Category: Madhya Pradesh

  • दान की जमीन गिरवी रखकर बैंक से लिया करोड़ों का कर्ज, लोन डूबने पर बेटियों के जरिए मुकदमा कराने का आरोप, बिल्डर दंपती पर कार्रवाई

    दान की जमीन गिरवी रखकर बैंक से लिया करोड़ों का कर्ज, लोन डूबने पर बेटियों के जरिए मुकदमा कराने का आरोप, बिल्डर दंपती पर कार्रवाई


    भोपाल । भोपाल में बेटियों के नाम दान की जा चुकी जमीन को गिरवी रखकर बैंक से दो करोड़ रुपए का कर्ज लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू ने बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि दंपती ने जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी अहम जानकारी पंजाब नेशनल बैंक से छिपाई और इसी संपत्ति के आधार पर अपनी कंपनी के लिए ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई। कर्ज की अदायगी नहीं होने पर जब बैंक ने वसूली की प्रक्रिया शुरू की तो जमीन की मालकिन बताई गई बेटियों के जरिए अदालत में मुकदमा दायर कराया गया। ईओडब्ल्यू ने पूरे घटनाक्रम और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह कार्रवाई की है।

    मामला भोपाल के बावड़ियाकलां इलाके की 526.83 वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2007 में शादाब गृह निर्माण सहकारी समिति की ओर से जारी टेंडर में जीशान अली अकेले बोलीदाता थे। इसके बाद पांच फरवरी 2008 को जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम हुई। करीब पांच साल बाद 10 जुलाई 2013 को जीशान ने हिबानामा तैयार कर यह जमीन अपनी तीन बेटियों के नाम कर दी। इनमें से दो बेटियां उस समय नाबालिग थीं। जांच के अनुसार जीशान ने वर्ष 2018 में बैंक को लिखे एक पत्र में भी जमीन बेटियों के नाम करने की बात स्वीकार की थी।

    आरोप है कि जमीन का हस्तांतरण होने के बावजूद 24 सितंबर 2015 को जीशान अली की कंपनी रॉयल हेरिटेज बिल्डर्स कॉलोनाइजर्स के लिए दो करोड़ रुपए की ओवरड्राफ्ट लिमिट मंजूर कराई गई। इस प्रक्रिया में बैंक को जमीन बेटियों के नाम किए जाने की जानकारी नहीं दी गई। जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार लीगल सर्च रिपोर्ट में भी नाबालिग के हित से जुड़े कॉलम में नन दर्ज था। ईओडब्ल्यू इस पहलू की जांच कर रही है कि जमीन के वास्तविक मालिकाना हक से संबंधित जानकारी बैंक के सामने किस तरह रखी गई और ऋण मंजूर कराने की प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।

    जांच में फरवरी 2015 की एक अन्य घटना का भी उल्लेख है। उस समय जीशान और नाजनीन ने अपनी नाबालिग बेटी के नाम दर्ज एक दूसरे प्लॉट को बेचने के लिए जिला अदालत से अनुमति ली थी। ईओडब्ल्यू ने इस तथ्य को नाबालिग की संपत्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी के संदर्भ में देखा है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।

    वर्ष 2017 में कंपनी का कर्ज खाता एनपीए हो गया। इसके बाद बैंक ने वसूली की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की। बैंक की ओर से तीन जनवरी 2018 को सरफेसी नोटिस जारी किए जाने से पहले ही चार अक्टूबर 2017 को बेटियों के जरिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया था। इसमें दावा किया गया कि जमीन उनकी संपत्ति है और बैंक उसे जब्त नहीं कर सकता। बैंक ने इस मुकदमे को वसूली की कार्रवाई रोकने के लिए की गई मिलीभगत का हिस्सा बताया था। सिविल कोर्ट से दावा खारिज होने के बाद मामला ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण यानी डीआरएटी इलाहाबाद पहुंचा।

