Category: Madhya Pradesh

  • राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती

    राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा के नेता और नवनिर्वाचित सांसद Mahesh Kewat ने अपनी जीत को पार्टी नेतृत्व और संगठन के भरोसे की जीत बताया है। दैनिक भास्कर को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भाजपा के पास पहले से ही पर्याप्त समर्थन मौजूद था और यदि मतदान की स्थिति बनती, तब भी पार्टी तीसरी सीट जीतने में सफल रहती।

    राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तेलंगाना प्रभारी Meenakshi Natarajan का नामांकन खारिज होने के बाद महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली। अब कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए महेश केवट ने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथ पत्र को लेकर जो विवाद सामने आया, उसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भाजपा का पक्ष मजबूत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस परिणाम स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालयों के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।

    महेश केवट ने कहा कि यदि चुनाव मतदान तक पहुंचता तो भाजपा को और अधिक समर्थन मिलता। उनका दावा था कि कई विधायक विकास और प्रदेश हित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं तथा मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों के कारण भाजपा को अतिरिक्त समर्थन हासिल होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं तथा पार्टी द्वारा दिए गए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं की क्षमता और योगदान को ध्यान में रखकर जिम्मेदारियां देता है। हाल ही में उन्हें मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया।

    महेश केवट ने यह भी कहा कि निषाद और केवट समाज से राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इससे समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है और वे इसे सम्मान के रूप में देख रहे हैं।

    बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाले महेश केवट ने कहा कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद उनकी प्राथमिकता क्षेत्रीय विकास, जल, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन और राज्य सरकार के विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

    दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। अब इस मामले पर सभी की नजरें संभावित हाईकोर्ट याचिका और उसके परिणाम पर टिकी हैं।

  • एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी

    एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। सोमवार को राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित 28 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित भी हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे और बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। सीहोर में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश हुई। यहां हवा की अधिकतम रफ्तार 61 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। मौसम विभाग ने भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं आगर-मालवा और राजगढ़ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, खरगोन, देवास, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और आगर-मालवा सहित कुल 28 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ मौसम ने अचानक करवट ली।

    तेज हवाओं की बात करें तो सीहोर के अलावा सागर और गुना में 59 किमी प्रतिघंटा, भोपाल में 57 किमी प्रतिघंटा, जबलपुर में 50 किमी प्रतिघंटा तथा नर्मदापुरम में 48 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इंदौर और अशोकनगर में 44 किमी, ग्वालियर में 43 किमी, राजगढ़ में 39 किमी तथा आगर-मालवा, रीवा, खंडवा और बड़वानी में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज आंधी दर्ज की गई।

    रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। भोपाल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में तेज हवाओं के कारण कुछ मकानों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को निंदाई और बुआई के कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश और बादलों के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    प्रदेश में केवल खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ऐसे स्थान रहे जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं शिवपुरी सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री तथा नर्मदापुरम और श्योपुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है तथा मानसून की प्रगति को भी बल मिल सकता है।

  • एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग

    एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग के कामकाज को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य में 1 सितंबर 2025 से लागू नए नियमों के बावजूद कथित रूप से 2440 बसों का पंजीयन बिना अनिवार्य टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट के किए जाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। इस पूरे प्रकरण में मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सीधे परिवहन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

    परिवहन आयुक्त उमेश जोगा द्वारा जारी पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 1 सितंबर 2025 से 5 जून 2026 के बीच प्रदेश के विभिन्न आरटीओ, डीटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में कुल 2440 बसों का पंजीयन ऐसे दस्तावेजों के आधार पर किया गया जो नए नियमों के अनुरूप नहीं थे। इनमें 1487 यात्री बसें, 745 शैक्षणिक संस्थानों की बसें, 141 स्कूल बसें और 67 प्राइवेट सर्विस व्हीकल शामिल हैं।

    मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि बस मालिक वाहन खरीदते हैं और पंजीयन के लिए विभाग के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। यदि वाहन नियमों के अनुरूप नहीं था तो उसका पंजीयन होना ही नहीं चाहिए था। ऐसे में जिम्मेदारी परिवहन अधिकारियों की बनती है, जिन्होंने नियमों के विपरीत पंजीयन की अनुमति दी।

    एसोसिएशन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने नए नियमों की जानकारी होने के बावजूद पुराने और निरस्त किए जा चुके दस्तावेजों के आधार पर बसों का पंजीयन किया। संगठन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने, सेवा से बर्खास्त करने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है।

