Category: Madhya Pradesh

  • भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता

    भोपाल में नशामुक्ति का संकल्प टीटी नगर स्टेडियम से निकली रन फॉर लाइफ मैराथन में युवाओं ने दिखाई एकजुटता


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रविवार को नशे के खिलाफ जनजागरूकता का बड़ा संदेश देते हुए रन फॉर लाइफ मैराथन का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश पुलिस के प्रदेशव्यापी महाअभियान नशे से दूरी है जरूरी 2.0 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों युवाओं खिलाड़ियों पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पुलिस और सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त पहल से आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

    मैराथन की शुरुआत सुबह टीटी नगर स्टेडियम से हुई। प्रतिभागियों के लिए दो किलोमीटर वॉकथॉन पांच किलोमीटर हाफ मैराथन और दस किलोमीटर मैराथन जैसी अलग अलग श्रेणियां रखी गई थीं ताकि हर आयु वर्ग के लोग इस अभियान से जुड़ सकें। तिरंगा हाथों में लेकर दौड़ते युवाओं ने नशामुक्त समाज का संदेश दिया और पूरे आयोजन में देशभक्ति तथा सामाजिक जिम्मेदारी का उत्साह दिखाई दिया।

    कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नशे के खिलाफ यह केवल एक प्रतीकात्मक दौड़ नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    इस अवसर पर एडीजी नारकोटिक्स डी श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश के हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचाना है कि स्वस्थ जीवन ही सबसे बड़ी पूंजी है और नशे से दूर रहकर ही बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत केवल एक व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को प्रभावित करती है। इसलिए सभी नागरिकों को से नो टू ड्रग्स का संकल्प लेकर समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देना चाहिए।

    एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस मुख्यालय एवं अपराध डॉ मोनिका शुक्ला ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई और पुरानी दोनों पीढ़ियों को मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।

    मैराथन के दौरान प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने इस अभियान को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि खेल और फिटनेस की गतिविधियां युवाओं को नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता अभियानों को लगातार जारी रखने का भरोसा दिलाया।

    मध्य प्रदेश पुलिस का नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान प्रदेशभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना और समाज में नशामुक्ति की मजबूत संस्कृति विकसित करना है। भोपाल में आयोजित रन फॉर लाइफ मैराथन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिसने युवाओं को सामाजिक बदलाव की मुहिम से जोड़ने का प्रभावी संदेश दिया।

  • खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई

    खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के दौरान खाद संकट को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य को जरूरत से कहीं अधिक यूरिया उपलब्ध कराने के बावजूद किसान खाद के लिए भटकते रहे। संसद में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2026 तक खरीफ सीजन के लिए मध्य प्रदेश को लगभग 9.61 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी जबकि केंद्र सरकार ने 14.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया। यानी राज्य को मांग से लगभग 147 प्रतिशत अधिक यूरिया मिला। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और अव्यवस्था देखने को मिली।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या यूरिया की उपलब्धता नहीं बल्कि उसके वितरण और प्रबंधन में रही। केंद्र सरकार का दायित्व राज्य तक खाद पहुंचाने का होता है जबकि जिलों ब्लॉकों और सहकारी समितियों तक समय पर और पारदर्शी वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होती है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाना वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    दूसरी ओर खरीफ सीजन में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डीएपी खाद की कमी बनकर सामने आई। राज्य को इस अवधि में लगभग 3.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी लेकिन केवल 3.05 लाख मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो सकी। यानी करीब 52 हजार मीट्रिक टन डीएपी की कमी रही। यही वजह रही कि बुवाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ी और कई स्थानों पर धक्का मुक्की तथा हंगामे की स्थिति भी बनी।

    संसद में पेश आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि एनपीकेएस उर्वरक की स्थिति बेहतर रही। लगभग 4.21 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले राज्य को 6.67 लाख मीट्रिक टन एनपीकेएस उपलब्ध कराया गया। यानी इस उर्वरक की भी पर्याप्त उपलब्धता रही। इसके बावजूद डीएपी की कमी ने खेती की तैयारियों को प्रभावित किया और किसानों की चिंता बढ़ा दी।

    केंद्र सरकार ने खाद आपूर्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और निगरानी आधारित बताया है। फसल सीजन शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकार के साथ मिलकर महीनेवार जरूरत तय करता है। इसके बाद उर्वरक विभाग राज्यों को आवंटन जारी करता है और रेलवे रैक के माध्यम से खाद की आपूर्ति की जाती है। सभी रैक की निगरानी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिए की जाती है तथा हर सप्ताह केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक भी होती है।

