्य औसत इससे काफी अधिक रहता है। इसके बावजूद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे अधिक वर्षा वाला समय होता है और पूरे मानसून की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने में होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और इससे खेती के साथ जलाशयों में भी पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।