Category: Madhya Pradesh

  • सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त

    सुभालय विहार में गरजा बुलडोजर, अवैध निर्माण पर निगम का एक्शन; नियम तोड़कर बनी दो मंजिला बिल्डिंग ध्वस्त


    भोपाल । भोपाल में अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को बावड़ियाकलां स्थित सुभालय विहार में अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला भवन पर जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई गौरव गृह निर्माण सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले सुभालय परिसर में स्थित मकान क्रमांक बी 93 पर की गई। जांच में सामने आया कि जिस भूखंड पर निर्माण किया गया उसका मूल क्षेत्रफल 1312 वर्गमीटर था जबकि लगभग 900 वर्गमीटर क्षेत्र में जी प्लस वन भवन का निर्माण कर लिया गया था। सबसे अहम बात यह रही कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा स्वीकृत लेआउट में इस भूखंड को एकल प्लॉट के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए इसका अवैध विभाजन कर दिया गया।

    नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित भूखंड को अनधिकृत तरीके से छोटे हिस्सों में बांटकर बेचा गया और बाद में स्वीकृत मानकों के विपरीत भवन निर्माण कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का निर्माण पूरी तरह नियमों के खिलाफ था इसलिए नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। निगम का कहना है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कार्रवाई के दौरान नगर निगम के इंजीनियर राजस्व विभाग के अधिकारी और पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।

    नगर निगम ने शहरवासियों से भी अपील की है कि किसी भी संपत्ति की खरीद या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से उसकी वैधता और स्वीकृत लेआउट की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। बिना अनुमति के निर्माण या अवैध प्लॉटिंग में निवेश करने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

    नगर निगम का कहना है कि अवैध निर्माण केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को प्रभावित नहीं करता बल्कि भविष्य में सड़क जल निकासी पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी गंभीर असर डालता है। इसी कारण प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

    प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में वैध और नियमानुसार विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। इसलिए जो लोग बिना स्वीकृति के निर्माण कर रहे हैं या अवैध प्लॉटिंग में शामिल हैं उनके खिलाफ आने वाले समय में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

  • नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार

    नकली पिस्टल के दम पर राहगीरों से वसूली, भोपाल में LLB छात्र सहित दो फर्जी पुलिसकर्मी गिरफ्तार


    भोपाल । भोपाल में फर्जी पुलिस बनकर राहगीरों से वसूली करने वाले दो युवकों का भंडाफोड़ हो गया। राजधानी के शाहपुरा थाना क्षेत्र में दोनों आरोपी सिविल ड्रेस पहनकर चौराहे पर वाहन चालकों को रोकते थे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर हेलमेट व अन्य यातायात नियमों के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश करते थे। गुरुवार रात लोगों की सतर्कता और सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई है जिसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के अनुसार गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे शाहपुरा चौराहे से सूचना मिली कि दो युवक खुद को पुलिसकर्मी बताकर वाहन चालकों की जांच कर रहे हैं और उनसे रुपए मांग रहे हैं। सूचना मिलते ही शाहपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने पहले खुद को कोहेफिजा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी बताया लेकिन जब उनसे पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए और सख्ती से पूछताछ की गई तो उनका झूठ सामने आ गया।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमान खान और कार्तिक मिश्रा के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में अमान खान ने बताया कि वह एमपी नगर स्थित एक निजी आईटी कंपनी में एचआर के पद पर कार्यरत है जबकि कार्तिक मिश्रा एलएलबी का छात्र है। तलाशी के दौरान अमान खान की कमर से एक नकली पिस्टल भी बरामद हुई जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों को दोनों युवकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। लोगों ने उनसे पूछा कि वे किस थाने से हैं और अपना पहचान पत्र दिखाएं। जब दोनों कोई वैध पहचान नहीं दिखा सके तो लोगों ने उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में लोग यह भी सवाल करते दिखाई दे रहे हैं कि जब वे खुद बिना हेलमेट वाहन चला रहे हैं तो दूसरों को किस अधिकार से रोक रहे हैं। इसी दौरान पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद दोनों की पोल खुल गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी हेलमेट नहीं पहनने या अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन का डर दिखाकर लोगों से मौके पर ही पैसे मांगते थे। हालांकि वे किसी भी वाहन चालक का वैधानिक चालान नहीं काटते थे। पुलिस का मानना है कि दोनों लोगों को पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर अवैध वसूली कर रहे थे।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने सफाई देते हुए कहा कि वे लोगों के साथ केवल प्रैंक कर रहे थे लेकिन पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया। थाना प्रभारी के मुताबिक मौके पर कोई वीडियो शूट नहीं हो रही थी और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि दोनों केवल मजाक कर रहे थे। पुलिस इसे सुनियोजित तरीके से लोगों को धोखा देकर पैसे ऐंठने का मामला मान रही है।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। अमान खान के खिलाफ पहले से मारपीट का एक मामला दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है जबकि कार्तिक मिश्रा के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों अब तक कितने लोगों से फर्जी पुलिस बनकर वसूली कर चुके हैं और इस पूरे नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा

    भोपाल में जल गुणवत्ता पर विवाद, यूनियन कार्बाइड क्षेत्र के पानी में फीकल कोलीफॉर्म मिलने का दावा


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने दावा किया है कि फैक्ट्री के आसपास की बस्तियों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है जिससे बड़े स्तर पर स्वास्थ्य संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हालात किसी बड़े जलजनित रोग के प्रकोप में बदल सकते हैं।

    संगठनों ने बताया कि इस महीने प्रभावित इलाकों की 30 बस्तियों से पेयजल के 63 नमूने एकत्र किए गए थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का संकेत होती है कि पेयजल में मल या सीवेज का मिश्रण हो चुका है और ऐसा पानी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि जांच के नतीजे बेहद चिंताजनक हैं। उनका दावा है कि करीब 70 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए हैं और 30 में से 19 बस्तियों में लोगों तक असुरक्षित पानी पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ा तालाब से सप्लाई किए गए पानी के अधिकांश नमूने और कोलार डैम से जुड़े कुछ नमूने भी जांच में दूषित मिले हैं।

    गैस पीड़ित संगठनों का आरोप है कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके कारण दस्त उल्टी टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और स्थानीय क्लीनिकों में संक्रमण से जुड़े मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास भूजल के रासायनिक प्रदूषण को गंभीर मानते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पानी पहुंचाने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी लेकिन उनका आरोप है कि जमीनी स्तर पर आज भी स्थिति संतोषजनक नहीं है।

    भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने कहा कि वर्ष 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने सीवर लाइन और ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने तय समय में काम पूरा करने का भरोसा दिया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्षेत्रों में समस्या जस की तस बनी हुई है।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मांग की कि दूषित पेयजल आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मामले में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। साथ ही प्रभावित इलाकों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र एवं नियमित निगरानी की व्यवस्था भी लागू की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

  • हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें

    हाईकोर्ट में 31 अस्पतालों की सुनवाई ने पकड़ा नया मोड़, गलत जांच रिपोर्ट और अवैध संचालन के आरोपों से बढ़ी मुश्किलें


    इंदौर  इंदौर के 31 अस्पतालों की वैधता और स्वास्थ्य संबंधी नियमों के पालन को लेकर दायर जनहित याचिका में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश के अनुसार याचिकाकर्ता एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने अपना रिजाइंडर यानी प्रत्युत्तर अदालत में पेश किया जिसमें सीएमएचओ डॉ माधव हासानी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाती और इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों को बचाने का प्रयास किया गया है।

    रिजाइंडर में कहा गया है कि सीएमएचओ की ओर से कोर्ट में दी गई रिपोर्ट भ्रामक है और उसमें वास्तविक स्थिति को पूरी तरह सामने नहीं रखा गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि गलत तथ्यों के आधार पर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई ताकि बिना नियमों का पालन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावित हो सके।

    याचिकाकर्ता ने अपने प्रत्युत्तर के साथ कई ऐसे दस्तावेज भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जिनके बारे में दावा किया गया कि वे कूटरचित हैं। इसके अलावा कुछ अस्पतालों के ऐसे रिकॉर्ड भी पेश किए गए जिनके संबंध में कहा गया कि वे आवश्यक वैधानिक अनुमति और पंजीयन के बिना संचालित हो रहे हैं जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में अलग स्थिति दिखाई गई है। याचिका में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इससे पहले हुई सुनवाई में भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया था कि जिन 31 अस्पतालों के संबंध में मामला लंबित है उनके स्थान पर 34 संस्थानों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। साथ ही विनायक पैथोलॉजी लैब और लेडी हलीमा हॉस्पिटल को सील किए जाने से जुड़े कथित फर्जी आदेश भी रिकॉर्ड पर रखने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा कुछ अस्पतालों की ओर से नगर निगम के कथित फर्जी शपथ पत्रों के आधार पर भवन अनुमति से जुड़े दस्तावेज पेश किए जाने का दावा भी किया गया।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि जनहित याचिका दायर करने के बाद उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और हमले की कोशिशें भी हुई हैं। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

