Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग

    भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग


    भोपाल। भोपाल के सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। घटना से जुड़े वीडियो में बजरंग दल के एक कार्यकर्ता को युवक को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। विवाद की वजह फिल्मी गानों पर गरबा करने और कॉलेज में बाहरी युवकों को प्रवेश देने को लेकर जताई गई आपत्ति बताई जा रही है। मामले में बजरंग दल की ओर से बिलखिरिया थाने में शिकायत आवेदन देकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि घटना के सभी पहलुओं और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
    विश्व हिंदू परिषद के मध्य भारत प्रांत मंत्री जितेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजन धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में फिल्मी और अश्लील गाने बजाने के बजाय पारंपरिक गरबा और धार्मिक गीतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर आयोजन के दौरान प्रवेश व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कार्यक्रम में ऐसे युवक भी मौजूद थे जो कॉलेज के विद्यार्थी नहीं थे।
    जितेंद्र चौहान के मुताबिक स्थानीय छात्रों से गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गाने बजाए जाने की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे थे। इसके बाद संगठन के अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। चौहान ने स्पष्ट किया कि वीडियो में जिस युवक को थप्पड़ मारे जाते दिखाई दे रहे हैं वह बजरंग दल का कार्यकर्ता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ भी बदसलूकी और मारपीट की गई। ऐसे में वीडियो में दिखाई देने वाली घटना और संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच किए जाने की जरूरत है।
    बिलखिरिया थाना प्रभारी को दिए गए शिकायत आवेदन में पुष्पराज यादव ने खुद को भोपाल जिला बजरंग दल का प्रमुख बताया है। आवेदन के मुताबिक 16 अक्टूबर की रात करीब साढ़े आठ बजे उन्हें सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गानों पर डांस होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह अपने साथियों शिवम कुशवाह और यश द्विवेदी के साथ कॉलेज पहुंचे। शिकायत में शिवम कुशवाह को मां कंकाली प्रखंड मंत्री और यश द्विवेदी को बजरंग दल का जिला संयोजक बताया गया है।
    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कॉलेज परिसर में मुस्लिम समुदाय के दो से अधिक युवक मौजूद थे। आवेदन के अनुसार जब कार्यकर्ताओं ने फिल्मी गाने बंद करने और आयोजन के स्वरूप पर आपत्ति जताई तो वहां मौजूद युवकों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में कॉलेज फैकल्टी के नीरज गुप्ता पर बाउंसर बुलाकर कार्यकर्ताओं को बाहर निकलवाने की धमकी देने और संबंधित युवकों का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में समीर आलम समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    जितेंद्र चौहान ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में होने वाले गरबा आयोजनों में धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने आयोजकों से पारंपरिक गीतों के इस्तेमाल और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की अपील की। साथ ही कहा कि संगठन ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग करेगा और जरूरत पड़ने पर विरोध भी करेगा। फिलहाल इस पूरे मामले में युवक को थप्पड़ मारने की घटना और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे

    भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के बाद भी दुकानों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। करीब 900 दुकानों वाले इस व्यस्त बाजार में कपड़े और ज्वेलरी की दुकानों के बीच छोले-भटूरे की दुकानों में भट्टियां सुलग रही हैं। इन दुकानों में ग्राहकों के लिए नाश्ता तैयार किया जा रहा है लेकिन सुरक्षा इंतजामों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जांच के दौरान कुछ दुकानों में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। वहीं अग्निशामक यंत्र होने के बावजूद कर्मचारियों को उनका इस्तेमाल करने की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है।
    रिपोर्ट के मुताबिक जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी उसके आसपास भी इसी तरह की दुकानें संचालित हो रही हैं। एक दुकान से करीब 50 फीट की दूरी पर तीन अन्य छोले-भटूरे की दुकानें होने की जानकारी सामने आई है। यहां छोटे किचन में भटूरे तले जा रहे हैं। दुकानों के आसपास कपड़े और अन्य सामान की मौजूदगी के कारण आग लगने की स्थिति में नुकसान बढ़ने की आशंका है। बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहकों की आवाजाही के कारण सुरक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
    जांच में कलकत्ता छोले-भटूरे की दुकान पर कई कमियां सामने आईं। यहां जिस जगह पर छोले तैयार किए जा रहे थे उसके ऊपर धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी हुई थी। दुकान में आग बुझाने का यंत्र मौजूद था लेकिन उसे चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को नहीं होने की बात बताई गई। आग लगने की स्थिति में केवल अग्निशामक यंत्र का मौजूद होना पर्याप्त नहीं है बल्कि कर्मचारियों को उसका सही इस्तेमाल करना भी आना चाहिए।
    देहली छोले-भटूरे की दुकान में किचन बेहद छोटा बताया गया है। यहां दो कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तल पाते हैं। ऐसी जगह पर आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा बिजली के तार भी खुले मिले। पंजाब छोले-भटूरे की दुकान में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं होने की जानकारी सामने आई। वहां भी बिजली के खुले तार और कोने में रखे अग्निशामक यंत्र पाए गए।
    फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानों में अग्निशामक यंत्र और व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयुक्त गैस सिलेंडर होना चाहिए। उन्होंने जांच में भट्टियां मिलने और बिजली सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र नहीं होने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार कुछ दुकानों में कर्मचारियों के बैठने और काम करने की व्यवस्था भी सुरक्षित नहीं पाई गई। इन कमियों को देखते हुए संबंधित दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
    न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि 8 अक्टूबर को बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में लगी आग आसपास की दुकानों और रेहड़ियों तक फैल गई थी। आग की चपेट में पांच अन्य बड़ी दुकानों और 12 से अधिक रेहड़ियों के आने की खबर थी। इस घटना में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया। दुकानदारों और कर्मचारियों को जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा था और कुछ लोगों को चोटें भी आई थीं।
    पुलिस ने इस मामले में दुकान संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। शुरुआती जांच के मुताबिक भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गई थीं। नगर निगम आग से बचाव के इंतजामों की जांच कर रहा है। इस कार्रवाई के बीच सवाल उठ रहा है कि बाजार में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन पहले क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया।
    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आ चुके हैं। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में आग लगने के दौरान इसके काम नहीं करने की बात सामने आई। सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे। बैरागढ़ के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में पहले हुए बड़े अग्निकांड के बाद लगाए गए उपकरणों की देखरेख पर भी चिंता जताई गई है।
    न्यू मार्केट की मौजूदा स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हादसों के बाद ही सुरक्षा जांच तेज होती है। व्यस्त बाजारों में नियमित निरीक्षण खुले बिजली के तारों को दुरुस्त करना कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण देना और अग्निशामक उपकरणों को चालू हालत में रखना बेहद जरूरी है। प्रशासन की ओर से दुकानों की शिफ्टिंग और जांच की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

  • बैरागढ़ में मासूम की हत्या पर उबाल, आरोपी को सख्त सजा दिलाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, मुख्य मार्ग पर लगा जाम

    बैरागढ़ में मासूम की हत्या पर उबाल, आरोपी को सख्त सजा दिलाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, मुख्य मार्ग पर लगा जाम


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के मामले ने लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। शनिवार को बड़ी संख्या में लोग बैरागढ़ थाने के बाहर जमा हुए और आरोपी मोबिन को उनके हवाले करने के साथ उसे फांसी देने की मांग करने लगे। प्रदर्शन के दौरान लोगों का गुस्सा बढ़ता गया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने थाने के भीतर जाने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने थाने के गेट बंद कर दिए और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने और हालात नियंत्रित करने में जुटे रहे।
    बच्ची की हत्या की खबर सामने आने के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मासूम के साथ हुई घटना बेहद गंभीर है और आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर लोग थाने के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग पर जाम लग गया जिससे आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए स्थिति पर नजर रखी। लोग आरोपी को उनके हवाले करने की मांग पर अड़े रहे जबकि पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की।
    जानकारी के मुताबिक बैरागढ़ क्षेत्र में रहने वाली 12 वर्षीय बच्ची गुरुवार रात घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की। शुक्रवार को बच्ची का शव कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक सुनसान खंडहर में मिला। शव मिलने की खबर से इलाके में सनसनी फैल गई। बच्ची कबाड़ बीनने का काम करती थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास के लोगों से पूछताछ की।
    जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। परिजनों से मिली जानकारी और अन्य शुरुआती तथ्यों के आधार पर 23 वर्षीय मोबिन को हिरासत में लिया गया। खबर के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में उसके द्वारा अपराध स्वीकार करने की बात सामने आई है। हालांकि मामले में आरोपों की पुष्टि और अपराध से जुड़े तथ्यों को स्थापित करना पुलिस की जांच तथा कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। पुलिस साक्ष्य जुटाने और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में लगी है।
    घटना के बाद लोगों में बच्ची के लिए न्याय की मांग तेज हो गई है। शनिवार को थाने के बाहर जमा भीड़ ने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने थाने के गेट तक पहुंचकर अंदर जाने का प्रयास किया। भीड़ की संख्या बढ़ने और तनाव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया। अधिकारियों की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना न हो और कानून व्यवस्था कायम रहे।
    इस मामले में बच्ची के शव की बरामदगी के बाद सामने आई परिस्थितियों ने भी लोगों को विचलित किया है। शुरुआती खबरों के मुताबिक बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था और उसके शरीर पर चोट से जुड़े कुछ संकेत मिले थे। इन तथ्यों की विस्तृत पुष्टि जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगी। पुलिस के लिए अब जरूरी है कि घटना से जुड़े सभी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
    बैरागढ़ में जारी प्रदर्शन के बीच लोगों की मांग है कि बच्ची को जल्द न्याय मिले और आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। हालांकि किसी भी आरोपी को सजा देने का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस इलाके की स्थिति पर नजर रखे हुए है। इस संवेदनशील मामले में आगे की जांच और प्रशासन की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे

    MP: बैतूल जिले के भीमपुर में दूध और केला के सेवन के बाद अचानक बीमार पड़े 32 बच्चे


    बैतूल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले (Betul district) में दूध और केला (Milk and Banana) का सेवन करने के बाद 32 बच्चों की तबीयत खराब (32 Children ill) हो गई है. बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. परिजनों का कहना है कि उनके बच्चों को परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिया गया था।

    मामला बैतूल के भीमपुर क्षेत्र का है जहां एक साथ 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया. दूध और केले का सेवन करने के बाद बच्चों को अचानक उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद सभी को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।

    भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत चिखली के ग्राम भाडरी का है. यहां परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले,.बरबटी के बीज दिया गया था. इनके सेवन के बाद 32 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।

    SDM और CMHO सहित सीनियर अधिकारी भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और बच्चों के उपचार की जानकारी ली. राहत की खबर यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है. बैतूल सीएमएचओ संजीव शर्मा का कहना है कि परिवार एजुकेशन सोसायटी की कुटीर संस्था से मिला दूध, केले, बरबटी के बीज दिए गए थे। इसके सेवन के बाद बच्चों को उल्टियां होने लगीं, उन्हें भी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया है. फिलहाल सभी की स्थिति स्थिर है और दूध का सैंपल ले लिया गया है।

    अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे सुमरत कास्दे का कहना है कि उसका बच्चा कुटीर गया था, जहां उसे दूध और केला दिया गया था. इसके बाद स्कूल गया, वहां उसने कुछ नहीं खाया और स्कूल से पता चला कि बच्चों को उल्टियां हो रही हैं तो उन्हें अस्पताल लेकर आए।

  • MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम

    MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम


    उज्जैन। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। उज्जैन के पास माकड़ोन फंटे पर बाइक सवारों को बचाने के प्रयास में शर्मा ट्रैवल्स की बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में उतर गई। हादसे में दो बाइक सवारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    वहीं, मैहर जिले में शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे एक ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इससे ट्रक बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़ी बस से टकरा गया। हादसे में चालक की मौत हो गई।

    उज्जैन में बाइक सवारों को बचाने में खाई में उतरी बस
    जानकारी के अनुसार, बस क्रमांक MP-70-P-0161 आगर से उज्जैन आ रही थी। बस माकड़ोन फंटे के पास पहुंची, तभी उज्जैन से माकड़ोन की ओर जा रहे एक बाइक सवार ने अचानक मोड़ ले लिया। उसे बचाने के प्रयास में बस बाइक से टकरा गई और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद बस सड़क किनारे खाई में जा गिरी। इस दौरान एक अन्य बाइक सवार भी बस की चपेट में आ गया।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही घोंसला क्षेत्र के ग्रामीण और राघवी थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। घायलों को एंबुलेंस की मदद से घट्टिया अस्पताल पहुंचाया गया।

    दो बाइक सवारों की मौके पर मौत, कई यात्री घायल
    हादसे में जान गंवाने वाले बाइक सवारों की पहचान महेश, पिता बापू, और मोहन, पिता मांगीलाल, के रूप में हुई है। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गोपाल सिंह नाम का एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुआ है। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। राघवी थाना पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