    मध्य प्रदेश स्वयं भी देश के प्रमुख यूरिया उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में राज्य में लगभग 19.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ जबकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जून तक ही 5.40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। इससे पहले वर्ष 2022-23 में राज्य ने 22.37 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था। देश में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 के बाद कई नई यूरिया उत्पादन इकाइयों की भी शुरुआत की है।

    खाद उपलब्धता के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में वास्तविक चुनौती उत्पादन या केंद्रीय आवंटन की नहीं बल्कि जरूरत के अनुरूप डीएपी उपलब्ध कराने और अंतिम छोर तक समय पर वितरण सुनिश्चित करने की है। यदि वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को हर खरीफ सीजन में इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत

    मध्य प्रदेश में बारिश का नया गणित देवास सबसे आगे आलीराजपुर सबसे पीछे जुलाई के आखिर में फिर भारी बारिश के संकेत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जुलाई के तीसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदल दी है और सूखे जैसे हालात से काफी राहत मिली है। इस दौरान प्रदेश में औसतन 3.3 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई जिससे नदियों झरनों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है और कई जिलों को अच्छी वर्षा का इंतजार है।

    मौसम विभाग के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में लगभग 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है जबकि सामान्य औसत 14.6 इंच माना जाता है। यानी मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस बार मानसून निर्धारित समय से नौ दिन की देरी से 24 जून को प्रदेश में पहुंचा था। देरी के कारण जून महीने में बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रहा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में स्थिति तेजी से सुधरी और बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर पड़ने से बारिश लगभग थम गई लेकिन तीसरे सप्ताह में जोरदार बरसात ने एक बार फिर राहत दी।

    प्रदेश के 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास सीहोर राजगढ़ हरदा बुरहानपुर मंदसौर नीमच आगर मालवा दमोह सिवनी निवाड़ी और भिंड प्रमुख हैं। सबसे अधिक बारिश देवास जिले में हुई है जहां करीब 19.3 इंच वर्षा दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 54 प्रतिशत अधिक है। दूसरी ओर आलीराजपुर प्रदेश का सबसे सूखा जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल 3.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 41 जिले अब भी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे चल रहे हैं। इनमें जबलपुर रीवा सतना सागर कटनी मंडला छिंदवाड़ा बालाघाट शहडोल उमरिया ग्वालियर मुरैना दतिया धार उज्जैन रतलाम विदिशा रायसेन नर्मदापुरम खरगोन खंडवा और अन्य जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की अभी भी आवश्यकता बनी हुई है ताकि खेती और जल भंडारण की स्थिति बेहतर हो सके।

    बारिश की कमी का असर प्रदेश के प्रमुख बांधों और नदियों पर भी देखने को मिला है। दूसरे सप्ताह में बारिश कमजोर रहने के कारण कई नदियों का जलस्तर घट गया था लेकिन पिछले सप्ताह हुई वर्षा से फिर जलस्तर में सुधार आने लगा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों को पूरी क्षमता तक भरने के लिए लगातार और व्यापक बारिश की जरूरत है।

    राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक करीब 17.5 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इंदौर में लगभग 15 इंच वर्षा हो चुकी है जबकि उज्जैन में करीब 13 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर में 13.6 इंच वर्षा दर्ज होने के बावजूद यह सामान्य कोटे से कम है। ग्वालियर चंबल संभाग में भी पिछले दिनों बारिश की रफ्तार बढ़ी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यहां भी अच्छी वर्षा होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में निचले स्तर पर नमी बनी हुई है और मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इसी कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में तेज और व्यापक बारिश होने की संभावना है। यदि अनुमान सही साबित होता है तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का घाटा काफी हद तक पूरा हो सकता है और किसानों के साथ साथ जल संसाधनों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

  • दतिया उपचुनाव में बदली चुनावी तस्वीर किन्नर प्रत्याशी संजना के समर्थन में पहुंचीं साध्वी सौम्या दीदी वोटरों से की खास अपील

    दतिया उपचुनाव में बदली चुनावी तस्वीर किन्नर प्रत्याशी संजना के समर्थन में पहुंचीं साध्वी सौम्या दीदी वोटरों से की खास अपील


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार चुनावी मुकाबला कई वजहों से चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय गण वार्ता पार्टी की प्रत्याशी संजना सिंह अपनी अलग शैली के चुनाव प्रचार और सामाजिक संदेश के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। उनके चुनाव अभियान में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से किन्नर समुदाय के सदस्य शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की साध्वी सौम्या दीदी भी दतिया पहुंची हैं जिन्हें अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले नजर उतारने की परंपरा निभाने के कारण पहचान मिली थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी सखी संजना सिंह के समर्थन में दतिया की नजर उतारने आई हैं।

