Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल के स्पा सेंटर में मिलीं युगांडा की दो महिलाएं, पासपोर्ट-वीजा नहीं दिखा सकीं, पुलिस ने संचालक पर दर्ज किया केस

    भोपाल के स्पा सेंटर में मिलीं युगांडा की दो महिलाएं, पासपोर्ट-वीजा नहीं दिखा सकीं, पुलिस ने संचालक पर दर्ज किया केस

    भोपाल । भोपाल में पुलिस की रूटीन चेकिंग के दौरान अयोध्या नगर स्थित एक स्पा सेंटर में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। शुक्रवार रात पुलिस ने थाई आरोमा वेलनेस सेंटर फैमिली सैलून एंड स्पा की जांच की तो वहां काम करने वाली युगांडा की दो महिलाएं पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं। इसके अलावा सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया गया था। पुलिस ने इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए सेंटर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिलहाल दोनों विदेशी महिलाओं के भारत आने और यहां रहने से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार 30 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे अयोध्या नगर क्षेत्र में नियमित जांच के दौरान थाई आरोमा वेलनेस सेंटर का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सेंटर के भीतर छह महिलाएं और एक पुरुष कर्मचारी मौजूद मिले। जांच के दौरान दो महिलाओं ने अपनी पहचान रशीम उर्फ मैसी और ईरीन उर्फ नीना के रूप में बताई। दोनों ने स्वयं को युगांडा का निवासी बताया। पुलिस ने जब उनसे भारत आने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि वे नौकरी की तलाश में भारत आई थीं।

    इसके बाद पुलिस ने दोनों महिलाओं से उनके पासपोर्ट और वीजा संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा। हालांकि वे मौके पर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके भारत आगमन और यहां रहने की स्थिति से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी। विदेशी नागरिकों के मामले में उनकी पहचान और वैध दस्तावेजों की पुष्टि महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पुलिस अब संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    जांच के दौरान स्पा सेंटर में कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़ी अनियमितता भी सामने आई। सेंटर की मैनेजर पूजा नरवाड़े ने पुलिस को बताया कि वहां अन्य कर्मचारी भी काम करते हैं। हालांकि जांच के समय कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। पुलिस ने इस लापरवाही को निर्धारित निर्देशों का उल्लंघन माना है। इसी आधार पर सेंटर संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस के मुताबिक भोपाल पुलिस आयुक्त ने 15 सितंबर 2026 को स्पा सेंटर ब्यूटी पार्लर और अन्य संबंधित संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य ऐसे संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों की पहचान और पृष्ठभूमि का सत्यापन सुनिश्चित करना है। आदेश का पालन नहीं करने वाले संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसी व्यवस्था के तहत अयोध्या नगर स्थित स्पा सेंटर में मिली अनियमितताओं पर कार्रवाई की गई है।

    फिलहाल पुलिस दोनों विदेशी महिलाओं से जुड़े दस्तावेजों और भारत में उनके प्रवास की स्थिति की जानकारी जुटा रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि उनके पास आवश्यक दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं थे और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। साथ ही सेंटर में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस घटना के बाद स्पा सेंटर और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में कर्मचारियों के सत्यापन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल में बाघों के भ्रमण क्षेत्र पर संकट, कलियासोत डैम किनारे 24 पेड़ काटने की अनुमति पर बवाल, पर्यावरणविदों ने उठाए गंभीर

    भोपाल में बाघों के भ्रमण क्षेत्र पर संकट, कलियासोत डैम किनारे 24 पेड़ काटने की अनुमति पर बवाल, पर्यावरणविदों ने उठाए गंभीर


    भोपाल । भोपाल में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलियासोत डैम के किनारे बिजली के टावर लगाने के लिए 24 पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने पर पर्यावरणविदों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है वह बाघों के भ्रमण और विचरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। पर्यावरणविदों ने नगर निगम प्रशासन से इस मामले की जांच कराने और अनुमति को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