    मैहर में चालक की तबीयत बिगड़ी, खड़ी बस से टकराया ट्रक
    दूसरा हादसा शुक्रवार शाम मैहर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में हुआ। सीमेंट फैक्ट्री से क्लिंकर लेकर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जा रहा ट्रक रामवन पथ गमन रोड पर उमरी पैला के पास पहुंचा था। इसी दौरान चालक नीरज सिंह (33) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इससे वाहन पर से उसका नियंत्रण हट गया और ट्रक सड़क किनारे खड़ी बस से जा टकराया। हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई। मृतक उत्तर प्रदेश के रायबरेली का निवासी था।

    टायर पंचर होने के कारण सड़क किनारे खड़ी थी बस
    जानकारी के मुताबिक, बस डिंडौरी की ओर जा रही थी। उसमें सवार यात्री चित्रकूट से आंखों का इलाज कराकर लौट रहे थे। रास्ते में बस का टायर पंचर हो गया था, जिसके कारण चालक ने उसे सड़क किनारे रोक दिया था। टायर बदले जाने के दौरान ही बेकाबू ट्रक बस से टकरा गया।

    दोनों हादसों में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। उज्जैन में बस हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, जबकि मैहर में ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ने को दुर्घटना की वजह बताया जा रहा है।

  • MP में दो चक्रवात से बदलेगा मौसम, आज 21 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    MP में दो चक्रवात से बदलेगा मौसम, आज 21 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून भले ही विदा हो चुका है, लेकिन सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण बारिश का दौर जारी है। पिछले दो दिनों से ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम केंद्र भोपाल ने शनिवार को प्रदेश के 21 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, रतलाम, झाबुआ, धार, आलीराजपुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश हो सकती है।

    दो चक्रवाती परिसंचरण से चार दिन तक बदला रहेगा मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग के जिलों में मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    18 और 19 अक्टूबर को नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सीधी, मऊगंज, सिंगरौली, सिवनी और बालाघाट में बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, 20 अक्टूबर से मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने लगेगी। इसके बाद प्रदेश में तेज बारिश की संभावना कम हो जाएगी।

    उज्जैन और चंबल संभाग के जिलों में पहले भी हुई बारिश

    इससे पहले गुरुवार को चंबल और उज्जैन संभाग के पांच जिलों—श्योपुर, भिंड, मुरैना, नीमच और मंदसौर में बारिश दर्ज की गई थी। शुक्रवार को भी कई इलाकों में मौसम बदला रहा। बारिश के बीच प्रदेश के कुछ जिलों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

    अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री सेल्सियस रहा। छिंदवाड़ा में 17.4 डिग्री, इंदौर में 17.6 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18 डिग्री और बैतूल में 18.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इससे रात और सुबह के समय ठंडक महसूस होने लगी है।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी, लेकिन मौसम प्रणालियों की सक्रियता के कारण प्रदेश में एक बार फिर बारिश होने लगी है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के जिलों में भी आंधी और बारिश का असर देखने को मिल रहा है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप नजर आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप निकलने लगी थी, लेकिन अब कई जिलों में बारिश हो रही है और रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिनों तक सक्रिय रहा।

    प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच का 95.9 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में औसत के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम बारिश दर्ज की गई।

    क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसूनी बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो गया है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    इस तरह प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का वितरण असमान रहा। अब मानसून की विदाई के बाद भी सक्रिय मौसमी प्रणालियों के चलते अगले कुछ दिनों तक कई जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है।

  • टीकमगढ़ में मृत गाय को लोडर से बांधकर सड़क पर घसीटा, घटना का वीडियो वायरल होने से लोगों में आक्रोश

    टीकमगढ़ में मृत गाय को लोडर से बांधकर सड़क पर घसीटा, घटना का वीडियो वायरल होने से लोगों में आक्रोश

    मध्य प्रदेश: के टीकमगढ़ जिले में मृत गाय के शव के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दो लोग मृत गाय को लोडर वाहन से बांधकर सड़क पर घसीटते दिखाई दे रहे हैं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि, घटना में शामिल लोगों की पहचान और इस मामले में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    बताया जा रहा है कि यह घटना टीकमगढ़ शहर के सागर हाईवे मार्ग पर स्थित नए बस स्टैंड के बायपास रोड की है। वायरल वीडियो में एक लोडर वाहन पर सवार लोग मृत गाय के शव को वाहन से बांधकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में वाहन तेज गति से आगे बढ़ता नजर आता है और गाय का शव सड़क पर घिसटता हुआ दिखाई देता है।