    संजना सिंह का चुनाव प्रचार पारंपरिक राजनीतिक रैलियों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। उनके साथ न तो बड़ी गाड़ियों का काफिला चलता है और न ही भारी भीड़ नजर आती है। उनकी पार्टी का प्रचार वाहन पहले गांव और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों को उनके आने की जानकारी देता है। इसके बाद संजना हाथ जोड़कर लोगों के बीच पहुंचती हैं और आत्मीयता के साथ समर्थन मांगती हैं। कई स्थानों पर वह बच्चों को दुलारते हुए उनकी नजर उतारती हैं और महिलाओं के साथ बैठकर मंगल गीत भी गाती हैं। इसके बाद वह लोगों से अपील करती हैं कि जिस तरह उन्होंने वर्षों तक बड़े राजनीतिक दलों को मौका दिया है उसी तरह इस बार एक किन्नर प्रत्याशी को भी अवसर देकर देखें।

    संजना सिंह का कहना है कि यह चुनाव केवल विधायक बनने का प्रयास नहीं बल्कि समाज में किन्नर समुदाय को सम्मानजनक पहचान दिलाने की लड़ाई भी है। उनका दावा है कि नामांकन के दौरान उन्हें कुछ लोगों की अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार ऐसे अनुभव बताते हैं कि समाज की सोच में बदलाव की अभी भी जरूरत है। वह चाहती हैं कि किन्नर समुदाय को भी समाज का सम्मानित और बराबरी का हिस्सा माना जाए तथा राजनीति में उनकी भागीदारी को सामान्य रूप से स्वीकार किया जाए।

    अपने चुनाव अभियान के दौरान संजना सिंह स्थानीय लोगों से विकास और जनसमस्याओं पर भी चर्चा कर रही हैं। उनका कहना है कि जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना और उनका समाधान करना उनकी प्राथमिकता होगी। वह मानती हैं कि समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों की आवाज को विधानसभा तक पहुंचाना भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    दतिया को अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत के लिए चुनने पर संजना कहती हैं कि मां पीतांबरा की पावन नगरी आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और किन्नर समुदाय का भी अध्यात्म से गहरा जुड़ाव रहा है। उनका कहना है कि किन्नर समाज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर में उनकी मौजूदगी है और इसी भावना के साथ उन्होंने दतिया से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

    साध्वी सौम्या दीदी भी चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से अपील कर रही हैं कि वे पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नया विकल्प चुनें। उनका कहना है कि पुरुष और महिलाओं की तरह किन्नर समुदाय भी समाज और राजनीति की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने में सक्षम है। उनके अनुसार यह चुनाव केवल एक उम्मीदवार का नहीं बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता और समान अवसर की भावना को मजबूत करने का भी अवसर है।

    दतिया उपचुनाव में संजना सिंह की उम्मीदवारी ने राजनीतिक मुकाबले को एक नया सामाजिक आयाम दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस अनोखी चुनावी मुहिम और सामाजिक संदेश को किस रूप में स्वीकार करते हैं।

  • राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त

    राजधानी भोपाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई इतवारा इलाके में 200 पुलिसकर्मियों का फ्लैग ऑपरेशन गांजा समेत नशीले पदार्थ जब्त


    भोपाल। राजधानी भोपाल के संवेदनशील माने जाने वाले इतवारा इलाके में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात पुलिस ने नशे के कारोबार और आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। डीसीपी जोन तीन आयुष गुप्ता के नेतृत्व में करीब 200 पुलिसकर्मियों की टीम ने सुनियोजित तरीके से इलाके के 24 से अधिक घरों और संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। देर रात शुरू हुआ यह ऑपरेशन कई घंटों तक चलता रहा जिससे पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    पुलिस की यह कार्रवाई पहले से तैयार रणनीति के तहत की गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अलग अलग टीमों ने एक ही समय पर कई स्थानों पर छापेमारी की ताकि किसी भी संदिग्ध को भागने या सबूत नष्ट करने का मौका न मिल सके। कार्रवाई के दौरान कई घरों की गहन तलाशी ली गई और पुलिस ने गांजा सहित अन्य अवैध मादक पदार्थ बरामद किए। हालांकि जब्त किए गए नशीले पदार्थों की कुल मात्रा का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक दर्जन से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है। अधिकारियों के अनुसार इन सभी से पूछताछ की जा रही है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड तथा नशे के अवैध कारोबार से संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा या पूछताछ के बाद कुछ को छोड़ दिया जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और मामले की जांच लगातार जारी है। बरामद मादक पदार्थों की जांच की जा रही है तथा अन्य संभावित ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना और इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है।