    पर्यावरणविद् राशिद नूर के मुताबिक नगर निगम की उद्यान शाखा ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को बिजली के टावर लगाने के लिए 24 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। उनका आरोप है कि अनुमति पत्र में कार्यस्थल का सही विवरण दर्ज नहीं किया गया। जिस स्थान पर टावर लगाने का काम चल रहा है वह चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद अनुमति पत्र में स्थान का उल्लेख खुशीलाल अस्पताल के पीछे और कलियासोत बांध के डूब क्षेत्र के रूप में किया गया है। पर्यावरणविदों का कहना है कि स्थान की वास्तविक स्थिति और अनुमति पत्र में दर्ज विवरण के बीच अंतर की जांच जरूरी है।

    राशिद नूर ने बताया कि चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र में 13 शटर के पास टावर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद इंजीनियर से पेड़ों की कटाई से संबंधित अनुमति पत्र मांगा। उनके अनुसार अनुमति पत्र में उस स्थान का उल्लेख नहीं था जहां वास्तव में निर्माण कार्य चल रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अनुमति जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि यह क्षेत्र वास्तव में बाघों के आवागमन और सघन वन क्षेत्र का हिस्सा है तो यहां किसी भी प्रकार की गतिविधि से पहले पर्यावरणीय और वन्यजीव संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    पर्यावरणविदों की चिंता केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि वन क्षेत्र में पेड़ वन्यजीवों को आश्रय देने के साथ उनके प्राकृतिक आवागमन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बिजली के टावर लगाने के लिए पेड़ों को हटाने से आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ सकता है। कलियासोत डैम के आसपास का इलाका पर्यावरण और वन्यजीवों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए यहां होने वाले निर्माण कार्यों की अनुमति और उनकी वास्तविक स्थिति का परीक्षण आवश्यक है।

    राशिद नूर ने नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई की अनुमति को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए और यह जांच की जानी चाहिए कि संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए किस आधार पर अनुमति जारी की गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कार्यस्थल बाघ भ्रमण क्षेत्र में आता है तो अनुमति पत्र में दूसरे स्थान का उल्लेख क्यों किया गया।

    बताया गया है कि इस क्षेत्र में पहले भी निर्माण गतिविधियों और पेड़ों की कटाई को लेकर आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। पर्यावरणविद् के अनुसार वन विभाग ने पूर्व में यहां चल रहे कार्यों और कटाई पर रोक लगाई थी। हालांकि मौजूदा मामले में अनुमति जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल कलियासोत डैम के पास 24 पेड़ों की कटाई का मामला पर्यावरण संरक्षण और बाघों के सुरक्षित आवागमन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

  • भोपाल में एक ही छत के नीचे मिलेगा देशी-विदेशी जायकों का अनोखा संगम, पोहा-जलेबी से जापानी कुजीन तक 35 तरह की मिठाइयों का स्वाद

    भोपाल में एक ही छत के नीचे मिलेगा देशी-विदेशी जायकों का अनोखा संगम, पोहा-जलेबी से जापानी कुजीन तक 35 तरह की मिठाइयों का स्वाद


    भोपाल । भोपाल में खाने के शौकीनों के लिए एक नया और खास ठिकाना शुरू हो रहा है जहां देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों से लेकर विदेशी जायकों तक का आनंद एक ही छत के नीचे लिया जा सकेगा। कोर्टयार्ड बाय मैरियट भोपाल में 31 अक्टूबर से डाइनिंग रेस्टोरेंट सब्सटेंस की शुरुआत हो रही है। इस नए रेस्टोरेंट में स्थानीय खानपान की पहचान को अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों के साथ जोड़ने की तैयारी की गई है। यहां मेहमानों को नाश्ते से लेकर दोपहर और रात के भोजन तक कई तरह के विकल्प मिलेंगे। बुफे के साथ मेन्यू से अपनी पसंद का खाना ऑर्डर करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

