Category: Madhya Pradesh

  • गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी गुरू परम्परा है। जब गुरूकुल के संस्कार आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अतिरिक्त क्षमता से जुड़ेंगे, तब हमारी ऐसी पीढ़ी तैयार होगी, जो ज्ञान में श्रेष्ठ, चरित्र में उत्कृष्ट और राष्ट्र निर्माण के प्रति एकनिष्ठ होगी। यही विकसित मध्य प्रदेश और विकसित भारत की सबसे बड़ी नींव है। विकसित भारत का सपना आधुनिक शिक्षा और अत्याधुनिक कक्षाओं से ही पूरा होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित ‘महर्षि सांदीपनि गुरू पर्व’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय हमारी पुरातन गुरूकुल शिक्षा पद्धति का नूतन एवं आधुनिक स्वरूप है। इन विद्यालयों के माध्यम से एक बेहतर कल की ओर बढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों से हम अपने लाखों विद्यार्थियों का एक सुनहरा भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार, तकनीक और सांस्कृति चेतना के अद्भुत समन्वय का संदेश देकर कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रहे सांदीपनि विद्यालय भविष्य के भारत के निर्माण की आधारशिला सिद्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मौके पर उज्जैन जिले के लिए कुल 587.23 करोड़ रुपये की लागत के विभिन्न श्रेणी के 9 बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने बीते तीन वर्ष तक बोर्ड परीक्षाओं में लगातार शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 6 प्राचार्यों को सांदीपनि अलंकरण से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग में नव नियुक्त 7500 प्राथमिक शाला शिक्षकों में से 10 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित ‘मिशन बुनियाद’ का शुभारंभ किया। यह मिशन प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों में चलाया जाएगा। इसमें कक्षा में 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई से पर्सनली पढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘सर्वांग’ एवं ‘श्रीकृष्ण विद्यांजलि’ नामक दो पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने नेशनल मीन्स कम मेरिट में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भी सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भव्य गीता भवन बनाने का संकल्प लिया है। आज उज्जैन में गीता भवन का लोकार्पण नागरिकों के लिए कई प्रकार से सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह शिक्षा विभाग का गीता भवन है। नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण के भी अलग-अलग गीता भवन बनाए जाएंगे। सिंहस्थ: 2028 की तैयारियों के साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास कार्य भी निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में नई भर्तियों की शुरुआत की है। विगत दो साल में पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा हुआ है। आज 3 संभागों के लगभग 1000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक महर्षि सांदीपनि के वंशज के रूप में जाने जाएंगे। शिक्षक भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के भाव से बच्चों को शिक्षित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज शासकीय विद्यालयों के ऐसे प्राचार्यों को, जिन्होंने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में तीन साल तक शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिया है, उन्हें सम्मानित किया गया है। प्रदेश के ऐसे सभी स्कूलों के प्राचार्यों को एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्राध्यापकों के साथ स्कूल में विकास कार्यों के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे स्कूल शिक्षा में और बेहतरी का एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जबलपुर में एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी है। दूसरी की महती आवश्यकता महसूस हो रही है। इसलिए अब उज्जैन में ही नवीन धनवन्तरी चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। प्रदेश सरकार स्कूल से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक हर स्तर पर सहायता करने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश, पूरे देश का इकलौता राज्य है, जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को डॉक्टर बनाने के लिए उनकी फीस के रूप में 70 से 80 लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एआई आधारित मिशन बुनियाद अंतर्गत नई शिक्षा योजना की शुरुआत कर दी है। यह प्रदेश की शिक्षा पद्धति में एक नये युग के आरंभ जैसा है।

    उन्होंने कहा कि ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर प्रदेशभर में 60 नए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिली है। इनमें 39 स्कूल शिक्षा विभाग और 21 जनजातीय कार्य विभाग के हैं। हमारे सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्मरण कराते हैं। पहले और दूसरे चरण में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण पर हमारी सरकार करीब 25 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है। अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़े पैमाने पर हमारे सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं, लेकिन पहले सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ चुके विद्यार्थियों को मौका दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अवन्तिका नगरी (उज्जैन) दुनिया की 7 पवित्र नगरियों में से एक है, जहां बाबा महाकाल विराजे हैं। जन्म-मृत्यु सब बाबा महाकाल के हाथों में है। उज्जैन ज्ञान-विज्ञान और इतिहास की धरती है।