    अब ताजा सुनवाई में पेश किए गए रिजाइंडर और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई करेगी। कोर्ट यह जांच करेगी कि प्रस्तुत रिपोर्ट और रिकॉर्ड में कितनी सच्चाई है तथा यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या गलत जानकारी दी गई है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले का फैसला इंदौर के स्वास्थ्य तंत्र और निजी अस्पतालों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में अस्पतालों के संचालन और नियामकीय व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।

  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भोजशाला के समीप तय स्थल पर अदा हुई जुमे की नमाज, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम


    धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के पीछे बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की भूमि पर शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने जुमे की नमाज अदा की। यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और जिला प्रशासन व मुस्लिम पक्ष के बीच बनी सहमति के बाद की गई।

    नमाज से पहले प्रशासन ने बारिश के कारण गीली जमीन पर तिरपाल बिछवाए और पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौजूद रहे।

    निजी जमीन बताकर हिंदू पक्ष ने जताई आपत्ति
    नमाज शुरू होने से पहले स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने संबंधित भूमि को निजी बताते हुए वहां नमाज की अनुमति का विरोध किया। उनका कहना था कि वे लंबे समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।

    सूचना मिलने पर एसडीएम राजकुमार हलदर मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों से चर्चा कर आश्वासन दिया कि उनकी आपत्तियों पर नियमानुसार सुनवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

    मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही
    कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि खसरा नंबर 611 और 612 से कमाल मौला मस्जिद सीधे दिखाई देती है, इसलिए इस स्थान पर नमाज पढ़ने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि यदि अगले शुक्रवार तक अदालत का कोई नया अंतरिम या अंतिम आदेश आता है, तो उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी व्यवस्था
    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला के समीप दरगाह परिसर की निर्धारित भूमि पर प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए थे।

    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।
    आदेश के बाद धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। देर शाम मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच हुई बैठक में खसरा नंबर 611 और 612 की भूमि पर नमाज अदा कराने को लेकर सहमति बनी।

    100 से अधिक नमाजी पहुंचे
    शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे से निर्धारित स्थल पर नमाजी पहुंचने लगे। शुरुआत में 10 से 15 लोग मौजूद थे, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 100 से अधिक हो गई। इस दौरान कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी और याचिकाकर्ता भी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

  • शिवपुरी में थार का हाईवोल्टेज ड्रामा, कार-बाइक को टक्कर मारकर भागे, गड्ढे में फंसने पर पकड़े गए

    शिवपुरी में थार का हाईवोल्टेज ड्रामा, कार-बाइक को टक्कर मारकर भागे, गड्ढे में फंसने पर पकड़े गए


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में गुरुवार शाम तेज रफ्तार थार सवारों ने शहर की सड़कों पर जमकर हंगामा मचाया। आरोप है कि नशे की हालत में वाहन चला रहे दो युवकों ने पहले एक कार को टक्कर मारी और विरोध होने पर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पीछा शुरू किया तो भागते समय उन्होंने एक बाइक को भी टक्कर मार दी, जिससे दो युवक घायल हो गए। करीब आधे घंटे तक चले पीछा के बाद फिजिकल थाना पुलिस ने थार को घेरकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

    घटना शाम करीब साढ़े सात बजे माधव चौक पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लाल रंग की थार ने गौतम शर्मा की कार को टक्कर मार दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो वाहन में सवार युवकों ने धमकाते हुए मौके से भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई कि थार सवार तेज रफ्तार में शहर से निकल रहे हैं।

