Category: Madhya Pradesh

  • दतिया में विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक आपस में भिड़े, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे

    दतिया में विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक आपस में भिड़े, भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे


    दतिया।
    मध्य प्रदेश के दतिया में भाजपा के पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी के समर्थक एसपी कार्यालय के घेराव के दौरान आपस में ही भिड़ गए। प्रदर्शन के दौरान माइक पर नारे लगाने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते खींचतान और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते देख विधायक को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। इस दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए गए। शुक्रवार को घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा।

    दरअसल, शिक्षा विभाग के सब इंजीनियर भूपेंद्र कुमार राजपूत के साथ 15 सितंबर को हुई मारपीट के विरोध में विधायक प्रीतम सिंह लोधी गुरुवार दोपहर अपने समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय का घेराव करने पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मामले को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। इसी बीच माइक पर नारे लगाने को लेकर समर्थकों के बीच विवाद हो गया।

    माइक छीनने को लेकर शुरू हुई झूमाझटकी

    बताया जाता है कि प्रदर्शन के दौरान एक युवक हाथ में माइक लेकर विधायक प्रीतम सिंह लोधी को ‘चंबल टाइगर’ बताते हुए उनके समर्थन में नारे लगाने लगा। इसी दौरान युवक ने दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी शुरू कर दी।

    इस पर भीड़ में मौजूद एक अन्य समर्थक ने आगे बढ़कर युवक के हाथ से माइक छीन लिया। माइक को लेकर दोनों के बीच खींचतान शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद धक्का-मुक्की और झूमाझटकी में बदल गया। समर्थकों के बीच बढ़ते विवाद को देखकर विधायक प्रीतम सिंह लोधी को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शनकारियों का हुजूम आगे बढ़ा।

    भाजपा सरकार के खिलाफ भी लगे मुर्दाबाद के नारे

    घटना के दौरान समर्थकों के बीच विवाद के साथ भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। सामने आए वीडियो में माइक को लेकर समर्थकों के बीच खींचतान होती दिखाई दे रही है। माइक छीने जाने से नाराज युवक ने ‘भाजपा सरकार मुर्दाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।

    एसपी कार्यालय के घेराव के दौरान विधायक के समर्थकों के बीच हुई इस घटना और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा।

  • भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां

    भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश में आगजनी की बड़ी घटनाओं से निपटने और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए अग्निशमन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदेश के 16 नगर निगमों और पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 12 हजार लीटर पानी की क्षमता वाले 21 आधुनिक वाटर बाउजर तैनात किए जाएंगे। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी ने इन वाहनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन वाहनों के मिलने से शहरी इलाकों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी आग लगने की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
    इन आधुनिक वाहनों को विशेष रूप से बड़ी आग की घटनाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें हाई प्रेशर पंप वाटर मॉनिटर और फोम सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी। इनकी सहायता से आग पर पानी और फोम की तेज बौछार डालकर उसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। बहुमंजिला इमारतों औद्योगिक इकाइयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आग लगने की स्थिति में ये वाहन उपयोगी साबित हो सकते हैं।
    योजना के तहत ग्वालियर भोपाल इंदौर जबलपुर उज्जैन देवास मुरैना सतना सागर रतलाम रीवा कटनी सिंगरौली छिंदवाड़ा बुरहानपुर और खंडवा नगर निगमों को आधुनिक वाटर बाउजर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा पीथमपुर मंडीदीप बानमोर मालनपुर और मेघनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के चलते आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत रहती है।
    इन वाटर बाउजर की क्षमता 12 हजार लीटर होगी और इनका कुल भार करीब 28 टन रहने का उल्लेख किया गया है। वाहनों में 304 ग्रेड स्टेनलेस स्टील से बने टैंक लगाए जाएंगे। टैंक के भीतर 10 कंपार्टमेंट और बाफल प्लेट्स होंगी जो वाहन चलते समय पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद करेंगी। इससे वाहन का संतुलन बनाए रखने और संचालन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
    वाहनों में हाई प्रेशर सेंट्रीफ्यूगल पंप लगाए जाएंगे। सामान्य दबाव पर ये पंप प्रति मिनट 3000 लीटर पानी उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे जबकि हाई प्रेशर मोड में इनकी क्षमता 250 लीटर प्रति मिनट होगी। सामान्य मोड में दबाव 10 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर और हाई प्रेशर मोड में 40 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर आग बुझाने की कार्रवाई की जा सकेगी।
    आधुनिक वाटर बाउजर में जीपीएस मोबाइल डेटा टर्मिनल लाइट मास्ट और ऑटोमैटिक प्राइमिंग सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाएं भी दी जाएंगी। जीपीएस से वाहन की लोकेशन जानने में मदद मिलेगी जबकि लाइट मास्ट रात के समय या कम रोशनी वाले स्थानों पर बचाव कार्यों को आसान बना सकता है। वाटर मॉनिटर के जरिए आग की ओर पानी की तेज बौछार छोड़ी जा सकेगी।
    योजना में केवल वाहन खरीदने पर ही जोर नहीं दिया गया है बल्कि कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था भी रखी गई है। अनुबंध होने के 10 महीने के भीतर वाहनों की आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद 12वें महीने तक संबंधित नगरीय निकायों के अग्निशमन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक संबंधित फायर स्टेशन पर कम से कम दो प्रायोगिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वाहन चलाने उपकरणों के इस्तेमाल रखरखाव और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने की जानकारी दी जाएगी।
    बड़े वाटर बाउजर के साथ प्रदेश के 90 नगरीय निकायों के लिए 111 मिनी वाटर टेंडर खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही है। इनकी क्षमता 550 लीटर होगी जिसमें 500 लीटर पानी और 50 लीटर फोम शामिल रहेगा। छोटे आकार के ये वाहन संकरी गलियों घनी बस्तियों और ऐसे स्थानों पर पहुंचने में मदद करेंगे जहां बड़े फायर ब्रिगेड वाहनों को ले जाना मुश्किल होता है।
    ग्वालियर इंदौर भोपाल जबलपुर और उज्जैन नगर निगमों को तीन-तीन मिनी वाटर टेंडर देने की योजना है। अन्य नगर निगमों को दो-दो वाहन मिलेंगे जबकि शेष नगरीय निकायों के लिए भी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बड़े वाटर बाउजर और छोटे मिनी टेंडर की खरीद से प्रदेश में अग्निशमन संसाधनों का विस्तार करने की तैयारी है। हालांकि इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ वाहनों की समय पर आपूर्ति कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जरूरत के समय त्वरित तैनाती पर निर्भर करेगा।
  • MBBS छात्रों जितना स्टाइपेंड मांग रहे आयुष डॉक्टर, जबलपुर में 200 विद्यार्थियों ने निकाला कैंडल मार्च, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    MBBS छात्रों जितना स्टाइपेंड मांग रहे आयुष डॉक्टर, जबलपुर में 200 विद्यार्थियों ने निकाला कैंडल मार्च, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान फिलहाल 9,383 रुपए मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है जो मौजूदा समय में उनके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वे इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों के बराबर 21,500 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग को लेकर विद्यार्थियों ने शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से झंडा चौक तक कैंडल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में करीब 150 से 200 छात्र शामिल हुए। झंडा चौक पहुंचकर विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाई और स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई।
    प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आयुष और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने वाले छात्रों के स्टाइपेंड में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक दोनों ही क्षेत्रों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान मेहनत करते हैं और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपना अनुभव बढ़ाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता में समानता होनी चाहिए। विद्यार्थियों ने समान काम के लिए समान आर्थिक लाभ की मांग उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्टाइपेंड से पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है।
    छात्रों के मुताबिक महंगाई के कारण भोजन आवास और अन्य जरूरी जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 9,383 रुपए की मासिक राशि में सभी आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। उनका मानना है कि स्टाइपेंड बढ़ने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान आर्थिक दबाव कम होना जरूरी है ताकि वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें।
    कैंडल मार्च के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का सहयोग भी मिला है। विद्यार्थियों के अनुसार आयुष मंत्रालय के स्तर पर भी स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर बातचीत की गई है। इसके बावजूद अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं लेकिन निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
    विद्यार्थियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। विद्यार्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द कोई सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।
    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है।
  • दुर्गा पंडाल लगाने पर सड़क पर संग्राम, कांग्रेस नेता की पुलिस को खुली चुनौती, TI बोले- यातायात रोकने की अनुमति नहीं

    दुर्गा पंडाल लगाने पर सड़क पर संग्राम, कांग्रेस नेता की पुलिस को खुली चुनौती, TI बोले- यातायात रोकने की अनुमति नहीं