    उन्होंने गुरू की महत्ता बताते हुए कहा कि माता-पिता प्रथम गुरू होते है। जीवन में माता-पिता से हम कभी भी ऊऋण नहीं हो सकते हैं। गुरु की महिमा ऐसी है कि उसे भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन सांदीपनि गुरु ने अपने परम शिष्य (भगवान श्रीकृष्ण) को जगतगुरू के रूप में देखा। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में ही भगवान श्रीकृष्ण को पुस्तकीय ज्ञान से कहीं अधिक यथार्थ कर्मवाद की शिक्षा मिली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा ज्ञान कदम-कदम पर अपनी परीक्षा मांगता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सदैव मनुष्यों को आगे बढ़ने और हिम्मत से काम करने की प्रेरणा देता है। पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत्गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन के रहस्य, प्रकृति प्रेम और योग के महत्व का विस्तार से वर्णन किया है।

  • MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित

    MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाने वाली मूंग की मात्रा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है। वहीं, खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर उसकी समीक्षा कराने का फैसला लिया गया है।

    कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बैठक के बाद बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। इसी के अनुरूप पहले प्रत्येक पात्र किसान से उसकी उपज का 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की मांग और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह औसतन लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ के बराबर उपार्जन होगा।

    सरकार ने उपार्जन प्रक्रिया में अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है। इसी प्रकार, मूंग खरीदी की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त के बजाय अब 20 अगस्त निर्धारित की गई है।

    बैठक में किसानों ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगी, जिनके आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट आने तक खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था स्थगित रहेगी और किसानों को पूर्व की व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जाएगा।

    बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    प्रमुख निर्णय

    • प्रत्येक पात्र किसान से मूंग उपज का 25 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत तक उपार्जन।
    • निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू।
    • स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त।
    • मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त।
    • खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित।
    • कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति करेगी ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा।
    • समिति की अनुशंसा मिलने तक खाद का वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा।

  • मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है

    मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है


    बाघों की धरती पर संरक्षण का नया संकल्प: मध्य प्रदेश ने एक हजार टाइगर की ओर बढ़ाए कदम

    भोपाल । देश में सर्वाधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को नए संकल्प के साथ दोहराया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

    उन्‍होंने कहा, वर्ष 2022 की गणना में 785 बाघों वाला मध्य प्रदेश अब आगामी गणना में एक हजार बाघों के आंकड़े के करीब पहुंचने की उम्मीद कर रहा है। इस अवसर पर रातापानी टाइगर रिजर्व का लोगो जारी किया गया, पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का लोकार्पण हुआ तथा वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने वाली अनेक पहलें सामने आईं।

    बाघ संरक्षण में अग्रणी बना मध्य प्रदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश की वन संपदा, संरक्षित क्षेत्र और वन विभाग के समर्पित प्रयासों ने बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। वर्ष 2022 की बाघ गणना में प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और वर्तमान प्रयासों को देखते हुए अगली गणना में यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है। उन्होंने इसे वन विभाग, स्थानीय समुदायों और जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि बताया।

    वन्यजीव संरक्षण को नई तकनीक और नई पहचान
    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों का लोकार्पण किया। उन्होंने रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया तथा पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ किया। जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े वृत्तचित्रों के टीजर जारी कर संरक्षण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल विचार
    मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली भारतीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को जीवन का आधार मानता आया है। वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने का विचार भारतीय ज्ञान परंपरा में बहुत पहले से स्वीकार किया गया था। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की यही भावना आज भी हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

