Category: Madhya Pradesh

  • तेरहवीं की तैयारियों के बीच परिवार पर टूटा दूसरा दुख, तालाब में मिला 25 वर्षीय युवक का शव

    तेरहवीं की तैयारियों के बीच परिवार पर टूटा दूसरा दुख, तालाब में मिला 25 वर्षीय युवक का शव


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa जिले में शनिवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक 25 वर्षीय युवक का शव तालाब में मिलने से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक की पहचान सागर अग्निहोत्री के रूप में हुई है, जो गुढ़ थाना क्षेत्र के दुआरी गांव का निवासी था और शुक्रवार से अपने घर से लापता बताया जा रहा था।

    घटना मनिकवार चौकी क्षेत्र के अमिलिहा गांव की है। स्थानीय लोगों ने शनिवार दोपहर तालाब में एक शव उतराता हुआ देखा, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को तालाब से बाहर निकलवाया। बाद में परिजनों को बुलाकर शव की पहचान कराई गई, जहां मृतक की पहचान सागर अग्निहोत्री के रूप में हुई।

    सागर की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों के अनुसार परिवार पहले से ही एक अन्य सदस्य के निधन के कारण शोक में था। शनिवार को घर में तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित होना था और उसकी तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच सागर के शव मिलने की सूचना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। एक ही परिवार में कम समय के भीतर दूसरी दुखद घटना होने से गांव में भी शोक का माहौल बन गया है।

    पुलिस के अनुसार सागर शुक्रवार से घर से लापता था। परिजन उसकी तलाश में जुटे हुए थे और रिश्तेदारों तथा परिचितों से भी संपर्क किया जा रहा था। इसी दौरान शनिवार दोपहर अमिलिहा गांव के तालाब में शव मिलने की सूचना सामने आई। सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।

    मौके पर पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मौत के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।

    Shail Yadav ने बताया कि युवक के लापता होने और शव मिलने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। परिजनों और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा युवक के अंतिम समय की गतिविधियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने और चिकित्सकीय रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सागर अग्निहोत्री की असमय मौत से दुआरी और आसपास के गांवों में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर कोई इस घटना के पीछे की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है।

  • रीवा में तेज रफ्तार कार का कहर, गाय को कुचलने के बाद बाइक सवार छात्रों को मारी टक्कर; मकान में घुसी कार

    रीवा में तेज रफ्तार कार का कहर, गाय को कुचलने के बाद बाइक सवार छात्रों को मारी टक्कर; मकान में घुसी कार


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Rewa जिले में शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे ने इलाके में सनसनी फैला दी। रीवा-सीधी मार्ग पर महसांव रेडियो स्टेशन के पास तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पहले एक गाय को कुचलते हुए आगे बढ़ी, फिर सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी। इसके बाद भी कार नहीं रुकी और सड़क किनारे स्थित एक मकान की दीवार तोड़ते हुए अंदर जा घुसी। हादसे में गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक सवार दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार घटना शनिवार सुबह करीब तीन बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार अत्यधिक गति से चल रही थी और चालक अचानक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। सड़क किनारे खड़ी गाय को टक्कर मारने के बाद कार सीधे सामने से आ रही बाइक से जा भिड़ी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उस पर सवार दोनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे।

    स्थानीय लोगों के अनुसार घायल दोनों छात्र सीधी की ओर जा रहे थे। दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। दोनों छात्रों को उपचार के लिए Sanjay Gandhi Memorial Hospital में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।

    हादसे का सबसे भयावह पहलू यह रहा कि बाइक को टक्कर मारने के बाद भी कार नहीं रुकी। अनियंत्रित वाहन सड़क किनारे बने दिनेश केवट के मकान में जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मकान की एक दीवार पूरी तरह ढह गई। दीवार गिरने से घर में खड़ा ई-रिक्शा भी क्षतिग्रस्त हो गया।