    सूचना मिलते ही पुलिस ने वायरलेस के जरिए अलर्ट जारी किया और शहर के विभिन्न स्थानों पर थार को रोकने का प्रयास किया। हालांकि चालक लगातार पुलिस को चकमा देता रहा। थार ग्वालियर नाका, सोनचिरैया होटल, भूत पुलिया, टूरिस्ट विलेज और करबला क्षेत्र से तेज रफ्तार में गुजरती रही। इस दौरान वाहन का एक टायर फटने के बावजूद चालक ने रफ्तार कम नहीं की।

    भागने के दौरान करबला क्षेत्र में थार ने सामने से आ रही एक बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बड़ी नोहरी निवासी वीरेंद्र शर्मा और नवाब साहब रोड निवासी गौरव शर्मा घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि वह परिवार के साथ बांकड़े मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार थार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।

    लगातार पीछा कर रही पुलिस ने आखिरकार थार को घेर लिया। भागने के दौरान वाहन अनियंत्रित होकर एक गड्ढे में फंस गया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने थार को भी जब्त कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक थार चला रहे चालक की पहचान सिरसौद निवासी 30 वर्षीय बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। वाहन मालिक चंद्रपाल चौहान भी कार में मौजूद था। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 281 और 125(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हादसे में हुए नुकसान सहित अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

  • शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की

    शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की


    शिवपुरी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक पालतू लेब्राडोर कुत्ते की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शांति नगर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पड़ोसियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके आठ माह के पालतू लेब्राडोर को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के विरोध में महिला शुक्रवार को कुत्ते का शव लेकर फिजिकल थाना पहुंची और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    महिला प्रीति परिहार के मुताबिक गुरुवार शाम उनका पालतू लेब्राडोर खाना खाने के बाद घर से बाहर निकल गया था। कुछ देर बाद वह पास स्थित एक आरओ प्लांट संचालक के घर की ओर चला गया। देर रात तक कुत्ता वापस नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि कुत्ते के साथ मारपीट की गई है।

    प्रीति परिहार का आरोप है कि आरओ प्लांट संचालक, उसके बेटे और ड्राइवर ने मिलकर लाठियों से उनके पालतू कुत्ते की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि घटना के बाद कुत्ते के शव को दूर फेंक दिया गया ताकि मामला सामने न आए।

    महिला का कहना है कि जब वह घटना की जानकारी लेने आरोपियों के घर पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट करने की कोशिश भी की गई। शुक्रवार सुबह कुत्ते का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर सीधे फिजिकल थाना पहुंचीं और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित आरओ प्लांट में रात के समय संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिजिकल थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • 2 अगस्त की प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से पहले MPPSC की तेज कार्रवाई, एक दिन में जारी की फाइनल चयन सूची

    2 अगस्त की प्रोफेसर भर्ती परीक्षा से पहले MPPSC की तेज कार्रवाई, एक दिन में जारी की फाइनल चयन सूची


    इंदौरमध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2024 के इकोनॉमिक्स विषय की अंतिम चयन सूची रिकॉर्ड समय में जारी कर दी। आयोग ने 112 पदों के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के महज 24 घंटे के भीतर चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी, जबकि सामान्य परिस्थितियों में अंतिम परिणाम घोषित होने में लगभग एक महीने का समय लग जाता है।

    आयोग के इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य 2 अगस्त को आयोजित होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 को अधिक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाना है। चयन सूची समय रहते जारी होने से वर्ष 2024 की भर्ती में चयनित अधिकांश अभ्यर्थी नई भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं होंगे। इससे उन उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेगा, जो अभी तक किसी भी भर्ती में चयनित नहीं हो सके हैं।

    एमपीपीएससी के अनुसार इकोनॉमिक्स विषय के कुल 112 पदों पर अंतिम चयन किया गया है। इनमें चयनित 111 अभ्यर्थी अब 2 अगस्त को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 में शामिल नहीं होंगे। इससे परीक्षा में अनावश्यक प्रतिस्पर्धा कम होगी और रिक्त पदों पर नए उम्मीदवारों के चयन की संभावना बढ़ेगी।

    आयोग की यह पहल भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम माना जा रहा है। इससे उन उम्मीदवारों को भी समय रहते अपनी स्थिति स्पष्ट हो गई है, जिनका चयन हो चुका है। उन्हें अब दोबारा परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी।