    घटना से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद मृत पशु के साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर नाराजगी की बात कही जा रही है। मृत गाय के शव को इस तरह सड़क पर घसीटकर ले जाने की परिस्थितियां क्या थीं और ऐसा करने के पीछे संबंधित लोगों का उद्देश्य क्या था, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

    इस घटना ने मृत पशुओं के निपटान और उनके शवों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के तरीके पर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी पशु की मृत्यु के बाद उसके शव को उचित तरीके से हटाना जरूरी होता है, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर असुविधा न हो और स्वच्छता संबंधी समस्याएं पैदा न हों। लेकिन वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा तरीका पशु के शव के प्रति असंवेदनशील व्यवहार को दर्शाता है।

    घटना का स्थान शहर के बायपास मार्ग पर बताया जा रहा है। ऐसे में वीडियो के आधार पर संबंधित वाहन और उसमें सवार लोगों की पहचान करना जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। यदि आसपास के क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध हैं, तो उनकी फुटेज से भी घटना के समय, वाहन की आवाजाही और संबंधित व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि, ऐसी किसी जांच या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

    इस मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि मृत गाय का शव कहां से लाया गया था और उसे किस स्थान पर ले जाया जा रहा था। वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों ने शव को वाहन से बांधकर ले जाने का फैसला क्यों किया, इस सवाल का जवाब भी संबंधित व्यक्तियों की पहचान और पूछताछ के बाद ही सामने आ सकता है।

    पशुओं के प्रति क्रूरता से जुड़े मामलों में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का प्रश्न परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है। इस मामले में भी किसी कानूनी कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

    टीकमगढ़ की इस घटना ने मृत गाय के शव को ले जाने के तरीके को लेकर चिंता पैदा की है। अब मामले में संबंधित लोगों की पहचान, घटना की वास्तविक परिस्थितियों और प्रशासन की संभावित कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    दतिया विधायक घनश्याम सिंह को हाईकोर्ट का नोटिस, 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप से बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश: की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं में आ गई है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने के आरोप से जुड़े प्रकरण में ग्वालियर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह कदम इस मामले में दायर याचिका पर उठाया है। नोटिस सामने आने के बाद दतिया में संभावित उपचुनाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि फिलहाल उपचुनाव की स्थिति बनने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    यह मामला वर्ष 1991 में कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस प्रदर्शन के दौरान घनश्याम सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान नामांकन पत्र दाखिल करते समय घनश्याम सिंह ने इस आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं किया था।

    इसी आरोप को आधार बनाकर दीपक बेलपत्री सहित कुछ लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में नामांकन पत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। अब अदालत ने विधायक को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। फिलहाल नोटिस जारी होने का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

    इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अवधेश नायक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से नोटिस मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे जरूरत से ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। नायक ने इस मामले को लेकर राजेंद्र भारती की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम के पीछे भारती की भूमिका हो सकती है।

    अवधेश नायक ने राजेंद्र भारती पर कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के माध्यम से राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 में उनका टिकट कटने के पीछे भी भारती की भूमिका थी। ये आरोप नायक की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या राजेंद्र भारती की इस मामले पर प्रतिक्रिया का विवरण नहीं है।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण भी यह मामला चर्चा में है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, जबकि कांग्रेस ने दोनों चुनावों में जीत दर्ज की थी। ऐसे में विधायक को जारी हुए नोटिस के बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अब सबसे अहम सवाल यह है कि पुराने आपराधिक मामले और नामांकन पत्र में जानकारी नहीं देने के आरोप पर अदालत आगे क्या रुख अपनाती है। यदि कानूनी कार्यवाही में कोई ऐसा आदेश आता है जिसका विधानसभा सदस्यता पर प्रभाव पड़ता हो, तो उसके राजनीतिक परिणाम भी हो सकते हैं। हालांकि, केवल नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती और न ही अपने आप उपचुनाव की स्थिति बनती है।

    फिलहाल ग्वालियर हाईकोर्ट के नोटिस के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार है। विधायक का जवाब, याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत का विचार और आगे आने वाले आदेश ही तय करेंगे कि इस प्रकरण का दतिया की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • भोपाल के बैरागढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या, कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला शव