    घटना के समय मकान के भीतर परिवार के सदस्य सो रहे थे। अचानक हुए जोरदार धमाके से सभी की नींद खुल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार कुछ और अंदर तक घुस जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। सौभाग्य से परिवार के किसी सदस्य को शारीरिक चोट नहीं आई और सभी सुरक्षित बच गए।

    तड़के हुए हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य में मदद की। लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने और सड़क पर यातायात सामान्य कराने में भी सहयोग किया।

    सूचना मिलने पर Gudh Police Station और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर चालक के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। वाहन की गति, चालक की स्थिति और अन्य परिस्थितियों की पड़ताल के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घायल छात्रों के उपचार और मामले की जांच पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

  • देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़

    देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Dewas जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर कथित रूप से ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना जिनवाणी वन परिक्षेत्र के कमलापुर बीट क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां वन विभाग की कार्रवाई के दौरान जमकर पथराव हुआ। इस घटना में छह वनकर्मी घायल हो गए, जबकि विभागीय वाहनों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। घटना का एक ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वनकर्मी और पुलिसकर्मी खेतों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए विभिन्न वन परिक्षेत्रों का स्टाफ और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। कार्रवाई का उद्देश्य कथित रूप से सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाना था। इसी दौरान क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में पथराव में बदल गया।

    घटना में घायल होने वालों में वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय, सूरज तथा परिक्षेत्र सहायक K K Parmar शामिल हैं। घायलों को पहले कमलापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में चापड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार दो कर्मचारियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आगे उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

    घायल वनकर्मी ज्योति जाट ने बताया कि कार्रवाई के दौरान अचानक चारों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। उनके अनुसार कर्मचारियों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और लगातार पत्थर बरसाए जाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें किसी तरह मौके से सुरक्षित बाहर निकलना पड़ा।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पथराव करीब आधे घंटे तक चलता रहा। विभागीय टीम के अनुसार ग्रामीणों की संख्या काफी अधिक थी और उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए वाहनों तथा उपकरणों को भी निशाना बनाया। विभाग का दावा है कि ड्रोन को भी क्षति पहुंचाई गई है।

    Vikas Mahore ने बताया कि भीलआमला क्षेत्र में वन भूमि पर खेती किए जाने की शिकायतें थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और उस पर अवैध कब्जे की जांच लंबे समय से चल रही थी।

    वन विभाग के मुताबिक कार्रवाई का नेतृत्व Ankit Jamod कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ी। वहीं स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    अधिकारियों ने कहा है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर ग्रामीणों की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखे जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।

  • लॉ कॉलेज के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, नगर निगम ने 10 करोड़ की भूमि कराई मुक्त

    लॉ कॉलेज के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, नगर निगम ने 10 करोड़ की भूमि कराई मुक्त


    मध्‍य प्रदेश । जबलपुर में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नगर निगम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी भूमि को अपने कब्जे में ले लिया है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के पॉश इलाके राइट टाउन में स्थित इस भूमि पर लॉ कॉलेज संचालित होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन जांच में कई तथ्य संदिग्ध पाए जाने के बाद निगम ने कार्रवाई की।

    जानकारी के अनुसार, Jabalpur Municipal Corporation के आयुक्त Ramprakash Ahirwar को शिकायत प्राप्त हुई थी कि सरकारी स्वामित्व वाली बहुमूल्य जमीन पर कब्जा किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि परिसर में लॉ कॉलेज संचालित होने की बात कही जाती है, लेकिन वहां नियमित रूप से न तो छात्र दिखाई देते हैं और न ही शिक्षकों की उपस्थिति नजर आती है।

    शिकायत मिलने के बाद निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि संबंधित परिसर अधिकांश समय बंद रहता है और वहां शैक्षणिक गतिविधियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर निगम आयुक्त ने कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

    शुक्रवार को नगर निगम की संपदा शाखा, अतिक्रमण विरोधी दस्ता और क्षेत्रीय अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान परिसर को निगम के कब्जे में लिया गया और मुख्य प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि मुक्त कराई गई भूमि की अनुमानित बाजार कीमत 10 करोड़ रुपए से अधिक है।