    एमपीपीएससी की यह कार्यशैली भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। यदि भविष्य की भर्तियों में भी इसी तरह परिणाम शीघ्र जारी किए जाते हैं, तो न केवल आयोग की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि अभ्यर्थियों का समय और संसाधन भी बचेंगे।

    2 अगस्त को होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के लिए आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। चयन सूची पहले जारी होने से परीक्षा संचालन भी अधिक सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है।

  • इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

    इंदौर के रोबोट चौराहे की बदलेगी तस्वीर, 800 पेड़ों का होगा ट्रांसप्लांट, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत


    इंदौर इंदौर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक जंक्शनों में शामिल रोबोट चौराहे की तस्वीर जल्द बदलने वाली है। लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और घंटों लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए यहां दोनों ओर चार-चार लेन का आधुनिक फ्लायओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना के लिए चौराहे के दोनों तरफ मौजूद लगभग 150-150 मीटर लंबे ग्रीन बेल्ट का उपयोग किया जाएगा। हालांकि इस फैसले से इलाके की घनी हरियाली प्रभावित होगी, लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण का कहना है कि एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा और 800 से अधिक पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

    रोबोट चौराहे का यह ग्रीन बेल्ट वर्षों की मेहनत से तैयार हुआ है। बारिश के मौसम में यह क्षेत्र मिनी फॉरेस्ट जैसा दिखाई देता है और गर्मियों में राहगीरों को छांव उपलब्ध कराता है। स्थानीय रहवासियों ने स्वयं पौधे लगाकर इस हरित क्षेत्र को विकसित किया था, जो अब बड़े और घने पेड़ों में बदल चुके हैं। फ्लायओवर निर्माण के कारण यह हरियाली अस्थायी रूप से समाप्त होती नजर आएगी, लेकिन अधिकारियों का दावा है कि पेड़ों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर संरक्षित किया जाएगा।

    दरअसल, खजराना चौराहे पर फ्लायओवर बनने के बाद वहां से गुजरने वाले वाहन बिना रुके सीधे रोबोट चौराहे तक पहुंच रहे हैं। इससे इस चौराहे पर ट्रैफिक का दबाव कई गुना बढ़ गया है। पीक आवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं और वाहन चालकों को दो से तीन बार सिग्नल बदलने का इंतजार करना पड़ता है। पहले खजराना चौराहे पर ट्रैफिक रुक जाने से दबाव बंट जाता था, लेकिन अब रोबोट चौराहा शहर का नया ट्रैफिक बॉटलनेक बन गया है।

    इंदौर विकास प्राधिकरण ने फ्लायओवर परियोजना का फिजिबिलिटी सर्वे पूरा कर लिया है और प्रारंभिक डिजाइन भी तैयार कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार खजराना फ्लायओवर की तर्ज पर यहां भी दोनों दिशाओं में चार-चार लेन का अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 150 मीटर लंबी और 30 मीटर से अधिक चौड़ी ग्रीन बेल्ट की जमीन का उपयोग किया जाएगा।

    आईडीए के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना शुरू होने से पहले सुपर कॉरिडोर स्थित प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में पेड़ों के लिए स्थान और गड्ढे तैयार किए जाएंगे। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से सभी पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा, ताकि पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

    हालांकि शहर में इससे पहले भी कई बड़े फ्लायओवर निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ प्रभावित हुए हैं। फूटी कोठी, आईटी पार्क, मूसाखेड़ी, पीपल्याहाना, बंगाली और खजराना फ्लायओवर परियोजनाओं के दौरान 10 हजार से अधिक पेड़ हटाए जा चुके हैं। जिन पेड़ों को दूसरी जगह लगाया गया था, उन्हें नए वातावरण में दोबारा विकसित होने में एक से दो वर्ष का समय लगा था।

    अब रोबोट चौराहे का यह फ्लायओवर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में अहम परियोजना माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इसके पूरा होने के बाद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और रोजाना हजारों वाहन चालकों को जाम से राहत मिलेगी।

  • भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग

    भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का दावा है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के कई इलाकों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने अपनी ओर से कराई गई पानी की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार इस महीने 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनका दावा है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ा तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने तथा कोलार डैम से आने वाले पानी के करीब 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।

    संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के निवासी लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

    वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी पेयजल में मल मिलने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने निर्धारित समय में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    हालांकि इस मामले में नगर निगम या संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में संगठनों के दावों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।