    जबलपुर ।  मध्य प्रदेश के जबलपुर में दुर्गा पंडाल लगाने को लेकर पुलिस और युवा कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जितिन राज के बीच विवाद सामने आया है। विजय नगर में शुक्रवार रात टेंट लगाने के दौरान शुरू हुई बहस कुछ ही देर में तीखी नोकझोंक में बदल गई। पुलिस का कहना था कि पंडाल का टेंट सड़क पर आ रहा है जिससे यातायात बाधित हो सकता है। इसलिए टेंट को पीछे करने के लिए कहा गया था। वहीं जितिन राज का तर्क था कि वह कई वर्षों से इसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने जितिन राज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। घटना के बाद दुर्गा पंडाल लगाने और सड़क पर धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात जितिन राज अपने समर्थकों के साथ विजय नगर में दुर्गा पंडाल के लिए टेंट लगवा रहे थे। इसी दौरान थाना प्रभारी धीरज कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने टेंट की स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह सड़क की ओर आ रहा है और इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। पुलिस ने टेंट को पीछे करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर जितिन राज और टीआई के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ता और पुलिस आमने-सामने आ गए।
    विवाद के दौरान जितिन राज ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से उसी स्थान पर दुर्गा प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं और पहले भी यहां आयोजन होते रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि टेंट तो इसी जगह लगेगा और जिसे कार्रवाई करनी है वह कर सकता है। उनके इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया। जितिन राज ने भाजपा विधायक के जन्मदिन पर हुए एक कार्यक्रम का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि उस दौरान मुख्य मार्ग पर करीब ढाई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था लेकिन तब कार्रवाई को लेकर ऐसे सवाल नहीं उठाए गए।
    जितिन राज ने सवाल किया कि जबलपुर-अमरकंटक रोड पर भाजपा विधायक अशोक रोहाणी के जन्मदिन के आयोजन के दौरान यातायात बाधित होने पर क्या इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़क पर होने वाली गतिविधियों को लेकर नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए। हालांकि विधायक के जन्मदिन के आयोजन को लेकर लगाए गए उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
    दूसरी ओर थाना प्रभारी धीरज कुमार ने पुलिस की कार्रवाई का पक्ष रखते हुए कहा कि सड़क पर टेंट लगाने से यातायात प्रभावित हो रहा था। उनके मुताबिक पुलिस ने इसी वजह से टेंट पीछे करने के लिए कहा था। टीआई का आरोप है कि जितिन राज ने पुलिस के साथ बहस की और कार्रवाई करने की चुनौती दी। उन्होंने विवाद के दौरान गाली गलौज होने की बात भी कही। पुलिस का कहना है कि सड़क पर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और नियमों के अनुसार ही आयोजन की व्यवस्था होनी चाहिए।
    मौके पर काफी देर तक बहस चलने के बाद पुलिस ने जितिन राज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। कार्रवाई के पीछे सड़क पर टेंट लगाने से यातायात प्रभावित होने और पुलिस के साथ हुए विवाद को वजह बताया गया है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नवरात्र के दौरान शहर में कई स्थानों पर दुर्गा पंडाल और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ यातायात व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन के लिए अहम चुनौती होती है। अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और आयोजकों की आपत्तियों को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है इस पर नजर रहेगी
  • ऑटो में बैठना पड़ा भारी, 20 रुपए की जगह 20 हजार मांगने लगे बदमाश, विरोध पर यात्री की कमर में घोंपा चाकू

    ऑटो में बैठना पड़ा भारी, 20 रुपए की जगह 20 हजार मांगने लगे बदमाश, विरोध पर यात्री की कमर में घोंपा चाकू