    भोपाल के आसपास बाघों की विशेष मौजूदगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ मानव आबादी के सबसे निकट सुरक्षित रूप से निवास करते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ नदियों में घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल दूसरे राज्यों की ओर चले जाते थे, अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जिससे उनका सुरक्षित संरक्षण मध्य प्रदेश में ही सुनिश्चित हो सके। हाथियों की आवाजाही से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    वन विभाग के कार्यों की सराहना
    मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें विशेष संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान और संरक्षण सहयोग को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे जैव विविधता के संरक्षण को नई गति मिल रही है।

    सम्मानित हुए वन संरक्षण के प्रहरी
    इस अवसर पर वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि अच्छा जंगल वही है, जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण प्रकृति, जल स्रोतों और मानव जीवन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन कर्मियों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया।

    इसके अलावा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

    भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी तेज बना रहा। मूंग की सरकारी खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने के लिए जुटे। हालांकि पुलिस ने एम्प्री के पास वीर सावरकर सेतु पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने बसों की चार परतों वाली बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों का रास्ता बंद कर दिया, लेकिन कुछ किसान बैरिकेड पर चढ़ गए और बाद में बसों पर भी चढ़कर विरोध जताया। पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा जिसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए तो कई किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन और यज्ञ किया। आंदोलन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। रातभर आंदोलन में डटे रहने के बाद कई किसान वहीं खुले आसमान के नीचे आराम करते भी नजर आए। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली और बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि मूंग खरीदी की मौजूदा व्यवस्था और ई-टोकन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसका असर होशंगाबाद रोड, नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों में देखने को मिला जहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने में लगी हुई है। उन्होंने किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

    राजधानी में जारी यह आंदोलन अब केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।

  • शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश

    शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश


    इंदौर । इंदौर में बैंककर्मी युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पांच साल पुराने प्रेम संबंध का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ जब शादी से इनकार करने पर प्रेमी ने अपनी ही प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या कर दी और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

    मामला इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र के तपेश्वरी बाग का है जहां 26 वर्षीय पलक केशव किराए के कमरे में रहती थीं और एक निजी बैंक में कार्यरत थीं। शनिवार रात उनके कमरे से जला हुआ शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में घटना को हादसा मानने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मोबाइल कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि घटना से एक दिन पहले दतिया निवासी मयंक शाक्य पलक से मिलने उसके कमरे पर आया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को दतिया से हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    पुलिस के अनुसार मयंक और पलक पिछले करीब पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध था और मयंक शादी करना चाहता था लेकिन पलक इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई। गुस्से में आरोपी ने पलक का गला घोंट दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    हत्या के बाद आरोपी ने अपराध को छिपाने की पूरी कोशिश की। उसने कमरे में पेट्रोल छिड़ककर शव को आग लगा दी ताकि मामला दुर्घटना या आग लगने की घटना जैसा दिखाई दे। इतना ही नहीं उसने किचन का गैस बर्नर भी खुला छोड़ दिया जिससे पुलिस को भ्रमित किया जा सके। हालांकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उसकी पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

    जब दो दिन तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला और आसपास के लोगों को संदेह हुआ तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा। कमरे के भीतर जला हुआ शव मिलने के बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए और जांच के बाद हत्या की पुष्टि हुई।