    आठ मार्च 2019 को ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने बैंक के पक्ष में फैसला देते हुए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया। इसके बावजूद बैंक का 2 करोड़ 7 लाख 86 हजार 807 रुपए से अधिक बकाया बताया गया है। ईओडब्ल्यू ने इसी पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए बिल्डर जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। कंपनी की डायरेक्टर और गारंटर रहीं जीशान की मां का निधन हो चुका है इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। अब जांच में ऋण से जुड़े दस्तावेजों और जमीन के हस्तांतरण की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।

  • हेड कॉन्स्टेबल की संपत्ति देख लोकायुक्त भी हैरान, जमीनों के सौदे से लेकर करोड़ों के बैंक ट्रांजैक्शन तक जांच के घेरे में फिरोज खान

    हेड कॉन्स्टेबल की संपत्ति देख लोकायुक्त भी हैरान, जमीनों के सौदे से लेकर करोड़ों के बैंक ट्रांजैक्शन तक जांच के घेरे में फिरोज खान

     
    इंदौर । इंदौर में पुलिस विभाग में हेड कॉन्स्टेबल ड्राइवर के पद पर तैनात फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस उनकी आय और संपत्ति के स्रोतों की जांच कर रही है। शुरुआती पड़ताल में छह करोड़ पचास लाख रुपए से अधिक की संपत्ति सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन और आय के स्रोतों की जांच अभी बाकी है। देवास और इंदौर में कुल 15 ठिकानों पर दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल की गई है। जांच में कृषि भूमि मकान फ्लैट कारोबारी फर्मों और बैंक खातों में हुए लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है ।

    इस पूरे मामले में सांवेर तहसील के ग्राम गुरान की करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि का विवाद अहम कड़ी बनकर सामने आया है। किसान परिवार के सदस्य गौरव चौधरी के मुताबिक जमीन को लेकर उनके परिवार में विवाद चल रहा था। इसी दौरान फिरोज खान ने उनके पिता से संपर्क किया और 35 लाख रुपए प्रति बीघा की दर से जमीन का सौदा करने की बात सामने आई। आरोप है कि बाद में अदालत ने जमीन पर स्थगन दिया और परिवार में समझौता होने के बावजूद जमीन को ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश की गई। गौरव का दावा है कि उनके पिता पर दबाव बनाकर कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इन आरोपों की जांच की जा रही है।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि फिरोज खान विवादित जमीनों के सौदों में सक्रिय रहता था। बागली और राजोद की जमीनों से जुड़े मामले भी जांच के दायरे में हैं। आरोपों के अनुसार वह जमीन विवाद में उलझे परिवारों से संपर्क कर कम कीमत पर जमीन खरीदने का सौदा करता था और पुलिस विभाग में पदस्थ होने का प्रभाव दिखाकर दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश करता था। इसके बाद जमीन परिचितों के नाम कराने और बाजार में अधिक कीमत पर बेचने के आरोप हैं। इन मामलों में जमीन की रजिस्ट्री और वास्तविक कब्जे की स्थिति की जांच की जा रही है।

    लोकायुक्त की पड़ताल में इंदौर की स्कीम नंबर 94 स्थित मनोरमा अपार्टमेंट में फिरोज की मां वहीदा खान के नाम दो फ्लैट और श्रीनगर कॉलोनी में एक अन्य फ्लैट की जानकारी सामने आई है। देवास में मकान और प्लॉट भी जांच के दायरे में हैं। मां और पत्नी के नाम साहिल ट्रेडिंग कंपनी का उल्लेख मिला है जिसके बैंक खातों में करोड़ों रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा रोशनी वर्मा के नाम रोशनी सेल्स एंड सर्विस और रियल एस्टेट निवेश से जुड़ी रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों को यह पता लगाना है कि इन फर्मों का वास्तविक कारोबार क्या है और संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल रकम कहां से आई।

