Category: Madhya Pradesh

  • 20% ब्याज और बेइज्जती से परेशान चार लोगों ने रची खूनी साजिश, गर्दन पर 5 और सिर पर 2 वार कर सूदखोर को मार डाला

    20% ब्याज और बेइज्जती से परेशान चार लोगों ने रची खूनी साजिश, गर्दन पर 5 और सिर पर 2 वार कर सूदखोर को मार डाला


    ग्वालियर। ग्वालियर में ब्याज पर पैसे देने वाले एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सूदखोरी और कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान चार लोगों पर हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने मृतक पुरुषोत्तम गुर्जर की गर्दन पर कुल्हाड़ी से पांच और सिर पर दो वार किए थे। इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में घटनास्थल पर मिले गेंदे के फूलों ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने मामले में मृतक के ही गांव के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
    यह वारदात 14 अक्टूबर को ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र के केदारपुर के पास छोटी मढ़ैया गांव में हुई थी। सुबह भागीरथ गुर्जर के खेत में 35 वर्षीय पुरुषोत्तम गुर्जर का खून से लथपथ शव मिला था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान मृतक की गर्दन और सिर पर कुल्हाड़ी से किए गए हमले के निशान मिले। शुरुआती पड़ताल में ही साफ हो गया था कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई है। मृतक की जेब से लेनदेन से जुड़ी एक पर्ची भी मिली जिसके बाद पुलिस ने आर्थिक विवाद के पहलू पर जांच शुरू की।
    पुलिस की जांच में सामने आया कि छोटी मढ़ैया गांव के रहने वाले रमन गुर्जर राधाकृष्ण गुर्जर छोटू उर्फ राहुल और विजय उर्फ खैरी ने पुरुषोत्तम से कथित तौर पर 20 प्रतिशत ब्याज पर करीब 10 लाख रुपये उधार लिए थे। पुलिस के अनुसार पुरुषोत्तम उनसे लगातार पैसों की मांग करता था। आरोपियों का कहना था कि ब्याज चुकाने के लिए बनाए जा रहे दबाव और गांव में कथित रूप से बेइज्जती किए जाने से वे परेशान थे। इसी नाराजगी के चलते चारों ने हत्या की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक वारदात से करीब तीन दिन पहले गांव के एक चबूतरे पर बैठकर उन्होंने इस साजिश को अंतिम रूप दिया था।
    जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने हत्या से पहले शीतला माता मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और वारदात को अंजाम देने का प्रण लिया। इसके बाद वे माला पहनकर घटनास्थल की ओर पहुंचे। घटनास्थल के पास एक चबूतरे पर मिले गेंदे के फूलों ने पुलिस का ध्यान खींचा। जांच के दौरान मंदिर जाने और माला पहनने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई। इसी सुराग ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद की और पूछताछ के दौरान कथित साजिश की परतें खुलती चली गईं।
    पुलिस के अनुसार 13 अक्टूबर की रात पुरुषोत्तम की पत्नी अपने भाई के एक्सीडेंट की सूचना मिलने पर मायके पृथ्वीपुरा गई हुई थी। पुरुषोत्तम घर पर अकेला था और बाहर सो रहा था। इसी दौरान रात करीब 11 बजे आरोपी रमन गुर्जर उसे ब्याज के पैसों का हिसाब करने और रकम देने की बात कहकर अपने साथ ले गया। इसके बाद पुरुषोत्तम घर के पास स्थित भागीरथ के खेत में पहुंचा जहां चारों ने कथित तौर पर उस पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में उसकी मौत हो गई।
    ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह के मुताबिक मामले का खुलासा करने के लिए एएसपी डॉ. शिवेश सिंह बघेल के निर्देशन में सीएसपी रवि भदौरिया की पांच टीमों ने काम किया। पुलिस ने करीब 72 घंटे के भीतर तकनीकी साक्ष्य और दूसरे सुराग जुटाकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल यह मामला कथित सूदखोरी और आर्थिक विवाद से शुरू होकर हत्या तक पहुंचने की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

  • ग्वालियर में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हथकड़ी सहित भागा चोरी का आरोपी, होटल में खाना खिलाने के बाद फ्लैट पर सो गए जवान