    फिलहाल आरोपी को इंदौर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या विवाद के दौरान अचानक वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा और अस्वीकार किए जाने की मानसिकता से उपजने वाले गंभीर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • मध्यप्रदेश में बाघों पर मंडरा रहा खतरा सबसे ज्यादा टाइगर होने के बावजूद बढ़ रही मौतें संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्यप्रदेश में बाघों पर मंडरा रहा खतरा सबसे ज्यादा टाइगर होने के बावजूद बढ़ रही मौतें संरक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्यप्रदेश । विश्व बाघ दिवस के अवसर पर जहां पूरे देश में बाघ संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है वहीं देश के सबसे बड़े टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश के सामने एक गंभीर चुनौती भी खड़ी नजर आ रही है। प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन उनके संरक्षण की राह पहले से अधिक कठिन होती जा रही है। जंगलों का घटता दायरा बढ़ती मानवीय गतिविधियां और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव अब बाघों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। यही कारण है कि वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही प्रदेश में 29 बाघों की मौत दर्ज की गई है जिसने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 29 अप्रैल 2026 के बीच हुई 29 बाघों की मौतों में पांच मामलों में बिजली के करंट को कारण माना गया है। एक मामले में शिकार की पुष्टि हुई जबकि अन्य मौतें आपसी संघर्ष बीमारी कुएं में गिरने और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुईं। करंट से मौत के अधिकांश मामले मंडला शहडोल उमरिया और सिवनी जैसे वन क्षेत्रों में सामने आए जहां खेतों के आसपास लगाए गए बिजली के तार वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़े भी मध्यप्रदेश के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2012 से 2025 के बीच पूरे देश में 1581 बाघों की मौत दर्ज की गई जिनमें अकेले 423 मौतें मध्यप्रदेश में हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य होने के साथ साथ सबसे अधिक टाइगर मॉर्टेलिटी भी यहीं दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ उनके लिए सुरक्षित आवास और प्राकृतिक कॉरिडोर का विस्तार भी उतना ही जरूरी है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघों की सबसे अधिक मौतें आपसी क्षेत्रीय संघर्ष के कारण होती हैं। जब किसी जंगल में बाघों की संख्या बढ़ती है तो वे नए क्षेत्र की तलाश में जंगल से बाहर निकलने लगते हैं। ऐसे में उनका सामना खेतों गांवों और मानव बस्तियों से होता है जहां करंट वाले तार सड़क दुर्घटनाएं और अन्य खतरे उनका इंतजार कर रहे होते हैं। इसके अलावा अवैध शिकार और जहरीले पदार्थों का इस्तेमाल भी बाघों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

    आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 मध्यप्रदेश के लिए सबसे घातक साबित हुआ जब पूरे वर्ष में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में 47 और वर्ष 2023 में 45 बाघों की मौत हुई थी। वहीं 2026 के केवल पहले चार महीनों में 29 मौतें दर्ज होना इस बात का संकेत है कि यदि प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह संख्या और बढ़ सकती है। औसतन हर चार दिन में एक बाघ की मौत होना संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।

    राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े यह भी बताते हैं कि अब बाघ केवल जंगलों के भीतर ही नहीं बल्कि उनके बाहर भी असुरक्षित हो गए हैं। लगभग आधी मौतें टाइगर रिजर्व के बाहर दर्ज हुई हैं। इतना ही नहीं बाघों की खाल और अन्य अंगों की अधिकांश बरामदगी भी संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हुई है जिससे स्पष्ट होता है कि वन्यजीव अपराधियों की गतिविधियां अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी बाघ संरक्षण को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके प्राकृतिक आवास और टाइगर कॉरिडोर को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन होना चाहिए ताकि जंगलों और वन्यजीवों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े।

    वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे का मानना है कि बाघों की मौत रोकने के लिए वन विभाग को जमीनी स्तर पर निगरानी मजबूत करनी होगी। प्रशिक्षित वन अधिकारियों की संख्या बढ़ाने मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने स्थानीय ग्रामीणों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और वन्यजीव अपराधों में दोष सिद्धि की दर बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि कानून का सख्ती से पालन और त्वरित कार्रवाई ही शिकारियों और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

    विश्व बाघ दिवस पर मध्यप्रदेश के सामने सबसे बड़ा संदेश यही है कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना सफलता नहीं बल्कि उन्हें सुरक्षित जीवन देना ही वास्तविक संरक्षण है। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे प्राकृतिक कॉरिडोर संरक्षित होंगे और मानव तथा वन्यजीवों के बीच संतुलन कायम रहेगा तभी टाइगर स्टेट की पहचान भविष्य में भी मजबूती के साथ कायम रह सकेगी।

  • दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में गृह विभाग के अधिकारियों ने खोला मोर्चा नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

    दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में गृह विभाग के अधिकारियों ने खोला मोर्चा नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में लगभग एक दशक बाद शुरू हुई शासकीय पदोन्नति प्रक्रिया अब बड़े विवाद का कारण बनती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पदोन्नति नियम 2025 के क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पहले वाणिज्यिक कर विभाग में नियमों के पालन को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं और अब गृह विभाग के अधिकारियों ने भी पदोन्नति प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई है और उनकी मनमानी व्याख्या कर बड़ी संख्या में पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो मामला न्यायालय तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।

    शिकायत करने वाले अधिकारियों ने गृह विभाग की सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए कहा है कि पदोन्नति नियम 2025 के स्पष्ट प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों के बजाय अलग तरीके से पात्रता तय की गई जिससे सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के हजारों कर्मचारी और अधिकारी प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि यदि नियमों का सही तरीके से पालन किया जाता तो कई और अधिकारी पदोन्नत होने के पात्र होते।

    सबसे अधिक विवाद पुलिस विभाग में हुई पदोन्नतियों को लेकर सामने आया है। राज्य सरकार के अनुसार पुलिस विभाग में करीब 25 हजार पदोन्नतियां की गई हैं और इसे प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना गया है। मुख्यमंत्री भी सार्वजनिक मंचों से इस प्रक्रिया की सराहना कर चुके हैं। लेकिन अब कई अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की और बाद में त्रुटियों की जानकारी होने के बावजूद उन्हें सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

    शिकायतकर्ताओं के अनुसार लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 की कंडिका 6 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी चयन वर्ष की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक समय पर नहीं हो पाती तो अगली बैठक में सबसे पहले उसी लंबित चयन वर्ष के लिए अलग चयन सूची तैयार की जानी चाहिए। इसके बाद वर्तमान और भविष्य की रिक्तियों के लिए नई चयन सूची बनाई जानी चाहिए। अधिकारियों का आरोप है कि अधिकांश विभागों ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और वर्ष 2025 की रिक्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया की बजाय बाद के वर्षों की गोपनीय चरित्रावली और अन्य अभिलेखों के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी कर दिए।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 जून 2025 को पदोन्नति नियम लागू किए थे और 30 जून 2025 को जारी स्पष्टीकरण में यह भी स्पष्ट किया था कि अलग अलग चयन वर्षों के लिए किस अवधि की गोपनीय चरित्रावली को आधार बनाया जाएगा। विशेष पदोन्नति समिति के लिए वर्ष 2022 से 2023 और उससे पहले की निर्धारित अवधि की सीआर पर विचार किया जाना था जबकि अन्य चयन वर्षों के लिए अलग समय सीमा तय की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इन दिशा निर्देशों का पालन नहीं होने से पूरी प्रक्रिया विवादों में आ गई है।

    पदोन्नति से वंचित अधिकारियों ने मांग की है कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमों के अनुरूप संशोधित आदेश जारी किए जाएं ताकि किसी भी पात्र अधिकारी के साथ अन्याय न हो। उनका कहना है कि यदि विभाग समय रहते आवश्यक सुधार नहीं करता तो वे न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।

    लंबे समय बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया से कर्मचारियों और अधिकारियों को जहां बड़ी उम्मीदें थीं वहीं अब उस पर उठ रहे सवाल प्रशासन के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित विभाग इस विवाद का किस तरह समाधान निकालते हैं इस पर हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर टिकी हुई है।

  • बाघों की दहाड़ से गूंजेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती

    बाघों की दहाड़ से गूंजेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती


    भोपाल । अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश ने एक बार फिर देश के टाइगर स्टेट के रूप में अपनी मजबूत पहचान दोहराई। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विश्वास जताया कि प्रदेश में बाघों की संख्या जल्द ही एक हजार के करीब पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार मध्यप्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और जिस गति से संरक्षण कार्य चल रहे हैं उसे देखते हुए अगली गणना में यह आंकड़ा लगभग एक हजार तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण बचाने का अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बन चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे निकट प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। यह प्रदेश के समृद्ध जंगलों और सफल वन प्रबंधन की पहचान है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है जिससे जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बना रहे और वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