    जांच में देवास के आदर्श नगर सहित पुष्पकुंज कॉलोनी विजय नगर कॉलोनी इंदिरा गांधी नगर जेतपुरा और गद्दूखेड़ी की संपत्तियों का भी उल्लेख है। ग्राम गुरान गजीपुरा और बागली क्षेत्र की जमीनों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। कुछ जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2023 से फिरोज या उनके परिचितों के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब रजिस्ट्री नामांतरण और वास्तविक कब्जे का मिलान किया जाएगा। शिकायत में महंगी गाड़ियों और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने के आरोप भी लगाए गए हैं। स्कॉर्पियो सहित अन्य वाहनों की खरीद और भुगतान के स्रोतों की जांच होगी।

    फरवरी में फिरोज खान की बेटी की शादी इंदौर के ग्रैंड शेरेटन और रॉयल पैलेस होटल में होने की जानकारी सामने आई थी। समारोह में नोट उड़ाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। बेटी की पढ़ाई पर लाखों रुपए खर्च होने की बात भी कही गई लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। महंगी जीवनशैली या शादी का खर्च अपने आप में आय से अधिक संपत्ति का प्रमाण नहीं है। हालांकि जांच में इन खर्चों का उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है।

    लोकायुक्त के डीएसपी सुनील तालान के मुताबिक फिरोज खान की संपत्तियों और जमीनों के कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जारी है। अन्य संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कुल संपत्ति उसके वैध आय स्रोतों और कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज

    मध्यप्रदेश की राजनीति में बयानबाजी से हलचल, राजेंद्र शुक्ल ने दी गोपनीय बातें लीक न करने की चेतावनी, जनार्दन मिश्रा के बयान पर भी तंज


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और सियासी घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक की बातें बाहर आने पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि गोपनीय चर्चा सार्वजनिक करने वाले नेता को भविष्य में बैठक में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। दूसरी ओर सीहोर में आदिवासी परिवारों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की आलोचना कर रहे विधायक कमलेश्वर डोडियार को एक व्यक्ति ने टोक दिया। वहीं रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का उद्योगपति इलॉन मस्क को लेकर दिया गया बयान भी चर्चा में है। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और अंदरूनी समीकरणों को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक में मंत्रियों द्वारा सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि बैठक में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने भी अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते। जब रीवा में मीडिया ने उनसे बैठक की चर्चाओं को लेकर सवाल किए तो वे नाराज दिखाई दिए। शुक्ल ने साफ कहा कि कोर ग्रुप की बैठक में हुई बातें बाहर पहुंचाने वाला व्यक्ति भविष्य में उस बैठक में बैठने लायक नहीं रहेगा। उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर गोपनीय जानकारी बाहर जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि किसने जानकारी साझा की है इस बारे में कोई नाम सामने नहीं आया है।

    इसी बीच सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली। रतलाम जिले के सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका पर सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि शिवराज मुख्यमंत्री रहे हैं और आदिवासियों को पट्टे देने का अधिकार उनके पास था लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मामा उनके सुख-दुख के साथी हैं और इस समय आदिवासियों का साथ दे रहे हैं।

    इसके बाद विधायक के बयान का रुख बदल गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को बुरा आदमी नहीं कहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के रूप में मोहन यादव से हजार गुना अच्छे थे। इस घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद विरोध जारी है और प्रभावित लोग जमीन के अधिकारों तथा मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

    रीवा में भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान भी सुर्खियों में रहा। एक कार्यक्रम में उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल इलॉन मस्क को लेकर तीखी टिप्पणी की। सांसद ने कहा कि वे मस्क को दो घूंसे मारकर भगा देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को कोई झुका नहीं सकता। सांसद ने यह भी कहा कि मस्क को भारत में अनुमति तभी मिलेगी जब वे प्रधानमंत्री की शर्तें मानेंगे। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके बयान पर तंज कसा तो कुछ ने इसे सुर्खियां बटोरने वाला बयान बताया।

    इन राजनीतिक घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों में एक वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ अधिकारी उनकी मौजूदा शक्तियां कम कराने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उनकी जिम्मेदारियां बरकरार रखी गईं और उन्हें एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में भाजपा की आंतरिक बैठकों की गोपनीयता से लेकर आदिवासी मुद्दे और नेताओं के तीखे बयानों तक कई विषय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इन बयानों और घटनाओं पर पार्टी तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया किस तरह सामने आती है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष

    आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष


    सीहोर 
    । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखेंगे और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाएंगे। कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीड़ित परिवारों से मिल चुके हैं। उन्होंने कार्रवाई को अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए नाराजगी जताई थी।

    वन विभाग ने 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और खेती के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं। मकान टूटने से 12 परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। आंदोलन में शामिल रमेश बारेला के मुताबिक आदिवासी समाज की मांग है कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए जाएं। प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जाएं और उनके रहने भोजन तथा स्वास्थ्य की व्यवस्था की जाए। साथ ही फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाए।

    आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे उन परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है जो लंबे समय से कृषि और जंगल पर निर्भर हैं। समाज ने सीहोर जिले के कई गांवों के साथ विदिशा जिले के ग्यारसपुर मेहंदीपुर डगरवाड़ा बदनपुर शमशाबाद लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। आदिवासी प्रतिनिधियों ने पुराने पट्टों और जमीन के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

    आंदोलनकारियों का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यारनगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने और ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन शिकायतों की जांच और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आदिवासी समाज मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेगा। रमेश बारेला ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित पदयात्रा में शिवराज सिंह चौहान के शामिल होने की जानकारी उनके पास नहीं है और इसमें आदिवासी समाज के लोग ही हिस्सा लेंगे।

    दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 लाख 37 हजार 500 सागौन के पौधे लगाए गए थे। इनमें से 78 हजार 700 पौधे काटे जाने और 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

    जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों को भी आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2021 तक संबंधित क्षेत्र खाली दिखाई देता था जबकि 2022 से वहां झोपड़ियों और खेती के संकेत मिले। रिपोर्ट के अनुसार 11 अक्टूबर की कार्रवाई में नौ झोपड़ियां हटाई गईं और पूरी प्रक्रिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई। वन विभाग का दावा है कि रिजर्व फॉरेस्ट की 31.48 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मध्यप्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। अब मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात और सरकारी पक्ष की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित परिवारों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल जमीन के अधिकारों और वन भूमि से जुड़े नियमों को लेकर विवाद जारी है।


  • बिना टिकट पकड़े जाने पर विवाद हुआ तो कैमरा खोलेगा राज, भोपाल मंडल के TTE को मिलेंगे बॉडी वियरिंग कैमरे

    बिना टिकट पकड़े जाने पर विवाद हुआ तो कैमरा खोलेगा राज, भोपाल मंडल के TTE को मिलेंगे बॉडी वियरिंग कैमरे


    भोपाल । ट्रेनों में टिकट चेकिंग के दौरान यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने नई पहल की है। अब टिकट चेकिंग स्टाफ की वर्दी पर बॉडी वियरिंग कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए रेलवे ने 56 कैमरों का ऑर्डर दिया है। इन कैमरों की मदद से टिकट चेकिंग के दौरान यात्री और कर्मचारी के बीच होने वाली बातचीत तथा घटनाक्रम को रिकॉर्ड किया जा सकेगा। रेलवे को उम्मीद है कि इससे शिकायतों की जांच आसान होगी और टिकट चेकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के मुताबिक पिछले दो साल से टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए बॉडी वियरिंग कैमरों की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब इन्हें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेलवे की तैयारी अगले दो से तीन महीने में कैमरों का इस्तेमाल शुरू करने की है। शुरुआती चरण में इनका उपयोग प्रमुख ट्रेनों में किया जाएगा। इसके बाद जरूरत और उपलब्धता के अनुसार दूसरे चरण में अधिक कर्मचारियों को भी कैमरों से लैस किया जा सकता है।

    दरअसल टिकट चेकिंग स्टाफ यात्रियों के सीधे संपर्क में रहता है। ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई बार बहस या विवाद की स्थिति बन जाती है। कुछ मामलों में यात्री कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार करने या उनकी बात नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराते हैं। दूसरी ओर कर्मचारियों को भी ड्यूटी के दौरान विवादों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के बाद रेलवे को यह पता लगाने के लिए जांच करनी पड़ती है कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था। इसमें समय लग सकता है।