    संभाग क्रमांक-13 के संभागीय अधिकारी Sagar Borkar ने बताया कि नगर निगम की ओर से शासकीय और निगम स्वामित्व वाली जमीनों की लगातार जांच की जा रही है। इसी क्रम में राइट टाउन स्थित चंचलाबाई स्कूल क्षेत्र की भूमि की पड़ताल की गई थी।

    जांच में सामने आया कि चंचलाबाई स्कूल के पास स्थित डायवर्सन प्लॉट नंबर-440 और डायवर्सन शीट नंबर-152-सी का एक बड़ा हिस्सा नगर निगम के स्वामित्व में दर्ज है। अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र में पहले कस्तूरबा स्कूल संचालित होता था। बाद में इस भूमि के एक हिस्से पर कथित रूप से लॉ कॉलेज के नाम पर कब्जा कर लिया गया।

    नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि जिस परिसर में कॉलेज संचालित होने की बात कही जा रही थी, वहां पर्याप्त शैक्षणिक गतिविधियां नहीं मिलीं। निरीक्षण के दौरान कमरे तो बने मिले, लेकिन नियमित रूप से छात्र और शिक्षक मौजूद नहीं पाए गए। इसी आधार पर प्रशासन ने भूमि की स्थिति और उपयोग को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की।

    नगर निगम का कहना है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्काल कदम उठाए गए। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि कब्जा मुक्त कराई गई इस बहुमूल्य भूमि का उपयोग भविष्य में सार्वजनिक हित और नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है।

    हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से यदि कोई दावा या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उनका परीक्षण नियमानुसार किया जाएगा। फिलहाल नगर निगम ने परिसर को अपने नियंत्रण में लेकर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • फर्जी मार्कशीट के सहारे आंगनबाड़ी नौकरी पाने की कोशिश नाकाम, हाईकोर्ट ने दो महिलाओं की याचिकाएं खारिज कीं

    फर्जी मार्कशीट के सहारे आंगनबाड़ी नौकरी पाने की कोशिश नाकाम, हाईकोर्ट ने दो महिलाओं की याचिकाएं खारिज कीं


    मध्‍य प्रदेश । टीकमगढ़ जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से फर्जी मार्कशीट प्रस्तुत करने का मामला अब न्यायालय तक पहुंच गया, जहां Madhya Pradesh High Court ने दो महिलाओं की याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि भर्ती प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की सत्यता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब जांच और सत्यापन में मार्कशीट फर्जी पाई गई है, तब याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त सुनवाई का अवसर देने का कोई औचित्य नहीं बनता।

    मामले की सुनवाई शुक्रवार को हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में हुई। Justice Vishal Mishra की एकल पीठ ने ममता यादव और नीतू राजपूत द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार करने के बाद उन्हें निरस्त कर दिया। दोनों महिलाओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भर्ती प्रक्रिया से बाहर किए जाने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देशों को चुनौती दी थी।

    जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने 20 जून 2025 को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत दोनों आवेदिकाओं ने आवेदन प्रस्तुत किए और अपने शैक्षणिक दस्तावेजों के रूप में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, भोपाल से जारी 12वीं कक्षा की मार्कशीट संलग्न की। प्रारंभिक दस्तावेज सत्यापन के बाद 18 अगस्त 2025 को जारी अंतरिम मेरिट सूची में दोनों महिलाओं के नाम शीर्ष स्थानों पर शामिल थे। इस कारण उनका चयन लगभग तय माना जा रहा था।

    हालांकि भर्ती प्रक्रिया के दौरान 29 अक्टूबर 2025 को जिला चयन समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई कि दोनों आवेदिकाओं द्वारा जमा की गई 12वीं की मार्कशीटें संदिग्ध हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला स्तरीय विवाद निवारण समिति ने मामले की जांच शुरू की और संबंधित शिक्षण संस्थान से दस्तावेजों का सत्यापन कराया।

    जांच के दौरान संस्थान की ओर से 8 जनवरी 2026 को भेजी गई रिपोर्ट में दोनों मार्कशीटों को फर्जी बताया गया। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी ने 26 मई 2026 को आदेश जारी कर दोनों महिलाओं को भर्ती प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को सात दिन के भीतर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

    याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह बघेल ने पक्ष रखा। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों, जांच रिपोर्ट और संबंधित तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि दस्तावेज सत्यापन में गंभीर अनियमितता सामने आई है।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब संबंधित संस्थान स्वयं मार्कशीट को फर्जी घोषित कर चुका है, तब मामले में और सुनवाई करना उचित नहीं है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में अनावश्यक सुनवाई न्यायिक समय की बर्बादी के समान होगी।

    हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाती है, तो दोनों महिलाओं को कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करने की स्वतंत्रता रहेगी। वे आवश्यकता पड़ने पर अग्रिम जमानत या अन्य वैधानिक राहत के लिए सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकती हैं।

  • प्रेम प्रसंग को लेकर जबलपुर में बवाल: दो परिवारों में हिंसक झड़प, वाहन फूंके; 16 लोगों पर केस दर्ज

    प्रेम प्रसंग को लेकर जबलपुर में बवाल: दो परिवारों में हिंसक झड़प, वाहन फूंके; 16 लोगों पर केस दर्ज


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Jabalpur जिले के मझौली क्षेत्र में प्रेम प्रसंग से जुड़ा विवाद शुक्रवार रात हिंसक टकराव में बदल गया। दो परिवारों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट, तोड़फोड़ और आगजनी तक पहुंच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचना पड़ा। मामले में दोनों पक्षों के कई लोगों के खिलाफ बलवा सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार मझौली क्षेत्र के एक युवक और युवती के बीच लंबे समय से परिचय और मित्रता थी। इसी दौरान दोनों के बीच संबंधों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। पुलिस के मुताबिक युवती की शादी अन्यत्र तय हो जाने के बाद युवक द्वारा कथित रूप से कुछ आपत्तिजनक संदेश भेजे गए, जिससे दोनों परिवारों के बीच तनाव बढ़ गया।

    विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के परिजन आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन सहमति बनने के बजाय मतभेद और गहरे हो गए। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा।

    शुक्रवार रात स्थिति अचानक बिगड़ गई। पुलिस के अनुसार दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान लाठी-डंडों से मारपीट हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

    घटना के दौरान कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। सड़क किनारे खड़े दोपहिया वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। आग की लपटें उठने के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही Nehru Khandate के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और हालात को नियंत्रित किया। इसके बाद फायर ब्रिगेड की मदद से जलते हुए वाहनों में लगी आग पर काबू पाया गया।

    मामले को लेकर Sampat Upadhyay ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रेम प्रसंग और मोबाइल संदेशों को लेकर विवाद की बात सामने आई है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर काउंटर एफआईआर दर्ज की है। बलवा, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत लगभग 16 लोगों को नामजद किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। आगजनी और संपत्ति को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।

  • झाबुआ में भैंस चोरी के आरोप में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी गिरफ्तार, पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी

    झाबुआ में भैंस चोरी के आरोप में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी गिरफ्तार, पुलिस रिमांड पर पूछताछ जारी


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Jhabua जिले में मवेशी चोरी के एक मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है। पुलिस ने भैंस चोरी के आरोप में एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में झाबुआ सीट से उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुका था। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ दर्ज शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान बालूसिंह के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने एक गांव से भैंस चोरी की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय से पुलिस को आरोपी की रिमांड भी प्राप्त हुई है, जिसके आधार पर उससे पूछताछ की जा रही है।

    जांच अधिकारियों के मुताबिक अब तक दो भैंस चोरी होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक छोटी भैंस बरामद कर ली गई है, जबकि दूसरी भैंस के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि दूसरी भैंस को कहीं बेच दिया गया हो सकता है। इस संबंध में विभिन्न स्थानों पर जानकारी एकत्र की जा रही है।

    मामले की एक खास बात यह भी बताई जा रही है कि जिस गांव में चोरी की घटना हुई, वहां आरोपी के रिश्तेदारी संबंध होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस फिलहाल मामले की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कर रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से यह भी पूछा जा रहा है कि चोरी किए गए मवेशियों को कहां ले जाया गया और उनसे जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या आरोपी का संबंध किसी बड़े मवेशी चोरी गिरोह से है या यह एक अलग घटना थी।

    वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में आरोपी ने झाबुआ सीट से चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई थी। राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति का इस प्रकार के आपराधिक मामले में नाम सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस ने बताया कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जाएगी। यदि पूछताछ में अन्य चोरी की घटनाओं या सहयोगियों की जानकारी सामने आती है, तो उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही पूरे घटनाक्रम का विस्तृत खुलासा करने की बात कह रही है।

  • झाबुआ बस स्टैंड की 13 दुकानें सील: व्यापारियों ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद कार्रवाई का लगाया आरोप

    झाबुआ बस स्टैंड की 13 दुकानें सील: व्यापारियों ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद कार्रवाई का लगाया आरोप


    मध्‍य प्रदेश । झाबुआ शहर में बस स्टैंड स्थित दुकानों को लेकर नगर पालिका और व्यापारियों के बीच विवाद गहरा गया है। नगर पालिका ने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात बस स्टैंड परिसर में स्थित दुकान क्रमांक 1 से 13 तक को सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित व्यापारियों ने प्रशासनिक कदम पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्हें उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त हो चुका था, इसके बावजूद दुकानों को सील कर दिया गया।

    जानकारी के अनुसार नगर पालिका ने कुछ समय पहले बस स्टैंड स्थित इन दुकानों को जर्जर और क्षतिग्रस्त बताते हुए व्यापारियों को दुकानें खाली करने के नोटिस जारी किए थे। नगर पालिका का तर्क था कि भवन की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से कार्रवाई आवश्यक है। हालांकि दुकानदारों ने इस निर्णय का विरोध करते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

    व्यापारियों का कहना है कि शुक्रवार को ही Madhya Pradesh High Court की एकल पीठ ने मामले में सशर्त स्थगन आदेश जारी किया था। उनका दावा है कि आदेश मिलने के बाद भी नगर पालिका ने देर रात कार्रवाई करते हुए दुकानों को सील कर दिया। व्यापारियों का आरोप है कि यह कदम न्यायालय के निर्देशों और उसकी भावना के विपरीत है।

    कार्रवाई के बाद प्रभावित दुकानदारों में नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि कई परिवार दशकों से इन दुकानों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं और अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    मामले में नगर पालिका के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिलन पटेल और संबंधित अधिकारियों से बातचीत नहीं हो पाई। वहीं नगर पालिका के सब इंजीनियर धीरेन्द्र रावत ने बताया कि सीएमओ बैठक के सिलसिले में बाहर हैं और उन्हें इस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी नहीं है।

    दूसरी ओर नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश बिट्टू सिंगार ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि दुकानों को खाली कराने के लिए पिछले तीन वर्षों से नोटिस जारी किए जा रहे थे। उनके अनुसार हाल ही में प्राप्त प्रशासनिक निर्देशों के बाद दुकानों को सीज करने की कार्रवाई की गई है।

    व्यापारियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Harshvardhan Singh Rathore ने दावा किया कि कार्रवाई में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 221 के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए बिना दुकानों को सील किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यापारी लगभग 30 वर्षों से इन दुकानों में व्यवसाय कर रहे हैं और भवन अभी भी उपयोग योग्य स्थिति में हैं।

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने भी भवन की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि नगर पालिका ऐसा कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह सिद्ध हो सके कि भवन मरम्मत योग्य नहीं हैं। न्यायालय ने निर्देश दिया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी पहले यह निर्धारित करें कि भवन की मरम्मत संभव है या नहीं। इस प्रक्रिया के पूर्ण होने तक आगे की कार्रवाई पर रोक रहेगी।

    फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें न्यायालय के अगले निर्देशों और नगर पालिका के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हुई हैं।

  • गुजरात के होटल में युवती की हत्या: प्रेमी पर गला रेतने का आरोप, पुलिस अभिरक्षा में हुई वारदात से उठे सवाल

    गुजरात के होटल में युवती की हत्या: प्रेमी पर गला रेतने का आरोप, पुलिस अभिरक्षा में हुई वारदात से उठे सवाल


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Shivpuri जिले से लापता एक युवती की गुजरात में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार युवती की हत्या का आरोप उसके साथ बरामद किए गए युवक पर है। घटना गांधीनगर के एक होटल में उस समय हुई, जब दोनों को पुलिस टीम गुजरात से शिवपुरी वापस लेकर आ रही थी। इस घटना ने पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी रजनी धाकड़ (21) और संतोष जाटव (25) 7 जून की रात अपने घरों से लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों के गुजरात में होने की जानकारी मिली।

    इसके बाद देहात थाना की एक टीम, जिसमें दो पुलिसकर्मी और युवती के परिजन शामिल थे, गुजरात रवाना हुई। पुलिस के अनुसार 11 जून को दोनों को गुजरात के राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र में एक फैक्ट्री के पास स्थित झोपड़ी से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस टीम दोनों को शिवपुरी वापस लेकर रवाना हुई।

    वापसी के दौरान लंबी यात्रा और थकान के कारण टीम ने गांधीनगर क्षेत्र में एक होटल में रुकने का निर्णय लिया। परिजनों के अनुसार सभी लोग एक ही कमरे में ठहरे हुए थे। रात के दौरान अचानक चीखने की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुली। मौके पर देखा गया कि युवती गंभीर रूप से घायल थी, जबकि संतोष जाटव भी खुद को चोट पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।

    पुलिस के अनुसार युवती को तत्काल बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं आरोपी युवक को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

    घटना के बाद Chiloda Police Station ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और होटल में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रेमी युगल को गुजरात से लाने गई टीम में महिला पुलिसकर्मी क्यों शामिल नहीं थी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि होटल में ठहरने के दौरान सुरक्षा संबंधी क्या इंतजाम किए गए थे और आरोपी के पास कथित तौर पर धारदार हथियार कैसे पहुंचा।

    प्रारंभिक जानकारी के आधार पर पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस टीम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल के पालन से जुड़े सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

    फिलहाल युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि आरोपी युवक की चिकित्सकीय निगरानी में पूछताछ की जाएगी। मामले की जांच जारी है। मध्य प्रदेश के Shivpuri जिले से लापता एक युवती की गुजरात में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार युवती की हत्या का आरोप उसके साथ बरामद किए गए युवक पर है। घटना गांधीनगर के एक होटल में उस समय हुई, जब दोनों को पुलिस टीम गुजरात से शिवपुरी वापस लेकर आ रही थी। इस घटना ने पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी रजनी धाकड़ (21) और संतोष जाटव (25) 7 जून की रात अपने घरों से लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों के गुजरात में होने की जानकारी मिली।

    इसके बाद देहात थाना की एक टीम, जिसमें दो पुलिसकर्मी और युवती के परिजन शामिल थे, गुजरात रवाना हुई। पुलिस के अनुसार 11 जून को दोनों को गुजरात के राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र में एक फैक्ट्री के पास स्थित झोपड़ी से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस टीम दोनों को शिवपुरी वापस लेकर रवाना हुई।

    वापसी के दौरान लंबी यात्रा और थकान के कारण टीम ने गांधीनगर क्षेत्र में एक होटल में रुकने का निर्णय लिया। परिजनों के अनुसार सभी लोग एक ही कमरे में ठहरे हुए थे। रात के दौरान अचानक चीखने की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुली। मौके पर देखा गया कि युवती गंभीर रूप से घायल थी, जबकि संतोष जाटव भी खुद को चोट पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।

    पुलिस के अनुसार युवती को तत्काल बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं आरोपी युवक को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

    घटना के बाद Chiloda Police Station ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और होटल में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रेमी युगल को गुजरात से लाने गई टीम में महिला पुलिसकर्मी क्यों शामिल नहीं थी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि होटल में ठहरने के दौरान सुरक्षा संबंधी क्या इंतजाम किए गए थे और आरोपी के पास कथित तौर पर धारदार हथियार कैसे पहुंचा।

    प्रारंभिक जानकारी के आधार पर पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस टीम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल के पालन से जुड़े सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

    फिलहाल युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि आरोपी युवक की चिकित्सकीय निगरानी में पूछताछ की जाएगी। मामले की जांच जारी है।

  • 250 क्विंटल सरसों गबन मामले में बड़ा खुलासा: 29 लाख का ट्रक और माल बरामद, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

    250 क्विंटल सरसों गबन मामले में बड़ा खुलासा: 29 लाख का ट्रक और माल बरामद, मुख्य आरोपी गिरफ्तार


    मध्‍य प्रदेश । शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र में सरसों गबन के चर्चित मामले में पुलिस ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। तेंदुआ थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों के कृषि व्यापार से जुड़े इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस ने लगभग 29 लाख रुपए मूल्य का ट्रक और बची हुई सरसों भी बरामद की है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार मामला उस समय सामने आया जब कोलारस निवासी व्यापारी Anita Gupta ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी फर्म ‘बुलबुल इंटरप्राइजेज’ से आगरा भेजी गई सरसों निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंची। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ अमानत में खयानत का प्रकरण दर्ज किया।

    जानकारी के मुताबिक 21 मार्च 2026 को बुलबुल इंटरप्राइजेज से 250 क्विंटल सरसों आगरा स्थित Mahesh Edible Oil Mills के लिए भेजी गई थी। लेकिन माल लेकर रवाना हुआ ट्रक निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंचा। इसके बाद व्यापारी की शिकायत पर ट्रक मालिक रामब्रज गुर्जर और उसके भाई श्रीकेश गुर्जर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ के अनुसार पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी बची हुई सरसों को बेचने की तैयारी में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर खरई और कस्बाथाना के बीच घेराबंदी कर कार्रवाई की। इस दौरान ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली गई और मुख्य आरोपी रामब्रज गुर्जर निवासी Dholpur को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस ने ट्रक (आरजे 11 जीए 9297) को भी जब्त कर लिया। अधिकारियों के अनुसार ट्रक की अनुमानित कीमत करीब 22 लाख रुपए है। वहीं वाहन में लगभग 100 क्विंटल सरसों बरामद हुई, जिसकी बाजार कीमत करीब 7 लाख रुपए आंकी गई है। इस प्रकार पुलिस ने कुल 29 लाख रुपए का मशरूका बरामद किया है।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि 250 क्विंटल में से बड़ी मात्रा में सरसों पहले ही बेची जा चुकी है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शेष माल कहां और किसे बेचा गया तथा उससे प्राप्त राशि का क्या हुआ। आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मामले की जांच के दौरान एक और नया नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार रामकेश गुर्जर, जो मुख्य आरोपी रामब्रज का रिश्तेदार बताया जा रहा है, इस पूरे मामले में सहयोगी भूमिका में हो सकता है। पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है। हालांकि उसके खिलाफ आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    वहीं, मामले में नामजद आरोपी श्रीकेश गुर्जर अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर मामले के सभी पहलुओं का खुलासा किया जाएगा।