    सूत्रों के अनुसार यह अभियान लंबे समय से मिल रही शिकायतों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाया गया। इतवारा क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने एक साथ बड़े स्तर पर कार्रवाई का फैसला लिया ताकि पूरे नेटवर्क को एक ही अभियान में निशाना बनाया जा सके।

    पुलिस ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी। इसमें बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामलों की पूरी जानकारी दी जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिए हैं कि राजधानी में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह के विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके और शहर में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।

  • एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना

    एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटे के लिए शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। वहीं, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर समेत करीब 50 जिलों में हल्की बारिश और बादल छाए रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों तक कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, शियर जोन और पूर्वी व पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय दो निम्न दबाव क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं। हालांकि शनिवार को अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी ही दर्ज की गई।

    पांच दिनों में सुधरे बारिश के आंकड़े
    बीते पांच दिनों की बारिश से प्रदेश में वर्षा की कमी में सुधार आया है। 20 जुलाई तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद यह अंतर घटकर 21 जुलाई को 14 प्रतिशत, 22 जुलाई को 11 प्रतिशत, 23 जुलाई को 10 प्रतिशत और 24-25 जुलाई को 11 प्रतिशत रह गया। अब तक प्रदेश में औसतन 330.4 मिमी (करीब 13 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 370.9 मिमी (14.6 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन जिलों में बारिश की संभावना
    अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं।

    जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, जून में मानसून कमजोर रहने से बारिश का आंकड़ा कम रहा। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन इसके बाद लगातार कई दिनों तक भारी बारिश नहीं होने के कारण वर्षा का ग्राफ फिर सामान्य से नीचे आ गया।

    आमतौर पर जुलाई महीने में प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। मध्य प्रदेश की सामान्य वार्षिक वर्षा 37.3 इंच है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है। इनमें जबलपुर ऐसा प्रमुख शहर है, जहां जुलाई में औसतन 17 इंच से अधिक बारिश दर्ज की जाती है।

  • सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली

    सिहोरा में सड़क की बदहाली बनी बच्चों की मुसीबत कीचड़ में फंसी स्कूल बस ढाई घंटे बाद ट्रैक्टर से निकली


    जबलपुर । जबलपुर जिले के सिहोरा की पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह सड़क की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आ गई। बच्चों को लेने पहुंची मेरिडियन स्कूल की बस कीचड़ और दलदल में इस तरह फंस गई कि उसे निकालने में करीब ढाई घंटे का समय लग गया। आखिरकार ट्रैक्टर की मदद से बस को बाहर निकाला जा सका। इस घटना ने न केवल कॉलोनी की खराब सड़क व्यवस्था की पोल खोल दी बल्कि बच्चों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार खितौला नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 12 स्थित पालीवाल कॉलोनी में शनिवार सुबह लगभग नौ बजे मेरिडियन स्कूल की बस बच्चों को लेने पहुंची थी। कॉलोनी में सड़क का निर्माण नहीं होने और लगातार बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह दलदल में बदल चुका था। जैसे ही बस अंदर पहुंची उसका पहिया कीचड़ में धंस गया और वाहन वहीं फंस गया। चालक ने काफी प्रयास किया लेकिन बस बाहर नहीं निकल सकी।

    बस के फंसने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और बस को निकालने की कोशिश शुरू की गई। करीब ढाई घंटे तक लगातार प्रयास करने के बाद ट्रैक्टर बुलाया गया। ट्रैक्टर से टोचन कर आखिरकार बस को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बस अपने निर्धारित अन्य स्टॉप तक नहीं पहुंच सकी जिससे कई बच्चों को समय पर स्कूल नहीं ले जाया जा सका।

    बस के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने से कई अभिभावकों को अपने बच्चों को स्वयं स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे उन्हें अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ा और सुबह का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क की स्थिति समय रहते सुधारी गई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

    रहवासियों ने बताया कि पालीवाल कॉलोनी के इस हिस्से में वर्षों से सड़क निर्माण नहीं हुआ है। हर बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। स्कूल बसों एंबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है और जिम्मेदार विभाग को कई बार शिकायतें भी दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद सड़क निर्माण या जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि जल्द पक्की सड़क और बेहतर ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

    रहवासियों ने नगर पालिका और प्रशासन से मांग की है कि पालीवाल कॉलोनी में प्राथमिकता के आधार पर सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिल सके और बारिश के मौसम में लोगों को बार-बार ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है और अब इस समस्या का स्थायी समाधान होना जरूरी है।