    बॉडी वियरिंग कैमरों से रिकॉर्ड होने वाली बातचीत और घटनाक्रम शिकायतों की जांच में मददगार साबित हो सकते हैं। रेलवे के अनुसार रेल मदद पर मिलने वाली शिकायतों का मंडल स्तर पर विश्लेषण किया जाता है। यदि किसी घटना की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होगी तो संबंधित अधिकारियों के लिए दोनों पक्षों की भूमिका समझना और शिकायत का उचित निराकरण करना आसान हो सकता है। इससे बिना टिकट यात्रा पर कार्रवाई या टिकट चेकिंग के दौरान हुए विवादों की जांच में भी मदद मिलेगी।

    रेलवे पहले चरण में शान-ए-भोपाल और वंदे भारत जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में कैमरों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा भोपाल मंडल से शुरू होने वाली या यहां से गुजरने वाली अन्य प्रमुख ट्रेनों में भी इन्हें लगाया जा सकता है। शुरुआत में 56 कैमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। आगे चलकर इस व्यवस्था का विस्तार करने की योजना है।

    भोपाल मंडल में टिकट चेकिंग स्टाफ की संख्या करीब 300 से 320 बताई गई है। ऐसे में शुरुआती कैमरों के बाद बाकी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से इस सुविधा से जोड़ने की तैयारी की जा सकती है। रेलवे बुकिंग और रिजर्वेशन काउंटरों पर तैनात कर्मचारियों के लिए भी बॉडी वियरिंग कैमरों की संभावनाओं पर विचार करेगा।
    रेलवे का उद्देश्य केवल शिकायतों की जांच करना नहीं बल्कि टिकट चेकिंग प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना भी है।

    रिकॉर्डिंग से यात्रियों और कर्मचारियों दोनों को अपना पक्ष रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था का वास्तविक असर कैमरों के नियमित इस्तेमाल और रिकॉर्डिंग के उचित प्रबंधन पर निर्भर करेगा। फिलहाल कैमरों की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले दो से तीन महीनों में इन्हें इस्तेमाल में लाने की तैयारी है।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच

    भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकान में जल रही भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी। इसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में कई दुकानों और एक दर्जन से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। अब पुलिस के साथ नगर निगम भी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती कर रहा है।

    जांच के मुताबिक बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में भट्टी जल रही थी। उसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैलती चली गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास की चार अन्य दुकानों को भी प्रभावित किया। इनमें आम्रपाली रेस्टोरेंट विजय स्टोर एक कैफे और मोबाइल की दुकान शामिल थीं। हादसे के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक आग की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी।

    दूसरी ओर नगर निगम यह भी जांच कर रहा है कि संबंधित दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह घटना एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा और दुकानों के आसपास रखे सामान से पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल खड़े करती है।

    आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को बाजार में आगे बढ़ने में परेशानी हुई थी। दुकानों के सामने रखे सामान और रेहड़ियों के कारण रास्ता बाधित होने की बात सामने आई थी। इसी के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई और दो दमकल वाहनों को बाजार में चलाकर रास्तों की स्थिति देखी गई। जहां दमकलों के आगे बढ़ने में बाधा आई वहां निगम के अमले ने सामान जब्त किया।

    नगर निगम अब रेहड़ी संचालकों को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग की जा रही है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित सीमा से आगे सामान रखने पर कार्रवाई होगी।

    इस घटना के बाद बाजार में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर व्यापक सवाल भी उठ रहे हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर दो अन्य छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं। आसपास नमकीन की दुकानें भी हैं जहां भट्टियां जलती हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।

    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे थे। जुमेराती इब्राहिमपुरा नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत अन्य बाजारों में भी सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।

    बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 17 दिसंबर 2017 को लगी आग में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद फायर सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। न्यू मार्केट की घटना ने साफ कर दिया है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच नियमित रखरखाव और दमकल वाहनों के लिए रास्ते खुले रखना भी उतना ही जरूरी है।


  • MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत

    MP: लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित महिलाओं के लिए खुशखबरी, खुलेगा पोर्टल… मंत्री ने दिए संकेत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (Chief Minister’s Ladli Behna Yojana) का लाभ पाने से वंचित रह गई महिलाओं (Women) के लिए राहत की उम्मीद जगी है. राज्य सरकार योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने के लिए पोर्टल दोबारा खोलने पर विचार कर सकती है. स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस संबंध में संकेत दिए हैं।

    बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल (Minister Narendra Shivaji Patel) ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने निकट भविष्य में लाड़ली बहना योजना से छूटी हुई महिलाओं के नाम जोड़ने की बात कही है. इसके लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. मंत्री के इस बयान के बाद उन महिलाओं को उम्मीद बंधी है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक योजना में अपना नाम नहीं जुड़वा सकी हैं. हालांकि, अभी पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।


    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए आकलन के निर्देश

    मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह नहीं बताया जा सकता कि लाड़ली बहना योजना का पोर्टल कब खोला जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पहले यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि योजना के लाभ से कितनी महिलाएं बाहर रह गई हैं. सरकार की ओर से इस आकलन के बाद आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सकता है. यदि पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला होता है, तो योजना से वंचित रह गई महिलाओं को आवेदन करने का अवसर मिल सकता है।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए आवेदन कब से लिए जाएंगे, आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी और पात्रता की शर्तों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं. इन सभी बातों पर सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है. 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में आई 41वीं किस्त लाड़ली बहना योजना को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब बुधवार, 14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उमरिया जिले के गुरुवाही ग्राम में आयोजित राज्य स्तरीय लाड़ली बहना सम्मेलन में योजना की 41वीं किस्त जारी की।

    मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए योजना की 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की. इस दौरान करीब 1834 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई. इस कार्यक्रम के साथ ही योजना से जुड़ी महिलाओं के खातों में किस्त पहुंचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. वहीं, अब योजना से बाहर रह गई महिलाओं के नाम जोड़ने को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।


    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है. योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है. अब सरकार की ओर से योजना के दायरे से बाहर रह गई महिलाओं की संख्या का आकलन कराया जा रहा है. इस प्रक्रिया के बाद पोर्टल दोबारा खोलने को लेकर फैसला लिए जाने की संभावना है. फिलहाल महिलाओं को आवेदन शुरू होने की तारीख और पात्रता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा. मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के बयान से पोर्टल दोबारा खुलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी इसे लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

  • MP में 18 अक्टूबर तक आंधी-बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में रहेगा ज्यादा असर

    MP में 18 अक्टूबर तक आंधी-बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल में रहेगा ज्यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने गुरुवार से अगले चार दिन यानी 15 से 18 अक्टूबर तक प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई है। ग्वालियर-चंबल संभाग में इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जबकि उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश होने के आसार हैं। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से मौसम में बदलाव आएगा। गुरुवार को ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, नीमच और मंदसौर में बारिश की संभावना है। इसके बाद 16, 17 और 18 अक्टूबर को बारिश का दायरा बढ़ सकता है।

    अक्टूबर में फिर बारिश, रात में बढ़ रही ठंडक

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण बारिश का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। पिछले सप्ताह पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, रविवार और सोमवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड का मिला-जुला असर रहता है। इस साल भी मौसम का यही मिजाज दिखाई दे रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने के साथ धूप खिली, जबकि रात के समय ठंडक महसूस की जा रही है। इसी बीच, मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से कई जिलों में बारिश हो रही है।

    इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    मानसून सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में औसतन 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

    पूर्वी हिस्से के इन जिलों में भी कम हुई बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल मिलाकर बारिश का आंकड़ा औसत से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 जिले पीछे

