Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन के सती माता मंदिर में पेड़ों पर टंगी सैकड़ों तस्वीरें, शत्रुनाश साधना की मान्यता से जुड़ी अनोखी परंपरा

    उज्जैन के सती माता मंदिर में पेड़ों पर टंगी सैकड़ों तस्वीरें, शत्रुनाश साधना की मान्यता से जुड़ी अनोखी परंपरा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में धार्मिक आस्था और तंत्र साधना से जुड़ी मान्यताओं के बीच एक ऐसा मंदिर चर्चा में है जहां पेड़ों पर महिला और पुरुषों की तस्वीरें टंगी दिखाई देती हैं। कुछ तस्वीरों पर कीलें ठुकी हैं तो कहीं सैंडल और कपड़ों से बने पुतले भी नजर आते हैं। भैरवगढ़ क्षेत्र में विक्रांत भैरव मंदिर के पास स्थित इस स्थान को सती माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे मेलडी माता मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां शत्रुनाश से जुड़े कर्मकांड कराए जाते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर और यहां दिखाई देने वाली इन वस्तुओं को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है।
    सती माता मंदिर उज्जैन के ओखलेश्वर रोड पर काल भैरव मंदिर के नजदीक स्थित है। मंदिर परिसर के आसपास पेड़ों पर तस्वीरें और दूसरी वस्तुएं टंगी दिखाई देती हैं। मौके पर पहुंची दैनिक भास्कर की टीम को आधा दर्जन से अधिक पेड़ों पर महिला और पुरुषों की तस्वीरें मिलीं। कुछ जगह कपड़े और सैंडल लटक रहे थे तो कहीं नींबू-मिर्च और कपड़ों से बनाए गए पुतले नजर आए। कुछ तस्वीरों पर कीलें भी ठुकी हुई थीं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच इन वस्तुओं को शत्रुनाश से जुड़ी मान्यताओं के साथ देखा जाता है। हालांकि इन कर्मकांडों के पीछे हर व्यक्ति का उद्देश्य एक जैसा है या नहीं इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
    सोशल मीडिया पर भी किसी विरोधी की तस्वीर पेड़ पर टांगने को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती रहती हैं। ऐसी सामग्री देखने के बाद कुछ लोग इस स्थान के बारे में जानने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि तस्वीर टांगने या किसी विशेष कर्मकांड से किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस तरह की मान्यताओं को धार्मिक विश्वास और लोक परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी तस्वीर पर कील ठोकने या कपड़े का पुतला टांगने से किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन पर असर पड़ता है ऐसा प्रमाणित नहीं है।
    तांत्रिक भय्यू महाराज के अनुसार यहां आने वाले कुछ लोग निजी और पारिवारिक विवादों से परेशान रहते हैं। इनमें सास-बहू के झगड़े और विवाहेतर संबंधों से जुड़े विवाद जैसे मामले भी शामिल बताए जाते हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग अपने विरोधियों से छुटकारा पाने की इच्छा लेकर यहां पूजन कराते हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र प्रमाण या आंकड़े सामने नहीं आए हैं। इसलिए मंदिर में होने वाले प्रत्येक कर्मकांड को किसी एक उद्देश्य से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
    भय्यू महाराज का यह भी कहना है कि मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग यहां पहुंचते हैं। गुजरात में कुछ तांत्रिक कर्मकांडों पर पाबंदियों के बाद वहां से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने का दावा भी किया गया है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया। उज्जैन का भैरवगढ़ क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां विक्रांत भैरव और काल भैरव मंदिर जैसे धार्मिक स्थल हैं। इसके आसपास चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर जैसे श्मशान घाट भी स्थित हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में भैरव उपासना और श्मशान से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन स्थलों की निकटता अपने आप में यहां होने वाले सभी कर्मकांडों को तंत्र साधना साबित नहीं करती।
    मंदिर के नाम को लेकर भी स्थानीय स्तर पर अलग-अलग बातें सामने आती हैं। भय्यू महाराज के मुताबिक इसका मूल नाम सती माता मंदिर है और यहां सती माता की चरण पादुकाओं के साथ मेलडी माता की प्रतिमा भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इसे मुख्य रूप से सती माता मंदिर कहा जाता था लेकिन बाद में मेलडी माता नाम का प्रचलन बढ़ा। मंदिर के नाम में यह बदलाव कब और क्यों हुआ इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है।
    गुजरात की कुछ लोक मान्यताओं में मेलडी माता से जुड़ी एक कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार देवी पार्वती ने अमुहा नाम के राक्षस का वध करने के लिए मेलडी माता का रूप धारण किया था। कुछ परंपराओं में उन्हें मां मसान मेलडी भी कहा जाता है और मसान शब्द को श्मशान से जोड़ा जाता है। ये धार्मिक लोककथाएं और आस्थाएं हैं जिन्हें प्रमाणित ऐतिहासिक घटना नहीं माना जा सकता। उज्जैन का यह मंदिर अपनी अनोखी निशानियों और उनसे जुड़ी मान्यताओं के कारण चर्चा में बना हुआ है लेकिन शत्रुनाश के दावों को प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय विश्वास के रूप में समझना जरूरी है।

  • भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

    भोपाल के ट्विशा शर्मा केस में जमानत पर टिकी नजरें, CBI के नए आरोपों के आधार पर हाईकोर्ट में होगी सुनवाई


    भोपाल । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की चार्जशीट में आरोपों में बदलाव के बाद जमानत याचिका पर नए कानूनी आधारों के साथ विचार किया जाएगा। पहले मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित धारा लगाई गई थी लेकिन जांच के बाद आरोपपत्र में इसे हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप शामिल किया गया है। ऐसे में अब अदालत बदली हुई कानूनी स्थिति और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर जमानत आवेदन पर सुनवाई करेगी।
    इससे पहले जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने गिरिबाला सिंह को जमानत आवेदन में संशोधन करने की अनुमति दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आवेदन में दहेज मृत्यु से संबंधित आरोप को हटाने और नए आरोप के अनुरूप जरूरी बदलाव करने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इस संशोधन की अनुमति देते हुए कहा था कि बदली हुई परिस्थितियों के आधार पर जमानत पर बहस करने से पहले आवेदन में आवश्यक सुधार किया जाए। CBI की चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का आरोप हटाकर धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप जोड़ा गया है।
    ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनकी ससुराल में हुई थी। 33 वर्षीय ट्विशा फंदे पर मिली थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी। मौत के बाद उनके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। शुरुआती मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु और क्रूरता सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया था। हालांकि ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत द्वारा साबित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
    मामले में भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी। इस आदेश को मृतका के परिजनों और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। 27 मई को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का आदेश निरस्त कर दिया था। उस समय अदालत ने केस डायरी में दर्ज बयानों और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों सहित कई पहलुओं पर विचार किया था। इसके बाद गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जांच के दौरान हिरासत में लिया गया।
    ट्विशा के परिजनों ने शुरुआती पोस्टमार्टम और जांच को लेकर सवाल उठाए थे और दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने भोपाल में दोबारा पोस्टमार्टम किया। CBI की चार्जशीट में शामिल रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण फंदे से दम घुटना बताया गया और मृत्यु को आत्महत्या माना गया। रिपोर्ट में ऐसी महत्वपूर्ण चोटों के नहीं मिलने की बात भी कही गई जो हमले या संघर्ष का संकेत देती हों।
    CBI ने जांच के दौरान डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की। जांच से संबंधित रिपोर्टों में चैट और कॉल रिकॉर्ड सहित ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोपपत्र में कथित मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप रखे हैं। अब गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट बदले हुए आरोपों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करेगा। वहीं ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई संभावित बताई गई है। जमानत पर अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • अनूपपुर को मिलेगी आधुनिक जिला अदालत की सौगात, ₹44.85 करोड़ स्वीकृत, हाईकोर्ट ने निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश

    अनूपपुर को मिलेगी आधुनिक जिला अदालत की सौगात, ₹44.85 करोड़ स्वीकृत, हाईकोर्ट ने निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में लंबे समय से किराए के भवन में संचालित हो रही जिला अदालत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने जिला अदालत के नए भवन के निर्माण के लिए 44.85 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दे दी है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने स्वीकृति की जानकारी मिलने के बाद भवन निर्माण का काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इससे जिला अदालत के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
    अनूपपुर जिला अदालत के भवन निर्माण का मामला गुरुवार को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ के समक्ष मामले से जुड़ी जानकारी रखी गई। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने भवन निर्माण के लिए 44.85 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दे दी है। इसके बाद हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने के निर्देश जारी किए। लंबे समय से किराए के भवन में संचालित हो रही अदालत के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    इस मामले में शहडोल निवासी अधिवक्ता वासुदेव चटर्जी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि अनूपपुर की जिला अदालत लंबे समय से किराए के भवन में चल रही है। अदालत के लिए स्थायी भवन की आवश्यकता को देखते हुए यह मामला हाईकोर्ट के सामने उठाया गया। इसके बाद हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता को मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से चर्चा करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद राज्य सरकार की ओर से अदालत को वित्तीय स्वीकृति की जानकारी दी गई। सरकार के इस कदम के बाद हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
    सुनवाई के दौरान प्रदेश की अन्य जिला अदालतों के भवन निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। खंडपीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश में जिला अदालतों के लंबित निर्माण कार्यों से संबंधित याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष प्रस्तुत की जाएं। इन निर्माण कार्यों से जुड़ी याचिकाओं पर पहले से ही मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई चल रही है। ऐसे में संबंधित याचिकाओं को उसी बेंच के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया है ताकि मामलों की सुनवाई निर्धारित व्यवस्था के तहत हो सके।
    अनूपपुर जिला अदालत के भवन के लिए वित्तीय मंजूरी मिलने और हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब निर्माण कार्य शुरू होने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। स्थायी भवन उपलब्ध होने से अदालत के संचालन के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने की वास्तविक तारीख और परियोजना पूरी होने की समयसीमा को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार को जल्द निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए हैं और जिला अदालतों के लंबित भवन निर्माण से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर भी व्यवस्था स्पष्ट कर दी है।

  • एक करोड़ दिलाने का वादा और फिर सोने की कहानी, तमिलनाडु के CM के नाम पर बुजुर्ग से ₹7.52 लाख की ठगी

    एक करोड़ दिलाने का वादा और फिर सोने की कहानी, तमिलनाडु के CM के नाम पर बुजुर्ग से ₹7.52 लाख की ठगी


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है जिसमें आरोपियों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति के नाम का इस्तेमाल कर 69 वर्षीय बुजुर्ग को एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने बुजुर्ग का भरोसा जीतकर अलग-अलग चरणों में कुल 7.52 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। रकम लेने के बाद भी ठगों ने पैसे मांगना बंद नहीं किया। उन्होंने सोना लेकर आने और रास्ते में पुलिस के पकड़ लेने की कहानी सुनाकर बुजुर्ग से 60 हजार रुपये और मांग लिए। इस बार उन्हें शक हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत कर दी। गोरखपुर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    पुलिस के मुताबिक जबलपुर के गुप्तेश्वर निवासी प्रवेश धीर को फेसबुक पर आर्थिक सहायता और ऋण उपलब्ध कराने से जुड़ा एक लिंक दिखाई दिया था। आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद में उन्होंने लिंक पर क्लिक किया। इसके कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर चार अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगे। फोन करने वालों ने खुद को विजय थलापति से जुड़ा हुआ बताया और दावा किया कि उन्हें एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जा सकती है। आरोपियों ने मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर बुजुर्ग को भरोसे में लेने की कोशिश की। उनकी बातों में आकर प्रवेश धीर ने आरोपियों पर विश्वास कर लिया।
    इसके बाद ठगी का सिलसिला शुरू हुआ। आरोपियों ने आर्थिक सहायता दिलाने के नाम पर अलग-अलग चरणों में भुगतान करने को कहा। उन्होंने सात बार स्कैनर भेजे और बुजुर्ग से विभिन्न बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 7.52 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में चले गए। बुजुर्ग को उम्मीद थी कि रकम जमा करने के बाद उन्हें वादा की गई आर्थिक मदद मिल जाएगी। लेकिन आरोपियों ने न तो आर्थिक सहायता दिलाई और न ही पैसे वापस किए। इसके बजाय वे लगातार नई कहानी बनाकर उनसे और रकम मांगने लगे।
    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पैसे लेने के बाद बुजुर्ग को बताया कि वे उनके लिए सोना लेकर आ रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और अब उन्हें छुड़ाने के लिए अतिरिक्त रकम की जरूरत है। इस बहाने आरोपियों ने 60 हजार रुपये और मांगे। लगातार भुगतान की मांग होने से प्रवेश धीर को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है जिनसे बुजुर्ग को फोन किए गए थे। इसके साथ ही रकम जिन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस लेनदेन के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। थाना प्रभारी नितिन कमल के मुताबिक साइबर टीम की मदद से मामले की जांच की जा रही है।
    यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आर्थिक सहायता दिलाने के नाम पर लोगों को किस तरह निशाना बनाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या फोन पर किए गए दावों पर तुरंत भरोसा करने से बचना जरूरी है। सरकारी सहायता या बड़ी रकम दिलाने के नाम पर अग्रिम भुगतान मांगने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए क्यूआर कोड या स्कैनर को जांचे बिना भुगतान नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री या किसी सरकारी योजना का नाम लेकर पैसे मांगता है तो पहले संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत बैंक को सूचना देकर खाते से जुड़े लेनदेन पर कार्रवाई का अनुरोध करना चाहिए और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

  • तेज धूप के बीच ग्वालियर में ठंडक का एहसास, सुबह तापमान में गिरावट, जानें दिन में कैसा रहेगा मौसम

    तेज धूप के बीच ग्वालियर में ठंडक का एहसास, सुबह तापमान में गिरावट, जानें दिन में कैसा रहेगा मौसम


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शुक्रवार सुबह मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। ठंडी हवाओं के चलने से लोगों को पिछले कुछ दिनों से महसूस हो रही गर्मी से राहत मिली। सुबह धूप निकलने के बावजूद वातावरण में ठंडक बनी रही और मौसम सुहावना महसूस हुआ। गुरुवार की तुलना में न्यूनतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव के कारण सुबह घरों से बाहर निकलने वाले लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार न्यूनतम तापमान अभी सामान्य से थोड़ा अधिक बना हुआ है और दिन चढ़ने के साथ धूप तेज होने पर गर्मी का असर फिर बढ़ सकता है।
    शुक्रवार सुबह ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 0.3 डिग्री अधिक रहा। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार सुबह 5:30 बजे तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस और सुबह 8:30 बजे 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच ठंडी हवाओं ने सुबह के मौसम को अपेक्षाकृत आरामदायक बनाए रखा। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और गर्मी के कारण लोगों को परेशानी हो रही थी लेकिन शुक्रवार सुबह मौसम में आई नरमी ने राहत का एहसास कराया।
    मौसम में ठंडक महसूस होने के पीछे हवा में नमी की अधिक मात्रा भी एक अहम वजह रही। शुक्रवार सुबह सापेक्ष आर्द्रता 96 प्रतिशत दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह पिछले रिकॉर्ड की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक रही। हवा में नमी बढ़ने और ठंडी हवाएं चलने से सुबह के समय वातावरण में अलग तरह की ठंडक महसूस हुई। हालांकि अधिक आर्द्रता का मतलब यह नहीं है कि बारिश होना तय है। मौसम की स्थिति पर तापमान हवा की दिशा और अन्य मौसमी परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।
    ग्वालियर में पिछले कुछ दिनों से दिन के समय तेज धूप के कारण गर्मी का असर बना हुआ था। सुबह और शाम के मुकाबले दोपहर में तापमान बढ़ने से लोगों को अधिक गर्मी महसूस हो रही थी। शुक्रवार सुबह चली ठंडी हवाओं ने इस स्थिति में कुछ राहत दी। सुबह की सुहावनी फिजा के बावजूद दिन में तापमान बढ़ने की संभावना बनी हुई है। धूप तेज होने के साथ वातावरण गर्म हो सकता है इसलिए सुबह की ठंडक को पूरे दिन के मौसम का संकेत मानना सही नहीं होगा।
    फिलहाल उपलब्ध मौसम जानकारी के अनुसार ग्वालियर में बारिश की संभावना के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में मौसम में आया बदलाव मुख्य रूप से ठंडी हवाओं और हवा में नमी बढ़ने से जुड़ा नजर आ रहा है। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रह सकता है जबकि दोपहर में धूप के कारण गर्मी फिर महसूस हो सकती है। बदलते मौसम के बीच लोगों को दिन के समय धूप से बचाव और पर्याप्त पानी पीने का ध्यान रखना चाहिए। आने वाले समय में तापमान और हवा की स्थिति के आधार पर मौसम का मिजाज बदल सकता है। फिलहाल ग्वालियर के लोगों को सुबह के समय गर्मी से मिली राहत ने कुछ सुकून जरूर दिया है।

  • कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले 9 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि, 21 अक्टूबर को परिजनों से मिलेंगे CM, लंबित भुगतान के निर्देश

    कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले 9 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि, 21 अक्टूबर को परिजनों से मिलेंगे CM, लंबित भुगतान के निर्देश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवारों को राहत देने के लिए पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर 21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति और लंबित देयकों के भुगतान से जुड़े मामलों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है ताकि प्रत्येक प्रकरण की समीक्षा की जा सके और परिवारों को मिलने वाली सहायता की स्थिति स्पष्ट हो सके।
    पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त हुई है। इन सभी के परिजनों को पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और उनके लंबित भुगतान का निपटारा किया जाए। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों के मामलों को प्राथमिकता देना है जिन्होंने अपने परिजन को पुलिस सेवा के दौरान खोया है।
    सूची में भोपाल की 25वीं वाहिनी में पदस्थ निरीक्षक आशीष शर्मा का नाम शामिल है। इसके अलावा उज्जैन जिले के सब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा सहायक उप निरीक्षक मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी सूची में शामिल हैं। उमरिया के प्रधान आरक्षक ओम प्रकाश भवेदी राजगढ़ के प्रधान आरक्षक सर्जन सिंह भील मुरैना के प्रधान आरक्षक परिमाल सिंह तोमर सतना के आरक्षक विकास चतुर्वेदी और शहडोल के आरक्षक महेश प्रसाद पाठक ने भी ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई थी। इन सभी पुलिसकर्मियों के परिजनों से संबंधित मामलों में नियुक्ति और बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
    सूची में शामिल निरीक्षक आशीष शर्मा नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए थे। वे मध्य प्रदेश हॉक फोर्स में पदस्थ थे और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव क्षेत्र के जंगलों में संयुक्त पुलिस अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अभियान में मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की पुलिस टीमें शामिल थीं। जंगल में पेट्रोलिंग के दौरान नक्सलियों की ओर से फायरिंग की गई थी। इस घटना में घायल आशीष शर्मा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनका बलिदान नक्सल विरोधी अभियान में पुलिसकर्मियों के सामने आने वाले जोखिमों की याद दिलाता है।
    उज्जैन जिले के तीन पुलिसकर्मियों की जान सितंबर 2025 में एक सड़क हादसे में गई थी। जानकारी के अनुसार लापता लड़की से जुड़े मामले की जांच के दौरान सुराग का पीछा करते समय उन्हेल थाने की कार शिप्रा नदी में गिर गई थी। इस दुर्घटना में सब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा सहायक उप निरीक्षक मदनलाल निनामा और आरक्षक आरती पाल की मृत्यु हो गई थी। वहीं अन्य पुलिसकर्मियों की मौत सड़क दुर्घटनाओं और ड्यूटी से जुड़े हादसों में हुई। सागर जिले में बांदरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की वैन ट्रक से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में प्रधान आरक्षक परिमाल सिंह तोमर शहीद हो गए थे।
    पुलिस स्मृति दिवस हर साल उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इस दिन शहीद जवानों और अधिकारियों को याद करने के साथ उनके परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना भी व्यक्त की जाती है। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। इस बार कार्यक्रम से पहले अनुकंपा नियुक्ति और लंबित देयकों के भुगतान पर जोर दिया गया है। अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई रिपोर्ट और परिवारों से मुख्यमंत्री की मुलाकात पर नजर रहेगी।

  • ग्वालियर में प्राइवेट वीडियो पति को भेजने पर भड़की महिला, एक्स बॉयफ्रेंड पर कैंची से किया हमला, 8 से 9 गहरे घाव से गंभीर हालत

    ग्वालियर में प्राइवेट वीडियो पति को भेजने पर भड़की महिला, एक्स बॉयफ्रेंड पर कैंची से किया हमला, 8 से 9 गहरे घाव से गंभीर हालत


    मध्य प्रदेश। के ग्वालियर में निजी वीडियो और ऑडियो को लेकर हुए विवाद में एक महिला ने अपने पूर्व प्रेमी पर कैंची से हमला कर दिया। इस घटना में 40 वर्षीय धर्मेंद्र प्रजापति गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके शरीर पर कैंची से किए गए 8 से 9 गहरे घाव बताए गए हैं। घटना के बाद घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    यह घटना ग्वालियर के कंपू थाना क्षेत्र की ललितपुर कॉलोनी में हुई। धर्मेंद्र प्रजापति यहां किराए के मकान में रहता था। बताया गया है कि महिला और धर्मेंद्र के बीच करीब ढाई साल तक प्रेम संबंध रहे थे। महिला के पहले पति बालवीर प्रजापति की मौत हो चुकी थी। इसके बाद वह धर्मेंद्र के संपर्क में आई और दोनों के बीच संबंध बन गए।कुछ समय बाद महिला ने धर्मेंद्र से दूरी बना ली और सिकंदर कंपू निवासी सोनू यादव से शादी कर ली।

    आरोप है कि शादी के बाद भी धर्मेंद्र महिला से संपर्क बनाए हुए था और उसे परेशान कर रहा था। इसी बीच महिला और धर्मेंद्र के पुराने संबंधों से जुड़े निजी ऑडियो और वीडियो उसके पति सोनू यादव तक पहुंच गए। महिला का आरोप है कि धर्मेंद्र ने ये निजी सामग्री उसके पति को भेजी थी।

    निजी वीडियो और ऑडियो पति तक पहुंचने के बाद महिला और उसके पति के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम से नाराज महिला कथित तौर पर धर्मेंद्र के घर पहुंची। वहां दोनों के बीच विवाद हुआ और महिला ने उस पर कैंची से हमला कर दिया। हमले में धर्मेंद्र गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा।

    चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उसके शरीर पर कई गहरे घाव होने के कारण घटना को गंभीर माना जा रहा है। पुलिस अब पूरे मामले के घटनाक्रम और हमले की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है।

    महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप
    पुलिस पूछताछ के दौरान महिला ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहा था और उसकी शादीशुदा जिंदगी में दखल दे रहा था। महिला के अनुसार, निजी वीडियो और ऑडियो उसके पति को भेजे जाने के बाद घर में विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी बात से नाराज होकर उसने धर्मेंद्र पर हमला किया। हालांकि, महिला की ओर से लगाए गए ब्लैकमेलिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    कंपू थाना पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस घायल धर्मेंद्र के बयान, घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्यों और दोनों पक्षों के आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह मामला निजी वीडियो और ऑडियो के कथित प्रसार से शुरू हुए विवाद के हिंसक रूप लेने से जुड़ा है। फिलहाल पुलिस का ध्यान हमले की परिस्थितियों, ब्लैकमेलिंग के आरोपों और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच पर है।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तंज का दौर, आरक्षण पर विधायक की फजीहत, लाड़ली बहना पर कांग्रेस की चुप्पी और भाजपा में हलचल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तंज का दौर, आरक्षण पर विधायक की फजीहत, लाड़ली बहना पर कांग्रेस की चुप्पी और भाजपा में हलचल


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी तंज और सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं भाजपा विधायक को आरक्षण के मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा तो कहीं लाड़ली बहना योजना पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के जवाब ने सवाल खड़े कर दिए। इंदौर में जल संकट को लेकर बुलाई गई बैठक में मंत्रियों और विधायकों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के युवा संवाद कार्यक्रम को कांग्रेस ने राहुल गांधी की राजनीति से जोड़कर देखा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत में बयान और जवाब के नए किस्से पैदा कर दिए हैं।
    शिवपुरी में भाजपा विधायक देवेंद्र जैन उस समय असहज स्थिति में आ गए जब उनकी ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक युवक से बहस हो गई। ओबीसी महासभा के कार्यकर्ता 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे थे। विधायक देवेंद्र जैन वहां एक बैठक के सिलसिले में पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू हो गई। एक युवक ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह ग्रेजुएट है और पढ़ा लिखा है। इस पर विधायक ने जवाब में खुद को गधा कह दिया। युवक ने भी पलटकर कह दिया कि हां आप गधे हो। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने हूटिंग शुरू कर दी और भाजपा सरकार मुर्दाबाद तथा शिवपुरी विधायक मुर्दाबाद के नारे लगाए। घटनाक्रम के दौरान विधायक ने अपने नाम पर भी मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस पूरे मामले का वीडियो सामने आने के बाद घटना चर्चा में आ गई है।
    दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लाड़ली बहना योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर चर्चा में आ गए। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन हजार रुपये देने का वादा किया गया था जबकि महिलाओं को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे वादे के अनुरूप राशि नहीं देने का मामला बताया। इसके बाद पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या लाड़ली बहना योजना जारी रहेगी और क्या राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये की जाएगी। इस सवाल पर पटवारी ने कहा कि इसका जवाब सही समय पर दिया जाएगा। उनके जवाब के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल हल्का हो गया। हालांकि योजना को लेकर कांग्रेस की भावी नीति पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
    इंदौर में जल संकट को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक में भी सियासी चर्चा तेज हो गई। बैठक में जिले के नौ विधायकों में से केवल चार के पहुंचने की जानकारी सामने आई। मंत्री तुलसी सिलावट भी बैठक में मौजूद नहीं थे। जब विजयवर्गीय से बाकी जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जो नहीं आए उनसे पूछा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शायद उनके क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं होगी। उनके इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि बैठक में कम उपस्थिति के पीछे किसी बड़े नेता की नाराजगी होने की बात को खबर में चर्चा और अटकल के रूप में ही देखा जा रहा है।
    इसी बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का युवा संवाद कार्यक्रम भी चर्चा में है। 17 अक्टूबर को अशोकनगर में उनका युवा अनप्लग्ड कॉन्सर्ट प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम के माध्यम से वे युवाओं से संवाद करेंगे और उनकी बात सुनने का प्रयास करेंगे। कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की युवाओं के बीच पहुंचने की रणनीति से जोड़कर तंज किया है। सिंधिया पहले कांग्रेस में रह चुके हैं लेकिन अब भाजपा में हैं। ऐसे में उनके युवा संवाद कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
    प्रदेश की नौकरशाही में भी हालिया तबादला सूची के बाद चर्चाएं जारी हैं। खबर के मुताबिक एक महिला आईएएस अधिकारी को उम्मीद थी कि उन्हें कलेक्टर बनाया जा सकता है। उन्होंने निमाड़ क्षेत्र के एक जिले में पदस्थापना के लिए प्रयास किए थे लेकिन जारी सूची में उस जिले की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को दे दी गई। हालांकि संबंधित अधिकारी का नाम और जिले का विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। कुल मिलाकर आरक्षण विवाद से लेकर लाड़ली बहना योजना और जल संकट की बैठक तक मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी और सियासी संकेत लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं।

  • MP में रबी सीजन से पहले बिजली कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें, ग्रिडों का घेराव और चक्काजाम, ऊर्जा मंत्री ने दिए 10 घंटे बिजली के निर्देश

    MP में रबी सीजन से पहले बिजली कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें, ग्रिडों का घेराव और चक्काजाम, ऊर्जा मंत्री ने दिए 10 घंटे बिजली के निर्देश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा अब गांवों से निकलकर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। किसानों और ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान मंदसौर राजगढ़ सीहोर बड़वानी धार झाबुआ खंडवा आगर मालवा नर्मदापुरम और बुरहानपुर समेत 10 से ज्यादा जिलों में बिजली कटौती के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। कहीं किसानों ने बिजली ग्रिडों का घेराव किया तो कहीं चक्काजाम लगाकर अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। कई स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए बिजली आपूर्ति नियमित करने की मांग उठाई है। खास बात यह है कि बिजली संकट को लेकर अब भाजपा के मंत्री और विधायक भी परेशान नजर आ रहे हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समस्या का समाधान कराने की गुहार लगा रहे हैं।
    ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। रबी सीजन की तैयारियों के बीच सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ने लगी है। किसानों का कहना है कि समय पर बिजली नहीं मिलने से खेतों में सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में रात के समय बिजली गुल होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कुछ स्थानों पर दो से आठ घंटे तक बिजली कटौती होने की बात कही जा रही है। इससे खेती के साथ घरेलू कामकाज और आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।
    मंदसौर जिले में बिजली कटौती के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए। गरोठ सुवासरा बालागुड़ा और शामगढ़ में किसानों ने बिजली ग्रिडों का घेराव किया। गरोठ-भोपाल रोड पर करीब तीन घंटे तक चक्काजाम रहा। मंदसौर विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान विधायक और अधीक्षण यंत्री के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने बिजली आपूर्ति में सुधार की मांग करते हुए कहा कि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
    राजगढ़ जिले में भी बिजली कटौती को लेकर नाराजगी देखने को मिली। करेड़ी गांव और ढाबला जोड़ पर पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर ने ग्रामीणों के साथ चक्काजाम किया। उन्होंने अधिकारियों से बिजली कटौती की शिकायत की और समस्या दूर नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। नवरात्रि के दौरान आरती के समय बिजली कटने को लेकर भी सवाल उठाए गए। सीहोर जिले के बिलकिसगंज में ग्रामीणों ने विद्युत केंद्र का घेराव किया जबकि बड़वानी में किसानों ने कार्यकारी यंत्री कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया। धार जिले के मनावर में विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कलेक्टर को पत्र लिखकर बिजली समस्या की ओर ध्यान दिलाया।
    आगर मालवा में ग्रामीणों ने चक्काजाम किया तो झाबुआ और खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैलियां निकालकर विरोध दर्ज कराया। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में ज्ञापन सौंपा गया जबकि बुरहानपुर में किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर बिजली कटौती का मुद्दा उठाया। लगातार सामने आ रही शिकायतों के कारण मामला कैबिनेट बैठक तक पहुंच गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा समेत कई मंत्रियों ने अपने क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्याएं बताईं। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया।
    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अधिकारियों को रबी सीजन में किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव और बिजली उत्पादन ट्रांसमिशन तथा पावर मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियों के अधिकारियों को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा है। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक प्रदेश में बिजली की मांग में अचानक तेजी आई है। 11 अक्टूबर को मांग करीब 16 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह लगभग 11 हजार मेगावाट थी। यानी एक साल में मांग में करीब 38 से 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
    सरकार के सामने अब बढ़ती मांग के बीच बिजली उत्पादन और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। अधिकारियों को उत्पादन बढ़ाने कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर आ रही बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय किसान संघ ने भी दशहरे तक बिजली समस्या का समाधान करने का अल्टीमेटम दिया है। रबी की बुवाई का समय नजदीक होने के कारण आने वाले दिनों में बिजली की जरूरत और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में किसानों और ग्रामीणों की नजर सरकार के आश्वासन तथा ऊर्जा विभाग के निर्देशों के असर पर टिकी है। अब देखना होगा कि प्रदेश में बिजली कटौती पर रोक लगाने और गांवों में नियमित आपूर्ति बहाल करने के लिए सरकार कितनी जल्दी प्रभावी कदम उठाती है।

  • इंडस्ट्रियल एरिया में मनमाने आवासीय निर्माण पर रोक, जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर तय, पुराने निर्माण सुरक्षित

    इंडस्ट्रियल एरिया में मनमाने आवासीय निर्माण पर रोक, जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर तय, पुराने निर्माण सुरक्षित


    भोपाल । मध्य प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय परियोजनाओं के विकास और औद्योगिक जमीन के आवंटन को लेकर राज्य सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब औद्योगिक क्षेत्रों में नई आवासीय परियोजनाओं के लिए रो-हाउस और अलग-अलग आवासीय प्लॉट बनाने की अनुमति नहीं होगी। यहां केवल बहुमंजिला फ्लैट या समूह आवास परियोजनाएं ही विकसित की जा सकेंगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन के इस्तेमाल को व्यवस्थित करना और आवासीय निर्माण को तय मानकों के अनुरूप रखना है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। नए नियम केवल नई परियोजनाओं पर लागू होंगे। पहले से संचालित आवासीय योजनाओं और मौजूदा निर्माण पर इनका असर नहीं पड़ेगा।
    नई व्यवस्था के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लैट आधारित आवासीय परियोजनाओं के तहत सिंगल बेडरूम और डबल बेडरूम की इकाइयां बनाई जा सकेंगी। इसके अलावा छात्रावास और उनसे जुड़ी सामाजिक सुविधाओं के विकास की भी अनुमति होगी। ये प्रावधान अधिसूचित आवासीय भूमि पर विकसित होने वाली परियोजनाओं के साथ औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन पर बनाई जाने वाली कैप्टिव आवासीय सुविधाओं पर भी लागू होंगे। हालांकि किसी भी परियोजना का निर्माण शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना जरूरी होगा। निर्माण कार्य मास्टर प्लान और विकास योजना के साथ भवन उपविधियों तथा भूमि आवंटन की शर्तों के अनुसार करना होगा। अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन भी अनिवार्य रहेगा।
    सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की कीमत तय करने का आधार भी निर्धारित किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि इस गणना के बाद भी जमीन की कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं रखी जा सकेगी। यदि तय प्रक्रिया के अनुसार मूल्य इससे कम निकलता है तो मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से कीमत बढ़ाने का अधिकार होगा।
    भूमि आवंटन में निवेश की सीमा से अधिक जमीन मांगने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित निवेश के आधार पर जितनी जमीन पर छूट मिल सकती है उससे अधिक आवंटित क्षेत्रफल पर छूट नहीं दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है तो 20 हेक्टेयर तक ही छूट मिलेगी। शेष पांच हेक्टेयर पर यह लाभ लागू नहीं होगा। नियमों में 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर प्रीमियम की गणना के दौरान जमीन के मूल्य में 50 प्रतिशत छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि मूल्य पर 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान दिया गया है।
    औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन का पूरा उपयोग नहीं होने पर अनुपयोगी हिस्से के हस्तांतरण की व्यवस्था भी तय की गई है। इसके तहत संचालित इकाई अपनी आवंटित जमीन में से अधिकतम 50 प्रतिशत या कम से कम 5000 वर्गमीटर तक अनुपयोगी भूमि को अलग सड़क मार्ग उपलब्ध होने की शर्त पर विभाजित कर दूसरे पक्ष को हस्तांतरित कर सकेगी। इसके लिए मूल आवंटी को हस्तांतरण की तारीख तक भू-भाटक और संधारण शुल्क समेत सभी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। आवंटन अभिलेख में जरूरी संशोधन के साथ समर्पण अभिलेख निष्पादित और पंजीकृत कराना भी अनिवार्य होगा।
    नए नियमों में भूमि और भवन आवंटन के लिए एमपीआईडीसी के अधिकारियों के अधिकार भी निर्धारित किए गए हैं। औद्योगिक भवनों का आवंटन क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक प्रयोजन के लिए 10000 वर्गमीटर तक जमीन आवंटित करने का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को दिया गया है जबकि इससे अधिक क्षेत्रफल के आवंटन का अधिकार प्रबंध संचालक के पास रहेगा। इसके अलावा सार्वजनिक निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर औद्योगिक आवास परियोजनाएं शुरू करने का प्रावधान भी किया गया है।
    सरकार ने निजी औद्योगिक पार्कों के साथ निर्यात पार्कों और प्लग-एंड-प्ले तथा लॉजिस्टिक पार्कों के लिए भी दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। निजी डेवलपर को परियोजना का विकास अपने खर्च और जोखिम पर करना होगा। जरूरत पड़ने पर वह विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी बना सकेगा और परियोजना की मान्यता तथा प्रोत्साहन संबंधी प्रावधानों के लिए एमपीआईडीसी के साथ समझौता कर सकेगा। कुल मिलाकर नए नियम औद्योगिक जमीन के उपयोग और आवंटन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में उठाया गया कदम हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इनका प्रभाव नई परियोजनाओं पर ही पड़ेगा और पहले से बने आवासीय परिसरों या वहां रह रहे लोगों को इससे प्रभावित नहीं किया जाएगा।