    ग्वालियर में पुलिस की बड़ी लापरवाही, हथकड़ी सहित भागा चोरी का आरोपी, होटल में खाना खिलाने के बाद फ्लैट पर सो गए जवान


    ग्वालियर । ग्वालियर में पुलिस की लापरवाही का एक मामला सामने आया है जहां चोरी के आरोप में पकड़ा गया एक बंदी हथकड़ी सहित पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। आरोपी को हाथ में चोट लगने के बाद इलाज कराने के लिए छतरपुर से ग्वालियर लाया गया था। लेकिन अस्पताल में उपचार नहीं मिलने पर पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में सुरक्षित रखने के बजाय अपने एक रिश्तेदार के फ्लैट पर ले जाने का फैसला किया। आरोप है कि रात में पुलिसकर्मी बंदी को होटल भी लेकर गए जहां उसने खाना खाया। इसके बाद सभी विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित लोटस विला के एक फ्लैट पर पहुंचे और सो गए। सुबह जब पुलिसकर्मियों की नींद खुली तो आरोपी वहां से गायब था जबकि उसकी हथकड़ी मौके पर ही पड़ी मिली। घटना के बाद पुलिस विभाग में सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी के दौरान बरती गई सावधानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    सीएसपी विश्वविद्यालय रवि भदौरिया के मुताबिक छतरपुर पुलिस में पदस्थ आरक्षक विजय यादव शुभम शर्मा और संदीप चोरी के आरोप में पकड़े गए बंदी सन्नी पाल को इलाज के लिए ग्वालियर लेकर आए थे। करीब 30 वर्षीय सन्नी पाल उत्तराखंड का निवासी बताया जा रहा है। उसके हाथ में चोट लगी थी जिसके उपचार के लिए पुलिसकर्मी उसे तड़के करीब चार बजे ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे सुबह आने की सलाह दी गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों के सामने बंदी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि उन्होंने उसे किसी नजदीकी थाने में रखने के बजाय आरक्षक शुभम शर्मा के भाई गौरव शर्मा के फ्लैट पर ले जाने का निर्णय लिया। यह फ्लैट विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के लोटस विला में स्थित है।
    मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार पुलिसकर्मी बंदी को फ्लैट पर ले जाने से पहले एक होटल में भी पहुंचे थे। वहां बंदी को खाना खिलाया गया। घटना से संबंधित एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें आरोपी होटल में खाना खाता दिखाई दे रहा है। इसके बाद पुलिसकर्मी बंदी को लेकर फ्लैट पर पहुंचे। आरोप है कि रात में सभी वहीं रुक गए और सो गए। इस दौरान बंदी की निगरानी में लापरवाही हुई जिसका फायदा उठाकर वह मौके से भाग निकला। सुबह करीब सात बजे जब पुलिसकर्मियों की नींद खुली तो सन्नी पाल वहां मौजूद नहीं था। उसकी हथकड़ी मौके पर पड़ी हुई थी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
    आरोपी के फरार होने के बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी और विश्वविद्यालय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर फरार बंदी की तलाश शुरू कर दी है। उसकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों और आसपास के क्षेत्रों में जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी किस रास्ते से फरार हुआ और घटना के समय उसकी निगरानी में किस स्तर पर चूक हुई इसकी भी जांच की जा सकती है।
    इस घटना ने बंदियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस हिरासत में रखे गए किसी भी आरोपी की निगरानी और उसकी सुरक्षित अभिरक्षा संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बंदी को अस्पताल से थाने ले जाने के बजाय निजी फ्लैट पर ठहराने के आरोप गंभीर माने जा रहे हैं। ड्यूटी के दौरान हुई इस लापरवाही को लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार सन्नी पाल को पकड़ना और पूरे घटनाक्रम की जांच करना है।

  • इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत

    इंदौर बायपास की बदहाली पर 27 अक्टूबर को फिर सुनवाई, NHAI ने पेश की तस्वीरें, हाईकोर्ट ने मांगी जमीनी हकीकत


    इंदौर। इंदौर-देवास बायपास की खराब हालत और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने अदालत में तस्वीरें पेश करते हुए दावा किया कि बायपास पर मौजूद गड्ढों को भर दिया गया है और अब वहां पहले जैसी समस्या नहीं है। हालांकि सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी सवाल उठाए गए थे। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मौके पर जाकर सड़क का निरीक्षण करने और वास्तविक स्थिति से अदालत को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। सुनवाई जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की डबल बेंच में हुई। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान NHAI से यह बताने को कहा था कि वर्ष 2023 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद बायपास की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
    इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर मातृ फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2021 में जनहित याचिका दायर की गई थी। एडवोकेट अमेय बजाज के माध्यम से दायर इस याचिका में सड़क की खराब स्थिति और वाहन चालकों की सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार बायपास पर बड़े-बड़े गड्ढे और खराब सर्विस रोड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। इसके अलावा खुले ड्रेनेज और जलभराव की समस्या भी सामने रखी गई है। कुछ स्थानों पर स्ट्रीट लाइट खराब या बंद होने का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि इससे रात के समय वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। याचिका में दुर्घटना संभावित स्थानों और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है।
    तीन दिन पहले हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि बायपास की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत हुई थी। उनका कहना था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं होने के कारण सड़क पर हादसों का खतरा बना हुआ है। हालांकि NHAI ने शुक्रवार को तस्वीरें पेश कर दावा किया कि गड्ढों को भरने का काम पूरा कर लिया गया है और समस्या दूर हो चुकी है। अब अदालत के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता मौके पर जाकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखेंगे। उनका निरीक्षण और उसके आधार पर अदालत में दी जाने वाली जानकारी अगली सुनवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
    इस मामले में सड़क सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन भी प्रमुख मुद्दा है। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अवैध ढाबों के साथ व्यावसायिक अतिक्रमण पर नियंत्रण की मांग की गई है। इसके अलावा दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और वहां चेतावनी संकेतक लगाने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। प्रकाश व्यवस्था बेहतर बनाने और यातायात की निगरानी मजबूत करने की जरूरत भी उठाई गई है। आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करना भी याचिका में उठाए गए मुद्दों में शामिल है।
    अब 27 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में बायपास की मौजूदा हालत और सुधार कार्यों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। NHAI के दावे और याचिकाकर्ता के मौके पर किए जाने वाले निरीक्षण के बाद अदालत के सामने सड़क की वास्तविक स्थिति से जुड़ी जानकारी आएगी। ऐसे में इंदौर-देवास बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों की नजर अब अगली सुनवाई पर रहेगी।

  • गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित

    गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित


    इंदौर । इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इस बार सामान्य से कम बारिश होने और कई ट्यूबवेल बंद होने के कारण आने वाले महीनों में जलापूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शहर में कुल 6040 ट्यूबवेल हैं जिनमें से 361 फिलहाल बंद पड़े हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या सामने आई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने नए जलस्रोत विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
    शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 ट्यूबवेल के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसके साथ ही बंद पड़े ट्यूबवेल को दोबारा चालू करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। निगम की योजना के तहत पंपों की मरम्मत और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए 10 विशेष टीमें लगाने की तैयारी है। इससे उन क्षेत्रों में राहत मिल सकती है जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है और स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भरता अधिक है।
    जलसंकट की चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह इस साल कम बारिश होना है। इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश दर्ज की जाती है लेकिन इस बार लगभग 23 इंच बारिश ही हुई है। इस तरह सामान्य के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। कम बारिश का असर भूजल स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में नए ट्यूबवेल खोदने से पहले संबंधित क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता का तकनीकी सर्वे करना जरूरी होगा। यदि किसी इलाके में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है तो वहां बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी मिलने की गारंटी नहीं होगी। इसलिए नए जलस्रोत विकसित करने के साथ वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर भी ध्यान देना होगा।
    नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 टंकियों के जरिए रोजाना जलापूर्ति की जा रही है। बाकी 10 टंकियों से नियमित पानी की सप्लाई नहीं होने के कारणों को स्पष्ट करने और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन करने की आवश्यकता है। यदि इन क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो गर्मी के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। पानी की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए निगम ने टैंकर व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके तहत 71 नए हाइड्रेंट स्थान चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा 12 मौजूदा समप और हाइड्रेंट स्थानों को आपातकालीन जल भराव केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है। जरूरत के अनुसार नए समप विकसित करने और उन्हें ट्यूबवेल या पाइपलाइन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
    एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा के मुताबिक नगर निगम गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट से बचने के लिए योजना बना रहा है। नए ट्यूबवेल खोदने और मौजूदा जलस्रोतों को दुरुस्त करने पर काम किया जाएगा ताकि लोगों को पानी की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के बीच केवल नए ट्यूबवेल खोदना ही पर्याप्त नहीं होगा। समय पर मरम्मत और जलापूर्ति की निगरानी के साथ पानी का संरक्षण भी जरूरी रहेगा। आने वाले महीनों में नगर निगम की तैयारियों और जलस्रोतों की स्थिति से तय होगा कि शहर के प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता कितनी बेहतर हो पाती है।

  • इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

    इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन


    इंदौर । इंदौर के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे डॉक्टरों नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर 175 कर्मचारियों के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। अब सभी संबंधित कर्मचारियों को अपनी मूल पदस्थापना पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मूल पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग देने के बाद ही कर्मचारियों का अक्टूबर महीने का वेतन जारी किया जाएगा।
    जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और उन्हें उनके मूल कार्यस्थल पर भेजा जाए। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय को भी देनी होगी। विभाग ने इस मामले में किसी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का उद्देश्य कर्मचारियों की तैनाती को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लागू करना और मूल पदस्थापना से जुड़े दायित्वों को सुनिश्चित करना बताया गया है।
    वेतन को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। वेतन आहरण केंद्रों से कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी जब अपनी मूल पदस्थापना पर उपस्थित होकर जॉइनिंग दे दें तभी अक्टूबर का वेतन आहरित किया जाए। इसका मतलब है कि केवल अटैचमेंट समाप्त होने का आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थिति भी दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही वेतन संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
    सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्देश जारी होने के बाद कोई अधिकारी या कर्मचारी अटैचमेंट पर काम करते हुए पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। इस निर्देश के जरिए विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आदेश के पालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
    यह आदेश जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों को भेजा गया है। इसमें सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के अलावा देपालपुर मानपुर सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भी आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
    आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसके आधार पर सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। अब विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाना है कि 175 कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर वापसी की प्रक्रिया समय पर पूरी हो और इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय तक पहुंचे।
    स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था में बदलाव होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभी संबंधित कर्मचारी कितनी जल्दी अपने मूल कार्यस्थल पर जॉइनिंग देते हैं और विभाग आदेश के पालन की निगरानी किस तरह करता है।

  • किसान को चूना लगाने की कोशिश! शिवपुरी में चने की तौल में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश और जुर्माने की तैयारी

    किसान को चूना लगाने की कोशिश! शिवपुरी में चने की तौल में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश और जुर्माने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में किसानों की उपज की तौल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। लुकवासा कृषि उपज मंडी के बाहर चना बेचने पहुंचे किसान कैलाश जाटव ने व्यापारी पर कम तौल करने का आरोप लगाया है। किसान के मुताबिक व्यापारी दीपक अहिरवार ने मंडी के भीतर मिलने वाले भाव से 50 रुपए प्रति क्विंटल अधिक कीमत देने का भरोसा दिलाया था। इसी लालच में किसान अपनी उपज लेकर मंडी के बाहर पहुंचा। आरोप है कि तौल के दौरान करीब 11 क्विंटल चने को केवल 8 क्विंटल बताया गया। किसान ने दोबारा तौल कराने की मांग की तो करीब तीन क्विंटल का अंतर सामने आया।
    किसान कैलाश जाटव के अनुसार अधिक भाव मिलने की उम्मीद में वह व्यापारी के पास चना बेचने पहुंचा था। शुरुआत में तौल के दौरान जितनी उपज बताई गई उस पर उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने दोबारा तौल कराने का फैसला किया। दोबारा तौल में कथित गड़बड़ी सामने आने पर मामला गंभीर हो गया। किसान का आरोप है कि यदि वह समय रहते तौल की जांच नहीं कराता तो उसे अपनी उपज का उचित भुगतान नहीं मिल पाता और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
    बताया गया है कि करीब 11 क्विंटल चने को 8 क्विंटल बताए जाने से लगभग तीन क्विंटल का अंतर सामने आया। किसान के अनुसार इस गड़बड़ी के कारण उसे करीब 20 हजार रुपए तक का नुकसान हो सकता था। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन उपज की सही मात्रा और उस समय लागू बाजार भाव के आधार पर किया जा सकेगा। फिलहाल किसान की शिकायत के बाद मामले ने मंडी में तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाले भुगतान पर सवाल खड़े किए हैं।
    घटना सामने आने के बाद कृषि उपज मंडी प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंडी सचिव नरेश जाटव ने बताया कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि तौल में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।
    वहीं कोलारस के एसडीएम शिवदयाल धाकड़ ने व्यापारी का कांटा जब्त करने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी से बचाने के लिए मंडी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सभी कांटों की जांच कराने की बात कही गई है। तौल उपकरणों की जांच से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि किसानों की उपज का वजन सही दर्ज हो और उन्हें भुगतान में नुकसान न उठाना पड़े।
    कृषि उपज मंडियों में किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल बेचने आते हैं। ऐसे में तौल और भुगतान में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। थोड़ी सी गड़बड़ी भी किसान की कमाई पर सीधा असर डाल सकती है। लुकवासा मंडी के बाहर सामने आया यह मामला किसानों के लिए सतर्क रहने और उपज की तौल स्वयं जांचने की जरूरत को रेखांकित करता है। प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि इस मामले में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

  • सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए तोड़ा गया ताला? कोलारस के पुराने भवन में आग से मचा हड़कंप, साजिश के एंगल से जांच

    सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए तोड़ा गया ताला? कोलारस के पुराने भवन में आग से मचा हड़कंप, साजिश के एंगल से जांच


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस नगर परिषद के पुराने भवन में शुक्रवार रात आग लगने से सरकारी रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आग इतनी गंभीर थी कि उस पर काबू पाने में समय लगा। जानकारी के मुताबिक रात करीब ढाई बजे आग बुझाई जा सकी। घटना के बाद पुराने भवन में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को हुए नुकसान का मामला सामने आया है। वहीं भवन के दरवाजे का ताला टूटा मिलने से आग लगने की वजह को लेकर संदेह गहरा गया है।
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुराने भवन में आग लगने की घटना सामान्य हादसा भी हो सकती है लेकिन ताला टूटा मिलने के कारण जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आग किसी ने लगाई या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था। कोलारस थाना पुलिस दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पुलिस घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
    जानकारी के मुताबिक कोलारस नगर परिषद का कार्यालय वर्ष 2014-15 में जगतपुर चौराहे के पास नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद से नगर परिषद का नियमित कामकाज नए कार्यालय से संचालित हो रहा है। इससे पहले नगर परिषद का काम पुराने भवन से होता था। नगर पंचायत के समय से लेकर वर्ष 2013 तक के रिकॉर्ड पुराने भवन के परिषद हॉल में रखे हुए थे। आग लगने से इसी स्थान पर रखे सरकारी दस्तावेज प्रभावित हुए हैं। हालांकि कितने रिकॉर्ड पूरी तरह नष्ट हुए हैं और कितने दस्तावेजों को आंशिक नुकसान पहुंचा है इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
    पुराने सरकारी रिकॉर्ड प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें पुराने निर्णयों और कार्यालयीन कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज शामिल होने की संभावना रहती है। ऐसे में आग की घटना के बाद रिकॉर्ड के नुकसान का आकलन करना भी जरूरी होगा। संबंधित विभाग को यह पता लगाना होगा कि कौन-कौन से दस्तावेज प्रभावित हुए हैं और क्या उनकी प्रतियां किसी अन्य कार्यालय या डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं।
    भवन का ताला टूटा मिलने के बाद इस घटना में किसी की भूमिका होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। हालांकि केवल ताला टूटा मिलना अपने आप में साजिश का प्रमाण नहीं है। जांच के दौरान पुलिस को यह पता लगाना होगा कि भवन में प्रवेश कैसे हुआ और आग किन परिस्थितियों में लगी। घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्य और अन्य उपलब्ध जानकारी जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
    कोलारस थाना पुलिस फिलहाल आग लगने की घटना को हादसे और संभावित साजिश दोनों एंगल से देख रही है। आग लगने का कारण स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि घटना दुर्घटनावश हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक गतिविधि थी। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड को हुए नुकसान और पुराने भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • शिवपुरी में सगाई की खुशियों में खलल, परिवार और रिश्तेदारों पर हमला, SC-ST एक्ट समेत 11 लोगों पर केस दर्ज

