Category: Madhya Pradesh

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने भोपाल की निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह याचिका ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई है।

    ट्विशा के पिता ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई भोपाल के बजाय दिल्ली में कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। साथ ही, याचिका पर आगे विचार किए जाने तक भोपाल की अदालत में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई का स्थान बदलने को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला उनके परिवार की ओर से घटना पर सवाल उठाए जाने और निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने के बाद चर्चा में आया था। ट्विशा पूर्व मॉडल और अभिनेत्री थीं। उन्होंने मॉडलिंग के अलावा तेलुगु फिल्मों में भी काम किया था। बाद में उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने लगीं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। दोनों की शादी दिसंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद 12 मई को ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मायके पक्ष ने घटना की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    ट्विशा के परिजनों ने उनके पति समर्थ सिंह और ससुराल के अन्य सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उनके पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया था कि शादी से पहले ही समर्थ का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान उनकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। परिवार की ओर से समर्थ की मां और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर भी दहेज के लिए ट्विशा को परेशान करने का आरोप लगाया गया है।

    मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के सिर, कान और हाथ पर चोट के निशान पाए गए थे। रिपोर्ट में इन चोटों के मौत से पहले लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, चोटों की परिस्थितियों और मौत से उनके संबंध को लेकर जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जमानत याचिका में गिरिबाला सिंह की ओर से बहू के व्यवहार और कथित नशे की आदत को लेकर आरोप लगाए गए थे। आवेदन में दावा किया गया था कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी और नशा नहीं मिलने पर उनका व्यवहार असामान्य हो जाता था। ये दावे जमानत आवेदन में लगाए गए आरोप हैं, इन्हें अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

    ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने भी परिवार की स्थिति को लेकर जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, ट्विशा काफी परेशान थीं और उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए नोएडा लौटने की इच्छा जताई थी।
    अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस और भोपाल की अदालत में सुनवाई पर लगी अंतरिम रोक के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। दिल्ली में सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इस बीच, ट्विशा की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार जारी रहेगा।

  • MP में पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई होगी तेज, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, दोषियों को सजा दिलाने पर सरकार का जोर

    MP में पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई होगी तेज, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, दोषियों को सजा दिलाने पर सरकार का जोर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेपर लीक नकल और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए भोपाल इंदौर ग्वालियर और जबलपुर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। इन अदालतों में चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल के साथ मध्य प्रदेश परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए अलग फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता मजबूत करना और मेहनत के दम पर परीक्षा देने वाले युवाओं के हितों की रक्षा करना है।
    राज्य सरकार के अनुसार यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद उठाया गया है। परीक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में अक्सर जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबी होने से अभ्यर्थियों के मन में निष्पक्ष चयन को लेकर सवाल उठते हैं। नई व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने और कानूनी कार्रवाई में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है लेकिन हर मामले में इस अवधि के भीतर फैसला आने की गारंटी नहीं है। सुनवाई का समय मामले की परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया पर भी निर्भर करेगा।
    इन चार अदालतों के लिए अलग अलग जिलों का दायित्व तय किया गया है। भोपाल स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट भोपाल के साथ सीहोर रायसेन बैतूल नर्मदापुरम हरदा राजगढ़ और विदिशा जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इंदौर की अदालत इंदौर के अलावा धार रतलाम झाबुआ मंदसौर उज्जैन और देवास सहित मालवा निमाड़ क्षेत्र के मामलों को देखेगी। ग्वालियर स्थित कोर्ट ग्वालियर भिंड मुरैना शिवपुरी गुना दतिया अशोकनगर और टीकमगढ़ जैसे जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। वहीं जबलपुर की अदालत को जबलपुर सागर रीवा सतना छिंदवाड़ा शहडोल और महाकौशल तथा बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
    मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए राज्य शासन ने विशेष अभियोजकों की नियुक्ति भी की है। इनकी जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने गवाहों से संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने और मामलों की पैरवी पर विशेष ध्यान देने की होगी। इसके साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित किए गए हैं। इन दलों के जरिए परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों की जांच को व्यवस्थित करने और जरूरी साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया जाएगा। जांच और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल से अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया को गति देने की उम्मीद है।
    पेपर लीक और नकल जैसी घटनाएं केवल परीक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करतीं बल्कि उन लाखों युवाओं के भविष्य पर भी असर डालती हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय और संसाधन लगाते हैं। यदि परीक्षा से जुड़े अपराधों की समय पर जांच और सुनवाई होती है तो निष्पक्ष चयन प्रक्रिया में लोगों का भरोसा मजबूत हो सकता है। नई व्यवस्था में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कानून और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। केवल आरोप लगने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
    मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल का वास्तविक असर अदालतों में मामलों की सुनवाई की गति और जांच की गुणवत्ता से सामने आएगा। विशेष अदालतों और अभियोजन व्यवस्था के माध्यम से सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने तथा अनियमितताओं के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई को मजबूत करना चाहती है। अब इन अदालतों के कामकाज और निर्धारित समयसीमा के पालन पर नजर रहेगी।