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा, तेज रफ्तार कार तालाब में गिरी, पांच लोगों की मौत

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा, तेज रफ्तार कार तालाब में गिरी, पांच लोगों की मौत

    राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में पांच लोगों की जान चली गई। पचोर थाना क्षेत्र के भीलखेड़ी जोड़ के पास शुजालपुर की ओर जा रही तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे तालाब में जा गिरी। पानी में डूबने से कार में सवार सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। सूचना पर पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। क्रेन की मदद से तालाब में डूबी कार को बाहर निकाला गया, जिसके भीतर से पांच शव बरामद हुए।

    पुलिस के अनुसार, सभी मृतक शाजापुर जिले के अरनिया क्षेत्र के निवासी थे। दस्तावेजों के आधार पर एक मृतक की पहचान गोविंद पुत्र उमाशंकर तिवारी के रूप में हुई है। वहीं, अन्य मृतकों के नाम रोहित पटेल, अरविंद सिंह और शंकरलाल बताए गए हैं। एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया अभी जारी है। घटना की खबर मिलते ही अरनिया गांव समेत आसपास के इलाके में शोक की लहर फैल गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए हैं।

    प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह कार की तेज रफ्तार और वाहन का नियंत्रण खोना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही दुर्घटना के तकनीकी पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा केवल तेज रफ्तार के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी थी। यह हादसा एक बार फिर सड़क पर सावधानी और सुरक्षित वाहन चलाने की जरूरत की याद दिलाता है।

  • पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन

    पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों पर अब तेजी से न्यायिक कार्रवाई होगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध फैसला देना है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता मजबूत होगी।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 8(3) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है। जारी अधिसूचना में राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा संबंधी गंभीर अपराधों की सुनवाई सामान्य मामलों की तरह लंबी प्रक्रिया में न फंसे और समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।

    इन विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत पंजीकृत परीक्षा संबंधी अपराध तथा राज्य या केंद्र सरकार की अधिकृत जांच एजेंसियों द्वारा जांचे जा रहे मामलों को भी इन्हीं अदालतों में भेजा जाएगा। इससे पेपर लीक, भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी, नकल माफिया और अन्य परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।

    हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसके तहत अदालतें मामलों का संज्ञान लेने, प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम होंगी। इससे मामलों को अलग अदालतों में भेजने की आवश्यकता कम होगी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक तेज तथा प्रभावी बन सकेगी।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं के मामलों ने प्रदेश सहित पूरे देश में चिंता बढ़ाई है। कई अभ्यर्थियों को परीक्षाएं रद्द होने और दोबारा आयोजित होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में भी देरी होती रही है। नई विशेष अदालतों के गठन से इन मामलों का जल्द निपटारा होने और दोषियों को शीघ्र सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना से जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को भी मामलों की सुनवाई में बेहतर समन्वय मिलेगा। साथ ही यह व्यवस्था भविष्य में परीक्षा माफिया और संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने में प्रभावी साबित हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।

    प्रदेश सरकार और न्यायपालिका की यह पहल परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की निगाह इस बात पर होगी कि नई अदालतें कितनी तेजी से मामलों का निपटारा करती हैं और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है।

  • देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत

    देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत


    देवास । देवास की स्वास्थ्य कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार देर रात हुई तोड़फोड़ की एक घटना ने इलाके के रहवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने घर के बाहर खड़ी एक कार पर शराब की बोतल फेंककर उसका कांच तोड़ दिया। घटना के बाद कॉलोनी में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पीड़ित समता श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी कार रोज की तरह घर के सामने खड़ी थी। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने शराब की बोतल फेंककर कार का शीशा तोड़ दिया। सुबह या घटना की जानकारी मिलने पर परिवार बाहर आया तो वाहन क्षतिग्रस्त मिला। उन्होंने बताया कि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई है और इसकी फुटेज पुलिस को सौंप दी जाएगी ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जा सके।

    पुलिस ने आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगालना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

    इस घटना के बाद कॉलोनी की महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समता श्रीवास्तव का आरोप है कि शाम होते ही कुछ असामाजिक तत्व कॉलोनी के आसपास खुलेआम शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इससे महिलाओं और परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दोहराते हुए कहा कि इलाके में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। रहवासियों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी में खड़े वाहनों के साथ तोड़फोड़ और उपद्रव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से रहवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में देने की बात कही है। वहीं कॉलोनी के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि कॉलोनी में रहने वाले परिवार सुरक्षित माहौल में रह सकें।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।