    प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक दर्ज की गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    इसके विपरीत, 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    मानसून के दौरान जून में हुई कम बारिश की भरपाई बाद के महीनों में पूरी तरह नहीं हो सकी। अब अक्टूबर में सक्रिय हुए नए सिस्टम से प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर बारिश होने की संभावना है।

  • सेवा भारती करेगी 501 कन्याओं का पूजन, 16 अक्टूबर को मानस भवन में होगा आयोजन

    सेवा भारती करेगी 501 कन्याओं का पूजन, 16 अक्टूबर को मानस भवन में होगा आयोजन

    शिवपुरी। सेवा भारती शिवपुरी द्वारा नवरात्रि में घरों में होने वाले कन्या पूजन को सामूहिक रूप दिया जा रहा है। शहर के मानस भवन में 16 अक्टूबर को सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजन की खास बात यह है कि एक ही स्थान पर 501 कन्याओं का पूजन किया जाएगा।

    सेवा भारती के विभाग समन्वयक अर्जुन सिंह दांगी ने बताया कि कार्यक्रम 16 अक्टूबर को सुबह 10 बजे शुरू होगा। आयोजन की पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। संस्था ने समाज के लोगों से कार्यक्रम में सहभागी बनने और कन्या शक्ति के सम्मान के लिए आगे आने की अपील की है।

  • चीफ जस्टिस के बंगले से चंद कदम दूर सनसनीखेज घटना, लूट की कोशिश के बाद एक्टिवा से फरार हुए 5 युवक

    चीफ जस्टिस के बंगले से चंद कदम दूर सनसनीखेज घटना, लूट की कोशिश के बाद एक्टिवा से फरार हुए 5 युवक


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण इलाके में लूट की कोशिश का मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के बंगले से कुछ ही दूरी पर पांच युवकों ने एक युवक को रोककर लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपियों ने चाकू निकाल लिया और युवक की ओर बढ़ने लगे। अपनी जान को खतरा देखकर पीड़ित को मौके से भागना पड़ा। घटना के बाद पीड़ित ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। वारदात से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।

    जानकारी के मुताबिक रांझी निवासी वैभव दुबे एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। 12 अक्टूबर की रात करीब 1 बजकर 52 मिनट पर वह एक्टिवा से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान जब वह सिविल लाइन चौराहे पर पहुंचा तो दो एक्टिवा पर सवार पांच युवकों ने उसे रोक लिया। अचानक रास्ता रोके जाने से वैभव मुश्किल स्थिति में आ गया। आरोपियों में से एक युवक अपनी गाड़ी से उतरकर उसके करीब पहुंचा। वैभव ने हिम्मत दिखाते हुए उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन हालात जल्द ही बदल गए।

    बताया गया है कि वैभव के विरोध करने पर आरोपी वहां से हटने लगे। हालांकि कुछ दूरी पर जाकर वे फिर रुक गए। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने के मुताबिक आरोपियों ने चाकू निकाला और वैभव की ओर बढ़ने लगे। बदमाशों के हाथ में चाकू देखकर वैभव को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ और उसने वहां से दौड़ लगा दी। करीब 56 सेकेंड के फुटेज में आरोपी एक्टिवा पर सवार होकर तेज रफ्तार से इंद्रा मार्केट की ओर भागते नजर आ रहे हैं।

    घटना के बाद वैभव किसी तरह सिविल लाइन थाने पहुंचा और पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। मामला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के बंगले के नजदीक का होने के कारण भी इलाके की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि घटना के सभी पहलुओं की पुष्टि और आरोपियों की भूमिका का पता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक पांच आरोपियों में से मास्क पहने एक युवक की पहचान करने में सफलता मिली है। बाकी आरोपियों की पहचान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। सिविल लाइन थाना प्रभारी शशि धुर्वे के अनुसार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द हिरासत में लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    इस घटना में राहत की बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार युवक आरोपियों के चंगुल से निकलने में सफल रहा। अब पुलिस के सामने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी संदिग्धों की पहचान करने और घटना की पूरी कड़ी जोड़ने की चुनौती है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों का मुख्य उद्देश्य लूट था और वारदात की योजना किस तरह बनाई गई थी।