    शिवपुरी में सगाई की खुशियों में खलल, परिवार और रिश्तेदारों पर हमला, SC-ST एक्ट समेत 11 लोगों पर केस दर्ज


    शिवपुरी ।  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा थाना क्षेत्र के समोहा गांव में सगाई समारोह के दौरान पुरानी रंजिश को लेकर विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने पहले परिवार के दामाद को रास्ते में रोककर पीटा और फिर घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों तथा रिश्तेदारों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। घटना में महिलाओं सहित कई लोगों को चोटें आई हैं। हमलावरों पर घर के बाहर लगे टेंट और सामान के साथ वाहनों में तोड़फोड़ करने का भी आरोप है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर 11 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत मारपीट से जुड़ी विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात करीब 10 बजे समोहा गांव में कमल सिंह जाटव के घर उनके भतीजे रविंद्र जाटव की सगाई का कार्यक्रम चल रहा था। घर के बाहर टेंट लगाया गया था और समारोह में शामिल होने के लिए रिश्तेदार भी पहुंचे हुए थे। परिवार में खुशी का माहौल था। इसी दौरान कमल सिंह के दामाद अनिल जाटव निवासी महलगांव जिला ग्वालियर दवाई लेने के लिए समोहा गांव जा रहे थे। आरोप है कि रास्ते में बाबा की बावड़ी के पास साहब सिंह गुर्जर और उनके साथ मौजूद निर्भय गुर्जर बंटी गुर्जर तथा छोटू गुर्जर ने अनिल को रोक लिया और उनके साथ मारपीट की।
    शिकायत के अनुसार इस हमले में अनिल जाटव के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। घटना के बाद अनिल ने फोन के माध्यम से अपने परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद विवाद ने और गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि कुछ देर बाद जीतू गुर्जर समेत अन्य लोग कमल सिंह जाटव के घर पहुंच गए। वहां पुरानी रंजिश को लेकर गाली-गलौज शुरू हो गई। परिवार के लोगों ने विरोध किया तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
    इस दौरान कमल सिंह जाटव और उनके भतीजे मंगल जाटव के सिर में चोटें आने की बात कही गई है। वहीं रिश्तेदार मनोज जाटव और परिवार की महिलाओं सपना जाटव तथा भारती जाटव को भी चोटें लगने का आरोप है। घटना के समय घर पर सगाई समारोह चल रहा था और बड़ी संख्या में रिश्तेदार मौजूद थे। अचानक हुए विवाद और मारपीट से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिवार का आरोप है कि हमलावरों ने समारोह के लिए लगाए गए टेंट और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया। वाहनों में भी तोड़फोड़ किए जाने की बात सामने आई है।
    घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस से शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 11 लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और मारपीट से संबंधित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। मामले में पुरानी रंजिश को विवाद की वजह बताया गया है। पुलिस की जांच में घटना से जुड़े सभी आरोपों और संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि होना बाकी है।
    सगाई जैसे पारिवारिक समारोह में हुई इस घटना से परिवार के लोगों में भय और नाराजगी है। समारोह में शामिल महिलाओं और रिश्तेदारों के घायल होने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। मामले में दोष तय करने का निर्णय साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

  • सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू

    सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया दौरों से जुड़े कुछ दिलचस्प नजारे चर्चा में हैं। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा से तंबू उड़ गया तो कहीं उनके दौरे से पहले प्रशासन ने कुछ ही घंटों में सड़क की मरम्मत कर दी। दूसरी ओर अशोकनगर में सिंधिया की बैठक के दौरान खाली कुर्सियां दिखाई दीं। इन घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
    पहला मामला नरसिंहपुर का है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा के झोंकों से वहां लगाया गया तंबू उड़ गया। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंत्री विधायक सांसद और अधिकारी हेलिपैड के पास मौजूद थे। हेलिकॉप्टर के पंखों से उठी तेज हवा के कारण धूल उड़ने लगी और तंबू भी हवा में उखड़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की खबर सामने नहीं आई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    दूसरा मामला मुरैना का है जहां मुख्यमंत्री को एक स्कूल का निरीक्षण करना था। स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत खराब बताई गई थी। मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में सड़क को दुरुस्त कर दिया। आम दिनों में बदहाल सड़कों से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी वीआईपी दौरे के दौरान प्रशासन इतनी तेजी से काम कर सकता है तो आम दिनों में भी सड़कों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर इसी तरह ध्यान क्यों नहीं दिया जाता। हालांकि सड़क निर्माण और मरम्मत के काम की वास्तविक स्थिति तथा उसकी गुणवत्ता का आकलन संबंधित विभाग की जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
    तीसरा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अशोकनगर दौरे से जुड़ा है। यहां वे जनप्रतिनिधियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां लगाई गई थीं लेकिन कई कुर्सियां खाली नजर आईं। सिंधिया के मंच पर पहुंचने के दौरान खाली कुर्सियों को हटाने की कवायद भी दिखाई दी। इस दृश्य के बाद कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की कम मौजूदगी को लेकर चर्चा होने लगी। हालांकि बैठक में उपस्थिति कम रहने की वजह स्पष्ट नहीं है। यह आयोजन की व्यवस्था से जुड़ा मामला था या जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के पीछे कोई अन्य कारण था इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
    इसी दौरे के दौरान सिंधिया अशोकनगर में आयोजित जनजातीय सम्मेलन में भी शामिल हुए। यहां आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया और उन्हें विशेष मुकुट पहनाया गया। सिंधिया पूरे कार्यक्रम के दौरान मुकुट पहने नजर आए और उन्होंने इसी रूप में भाषण भी दिया। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक स्वागत और पहनावे की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सड़क का तेजी से दुरुस्त होना सरकारी मशीनरी की तत्परता को दिखाता है लेकिन आम नागरिकों के लिए भी ऐसी ही नियमित व्यवस्था जरूरी है। वहीं राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थिति और आयोजन की तैयारियां भी चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। फिलहाल इन घटनाओं की खासियत यही है कि एक ही दौर में प्रशासनिक फुर्ती से लेकर राजनीतिक आयोजनों के अलग-अलग दृश्य सामने आए हैं।

  • भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से उबाल, बैरागढ़ थाने में घुसने की कोशिश, लोगों की मांग आरोपी को हमारे हवाले करो

    भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से उबाल, बैरागढ़ थाने में घुसने की कोशिश, लोगों की मांग आरोपी को हमारे हवाले करो


    भोपाल। भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे और बैरागढ़ थाने का घेराव कर दिया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को उनके हवाले करने या उसे फांसी देने की मांग की। इस दौरान कुछ लोगों ने थाने के अंदर घुसने का प्रयास भी किया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने थाने के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।
    बच्ची की मौत की खबर सामने आने के बाद से ही क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारी थाने के बाहर एकत्र हुए और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए नारे लगाए। उनका कहना था कि बच्ची के साथ हुई घटना बेहद गंभीर है और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोपी को पुलिस के हवाले रखने के बजाय उन्हें सौंपने की मांग भी की। हालांकि कानून के तहत किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई और सजा तय करने का अधिकार न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होता है।
    प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने बैरागढ़ थाने में प्रवेश करने की कोशिश की। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने लोगों को थाने के भीतर जाने से रोक दिया। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों को बाहर ही रोके रखा गया। घटना के बाद इलाके में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना और मामले की जांच को आगे बढ़ाना है।
    जानकारी के मुताबिक बच्ची गुरुवार रात घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की। शुक्रवार को उसका शव बैरागढ़ क्षेत्र में कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहर में मिला। शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। बच्ची की हत्या की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने घटना पर नाराजगी जताई और आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी।
    पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर 23 वर्षीय एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। शुरुआती पूछताछ में उसके अपराध स्वीकार करने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि मामले में आरोपों की पुष्टि और दोष तय करने की प्रक्रिया जांच तथा न्यायालय के माध्यम से पूरी होगी।
    प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। इस घटना ने क्षेत्र में गुस्से और भय का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की चुनौती है। लोगों की मांग है कि मामले में तेजी से कार्रवाई हो और दोषी को कानून के अनुसार सजा मिले।