Category: Madhya Pradesh
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भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट से स्टे हटते ही होगा शिफ्ट, तब तक 13 सख्त शर्तें लागू
भोपाल । भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बैरागढ़ के एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने यहां संचालित 15 पटाखा दुकानों के खिलाफ आदेश जारी करते हुए उन्हें जनसुरक्षा के लिए खतरा माना है। प्रशासन की योजना है कि जबलपुर हाईकोर्ट से संबंधित मामलों में लगा स्थगन हटते ही इस बाजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। तब तक कारोबारियों को सुरक्षा से जुड़ी 13 शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि पटाखों के कारोबार में लापरवाही से आग लगने और बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत इन दुकानों को लोक न्यूसेंस यानी जनसामान्य के लिए परेशानी और खतरे का कारण मानते हुए आदेश जारी किया है। इस मामले से जुड़े 12 रिट याचिका और आठ अवमानना प्रकरण जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित हैं। अदालत ने इन मामलों में अपना आदेश सुरक्षित रखा है और फिलहाल स्थगन भी लागू है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय का स्थगन हटने के बाद दुकानों को अन्य स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। तब तक मौजूदा दुकानदारों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।आदेश के अनुसार कारोबारियों को विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करना होगा। दुकानों में अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण पर भी ध्यान देना होगा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। तय ध्वनि सीमा से अधिक आवाज करने वाले पटाखों और कार्बाइड गन जैसे प्रतिबंधित सामान की बिक्री पर रोक रहेगी। दुकानदारों को अग्नि सुरक्षा की मॉक ड्रिल कराने के साथ फायर एनओसी और विद्युत सुरक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत करने होंगे।प्रशासन ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी संबंधित तहसीलदार नगर निगम के उपायुक्त और थाना प्रभारी को सौंपी है। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर दुकान मालिक को छह महीने तक के कारावास का दंड भुगतना पड़ सकता है। इन प्रावधानों का उद्देश्य बाजार में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।एसडीएम ने अपने आदेश में 12 जून 2026 की रात सोनी पटाखा दुकान में लगी भीषण आग का भी उल्लेख किया है। इस दुकान के पास पेट्रोल पंप स्थित है और आग वहां तक पहुंचने की आशंका पैदा हो गई थी। प्रशासन के मुताबिक यदि यह हादसा दिन के समय होता तो बड़े स्तर पर जनहानि हो सकती थी। हलालपुरा मार्केट के आसपास पटाखा दुकानों के अलावा बसों का संचालन और चार्टर बसों का टर्मिनल भी है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में यात्रियों और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन सकती है।हलालपुरा पटाखा मार्केट की सुरक्षा को लेकर चिंता नई नहीं है। वर्ष 2024 में हरदा पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद भोपाल में पटाखा दुकानों और गोदामों की जांच की गई थी। उस दौरान कुछ स्थानों पर तय सीमा से अधिक स्टॉक और सुरक्षा नियमों में खामियां सामने आई थीं। तत्कालीन बैरागढ़ एसडीएम आदित्य जैन ने भी हलालपुरा बाजार को खतरनाक बताते हुए दुकानों और गोदामों को शहरी सीमा से बाहर गैर आवासीय क्षेत्र में स्थानांतरित करने की जरूरत बताई थी। जांच में आसपास रहवासी इलाकों मैरिज गार्डन और पेट्रोल पंप की मौजूदगी को जोखिम का कारण माना गया था।बताया जाता है कि वर्ष 1997 से पहले भोपाल का थोक पटाखा बाजार कबाड़खाना क्षेत्र में था। वहां एक हादसे के बाद प्रशासन ने कारोबारियों को हलालपुरा में जगह दी थी। उस समय आसपास आबादी कम थी लेकिन अब क्षेत्र में रिहायशी बस्तियां और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ चुकी हैं। ऐसे में पटाखा बाजार की सुरक्षा और स्थानांतरण का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है और तब तक प्रशासन ने कारोबारियों को सुरक्षा संबंधी सभी शर्तों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। -

विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर भोपाल में जागरूकता अभियान, आरएनटीयू के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से समझाए एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल के खतरे
मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल के चिकलोद गांव में एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की ओर से विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 और राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को दवाओं के जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान स्टेशनरी सामग्री का वितरण भी किया गया।कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की प्राचार्य डॉ. दुर्गा पांडेय के मार्गदर्शन में हुआ। इसका समन्वय राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गब्बर सिंह और डॉ. रेखा गुप्ता ने किया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना और संक्रमणों के उपचार में सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी देना था।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना’ रखी गई है। इसी उद्देश्य के अनुरूप कार्यक्रम में दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में फार्मासिस्टों की भूमिका पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को समझाया कि दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी है और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध के कारणों और संभावित दुष्परिणामों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल, बिना चिकित्सकीय परामर्श के इनका सेवन और उपचार संबंधी निर्देशों की अनदेखी इस समस्या को बढ़ा सकती है। ऐसी स्थिति में संक्रमणों का उपचार अधिक कठिन हो सकता है। कार्यक्रम में लोगों को इस चुनौती से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई।
विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवाएं न लें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही उनका उपयोग करें। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। दवाओं के इस्तेमाल में सावधानी बरतकर इस समस्या को नियंत्रित करने के प्रयासों में सहयोग किया जा सकता है।
स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के साथ कार्यक्रम में सामाजिक उत्तरदायित्व को भी महत्व दिया गया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को स्टेशनरी सामग्री वितरित की। इस गतिविधि के माध्यम से सामुदायिक सहयोग, सामाजिक संवेदनशीलता और जनसेवा के महत्व को सामने रखा गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी का उद्देश्य उन्हें सामाजिक जरूरतों से जोड़ना और जनहित से जुड़े कार्यों के प्रति प्रोत्साहित करना भी था।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.पी. दुबे ने कहा कि जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग हैं। उनके अनुसार, इस तरह की पहल विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ती है और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करती है।
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी ने भी दवाओं के उचित उपयोग और एंटीबायोटिक के प्रति जागरूकता को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं और उन्हें जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।
यह कार्यक्रम फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश राज्य फार्मेसी परिषद के जनस्वास्थ्य जागरूकता तथा फार्मासिस्टों की सामाजिक भूमिका से जुड़े उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया। इसके माध्यम से जिम्मेदार दवा उपयोग, संक्रमणों की रोकथाम और समुदाय की सहभागिता का संदेश दिया गया।
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सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग
मध्य प्रदेश। के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले में विरोध तेज हो गया है। खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के एक हजार से ज्यादा आदिवासी न्याय की मांग को लेकर भोपाल की ओर कूच कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही है। इस आंदोलन के कारण प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है।आदिवासियों की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन शुरुआत में कोसमी गांव के 12 आदिवासी परिवारों को बेदखल किए जाने के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन अब आसपास के दर्जनभर गांवों के लोग भी इसमें शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उनके साथ हुई कार्रवाई की जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।
इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। आयोग की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे। प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई में उनकी फसलें बर्बाद कर दी गईं और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गांव में लगातार तीन दिन तक धरना दिया था। उनका कहना है कि मकान टूटने और फसलें नष्ट होने से परिवारों के सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
घटना के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक रमाकांत भार्गव प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए धरने पर बैठकर प्रभावित परिवारों की शिकायतें सुनी थीं। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया।
दूसरी ओर, प्रशासन की रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर कब्जे को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग की ओर से यह कहा गया है कि आरक्षित वन भूमि पर पौधे काटकर अतिक्रमण किया गया था। इस तरह मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और प्रशासन का पक्ष अलग-अलग हैं। जमीन पर कब्जे की स्थिति और कार्रवाई से जुड़े मुद्दे विवाद के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।
प्रदर्शनकारी आदिवासी परिवारों की मांग है कि जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, उसका पट्टा दिया जाए। इसके अलावा बेदखल परिवारों के पुनर्वास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने तथा नष्ट हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की मांग भी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें रहने तथा आजीविका के लिए उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।
आंदोलन में शामिल लोग कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। भोपाल कूच का उद्देश्य मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें और जमीन से संबंधित दस्तावेज रखना है। अब इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मांगे गए जवाब, प्रशासन के पक्ष और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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भोपाल में आदिवासी छात्रों के ‘जय जोहार’ नारे पर कथित गाली-गलौज का वीडियो वायरल, मिसरोद थाना प्रभारी निलंबित, उमंग सिंघार ने मांगी एफआईआर
मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। छात्रों के ‘जय जोहार’ के नारे लगाने के दौरान मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर गाली-गलौज करने का आरोप लगा है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, आदिवासी छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि छात्रों को जबरन पुलिस वाहन में बैठाया गया। जब छात्र वाहन में बैठ रहे थे, तब वे ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे।इसी दौरान वाहन के बाहर मौजूद मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार पर छात्रों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और गालियां देने का आरोप लगा।घटनास्थल पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया। पुलिस विभाग के एडीसीपी अनिल कुमार शर्मा ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें निरीक्षक रतन सिंह परिहार आदिवासी छात्रों के संबंध में टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो का संज्ञान लेने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया। एडीसीपी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।
इस घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्र व्यवहार को गंभीर और निंदनीय बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। सिंघार का कहना है कि आदिवासी छात्रों का अपमान करने के आरोपों की जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।उन्होंने मांग उठाई कि मामले में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस तरह उन्होंने घटना को आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है।
फिलहाल पुलिस ने थाना प्रभारी को निलंबित करने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि प्रदर्शन के समय वास्तव में क्या हुआ था और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही। मामले में एफआईआर दर्ज होने और जांच के अंतिम निष्कर्षों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
भोपाल में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया यह मामला अब पुलिस विभाग की कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर चर्चा में है। एक ओर थाना प्रभारी को निलंबित कर जांच शुरू की गई है, वहीं दूसरी ओर उमंग सिंघार ने कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। -

मुरैना में ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और सवारी की मौत
मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बानमौर चौराहे के पास गुरुवार को ट्रक की टक्कर से ई-रिक्शा चालक और उसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई। पीछे से आए तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर लगने से ई-रिक्शा आगे चल रहे ट्रक से जा भिड़ा। हादसे के बाद टक्कर मारने वाला चालक अपना ट्रक छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक जब्त कर चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, हादसा गुरुवार सुबह बानमौर थाना क्षेत्र में हुआ। गंगाराम पुरा निवासी भूरा श्रीवास ई-रिक्शा लेकर जा रहा था। उसके साथ रिश्तेदार गिर्राज श्रीवास भी सवार था। दोनों का ई-रिक्शा जब आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बानमौर नगर के मुख्य चौराहे पर पहुंचा, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसे टक्कर मार दी।
टक्कर के कारण ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रक से जा भिड़ा। इसी दौरान पीछे से टक्कर मारने वाले ट्रक ने ई-रिक्शा को कुचल दिया। हादसे में चालक भूरा श्रीवास और सवारी गिर्राज श्रीवास की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