    डॉ मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार केवल बाघों तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य वन्यजीवों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की नदियों में घड़ियालों का संरक्षण और पुनर्वास अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियालों का अधिक लाभ दूसरे राज्यों को मिलता था लेकिन अब ऐसी रणनीति बनाई जा रही है जिससे घड़ियाल मध्यप्रदेश की नदियों में ही सुरक्षित रह सकें और उनकी संख्या लगातार बढ़े।

    गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सदियों से प्रकृति के सम्मान और संरक्षण की शिक्षा देती आई है। महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने की अवधारणा भारत की प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रही है और आज आधुनिक विज्ञान भी इस सत्य को स्वीकार कर चुका है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं लेकिन वन विभाग के साथ काम करना उन्हें विशेष संतोष देता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान प्रदान और संरक्षण को लेकर भी सकारात्मक पहल कर रही है। हाथियों की आवाजाही और उससे होने वाली जनहानि को कम करने के लिए किए गए प्रयासों के भी अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

    इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सेन ने कहा कि स्वस्थ जंगल की सबसे बड़ी पहचान वहां सुरक्षित बाघ और उनके शावक होते हैं। उनका कहना था कि बाघों का संरक्षण केवल एक वन्यजीव की रक्षा नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी और स्थानीय समुदाय मिलकर इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए नए वाहनों का लोकार्पण किया और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही विभागीय प्रकाशनों का विमोचन किया गया और वन्यजीव प्रबंधन पर आधारित वृत्तचित्रों के टीजर जारी किए गए। वन सुरक्षा समितियों ईको विकास समितियों ग्राम वन समितियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में भी देश में वन्यजीव संरक्षण का अग्रणी राज्य बने रहने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है।

  • भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना

    भोपाल में किसान आंदोलन बना संघर्ष और परिवार की कहानी बेटियों ने खिलाया खाना पत्नी ने कहा खाली हाथ मत लौटना


    भोपाल । भोपाल में जारी किसान आंदोलन अब केवल सरकारी नीतियों के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह किसानों के संघर्ष उनके परिवारों की उम्मीदों और गांव की आर्थिक हकीकत की मार्मिक कहानी बन गया है। राजधानी के होशंगाबाद रोड पर हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इस आंदोलन के बीच कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। कहीं दो बेटियां अपने किसान पिता के लिए घर का बना खाना लेकर पहुंचीं तो कहीं एक पत्नी ने अपने पति को साफ शब्दों में कह दिया कि इस बार मांगें मनवाकर ही घर लौटना।

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकली किसान क्रांति पैदल यात्रा नर्मदापुरम जिले के बरखेड़ा से शुरू होकर भोपाल पहुंची है। किसान मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी खाद वितरण व्यवस्था में सुधार और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    आंदोलन के बीच कटारा हिल्स में रहने वाली प्रगति पटेल और उनकी बहन प्रकृति पटेल अपने पिता के लिए भोजन लेकर धरना स्थल पहुंचीं। दोनों भोपाल में पढ़ाई कर रही हैं। प्रगति ने कहा कि उन्होंने बचपन से अपने पिता को खेतों में मेहनत करते देखा है लेकिन मेहनत के अनुरूप उन्हें कभी उचित मूल्य नहीं मिला। उनका कहना था कि यदि किसान खेती करना छोड़ देगा तो देश की खाद्य व्यवस्था पर संकट खड़ा हो जाएगा। दोनों बहनों ने कहा कि अपने अधिकारों की लड़ाई में डरने का सवाल ही नहीं उठता और वे अपने पिता के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी हैं।

    हरदा से आए किसान अशोक गुर्जर ने बताया कि इस बार भीषण गर्मी में कड़ी मेहनत कर मूंग की फसल तैयार की लेकिन सरकार पूरी उपज खरीदने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि घर से निकलते समय उनकी पत्नी ने उन्हें सिर्फ एक बात कही कि इस बार मांगें पूरी कराकर ही वापस आना। चाहे जितना समय लगे लेकिन खाली हाथ मत लौटना। अशोक का कहना है कि गांव में किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है और खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है।