    रेस्टोरेंट की खासियत इसका विविधतापूर्ण मेन्यू होगा जिसमें भोपाल के लोकप्रिय पोहा-जलेबी से लेकर देश के दूसरे हिस्सों के पारंपरिक पकवान शामिल किए जाएंगे। ब्रेकफास्ट बुफे में छोले-भटूरे और बेड़मी-पूरी जैसे व्यंजनों के साथ बिहार और महाराष्ट्र के पारंपरिक स्वाद भी चखने को मिलेंगे। दक्षिण भारतीय भोजन पसंद करने वाले लोगों के लिए इडली और डोसा के अलावा अप्पम पनियारम इडियप्पम और कडला करी जैसे विकल्प भी उपलब्ध रहेंगे। इस तरह सुबह के नाश्ते में स्थानीय स्वाद के साथ देश के अलग-अलग क्षेत्रों की खानपान परंपराओं का अनुभव मिलेगा।

    लंच और डिनर के दौरान भारतीय व्यंजनों के साथ अंतरराष्ट्रीय कुजीन को भी प्रमुखता दी जाएगी। रेस्टोरेंट में थाई कोरियन जापानी और चाइनीज व्यंजनों के विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे उन लोगों को खास अनुभव मिल सकेगा जो भारतीय भोजन के साथ विदेशी जायकों का स्वाद लेना पसंद करते हैं। मेन्यू में पारंपरिक और आधुनिक व्यंजनों का मेल देखने को मिलेगा। होटल प्रबंधन का उद्देश्य मेहमानों को एक ही स्थान पर अलग-अलग तरह के भोजन का विकल्प देना है ताकि परिवार और दोस्तों के साथ आने वाले लोग अपनी पसंद के अनुसार व्यंजन चुन सकें।

    सब्सटेंस का चाट काउंटर भी खास आकर्षण बनने जा रहा है। यहां पारंपरिक भारतीय चाट के साथ कुछ नए प्रयोग भी देखने को मिलेंगे। एवोकाडो चाट और बुराटा-बाल्समिक चाट जैसे विकल्पों के जरिए चाट को नए अंदाज में पेश किया जाएगा। पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक खाद्य सामग्री का यह मेल उन लोगों को आकर्षित कर सकता है जो कुछ नया चखना चाहते हैं। इसके अलावा मिठाइयों के शौकीनों के लिए भी यहां खास इंतजाम किए गए हैं। एग्जीक्यूटिव शेफ अमोल के मुताबिक डेजर्ट बुफे में भारतीय और पश्चिमी स्वाद की लगभग 30 से 35 तरह की मिठाइयां उपलब्ध होंगी।

    रेस्टोरेंट में केवल भोजन की विविधता पर ही नहीं बल्कि बैठने की व्यवस्था और माहौल पर भी ध्यान दिया गया है। यहां एक समय में करीब 140 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। मेहमानों के लिए प्राइवेट डाइनिंग रूम सेमी-प्राइवेट सीटिंग हाई-टेबल और सोफा सीटिंग जैसे विकल्प उपलब्ध रहेंगे। खुले वातावरण में भोजन करने के इच्छुक लोगों के लिए अल्फ्रेस्को सीटिंग की व्यवस्था भी की गई है। परिवार के साथ भोजन करने दोस्तों के साथ मिलने-जुलने और किटी पार्टी जैसे छोटे आयोजनों के लिए अलग-अलग तरह की सीटिंग उपयोगी रहेगी।

    होटल के फूड एंड बेवरेज मैनेजर मनीष कुमार के अनुसार रेस्टोरेंट में मेहमानों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लाइव कुकिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं। यहां भोजन तैयार होते देखने का मौका मिलेगा। इसके साथ लाइव म्यूजिक की व्यवस्था भी रहेगी जिससे खाने के साथ मनोरंजन का अनुभव भी जुड़ सकेगा। कुल मिलाकर सब्सटेंस में स्थानीय स्वाद क्षेत्रीय पकवान अंतरराष्ट्रीय कुजीन और आधुनिक डाइनिंग सुविधाओं को एक साथ लाने की कोशिश की गई है। 31 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह रेस्टोरेंट भोपाल में अलग-अलग तरह के व्यंजनों का अनुभव लेने वालों के लिए नया विकल्प पेश करेगा।

  • भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद

    भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शनिवार को भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। पुरी शुक्रवार देर रात भोपाल पहुंच गए थे। उनके नामांकन को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी के नाम पर मुहर लगाई थी। इसके बाद से ही उनके नामांकन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। शनिवार सुबह वे विधानसभा पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पार्टी की ओर से इस दौरान वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता प्रदर्शित करने की भी तैयारी है। केंद्रीय मंत्री के नामांकन को राज्यसभा उपचुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    दरअसल मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य डॉ. एल. मुरुगन ने 13 अक्टूबर को अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा की यह सीट खाली हो गई और अब इसी सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं और उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने के फैसले को पार्टी की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नामांकन की प्रक्रिया में भाजपा ने अपने स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर हरदीप सिंह पुरी के नामांकन में प्रस्तावक बनेंगी। उन्होंने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में प्रस्तावक के रूप में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इससे नामांकन की औपचारिक तैयारियों को आगे बढ़ाया गया। शनिवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल होने के साथ ही चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा।

    इस उपचुनाव में विधानसभा का संख्या बल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। हालांकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में प्रभावी संख्या बल के आधार पर चुनावी गणित का आकलन किया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगा। विधायकों की वास्तविक संख्या और मतदान की स्थिति चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

    बीना से विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी देखी गई है। दलबदल से जुड़े मामले के कारण उनकी स्थिति को लेकर राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के लिए विधायकों के समर्थन का सही आकलन करना अहम होगा।

    नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को भोपाल स्थित करुणा धाम आश्रम पहुंचकर पीठाधीश्वर गुरुदेव सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और विधायक भगवानदास सबनानी सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और आगे होने वाले राज्यसभा उपचुनाव पर टिकी हैं।

  • तूफान 'अर्नब' के चलते MP में बदला मौसम, आज 27 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    तूफान 'अर्नब' के चलते MP में बदला मौसम, आज 27 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी


    भोपाल। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है, लेकिन इसके असर से मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। शुक्रवार को भी कई जिलों में पानी गिरा। मौसम विभाग ने शनिवार को ग्वालियर-जबलपुर समेत 27 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित कई जिलों में मौसम साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, शनिवार को ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश की संभावना है।

    दूसरी ओर भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, गुना, अशोकनगर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर और हरदा में धूप निकलने के आसार हैं।

    2 नवंबर तक बना रहेगा बदला मौसम
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, प्रदेश में अगले चार दिन तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज धूप निकलेगी, जबकि दक्षिणी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसमी सिस्टम का असर अधिक रहने से आंधी और बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी।

    38 जिलों के 155 शहरों-कस्बों में हुई बारिश
    इससे पहले प्रदेश के 38 जिलों के करीब 155 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, मुरैना और भिंड शामिल हैं।

    इसके अलावा जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश हुई। अनूपपुर शहर में सबसे ज्यादा तीन इंच से अधिक पानी गिरा। अमरकंटक में सवा दो इंच और सिंगरौली में दो इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। अनूपपुर में आंधी की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

    पांढुर्णा में हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका
    बेमौसम बारिश का असर खेती और मंडियों में रखी उपज पर भी पड़ा है। जिन जिलों में धान की फसल खेतों में खड़ी है, वहां किसानों को नुकसान की चिंता सता रही है। वहीं, मंडियों में खुले में रखे अनाज के भीगने से भी परेशानी बढ़ गई है। पांढुर्णा में बारिश के कारण हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका है।

    दिन के तापमान में 3 डिग्री तक गिरावट
    आंधी और बारिश के चलते गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के समय ठंडक महसूस की गई। बादलों और बारिश के कारण दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। कुछ शहरों में रात के तापमान में भी कमी आई है।

  • मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश: के स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर 2026 को प्रदेशभर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए राज्य शासन ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के जिलों का निर्धारण कर दिया है। जारी व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को भी अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नामांकित किया गया है।

    राज्य शासन की ओर से जारी नामांकन के तहत उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर में स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला रीवा में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं हेमंत खंडेलवाल को बैतूल में कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। इन नामांकनों के माध्यम से जिला स्तर पर होने वाले समारोहों में प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