दुर्घटना के बाद बानमौर चौराहे पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रक चालक वाहन को बीच रास्ते में छोड़कर मौके से भाग निकला। घटना की सूचना मिलने पर बानमौर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए नूराबाद चिकित्सालय भेजे।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर थाना परिसर में सुरक्षित रखवा दिया है। फरार चालक की तलाश की जा रही है। हादसे की जानकारी मिलने पर मृतकों के परिजन भी घटनास्थल पर पहुंच गए। दुर्घटना के कारण मुरैना से ग्वालियर की ओर जाने वाले मार्ग पर कुछ देर तक यातायात बाधित रहा।
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मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी डॉक्यू-सीरीज में दिखाई गई
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। बुधवार को आए इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस हत्याकांड की घटनाओं, पुलिस जांच और आरोपियों से जुड़े घटनाक्रम को ‘हनीमून से हत्या’ नाम की डॉक्यू-सीरीज में भी प्रस्तुत किया गया है।
यह डॉक्यू-सीरीज पांच गंभीर आपराधिक मामलों पर आधारित है। इसमें उन महिलाओं की घटनाओं को दिखाया गया है, जिन्होंने अपने पतियों की हत्या की। घटनाओं को समझाने के लिए पुलिस जांच, संबंधित लोगों के साक्षात्कार और घटनाओं के पुनर्निर्माण का सहारा लिया गया है। मेरठ का ब्लू ड्रम हत्याकांड भी इसमें शामिल है। इस मामले में हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।
यह घटना 3 मार्च 2022 की बताई गई है। सौरभ राजपूत लंदन में रहते थे। आरोपों के मुताबिक, उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी। बताया गया कि हत्या के बाद दोनों पूरी रात शव के साथ घर में रहे। अगले दिन उन्होंने चाकू, सीमेंट और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा। इसके बाद शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें तकिए के कवर में लपेटकर ड्रम में रखा गया। शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट का घोल भी डाला गया।
आरोपियों की योजना ड्रम को किसी दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की थी, लेकिन उसका वजन अधिक होने के कारण वे उसे घर से बाहर नहीं ले जा सके। परिणामस्वरूप ड्रम उसी मकान में छिपा रह गया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड घूमने जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
बताया गया कि 4 मार्च को दोनों ने ड्राइवर अजब सिंह के साथ कैब बुक की और घूमने निकल गए। इस दौरान वे मनाली, शिमला और कसोल गए। ड्राइवर के अनुसार, दोनों ने यात्रा के दौरान शराब पी और छुट्टियां बिताईं। 17 मार्च को मेरठ लौटने के बाद मुस्कान ने अपनी मां कविता को फोन कर सौरभ की हत्या की जानकारी दी। उसने बताया कि शव किराए के मकान में पड़ा है।
इसके बाद मुस्कान के पिता प्रमोद ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मकान पर पहुंचकर तलाशी ली, जहां नीले ड्रम के अंदर सौरभ का शव बरामद हुआ। जांच के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया। 19 मार्च को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
इस मामले में एक अन्य घटनाक्रम तब सामने आया, जब जेल में रहते हुए मुस्कान ने 24 नवंबर को एक बेटी को जन्म दिया। यह उसकी दूसरी बेटी बताई गई है। उसकी पहली बेटी पीहू अपने दादा-दादी के पास रह रही है। इस घटना ने मामले से जुड़े पारिवारिक पहलुओं को भी चर्चा में ला दिया था।
अब जिला अदालत द्वारा मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद यह हत्याकांड फिर सुर्खियों में है। इस मामले को विस्तार से समझने के इच्छुक दर्शक ‘हनीमून से हत्या’ डॉक्यू-सीरीज देख सकते हैं, जिसमें अपराध की घटनाओं, जांच और उनसे जुड़े सवालों को प्रस्तुत किया गया है। -

सिंगरौली में मासूम के साथ कथित अत्याचार का मामला, बिगड़ी बच्ची की तबीयत, अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में उपचार जारी
सिंगरौली । सिंगरौली में 8 साल की मासूम से कथित प्रताड़ना का मामला, गंभीर हालत में अस्पताल में इलाज जारी
मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय बालिका के साथ कथित दुष्कर्म और शारीरिक प्रताड़ना का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत में बालिका के पिता पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है जबकि उसकी सौतेली मां पर मारपीट करने और गर्म चिमटे से प्रताड़ित करने के आरोप हैं। बालिका की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद उसे जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसे गंभीर संक्रमण और दोनों किडनियों में पथरी की समस्या है। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। मामले में बालिका की सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर बाल कल्याण समिति तथा संबंधित अधिकारी भी निगरानी कर रहे हैं।
शिकायत के मुताबिक ग्राम गुलहरिया निवासी प्रेम सिंह गोड़ ने अपनी आठ वर्षीय भतीजी के लापता होने के बाद उसकी तलाश शुरू की थी। 22 अगस्त 2026 को उन्हें सूचना मिली कि बालिका झगरौहा स्कूल के पास मौजूद है। वहां पहुंचने के बाद बालिका ने घर से चले आने की वजह बताते हुए कथित प्रताड़ना की जानकारी दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब दो महीने पहले उसकी सौतेली मां ने रात के समय गर्म चिमटे से उसे दागा था। इसके अलावा मारपीट करने पर्याप्त भोजन नहीं देने और घर से निकालने जैसे आरोप भी लगाए गए। बालिका के पिता पर भी गंभीर आरोप दर्ज कराए गए। इन आरोपों के संबंध में पुलिस की कार्रवाई और जांच की स्थिति महत्वपूर्ण है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद बालिका को संरक्षण देने के लिए प्रशासन ने कदम उठाए। कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देशन में उसे बाल कल्याण समिति सिंगरौली की देखरेख में जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। बाद में देखभाल और सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर में व्यवस्था की गई। अधिकारियों के मुताबिक बालिका को भोजन चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए। उसकी पढ़ाई जारी रखने के उद्देश्य से उसे डे केयर ओएसएच से भी जोड़ा गया। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राम दयाल पाण्डेय और अन्य सदस्यों सहित बाल संरक्षण से जुड़े कर्मियों ने उसकी देखरेख में सहयोग किया।
बालिका के स्वास्थ्य में कुछ सुधार होने पर 10 सितंबर 2026 को उसे वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या आश्रयशाला बंजारी में दाखिल कराया गया था। हालांकि कुछ समय बाद तेज पेट दर्द की शिकायत के चलते उसे फिर अस्पताल लाना पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच में पित्ताशय में बड़ी पथरी होने का पता चला। जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ. बालेन्दु शाह ने ऑपरेशन कर पथरी निकाली। इसके बाद हालत में कुछ सुधार होने पर बालिका को दोबारा आश्रयशाला भेजा गया।
लेकिन कुछ दिनों बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ गई। उसे यूरिन संक्रमण की शिकायत हुई और पेशाब में खून आने की जानकारी सामने आई। आगे की जांच में दोनों किडनियों में पथरी और निजी अंगों में गंभीर संक्रमण की बात बताई गई। इन स्वास्थ्य समस्याओं के चलते बालिका को दोबारा जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसका उपचार जारी है और स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है।
शिकायत के बाद पुलिस ने बालिका के पिता हीरा सिंह गोड़ और सौतेली मां सविता सिंह गोड़ की तलाश शुरू की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिता की आत्महत्या से मौत हो गई जबकि सौतेली मां के फरार होने की बात सामने आई है। उनकी वर्तमान स्थिति और मामले में आगे की कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। फिलहाल प्राथमिकता बालिका को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षा सहित दीर्घकालीन पुनर्वास की व्यवस्था बनाए रखने की है। बालिका की पहचान गोपनीय रखना भी आवश्यक है। -

मैहर में देवी भक्ति का अनूठा नजारा, नृत्य-नाटिका और देवी गीतों ने मोहा मन, SP के भजन पर गूंजे जयकारे
मैहर । मध्यप्रदेश के मैहर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मां शारदा देवी मंदिर परिसर में शक्तिपर्व का आयोजन किया गया। बुधवार शाम मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में भक्ति संगीत और देवी आराधना का अनूठा संगम देखने को मिला। देर रात तक चले कार्यक्रम में कलाकारों ने देवी गीतों और नृत्य-नाटिका के माध्यम से मां आदिशक्ति की महिमा का गुणगान किया। भजनों की मधुर धुनों और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के दौरान ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा जिस पर मौजूद दर्शक उत्साह से झूम उठे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी और कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने मां शारदा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद मंच पर देवी आराधना से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों ने भाग लिया तथा भक्ति संगीत का आनंद लिया। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति और कला को भी मंच प्रदान किया।
शक्तिपर्व में लोक भक्ति गायन की प्रस्तुति देने के लिए रीवा से रीता तिवारी अपने साथियों के साथ पहुंचीं। उन्होंने देवी गीतों के जरिए मां शक्ति की आराधना की। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भक्ति के रंग में रंग दिया। वहीं मुंबई से आए अरविंद कुमार पटेल और उनके साथियों ने मां आदिशक्ति पर आधारित नृत्य-नाटिका का मंचन किया। कलाकारों ने नृत्य और अभिनय के माध्यम से देवी शक्ति की महिमा को मंच पर प्रस्तुत किया। इसके अलावा रवि त्रिपाठी और उनके साथियों ने भी भक्ति गायन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में प्रस्तुत ‘जब जिद पर आ गई पार्वती’ गीत को दर्शकों ने खास तौर पर पसंद किया और उत्साह के साथ कलाकारों का स्वागत किया।
इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण मैहर के पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह का भजन गायन रहा। उन्होंने ‘अंगना पधारो महारानी मोरी शारदा भवानी’ भजन प्रस्तुत किया। मां शारदा की स्तुति में गाए गए इस भजन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पुलिस अधीक्षक की इस प्रस्तुति से आयोजन का माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया। धार्मिक गीतों और संगीत के बीच उनकी प्रस्तुति कार्यक्रम के यादगार पलों में शामिल रही।
शक्तिपर्व में पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह के साथ अपर कलेक्टर रोशन राय और नायब तहसीलदार शिवभूषण सिंह सहित अन्य अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। नवरात्रि के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति गायन और नृत्य-नाटिका के जरिए मां शारदा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। मैहर में हुए इस आयोजन ने धार्मिक उत्सव को सांस्कृतिक रंगों से सजाया और दर्शकों को संगीत तथा देवी आराधना से जुड़ने का अवसर दिया। -

आंगनवाड़ी केंद्रों में लापरवाही पर गिरी गाज, पांच कर्मचारियों की सेवा समाप्त, औचक निरीक्षण में सामने आईं खामियां
मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन में कथित अनियमितताओं को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। नईगढ़ी परियोजना क्षेत्र में तीन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और दो सहायिकाओं सहित कुल पांच कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इन कर्मचारियों के खिलाफ लंबे समय से अनधिकृत अनुपस्थिति और केंद्रों का नियमित संचालन नहीं करने जैसी शिकायतें मिल रही थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने औचक निरीक्षण कराया और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा। अधिकारियों का कहना है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने और कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं होने के बाद नियमानुसार सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति और निर्धारित समय पर केंद्र नहीं खुलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों के मुख्यालय पर निवास नहीं करने और अपने पद से जुड़े दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं करने के आरोप भी थे। इन शिकायतों को लेकर जनहित में मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रशासन ने निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया तेज की। कलेक्टर के निर्देश और जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में नईगढ़ी परियोजना के अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर केंद्रों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कुछ केंद्रों के निर्धारित समय पर नहीं खुलने की बात सामने आई। इससे बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
नईगढ़ी परियोजना अधिकारी रविशंकर पांडेय ने विभागीय कार्रवाई के तहत पांच कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए। इनमें जुड़मनिया रघुनाथ केंद्र की कार्यकर्ता भारती पटेल और सुअरहा केंद्र की कार्यकर्ता सुशीला उपाध्याय शामिल हैं। इसके अलावा मैर मुहल्ला भटिगवां केंद्र की कार्यकर्ता आरती कारपेंटर की सेवा समाप्त की गई है। छुहिया केंद्र की सहायिका आशा मिश्रा और पहरखा-2 केंद्र की सहायिका गीता मिश्रा शुक्ला पर भी कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से यह कदम संबंधित शिकायतों और कार्रवाई की प्रक्रिया के बाद उठाया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आशीष द्विवेदी ने बताया कि इन कर्मचारियों के विरुद्ध बिना विधिवत सूचना के अनुपस्थित रहने और आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित संचालन नहीं करने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। उनके मुताबिक परियोजना कार्यालय की ओर से समय-समय पर मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे। पर्यवेक्षकों ने आकस्मिक निरीक्षण भी किए और नियमों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा गया था। विभाग के अनुसार प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए और कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार भी नहीं हुआ। इसके बाद नियुक्ति आदेश की शर्तों और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया।
आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों को पूरक पोषण और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ गर्भवती तथा धात्री महिलाओं तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केंद्रों का समय पर खुलना और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति जरूरी है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति या केंद्रों के बंद रहने से उन परिवारों को परेशानी हो सकती है जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। वहीं स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने मऊगंज तथा हनुमना परियोजना क्षेत्रों में भी इसी तरह जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केंद्रों के संचालन और पोषण आहार वितरण से जुड़ी शिकायतों की भी नियमित जांच होनी चाहिए। विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब अन्य केंद्रों की निगरानी और व्यवस्था में सुधार पर भी नजर रहेगी।