    भोपाल के बैरागढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या, कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे खंडहर में मिला शव

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है। गुरुवार रात से लापता बच्ची का शव शुक्रवार को कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित एक खंडहरनुमा इमारत से बरामद किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। बच्ची की मौत की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्ची गुरुवार रात करीब आठ बजे किसी काम से अपने घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। काफी समय बीतने के बावजूद जब परिजनों को बच्ची का कोई पता नहीं चला, तो उन्होंने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की। आसपास के इलाकों में खोजबीन करने के साथ रिश्तेदारों से भी संपर्क किया गया, लेकिन बच्ची के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

    परिजनों की ओर से तलाश किए जाने के बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला, तो वे देर रात बैरागढ़ थाने पहुंचे और उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद बच्ची की तलाश शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी तलाश के साथ उससे जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया।

    शुक्रवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे बने एक खंडहर में बच्ची का शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही बैरागढ़ थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। शव मिलने की जानकारी सामने आने के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और मामले की जांच के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    घटनास्थल पर एफएसएल की विशेष टीम को भी बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने खंडहर और उसके आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट समेत अन्य संभावित साक्ष्य एकत्र किए। इन साक्ष्यों की जांच से बच्ची की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और घटना में शामिल व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि घर से निकलने के बाद बच्ची कहां गई और कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित खंडहर तक कैसे पहुंची। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बच्ची के साथ कोई अन्य व्यक्ति था या नहीं। फिलहाल घटना से जुड़े इन पहलुओं पर जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

    पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। इसके साथ ही बच्ची के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है, ताकि उसके घर से निकलने के बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध साक्ष्यों और लोगों से मिलने वाली जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

    बच्ची का शव खंडहर में मिलने के बाद इलाके में चिंता का माहौल है। पुलिस का प्रयास है कि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाया जाए कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस और एफएसएल की टीम मामले की जांच में जुटी हैं। बच्ची की मौत से जुड़े कारणों, घटनास्थल तक पहुंचने की परिस्थितियों और संभावित आरोपी की पहचान को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।

  • मेरठ सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज

    मेरठ सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सांप कांड में अदालत ने अमित कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव से जुड़े इस मामले में दोनों को हत्या का दोषी पाया गया। अपर जिला जज, कोर्ट संख्या-12 ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इस प्रकरण में शुरुआत में अमित की मौत को सांप के काटने से हुई घटना माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई।

    यह घटना 12 अप्रैल 2025 की है। उस दिन अमित कश्यप अपने घर के अंदर मृत पाया गया था। उसके शव के पास एक सांप भी मौजूद था। घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया और अमित के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती परिस्थितियों में आशंका जताई गई कि अमित की मौत सर्पदंश के कारण हुई होगी।

    हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले को संभावित हत्या के रूप में लेकर जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर अमित की पत्नी रविता और गांव के ही युवक अमरदीप के संबंधों की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध थे और अमरदीप का अमित के घर आना-जाना लगा रहता था। वह अमित के साथ काम भी करता था।

    जांच में आरोप लगाया गया कि रविता और अमरदीप ने मिलकर अमित की हत्या की योजना बनाई थी। इसके बाद उसकी मौत को सांप के काटने से हुई घटना के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस ने इस मामले में उस व्यक्ति से भी पूछताछ की, जिस पर सांप उपलब्ध कराने का आरोप था। जांच के दौरान उसे सरकारी गवाह बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष ऐसे साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश और वारदात में शामिल होने का मामला रखा गया।

    अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार किया। सात अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को हत्या का दोषी ठहराया गया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाए जाने की जानकारी सामने आई। इस फैसले के साथ ही अमित कश्यप की हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।

    मेरठ में यह मामला उस चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड की याद भी दिला रहा है, जिसमें सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को भी फांसी की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई थी। दोनों मामलों में पति की हत्या के आरोप में पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी ठहराए जाने की समानता चर्चा का विषय बनी है।

    अमित कश्यप हत्याकांड में सबसे अहम मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट रही, जिसने शुरुआती तौर पर दिखाई दे रही सर्पदंश की आशंका को बदल दिया। इसके बाद पुलिस की जांच, आरोपियों के संबंधों और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा। अदालत के फैसले के बाद अब इस प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।