  • 500 साल पुरानी आस्था का चमत्कारी धाम, जहां ज्वाला से प्रकट हुईं मां अष्टभुजा, नवरात्रि में उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब

    500 साल पुरानी आस्था का चमत्कारी धाम, जहां ज्वाला से प्रकट हुईं मां अष्टभुजा, नवरात्रि में उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब


    मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी में स्थित मां अष्टभुजा का धाम करीब 500 वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर की घंटियों की ध्वनि और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस धाम का इतिहास एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसे श्रद्धालु मां आदिशक्ति के प्राकट्य की कथा के रूप में याद करते हैं। कभी घने जंगलों और सुनसान पगडंडियों के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका आज मां अष्टभुजा की आराधना के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।
    स्थानीय लोकश्रुति के अनुसार लगभग पांच सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र के घने जंगल में अचानक आग जैसी प्रचंड ज्वाला दिखाई दी थी। उसी समय लालगंज का एक यादव वहां से गुजर रहा था। जंगल को जलने से बचाने की भावना से उसने अपने लोटे का पानी उस ज्वाला पर डाल दिया। मान्यता है कि पानी अर्पित करते ही ज्वाला शांत हो गई और वहां पिंडी स्वरूप प्रकट हुआ। श्रद्धालु इसी घटना को मां अष्टभुजा के प्राकट्य से जोड़ते हैं। हालांकि यह कथा स्थानीय जनविश्वास और परंपरा का हिस्सा है जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है। इसी मान्यता ने इस स्थान को धार्मिक पहचान दिलाई और समय के साथ यहां मंदिर विकसित हुआ।
    नईगढ़ी के नाम से जुड़ी एक अन्य रोचक लोककथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि उस समय सेंगर वंश के राजा प्रताप सिंह इस क्षेत्र में गढ़ी बनवा रहे थे। मान्यता के अनुसार माता ने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर इस भूमि को अपनी आराधना के लिए छोड़ने का संदेश दिया। कथा के मुताबिक माता ने राजा को एक श्वेत खरगोश और श्यामवर्णी श्वान का संकेत दिया था। सुबह राजा ने वैसा ही दृश्य देखा और उस स्थान पर नई गढ़ी बसाने का निर्णय लिया। लोकविश्वास में इसी घटना को नईगढ़ी नगर के नामकरण से जोड़ा जाता है। मंदिर के पास बहने वाली देवलहा नदी और देवलहा जलप्रपात भी इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं।
    वर्तमान मंदिर के निर्माण का श्रेय करीब 135 वर्ष पहले दुवगवां निवासी साधुराम कोड़रिया को दिया जाता है। बाद के वर्षों में मोतीलाल पांडेय सुमेदा और पटवारी राजेंद्र धर द्विवेदी हटवा सहित कई श्रद्धालुओं ने मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार में योगदान दिया। समय के साथ यह धाम केवल स्थानीय लोगों का पूजा स्थल नहीं रहा बल्कि आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया। सोमवार और गुरुवार को यहां विशेष रूप से भक्त पहुंचते हैं। नवरात्रि और आषाढ़ तथा श्रावण में आयोजित हरियाली पुजाई के दौरान मंदिर परिसर में विशेष रौनक रहती है।
    मां अष्टभुजा के दरबार से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना माता के आशीर्वाद से पूरी होती है। यहां मुंडन संस्कार कर्ण छेदन सत्यनारायण कथा भजन कीर्तन और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। कुछ भक्त अपनी मनौती पूरी होने पर पारंपरिक रूप से विशेष अर्पण भी करते हैं। इन मान्यताओं को श्रद्धालु अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं। मंदिर के आसपास लगने वाली दुकानों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और मेले के समय क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।
    श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से धर्मशाला पेयजल और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेले के दौरान भीड़ को व्यवस्थित करने और दर्शन को सुगम बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। करीब पांच शताब्दियों से चली आ रही लोकआस्था और लगभग 135 वर्ष पुराने मंदिर की परंपरा ने नईगढ़ी धाम को क्षेत्र की विशिष्ट धार्मिक पहचान दी है। नवरात्रि में यहां पहुंचने वाले भक्त माता के दर्शन कर सुख समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।

  • आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन

    आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार देर शाम केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रभावित आदिवासी परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। वह पहले भी इस मामले पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि मौके पर उन्होंने बच्चों को परेशान होते और महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा था। अब मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
    जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने अपने नुकसान को लेकर सवाल उठाए और मुआवजे की मांग की। परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं और मकानों के साथ फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन पर परिवारों की नजर बनी हुई है।
    बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर के. बालागुरु रात में कोनझीर पहुंचे और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को बस के जरिए वापस उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को परेशान नहीं किया जाए और जहां लोग स्थापित हैं वहां उनके साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए। हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कार्रवाई की परिस्थितियों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।
    कोसमी गांव की घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन ही नहीं बल्कि वास्तविक राहत भी मिले। उनके अनुसार मकान और फसलें प्रभावित होने से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हुई हैं। ऐसे में मुआवजे और जमीन के पट्टों से संबंधित मांगों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
    इधर कोसमी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च भी शुरू किया है। जानकारी के अनुसार ये परिवार शुक्रवार शाम तक राजधानी पहुंच सकते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मकान तोड़े जाने के मामले में न्याय मिले और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। मुख्यमंत्री की ओर से जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित परिवारों को किस तरह राहत मिलती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक

    भोपाल में गरबा की धूम, सीएम मोहन यादव ने दिया संस्कृति और संस्कारों को सहेजने का संदेश, नवरात्रि में दिखी भक्ति की झलक


    भोपाल । भोपाल के जंबूरी मैदान में गुरुवार को भोजपाल गरबा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान गरबा की आकर्षक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मुख्यमंत्री ने भजन गायन भी किया और प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए मां दुर्गा से सभी के सुख समृद्धि और कल्याण की कामना की। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति परंपराओं और विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए उसे अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। जिन समाजों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखा है वे विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। यहां कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और मातृशक्ति के रूप में भी पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी नारायणी हैं और शक्ति का प्रतीक हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप हमें साहस पराक्रम और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं। शक्ति की भक्ति में ही सभी का कल्याण निहित है। नवरात्रि का पर्व केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें अपनी परंपराओं को समझने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
    मुख्यमंत्री ने लोगों से समाज में सद्भाव बढ़ाने और महिलाओं के सम्मान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारों की सार्थकता तभी है जब उनके माध्यम से समाज में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत हो। लोगों को गरीब और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में खुशियां लाने का संकल्प भी लेना चाहिए। भोजपाल गरबा महोत्सव में भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारतीय परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में भोजपाल महोत्सव मेला समिति के संयोजक विकास वीरानी और समिति के अध्यक्ष सुनील यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भोजपाल गरबा महोत्सव लगातार भव्य और व्यापक होता गया है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं। गरबा केवल नृत्य का कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह शक्ति की आराधना से मिलने वाली शांति खुशी और उत्साह को सामूहिक रूप से व्यक्त करने का माध्यम है। ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और आपसी मेलजोल बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल और शारीरिक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि लोग स्वस्थ और सक्रिय रह सकें।
    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में प्रमुख त्योहार और सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक उत्साह के साथ मनाए जाएं। मकर संक्रांति पर पतंग उत्सव सर्दियों में भोपाल उत्सव और जन्माष्टमी जैसे आयोजनों के माध्यम से सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का अवसर देते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत के बढ़ते मान सम्मान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आशा जताई कि वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल होगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति और गौरव का परचम पूरी दुनिया में ऊंचा रखने का आह्वान किया। साथ ही लोगों को आगामी दशहरे की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी परंपराओं को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया। भोजपाल गरबा महोत्सव का शुभारंभ भक्ति उल्लास और सांस्कृतिक गौरव के माहौल में हुआ।

  • इंदौर में साइबर ठगों का जाल, निवेश के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी, दूसरे मामले में खाते से 51 हजार रुपए गायब