    कई किसानों ने आंदोलन के दौरान अपनी आर्थिक परेशानियां भी साझा कीं। हरदा के किसान बृजेश जाट ने बताया कि मूंग की खेती में उन्होंने गेहूं की पूरी कमाई लगा दी लेकिन सीमित खरीदी की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दो महीने से बच्चों की स्कूल फीस तक जमा नहीं कर पाए। फीस नहीं भरने पर स्कूल बस संचालकों ने बच्चों को बस में बैठाने से मना कर दिया और स्कूल प्रशासन ने भी चेतावनी दे दी। उनका कहना है कि किसान परिवार आज सम्मान और अस्तित्व दोनों की लड़ाई लड़ रहा है।

    वहीं किसान दीपक पटवारे ने बताया कि आठ दिन पहले उनके पिता का घुटना बदलने का ऑपरेशन हुआ था लेकिन इसके बावजूद वे आंदोलन में शामिल होने भोपाल पहुंचे। खुद कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे दीपक बेल्ट बांधकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास लगभग 200 क्विंटल मूंग की उपज है लेकिन सरकारी खरीदी सीमित होने से पूरी फसल बिक नहीं पा रही है। परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई के बावजूद उन्होंने आंदोलन को प्राथमिकता दी है।

    कई किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए कठिनाइयों का सामना करना पड़े तो भी वे आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों का मानना है कि यह केवल फसल की कीमत का मुद्दा नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और खेती की सुरक्षा की लड़ाई है।

    राजधानी भोपाल में जारी यह आंदोलन अब केवल नारों तक सीमित नहीं है बल्कि परिवार के त्याग संघर्ष और उम्मीदों की ऐसी तस्वीर बन गया है जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है।

  • बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क

    बारिश ने पकड़ी रफ्तार बालाघाट से ग्वालियर तक झमाझम बरसात 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट प्रशासन सतर्क


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम को देखते हुए 15 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सबसे अधिक असर बालाघाट जिले में देखने को मिला जहां बीते 24 घंटे के दौरान करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के कारण कई नदी नाले उफान पर पहुंच गए हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के कई संपर्क मार्ग बंद करने पड़े हैं। प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील कर रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट सिवनी छिंदवाड़ा नर्मदापुरम और रायसेन जिलों में अति भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में अगले 24 घंटे के दौरान लगभग 4 इंच तक वर्षा हो सकती है। वहीं देवास सीहोर हरदा बैतूल पांढुर्णा सागर नरसिंहपुर दमोह जबलपुर और छतरपुर सहित अन्य जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। विभाग ने बिजली गिरने तेज हवाएं चलने और जलभराव जैसी स्थितियों को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से यह मजबूत मौसम प्रणाली बनी हुई है। यह सिस्टम ओडिशा दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्यप्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों को प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में इसके धीरे धीरे कमजोर होकर अवदाब और फिर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है लेकिन तब तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    बालाघाट में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण दैतबर्रा मंगलेगांव पुल टोंडिया नाला और थानेगांव का नाला पूरी तरह उफान पर हैं। सुरक्षा के लिहाज से कई मार्गों पर यातायात रोक दिया गया है। इसके बावजूद कुछ लोग जान जोखिम में डालकर नालों को पार करते दिखाई दिए। टोंडिया नाले का पानी एक ढाबे तक पहुंच गया जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    ग्वालियर में भी बुधवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने कई दिनों से जारी उमस और गर्मी से लोगों को राहत दिलाई। वहीं भोपाल इंदौर उज्जैन रीवा सतना शहडोल धार खरगोन खंडवा बुरहानपुर रतलाम मंदसौर नीमच विदिशा राजगढ़ शिवपुरी मुरैना भिंड दतिया कटनी मंडला डिंडौरी सीधी सिंगरौली पन्ना टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कई जिलों में भी हल्की से मध्यम और कहीं कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दिनों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। किसानों को खेतों में सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में औसतन 13.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक लगभग 16.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अभी भी करीब 17 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान सक्रिय मानसूनी सिस्टम के चलते आगामी चार दिनों में अच्छी बारिश होने से यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान सिस्टम का प्रभाव 1 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान कई जिलों में अत्यधिक वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।