Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज

    भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज


    भोपाल । भोपाल के जेपी अस्पताल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां शुक्रवार शाम एक मरीज को फफूंद लगी दवा दी गई। यह मामला दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। मरीज ने दवा लेने से पहले उसे देखा जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सका। यदि मरीज ने दवा की स्थिति का ध्यान नहीं किया होता तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती थी।

    मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।

    इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।

    इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।

  • भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर

    भोपाल के यूनियन कार्बाइड इलाके में 42 बस्तियों की बड़ी आबादी मल-मूत्र और रसायन मिला पानी पीने को मजबूर हालत बदतर


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास बसी 42 बस्तियों की एक बड़ी आबादी अब भी गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर है। यह पानी मल-मूत्र और घातक रसायनों से भरा हुआ है जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है। नगर निगम ने 2017 में इन बस्तियों में पाइपलाइन के जरिए जलापूर्ति शुरू की थी लेकिन यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है जिससे पानी की गुणवत्ता पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।

    गैस त्रासदी से पीड़ित इन इलाकों के लोग अब तक बेहतर पानी की सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गैस पीड़ित संगठनों की शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2012 में एक निगरानी समिति का गठन किया था। इस समिति ने इन बस्तियों में स्थित हैंडपंप और कुओं के पानी की जांच की और उसमें भारी मात्रा में हैवी मेटल डाइक्लोरोइथीन जैसे रसायन पाए गए।

    इसके बाद समिति ने नगर निगम को पेयजल के लिए पाइपलाइन डालने का निर्देश दिया। हालांकि यह पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही थी जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ई. कोलाई बैक्टीरिया सामान्यतः मलजल में पाया जाता है और यह इंसान के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है।

    2018 में किए गए पानी की जांच में यह खुलासा हुआ कि पाइपलाइन के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक थी जो लोगों के लिए गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके बावजूद नगर निगम और प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और आज भी लोग इस गंदे पानी को पीने को मजबूर हैं।

    गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए यह स्थिति और भी दर्दनाक है क्योंकि पहले ही वे जानलेवा गैसों से प्रभावित हुए थे और अब उन्हें दूषित पानी पीने के कारण नए स्वास्थ्य संकटों का सामना करना पड़ रहा है। इन बस्तियों के निवासी बार-बार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक समाधान नहीं निकल सका है।

    इस संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए गैस पीड़ित संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन भी किया है लेकिन शासन की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। 2017 में नगर निगम ने सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र देकर जलापूर्ति में सुधार करने का वादा किया था लेकिन सात साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

    यह संकट सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है बल्कि यह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी खतरा बन चुका है। नागरिक समाज और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं ताकि इन 42 बस्तियों के लोगों को साफ पानी मिल सके और उनका स्वास्थ्य सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप

    इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

    स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।

  • इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी

    इंदौर में सर्द हवाओं से ठिठुरन अगले हफ्ते तक कोहरे और कड़ाके की ठंड का सामना करेंगे शहरवासी


    इंदौर । इंदौर में इन दिनों सर्द हवाओं और घने कोहरे ने शहरवासियों को ठिठुरन का अहसास करा दिया है। रविवार की सुबह भी कोहरे ने इंदौर को अपनी चपेट में लिया और शनिवार को भी कोहरा छाया हुआ था जिसके कारण दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई थी। इस घने कोहरे के कारण इंदौर एयरपोर्ट से दो दर्जन उड़ानें प्रभावित हुईं।

    उत्तर भारत से आ रही सर्द हवाओं के कारण शहरवासियों को दिन और रात दोनों समय ठंडक का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में अगले एक हफ्ते तक कोहरे और शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी। 4 से 6 जनवरी के बीच न्यूनतम तापमान में और गिरावट की संभावना जताई गई है।

    वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से इंदौर में नमी आ रही है और उत्तरी हवाओं की वजह से ठंडक का असर दिन में भी महसूस हो रहा है। हालांकि तीन दिन बाद हवाओं का रुख पश्चिमी होने से तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। 10 जनवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बनेगा जिसके प्रभाव से इंदौर का तापमान बढ़ सकता है।

    शुक्रवार रात तीन बजे से शनिवार सुबह 4.30 बजे तक घना कोहरा छाया रहा और इस दौरान दृश्यता 100 मीटर तक सिमट गई। दिन में धूप भी बहुत कम समय के लिए निकली और अधिकांश समय बादल छाए रहे। शनिवार को इंदौर का अधिकतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक था।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन दिनों तक इंदौर में शीतलता बरकरार रहेगी। रविवार तक कोहरे का असर जारी रहेगा और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है।

  • सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर

    सेवा जब विश्वास बन जाए : आरोग्य भारती ने मप्र में ऐसे बदली स्वास्थ्य की सोच और तस्वीर


    भोपाल।
    बीमारी जब शरीर से पहले मन को तोड़ने लगे, जब इलाज का नाम सुनते ही जेब का हिसाब लगाया जाने लगे और जब अस्पताल किसी डरावनी जगह जैसे लगने लगें, तब समाज को केवल डॉक्टर नहीं, भरोसे की जरूरत होती है।

    आज देश के साथ मध्य प्रदेश में “आरोग्य भारती” ने पिछले वर्षों में यही भरोसा लौटाने का काम किया है।

    निःशुल्क सेवाएँ, संवेदनशील व्यवहार और समग्र स्वास्थ्य दृष्टि के माध्यम से यह संगठन उन लाखों लोगों के लिए आशा बन गया है, जिन्‍हें कल तक धनाभाव में उचित स्वास्थ्य देखभाल से वंचित रह जाना पड़ता था। कहने का मतलब कि गरीब से आमजन तक ये स्वास्थ्य सेवाएं बना किसी भेदभाव के निशुल्क दी जा रही हैं, यह ऐसे समाज के लिए बहुत दुखद और प्रेरणा देने वाला है।

    दरअसल, “आरोग्य भारती” कोई नया संगठन नहीं है, ये वर्ष 2002 से स्वास्थ्य संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय एक वैचारिक आंदोलन है। इसका मूल मंत्र है; “रोग से पहले स्वास्थ्य”। यही कारण है कि संगठन इलाज के साथ-साथ जीवनशैली, आहार, योग, पर्यावरण और मानसिक संतुलन को भी स्वास्थ्य का अभिन्न अंग मानता है।

    व्‍यवहारिक धरातल पर “आरोग्य भारती” का कार्यदर्शन

    “आरोग्य भारती” का विश्वास है कि स्वास्थ्य सेवा मानवता, संवेदना और परंपराओं को समर्प‍ित भारत में चिकित्‍सकों और दवाओं तक सीमित नहीं हो सकती। समाज को अपने स्वास्थ्य के प्रति कर्तव्य और उत्तरदायित्व का बोध कराना उतना ही आवश्यक है, जितना कि दैनन्‍दिन जीवन में जरूरी व्‍यवहार को सामान्‍यत: आवश्‍यक माना गया है। इसलिए इसी सोच को साथ ले संगठन आज सभी चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों, सेवाभावी नागरिकों और स्वयंसेवकों को जोड़ते हुए देशभर में कार्य का विस्तार करते हुए अपना कार्य सफलता के साथ कर रहा है।

    आज संगठन की सक्रिय इकाइयाँ देश के 43 प्रांतों और 900 से अधिक जिलों में कार्य कर रही हैं। मध्य प्रदेश में यह कार्य विशेष रूप से प्रभावी रूप में सामने आया है, जहाँ “आरोग्य भारती” के सेवा प्रकल्प समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़े हुए हैं।

    आरोग्य मित्र : समाज के भीतर से निकला समाधान

    स्वास्थ्य को समाज की जड़ों तक पहुँचाने के लिए “आरोग्य भारती” ने ‘आरोग्य मित्र’ की संकल्पना विकसित की। सामान्य शैक्षणिक योग्यता रखने वाले सेवाभावी युवक-युवतियों को प्राथमिक स्वास्थ्य, जीवनशैली, योग, आहार, घरेलू उपचार, प्राथमिक उपचार और सीपीआर जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। उल्‍लेखित है कि बीते 24 वर्षों में 375 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 9000 से अधिक स्वयंसेवक तैयार किए जा चुके हैं। यही आरोग्य मित्र आज गाँव-गाँव, बस्तियों और शहरी कॉलोनियों में स्वास्थ्य जागरूकता का कार्य कर रहे हैं।

    भोपाल : सेवा का जीवंत मॉडल

    देखने में आया है कि मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में “आरोग्य भारती” के सेवा कार्य मॉडल के रूप में सामने आए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर संगठन की गंभीरता का प्रमाण है निःशुल्क स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम। वर्ष 2021 से निरंतर चल रहे 9 केंद्रों के माध्यम से अब तक 20 हजार से अधिक बच्चों को स्वर्ण प्राशन दिया जा चुका है। यह उन परिवारों के लिए वरदान है जो महँगी दवाइयाँ और सप्लीमेंट नहीं खरीद सकते। इसी तरह भोपाल के आसपास पांच गाँवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का परिणाम केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ के स्वास्थ्य आँकड़ों में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है। समय रहते रोगों की पहचान और जीवनशैली सुधार से लोगों की दवा-निर्भरता कम हुई है।

    योग और जीवनशैली : दवा से पहले समाधान

    भोपाल में 22 स्थानों पर नियमित निःशुल्क योग कक्षाएँ संचालित हो रही हैं। इनमें शामिल होने वाले अधिकांश लोग ऐसे हैं जो या तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या लंबे समय से दवाओं पर निर्भर रहे हैं। योग ने उन्हें शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी दिया है। साथ ही पांच विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य प्रबोधन का कार्य बच्चों में स्वास्थ्य संस्कार विकसित कर रहा है। स्वच्छता, आहार, दिनचर्या और तनाव प्रबंधन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देकर आरोग्य भारती भविष्य की पीढ़ी को स्वस्थ बनाने में जुटा है।

    महिला टोली : दे रहीं घर-घर स्वास्थ्य की ताकत

    इतना ही नहीं संपूर्ण मध्य प्रदेश में महिला टोली के माध्यम से घरेलू उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह पहल महिलाओं को केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं बनाती, बल्कि उन्हें परिवार और समाज के लिए स्वास्थ्य की धुरी बनाती है। साधारण घरेलू उपायों से छोटे-मोटे रोगों का समाधान गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है।

    पर्यावरण और स्वास्थ्य का साझा सरोकार

    “आरोग्य भारती” का मानना है कि प्रदूषित पर्यावरण में स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं। इसी सोच से प्रतिदिन कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लिया गया। अब तक 1697 पौधे लगाए जा चुके हैं और सभी जीवित हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रखा गया है। यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य में निवेश जैसा है।

    शिवपुरी की अनुकरणीय पहल ला रही रंग

    “आरोग्य भारती” जिला इकाई शिवपुरी ने सेवा का एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया। शिवपुरी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में आर्थोपेडिक विभाग में एक इंडक्शन, मातृत्व एवं शिशु विभाग में दो इंडक्शन, लगवाकर रोगियों की सुविधा में स्थायी सुधार किया गया। यह दिखाता है कि आरोग्य भारती सेवा को केवल शिविरों तक सीमित नहीं रखता।

    उत्सव से जागरूकता तक

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, धन्वंतरि जयंती और आयुर्वेद दिवस जैसे आयोजनों को आरोग्य भारती ने जन-जागरूकता के उत्सव में बदला है। एक ही वर्ष में लाखों लोगों की सहभागिता इस बात का प्रखर प्रमाण है कि समाज इस स्‍वास्‍थ्‍य के आन्‍दोलन और विचार से जुड़ रहा है।

    आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय कहते हैं, “आरोग्य भारती स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक सेवा संगठन है । जिसके माध्‍यम से देश में अनेक सेवा कार्य नित्‍यप्रति सम्‍पन्‍न हो रहे हैं। उनमें मध्य प्रदेश में भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आज संगठन कई प्रकल्प चला रहा है। यह कार्य निरंतर ठीक ढंग से चलता रहे इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्य किया जा रहा है। आरोग्य भारती का प्रयास है कि मध्य प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक वनस्पति संपदाओं का उपयोग करते हुए रोगी तो स्वस्थ हो ही साथ में स्वस्थ व्यक्ति भी रोगी न बने।”

    उन्‍होंने आगे बताया, “हमारा प्रयास रहता है कि वनवासी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को प्रशिक्षित कर आरोग्य मित्र बना सकें । ताकि उनके माध्‍यम से लोगों की जीवन शैली में सुधार कर अधिकाधिक लोगों को स्वस्थ रख पाएं। साथ ही सर्व समावेशी चिकित्सा पद्धति का विकास हो, जिससे कि चिकित्सा पद्धति आधारित चिकित्सा न होकर रोगी आधारित चिकित्सा हो और रोगी जल्दी स्वस्थ हो सके, यह हमारी प्राथमिकता के साथ भविष्य का दृष्टिकोण है।”

    उधर, इस संबंध में आरोग्‍य भारती के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख मिहिर कुमार कहते हैं कि “माई हेल्थ माई रिपॉन्सबिलिटी” की भावना जब समाज में जड़ पकड़ लेगी, तब स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। इसी सोच को लेकर आरोग्‍य भारती का गठन हुआ और अपने गठन से लेकर आज तक संगठन इसी उद्देश्‍य को लेकर प्रमुखता से चल रहा है, हमारे संगठन का कुल लक्ष्य यही है कि कोई भी चिकित्सा, पद्धति आधारित नहीं होनी चाहिए वह रोगी आधारित चिकित्सा विकसित होनी चाहिए, वास्‍तव में हम इसी लक्ष्‍य को लेकर आज आगे बढ़ रहे हैं।

  • एबी रोड स्थित सम्राट होटल में आग लगी, दमकल ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं

    एबी रोड स्थित सम्राट होटल में आग लगी, दमकल ने समय रहते काबू पाया, कोई जनहानि नहीं


    देवास: एबी रोड स्थित सम्राट होटल के एक कमरे में शुक्रवार दोपहर अज्ञात कारणों से आग लग गई। हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, और आग को जल्द ही दमकल द्वारा बुझा लिया गया। नगर निगम के दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के कारण बड़ा हादसा टल गया।जानकारी के अनुसार सम्राट होटल की दूसरी मंजिल के एक कमरे में आग लगने से कमरे में रखा सामान जलकर क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय होटल के कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर पर थे। जब उन्हें दूसरी मंजिल से धुआं उठते हुए दिखाई दिया, तो उन्होंने तुरंत नगर निगम के फायर ब्रिगेड को सूचना दी। इसके बाद दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।

    नगर निगम के अधिकारी और स्थानीय नेताओं ने मौके का दौरा किया। निगम सत्तापक्ष के नेता मनीष सेन ने बताया कि होटल के कर्मचारी जब धुआं उठता हुआ देखा, तो उन्होंने बिना समय गंवाए दमकल विभाग को सूचित किया। आग के फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित कर लिया गया जिससे कोई बड़ा हादसा टल गया।इसी दौरान पुलिस अधिकारी सीएसपी सुमित अग्रवाल भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा सम्राट होटल की दूसरी मंजिल के कमरे में आग लगी थी जिसे समय रहते काबू कर लिया गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद, जैसे ही सूचना प्राप्त हुई, फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं। इन गाड़ियों में आधुनिक उपकरण थे जिनकी मदद से आग को जल्दी बुझाया जा सका। हालांकि आग से कमरे में रखे कुछ सामान जल गए लेकिन बड़ा नुकसान टल गया।आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पहले अनुमान के अनुसार यह शॉर्ट सर्किट के कारण हो सकती है, लेकिन इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस और दमकल विभाग दोनों ही आग के कारणों की जांच में जुटे हैं।

    सुरक्षा की महत्वता

    इस घटना ने होटल मालिकों और अधिकारियों को आग से संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। होटल में आग बुझाने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए थे, लेकिन फिर भी आग की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा था।होटल में आग बुझाने की व्यवस्था के अलावा, अग्निशमन विभाग ने होटल मालिकों को आग से बचाव के लिए समय-समय पर निरीक्षण करने और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है।
  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।

  • जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा

    जबलपुर में नालियों से गुजर रहीं पेयजल आपूर्ति की लाइनों से बढ़ रही चिंता इंदौर जैसी घटना का खतरा


    जबलपुर । हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई 15 लोगों की मौत ने प्रदेशभर में चिंता की लहर दौड़ा दी है और अब जबलपुर के नागरिकों में भी जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। जबलपुर में जल वितरण पाइपलाइनों की हालत बेहद खराब है क्योंकि शहर की करीब 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइनें नाली-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही हैं।

    इन पाइपलाइनों का निर्माण आमतौर पर 20 साल पहले किया गया था लेकिन कई लाइनें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इन पाइपलाइनों में क्षरण हो चुका है और इनसे लगातार नाली के पानी धूल और मिट्टी का संपर्क होता है। इस कारण पाइपलाइनों में लीकेज हो रहा है जिससे गंदगी और दूषित पानी वितरण के दौरान पेयजल में घुलने की संभावना बढ़ गई है।

    इंदौर में हुई घटना के बाद जबलपुर नगर निगम ने इस गंभीर समस्या को लेकर सक्रियता दिखाई और जल विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया। ये टीमें शहर के विभिन्न हिस्सों से पेयजल के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता जांचने में जुट गईं। हालांकि एक दिन सैंपल लेने के बाद विभागीय टीम की गतिविधियां सुस्त पड़ गईं जिससे इस मुद्दे को लेकर नागरिकों के बीच और भी चिंता बढ़ गई है।

    विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शहर में जल वितरण की पाइपलाइनों के रखरखाव और सही तरीके से मरम्मत की आवश्यकता है ताकि पानी की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े। यह समस्या इंदौर जैसी बड़ी घटनाओं को टालने के लिए जल्द सुलझाई जानी चाहिए।नागरिकों ने इस विषय पर नगर निगम और प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है ताकि भविष्य में दूषित पानी से कोई स्वास्थ्य संकट उत्पन्न न हो।

  • कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल

    कोहरे के कारण सड़क हादसा बाइक से पिकअप में टकरा कर युवक की मौत, पिता घायल


    मंडला । मंडला जिले के चौकी पिंडरई क्षेत्र में शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें 21 वर्षीय युवक करण यादव की मौत हो गई। हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ जब वह परीक्षा देने जबलपुर जाने के लिए बाइक से पिंडरई जा रहा था।

    घटना के अनुसार करण यादव बाइक पर अपने पिता बसंत यादव के साथ जा रहा था। जैसे ही वह तुमेगांव मंदिर के पास पहुंचे घने कोहरे के कारण उन्हें सड़क किनारे खड़ी पिकअप वाहन दिखाई नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि बाइक सीधे पिकअप वाहन से टकरा गई। हादसे के समय पिकअप वाहन पूरी तरह से खड़ा था और कोहरे के कारण करण को उसे देखने का मौका नहीं मिला।

    इस गंभीर हादसे में करण को बहुत गंभीर चोटें आईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके पिता बसंत यादव को मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल नैनपुर में भर्ती कराया गया।
    घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

    प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है लेकिन घना कोहरा और सड़क पर खड़ी गाड़ी को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
    अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हादसों से बचने के लिए सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है खासकर कोहरे जैसे मौसम में।