    इंदौर में साइबर ठगों का जाल, निवेश के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी, दूसरे मामले में खाते से 51 हजार रुपए गायब


    इंदौर । इंदौर में ऑनलाइन ठगी के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में इंटरनेशनल शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर एक युवक से 8 लाख 70 हजार रुपए ठग लिए गए। आरोपी महिला ने युवक को अपने झांसे में लेकर अलग अलग बैंक खातों में नौ बार रकम ट्रांसफर कराई। जब युवक ने निवेश की रकम और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की तो उससे और पैसे मांगे जाने लगे। इसके बाद उसे ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस तथा साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। दूसरे मामले में राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक युवक को पत्नी के मोबाइल पर रिचार्ज कराने के दौरान पता चला कि उसके बैंक खाते से करीब 51 हजार रुपए कट चुके हैं। दोनों मामलों में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    चंदन नगर पुलिस के मुताबिक ताप्ती परिसर निवासी जय कुमार बडोनिया ने शिकायत में बताया कि अप्रैल में उनके पास एक अज्ञात महिला का फोन आया था। महिला ने इंटरनेशनल शेयर मार्केट में निवेश करने का प्रस्ताव दिया और भरोसा दिलाया कि कम समय में अच्छी खासी कमाई की जा सकती है। अधिक मुनाफे की उम्मीद में जय कुमार उसकी बातों में आ गए। इसके बाद महिला ने उन्हें अलग अलग बैंक खातों की जानकारी दी और उनमें रकम जमा कराने को कहा। युवक ने कुल नौ बार में 8 लाख 70 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने अपनी जमा रकम और मुनाफा वापस लेने की कोशिश की तो उनसे अतिरिक्त पैसे मांगे जाने लगे। इस स्थिति से उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
    पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि ठगी की रकम बैंक ऑफ इंडिया बंधन बैंक और एक स्मॉल फाइनेंस बैंक के खातों में पहुंची थी। शिकायत में हिंदूस ट्रेडर्स एम इंटरप्राइजेस कलिता इंटरप्राइजेस विलेस एआई टेक्नोलॉजी इंटरप्राइजेस और सोहन वुडन कार्ड सहित कई नामों से जुड़े खातों का उल्लेख किया गया है। पुलिस इन खातों की जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची। मामले में फोन करने वाली महिला सहित अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
    दूसरी घटना राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र की है। चोइथराम मंडी के पास राजरानी नगर निवासी करण कोटिया ने पुलिस को बताया कि वह काम से घर लौटे थे। इस दौरान उनकी पत्नी मनीषा ने मोबाइल का बैलेंस खत्म होने की बात कही। करण जब रिचार्ज कराने लगे तो उन्हें बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने का संदेश मिला। इसके बाद उन्होंने खाते से जुड़े भुगतान और लेनदेन की जानकारी जांची तो करीब 51 हजार रुपए कटने का पता चला। यह देखकर वह हैरान रह गए। उन्होंने बैंक में शिकायत दर्ज कराने के साथ साइबर हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया। पुलिस ने इस मामले में भी अज्ञात आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
    दोनों घटनाएं ऑनलाइन लेनदेन के दौरान सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करती हैं। शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी और निवेश मंच की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। कम समय में निश्चित या असाधारण मुनाफे का वादा करने वालों से सावधान रहना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अलग अलग खातों में पैसे भेजने से बचना चाहिए। खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। पुलिस अब दोनों मामलों में लेनदेन के रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जांच कर रही है ताकि ठगी में शामिल लोगों तक पहुंचा जा सके।

  • रेलवे ट्रैक के लिए ढाई लाख पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चोरल के जंगलों में वन्यजीवों और पर्यावरण को लेकर जताई गई चिंता

    रेलवे ट्रैक के लिए ढाई लाख पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त, चोरल के जंगलों में वन्यजीवों और पर्यावरण को लेकर जताई गई चिंता


    इंदौर । इंदौर के चोरल जंगलों को बचाने के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। सिमरोल से चोरल होते हुए बड़वाह तक प्रस्तावित रेलवे ट्रैक के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर अदालत ने अंतरिम रोक लगा दी है। गुरुवार को चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोकजे और जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे और वन विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस परियोजना के कारण ढाई लाख से अधिक छोटे बड़े पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
    याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत में चोरल के जंगलों के पर्यावरणीय महत्व को सामने रखा। दलील दी गई कि ये जंगल इंदौर और मालवा क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। निमाड़ की ओर से आने वाली गर्म हवाओं को रोकने में भी इन जंगलों का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का तापमान बढ़ सकता है। इसके साथ ही भूजल स्तर में गिरावट और बारिश के प्राकृतिक चक्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका भी जताई गई।
    याचिका में क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले पांच वर्षों से गर्मियों के दौरान इंदौर का अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। ऐसे हालात में यदि ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई होती है तो मालवा और निमाड़ के पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है। अदालत में रेलवे ट्रैक के डिजाइन में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि पहले के डिजाइन में लगभग 40 से 50 हजार पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान था लेकिन बाद में डिजाइन बदलने से पेड़ों की कटाई का दायरा काफी बढ़ गया।
    सुनवाई के दौरान रेलवे ट्रैक के तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। रेलवे की ओर से ढलान अधिक होने और सिमरोल से बड़वाह तक यात्रा में 30 से 40 मिनट अतिरिक्त लगने जैसी व्यावहारिक समस्याओं का हवाला दिए जाने की बात अदालत में रखी गई। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया कि क्या वास्तव में परियोजना के लिए इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना जरूरी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी।
    याचिकाकर्ता ने चोरल जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया। अदालत में पेश दलीलों के मुताबिक क्षेत्र में बाघों के 37 और तेंदुओं के 89 पगमार्क दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा चीतल सांभर लोमड़ी मोर और जंगली खरगोश जैसे वन्यजीव भी यहां पाए जाते हैं। आशंका जताई गई कि जंगलों का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि क्षेत्र में लगभग 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियां दुर्लभ होती जा रही हैं और सलाई जैसे पेड़ों का दायरा भी घट रहा है।
    सुनवाई के दौरान जस्टिस विनय सराफ ने जबलपुर खंडपीठ के एक पुराने आदेश का उल्लेख किया। उस मामले में जंगलों की कटाई पर रोक लगाते हुए सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक छंटाई की अनुमति दी गई थी। इसी संदर्भ में चोरल जंगलों के मामले में भी पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने वन भूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई से जुड़े दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कराने के साथ ही वानिकी वन्यजीव पारिस्थितिकी और पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। फिलहाल हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से प्रस्तावित कटाई पर विराम लग गया है। अब रेलवे और वन विभाग के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

  • रीढ़ की सर्जरी से डरने की जरूरत नहीं, इंदौर में 80 डॉक्टरों और मरीजों ने साइकिल चलाकर बताया कैसे लौट सकती है सामान्य जिंदगी

    रीढ़ की सर्जरी से डरने की जरूरत नहीं, इंदौर में 80 डॉक्टरों और मरीजों ने साइकिल चलाकर बताया कैसे लौट सकती है सामान्य जिंदगी


    इंदौर । इंदौर में वर्ल्ड स्पाइन डे के अवसर पर रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्पाइन हेल्थ अवेयरनेस साइक्लोथॉन का आयोजन किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 70 से 80 वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन स्पाइन सर्जन और एनेस्थेटिस्ट ने हिस्सा लिया। डॉक्टरों के साथ स्पाइन सर्जरी करा चुके कुछ मरीज भी साइकिल चलाते नजर आए। इस पहल के जरिए लोगों को नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया। साथ ही रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर और भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की गई।
    इस साइक्लोथॉन का आयोजन इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन यानी ISSA की ओर से किया गया। कार्यक्रम में शामिल चिकित्सकों ने बताया कि रीढ़ की हड्डी शरीर की महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है। इसकी सेहत का असर व्यक्ति की चाल और शारीरिक गतिविधियों से लेकर रोजमर्रा के कामकाज तक पर पड़ता है। लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना शारीरिक गतिविधियों की कमी और फिटनेस पर ध्यान नहीं देना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी है। साइक्लोथॉन के माध्यम से डॉक्टरों ने लोगों को अपनी सेहत के लिए समय निकालने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने का संदेश दिया।
    कार्यक्रम की खास बात यह रही कि हाल ही में स्पाइन सर्जरी करा चुके एक-दो मरीजों ने भी डॉक्टरों के साथ साइकिल चलाई। उनकी भागीदारी का उद्देश्य यह बताना था कि उचित इलाज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रिकवरी होने के बाद कई मरीज फिर से सक्रिय जीवनशैली अपना सकते हैं। हालांकि सर्जरी के बाद हर मरीज की स्थिति अलग होती है और व्यायाम या साइकिल चलाने जैसी गतिविधियां शुरू करने का समय इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए।
    ISSA के सचिव डॉ. अविनाश जैन ने बताया कि समाज में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां हैं। कुछ लोग यह सोचकर ऑपरेशन कराने से बचते हैं कि इसके बाद वे सामान्य जीवन नहीं जी पाएंगे या उनकी शारीरिक गतिविधियां हमेशा के लिए सीमित हो जाएंगी। ऐसे डर के कारण कई बार लोग समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से भी हिचकते हैं। सर्जरी करा चुके मरीजों को साइकिल चलाते देखना उन लोगों के लिए भरोसा बढ़ाने वाला संदेश है जो इलाज को लेकर असमंजस में रहते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सही जांच उचित उपचार और पुनर्वास की प्रक्रिया से कई मरीजों को अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लौटने में मदद मिल सकती है।
    साइक्लोथॉन का नेतृत्व इंदौर स्पाइन सर्जन एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एसके लूनावत उपाध्यक्ष डॉ. प्रसाद पटगांवकर और सचिव डॉ. अविनाश जैन ने किया। एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स ऑफ इंदौर के सचिव डॉ. प्रणव महाजन भी आयोजन में शामिल हुए। वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मसंद और डॉ. मनचंदा सहित अन्य चिकित्सकों ने भी अपनी भागीदारी निभाई। आयोजन में शहर के सक्रिय साइकिल राइडर्स ने भी हिस्सा लिया।
    कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में इंदौर यातायात पुलिस ने सहयोग दिया। आयोजन के अंत में एसोसिएशन की ओर से चिकित्सकों एनेस्थीसिया क्लब के सदस्यों साइकिल राइडर्स और प्रशासन के प्रति आभार जताया गया। वर्ल्ड स्पाइन डे पर आयोजित इस पहल ने रीढ़ की हड्डी की सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सर्जरी के बाद सामान्य जीवन में लौटने की संभावनाओं पर सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की कि वे नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं और रीढ़ से जुड़ी परेशानी होने पर खुद इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें।

  • सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग

    सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण जलसंकट की आशंका अभी से गहराने लगी है। गर्मी का मौसम आने से पहले ही शहर के हजारों परिवारों को पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इंदौर नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक करीब 85 हजार परिवारों की पानी संबंधी जरूरतें पूरी करने में परेशानी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 52 हजार 262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा जल नहीं पहुंच रहा है। वहीं 33 हजार 37 परिवार ऐसे हैं जिन्हें पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। निगम का यह सर्वे 14 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
    सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार वार्ड नंबर 36 के मायाखेड़ी अरंडिया निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे इलाकों में पानी की समस्या अधिक गंभीर बताई गई है। इन क्षेत्रों में करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा जल के कनेक्शन नहीं हैं। मायाखेड़ी और निपानिया में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से सप्लाई भी शुरू कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि शहर के कुछ इलाकों में गर्मी शुरू होने से पहले ही वैकल्पिक जल व्यवस्था की जरूरत पड़ रही है। वार्ड नंबर 16 में भी करीब साढ़े सात हजार परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित बताए गए हैं।
    नगर निगम की रिपोर्ट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उन परिवारों से जुड़ा है जिनके क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे परिवारों को भी टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है। सर्वे के अनुसार शहर में 33 हजार 37 परिवार इस श्रेणी में आते हैं। वार्ड नंबर 37 में करीब दो हजार परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड 45 में 1800 परिवार वार्ड 51 में 1300 और वार्ड 28 में 1200 परिवारों को टैंकर से पानी देने की जरूरत बताई गई है। वार्ड नंबर 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जलापूर्ति की चुनौती केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां नर्मदा पाइपलाइन नहीं पहुंची है। कुछ इलाकों में नेटवर्क होने के बावजूद जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।
    जलसंकट की स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। गुरुवार को हुई बैठक में उन्होंने पर्याप्त हाइड्रेंट बनाने और टैंकरों में पानी भरने की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए। महापौर ने यह भी बताया कि नए टैंकर खरीदने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को मांग भेजी गई है। इससे उन इलाकों में पानी की सप्लाई बेहतर करने की कोशिश की जा रही है जहां लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है।
    इस बार इंदौर में कम बारिश को भी जलसंकट की आशंका की बड़ी वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। इस स्थिति को देखते हुए महापौर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।
    जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक भी हुई। अब शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और टैंकर व्यवस्था मजबूत करने के उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में बारिश की कमी और मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था के बीच इंदौर के सामने बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।

  • गरबा एंट्री फीस को लेकर उज्जैन में विवाद, पांडाल में विरोध के बीच भगदड़ जैसे हालात, प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी

    गरबा एंट्री फीस को लेकर उज्जैन में विवाद, पांडाल में विरोध के बीच भगदड़ जैसे हालात, प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश शुल्क लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से निशुल्क आयोजन की शर्त पर अनुमति दिए जाने के बावजूद कुछ पांडालों में प्रवेश के लिए 150 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक के पास बेचे जाने की शिकायत सामने आई है। गुरुवार रात इस मुद्दे पर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने कई आयोजनों को लेकर विरोध जताया। मित्तल होटल में कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद हंगामा हुआ और आयोजकों ने सभी के लिए प्रवेश निशुल्क करने की बात कही। वहीं दूसरी ओर दो आयोजकों ने अपने कार्यक्रम निरस्त कर दिए। मामले के बाद गरबा आयोजनों की प्रवेश व्यवस्था और प्रशासन की अनुमति की शर्तों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    मित्तल होटल में आयोजित केसरिया रास कार्यक्रम के दौरान हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रवेश पास को लेकर आपत्ति जताई। मौके पर एक युवक ने कार्यकर्ताओं को 1500 रुपये के पास दिखाए। इसके अलावा अलग-अलग दिनों के पास भी सामने आए। जानकारी के मुताबिक यहां प्रवेश के लिए 150 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के पास बेचे जाने की शिकायत भी थी। हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य अर्जुन सिंह भदौरिया ने आरोप लगाया कि आयोजन स्थल पर दो प्रवेश द्वार बनाए गए थे। एक गेट से लोगों को निशुल्क प्रवेश दिया जा रहा था जबकि दूसरे गेट से पास खरीदने वालों को अंदर जाने दिया जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने इसे अनुमति की शर्तों के विपरीत बताते हुए विरोध किया। इसके बाद सभी के लिए प्रवेश निशुल्क करने की बात कही गई।
    हालांकि केसरिया रास के आयोजक कपिल कसेरा ने पास बेचने के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि सभी पास निशुल्क बांटे गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर सनातनी कार्यक्रम को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह एक ओर कार्यकर्ताओं ने प्रवेश शुल्क वसूले जाने का आरोप लगाया तो दूसरी ओर आयोजक ने पास निशुल्क बांटने की बात कही। ऐसे में पास वितरण और प्रवेश व्यवस्था को लेकर उठे विवाद की पूरी स्थिति संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    उज्जैन के नागदा बायपास स्थित राजाराम रिसोर्ट में भी गरबा आयोजन को लेकर विवाद सामने आया। यहां 13 अक्टूबर से डांडिया बीट नाम से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। इस आयोजन को भी निशुल्क प्रवेश की शर्त पर अनुमति दी गई थी। बुधवार रात बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद प्रवेश द्वार पर भीड़ बढ़ गई और भगदड़ जैसे हालात बनने की जानकारी सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कार्यक्रम बंद करा दिया। इसके बाद आयोजन की अनुमति भी निरस्त कर दी गई। आयोजकों का दावा है कि उन्होंने पास निशुल्क बांटे थे। हालांकि भीड़ के प्रबंधन और प्रवेश व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया।
    नवरात्रि के दौरान होटल मित्तल एवेन्यू के अलावा राजमहल राजाराम रिसोर्ट आस्था गार्डन परमेश्वरी गार्डन और श्रीराम वन में भी गरबा आयोजन के लिए प्रवेश शुल्क लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हिंदू जागरण मंच ने इन आयोजनों को लेकर विरोध जताया है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निशुल्क आयोजन की अनुमति मिलने के बाद आयोजक प्रवेश के लिए शुल्क नहीं ले सकते।
    एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि कोठी महल क्षेत्र में गरबा आयोजन की अनुमति के लिए आए आवेदनों में शुल्क या निशुल्क प्रवेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। सभी आयोजकों को शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि कोई भी आयोजक सशुल्क आयोजन नहीं कर सकता और यदि कोई प्रवेश पास बेच रहा है तो पुलिस को उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल उज्जैन में गरबा आयोजनों को लेकर उठे विवाद के बाद प्रवेश व्यवस्था और अनुमति की शर्तों के पालन पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।