    मंत्री कुमार विजय शाह खंडवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में स्थापना दिवस समारोह में भाग लेंगे। प्रहलाद सिंह पटेल को नरसिंहपुर और तुलसीराम सिलावट को देवास में होने वाले कार्यक्रम के लिए नामांकित किया गया है। इस तरह प्रमुख जिलों में कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति तय की गई है।

    मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस हर वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1956 में राज्य का गठन हुआ था। स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए राज्य के गठन, विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पहलुओं को सामने रखा जाता है।

    इस वर्ष भी जिला स्तरीय आयोजनों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए शासन ने पहले से जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भोपाल में उपस्थिति के साथ राजधानी में मुख्य आयोजन होगा, जबकि अन्य जिलों में नामांकित प्रतिनिधि कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इससे विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में शासन की ओर से प्रतिनिधित्व रहेगा।

    जारी जानकारी में कुछ प्रमुख जिलों के लिए नामांकन का उल्लेख किया गया है। हालांकि उपलब्ध विवरण में सभी जिलों और मंत्रियों की पूरी सूची शामिल नहीं है। इसलिए शेष जिलों में किस मंत्री को भेजा गया है, इसकी जानकारी इस सूची से स्पष्ट नहीं होती। फिलहाल भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, बैतूल, खंडवा, इंदौर, नरसिंहपुर और देवास के लिए नामांकित प्रतिनिधियों के नाम सामने आए हैं।

    स्थापना दिवस कार्यक्रमों को लेकर जिला स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। एक नवंबर को होने वाले समारोहों में संबंधित जिलों के नामांकित मंत्री और जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। शासन के इस निर्णय के बाद अब इन जिलों में कार्यक्रमों के दौरान संबंधित प्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी।
  • सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में बहेरिया स्थित इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज (IGEC) के हॉस्टल में एक इंजीनियरिंग छात्र की मौत का मामला सामने आया है। कॉलेज के फाइनल ईयर में पढ़ने वाले छात्र विक्रमादित्य सिंह बघेल का शव हॉस्टल के स्टोर रूम में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद कॉलेज और हॉस्टल परिसर में हलचल मच गई। मृतक मूल रूप से रीवा का निवासी था और इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। वह ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था।

    जानकारी के मुताबिक, छात्र का शव हॉस्टल परिसर में बने स्टोर रूम में मिला। घटना सामने आने के बाद वहां मौजूद छात्रों और कॉलेज परिसर में चर्चा शुरू हो गई। छात्र की मौत से उसके साथी और परिचित स्तब्ध हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घटना के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और उसकी मौत के पीछे क्या वजह रही।

    विक्रमादित्य के रूममेट आकाश खरोले ने उसके पिछले कुछ दिनों के व्यवहार के बारे में जानकारी दी। आकाश के अनुसार, विक्रमादित्य पहले की तुलना में काफी शांत और गुमसुम रहने लगा था। वह कमरे में भी कम समय बिताता था। उसके व्यवहार में आए इस बदलाव को उसके साथी महसूस कर रहे थे। रूममेट ने बताया कि वह अपने करियर और भविष्य को लेकर तनाव में रहता था।

    आकाश के मुताबिक, विक्रमादित्य पढ़ाई में अच्छा था और GATE परीक्षा की तैयारी के लिए लगातार मेहनत कर रहा था। वह इस परीक्षा को लेकर गंभीर था और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था। इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी उसके समय का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। हालांकि, उसके रूममेट की ओर से बताई गई मानसिक स्थिति के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र की मौत की खबर सामने आने के बाद हॉस्टल में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों के बीच भी चिंता का माहौल है। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने साथी की मौत से दुखी हैं। विक्रमादित्य रीवा का रहने वाला था, इसलिए उसके परिवार और परिचितों के लिए भी यह घटना गहरा झटका है।

    इस घटना ने छात्र जीवन में पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य को लेकर बनने वाले दबाव के मुद्दे को भी सामने रखा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में विद्यार्थी अक्सर आगे की पढ़ाई, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं। हालांकि, इस मामले में विक्रमादित्य की व्यक्तिगत परिस्थितियों के बारे में सीमित जानकारी ही सामने आई है। उसके रूममेट ने केवल इतना बताया है कि वह कुछ दिनों से शांत रहता था और करियर को लेकर तनाव में था।

    फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी सामने आना बाकी है। छात्र की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हॉस्टल के स्टोर रूम में शव मिलने की घटना के बाद अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उस दिन क्या परिस्थितियां बनी थीं और छात्र की मौत से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं।

  • शिवपुरी से लापता 17 वर्षीय किशोरी उज्जैन में मिली, अपहरण के आरोपी अनस खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज

    शिवपुरी से लापता 17 वर्षीय किशोरी उज्जैन में मिली, अपहरण के आरोपी अनस खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज

    शिवपुरी जिले: में अपहरण के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 17 वर्षीय किशोरी को उज्जैन से सुरक्षित बरामद किया है। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी अनस खान को भी गिरफ्तार किया गया है। किशोरी के बयान और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    पुलिस के अनुसार, मामला पुरानी शिवपुरी क्षेत्र का है। यहां राधारमण मंदिर के पास रहने वाली किशोरी के परिजनों ने 24 अक्टूबर को देहात थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 17 वर्षीय किशोरी को अनस खान बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने किशोरी और आरोपी की तलाश के लिए मोबाइल लोकेशन की मदद ली। तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस को दोनों के उज्जैन में होने का पता चला। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उज्जैन से किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया और आरोपी अनस खान को गिरफ्तार कर लिया।

    किशोरी की बरामदगी के बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की आगे जांच की गई। पुलिस के मुताबिक, बयान और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद मामले की विवेचना आगे बढ़ाई गई है।

    पुलिस ने बरामद किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। वहीं, आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय से आदेश मिलने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इस तरह किशोरी की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के साथ मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।

    यह मामला 24 अक्टूबर को दर्ज हुई अपहरण की शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश की और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उज्जैन तक पहुंची। किशोरी की बरामदगी के बाद उसके बयानों के आधार पर मामले में दुष्कर्म से संबंधित कार्रवाई भी की गई।

    फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और दर्ज बयानों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नाबालिग से जुड़े मामले में उसकी पहचान और निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

  • नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले के संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में पहल की गई है। शिवपुरी-गुना क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन करने, यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क बनाने और इसे प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ने के प्रस्ताव पर कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को अर्धशासकीय पत्र भेजे हैं। यह पहल भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी और नगर परिषद अध्यक्ष पद्मा संदीप माहेश्वरी की ओर से उठाई गई मांगों के बाद सामने आई है।

    नरवर का किला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण क्षेत्र की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। इससे राजा नल और रानी दमयंती की कथाएं, प्राचीन राजवंशों का इतिहास और ढोला-मारू की प्रेमकथा जैसी लोकपरंपराएं जुड़ी हुई हैं। किले को लेकर प्रचलित मान्यताओं में इसे राजा नल की राजधानी नलपुर से भी जोड़ा जाता है। यहां पसरा देवी और लोढ़ी माता से संबंधित धार्मिक आस्थाएं भी स्थानीय परंपरा का हिस्सा हैं। इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं के चलते किले के संरक्षण और व्यवस्थित पर्यटन विकास की मांग लंबे समय से उठती रही है।

    नरवर किले का इतिहास अलग-अलग राजवंशों और शासकों से जुड़ा रहा है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र पर नाग राजाओं का शासन होने के उल्लेख मिलते हैं। बाद के दौर में कछवाह राजपूतों ने किले का पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद यहां परिहार और तोमर राजपूतों का अधिकार रहा। 16वीं शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर लोदी ने किले पर कब्जा किया। आगे चलकर मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में यह मालवा सूबे के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बना। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में मराठा सिंधिया राजवंश ने इस पर अधिकार कर लिया। किले के ऐतिहासिक भवनों में कचहरी महल भी शामिल है, जिसके जीर्णोद्धार का उल्लेख वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के समय से जुड़ा है।

    किला विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। कस्बे से इसकी खड़ी ऊंचाई लगभग 500 फीट बताई जाती है, जबकि समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 1,600 फीट है। इसकी भौगोलिक स्थिति और प्राचीन संरचना इसे विशेष पहचान देती है, लेकिन ऊंचाई पर स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए पहुंच आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर पहुंच मार्ग, नियमित रखरखाव और आवश्यक पर्यटक सुविधाओं की कमी लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय रही है। किले तक सड़क बनाने के लिए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के समन्वय की जरूरत भी उठाई जाती रही है।

    किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन करने का प्रस्ताव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक संरचनाओं का व्यवस्थित रखरखाव करना और पुरातात्विक महत्व के अनुरूप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, प्रस्ताव पर संबंधित विभागों की नियमानुसार कार्रवाई और निर्णय के बाद ही इसके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।

    पर्यटन विकास के लिए रणथंभौर, कूनो, शिवपुरी, नरवर, ओरछा और खजुराहो को जोड़कर एक सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इन स्थलों को एक मार्ग से जोड़ने पर पर्यटकों को वन्यजीव पर्यटन, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक स्थलों को एक ही यात्रा में देखने का अवसर मिल सकता है। इससे नरवर को भी व्यापक पर्यटन मानचित्र पर पहचान मिलने की संभावना है।

    पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच सकता है। गाइड सेवा, होटल, होम-स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सुविधाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। फिलहाल, किले के संरक्षण, पहुंच मार्ग और पर्यटन सर्किट से जोड़ने के प्रस्तावों पर संबंधित स्तरों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    मध्य प्रदेश । के शिवपुरी जिले में बीआरसीसी और एपीसी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में प्रस्तावित काउंसलिंग के जरिए 12 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से मिले नए निर्देशों के बाद फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लग गई है। निर्देशों के अनुसार, संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण होने तक नियुक्ति की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा।

    जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार के अनुसार, शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में काउंसलिंग होनी थी। इसके बाद परीक्षा के परिणाम के आधार पर रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। हालांकि, राज्य स्तर से मिले नए दिशा-निर्देशों के कारण तय कार्यक्रम को रोकना पड़ा है।

    यह मामला सहायक परियोजना समन्वयक यानी एपीसी और बीआरसीसी पदों पर नियोजन से जुड़ा है। राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने न्यायालय के निर्णय और उसके अनुपालन को लेकर कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें उच्च प्रभार और कूलिंग पीरियड से संबंधित प्रावधानों के तहत आवेदकों को परीक्षा में शामिल करने के न्यायालयीन निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

    इन निर्देशों के अनुपालन में शिवपुरी जिले में 16 याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल किया गया था। योजना के अनुसार, परीक्षा परिणाम के आधार पर 30 अक्टूबर को होने वाली काउंसलिंग के बाद नियुक्ति से संबंधित अगली प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्तियों से जुड़े न्यायालयीन मामलों के चलते अब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसलिंग की अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी।

    राज्य शिक्षा केंद्र ने अपने नए निर्देशों में न्यायालयीन प्रकरणों से निपटने के लिए जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जिन जिलों में नियुक्ति से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां संबंधित याचिका के अनुसार एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाना है। इस अधिकारी को प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जवाबदावा तत्काल प्रस्तुत किया जाए और न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्ष का जवाब समय पर प्रस्तुत करना है। राज्य शिक्षा केंद्र ने उन जिलों के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है, जहां इस प्रकार के न्यायालयीन प्रकरण नहीं हैं। ऐसे जिलों में 2 सितंबर 2026 को जारी पूर्व पत्र के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ये निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह की ओर से 29 अक्टूबर को जारी किए गए। इसके बाद शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय न्यायालयीन मामलों से संबंधित निर्देशों के पालन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    दफेदार सिंह सिकरवार ने बताया कि नए आदेश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी, इसका पता आगे की स्थिति स्पष्ट होने पर ही चलेगा। फिलहाल जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और निर्देशों के अनुपालन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में 12 पदों पर चयन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग और नियुक्ति के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा।