Category: Madhya Pradesh

  • उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील

    उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील


    उज्जैन ।उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी और भारी माला पहनाने पर 1 जनवरी से रोक लगा दी गई है। इस फैसले के बाद भक्तों को मंदिर प्रशासन की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अब महाकाल के लिए अजगर माला जैसी भारी माला न खरीदें। यह कदम मंदिर के संरक्षण और उसके दीर्घकालिक रखरखाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने भक्तों को सूचित करने के लिए मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से लगातार उद्घोषण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंदिर समिति ने भक्तों से अपील की है कि वे अब केवल फूलों की छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित करें। यह निर्णय मंदिर के संरक्षात्मक प्रयासों का हिस्सा हैजो मंदिर परिसर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखने के लिए लिए गए हैं।

    नए नियमों का उद्देश्य और कारण

    यह कदम मंदिर के संरक्षकों और विशेषज्ञों की सलाह पर उठाया गया है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए कुछ वर्षों पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थीजिसमें मंदिर की संरक्षा और उसे सुरक्षित रखने के उपायों की मांग की गई थी। इस याचिका के बादसुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की थीजिन्होंने मंदिर के संरक्षण पर गहन अध्ययन किया और कई सुझाव दिए।

    विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के संरक्षात्मक पहलुओं की जांच शुरू कीजिसमें यह पाया गया कि भारी फूलों की माला पहनाने से मंदिर की संरचना और विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित किए जाएंताकि मंदिर का संरचनात्मक नुकसान रोका जा सके और उसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार रहे।

    महाकालेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भारत के धार्मिक मानचित्र पर अत्यधिक महत्व है। यह मंदिर हिंदू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे विशेष रूप से शिव पूजा के लिए अत्यधिक पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ हर दिन लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैंऔर भगवान महाकाल की उपासना में लीन रहते हैं। इस मंदिर का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से हैबल्कि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।

    मंदिर प्रशासन का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए इस तरह के उपायों की आवश्यकता समय-समय पर महसूस की जाती रही है। खासकर जब बड़े पैमाने पर श्रद्धालु आते हैंतो छोटे-छोटे उपाय भी मंदिर की संरचना और मूर्तियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    भविष्य में और क्या बदलाव हो सकते हैं

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन द्वारा यह कदम केवल फूलों की माला पर रोक लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अलावामंदिर प्रशासन द्वारा अन्य संरक्षात्मक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। मंदिर में होने वाली पूजा-पाठ की विधियोंश्रद्धालुओं के आने-जाने के तरीकोंऔर अन्य वस्तुओं के अर्पण की प्रक्रिया पर भी सुधार किए जा सकते हैंताकि मंदिर का संरचनात्मक क्षरण और धार्मिक महत्व दोनों की सुरक्षा की जा सके।

    मंदिर समिति का कहना है कि भविष्य में अन्य उपायों पर भी काम किया जाएगाताकि महाकालेश्वर मंदिर की भव्यता और शुद्धता बनी रहे। इस निर्णय के माध्यम से न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ेगीबल्कि यह समाज में पर्यावरण और संरक्षा के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी देगा। अंतत यह कदम महाकालेश्वर मंदिर के संरक्षण और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैजो धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए आवश्यक है।

  • जबलपुर में बाबरी मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन: शौचालय के बाहर बाबर के नाम के लगाए गए पोस्टर

    जबलपुर में बाबरी मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन: शौचालय के बाहर बाबर के नाम के लगाए गए पोस्टर


    जबलपुर । जबलपुर में हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भंवरताल कल्चलर स्ट्रीट पर एक प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के विरोध में नारेबाजी की और कुछ विवादास्पद पोस्टर भी लगाए। ये पोस्टर सुलभ शौचालय के बाहर लगाए गए थेजिनमें बाबर के नाम की तस्वीरें और आपत्तिजनक संदेश लिखे गए थे।

    सूचना मिलते ही ओमती थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों के अनुसारइस तरह के प्रदर्शन और पोस्टर का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को भड़काना और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ना हो सकता है। हालांकिपुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और संबंधित कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है।

    हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी विकास खरे ने इस प्रदर्शन को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के खिलाफ एक विरोध के रूप में प्रस्तुत किया। खरे ने कहा कि “पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जा रहा हैजो निंदनीय है। यह हमारे देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के खिलाफ हैऔर हम इसका विरोध करते हैं।” उनके मुताबिकइस प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने देशभर में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है।

    इसके अलावाप्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर गलत संदेश फैला रहे हैं और इससे देश के हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा रहा है। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारत की धार्मिक एकता को कमजोर करेगाऔर इस पर बडे़ पैमाने पर विरोध होना चाहिए।

    वहींइस प्रदर्शन के बाद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इसका विरोध किया है। उनका मानना है कि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन समाज में तनाव पैदा करते हैं और धार्मिक घृणा को बढ़ावा देते हैं। कुछ लोगों ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से केवल सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचता है।

    किसी भी प्रकार के धार्मिक या सांप्रदायिक विवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भारत के संवेदनशील समाज के लिए खतरे का संकेत हो सकती हैं। भारत में धार्मिक और सांप्रदायिक एकता को बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को एक दूसरे के विश्वास और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

    पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और ऐसे प्रदर्शनों को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के विवादास्पद प्रदर्शन और पोस्टर लगाने से किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सकता हैजो कि कानूनन गलत है।

    अंततःयह घटनाएं यह दर्शाती हैं कि आज भी हमारे समाज में सांप्रदायिक मुद्दे अत्यधिक संवेदनशील हैंऔर इन्हें समझदारी और संयम से हल किया जाना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि हमारी एकता और अखंडता ही हमें मजबूत बनाती हैऔर हर किसी को अपने विश्वास और विचारों का सम्मान करते हुए एक साथ जीने की कोशिश करनी चाहिए।

  • रतलाम कलेक्ट्रेट में हाई वोल्टेज ड्रामा: कोर्ट ने प्रेमिका को नारी निकेतन भेजा, प्रेमी अस्पताल में भर्ती

    रतलाम कलेक्ट्रेट में हाई वोल्टेज ड्रामा: कोर्ट ने प्रेमिका को नारी निकेतन भेजा, प्रेमी अस्पताल में भर्ती


    रतलाम । रतलाम कलेक्ट्रेट (Ratlam Collectorate)में मंगलवार को प्रेमी-प्रेमिका(boyfriend girlfriend) का ऐसा हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ कि पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई. मामला तब शुरू हुआ जब स्टेशन रोड थाना पुलिस एक 19 साल के युवक और उसकी 19 वर्षीय प्रेमिका को अपर कलेक्टर(Additional Collector) कोर्ट में लेकर पहुंची. युवती के परिवार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई थी, जिसके बाद पुलिस दोनों को ढूंढकर कलेक्ट्रेट लाई.

    कोर्ट में पता चला कि युवक सिर्फ 19 साल का है. प्रेमी-प्रेमिका दोनों ने 2 दिसंबर को लव मैरिज की थी, लेकिन उम्र के कारण कोर्ट ने शादी की वैधता पर सवाल उठाए. युवती की इच्छा जानने के बाद एडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने उसे उज्जैन नारी निकेतन भेजने का आदेश दे दिया.

    प्रेमी-प्रेमिका का हाई वोल्टेज ड्रामा
    फैसला सुनते ही युवक और उसके परिजन विरोध में खड़े हो गए. जब नारी निकेतन की गाड़ी युवती को लेने पहुंची, तब भी युवक ने कोर्ट परिसर में जमकर हंगामा किया. वह बार-बार अपनी पत्नी को अपने साथ भेजने की मांग करता रहा. एक घंटे तक समझाइश का दौर चलता रहा, मगर युवक शांत नहीं हुआ.

    लगातार रोने-चिल्लाने और तनाव के चलते अचानक युवक की तबीयत बिगड़ गई. वह बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसके बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उसे जिला अस्पताल भिजवाया. फिलहाल युवक का इलाज रतलाम के सरकारी अस्पताल में चल रहा है.

    कोर्ट ने प्रेमिका को नारी निकेतन भेजा
    युवक के परिजनों का कहना है कि दोनों ने अपनी मर्जी से शादी की है और प्रशासन को युवती को नारी निकेतन भेजने की जरूरत नहीं थी. वे चाहते हैं कि उनकी बहू जल्द से जल्द वापस घर आए. अपर कलेक्टर शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की गई है और युवती की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे नारी निकेतन भेजा गया है.

  • इंदौर में रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी यातायात व्यवस्था में बदलाव फूटी कोठी से महूनाका तक रहेगा बंद

    इंदौर में रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी यातायात व्यवस्था में बदलाव फूटी कोठी से महूनाका तक रहेगा बंद


    इंदौर । इंदौर में भगवान रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी शुक्रवार 15 दिसंबर को अल सुबह तड़के तीन बजे से शुरू होगी। इस दौरान शहर के पश्चिमी क्षेत्र में भक्तों की एक बड़ी संख्या यात्रा में भाग लेगी। यह प्रभातफेरी रणजीत हनुमान मंदिर से शुरू होकर द्रविड़ नगर रणजीत हनुमान रोड महूनाका चौराहा अन्नपूर्णा रोड महावर नगर उषा नगर चौराहा दशहरा मैदान के पास स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर नरेंद्र तिवारी मार्ग आदित्य नर्सिंग होम होते हुए पुनः रणजीत हनुमान मंदिर पर समाप्त होगी। यात्रा के दौरान शहर के प्रमुख मार्गों से यातायात प्रभावित रहेगा जिससे प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए हैं।

    यातायात बंद रहेगा परिवर्तित मार्गों का उपयोग करें

    प्रभातफेरी के दौरान शहर में यातायात को सुचारू बनाने के लिए पुलिस ने महूनाका चौराहा और फूटी कोठी के बीच के मार्ग को तड़के तीन बजे से बंद करने का निर्णय लिया है। ऐसे में जो वाहन चालक फूटी कोठी चौराहा से रणजीत हनुमान मंदिर होते हुए महूनाका चौराहा आना-जाना करना चाहते हैं उन्हें इस समय के दौरान ये मार्ग बंद होने के कारण यात्रा मार्गों को परिवर्तित करना होगा। वाहन चालक फूटी कोठी चौराहा से चंदन नगर चौराहा और गंगवाल चौराहा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।

    इसी तरह यदि किसी को जूनी इंदौर भंवरकुआं की ओर जाना है तो वे गोपुर चौराहा और चाणक्यपुरी चौराहा से अपने मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। यात्रा के दौरान जब प्रभातफेरी अन्नपूर्णा रोड पर पहुंचेगी तो अन्नपूर्णा रोड और महूनाका चौराहा के बीच भी यातायात बंद रहेगा। ऐसे में यात्री लालबाग से केसरबाग रोड का उपयोग करके अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं।

    पार्किंग व्यवस्था
    पार्किंग की विशेष व्यवस्था भी की गई है ताकि यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु अपने वाहन सुरक्षित स्थानों पर पार्क कर सकें। कलेक्ट्रेट चौराहा से आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन लालबाग परिसर में पार्क कर यात्रा में शामिल हो सकते हैं। गंगवाल की ओर से आने वाले वाहन चालक सराफा स्कूल एमओजी लाइन और शासकीय स्कूल एमओजी लाइन परिसर में अपने वाहन खड़े कर सकते हैं। अन्नपूर्णा से आने वाले यात्री दशहरा मैदान में पार्किंग कर यात्रा में शामिल हो सकते हैं।

    प्रशासन की अपील

    प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे दिए गए परिवर्तित मार्गों का पालन करें और निर्धारित पार्किंग स्थानों पर ही अपने वाहन खड़े करें। इससे यातायात व्यवस्था में सुगमता रहेगी और यात्रा में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सकेगा। प्रशासन ने यह भी कहा है कि यात्रियों को यात्रा के मार्गों में कोई परेशानी न हो इसके लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है और प्रशासन का प्रयास है कि सभी श्रद्धालु अपनी यात्रा आराम से पूरी कर सकें।

    रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी हर साल श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई जाती है। यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम है जो इंदौर शहर की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु शहर भर में फैले मार्गों पर प्रभातफेरी में शामिल होते हैं। प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाएं यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े और आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

    यात्रा की सफलता के लिए सहयोग की अपील

    प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यातायात व्यवस्था में सहयोग करें ताकि इस महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जा सके।

  • मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना 943 किसानों की जमीन अधिग्रहण लेकिन धार जिले में काम बाकी

    मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना 943 किसानों की जमीन अधिग्रहण लेकिन धार जिले में काम बाकी



    इंदौर ।
    मध्य प्रदेश में मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। इस परियोजना के तहत इंदौर जिले के महू तहसील में 18 गांवों के कुल 943 किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जा चुकी है। यह रेल मार्ग महाराष्ट्र से सीधे आंबेडकर नगर स्टेशन को जोड़ेगा जो क्षेत्रीय परिवहन और विकास को एक नई दिशा देने की उम्मीदें जगाता है। परियोजना के तहत खेड़ी इस्तमुरार गांव से भूमि अधिग्रहण की औपचारिक शुरुआत भी हो चुकी है जो इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम है।

    मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना को लेकर अब तक इंदौर जिले में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में कोई बड़ी अड़चन नहीं आई है लेकिन धार जिले में यह कार्य अभी अधूरा है जिससे परियोजना की प्रगति प्रभावित हो रही है। धार जिले में भूमि अधिग्रहण की गति धीमी होने के कारण इस परियोजना की समय-सीमा पर असर पड़ सकता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। सेंधवा की भूमि अधिग्रहण संबंधी फाइल कसरावद प्रशासन को ड्राफ्ट तैयार करने के लिए भेज दी गई है और ड्राफ्ट के अनुमोदन के बाद सेंधवा की अंतिम अधिग्रहण सूची जारी कर दी जाएगी।

    मनोज मराठे जो रेलवे संघर्ष समिति के प्रमुख हैं ने धार जिले में चल रही देरी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इंदौर में रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य नागेश नामजोशी के साथ बैठक की और विभागीय स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग की। मराठे ने कहा कि यदि धार जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कोई और देरी हुई तो इससे परियोजना की शुरुआत में अनावश्यक विलंब हो सकता है जो जनहित में नुकसानदायक हो सकता है।

    मराठे का कहना है कि समिति का प्रयास है कि सभी प्रभावित जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के शीघ्र पूरी हो ताकि मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना समय पर धरातल पर उतर सके और व्यापक जनहित को लाभ पहुंचा सके।

    मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना का महत्व

    यह रेल परियोजना न केवल महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करेगी बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आंबेडकर नगर स्टेशन से रेल मार्ग जुड़ने से न केवल परिवहन की गति बढ़ेगी बल्कि आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना की सफलता इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उम्मीद बन सकती है और यह भारतीय रेल नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

    हालांकि इस परियोजना की प्रगति में कुछ चुनौतियां भी आ रही हैं विशेषकर धार जिले में भूमि अधिग्रहण को लेकर लेकिन उम्मीद की जाती है कि जल्द ही प्रशासन और रेलवे विभाग के प्रयासों से ये समस्याएं हल हो जाएंगी और परियोजना समय पर पूरी होगी। इस तरह मनमाड़-इंदौर रेल परियोजना ना केवल क्षेत्रीय परिवहन को एक नया आयाम देगी बल्कि प्रदेश के विकास में भी अहम योगदान करेगी।

  • जगदीशपुर किला गोंड काल से मुगल दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा और जीर्णोद्धार की नई शुरुआत

    जगदीशपुर किला गोंड काल से मुगल दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा और जीर्णोद्धार की नई शुरुआत


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश का जगदीशपुर किला एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसकी कहानी कई सदियों पुरानी है। 15वीं शताब्दी में गोंड साम्राज्य के 52 किलों में से एक महत्वपूर्ण किला आज भी अपने ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए है। गोंड साम्राज्य के दौरान यह किला विशेष स्थान रखता था और उसकी स्थापत्य कला की अनूठी शैली को यहां देखा जा सकता है। समय के साथ किले का रूप और नाम बदलते रहे लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व में कोई कमी नहीं आई।

    किले की कहानी गोंड साम्राज्य से शुरू होती है जब यहां के वन क्षेत्रों में गोंड शासकों ने स्थानीय सत्ता संभाली थी। संग्रामशाह ने कई किलों का निर्माण कराया था जिनमें से यह किला भी शामिल था। रानी दुर्गावती की पराजय के बाद किला अकबर के अधीन आ गया था। मुगल काल में यह किला देवड़ा राजपूतों का ठिकाना बना और इसे ‘जगदीशपुर’ नाम मिला। बाद में 18वीं शताब्दी में दोस्त मोहम्मद खान ने इसका नाम बदलकर ‘इस्लामनगर’ कर दिया लेकिन आज यह किला जगदीशपुर के नाम से ही प्रसिद्ध है।

    किले की संरचना और स्थापत्य की खासियत

    जगदीशपुर किले की संरचना और सुरक्षा प्राचीर आज भी अपनी भव्यता बनाए हुए हैं। किले के चारों ओर मजबूत बुर्ज बनाए गए हैं जिनका अलंकरण गोंड स्थापत्य कला को दर्शाता है। बुर्जों से दुश्मनों पर सटीक निशाना साधने की व्यवस्था थी। किले के परिसर में तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जबकि चौथा द्वार शाही परिसर का हिस्सा बन चुका है। किले में गोंड महल और शाही परिसर दो महत्वपूर्ण निर्माण हैं जिन्हें आंतरिक प्राचीर से सुरक्षित किया गया था।

    गोंड महल – 15वीं शताब्दी का प्रतीक

    गोंड महल किले का सबसे पुराना महल है जो 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बना था। यह महल उस समय की शाही भव्यता का प्रतीक था। महल में तीन मंजिलें हैं जिनमें विशाल आंगन मेहराबदार दालान आवासीय कक्ष दीवाने-आम फव्वारा स्नानगृह अश्वशाला और बाग हैं। लताबल्लरी युक्त मेहराबें और नक्काशीदार झरोखे महल की भव्यता को आज भी जीवंत रखते हैं।

    रानी महल – गोंड और मुगल स्थापत्य का संगम

    रानी महल किले की एक और प्रमुख संरचना है। इसकी मूल संरचना 16वीं शताब्दी की गोंड शैली में बनी है जबकि 17वीं शताब्दी में इसमें मुगल शैली की बहुकोणीय मेहराबें जोड़ी गईं। यह महल कभी देवड़ा राजपूत जमींदारों और बाद में दोस्त मोहम्मद खान का निवास भी रहा। रानी महल की मरम्मत तो हुई है लेकिन इसकी मूल संरचना को पूरी तरह से बरकरार रखा गया है।

    चमन महल – शाही परिसर का एक अनमोल रत्न

    रानी महल के उत्तर में स्थित चमन महल शाही परिसर की शोभा है। यह महल राजपूत-मुगल शैली का बेहतरीन उदाहरण है जिसमें सुंदर उद्यान गुंबद नुकीली आमेर शैली की अर्ध-मेहराबें और मुगल शैली का हमाम विशेष आकर्षण हैं। यहां स्थित चारबाग शैली का उद्यान और फव्वारे कश्मीर के मुगल बागों की याद दिलाते हैं।

    जीर्णोद्धार की प्रक्रिया

    1977 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किले को अधिगृहीत किया गया था और तब से इसे संरक्षित करने के प्रयास जारी हैं। हाल ही में पुरातत्व विभाग ने रानी महल और चमन महल का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण पूरा किया है। डॉ. मनीषा शर्मा के अनुसार इस वर्ष जून में रानी महल और चमन महल का पुनरुद्धार पूरा हुआ है। अगले चरण में किले के मुख्य प्रवेश द्वार परकोटा दीवार और बुर्जों को उनके मूल स्वरूप में लाने का कार्य शुरू होगा।

    हृदय दृश्यम संगीत समारोह

    किले के जीर्णोद्धार के बाद 6 दिसंबर को किले में पहली बार भव्य हृदय दृश्यम संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह समारोह किले की ऐतिहासिक धरोहर को और भी खास बनाएगा। इसके साथ ही हस्तशिल्प और व्यंजन मेले का आयोजन भी किया जाएगा जो पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण होगा। जगदीशपुर किला न केवल गोंड साम्राज्य की शान है बल्कि मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और स्थापत्य धरोहर का अहम हिस्सा भी है। इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार के प्रयास किले की भव्यता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

  • सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर

    सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो साल जल्द ही पूरे होने वाले हैं। दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय बड़े नाम खासकर शिवराज सिंह चौहान जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे चर्चा में थे। इस वजह से जब डॉ. यादव ने पद संभाला तो उनके नेतृत्व को लेकर कुछ हिचक और आशंकाएं थीं। लेकिन अब उनके दो साल के कार्यकाल ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है और उन्होंने मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में कई नए बदलाव हुए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में विकास की नई दिशा दिखाने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। केन-बेतवा लिंक परियोजना की शुरुआत भी प्रदेश से हुई है जो बुंदेलखंड के पिछड़े इलाकों में विकास की नई राह खोलेगी। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है जैसे प्रमोटी अधिकारियों को हटाकर युवा अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपना जिससे प्रदेश में बेहतर प्रशासन का माहौल बना है।

    डॉ. यादव ने रोजगार सृजन के मामले में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने सिर्फ एक साल में 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इसके अलावा सात लाख करोड़ के निवेश से नए उद्योग शुरू किए गए हैं और निजी क्षेत्र में दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी लगातार काम हो रहा है। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि 2028 तक एक करोड़ हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी जिससे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    बिजली क्षेत्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश अच्छा प्रदर्शन कर रहा है जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। प्रदेश में अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25 से अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसके अलावा सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
    श्री महाकाल महालोक के उद्घाटन के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है। 2023 में जहां 5 लाख पर्यटक उज्जैन आए थे वहीं 2024 में यह संख्या सात करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश में 12 लोक बन रहे हैं जिससे मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो रही है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में समग्र विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करना है जिसे वह अपनी सरकार के अगले दो सालों में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य का विकास निश्चित रूप से एक नए मुकाम पर पहुंचने की ओर अग्रसर है।

  • बंद हुई कंपनियों के वाहनों के लिए एचएसआरपी बनवाना हुआ मुश्किल भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिक परेशान

    बंद हुई कंपनियों के वाहनों के लिए एचएसआरपी बनवाना हुआ मुश्किल भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिक परेशान



    भोपाल ।
    भोपाल में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने की अनिवार्यता अब पुराने वाहन मालिकों के लिए समस्या बन गई है। यह समस्या खासतौर पर उन गाड़ियों के मालिकों के लिए है जो कंपनियां अब बंद हो चुकी हैं या जिन्होंने भारत में अपना कारोबार समेट लिया है। इन गाड़ियों पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने का काम अब नहीं हो पा रहा है क्योंकि एचएसआरपी बनाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों OEM और नंबर प्लेट निर्माता कंपनियों के बीच एक करार एग्रीमेंट होना जरूरी होता है ।
    ऐसी कंपनियों की गाड़ियों के मालिकों को अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इन कंपनियों का कोई प्रतिनिधि या सिस्टम अब उपलब्ध नहीं है। इसका सीधा असर भोपाल में दो हजार से अधिक वाहन मालिकों पर पड़ रहा है जो अपने वाहन पर एचएसआरपी नंबर प्लेट लगाने के लिए आरटीओ और डीलरों के चक्कर काट रहे हैं ।
    लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है। यहां तक कि भोपाल में काम करने वाली प्रमुख नंबर प्लेट निर्माता कंपनियों जैसे रोजमाटा सेफ्टी प्राइवेट लिमिटेड एफटीए और सुजुकी इन कंपनियों की गाड़ियों के लिए एचएसआरपी बनाती हैं लेकिन जिन कंपनियों का अब अस्तित्व नहीं है उनके वाहन मालिकों के लिए यह प्रक्रिया ठप हो चुकी है।
    दरअसल एचएसआरपी व्यवस्था के तहत एक नंबर प्लेट बनाने वाली कंपनी को वाहन निर्माता कंपनी से एक एग्रीमेंट की आवश्यकता होती है जिससे पोर्टल पर डाटा प्रोसेस हो सके। अगर वाहन निर्माता कंपनी बंद हो गई है तो पोर्टल पर उनका डाटा प्रोसेस नहीं हो सकता और इस कारण उन गाड़ियों की नंबर प्लेट बनवाना संभव नहीं होता।
    इस प्रकार उन पुराने वाहनों के मालिकों के लिए जो बंद हो चुकी कंपनियों से संबंधित हैं एचएसआरपी नंबर प्लेट का मिलना एक बड़ा संकट बन गया है। कई वाहन मालिक महीनों से इस समस्या का समाधान ढूंढ़ रहे हैं लेकिन किसी भी तरह का ठोस समाधान सामने नहीं आ पा रहा है। ऐसे में वाहन मालिकों को विभिन्न अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
    इसके अलावा यह भी देखा गया है कि नए नियमों के तहत एचएसआरपी की अनिवार्यता बढ़ने से वाहन मालिकों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं खासकर उन गाड़ियों के मालिकों के लिए जिनकी कंपनियां अब बंद हो चुकी हैं। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक एचएसआरपी सिस्टम को लागू करने का उद्देश्य वाहनों की पहचान को सुनिश्चित करना और सुरक्षा बढ़ाना है लेकिन इस प्रक्रिया में पुराने वाहन मालिकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

  • खजुराहो केबिनेट में बुंदेलखंड को हजारों करोड़ की मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगातें

    खजुराहो केबिनेट में बुंदेलखंड को हजारों करोड़ की मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगातें


    भोपाल! खजुराहो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बुंदेलखंड के लिए केबिनेट बैठक का दिन स्वर्णिम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर को महत्वपूर्ण विकास कार्यों की सौगातें देकर सागर के विकास की नई इबारत लिखी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि केबिनेट में बुंदेलखंड एवं सागर के लिए हजारों करोड़ की सौगातें दी हैं, जिससे सागर विकास के नये आयामों को छुएगा। यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़कर विकास की नई कहानी लिखी जायेगी, वहीं पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास रचने की घोषणा भी हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सागर में 608.93 हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार करोड़ की लागत से नया उद्योग क्षेत्र स्थापित किया जायेगा। इससे 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं दूसरी ओर नौरादेही अभयारण्य में जुलाई माह में 4 चीतों को बसाया जायेगा। इससे क्षेत्र में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि सागर से दमोह फोरलेन सड़क, छतरपुर तथा दमोह में नये मे‍डिकल कॉलेज के लिये नये पदों का सृजन किया जायेगा। साथ ही बीना में 100 बिस्तरीय अस्पताल बनेगा। इससे सागर विकास की ऊँचाइयों तक पहुँचेगा। मंत्री श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सागर तथा बुंदेलखण्ड के लिये दी गई सौगातें विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगी।

    25 हजार करोड़ से विकसित होगा नया औद्यौगिक क्षेत्र

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उद्योगों के लिए भी सागर को विशेष पैकेज प्रदान किया गया है। इसके तहत रिछोड़ा के पास 25 हजार करोड़ की लागत से नया औद्यौगिक क्षेत्र विकसित किया जायेगा, जिसमें लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। मसवासी ग्रंट औद्योगिक क्षेत्र के लिये स्वीकृत विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज में भूमि टोकन शुल्क मात्र एक रुपये प्रति वर्गमीटर, किराया और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूर्ण छूट एवं बिजली दरों में रियायत शामिल है।

    जुलाई माह में आयेंगे नौरादेही में 4 चीते

    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कूनो में चीता लेकर आये थे तो पूरे देश को बड़ी खुशी हुई थी और अब बुंदेलखंड में पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. यादव जुलाई माह में नौरादेही अभयारण्य में 4 चीते छोड़ेंगे, यह हमारे लिए गर्व की बात है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी सागर जिले को बड़ी उपलब्धि है। नौरादेही अभयारण्य को प्रदेश का तीसरा चीता आवास के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। यह क्षेत्र में पर्यावरणीय संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की सकारात्मक पहल है।

    सागर-दमोह फोरलेन निर्माण को 2059 करोड़ मंजूर

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि केबिनेट बैठक में सागर-दमोह मार्ग को 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ विकसित करने के लिए 2059.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। 76.680 किमी लंबे इस मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के अंतर्गत किया जाएगा। परियोजना में 13 अंडरपास, 3 फ्लाईओवर, 9 मिडियन, 1 आरओबी तथा 13 पुल-पुलिया निर्माण का प्रावधान है। भूमि अर्जन और अन्य कार्यों पर 323.41 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इससे सागर दमोह भोपाल जबलपुर जाने वालों के लिए आवागमन सुलभ होगा।

    100 बेड का होगा बीना अस्पताल, पद सृजन को मंजूरी

    स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बीना सिविल अस्पताल की क्षमता 50 से 100 बिस्तर तक बढ़ाने और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी।

  • जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण

    जल जीवन मिशन का कार्य निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2028 के पहले मार्च-2027 में होगा पूर्ण


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे।

    प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

    बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य

    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है।

    वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं।

    विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है।

    ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा।

    बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके।