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  • वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप

    वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप


    इंदौर । इंदौर के एक वृद्धाश्रम से सामने आया मारपीट का वीडियो लोगों को झकझोर देने वाला है। वीडियो में एक नाबालिग लड़का वृद्ध महिलाओं पर डंडे से हमला करता दिखाई दे रहा है। बीच बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी उसने हाथापाई की। घटना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाबालिग की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं बताई जा रही है और इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि करीब 14 वर्षीय लड़का हाथ में डंडा लेकर एक बुजुर्ग महिला पर लगातार हमला कर रहा है। जब आश्रम में मौजूद अन्य महिलाएं उसे रोकने की कोशिश करती हैं तो वह उनके साथ भी मारपीट करने लगता है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठने लगी।

    मामले की जानकारी मिलते ही बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस ने उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस ने संचालिका को समझाइश देकर छोड़ दिया है जबकि पूरे मामले की जांच जारी है।

    एसीपी रुबीना मिजवानी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि नाबालिग करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम में रहने आया था। उसकी मां गंभीर रूप से झुलस गई थीं और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद से लड़का वहीं रह रहा था। पुलिस के अनुसार बुधवार को किसी बात को लेकर उसका एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा उठाकर हमला कर दिया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि बीच बचाव करने वाले लोगों के साथ भी उसने आक्रामक व्यवहार किया।

    पुलिस का कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी मिली है इसलिए उसके साथ संवेदनशील तरीके से कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले उसकी विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति का सही आकलन किया जा सके। इसके साथ ही वृद्धाश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि उसे तत्काल बुजुर्गों से अलग रखा जाए ताकि किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा न हो।

    प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि नाबालिग को वृद्धाश्रम से हटाकर बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के सुपुर्द किया जाएगा जहां उसकी उचित देखभाल इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि उसकी परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की दिशा में काम करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इस घटना ने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की नियमित निगरानी मानसिक स्वास्थ्य की जांच और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि बुजुर्ग सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

  • मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत

    मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

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    MadhyaPradesh, MoongProcurement, FarmersProtest, ShivrajSinghChouhan, MSP मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।

  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।

  • मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी

    मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान समर्थन मूल्य पर पूरी मूंग खरीदे जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से बड़ी संख्या में किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास तक अपनी आवाज पहुंचाई। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी उपज की सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।

    किसानों के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने मूंग खरीदी का दायरा बढ़ाने की बात कही लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा आर्थिक तथ्य भी सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में लक्ष्य से अधिक मूंग खरीदी के कारण सरकार को लगभग 3346 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यानी हर वर्ष औसतन 1115 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर पड़ा है। इस नुकसान में खरीदी परिवहन भंडारण और बाद में बाजार में बिक्री के दौरान होने वाला घाटा शामिल है।

    मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि वह केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए खरीदी कोटे से अधिक मात्रा में मूंग खरीदती रही है जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है। इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कई बार पत्र लिखकर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि जिन राज्यों में मूंग की सरकारी खरीदी बहुत कम होती है वहां का अप्रयुक्त कोटा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके और कुल राष्ट्रीय सीमा भी प्रभावित न हो।

    हालांकि केंद्र सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश को पहले से मिले कोटे का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। केंद्र के अनुसार 16 जुलाई तक निर्धारित कोटे का केवल दो प्रतिशत ही खरीदा गया था। ऐसे में पहले उपलब्ध लक्ष्य के अनुरूप खरीदी पूरी करने के बाद ही अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार पत्राचार जारी है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग खरीदी करने वाला राज्य है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश के लिए 2.76 लाख मीट्रिक टन खरीदी की स्वीकृति मिली और पूरी मात्रा खरीदी गई। वर्ष 2024-25 में 3.31 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 2.90 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई जबकि वर्ष 2025-26 में 3.51 लाख मीट्रिक टन की स्वीकृति के बावजूद 4.20 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक रही।

    दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र कर्नाटक हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वीकृति मिलने के बावजूद वास्तविक खरीदी काफी कम रही। कई राज्यों में उत्पादन की तुलना में सरकारी खरीदी तीन प्रतिशत से भी कम रही जबकि मध्य प्रदेश में हर वर्ष कुल उत्पादन का लगभग 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। यही वजह है कि प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक भार भी अधिक पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर खरीदी नीति में संतुलित बदलाव करें तथा वास्तविक उत्पादन के आधार पर कोटा तय किया जाए तो किसानों को भी राहत मिलेगी और सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ भी कम होगा। फिलहाल मूंग खरीदी का मुद्दा किसानों सरकार और केंद्र के बीच सबसे बड़ी कृषि चुनौती बनकर सामने आया है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं जिसके कारण अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसके चलते प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। वहीं इंदौर ग्वालियर जबलपुर रीवा सतना और कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक बारिश हो सकती है जिससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से एक दुखद हादसा भी सामने आया है। गंज थाना क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास बनी एक झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथी शनि सिंह को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अलग अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बालाघाट में कई नदी नाले उफान पर हैं और ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बंद हो गए हैं। बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। ग्वालियर और अन्य शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार वर्तमान मौसमी सिस्टम दो अगस्त तक सक्रिय बने रहेंगे। इस दौरान प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि लगातार वर्षा से नदी नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहद जरूरी होगा।

  • जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक

    जली लाश के पीछे छिपा था खौफनाक सच फोरेंसिक एक्सपर्ट के एक सुराग ने पहुंचाया पुलिस को कातिल तक


    इंदौर  इंदौर में बैंककर्मी पलक केशव हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि किसी भी आपराधिक मामले में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका कितनी अहम होती है। जिस घटना को शुरुआती तौर पर आग लगने से हुई दुर्घटना माना जा रहा था वही मामला फोरेंसिक विशेषज्ञों की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच के कारण हत्या में बदल गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही विशेषज्ञों ने पुलिस को स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि पहले उसकी हत्या की गई और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव को जलाया गया।

    हरदा जिले के टिमरनी की रहने वाली पलक इंदौर में किराए के मकान में रहकर बैंक में नौकरी कर रही थी। 25 जुलाई को उसका जला हुआ शव कमरे में मिला था। शुरुआती जांच में यह माना गया कि आग लगने से उसकी मौत हुई है लेकिन जब शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचा तो फोरेंसिक विशेषज्ञों ने शरीर पर मौजूद चोटों और जलने के निशानों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि सिर गर्दन और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि शरीर पर आग से हुए निशान मृत्यु के बाद के थे। इससे साफ हो गया कि पहले हत्या की गई और बाद में आग लगाकर इसे हादसे का रूप देने की कोशिश की गई।

    फोरेंसिक विशेषज्ञों के इस इनपुट के बाद पुलिस ने जांच का पूरा फोकस बदल दिया। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस दतिया निवासी मयंक शाक्य तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से पलक के संपर्क में था और उससे शादी करना चाहता था। हालांकि पलक ने शादी से इनकार कर दिया था क्योंकि उसके परिवार ने उसके लिए दूसरा रिश्ता तय कर दिया था।

    आरोपी के मुताबिक वह दतिया से इंदौर पलक से मिलने पहुंचा था। दोनों पहले सराफा चौपाटी गए और वहां साथ में समय बिताया। कमरे पर लौटने के बाद जब उसने एक बार फिर शादी का प्रस्ताव रखा तो पलक ने साफ मना कर दिया। इसी बात पर दोनों के बीच विवाद हुआ और गुस्से में आकर आरोपी ने पहले पलक का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसने शव के ऊपरी हिस्से पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी ताकि घटना को दुर्घटना साबित किया जा सके। इतना ही नहीं उसने रसोई में गैस चूल्हे के पास शव रखकर हादसे जैसा माहौल बनाने का प्रयास भी किया और अपने जले हुए कपड़े साथ लेकर वहां से फरार हो गया।

    एमवाय अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ बजरंग कुमार सिंह ने बताया कि ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान मिलने वाले छोटे से छोटे संकेत भी जांच की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवेदनशील मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी पोस्टमार्टम के समय जरूरी होनी चाहिए ताकि चिकित्सकों और जांच एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित हो सके और अपराध की तह तक जल्दी पहुंचा जा सके।

    पलक हत्याकांड एक बार फिर यह साबित करता है कि आधुनिक फोरेंसिक तकनीक अपराधियों को कानून से बचने नहीं देती। वैज्ञानिक जांच और पुलिस की सतर्कता के कारण इस मामले का खुलासा बेहद कम समय में हो गया और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया। यह घटना समाज के लिए भी एक संदेश है कि रिश्तों में अस्वीकार को स्वीकार करना सीखना जरूरी है क्योंकि जुनून और हिंसा केवल जीवन ही नहीं बल्कि कई परिवारों की खुशियां भी छीन लेती है।

  • दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का महापर्व मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें सड़क के मुद्दे पर विरोध के बीच दोनों दलों ने किया जीत का दावा

    दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का महापर्व मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें सड़क के मुद्दे पर विरोध के बीच दोनों दलों ने किया जीत का दावा


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह सात बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों ने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। शुरुआती घंटों में ही 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज होने से चुनाव को लेकर लोगों की सक्रिय भागीदारी साफ दिखाई दी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मतदाता समय से पहले मतदान केंद्रों पर पहुंच गए जिससे पूरे जिले में चुनावी माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।

    हालांकि मतदान के बीच एक स्थान पर स्थानीय समस्या भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई। बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव के ग्रामीणों ने मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया और सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सूचना मिलने पर प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया जिसके बाद लगभग पचास ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया।

    चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद दावा किया कि जनता इस बार भाजपा के अहंकार को जवाब देगी और कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बसई क्षेत्र में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को बूथ के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी की।

    वहीं भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले मां पीतांबरा पीठ पहुंचकर दर्शन किए और दतिया के विकास युवाओं के रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने अपने मतदान केंद्र पर पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और विश्वास जताया कि जनता विकास के पक्ष में मतदान कर रही है तथा भाजपा को भरपूर समर्थन मिलेगा।

    जिले में कुल 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जहां दो लाख बीस हजार चार सौ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं जबकि सेक्टर मोबाइल दल लगातार क्षेत्र में गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने कई मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर निर्धारित समय पर मतदान शुरू हुआ और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संचालित की जा रही है। प्रशासन ने मतदाताओं से निर्भय होकर मतदान करने की अपील भी की।

    दतिया उपचुनाव में शुरुआती मतदान प्रतिशत और मतदाताओं के उत्साह ने संकेत दिया है कि लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण अवसर पर जनता अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए पूरी तरह जागरूक है। अब सभी की नजर मतदान समाप्त होने के बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है जो यह तय करेंगे कि दतिया की जनता ने किस पर अपना भरोसा जताया है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक विशेष रूप से मालवा-निमाड़ क्षेत्र सहित कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए उज्जैन और सागर संभाग समेत 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी
    आईएमडी भोपाल के अनुसार धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां अति भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    2 अगस्त तक बना रहेगा असर
    मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मानसूनी सिस्टम 2 अगस्त तक सक्रिय रहेंगे। इस दौरान कई जिलों में लगातार तेज बारिश और कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा हो सकती है। बुधवार को रतलाम, बालाघाट, पचमढ़ी और भोपाल समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    अब भी सामान्य से 16% कम बारिश
    बारिश का दौर तेज होने के बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 14.1 इंच (359.3 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 16.9 इंच (428.9 मिमी) वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में फिलहाल करीब 16 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, अगले कुछ दिनों तक जारी रहने वाले तेज बारिश के दौर से इस कमी में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी गुरू परम्परा है। जब गुरूकुल के संस्कार आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अतिरिक्त क्षमता से जुड़ेंगे, तब हमारी ऐसी पीढ़ी तैयार होगी, जो ज्ञान में श्रेष्ठ, चरित्र में उत्कृष्ट और राष्ट्र निर्माण के प्रति एकनिष्ठ होगी। यही विकसित मध्य प्रदेश और विकसित भारत की सबसे बड़ी नींव है। विकसित भारत का सपना आधुनिक शिक्षा और अत्याधुनिक कक्षाओं से ही पूरा होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित ‘महर्षि सांदीपनि गुरू पर्व’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय हमारी पुरातन गुरूकुल शिक्षा पद्धति का नूतन एवं आधुनिक स्वरूप है। इन विद्यालयों के माध्यम से एक बेहतर कल की ओर बढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों से हम अपने लाखों विद्यार्थियों का एक सुनहरा भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार, तकनीक और सांस्कृति चेतना के अद्भुत समन्वय का संदेश देकर कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रहे सांदीपनि विद्यालय भविष्य के भारत के निर्माण की आधारशिला सिद्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मौके पर उज्जैन जिले के लिए कुल 587.23 करोड़ रुपये की लागत के विभिन्न श्रेणी के 9 बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने बीते तीन वर्ष तक बोर्ड परीक्षाओं में लगातार शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 6 प्राचार्यों को सांदीपनि अलंकरण से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग में नव नियुक्त 7500 प्राथमिक शाला शिक्षकों में से 10 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित ‘मिशन बुनियाद’ का शुभारंभ किया। यह मिशन प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों में चलाया जाएगा। इसमें कक्षा में 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई से पर्सनली पढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘सर्वांग’ एवं ‘श्रीकृष्ण विद्यांजलि’ नामक दो पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने नेशनल मीन्स कम मेरिट में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भी सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भव्य गीता भवन बनाने का संकल्प लिया है। आज उज्जैन में गीता भवन का लोकार्पण नागरिकों के लिए कई प्रकार से सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह शिक्षा विभाग का गीता भवन है। नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण के भी अलग-अलग गीता भवन बनाए जाएंगे। सिंहस्थ: 2028 की तैयारियों के साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास कार्य भी निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में नई भर्तियों की शुरुआत की है। विगत दो साल में पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा हुआ है। आज 3 संभागों के लगभग 1000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक महर्षि सांदीपनि के वंशज के रूप में जाने जाएंगे। शिक्षक भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के भाव से बच्चों को शिक्षित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज शासकीय विद्यालयों के ऐसे प्राचार्यों को, जिन्होंने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में तीन साल तक शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिया है, उन्हें सम्मानित किया गया है। प्रदेश के ऐसे सभी स्कूलों के प्राचार्यों को एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्राध्यापकों के साथ स्कूल में विकास कार्यों के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे स्कूल शिक्षा में और बेहतरी का एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जबलपुर में एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी है। दूसरी की महती आवश्यकता महसूस हो रही है। इसलिए अब उज्जैन में ही नवीन धनवन्तरी चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। प्रदेश सरकार स्कूल से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक हर स्तर पर सहायता करने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश, पूरे देश का इकलौता राज्य है, जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को डॉक्टर बनाने के लिए उनकी फीस के रूप में 70 से 80 लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एआई आधारित मिशन बुनियाद अंतर्गत नई शिक्षा योजना की शुरुआत कर दी है। यह प्रदेश की शिक्षा पद्धति में एक नये युग के आरंभ जैसा है।

    उन्होंने कहा कि ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर प्रदेशभर में 60 नए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिली है। इनमें 39 स्कूल शिक्षा विभाग और 21 जनजातीय कार्य विभाग के हैं। हमारे सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्मरण कराते हैं। पहले और दूसरे चरण में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण पर हमारी सरकार करीब 25 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है। अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़े पैमाने पर हमारे सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं, लेकिन पहले सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ चुके विद्यार्थियों को मौका दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अवन्तिका नगरी (उज्जैन) दुनिया की 7 पवित्र नगरियों में से एक है, जहां बाबा महाकाल विराजे हैं। जन्म-मृत्यु सब बाबा महाकाल के हाथों में है। उज्जैन ज्ञान-विज्ञान और इतिहास की धरती है।

    उन्होंने गुरू की महत्ता बताते हुए कहा कि माता-पिता प्रथम गुरू होते है। जीवन में माता-पिता से हम कभी भी ऊऋण नहीं हो सकते हैं। गुरु की महिमा ऐसी है कि उसे भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन सांदीपनि गुरु ने अपने परम शिष्य (भगवान श्रीकृष्ण) को जगतगुरू के रूप में देखा। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में ही भगवान श्रीकृष्ण को पुस्तकीय ज्ञान से कहीं अधिक यथार्थ कर्मवाद की शिक्षा मिली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा ज्ञान कदम-कदम पर अपनी परीक्षा मांगता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सदैव मनुष्यों को आगे बढ़ने और हिम्मत से काम करने की प्रेरणा देता है। पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत्गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन के रहस्य, प्रकृति प्रेम और योग के महत्व का विस्तार से वर्णन किया है।