    दरअसल, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 मार्च 2024 को अधिसूचना जारी कर 1 सितंबर 2025 से बस बॉडी निर्माण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। इसके तहत फॉर्म 22B की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी और 13 या उससे अधिक यात्री क्षमता वाली बसों के लिए मान्यता प्राप्त एजेंसी से टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बिना किसी बस का पंजीयन नहीं किया जाना था।

    परिवहन आयुक्त के पत्र के अनुसार नए नियम लागू होने के बाद भी कई कार्यालयों में पुराने फॉर्म 22B के आधार पर पंजीयन किए गए। इसी कारण अब इन पंजीयनों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मामले का एक चिंताजनक पहलू स्कूल बसों का पंजीयन भी है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 141 स्कूल बसों का भी कथित रूप से नियम विरुद्ध पंजीयन हुआ। इनमें सबसे अधिक 51 बसें भोपाल और 48 बसें इंदौर में दर्ज की गईं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस प्रकार की अनियमितता को गंभीर माना जा रहा है।

    यदि जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 387 बसों का पंजीयन इंदौर आरटीओ में हुआ। इसके बाद नीमच में 247, देवास में 220, उज्जैन में 192, आगर मालवा में 168 और भोपाल में 166 बसों का पंजीयन दर्ज किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मामला केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि प्रदेशव्यापी है।

    उधर परिवहन विभाग का कहना है कि परिवहन आयुक्त के निर्देशानुसार पूरे मामले की जांच जारी है। जिन वाहनों का पंजीयन नियमों के विपरीत पाया जाएगा, उनका पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब सभी की नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इस मामले का असर हजारों बस संचालकों, यात्रियों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ सकता है।

  • सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    सीएम मोहन यादव का पूर्व पीएम पर तंज, बोले- अर्थशास्त्री भी नहीं समझ पाए जीरो बैलेंस खाते की ताकत; महू में बनेगा साइबर रिसर्च सेंटर

    मध्यप्रदेश । भोपाल में आयोजित साइबर सिक्योरिटी और स्टेट डाटा सिक्योरिटी पर राज्य स्तरीय कंसल्टेटिव वर्कशॉप के दौरान मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh का नाम लिए बिना उन पर परोक्ष टिप्पणी भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का बड़ा जानकार माना जाता था, लेकिन जीरो बैलेंस खाते की उपयोगिता और उसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को वे भी नहीं समझ पाए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डाटा सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पहले सीमाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन डिजिटल युग में नागरिकों का डाटा और ऑनलाइन लेनदेन भी उतने ही संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों द्वारा लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में ठगी जा रही है, जो बेहद गंभीर विषय है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महू में अत्याधुनिक स्टेट डाटा साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। यह केंद्र राज्य सरकार और Military College of Telecommunication Engineering के सहयोग से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञता विकसित करना समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा केवल चर्चा का विषय नहीं बल्कि जवाबदेही का मामला है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित विभागों को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के डाटा की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    कार्यशाला में एडीजी इंटेलिजेंस साई मनोहर ने साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि पिछले 14 वर्षों में साइबर अपराधों में 77 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में हर वर्ष हजारों साइबर शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि साइबर हेल्पलाइन की क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अब तक जनता के 137 करोड़ रुपए साइबर ठगी से बचाए जा चुके हैं।

    उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंकिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या सेना का अधिकारी बताकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

    साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हालांकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी सेवा या डाटा सिस्टम पर साइबर हमला होता है तो उसका सीधा असर आम जनता और शासन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

    कार्यशाला में देशभर के साइबर विशेषज्ञों, रक्षा संस्थानों के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। उनके सुझावों के आधार पर राज्य में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।

  • कैंसर मरीजों पर बढ़ा दवा संकट, जीवनरक्षक कीमोथेरेपी इंजेक्शन की कमी; इलाज महंगा होने की आशंका

    कैंसर मरीजों पर बढ़ा दवा संकट, जीवनरक्षक कीमोथेरेपी इंजेक्शन की कमी; इलाज महंगा होने की आशंका


    मध्यप्रदेश । देश में कैंसर मरीजों के लिए चिंता बढ़ाने वाली स्थिति सामने आई है। कैंसर उपचार में व्यापक रूप से उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की कमी ने अस्पतालों और मरीजों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कैंसर के इलाज की लागत बढ़ सकती है और हजारों मरीजों का उपचार प्रभावित हो सकता है।

    नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. श्याम अग्रवाल के अनुसार पिछले दो से तीन सप्ताह से देशभर में इन दोनों दवाओं की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। ये दवाएं कैंसर उपचार की फर्स्ट लाइन थेरेपी का अहम हिस्सा हैं और फेफड़ों, मुंह, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), ओवरी, गर्भाशय और अंडकोष सहित कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं।

    भोपाल के जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. हरमीत कौर के मुताबिक दवाओं की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। कई मामलों में मरीजों को निर्धारित समय पर कीमोथेरेपी नहीं मिल पा रही है, जबकि कुछ मरीजों को दवा उपलब्ध न होने के कारण उपचार टालना पड़ रहा है। इससे इलाज की निरंतरता और सफलता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

    वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू का कहना है कि कैंसर उपचार के क्षेत्र में यह बेहद चुनौतीपूर्ण दौर है। सिस्प्लैटिन जैसी दवा पिछले कई दशकों से कैंसर उपचार की सबसे भरोसेमंद और किफायती दवाओं में शामिल रही है। इसकी मदद से हजारों रुपए में उपचार संभव हो जाता है, जबकि कई आधुनिक विकल्पों पर लाखों रुपए तक खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में इसकी कमी मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन केवल दवाएं नहीं, बल्कि कई कैंसर उपचार योजनाओं की रीढ़ मानी जाती हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओ.पी. सिंह बताते हैं कि देश में लगभग 70 प्रतिशत कीमोथेरेपी उपचार योजनाओं में सिस्प्लैटिन का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ है कि हर दस में से लगभग सात मरीज किसी न किसी रूप में इस दवा पर निर्भर रहते हैं।

    मुंबई के कामा एवं एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे के अनुसार प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाओं की कमी के कारण डॉक्टरों को उपचार की रणनीतियों में बदलाव करना पड़ रहा है। हालांकि अन्य कुछ कीमोथेरेपी दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सभी मामलों में उनका उपयोग सिस्प्लैटिन या कार्बोप्लैटिन का विकल्प नहीं बन सकता।

    दवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, कच्चे माल की उपलब्धता पर असर और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण कंपनियों को उत्पादन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने इन दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी है। रिपोर्टों के मुताबिक सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले समय में कैंसर मरीजों को इलाज के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। साथ ही अस्पतालों पर भी उपचार की निरंतरता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। फिलहाल डॉक्टरों और अस्पतालों की कोशिश है कि उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से मरीजों का उपचार जारी रखा जाए और किसी भी मरीज की चिकित्सा प्रभावित न हो।

  • राजस्थान से ATS ने पकड़ा तीसरा आरोपी, भोपाल कनेक्शन की जांच तेज; युवाओं को जोड़ने और नेटवर्क फैलाने की साजिश का आरोप

    राजस्थान से ATS ने पकड़ा तीसरा आरोपी, भोपाल कनेक्शन की जांच तेज; युवाओं को जोड़ने और नेटवर्क फैलाने की साजिश का आरोप


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने कथित आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीसरे आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार आरोपी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था और कथित नेटवर्क के संचालन में उसकी सक्रिय भागीदारी सामने आई है। अदालत में पेशी के बाद उसे 20 जून तक रिमांड पर भेज दिया गया है।

    इस मामले में पहले भोपाल के काजी कैंप क्षेत्र से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह और उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि दोनों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार फराज पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को विभिन्न ग्रुपों से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का कहना है कि आरोपी कई वर्षों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था और उसके ऑनलाइन नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है।

    सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि फराज को कथित तौर पर नई पहचान देकर सोशल मीडिया नेटवर्क बढ़ाने और युवाओं तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया था। एटीएस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि उसके संपर्क किन लोगों से थे और कथित नेटवर्क का विस्तार किन-किन क्षेत्रों तक था।

    फराज की निशानदेही पर उसके सहयोगी नईम अब्दुल्ला को उत्तर प्रदेश के देवबंद से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी पूरे नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। दोनों आरोपियों से अलग-अलग तथा आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है ताकि कथित साजिश की परतें खोली जा सकें।

    गौरतलब है कि एटीएस ने गुरुवार तड़के भोपाल के काजी कैंप इलाके में फराज के घर पर दबिश देकर उसे हिरासत में लिया था। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार फराज स्थानीय स्तर पर एक निजी क्लीनिक में काम करता था और उसने देवबंद में धार्मिक शिक्षा भी प्राप्त की थी। वहीं उसकी मुलाकात नईम अब्दुल्ला से हुई थी।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल साक्ष्य हैं। फराज का मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क देश और विदेश में किन लोगों से थे।

    इसके अलावा कथित विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है। एटीएस बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि किसी संदिग्ध आर्थिक सहायता के स्रोत का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    मामले में एटीएस, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य जांच इकाइयों के सहयोग से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • MP के 5 दिन के दौरे पर आ रही हैं राष्ट्रपति मुर्मू, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनो का करेंगी भ्रमण

    MP के 5 दिन के दौरे पर आ रही हैं राष्ट्रपति मुर्मू, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनो का करेंगी भ्रमण


    भोपाल।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) आगामी 18 से 22 जून तक मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे (Madhya Pradesh, five-day visit) पर आ रही हैं। वे यहां ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और कूनों नेशनल पार्क के भ्रमण करने के साथ बैतूल और जबलपुर में भी विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगी। इसे लेकर प्रदेश के प्रशासनिक और सुरक्षा अमले ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं।

    श्योपुर जिले में तय दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार, 21 जून दोपहर 3 बजे राष्ट्रपति वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर पहुंचेंगी. वहां से वे सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे कूनो नेशनल पार्क आएंगी. 21 जून की पूरी रात कूनो नेशनल पार्क में ही बिताएंगी. उनके विश्राम के लिए कूनो में विशेष और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. वहीं, 22 जून सुबह 10 बजे कूनो नेशनल पार्क में सुबह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रपति अगले गंतव्य के लिए प्रस्थान कर जाएंगी।


    मुख्य सचिव अनुराग जैन ने परखी सुरक्षा

    राष्ट्रपति के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हैं. बुधवार को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रोटोकॉल की बारीकी से समीक्षा की. मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा, आवागमन, संचार, स्वास्थ्य सेवाओं और वीवीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़े सभी इंतजाम समय सीमा के भीतर अचूक तरीके से पूरे किए जाएं।

    माना जा रहा है कि बोत्सवाना से भारत लाए गए शेष चीतों को राष्ट्रपति के हाथों ही कूनो के खुले जंगल में आजाद किया जा सकता है. दरअसल, जब बोत्सवाना सरकार ने भारत के लिए इन खास चीतों का चयन किया था, तब प्रतीकात्मक रूप से इन्हें खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ही सौंपा गया था. यही वजह है कि कूनो प्रबंधन और वन्यजीव विशेषज्ञ इस पल को लेकर बेहद उत्साहित हैं।


    इंदौर, ओंकारेश्वर और जबलपुर भी जाएंगी राष्ट्रपति

    अपने पांच दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भी रुख करेंगी. वे श्योपुर और ग्वालियर के अलावा इंदौर, बैतूल में स्थित प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और जबलपुर का भी भ्रमण करेंगी, जिसे लेकर इन सभी जिलों में भी सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

  • देवास में अवैध शराब पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान हंगामा: शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में दो गिरफ्तार

    देवास में अवैध शराब पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान हंगामा: शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में दो गिरफ्तार


    मध्यप्रदेश । देवास जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि अवैध शराब बिक्री की सूचना पर जांच के लिए पहुंची टीम के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, गाली-गलौज की गई और शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया। मामले में पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार, जिले में अवैध शराब कारोबार और असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक Punit Gehlod के निर्देशन, नगर पुलिस अधीक्षक Sumit Agrawal के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी निरीक्षक Shashikant Chaurasiya के नेतृत्व में की गई।

    पुलिस टीम क्षेत्र भ्रमण और सूचना संकलन के दौरान गांगरदी चौराहा क्षेत्र में पहुंची थी। यहां एक महिला संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। पुलिस के अनुसार, तलाशी लेने पर महिला के कब्जे से देशी शराब बरामद हुई। इसके बाद संबंधित महिला के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

    इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र में एक अन्य महिला द्वारा भी कथित रूप से अवैध शराब का विक्रय किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस दल मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि टीम को देखकर कुछ लोग वहां से भागने लगे। इसी बीच संबंधित महिला और उसके परिजनों ने कार्रवाई का विरोध किया।

    पुलिस के अनुसार, विरोध के दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, धक्का-मुक्की की तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और आरोपियों की तलाश शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करण सिसोदिया उर्फ संतोष शर्मा (25 वर्ष) और संतोष शर्मा (56 वर्ष), निवासी ग्राम भाड़ा पिपल्या, जिला देवास को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा है कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और शासकीय कार्य में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संबंधित तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।

  • उज्जैन में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला साइंस सेंटर: एक महीने तक फ्री एंट्री, विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू हो रहे बच्चे

    उज्जैन में शुरू हुआ मध्यप्रदेश का पहला साइंस सेंटर: एक महीने तक फ्री एंट्री, विज्ञान और अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू हो रहे बच्चे


    मध्यप्रदेश । धार्मिक और खगोलीय नगरी के रूप में पहचान रखने वाले उज्जैन को अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी एक नई पहचान मिली है। शहर में मध्यप्रदेश का पहला अत्याधुनिक साइंस सेंटर शुरू हो गया है, जो बच्चों, युवाओं, शोधार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का अनूठा केंद्र बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अप्रैल माह में इस साइंस सेंटर का लोकार्पण किया था। अब इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है और विशेष बात यह है कि पहले एक महीने तक यहां प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है।

    उज्जैन की समृद्ध खगोलीय परंपरा को ध्यान में रखते हुए साइंस सेंटर में एक अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की गई है। इस गैलरी में ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं, ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारियों को आधुनिक डिजिटल तकनीक और आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यहां आने वाले लोग न केवल अंतरिक्ष के रहस्यों को समझ रहे हैं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक विरासत और तकनीकी उपलब्धियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

    साइंस सेंटर की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसकी साइंस फन गैलरी है। यहां लगाए गए इंटरएक्टिव मॉडल बच्चों को खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझने का अवसर देते हैं। गुरुत्वाकर्षण, ऊर्जा, गति, प्रकाश, ध्वनि और संतुलन जैसे विषयों को प्रयोगात्मक तरीके से समझाया गया है। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और रुचि बढ़ रही है।

    सेंटर परिसर में विकसित साइंस पार्क भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। खुले वातावरण में स्थापित वैज्ञानिक उपकरण और मॉडल बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर देते हैं। यहां छात्र किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को वास्तविक रूप में देखकर समझ सकते हैं, जिससे उनकी अवधारणाएं और अधिक मजबूत होती हैं।

    साइंस सेंटर का आधुनिक प्लेनेटेरियम भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। अत्याधुनिक 3D-4K तकनीक से लैस यह प्लेनेटेरियम दर्शकों को अंतरिक्ष की रोमांचक यात्रा पर ले जाता है। यहां प्रदर्शित होने वाली फिल्में जैसे Voyager: The Never Ending Journey और Dawn of the Space Age अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रहों की दुनिया और मानव अंतरिक्ष अभियानों की रोचक जानकारी प्रदान करती हैं।

    साइंस सेंटर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। एक महीने की निशुल्क अवधि के बाद भी यहां आने वाले लोगों के लिए प्रवेश शुल्क किफायती रखा गया है। प्लेनेटेरियम शो के लिए सामान्य नागरिकों से 50 रुपए शुल्क लिया जाएगा, जबकि विद्यार्थियों को रियायती दरों पर सुविधा उपलब्ध होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह साइंस सेंटर प्रदेश में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। आने वाले समय में यह केंद्र विज्ञान शिक्षा, शोध और जागरूकता का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

  • बिजली के तार हटाने को लेकर पड़ोसियों में विवाद: महिला से मारपीट का आरोप, सीसीटीवी वीडियो आया सामने

    बिजली के तार हटाने को लेकर पड़ोसियों में विवाद: महिला से मारपीट का आरोप, सीसीटीवी वीडियो आया सामने


    मध्यप्रदेश । शिवपुरी शहर की मदकपुरा कॉलोनी में शनिवार दोपहर पड़ोसियों के बीच चल रहा विवाद उस समय हिंसक रूप ले बैठा, जब बिजली के तार हटाने को लेकर शुरू हुई कहासुनी मारपीट तक पहुंच गई। घटना में एक महिला के घायल होने की जानकारी सामने आई है। महिला ने पड़ोसी परिवार पर बाल पकड़कर घसीटने और सड़क पर गिराकर मारपीट करने का आरोप लगाया है। वहीं, घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार, मदकपुरा कॉलोनी निवासी शिवानी कुशवाह और उनके पड़ोसी मिथलेश लोधी के परिवार के बीच पहले से कुछ विवाद चल रहा था। शनिवार को बिजली के तार हटाने के मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआती बहस देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई और फिर दोनों पक्षों के बीच मारपीट की स्थिति बन गई।

    शिवानी कुशवाह ने शिकायत में आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान मिथलेश लोधी, उनके पति अमर लोधी और बेटे हजरत लोधी ने उनके साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, उन्हें बाल पकड़कर सड़क पर गिराया गया और घसीटते हुए पीटा गया। इस घटना में घायल होने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में भी दोनों पक्षों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की पूरी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। घटना के समय आसपास के लोग भी मौजूद थे, लेकिन विवाद बढ़ने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    देहात थाना पुलिस ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिवानी कुशवाह की रिपोर्ट पर मिथलेश लोधी, अमर लोधी और हजरत लोधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर, मिथलेश लोधी की शिकायत के आधार पर शिवानी कुशवाह और उनके पति के खिलाफ भी क्रॉस केस दर्ज किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों परिवारों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। इस ताजा घटना के बाद कॉलोनी में चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने दोनों पक्षों को कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने की हिदायत दी है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई कर रही है।