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में दूसरे जिले से आए एक यात्री के साथ लूट और चाकूबाजी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि ऑटो चालक और उसके साथी ने यात्री से तय किराए के 20 रुपए की जगह 20 हजार रुपए की मांग की। यात्री ने जब इतनी बड़ी रकम देने से इनकार किया तो दोनों ने उसके साथ गाली गलौज और मारपीट शुरू कर दी। विरोध करने पर एक आरोपी ने चाकू से हमला कर दिया और घायल यात्री की जेब से 500 रुपए निकाल लिए। घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने मामले में एक नाबालिग सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घायल यात्री की हालत गंभीर बताई गई है और उसका अस्पताल में इलाज जारी है।
    जानकारी के मुताबिक सिंगरौली जिले के माडा गांव में रहने वाले 25 वर्षीय दिलकेश शाह 9 अक्टूबर की रात करीब डेढ़ बजे जबलपुर पहुंचे थे। उन्हें यहां से महाराष्ट्र के पुणे जाना था। बस स्टैंड से तीन पत्ती चौक पहुंचने के बाद वह रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक ऑटो में सवार होकर दो युवक वहां पहुंचे। दिलकेश ने उनसे रेलवे स्टेशन जाने का किराया पूछा तो चालक ने 20 रुपए बताया। किराया तय होने के बाद दिलकेश ऑटो में बैठ गए।
    करीब 15 मिनट बाद ऑटो स्टेशन रोड पर पहुंचा। दिलकेश जब ऑटो से उतरे और चालक को तय किए गए 20 रुपए देने लगे तो दोनों युवकों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने उनसे 20 हजार रुपए की मांग शुरू कर दी। दिलकेश ने जब कहा कि रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए 20 रुपए किराया तय हुआ था तो इतनी बड़ी रकम क्यों दें। इस बात पर दोनों युवक भड़क गए और उनके साथ गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगे।
    विवाद बढ़ने पर एक आरोपी ने चाकू निकाल लिया और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। अपनी जान बचाने के लिए दिलकेश वहां से भागने लगे लेकिन नाबालिग आरोपी ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद उन पर चाकू से हमला कर दिया गया। चाकू दिलकेश की कमर में लगा जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप है कि हमलावरों ने घायल यात्री की जेब से 500 रुपए भी निकाल लिए। इसी बीच दिलकेश की आवाज सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा होने लगे। भीड़ जुटती देख दोनों आरोपी मौके से भाग गए।
    घटना की सूचना मिलने पर सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल दिलकेश को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी। घटना दूसरे जिले से आए यात्री के साथ होने के कारण पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों को जल्द पकड़ने के निर्देश दिए।
    सिविल लाइन थाना प्रभारी शशि धुर्वें के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में पूछताछ की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संबंधित नंबर का ऑटो शुभम बेन चलाता है। इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी लेकिन वह वहां नहीं मिला। पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही और शनिवार सुबह एक पहाड़ी से शुभम बेन तथा उसके नाबालिग साथी को गिरफ्तार कर लिया।
    पुलिस के मुताबिक शुभम बेन की उम्र 26 वर्ष है और वह गोरखपुर क्षेत्र के मांडवा का निवासी है। संबंधित ऑटो नाबालिग की मां के नाम पर पंजीकृत बताया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चाकू और लूटे गए रुपए बरामद करने के साथ ऑटो भी जब्त कर लिया है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। इस घटना ने शहर में यात्रियों की सुरक्षा और किराए के नाम पर होने वाली कथित जबरन वसूली को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
  • शिवपुरी के सुनाज गांव में दर्दनाक हादसा, मिट्टी से लदी ट्रॉली पर पलटा ट्रैक्टर, ड्राइवर की हालत गंभीर

    शिवपुरी के सुनाज गांव में दर्दनाक हादसा, मिट्टी से लदी ट्रॉली पर पलटा ट्रैक्टर, ड्राइवर की हालत गंभीर


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मिट्टी से भरी ट्रॉली पर ट्रैक्टर पलटने से एक गंभीर हादसा हो गया। दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक ट्रॉली के नीचे दब गया और उसे गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल मदद करते हुए चालक को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे शिवपुरी जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर कर दिया गया। वहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    जानकारी के मुताबिक हादसा शुक्रवार शाम शिवपुरी जिले के सुनाज गांव में हुआ। ढेंकुआ गांव का रहने वाला रामवीर यादव ट्रैक्टर के साथ मिट्टी से भरी ट्रॉली लेकर जा रहा था। इसी दौरान करमई सड़क पर मिट्टी भराव का काम चल रहा था। बताया गया है कि रामवीर ट्रैक्टर को ऊंचाई वाली सड़क पर चढ़ाने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान ट्रैक्टर का अगला हिस्सा अचानक ऊपर उठ गया और वाहन का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते ट्रैक्टर मिट्टी से भरी ट्रॉली पर पलट गया। इस हादसे में चालक रामवीर उसके नीचे दब गया।
    दुर्घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। लोगों ने बिना देर किए चालक को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। काफी प्रयास के बाद रामवीर को ट्रैक्टर और ट्रॉली के नीचे से निकाला गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर मदद मिलने से उसे अस्पताल तक ले जाया जा सका।
    अस्पताल में डॉक्टरों ने घायल चालक का प्राथमिक उपचार किया। लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल भेजा गया। वहां भी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रेफर कर दिया। फिलहाल रामवीर का ग्वालियर में इलाज जारी है। उसकी हालत को लेकर आगे की जानकारी उपचार के दौरान सामने आ सकती है।
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर का अगला हिस्सा ऊंचाई पर चढ़ाते समय उठने के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि दुर्घटना की परिस्थितियों और वाहन के पलटने के वास्तविक कारणों की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि सड़क पर मिट्टी भराव के काम के दौरान वाहन किस स्थिति में था और ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने की वजह क्या रही।
    इस घटना ने एक बार फिर मिट्टी और निर्माण सामग्री से भरे ट्रैक्टर ट्रॉलियों को ऊंचाई वाली सड़कों पर ले जाने के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने रखा है। ऐसे वाहनों को चढ़ाई पर ले जाते समय संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। खासकर जब ट्रॉली में भारी मिट्टी भरी हो तो चालक के लिए वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घायल चालक का ग्वालियर में उपचार जारी है।
  • शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता

    शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में नवरात्र से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में नालियां जाम होने और सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने की शिकायतें सामने आई हैं। दुर्गा पंडालों और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों के बीच साफ सफाई की स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका में शिकायत करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में वार्ड 30 के लोगों को खुद ही सफाई की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। शनिवार को कॉलोनीवासियों ने झाड़ू उठाकर नालियों से कचरा निकालना शुरू कर दिया। इस घटना ने शहर की सफाई व्यवस्था और त्योहारों से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
    जानकारी के मुताबिक कोलियों के मंदिर के पीछे स्थित नरिया क्षेत्र में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई थी। नालियों में जमा कचरे और कीचड़ के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका में शिकायत भी की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार परेशानी झेलने के बाद लोगों ने इंतजार करने के बजाय खुद ही सफाई शुरू कर दी। कॉलोनीवासियों ने नालियों से कचरा निकाला और आसपास के क्षेत्र को साफ करने का प्रयास किया। नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व से पहले लोगों को इस तरह सफाई करनी पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
    शहर के माधव चौक के पास स्थित मां वैष्णो दरबार की झांकी के आसपास भी गंदगी की समस्या सामने आई है। यहां सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने के कारण स्थानीय लोगों और आयोजन समिति के सदस्यों की परेशानी बढ़ गई है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में सीवर की गंदगी और आसपास फैला कचरा लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई से कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।
    आयोजन समिति के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर भी अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। वे अपर कलेक्टर से भी मिले थे ताकि सीवर चैंबर की समस्या का जल्द समाधान हो सके। हालांकि उनके अनुसार अब तक राहत नहीं मिली है। समिति के सदस्यों का कहना है कि सीवर चैंबर की सफाई सामान्य झाड़ू या घरेलू उपकरणों से करना संभव नहीं है। इसके लिए संबंधित विभाग की टीम और जरूरी संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जिम्मेदार विभाग समय रहते मौके पर पहुंचकर सफाई कराए।
    यह स्थिति तब सामने आई है जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्योहारों से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शहर के कुछ इलाकों में नालियों और सीवर चैंबर की समस्या बने रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं बल्कि नियमित रूप से भी सफाई व्यवस्था की निगरानी करें।
    नवरात्र के दौरान दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में साफ सफाई और सीवर व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। शिवपुरी के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर जाम नालियों और सीवर चैंबर की समस्या दूर करेगा ताकि धार्मिक आयोजन स्वच्छ वातावरण में हो सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और त्योहार से पहले लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।

  • MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका

    MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका


    शहडोल।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवा कांग्रेस नेताओं (Youth Congress leaders) को शनिवार को शहडोल रेलवे स्टेशन (Shahdol Railway Station) पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम, प्रदेश सचिव अभिषेक शुक्ला, जिला महासचिव शेख आबिद, जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल और सत्यम प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सभी को सिटी कोतवाली ले गई, जहां कुछ घंटे रखने के बाद देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।

    युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली में आयोजित आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर उन्हें रोककर कार्रवाई की। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल रही। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सरकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं और आंदोलन में शामिल होने का प्रयास जारी रखेंगे।


    ‘कितनी बार गिरफ्तार करोगे, आंदोलन में जरूर जाएंगे’

    युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम ने कहा कि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं और दमनकारी सरकार से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ता दिल्ली जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें कितनी बार गिरफ्तार किया जाएगा। गौतम ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता एक रास्ते से जाएंगे, तो दूसरे कार्यकर्ता अन्य रास्तों से दिल्ली पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन में शामिल होकर रहेंगे।


    रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ भी अलर्ट

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शहडोल रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भी सतर्क नजर आया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में आंदोलन में शामिल होने जा रहे लोगों की संख्या की जानकारी हर दो घंटे में मुख्यालय को भेजने के निर्देश मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा

    MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण (27 Percent OBC reservation ) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।


    कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं।


    विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान

    बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश के करीब 50 लाख लोगों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए सरकार ने 3800 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री होने से लोगों को अपनी संपत्ति के दस्तावेज मिलेंगे और बैंक से कर्ज लेने जैसी सुविधाओं का लाभ उठाना आसान होगा। लेकिन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सामने आए आंकड़े इस योजना की जरूरत और प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख प्राप्त करने वाले 2102 हितग्राही पहले ही बैंकों से कुल 175 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक का कर्ज ले चुके हैं। इनमें कुछ भूखंडों पर करीब 17 करोड़ रुपये तक का ऋण दर्ज है।

    इस जानकारी के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब आबादी भूमि के अधिकार अभिलेख के आधार पर बैंक पहले ही कर्ज दे रहे हैं और संबंधित भूखंडों को बंधक भी बनाया जा चुका है तो अब मुफ्त रजिस्ट्री की व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ रही है। हालांकि सरकार की योजना का उद्देश्य केवल बैंक ऋण उपलब्ध कराना नहीं बल्कि लोगों को भूमि का विधिवत पंजीकृत मालिकाना हक दिलाना भी है। ऐसे में अधिकार अभिलेख और पंजीकृत स्वामित्व के बीच कानूनी अंतर को समझना जरूरी है। बैंक से कर्ज मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया अनावश्यक है। लेकिन पहले से ऋण प्राप्त कर चुके हितग्राहियों के मामलों में नियमों और प्रक्रिया की स्पष्टता को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं।

    राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रतलाम जिले की जावरा तहसील के टोलखेड़ी निवासी संजय के भूखंड पर 16 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक का कर्ज दर्ज है। खरगोन जिले के धनोरा में लक्ष्मीबाई और अन्य संबंधित हितग्राहियों के भूखंड पर भी करीब 16 करोड़ 81 लाख रुपये का ऋण दर्ज बताया गया है। इसके अलावा विदिशा जिले के गूलरखेड़ी में आकाश कटारे के भूखंड पर 96 लाख रुपये और देवास जिले के डबलचौकी में सुरेश अग्रवाल के भूखंड पर 52.20 लाख रुपये का कर्ज दर्ज है। इंदौर उज्जैन नीमच रतलाम मंदसौर सीहोर और कई अन्य जिलों में भी आबादी भूमि पर लाखों रुपये के ऋण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

    दरअसल अप्रैल 2022 में तत्कालीन भू-अभिलेख आयुक्त की ओर से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को पत्र भेजा गया था। इसमें आबादी भूमि को बंधक रखने और बंधक हटाने की प्रक्रिया को कृषि भूमि के खसरे की तरह अपनाने की बात कही गई थी। पत्र के अनुसार कर्ज की अदायगी नहीं होने पर बैंक को संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है। इसी व्यवस्था के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने आबादी भूमि पर ऋण देने की प्रक्रिया अपनाई। ऐसे में पहले से बंधक संपत्तियों की रजिस्ट्री के दौरान कानूनी प्रक्रिया और बैंक के हितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।

    दूसरी ओर मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया पटवारियों के विरोध के कारण भी अटकी हुई है। विवाद की मुख्य वजह रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक यानी एक्जीक्यूटर की भूमिका देना और उनकी व्यक्तिगत आईडी तथा कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े सवाल हैं। सरकार ने पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति जताई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने सोमवार से स्वामित्व योजना का काम शुरू करने की घोषणा की है।

    सरकार ने इस योजना के तहत करीब 50 लाख लोगों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 3800 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है और कई राजस्व तथा अन्य अधिकारियों को पंजीयन से जुड़े अधिकार दिए गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से अधिकार अभिलेख और बैंक ऋण वाले भूखंडों की रजिस्ट्री किस प्रक्रिया से होगी और योजना को कानूनी विवादों से बचाते हुए समय पर कैसे पूरा किया जाएगा। योजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब हितग्राहियों को स्पष्ट स्वामित्व मिलेगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी होगी।